The Bestseller -28

“कालचक्र”
. यह कहानी है एक लेखक की, एक अजीब सा सनकी और पागल लेखक जो अपनी पत्नी से बेहद प्यार करता था।
कहानी की शुरुआत उनके कॉलेज के दिनों से होती है.. कॉलेज में वह लड़का और लड़की एक साथ पढ़ते होते हैं। लड़का पढ़ने लिखने में अच्छा होता है और आर्ट्स का स्टूडेंट होता है । उसका हमेशा से सपना एक लेखक बनने का रहता है , वह कॉलेज की निकलने वाली सभी अखबारों और पत्रिकाओं में अपनी कहानियां- लेख छपावाता ही रहता है… और उसके लेख पढ़ पढ़ कर वह लड़की उसके प्यार में डूबती चली जाती है। पहले पहल तो लड़का उस पर उतना ध्यान नहीं देता , लेकिन लड़की के खूबसूरत चेहरे और खूबसूरत दिल से वह ज्यादा दिन तक भाग नहीं पाता और वह भी उस लड़की से प्यार करने लगता है। दोनों की शादी के बीच रुकावट आ जाती है, क्योंकि लड़की एक बहुत अमीर घर की लड़की होती है।
और उसके पिता उसकी शादी अपनी बराबरी में करना चाहते हैं । लड़के से मिलने के बाद लड़की के पिता को वह अपनी इकलौती बेटी के लायक नहीं लगता। और वह उसके सामने यह शर्त रखते हैं कि वह चाहे तो उनका फैमिली बिजनेस जॉइन कर ले। लेकिन लड़का इस बात को सिरे से नकार देता है। वह कहता है कि वह सिर्फ और सिर्फ लेखक बनना चाहता है और इसी में उसे खुशी मिलती है।
लड़की का पिता उन दोनों को समझाने की कोशिश करता है, कि सिर्फ प्यार से रोटी नहीं खरीदी जा सकती। लेकिन प्यार में पागल वह दोनों अपने पिता की बात को मानने से इंकार कर देते हैं।
अब उस लड़की सुनयना पर ढेर सारी बंदिशे लगा दी जाती हैं। पहरे बैठा दिया जाते हैं, कि जिससे वह उस पागल लड़के से मिलना बंद कर दे।
अब जब लड़की पर पाबंदियां बढ़ जाती हैं और वह कॉलेज जाना बंद कर देती है, तब असल में लड़के नयन को यह महसूस होता है, कि वह वाकई उस लड़की से टूट कर मुहब्बत करता है। और वह उसके बिना नहीं जी सकता… ये उस लड़के को समझ में आ जाता है।
अब तक वो लड़का यही सोचा करता था, कि लड़की के बार-बार गुजारिश करने के कारण ही उसके मन में लड़की के प्रति प्रेम जागा था, लेकिन उसका सोचना गलत साबित होता है। सुनयना के बिना अपना जीवन उसे बिल्कुल ही व्यर्थ लगने लगता है।
ना उसे भूख लगती है और ना नींद आती है। यहां तक कि अब उसका कुछ भी लिखने का भी मन नहीं करता।
और उसे समझ में आ जाता है कि उसके मन में उसके ह्रदय में उस लड़की सुनयना ने कितनी गहरी जगह बना ली है।
इसके बाद कहानी एक नया मोड़ लेती है। और नयन और सुनयना अपना आशियाना बसाने उस शहर से काफी दूर चले जाते हैं।
एक नई जगह वो लोग अपना रैन बसेरा बसाते हैं। शुरू में दोनों के पास ही घर से भागते समय रखे हुए पैसे मौजूद होते हैं, जिन से कुछ समय तक तो दोनों का गुजारा चल जाता है। उसके बाद घर चलाने के लिए नयन को छोटी-मोटी नौकरी का सहारा लेना पड़ता है।
