Bestseller-5

              The Bestseller -5

               
                          सनक
 
    
    नंदिनी  ने ना में सिर हिलाया और मना कर दिया….” नहीं मैं थोड़ा ज्यादा थकी हूं और बाथ भी लेना है तो इसलिए तुम जाओ अभी। मैं बाद में देखती हूं।”
” ओके ऐसा करो तुम अपनी गाड़ी की चाबी दे दो मैं तुम्हारी कार लेकर चला जाता हूं। “
” क्यों तुम्हारी गाड़ी कहां है?”
” यार मेरी पुलिस की जीप है, अब इतनी बड़ी राइटर के घर पुलिस की जीप खड़ी रहेगी तो नाम उछलता है ना| वैसे भी उसने बहुत रिक्वेस्ट की थी कि यह मामला मीडिया तक ना जाए | अरे हां मैं तुमसे यह कहना भूल गया कि तुम किसी हाल में यह बात की कामिनी रायसागर का पति गायब है, अपने अखबार में नहीं छापोगी, और ना ही किसी से इस बारे में कोई चर्चा करोगी। समझ रही हो ना , कोई स्पॉइलर क्रिएट नही होना चाहिए!!

   नंदिनी ने धीरे से ‘हां’ में सिर हिला दिया। और उसे इस कदर मासूमियत से सिर हिलाते देख शेखर को बड़ा आश्चर्य हुआ और वो कूद कर उसके पास पहुंच गया | उसके माथे पर अपनी उंगलियां रखकर वह कुछ देर विचार मगन मुद्रा में खड़ा रहा…..
”  ये क्या कर रहे हो शेखर?
” चेक कर रहा हूं यार!! तुम्हारी तबीयत तो सही है? इतनी बड़ी million-dollar की न्यूज़ तुम्हें बता दी और तुम  बिना उछल कूद मचाये चुपचाप खड़ी हो। ये तो गज़ब हो गया!
    और तुमने मेरी बात इतनी आसानी से मान भी ली कि तुम इस बात को अखबार में नहीं छापोगी।”
” आई रिस्पेक्ट समवन्स प्राइवेसी!”
“ओह्ह मैन! रियली?
    तुम एक पत्रकार हो, और दूसरों की निजता में ताकाझांकी तुम्हारा हक है। ये कभी तुम्हारे शब्द हुआ करते थे बेबी।”
” ओह कम ऑन शेखर! वक्त के साथ विचार भी बदलते हैं। अच्छा सुनो, मैं मेरी गाड़ी तुम्हें नही दे पाऊँगी।”
” पर क्यों?”
” पेट्रोल नही है।”
“मैं डलवा लूंगा यार। मैं भी ठीक ठाक कमाता हूँ। सांतवें वेतन आयोग के बाद हम पुलिस वालों की भी अच्छी खासी सैलरी हो गयी है।”

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” नही मेरा मतलब, फ्यूल स्टेशन तक भी गाड़ी नही जा पाएगी।”
” हे भगवान! गाड़ी को सहारा का रेगिस्तान बनाने की क्या ज़रूरत है। फ्यूल प्रॉपर चेक किया करो न!”
” कूलेंट भी खत्म हो गया है बाबा।”
” ओके!!! ओके मेरी जान ! मतलब तुम घुमा फिरा कर ये कह रही हो कि सन्डे तुम्हारी गाड़ी की सर्विसिंग करवा दूँ।”
” हाँ बेबी प्लीज़। लेकिन अभी गाड़ी हाथ लगाने लायक भी नही है।  तुम जाओ जल्दी। वरना लेट हो जाओगे।”
” इतने धक्के मार कर मुझे घर से निकाल रही हो माजरा क्या है?  क्या कोई और आने वाला है?”
” यार समझते क्यों नहीं हो प्रेशर आया हुआ है वो भी जोर का। अब तुम्हें दरवाजे पर छोड़ कर मैं फ्रेश होने बाथरूम में तो नहीं घुस सकती ना !! अच्छा भी तो नहीं लगेगा… बॉयफ्रेंड हो आखिर। “
   शेखर ने एक बार नंदिनी को ध्यान से देखा और अपनी जेब से जीप की चाबी निकालकर उंगली में गोल-गोल घुमाते हुए लिफ्ट की तरफ बढ़ गया।  लिफ्ट तक जाकर वह वापस एक बार मुड़ा और उसकी तरफ अपनी आंखों से इशारा कर दिया जैसे कह रहा हो “मेरी आंखें तुम पर ही हैं”!
   नंदिनी ने बहुत बेमन से मुस्कुराते हुए उसकी तरफ एक फ्लाइंग किस उछाल दिया। लिफ्ट के बंद होते ही उसने तुरंत दरवाजा बंद किया और अपना सिर पकड़ कर अंदर चली गई।

