जीवनसाथी -3 भाग -77

जीवनसाथी -3 भाग -77

जीवनसाथी by aparna

“हर्ष मुझसे जुडी एक सच्चाई है, जो मैं तुम्हे बताना चाहती हूँ, पता नहीं उस सच्चाई को जानने के बाद तुम किस निर्णय पर पहुंचोगे?  हो सकता है मुझसे तुम्हारा प्यार भी ख़त्म हो जाये, बावजूद मुझे हर एक बात तुम्हे बतानी होगी हर्ष !”

हर्ष आंखे फाडे मीठी को देखने लगा..

“ऐसी क्या बात है मीठी ? सुनो ये बात क्या रानी मॉम से जुडी बात है ?”

“नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं!”

” झूठ मत बोलो, कोई बात तो है। और वह बात क्या है, यह जब तक तुम नहीं बताओगी मुझे पता कैसे चलेगा?”

“बताती हूँ।”

हर्ष दरवाजे से बाहर निकल आया था, मीठी भी उसके साथ ही थी, उनके गार्डन में टहलते हुए वह दोनों आगे बढ़ रहे थे। एक जगह पहुंच कर मीठी थम गई।

” हर्ष मैं तुमसे …  कुछ कहना चाहती हूं!’

” कहो ना, मैं तो कब से सुनने के लिए बेकरार हूं।”

” हर्ष मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती।”

मीठी के ऐसा बोलते ही हर्ष आश्चर्य से उसकी तरफ देखने लगा।

” यह क्या कह रही हो तुम? क्या हो गया तुम्हें?”

” हर्ष मेरे बारे में एक ऐसी बात है, जो तुम्हें पता चलेगी तो तुम खुद इस शादी से इनकार कर दोगे।
      हालांकि मेरे इस राज से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन अगर तुम सच में मुझसे प्यार करते हो, तो तुम्हें भी मेरे जन्म की इस सच्चाई के बारे में मालूम होना चाहिए।

    यह सच्चाई तुम्हें बताएं बिना अगर मैं तुमसे शादी कर लेती हूं, तो यह तुम्हारे साथ धोखा होगा।”

” तुम कहना क्या चाहती हो मीठी? इतना गोल-गोल मत घुमाओ बातों को।
   जो कहना है साफ़-साफ़ कहो।”

मीठी ने पल भर रुक कर गहरी सी साँस भरी, और फिर हर्ष की तरफ देखने लगी..

” हर्ष!! मैं मेरे पापा की बेटी नहीं हूं!
    मेरे पापा के छोटे भाई प्रताप जी की बेटी हूं !”

“ये क्या कह रही हो? और तुम्हें यह सब किसने बताया? कब बताया, क्यों बताया?”

” मुझे यह सब क्यों, कैसे पता चला, यह बात मायने नहीं रखती! बात बस इतनी सी है कि मैं प्रेम सिंह चंदेल की नहीं प्रताप सिंह चंदेल की बेटी हूँ…
    उस समय क्या और क्यों, कैसे हुआ, मैं नहीं जानती। और ना ही मैंने अपनी मां से इस बारे में कुछ भी पूछा। बस इतना पता है कि मेरे पिता यानी प्रताप सिंह चंदेल के गुजर जाने के बाद शायद मेरे पापा ने मुझे अपना लिया।
      मेरी नजर से देखो, तो मैं सिर्फ और सिर्फ प्रेम सिंह चंदेल की ही बेटी थी, और हमेशा रहूंगी।

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    लेकिन तुम्हें मैं इस सच्चाई को बता देना चाहती थी, क्योंकि तुम्हारे साथ मेरा जिंदगी भर का संबंध जो जुड़ना था। और इस सच्चाई को बताने के बाद अब मैं तुमसे हाथ जोड़कर यह प्रार्थना करती हूं कि मुझे भूल जाओ। मेरे साथ तुम्हारा कोई भविष्य नहीं है।

    तुम अपनी महलों की दुनिया में वापस लौट जाओ। पहले तो मुझे लगता था मैं सिर्फ एक आम लड़की हूं, लेकिन नहीं।
     एक बहुत आम लड़की तो नहीं हूं मैं। मेरे जीवन का इतिहास ही बड़ा अजीब सा है।

