
अपराजिता -116
‘हाँ … अभी तो बहुत सी बातें बाक़ी है.. मैं आपको सारी बातें बताती जा रही हूँ.. !”
“फिर क्या हुआ ?” अनिर्वान ने पूछा
“सर, धीरेन्द्र घुन की तरह था, वो धीरे धीरे पापा के दिमाग को खोखला करता जा रहा था.. मेरे घर का माहौल ज़रा अनुदार था।
मेरे पिता और दादी रूढ़ियों पर चलने वाले लोग थे.. हमारे घर पर वही होता था जो पापा चाह्ते थे..।
मैंने सुखिया वाले केस के बाद पापा के सामने अखंड का पक्ष रखना चाहा था, लेकिन पापा ने सुनने से इंकार कर दिया.. मेरी दादी भी पुराने विचारो वाली थी.. उन्हेँ तो मेरा किसी लड़के से बात तक करना गंवारा नहीं था..। इस सब के बावजूद मैं अखंड से प्यार करने लगी थी…।
मैंने सोचा पापा नहीं सुनते तो कोई बात नहीं, अखंड से ही एक बार मन की बात कह लेती हूँ..
कहीं न कहीं अखंड की भी थोड़ी जगह तो पापा के दिल में थी ही, हो सकता है उसके कहने पर पापा मेरे और उसके रिश्ते के लिए मान भी लेते..।
लेकिन इसी बीच मुझे गोलू से ये मालूम चल गया कि अखंड किसी लड़की को पसंद करने लगा है। गोलू ने मुझे दूर से उस लड़की की झलक भी दिखा दी..।
लड़की वाकई बहुत सुंदर थी, और उसे देख कर लगा की अखंड कभी इसे छोड़ कर मुझसे प्यार करने को राजी नहीं होगा..।
मैंने अखंड से अपना मन हटाने की सोच ली, लेकिन इस बात से मेरी तकलीफ और बढ़ गयी.. ना घर पर कोई मेरी बात समझ सकता था और ना अखंड..
ऐसे में मेरी दोस्त शालू ने मुझसे कहा कि मुझे एक बार ही सही अखंड को अपने मन की बात बता देनी चाहिए उसके बाद वो भले ही जो भी निर्णय ले..।
यही सोच कर मैंने उससे मिलने की ठानी.. उसे फ़ोन किया तो उसने कहा वो बॉयज हॉस्टल में है..।
इसलिए अभी नहीं आ सकता। किसी काम में व्यस्त है।
लेकिन मैं उससे मिलने को बावरी हुई जा रही थी…।
मुझे उस वक्त लगा अगर अखंड से नहीं मिली तो पागल हो जाउंगी, और मैं घर पर बिना किसी से कुछ कहे अखंड के हॉस्टल की तरफ बढ़ गयी.. ।
मैंने अपने चेहरे को दुपट्टे से अच्छे से लपेट रखा था..
मैं जानती थी बॉयज हॉस्टल में लड़कियों का प्रवेश निषेध था..।
गोलू से शुरू से ही मेरी बातचीत थी, मैंने उसे फ़ोन लगा लिया..
उसने मुझे हॉस्टल में घुसने का पिछला रास्ता बता दिया.. मैं वहाँ से हॉस्टल में दाखिल हो गयी..।
शाम का समय था, हॉस्टल के बहुत से लड़के बाहर गए हुए थे…
किसी तरह छुप छुपा कर गोलू मुझे अखंड के कमरे तक ले आया..
मैं अखंड के कमरे में पहुँच गयी..
अखंड उस वक्त लल्लन के साथ बैठा अपना कुछ काम निपटा रहा था..
मैं अंदर दाखिल हुई और कमरे का दरवाज़ा लगा दिया..
मैंने अखंड से कहा कि मैं उससे कुछ बात करना चाहती हूँ..
अखंड ने इस बात पर आपत्ति जताई कि मैं अचानक ऐसे उसके कमरे में कैसे पहुँच गयी..?
हम दोनों को बात करता देख गोलू और लल्लन बाहर निकल गए..
मैं उसे अपनी बात कह पाती या समझा पाती उसके पहले दरवाज़े पर जोरो की दस्तक होने लगी..।
मैं इस दस्तक को सुन कर घबरा गयी.. उसी वक्त बाहर से धीरेन्द्र की आवाज़ आने लगी…
“कौन है अंदर… परिहार दरवाज़ा खोल !”
उसकी आवाज़ सुन मैं घबरा गयी, लेकिन अखंड पर कोई फर्क नहीं पड़ा..
“तुम घबराओ मत गीता, अगर हम गलत नहीं, तो हमें डरना भी नहीं चाहिए.. शांत रहो..।
हम दरवाज़ा खोलते हैं !”