*******

  कामिनी के हाथ में थमी किताब के पन्ने फड़फड़ा रहे थे। और वो खिड़की से बाहर झमाझम गिरती बारिश को देख रही थी कि, हवा का रुख अचानक बदल गया। अब बारिश की बूंदे उसकी खिड़की के कांच पर धड़धड़ का कोलाहल पैदा कर रही थी, और वही बारिश की कुछ बूंदे खिड़की से बड़ी बेशर्मी से अंदर आती पन्नों को भिगोने लगी….

****

      रास्ते में फ्यूल स्टेशन पर नजर पड़ते ही सुहास ने चैन की सांस ली और उसी तरफ अपनी गाड़ी मोड़ दी।
     बड़ी अजीब सी बात थी कि इतने बड़े फ्यूल स्टेशन पर कोई भीड़ भाड़ नहीं थी । लोग रास्ते से निकल तो रहे थे लेकिन कोई वहां पेट्रोल या डीजल डलवाने नहीं आ रहा था। फिर उसका ध्यान गया लाइन से एक के बाद एक लगे मीटर के सामने क्रॉस का साइन लगा था यानी वहां पर पेट्रोल नहीं था।
      लेकिन वह एक बार फिर सोच में पड़ गया कि, पेट्रोल हो या ना हो कोई आदमी तो यहां मौजूद हो ही सकता था। तभी उसका ध्यान सीढ़ियों पर बैठे एक लड़के की तरफ गया। उसने नीली पीली स्वेटशर्ट सी पेट्रोल पंप की यूनिफार्म जैसी कोई ड्रेस पहन रखी थी। बालों पर भी उसने एक छोटा सा पीले रंग का कैप लगाया हुआ था।
    सुहास ने गाड़ी का हॉर्न बजाना शुरू किया लेकिन उस लड़के ने नहीं देखा। वह सीढ़ियों पर बैठा हुआ अपने दोनों घुटनों पर दोनों हाथों को मोड़े हुए चेहरे को नीचे झुकाए हुए बैठा था। माथे से नीचे उसके बाल इसके चेहरे को लगभग ढके हुए थे।
   बार-बार हॉर्न देने पर भी जब उस लड़के ने सिर उठाकर सुहास को नहीं देखा तो सुहास ने गाड़ी ठीक उसके सामने ले जाकर खड़ी कर दी….
” ओ भाई सुन क्यों नहीं रहे हो? सुनो मैं तुमसे कह रहा हूं…”
     उस लड़के ने फिर भी चेहरा नहीं उठाया… सुहास बुरी तरह से खीझ रहा था लेकिन अपने गुस्से को काबू में कर एक बार फिर उसने उस लड़के से सवाल किया…” अरे ओ भाई!! तुम ही से कह रहा हूँ। पेट्रोल मिलेगा यहाँ?”
  पर उस लड़के ने न कोई जवाब दिया और न एक बार को भी नज़र उठा कर सुहास की तरफ देखा…
   सुहास वापस उसे कुछ कहने जा रहा था  कि तभी सुहास की गाड़ी के दूसरी तरफ के कांच को कोई जोर जोर से खटखटाने लगा।  कांच पर धड़ धड़ की तेज आवाज से घबराकर सुहास ने उस तरफ देखा। एक अजीब सा झुर्रियों से भरा चेहरा उस कांच के पार झांक रहा था…
   … सुहास ने कांच नीचे कर दिया।
” बोलिए दादा क्या हुआ?”
” वह लड़का कुछ नहीं बोलेगा। उससे कुछ मत पूछो?
” अच्छा!!! लेकिन क्यों? तुम ही बता दो।”
” वो लोग बहुत ज़ालिम थे , उन लोगों ने पिघला हुआ गर्म लोहा उसके गले में उतार दिया था ना।”
” व्हाट नॉनसेंस। ” सुहास पहले ही रास्ता गुम हो जाने के कारण परेशान था उस पर इस सनकी बूढ़े की अजीबोगरीब बातें उसे और भी ज्यादा खीझ से भर दे रही थी…
” मैं सही कह रहा हूं तुम चाहो तो उसकी गर्दन उठाकर देख लो। “
    सुहास की भौहें तन गई थी। उसे उस बूढ़े पर पता नहीं क्यों पर बहुत तेज गुस्सा आ रहा था। वो गुस्से में तुरंत अपनी कार का दरवाजा खोलकर उतरा और सामने बैठे उस लड़के की टोपी हटाकर उसका चेहरा ऊपर कर दिया। उसका चेहरा ऊपर करके सुहास उससे अपना सवाल पूछने ही वाला था लेकिन उसका चेहरा देखते ही सुहास के रोंगटे खड़े हो गए….-  ‘ये क्या था।”

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      उस लड़के की नाक के नीचे मुंह के पास से सारा गला सीने तक गायब था। यानी कि सुहास उसके गले के अंदर पीछे की हड्डियां देख पा रहा था। वो भी बिल्कुल साफ साफ !!!
 