   इसलिए बस यही कहना चाहती हूं कि आज के बाद हम कभी नहीं मिलेंगे, और अगर मिलेंगे भी तो सिर्फ दोस्त की तरह।

     मैं जानती हूं इस सच्चाई को जानने के बाद तुम्हारा वैसे भी मुझ पर से मोह भंग हो जाएगा। दूसरी बात अगर तुम अब भी मुझे अपनाने को तैयार हो, तो इस सच्चाई को जानने के बाद तुम्हारे माता-पिता कभी मेरे साथ तुम्हारा रिश्ता करने के लिए तैयार नहीं होंगे। बस इसीलिए कहती हूं मुझे माफ कर दो हर्ष। तुम अपने रास्ते चले जाओ। मैं अपने रास्ते चली जाऊंगी। कोई ना कोई मंजिल तो हमें भी मिल ही जाएगी।

आखिर शादी ही बस कर लेना तो सब कुछ नहीं होता ना।”

    मीठी की बात सुनकर हर्ष सकते में आ गया था। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि ऐसा भी कुछ हो सकता है। इस सब के पीछे का असली कारण क्या था? क्यों मीठी ने ऐसा कहा कि वह प्रताप की बेटी है, प्रेम की नहीं।

     और अगर ऐसा था भी तो यह इतनी जरूरी बात महल में क्यों किसी को पता नहीं थी?

बातें ढेर सारी थी, जो हर्ष के मन में सवाल पैदा कर रही थी? और उन सवालों के उसके पास फिलहाल कोई जवाब नहीं थे।

हर्ष ने मीठी की सारी बातें सुनी और बिना कोई जवाब दिए वहां से निकल गया।

मीठी कहीं ना कहीं यही चाहती थी, कि हर्ष उसकी बात को काटकर उसे अपना ले।

हर्ष आकर उसे अपनी बाहों में भर ले, और उससे कहे कि मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि तुम किसकी बेटी हो, लेकिन हर्ष ने वैसा नहीं किया। उसने मीठी की सारी बातें सुनी और उसके बाद बिना कोई जवाब दिए वहां से वापस लौट गया।

तो क्या इसका मतलब हर्ष उसे भूल गया या भूलने की तैयारी करने लगा था…।

हर्ष को यूँ जाते देख मीठी की आँखों से आंसू छलक आये.. उसका मन रोने लगा..
क्या यही उसकी नियति थी ? हाँ शायद ! उसने ही तो चुना इस बात को कि हर्ष को सच्चाई बता देगी, और उससे शादी से इंकार कर देगी.. !
अगर यही उसने सोचा था तो उसे इस बात पर अडिग रहना था..।
मन के किसी कोने में उसने ये उम्मीद क्यों छिपा रखी थी,की हर्ष उसकी सारी सच्चाई जान कर भी उसे अपना लेगा !

हाय रे मन !! बड़ा अजीब होता है इंसान का मन.. हम खुद अपने बारे में सब जानते हुए भी खुद से ही झूठ बोल जाते हैं, और बाद में दुखी हो जाते हैं..।

ये मीठी का खुद से कहा झूठ ही था कि अब वो हर्ष से शादी नहीं करना चाहती। जबकि असल में वो चाहती थी हर्ष उसकी इस बात को झुठला कर सारी दुनिया के सामने उसे अपना ले..।
लेकिन वैसा कुछ नहीं हुआ था, उसकी ज़िंदगी में सच का राजकुमार आया ज़रूर, लेकिन एक हवा के झोंके से बह कर चला भी गया..

वो आंसू बहाती खड़ी थी कि उसके कंधे पर अपना सर रख रुस्तम उसके गालों पर अपना गाल घिसने लगा..।
मीठी का मन अच्छा नहीं था उसने रुस्तम को झटक दिया, लेकिन एक बार फिर रुस्तम वही करने लगा.. मीठी ने पलट कर रुस्तम को डांट लगा दी.. डांट पड़ते ही अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मीठी को देखता रुस्तम भोला सा चेहरा बना कर इधर उधर देखने लगा.. उसकी इस अदा पर मीठी को हंसी आ गयी…।