वह उसी शहर के एक लोकल प्रिंटिंग प्रेस में प्रिंटिंग का काम पकड़ लेता है। अब रात रात भर प्रिंटिंग के काम में व्यस्त रहने के बावजूद सुबह के समय पर वह अपने शौक को पूरा करते हुए कहानियां लिखना शुरु कर देता है । उसका सपना होता है कि वह एक बहुत प्रसिद्ध लेखक बने और इसके लिए वह एक नावेल लिखना शुरू करता है।
शादी के शुरुआती दिन तो हवा में उड़ते हुए निकल जाते हैं। लेकिन धीरे-धीरे जैसे जैसे समय बीतता जाता है सुनयना को वह जिंदगी बेकार लगने लगती है।
अब धीरे-धीरे उसे जिंदगी की जमीन से जुड़ी पथरीली हकीकत समझ में आने लगती है। उसे महसूस होने लगता है, कि प्यार के साथ ही पैसों की भी बेहद जरूरत होती है। अब वह बात बात पर अपना गुस्सा नयन पर निकालना शुरू कर देती है।
बचपन से ही सुख सुविधाओं की आदी रही सुनयना को यह अभावों भरी जिंदगी रास नहीं आती। कभी उसके घर पर चीनी खत्म हो जाती है, तो कभी चाय पत्ती कभी सब्जियों में डालने के लिए आलू नदारद होते हैं, तो कभी चावलों का खाली कनस्तर उसे मुंह चिढ़ा रहा होता है।
पहले तो वह हर तीसरे चौथे दिन सिर्फ अपना मूड बदलने के लिए शॉपिंग पर निकल जाया करती थी। लेकिन अब उसे उन्हीं गिने-चुने कपड़ों में बाहर भी जाना होता है और घर में भी रहना होता है ।
बाहर जाने और लोगों से मिलने से होने वाली शर्मिंदगी से बचने के लिए अब वह घर से निकलना ही बंद कर देती है। लेकिन इसी सब में उसकी चिड़चिड़ाहट और उसका गुस्सा बढ़ता जाता है।
धीरे-धीरे उनकी जिंदगी एक अलग करवट ले लेती है। जहां पहले सोने से दिन और चांदी सी रातें बीता करती थी।
अब व्यंग लांछन आरोप-प्रत्यारोपों में ही कब दिन ढल जाता है और कब रात बीत जाती है, दोनों को मालूम ही नहीं चलता।
इस बीच नयन काफी कोशिश करता है , कि वह किसी तरह अपने लिखने पर फोकस कर सके और एक अच्छा नॉवेल लिख सकें । लेकिन अब सुनयना उसकी लिखने की ही आदत से और भी ज्यादा चिढ़ने लगती है । उसे लगता है अगर नयन लिखने में फोकस नहीं करता तो कोई ढंग का काम कर सकता था, और घर में चार पैसे आ सकते थे।
ढंग से कमाने और घर चलाने की जगह नयन बस बैठकर पन्नों को काला करता अपना और उसका भी समय बर्बाद किया करता है। यही सोचकर सुनयना और भी ज्यादा कुढ़ने लगती है । इस का नतीजा यह होता है कि जब भी नयन अपनी कहानी को लिखने बैठता है उसी समय सुनयना कोई ना कोई तिकतिक लगा देती है।
अब ये रोज़की बात हो जाती है। नयन अपने आप को ठंडा रखने की बहुत कोशिश करता है ।वह जब भी सुनयना कोई चिकचिक शुरू करती हैं, उठकर बाहर चला जाता है। लेकिन सुनयना उसके पीछे पीछे जाकर उसे बातें सुनाती रहती है।
इस सब के बावजूद नयन किसी तरह अपने नॉवेल पर काम करता रहता है। उसकी नॉवेल का लगभग आखिरी हिस्सा लिखना बाकी बचा रहता है, की एक सुबह नयन अपने प्रिंटिंग प्रेस का काम निपटा कर जल्दी घर वापस आ जाता है। अपने लिए चाय बना कर वह नॉवेल के आखिरी हिस्से पर काम करना शुरू कर देता है कि उसी वक्त सुनयना की नींद खुल जाती है। वह बाहर आती है,और नयन को लिखते देखती है और उसका पारा सातवें आसमान पर चढ़ जाता है। वह उसे खरी खोटी सुनाना शुरू कर देती है। सुनयना के उसके सुनाते रहने