      उस लड़के का चेहरा आधा ही था!  सिर्फ नाक तक…. और उसके नीचे ऊपरी और निचले जबड़े के ठीक पीछे स्वर यंत्र के पास से उसकी रीढ़ की हड्डी नजर आ रही थी…. जो सीने तक आकर फिर गायब हो गई थी।
      घबराकर सुहास ने उसे छोड़ दिया जिससे उस लड़के को तो धक्का लगा ही वो खुद भी चार-पांच कदम पीछे सरक कर लड़खड़ाते हुए गिर गया।
     वह अपनी ही गाड़ी से टकरा कर नीचे गिर गया था। उसकी हालत इतनी खराब थी कि, वह एकाएक उठ नहीं पा रहा था। उसने गहरी-गहरी सांसे ली और कुछ देर जमीन पर ही लेटा रह गया। कार के नीचे से उसने दूसरी तरफ झांक कर देखा। जमीन से होते हुए दूसरी तरफ जहाँ वो बूढ़ा खड़ा था वहाँ उस बूढ़े आदमी के ना तो पैर नजर आ रहे थे और ना परछाई।
      सुहास की धड़कने बढ़ने लग गई थी। उसके माथे पर पसीना छलकने लग गया था। वह जोर से आवाज देकर लोगों को मदद के लिए बुलाना चाहता था। लेकिन उसकी आवाज गले में फंस कर रह गई थी। जैसे तैसे खुद को संभाल कर उसने फिर एक बार उस लड़के की तरफ देखा।  उस लड़के ने अपनी कोटर में धंसी पीली सी आंखों से सुहास को देखा और अपना जबड़ा खोलकर कुछ बोलने की कोशिश करने लगा। वह लड़का इतना भयानक दिख रहा था कि सुहास ने डर कर अपनी आंखें बंद कर ली। बड़ी मुश्किल से कार का सहारा लिए वह खड़ा हुआ….और जैसे तैसे अपनी तरफ का दरवाजा खोलकर अंदर बैठ गया की तभी उसे वापस उस बूढ़े आदमी की आवाज़ सुनाई पड़ी….-” क्या हुआ उसकी मदद नहीं……?”
   एक बार फिर उसी बूढ़े की आवाज सुहास के कानों में पड़ी उसने चौक पर उसकी तरफ देखा यह वही बूढ़ा था जिसकी कुछ सेकेंड पहले सुहास को न तो परछाई नजर आई थी और न पैर।
   सुहास ने क्लच पर अपने पैर का दबाव बढ़ाया और गाड़ी आगे बढ़ा दी।
      एक झटके से धुआं उड़ाती गाड़ी फ्यूल स्टेशन से आगे बढ़कर मेन रोड पर आते हुए एक गड्ढे में धचका खा कर रोड पर पहुंच गई।
     मेन रोड पर पहुंचते ही रास्ते के दोनों और चमकती रंग बिरंगी रोशनियोँ को देखकर सुहास की जान में जान आई। उसे समझ में आ गया था कि उसे वापस भूत प्रेत नजर आ रहे थे।
 
     उसके लिए किसी भी तरह और अघोरिया बाबा तक पहुंचना बहुत जरूरी हो गया था। क्योंकि यही हाल रहा तो वह अगले दिन से अपना कोई काम सही समय पर नहीं कर पाएगा।
     और इस बार वह अपनी कमजोरी से कमजोर नहीं पड़ना चाहता था…..
     इस बार वो लड़ना चाहता था!!