“नहीं अखंड.. ये लड़का हम दोनों को बदनाम कर देगा.. तुम जानते नहीं ये कितना शातिर है ?”
“कोई फर्क नहीं पड़ता.. लोग सच्चाई से कब तक भागेंगे.. झूठ इतना भी ताकतवर नहीं होता.. !”
ये कह कर अखंड ने दरवाज़ा खोल दिया..
दरवाज़ा खुलते ही धीरेन्द्र ने अखंड को धक्का दिया और अंदर दाखिल हो गया.. उसके एक गुर्गे ने तुरंत मेरी तस्वीर खींच ली..
तस्वीर में मेरे साथ खड़ा अखंड साफ नजर आ रहा था….।
“शर्म नहीं आती परिहार, बॉयज हॉस्टल में लड़की को बुलाते ?” धीरेन्द्र चीख पड़ा.. और उससे तेज़ आवाज़ से अखंड ने उसे ललकार दिया..
“तुम्हे शर्म नहीं आती मंत्री जी के घर रोज़ का आना जाना है तुम्हारा और गीता के लिए ऐसा बोल रहे हो ?”
“हमने तो सिर्फ बोला है तुम अपने करम देखो परिहार, बॉयज हॉस्टल में लड़की को लाकर बैठे हैं.. देख लो सब.. इन्ही को अपना नेता चुनना सब, जिससे यही सब धांधली हो यहां !”
“चुप हो जाओ धीरेन्द्र !” मै बिफर पड़ी..
“शर्म नहीं आती तुम्हे.. तुम भी जानते हो कि अखंड हमारा अच्छा दोस्त है !”
“अगर सिर्फ अच्छा दोस्त है, तो काहे उससे मिलने यहां आना पड़ा आपको गीता कुमारी जी.. ये देखिये आपके पिता जी को दिखाने के लिए सबूत भी रख लिए है हम.. उन्हेँ भी तो पता चले जिस अखंड को आजकल वो अच्छा मान बैठे है वो कैसा आस्तीन का सांप है.. !”
धीरेन्द्र चीख रहा था, जिससे आजू बाजू के कमरे से लड़के निकल कर आने लगे थे..
इस जहालत से बचने के लिए हमने अपना चेहरा दुपट्टे से ढंका और वहाँ से बाहर निकल गयी..
गोलू साथ था, उसने पीछे की तरफ का दरवाज़ा खोल दिया और मुझे बाहर निकल दिया.. लेकिन इस थोड़ी सी देर में ही मेरी हालत ख़राब हो गयी थी.. यूँ लग रहा था मेरी इज्जत सरे आम उस लीचड़ इंसान ने नीलाम कर दी है..
मुझे लगा कहीं वो लड़को की फ़ौज के साथ मेरा पीछा ना करने लगे लेकिन उसने वैसा कुछ नहीं किया, बल्कि जो लड़के मेरी तरफ भागे उन्हेँ भी रोक लिया..
मैं हैरान थी कि इसने उन लड़को को रोक कर मुझे इतनी आसानी से निकलने क्यों दिया..
उस वक्त मुझे नहीं पता था कि धीरेन्द के दिमाग में कैसी खिचड़ी पक रही थी..
उसने उस वक्त तो मुझे जाने दे दिया, लेकिन उस वक्त का मेरा वहाँ से बच कर निकल जाना, मेरे ही भविष्य को अंधकार के गर्त में डुबो जायेगा, मैंने सोचा नहीं था..
*****
कुसुम खुश थी, बहुत खुश.. एक तो उसकी लाड़ली गिट्टू का जन्मदिन था दूसरा उसे यज्ञ के साथ मायके जाने मिल रहा था..।
उसके पहले भी कई बार वो यज्ञ के साथ अकेले अपने मायके गई थी, लेकिन उसने उस सुनहरे समय को यूं ही मुंह फुलाए हुए गंवा दिया था।
आज उन बातों को याद करके उसके चेहरे पर हंसी छा जा रही थी।
उसने जरूर उस सुनहरे से समय को व्यर्थ कर दिया था लेकिन यज्ञ ने उस रास्ते के एक-एक पल को यादगार बना दिया था…
कभी उसे छेड़ कर कही जाने वाली बातों से और कभी अपने गाए गीतों से…
मुस्कुराकर कुसुम ने सारी तैयारी कर ली! उसने अपनी सबसे खूबसूरत साड़ी को सबसे ऊपर रखा और तभी उसे ध्यान आया कि यज्ञ की पैकिंग भी बाकी है ! आज तक कभी उसने यह सोचा ही नहीं था कि यदि उसका पति है तो उसके सारे काम भी कुसुम को ही करने हैं!