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उसने धीरे से उसकी गर्दन पर हाथ फेरना शुरू कर दिया….।
रुस्तम को सहलाना मीठी को बहुत पसंद था।
बचपन में भी जब कभी उसे उसकी माँ डपट दिया करती थी, वो ऐसे ही आकर रुस्तम को सहला कर अपना दुःख भूल जाया करती थी…
आज भी वही हुआ..।
कुछ देर बाद मीठी रुस्तम पर सवार हुई और बाहर निकल गयी….।

गेट से निकल कर वो एक तरफ बढ़ गयी, उसका गेट के दूसरी तरफ ध्यान ही नहीं गया…

हर्ष ने गाडी घर से बाहर खड़ी की थी….
वो मीठी की बात सुनने के बाद उससे कहना चाहता था कि उसे इन सब बातों से फर्क नहीं पड़ता… वो हमेशा से मीठी को चाहता था और चाहता रहेगा, लेकिन उसे लगा इतने सीधे शब्दों में अपने मन की बात कह देना उचित नहीं है।

इसलिए वो अपनी गाड़ी में रखी अंगूठी लेने चला गया..
वो अंगूठी अपने साथ लाया था..।

उसका मन था मीठी को तोहफा देकर उससे अपने मन की बात कह देगा, और इसीलिए उसे सरप्राइज देने वो बिना कुछ बोले बाहर चला गया…

वो अपनी गाड़ी तक पहुंचा था कि धनुष का फ़ोन आ गया…

“कहाँ हो हर्ष ?”

“बाहर था, बोलो क्या हुआ ?”

“तुम्हारे केस से जुडी एक लीड मिली है !”

“क्या ?”

“हाँ, जल्दी से ऑफिस आ जाओ.. तुम्हे कुछ बताना है.. !”

“अभी थोड़ा सा बिज़ी था… आधे घंटे में आता हूँ !”

“ठीक है.. मैं ये कह रहा था कि हमें जल्दी ही दिल्ली लौटना होगा… वही से सारे तार जुड़े हैं..
सनंत कस्तूरिया की बेटी को अपना मुहरा बनाने वाले लोग अब लगभग हमारी पकड़ में हैं.. वो अब ज्यादा दूर नहीं है हमसे!”

“कौन है इस सबके पीछे.. ?”

“हर्ष तुम्हे दिल्ली की वो घटना याद है, जब एक बार हम अपनी किसी क्लाइंट मीटिंग को निपटा कर निकल रहे थे… तुम होटल की सीढ़ियों पर थे और तभी तुमने अपने सामने एक बड़ी सी वैन खड़ी देखी जिसमे एक पन्द्रह सोलह साल का लड़का बैठा ग़ुमसुम सा बाहर देख रहा था…

“हाँ याद है, वो लड़का इतना शांत था कि वो मुस्कुरा उठे इसलिए मैं उसे मुहं बना बना कर चिढ़ाने लगा था..।
लेकिन वो तब भी नहीं हंसा, और उसी बात पर मुझे थोड़ा अजीब सा लगा था..।

बाद में मैं अपनी गाडी निकाल कर वहाँ से निकल गया था, और वो लड़का उसी वैन में मुझे ट्रेफिक सिग्नल पर भी मिल गया था…।
और इस बार उसकी मुझ पर नजर जैसे ही पड़ी वो मुझे लगातार देखता रहा, उसका ऐसे देखना देख कर मुझे लगा कि ये लड़का किसी परेशानी में है। और मैंने ट्रैफिक सिग्नल के बीच ही उतर कर उस गाडी तक जाना शुरू कर दिया था..
मैंने जाकर उस गाड़ी के कांच पर जैसे ही दस्तक दी, उन लोगो ने गाड़ी सिग्नल खुले बिना ही भगा दी थी.. !”

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“हाँ और तुमने उन लोगो का पीछा करना शुरू कर दिया था…।
तुम्हारी गाडी के आगे उनकी वैन कहाँ टिकती ? तुमने उन्हेँ पकड़ ही लिया और उस लड़के को गाडी से बाहर निकाल लिया था… !”

“हाँ लेकिन अफ़सोस है कि मैं उन लोगो को पकड़ कर पुलिस के हवाले नहीं कर पाया था..।
मुझे पीछे आता देख लड़के को बाहर फेंक कर वो लोग भाग गए थे..!”