*******

      दरवाजे के बाहर लगे बड़े से घंटे के बजने की आवाज आते ही कामिनी ने किताब बंद करके टेबल पर रखी ,और कुर्सी में से उठकर कमरे के दरवाजे तक चली आई ।
    दरवाजे को हल्के से खोलकर उसने नीचे झांकने की कोशिश की।  नीचे बाहर हॉल के सदर दरवाजे को जैसे ही जमना ताई ने खोला सामने इंस्पेक्टर शेखर खड़ा था।
     यह इस वक्त यहां क्यों चला आया। मन ही मन यह सोचती कामिनी को अगले ही पल लगा कि हो सकता है उसके पति के बारे में कोई खबर मिली हो.. और यही सोच वह तुरंत सीढ़ियां उतरती हुई इंस्पेक्टर शेखर तक पहुंच गई….-” क्या हुआ इंस्पेक्टर साहब?कुछ पता चला सर का?”
” जी उसी बारे में कुछ पूछताछ करने आया था मैं।”
” जी बैठीये ….. पूछिए क्या पूछना है आपको। “
” आपके पति फोन इस्तेमाल किया करते थे? है ना ?”
“हां!! जी दो नंबर थे उनके!”
” ओके…. तो आपने उनके दोनों नंबरों पर कॉल भी किया होगा?”
” जी किया था! और दोनों ही नंबर मुझे बंद आ रहे हैं!”
“हां उस दिन आप आई थी तो आपने पुलिस स्टेशन पर उनके नंबर हमें नोट करवाए थे!”
” जी !”
“हमने उनके दोनों नंबरों को ट्रैकिंग पर डाल दिया था! और ट्रेकिंग के रिजल्ट बड़े अजीब से आए हैं!”
” जी मतलब? कहना क्या चाहते हैं आप?
“उनका एक नंबर फिलहाल कोच्चि में बता रहा है…
…. और दूसरा नंबर औरंगाबाद में। “
“व्हाट? यह कैसे पॉसिबल है?”
” हम भी वही जानने की कोशिश कर रहें हैं। नंबर फिलहाल अभी बंद है! लेकिन इन दोनों जगहों पर हमने वहाँ की लोकल पुलिस से बात करके उन्हें यह नंबर ट्रेस करने और पता करने के लिए दिए हैं। जैसे ही इन नंबरों का एग्जैक्ट लोकेशन हमें मिलता है.. हम तुरंत आपसे इस बारे में बात करेंगे।”
” तो क्या वह इन दोनों में से किसी एक जगह पर हो सकते हैं?”
” बेशक हो सकते हैं। आप एक बार दिमाग पर जोर देने की कोशिश कीजिए! क्या उन्होंने ऐसा कुछ आपको बताया था कि वह निकट भविष्य में औरंगाबाद या फिर केरल जाने की कोई प्लानिंग कर रहे हैं?”
” नहीं! और वैसे भी वह क्लब से कहीं बिना बताए अचानक चले जाए ऐसा पॉसिबल नहीं है ।क्योंकि उनकी रेगुलर दवाइयां उनके कपड़े बिना किसी सामान के वह ऐसे कैसे जा सकते हैं।”
” पर आपने कहा था कि वह क्लब से अपने दूसरे घर जाया करते हैं… तो हो सकता है वहां से निकल गए हों।”
” नहीं वहां तो वह पहुंचे ही नहीं। मैंने पुलिस स्टेशन आने के पहले उस घर में भी फोन किया था…. वहां उनके बड़े बेटे की पत्नी से मेरी बातचीत होती है। और उसने मुझे बताया कि वह हर बुधवार की तरह उस बुधवार वहां नहीं पहुंचे।
” इसका मतलब है कि उस घर के सदस्यों को भी उनकी गुमशुदगी के बारे में मालूम है?”
” शायद नहीं…. क्योंकि मैंने रेशमी से मना किया था किसी से भी इस बारे में बात करने के लिए?”
” रेशमी…?”
” उनके बड़े बेटे की पत्नी। “
” ओके तो इसका मतलब रेशमी आपकी बात मानती है? उसने आपको अपनी सास माना हुआ है।”
” असल में मैं और रेशमी कॉलेज में एक ही साथ पढ़ते थे!  इसीलिए रेशमी से जान पहचान थी मेरी। और इसीलिए घर के बाकी सदस्यों से छिपकर वह मुझे वहां की खबर दे दिया करती थी। “
” आपके पति के बच्चे कितने हैं? मेरा मतलब है पहली वाइफ से?”
” दो लड़के हैं और एक बेटी है। बेटी की भी शादी हो चुकी है और बड़े वाले बेटे की भी। छोटे वाले बेटे की अब तक शादी नहीं हुई। “
” यह लोग रायसागर साहब का पुश्तैनी बिज़नेस देखते हैं …..है ना?
“हम्म ! “
“और आपके बच्चे कहां हैं इस वक्त?”
” मेरे बच्चे नहीं है?” शेखर के सवाल पर वो कुम्हला सी गयी…
“ओह्ह ! कोई स्पेसिफिक रीजन ? लेकिन जवाब पूरी तरह से आपकी इच्छा पर निर्भर करता है अगर आप बताना चाहें तभी बताइए।”
” जी ऐसी कोई बात नही। वो असल में सर नहीं चाहते थे कि हमारे बच्चे हो। एक्चुली मेरी शादी को 3 साल हो चुके हैं। हमारी शादी के समय उनकी उम्र यही कोई 57-58 के आसपास रही होगी, शायद यही कारण होगा कि उन्होंने मुझसे पहले ही कह दिया था कि मैं शादी के बाद बच्चों के बारे में नहीं सोचूंगा।”
” क्या आपको कमी नहीं महसूस होती कि आपका भी अपना एक बच्चा तो होना ही चाहिए।”
   शेखर ने बड़ी गहरी नजरों से कामिनी को घूरते हुए कहा।  कामिनी एक फीकी सी मुस्कान देकर रह गई। उसकी नजरें हॉल की उस दीवार की तरफ उठ गई। जहां पूरी दीवार भरकर लंबी चौड़ी सी अलमारी थी और उस पूरी अलमारी में लगभग सैकड़ों किताबें सजी हुई थी। उसने सूनी सूनी आंखों से उन किताबों को देखा और वापस शेखर को देखने लगी…-” मेरी लिखी कहानियां और मेरी नॉवेल्स ही मेरे लिए मेरे बच्चों के समान है।”
” यह सब किताबी बातें हैं लेकिन अपना एक जीता जागता….”