के बावजूद नयन चुपचाप बैठा लिखता रहता है, लिखता रहता है। लेकिन सुनैना भी पीछे नहीं हटती, वह उसके कान के पास खड़े होकर चिल्ला चिल्ला पर उसे सारे संसार के सुखों और अपने दुखों का वर्णन करने लगती है। वह बार-बार कहने लगती है, कि तुम्हारी इन्ही कहानियों के कारण हम सुखी नहीं हैं। तुम अगर लिखना छोड़ दो, और कमाने लगो तो हम भी एक अच्छी जिंदगी जी सकते हैं। बहुत देर तक उसकी बातें सुनते रहने के बाद नयन अपना आपा खो बैठता है। और वही रखा क्रिस्टल वास उठाकर वह सुनयना के सिर पर दे मारता है।
वैसे तो वास की चोट लगने से कोई मरता नहीं है। लेकिन क्रिस्टल वास उसकी गर्दन की कैरोटिड वेन पर जाकर चुभ जाता है। कैरोटीड वेन फट जाने से वहां से इतना तीव्र रक्त स्त्राव होता है कि सुनयना की वहीं मौत हो जाती है।
सुनयना के मरते ही उसकी आवाज आनी बंद हो जाती है। नयन एक बार उसकी लाश की तरफ देखता है, और वापस अपनी कहानी के उस हिस्से पर काम करना शुरू कर देता है। लगभग डेढ़ दो घंटे लिखने के बाद उसकी कहानी पूरी हो जाती है। उसके चेहरे पर आत्म संतुष्टि की एक मुस्कान खेल जाती है और आखिर वह सनकी लेखक अपनी नॉवेल पूरी कर लेता है। उस नॉवेल को पूरा करने के बाद वह डायरी को बंद करता है और उसे अपने माथे से लगाकर वापस टेबल पर रख देता है। अब वह पलट कर देखता है तो जमीन पर खामोश पड़ी सुनयना पर उसकी नजर पड़ती है। उसे एकदम से महसूस होता है कि यह कुछ समय पहले तक उसकी अपनी पत्नी थी । वह नीचे उसके पैरों के पास बैठ कर उससे माफी मांगने लगता है। रो कर गिड़गिड़ा कर वह सुनयना से खूब देर तक माफी मांगता है उसे प्यार से अपनी बाहों में भर लेता है ।और उससे कहता है कि सुनयना अगर हमारे प्यार को जिंदा रखना था, तो तुम्हारा मरना जरूरी था । वरना तुम मेरे दिमाग को दीमक की तरह खाती जा रही थी। अब तुम्हारे जाने के बाद मैं तुम्हारी और मेरी मुहब्बत को हमेशा जिंदा रख लूंगा अपने किरदारों में और अपनी कहानियों में।
वह दवा रुई और पट्टियां लाकर जहां पर सुनयना को चोट लगी होती है ,उसे साफ करके पट्टियां बांध देता है। उसके बाद सुनयना की लाश को एक तरफ करके उस पूरे फर्श पर पोछा मार कर उस फर्श को भी साफ कर देता है। वह वक्त देखता है , उस वक्त दोपहर होने को काफी समय बाकी रहता है। वह समय की गणना करता है और सोचता है कि सुनयना को मरे हुए लगभग 2 से 3 घंटे बीत चुके हैं ।अब उसे उसके शरीर को ठिकाने लगाना होगा ।वह जानता है कि उसने सुनयना का कत्ल किया है, और अगर वह सभी लोगों को जाकर बताता है तो वह इस कत्ल के इल्जाम में फंस जाएगा और अगर वह एक बार जेल के अंदर चला गया तो उसके अंदर का लेखक तड़पता रह जाएगा और वह कहानियां नहीं लिख पाएगा।
वह सुनयना के कपड़े बदल देता है। अपने भी कपड़े बदलकर वह एक मोटा शॉल और कंबल लेता है। इसके बाद सुनयना को अपने कंधों पर लादकर उसके ऊपर से शॉल लपेटकर वह घर से बाहर निकल जाता है।