वह तो आज तक बस अपने ही काम निपटाती आई थी। उसे लगा कि उसे यज्ञ का सामान भी रख लेना चाहिए।
उसने यज्ञ की अलमारी खोली। अलमारी खुलते ही खुशबू का एक झोंका उसे सहला गया।
यज्ञ के कपड़े सिलसिलेवार सजे हुए थे। इतने सलीके से सजे कपड़ों को देखकर कुछ पल के लिए कुसुम देखती ही रह गई। उसमें तो इतना शऊर ही नहीं था।
वह तो अपने कपड़े यूं ही अपनी अलमारी में ठूंस दिया करती थी। कई बार मायके में ऐसा होता था कि किसी कुर्ते की चुन्नी ढूंढने के चक्कर में अलमारी के पूरे कपड़े नीचे गिर जाया करते थे। पर उसे अखंड की अलमारी बड़ी प्यारी लग रही थी।
एक तरफ पांच छह अलग-अलग परफ्यूम की कांच की सुंदर-सुंदर बॉटल रखी थी। उसने एक बोतल उठाई और धीरे से अपने ऊपर स्प्रे कर लिया। उस खुशबू में वह नहा गई।
और मुस्कुरा कर उसने वह बोतल वापस रख दी।
अलमारी के एक खंड में कुर्ते पजामे रखे हुए थे। उनमें से अपनी साड़ी से मिलते जुलते रंग का कुर्ता उसने निकाल लिया। उसके अलावा दो-तीन टी-शर्ट जींस निकाल कर उसने अलमारी बंद करके रख दी…।
शाम हो चुकी थी उन लोगो को निकलना था.. आज कुछ देर के लिए यज्ञ अखंड के साथ बाहर चला गया था, उसे कुछ सामान लेना था.. ।
कुसुम अपना काम लगभग निपटा चुकी थी कि नीचे से कामवाली बाई की चिल्लाने की आवाज आई।
कुसुम ने ऊपर से झांक कर देखा और उसे कुछ समझ नहीं आया। वह तेजी से भागती, नीचे पहुंची। नीचे आंगन में उसकी सास अपने सीने को पकड़े हुए कुर्सी पर पड़ी हुई थी।
उनके आसपास काकी सास और घर के काम वाले लोग उन्हें घेर कर खड़े थे। वहां पहुंचते ही कुसुम ने सबको दूर किया और पानी का गिलास अपनी सास के मुंह से लगाने की कोशिश करने लगी..।
“अम्मा जी क्या हुआ थोड़ा पानी पी लीजिए..।”
कुसुम की सास ने पानी का घूंट लेने की कोशिश की लेकिन वह पी नहीं पाई। उनकी तकलीफ उनके चेहरे पर नजर आ रही थी। ऐसा लग रहा था शरीर का सारा खून एक साथ उनके चेहरे पर चढ़कर उनके मस्तक पर हथौड़े मार रहा है। पूरा चेहरा लाल पड़ गया था। वह बार-बार अपने सीने को मसल रही थी, और उनके माथे पर पसीने की बूंदे छलक आई थी। उन्हें देखकर ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कि उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कुसुम ने उनकी हालत देखी और घर वालों की मदद से उन्हें धीरे से उठाकर बाहर खड़ी गाड़ी में बिठाया और गाड़ी अस्पताल की तरफ निकाल दी.. ।
क्रमशः
aparna…

Very Imotional and Interesting and Shandaar part
Nice part
Bahut accha likhti hai aap
लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️
🥰❤️🥰❤️🥰❤️🥰❤️🥰❤️🥰❤️❤️🥰🥰❤️🥰❤️🥰❤️🥰❤️🥰❤️🥰❤️🥰❤️
Dii kisi bhi kahani ka next part nhi dala aapne next part kab aayega
बहुत खूबसूरत भाग।
प्यार का रंग चढ़ रहा है धीरे-धीरे परफ्यूम से लेकर उसके सजीले कपड़े मन को गुदगुदाने लगे कुसुम कुमारी के😍😍😍😍😍😍 मायके जाने के सपने सजाने लगी पति सन्ग।
पर अब सासु मॉम को क्या हुआ हार्ट अटैक आया है लग रहा है कुसुम कुमारी ने सही समय पर उन्हें ले जाकर अच्छा किया।
यह धीरेंद्र वाकई बहुत कुकुर इंसान है कुकुर कुकुर कुकुर कहीं का🙄🙄😡😤
Beautiful part🌹👌🌹👌 ❤❤❤❤❤
Abb dubara akhand ka milna hoga resham se kusum apni saas ko unhi ke paas le jayega.
Bichara akhand…sherni kusum ka yu dhere dhere badlna kitna pyara lg rha hai.