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   उसने शेखर की बात आधे में ही काट दी…-” नहीं ऐसा कुछ नहीं है मेरे साथ!”
” ओके फाइन! उस दिन एक जरूरी डॉक्यूमेंट पर आपका हस्ताक्षर चाहिए था, जो मैं लेना भूल गया था.. मैं वो कागज़ लेकर आया हूं आप प्लीज उस पर साइन कर दीजिए। “
  कामिनी की तरफ उसने एक पेपर और अपना पेन जेब से निकालकर आगे बढ़ा दिया। कामिनी ने पेपर तो हाथ में ले लिया लेकिन पेन के लिए वह अपनी जगह से उठ गई।
    धीरे से उसी बड़ी सी अलमारी के पास पहुंच गई, जिसमें पूरी दीवार भरकर शेल्फ बनी हुई थी और किताबें सजी हुई थी। उसी की एक दराज़ को खोलकर उसने उसमें से एक पेन निकाली पर फिर कुछ सोचकर उस पेन को वापस डाल दिया और वहीं खड़ी जमना ताई की तरफ घूम गई…-” जमना ताई मेरे कमरे से मेरी पेन ले आईये  प्लीज….
   मेरी स्टडी टेबल पर ही रखी मिलेगी आपको सफेद रंग की है गोल्डन कैप वाली। “
   जमुना ने धीरे से हां में सर हिलाया और सीढ़ियां चढ़ती ऊपर चली गई।
” कोई बात नहीं आप मेरी पेन यूज कर सकती हैं। आई डोंट माइंड। “
” बट आई डू। ” कामिनी का अजीब सा जवाब सुन शेखर चुप रह गया। उसने अपनी पेन जेब में वापस रख ली।
   जमुना के पेन लेकर आते ही कामिनी ने हाथ बढ़ा कर उसके हाथ से पेन लिया और उस पेन को बहुत प्यार से देखने लगी । सामने से कैप निकाल कर उसने पीछे लगाया और साइन करने को ही थी कि कैप पेन से निकल कर गिर गया।
     वो  घबरा कर इधर-उधर देखती कैप को ढूंढने लगी…-” जमना ताई जल्दी ढूंढो मेरी पेन का कैप का नहीं मिल रहा।”
     शेखर ने झुक कर अपने पैर के नीचे आ गए कैप को उठाकर कामिनी के सामने कर दिया…. कामिनी ने हल्के से मुस्कुरा कर वह  कैप पेन पर लगाया और साइन करके वह पेपर शेखर के हाथ में रख दिया…
” थैंक यू मैडम और कोई जरूरत पड़ी तो मैं फिर आऊंगा?”
“श्योर!”
     शेखर अपने बालों पर हाथ फिराता कुछ सोचता हुआ तेज कदमों से वहां से बाहर निकल गया।
   ” यह राइटर भी बड़े अजीब किस्म के होते हैं…. इनकी अपनी अलग ही दुनिया होती है और अपने अलग ही रंगों- मिज़ाज़ । भगवान बचाए इन राइटर्स से। “

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क्रमशः

aparna…..
     

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Kavita
Kavita
1 year ago

😂agar writer na hote to hum ye kahaniya kaise padte
Interesting part