जैसा कि मैंने पहले ही बताया यह पुराने जमाने की कहानी है , जिस समय पर गाड़ियां बहुत ज्यादा नहीं चला करती थी। दूसरी बात वह इतना गरीब था कि उसके पास अपनी कोई गाड़ी नहीं थी। इसीलिए वह सुनयना की लाश को अपने ही कंधों पर लादकर घर से निकल जाता है।
वह सोचता है कि जो भी पहला पोखरा आएगा वहां वह सुनयना की लाश को बहा देगा। यही सोचकर वह अपने गांव से निकलकर पैदल आगे बढ़ता जाता है।
गांव में मिलने जुलने वाले लोग उससे पूछते भी हैं। कि ऊसने अपनी पीठ पर क्या सामान लाद रखा है? और वह कोई ना कोई बहाना बनाकर आगे निकल जाता है।
असल में उसने सुनयना की लाश को एक बोरी में डाल दिया था और उस बोरी से बाहर सुनयना का चेहरा और उसके दोनों हाथ ही बस निकले हुए थे । वो दोनों हाथ नयन की गर्दन के दोनों तरफ से आकर सामने बंधे होते हैं…. नयन ने इस सब के ऊपर से एक कंबल ढक रखा था जिसके कारण सुनयना का चेहरा या हाथ किसी को नजर नहीं आ रहे थे, लोगों को बस ये लग रहा था कि, नयन ने अपने कंधों पर कोई भारी सामान लाद रखा है।
चलते चलते उसे एक पोखरा नजर आता है, लेकिन वहां पर काफी सारे मवेशी पानी पीते रहते हैं। नयन को लगता है कि अगर मैं एक लाश को इस पोखरे में बहा दूंगा तो इन मवेशियों को गंदा पानी पीने मिलेगा। यही सोच कर वहां से आगे बढ़ जाता है, वह सोचता है आगे जो भी कुआं तालाब या नदी बावड़ी आएगी वहां इस लाश को ठिकाने लगा देगा। बहुत दूर चलने के बाद उसे एक बावड़ी नजर तो आती है, लेकिन वहां पर काफी सारे बच्चे आसपास खेलते रहते हैं। महिलाएं उस बावड़ी से पानी भरती रहती हैं, कुछ महिलाएं वही पर उसी बावड़ी के पानी को अपने बच्चों को पानी पिलाती रहती हैं। यह सब देखकर नयन तय कर लेता है कि यह बावड़ी भी उपयुक्त नहीं है। क्योंकि अगर वह यहां लाश डालेगा, तो इस बावड़ी का पानी प्रदूषित हो जाएगा और फिर उसे पीने से यह बच्चे बीमार हो सकते हैं इस तरह वह सनकी लेखक एक बार फिर अपनी पत्नी की लाश को कंधों पर टिकाए आगे बढ़ जाता है ।
चलते चलते काल चक्र अपना पहिया अपनी गति से घूमाता जाता है। वक्त बीतता जाता है, सूरज जिस ढंग से ऊपर चढ़ा था उसी ढंग से डूबने लगता है ध्रुवीय समीकरण बदलने लगते हैं । लाश को कंधों पर टिकाए लगभग 8 से 9 घंटे बीत चुके होते हैं, अब वो लेखक समंदर किनारे पहुंच चुका होता है।
नयन समंदर की आती लहरों को देखकर खुश हो जाता है। वह मन ही मन उस समंदर से प्रार्थना करता है कि मैं जो भी आपको चढ़ाने आया हूं इसे स्वीकार कर लेना। वह धीमे-धीमे कदमों से समंदर की तरफ बढ़ने लगता है। अलसुबह घर से निकला नयन अब शाम ढलने पर उस जगह को तलाश पाया था जहां उसे अपनी पत्नी से मुक्ति मिलने वाली थी।
अपने चेहरे पर एक मुस्कान लिए नयन धीमे-धीमे कदमों से समंदर में उतरने लगता है। उसे लगता है आज के बाद उसे टोकने वाला कोई नहीं होगा। आज के बाद उसके और उसकी कहानियों के बीच कोई नहीं आएगा। वह अपने किरदारों के साथ मस्त मगन होकर ढेर सारा समय बिता पाएगा। अब उसके पीछे कोई नहीं होगा जो बार-बार उसके लिखने में विघ्न डालें।