“हाँ…. इस गैंग के बारे में पुलिस भी ज्यादा कुछ पता नहीं कर पायी थी…
और हमने भी लड़के को आज़ाद करवा कर पुलिस की मदद से उसके घर वालो को सौंपने के बाद उस बात पर  ध्यान नहीं दिया था… ! लेकिन अभी जब मैं सनंत वाला केस देख रहा था, तब उसकी एक पुरानी तस्वीर में इनमें से एक बंदा नजर आया..
तुम्हे याद है वो आदमी जो सामने ड्राइवर के बगल में बैठा था !”

“हाँ उसके आधे चेहरे पर कोई दाग सा था.. !”

“हाँ इसीलिए वो चेहरा याद रह गया था… उस आदमी को मैंने सनंत की एक तस्वीर में देखा है !”

“ओह्ह.. !”

“हाँ.. मैं बाक़ी की बातो को जानने की कोशिश में हूँ लेकिन मुझे लगता है अब बाक़ी सारे रहस्य दिल्ली जाकर ही खुलेंगे !”

“ठीक है वापसी की तैयारी करते हैं.. वैसे भी काम सारा पड़ा है वहाँ.. जाना तो है ही ! मैं आ रहा हूँ वापस.. फिर ये सब देखते हैं !”

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“ओके !”
धनुष से बात करने के बाद हर्ष के दिमाग में वो सारी बातें घूमने लगी थी….
अपने सर को झटका दे कर उसने इन सारी बातों से अपना मन हटाया और गाड़ी खोल कर अंगूठी निकाल कर वापस मीठी के घर की तरफ मुड़ गया..

लेकिन वो जब तक वहाँ पहुंचा मीठी वहाँ से निकल चुकी थी..

क्रमशः

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aparna…

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Arun Kumar
Arun Kumar
1 year ago

😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔😔❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️

Gurpreet Kaur
Gurpreet Kaur
1 year ago

😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊👍👍👍👍👍👍👍👍👍

Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
1 year ago

थोड़ी देर वह भी ठहर जाती और वह भी कह कर जाता आता हूं तो कोई प्राब्लम ही नहीं होती, आजकल के लोग इम्पेशेंट हो गए हैं, अब लड़की कुछ सोच रही है लड़का कुछ और सोचेगा, कन्फ्यूजन में कनेक्शन पर असर ना पड़े, फिर भी उत्सुक हूं वह कोन है दिल्ली में, क्या राज है, मैं भी दिल्ली चलने के लिए तैयार हूं, तब तक के लिए नाईस पार्ट दीदी…💐🙏

Ritu Jain
Ritu Jain
1 year ago

Wonderful part. Kya aap pratilipi par koi notification nhi dengi dii mujhe toh pata nahi ki part aa gye hai ab jab aap pratilipi par nhi ho toh mein subscription nhi le rhi hu aage kaise pata chalega ki aapki kahani ka next part aa gye hai pls bataye didi

Manu verma
Manu verma
2 years ago

लाजबाब, भावुकता से भरा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️💐💐💐💐💐💐

Poonam singh
Poonam singh
2 years ago

हर्ष और मीठी की लाइफ में वही समय आया है जो कभी राजा साहब और बांसुरी के जीवन में था लेकिन इनका प्यार सच्चा है इन्हें भी भी अपनी मंजिल मिल ही जाएगी

Mandeep kaur
Mandeep kaur
2 years ago

Beautiful part🌹🌹🌹
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Λ🌷🌸🌷🌸🌷
( ˘ ᵕ ˘🌷🌸🌷
ヽ つ\ /
UU / 🎀 \
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Vinod Kumar Bansal
Vinod Kumar Bansal
2 years ago

बहुत अच्छा जी

Manjeet Kaur
Manjeet Kaur
2 years ago

Superb awesome 👌👌👌👌👌👌

Archana Singh
Archana Singh
2 years ago

Very interesting part 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻

Rachna Gupta
Rachna Gupta
2 years ago
Reply to  Archana Singh

हर्ष और मीठी तो एक दूसरे को पसंद करते है रूपा रानी साहिबा इनके रिश्ते के लिए मानेगी