
Gone girl-1
********
Gone Girl ….
1 – मैं जिंदा हूँ ….
रातों रात तारा कोई चाँद या सितारा कोई
गिरे तो उठा लेना ओ सुनियो रे
तारा चमकीला होगा। चाँद शर्मीला होगा
नथ में लगा लेना
ज़रा सी सांवरी है वो ज़रा सी बावरी है वो
वो सुरमें की तरह मेरी आंखों में ही रहती है
सुबह के ख्वाब से उड़ाई है पलकों के नीचे छुपाई है
मानों ना मानों तुम। सोते सोते ख्वाबों में भी
ख्वाब दिखाती है
मानों ना मानों तुम परी है वो परी की कहानियाँ. सुनाती है…
रेडियो पर चल रहे गीत के बोल घनघोर बारीश के कारण ठीक से सुनाई नही दे रहे थे…..
…आसमान में घुमड़ते बादलों और बिजली के शोर के बीच सुबह से रुक रुक के होती बारीश ने रात होते होते मुसलाधार बारीश का रूप ले लिया था।।
सरबहाल पुलिस चौकी में सुबह की शिफ्ट निपटा के जाने वाले पुलिस कर्मी ना घर जा पा रहे थे,और ना ही रात की शिफ्ट के कर्मी घरों से निकल कर आ पा रहे थे,,सारे शहर में पानी भरा होने से जगह जगह ट्रैफिक रोकने की नौबत आ गई थी,,समझ नही आ रहा था,की अचानक इंद्र देव इतने खुश कैसे हो गये थे,खैर उनकी खुशी यहाँ कहर बन कर बरस रही थी,, चौकी पे बैठे थानेदार हवलदार और अन्य कर्मचारी टी वी पर न्यूज़ देख रहे थे,शुक्र था की इतनी गहन बारीश में भी टी वी काम कर रहा था,उसका नेट्वर्क उड़ा नही था,सभी मगन थे ,तभी___
एक 26–27 साल की लड़की बुरी तरह से पानी में तर बतर वहाँ पहुंच गई,,दुबली गोरी सुन्दर सी लड़की शकल से अच्छे घर की और शादीशुदा लग रही थी,बहुत घबराई सी इधर उधर देखती हुई वो अन्दर दाखिल हुई और वहाँ सब से किनारे टेबल पर बैठे हवलदार से inspector के बारे में पूछने लगी।।
उसकी घबराहट देख कर किसी अनहोनी की आशंका से त्रस्त हवलदार ने उसे बैठा कर पानी दिया और खुद अन्दर इंस्पेक्टर के केबिन में चला गया__”सर बाहर एक लड़की आयी है ,आपसे मिलना चाह रही,बड़ी घबराई हुई सी लग रही,,लगता है दहेज वाला कुछ मामला होगा।”
इंस्पेक्टर शेखर सिंह ने मोबाइल पर से आंखे उठा कर हवलदार को देखा और इशारे से लड़की को अन्दर भेजने कहा….
अब लड़की और इंस्पेक्टर शेखर आमने सामने थे,इंस्पेक्टर शेखर ने हवलदार को 2 कप चाय लाने को बोला और लड़की की तरफ घूम कर पूछा…
शेखर-जी कहिये मैडम आपका नाम क्या है?? और किस बारे में आप एफ आई आर लिखाना चाहती हैं??”
लड़की-जी इंस्पेक्टर साब !! मेरा नाम सलोनी रायचंद है, मैं रायचंद इंडस्ट्री के मालिक स्वर्गीय श्री जगन्नाथ रायचंद की बड़ी बहु और स्वर्गीय समर रायचंद की बीवी सलोनी हूँ ।।
शेखर-क्या !!!! आप रायचंद इंडस्ट्री की माल्किन सलोनी रायचंद हैं???? पर ऐसा कैसे हो सकता है मैडम ,,उनकी तो दो साल पहले डेथ हो गई,,मैनें खुद ने पंचनामा तैय्यार किया था,,सलोनी रायचंद तो मर चुकी है।।
सलोनी-नही इंस्पेक्टर साब आपको गलतफहमी हो रही है ,मै जिंदा हूँ!!! और मैं ही सलोनी हूँ,आप विश्वास कीजिए मेरा।।
शेखर –पर कैसे मानू मैडम ,,आपके पास कोई प्रूफ है,जैसे वोटर आई डी कार्ड,या आधार कार्ड,ड्राईविंग लाइसेंस या कोई भी पहचान पत्र हैं??
सलोनी–सर मेरे पास कोई सबूत नही है अभी आपको देने के लिये,,लेकिन मैं सच कह रही हूं,मैं ही सलोनी हूँ,आप प्लीज़ मुझ पर भरोसा कीजिए,मैं पिछले दो साल से भटक रही हूँ ।।
शेखर-भटक रहीं हूँ मतलब ???
हवलदार –साब ये सलोनी की आत्मा तो नही??
शेखर – shut up!! देखिए मैडम मेरी शिफ्ट खतम हो चुकी है बारीश के कारण घर नही जा पा रहा,,आप और सर दर्द बढाने आ गई,अच्छा मान लिया आप ही सलोनी हैं,तो बताईये आप एफ आई आर किसके खिलाफ लिखाना चाहती हैं??
सलोनी–सर अपने ससुराल वालों के खिलाफ,मेरी सास और देवर देवरानी के खिलाफ,,उन्होनें पहले पति को मारा उसके बाद मेरी जान के पीछे पड़ गये,,इसलिए दो साल पहले मुझे वहाँ से जान बचा के भागना पड़ा था सर।।
शेखर –अपने घर का नम्बर बताईये ,ज़रा वहाँ भी बात कर के देखी जाये।।
सलोनी के नम्बर बताते ही शेखर ने नम्बर डायल किया उधर से किसी औरत के हेलो कहने पर __
शेखर –हेलो !! जी मैं इंस्पेक्टर शेखर बोल रहा हूँ,क्या आप रायचंद हाऊस से बोल रही हैं??
लड़की–जी इंस्पेक्टर साब मैं रायचंद हाऊस से उनकी बड़ी बहु अनन्या रायचंद बोल रही हूँ, कहिये क्या कहना चाहतें हैं आप।”
शेखर — आप पक्का उनकी बड़ी बहू बोल रहीं हैं, आई मीन क्या मैं आपके पति का नाम जान सकता हूँ।”
” बेशक जान सकतें हैं मेरे पति का नाम है समर रायचंद और मैं हूँ उनकी धर्मपत्नी अनन्या समर रायचंद।”
क्रमशः
aparna ….
पहले लिखी कहानी में आज कुछ फेर बदल जोड़ घटाव कर के प्रकाशित किया है।

गजब
Very interesting part…
Dr साहिबा ये नई कहानी है या पहले की पब्लिश की हुई है। क्यों की आपकी लिखी हुई कई कहानियां पढ़ चुका हूं
सर ये पुरानी ही है..