अब कोई नहीं होगा जो उसे उठाकर किसी ना किसी सामान के लिए बार-बार बाजार की तरफ भेजा करेगा।
सबसे बड़ी बात उसके और उसकी किरदारों के बीच बोलने वाला अब कोई नहीं होगा। वह खुलकर अपने किरदारों से अपनी मन की बात बोल भी सकेगा और उनसे बुलवा भी सकेगा। अब वह पूरी तरह डूब कर अपनी कहानियों को लिख सकेगा…
यही सब सोचते सोचते वो समंदर में भीतर घुसते हुए एक जगह पर पानी में डूब कर बैठ गया। बैठने के बाद उसने अपने एक हाथ से अपने ऊपर ओढ़ रखा कंबल उठाकर निकाल दिया।
अपने दूसरे हाथ से उसने अपनी पत्नी के दोनों हाथों को एक के ऊपर एक रखकर पकड़ रखा था ।
अपने दोनों हाथों से उसने अपनी पत्नी के हाथों को अपनी गर्दन से निकाल कर उसके शरीर को समंदर के पानी में बहा देने के पहले वह उस समंदर की रेत में पानी के भीतर ही बैठ गया। बैठने के बाद उसने अपने दोनों हाथों से अपनी पत्नी के दोनों हाथों को खोलने की कोशिश शुरू की, लेकिन यह क्या? उसकी पत्नी का हाथ तो उसकी गर्दन पर बुरी तरह से कसा हुआ था।
एक पल को नयन बौखला गया। लेकिन फिर उसने खुद को संभालते हुए सुनयना की कसी हुई मुट्ठियों को खोलना शुरू किया। लेकिन वह असफल रहा। धीरे-धीरे उसने अपने दोनों हाथों से सुनयना के दोनों हाथों को जोर से पकड़ कर खींचना शुरू कर दिया। लेकिन जितना ही वह खींचता चला जाता उतना ही सुनयना की पकड़ उसकी गर्दन के चारों ओर मजबूत होती चली जा रही थी ।
उसे अब समझ में आ रहा था, कि क्यों जब वह सुबह उस शरीर को अपने ऊपर लादे निकला था उससे शाम ढलते ढलते उस शरीर के वजन में बढ़ोतरी कैसे हो गई थी? शायद यह शरीर के मर जाने के बाद शरीर में जो कठिनता उत्पन्न हो जाती है, उसका नतीजा था। वह चलने में इतना मगन था कि इस बात पर उसका ध्यान ही नहीं गया था, कि सुबह सतर कंधे लिए चलने वाला नयन शाम होते तक किसी बूढ़े की तरह झुक चुका था। और अब समंदर की रेत पर बैठा हुआ वह अपने ऊपर लगे उस शरीर को बार-बार अपने से हटाने की कोशिश में लगा हुआ था।
लेकिन कालचक्र की कैसी महिमा थी कि उसकी जीवनसंगिनी का शरीर उससे अलग ही नहीं हो पा रहा था। उल्टा मृत्यु जन्य काठिन्य ( राइगर मॉरटिस) के कारण उसकी बांहें धीरे धीरे नयन के गर्दन के चारों ओर और कसती चली जा रही थी।
अपने पाप पुण्य का लेखा जोखा छोड़कर लोगों से होने वाले भय को भूलकर नयन जोर जोर से लोगों को आवाज देकर चिल्लाने लगा, कि कोई मेरी मदद कर दो। मुझे इससे मुक्ति दिला दो । मेरी पत्नी से मुक्ति दिला दो ….. लेकिन वहाँ दूर दूर तक उसकी आवाज़ सुनने के लिए कोई नहीं था।
रात बीतने लगी थी, और समंदर में चढ़ने वाले ज्वार भाटा के कारण आसपास दूर-दूर तक कहीं कोई एक पंछी भी नजर नहीं आ रहा था। मछुआरे सारे शाम का अपना काम पूरा करके अपने घर जा चुके थे। उस समंदर में बढ़ते पानी के साथ सिर्फ नयन की चीखें गूंज रही थी और ….
……कालचक्र उन पवित्र अग्नि के फेरों के बीच एक दूसरे का साथ किसी हाल में नही छोड़ने के वचन को पूरा करता नजर आ रहा था…..
क्रमशः
aparna….
