Bestseller-2

The  Bestseller – 2

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         तंत्र- मंत्र

       नन्दिनी तेज़ तेज़ कदमों से जिया का हाथ थामे चली जा रही थी। उसकी पॉटरी क्लास के पास ही जिया की टेनिस क्लासेस हुआ करती थीं। वैसे तो रोज़ जिया की माँ ही उसे उसकी क्लास से लाया ले जाया करती थी,लेकिन आजकल कभी जब जिया की माँ को कोई काम हो तो वो नंदिनी को ही उसे लाने की ज़िम्मेदारी दे दिया करती थी।
      बादल ऐसे घुमड़ रहे थे कि कभी भी बरस सकते थे और बस इसलिए नन्दिनी की चाल तेज़ पर तेज़ होती जा रही थी।
     आखिर भागते गिरते पड़ते वह जिया को लिए सोसाइटी के अंदर दाखिल हुई की बड़ी-बड़ी बूंदे बरसने लगी और जिया जोर-जोर से  खिलखिलाने लगी। उसे हंसते देख नंदिनी के चेहरे पर भी हंसी खेल गई वह उसे लिए लिफ्ट में दाखिल हो गई।
        नौवें माले पर ही नंदिनी का घर भी था। वह जिया को लेकर उसकी फ्लैट के सामने खड़ी बेल बजाने ही वाली थी कि जिया की मां ने दरवाजा खोल दिया…-” आ जा नंदिनी। तू भी आ जा चाय पी के जाना। “
   बाहर की सर्द हवाओं को झेल कर आई नंदिनी का भी मन गरमा गरम अदरक वाली चाय पीने का हो रहा था वह मुस्कुराती हुई अंदर दाखिल हो गई।
      सुरेखा ने जिया को प्यार से गोद में लिया और उसके कपड़े बदलने अंदर कमरे में चली गई।
  और नंदिनी हॉल में बैठी इधर-उधर हॉल की सजावट को देखने लगी , वो जिस सोफे पर बैठी थी वहीं पास में रखी टेबल पर एक तस्वीर सजी थी सिया और जिया की।
  उसने वह तस्वीर उठाकर हाथ में ले ली। दोनों बहनों का चेहरा कितना ज्यादा मिला करता था आखिर जुड़वा भी तो थी। अगर आज सिया भी मौजूद होती तो लगभग 8 बरस की होती।
   नंदिनी को इस फ्लैट में आए लगभग छह-सात महीने ही हुए थे। पढ़ाई तो उसने सारी अपने घर पर रहकर अपने शहर से ही पूरी की थी लेकिन नौकरी ने उसे अपने घर से इतने दूर ला पटका था।
    जिस दिन वो पहली बार अपने इस फ्लैट में शिफ्ट होने आई थी तब दरवाजा खोलते समय यही बच्ची जिया उसके पास चली गई थी और उस वक्त सुरेखा ने डपट कर जिया को बुलाकर अंदर बंद कर लिया था। शुरू शुरू में उसे सुरेखा का व्यवहार बड़ा अजीब लगा था। ना जिया को कहीं जाने देती ना खुद बाहर निकलती। सारा वक्त घर पर ही बंद रहती थी। फिर एक बार सुरेखा को ही उससे काम पड़ गया था। अचानक से घर पर गैस सिलेंडर खत्म होने पर उसने पहली बार नंदिनी के घर पर दस्तक दी थी।  और नंदिनी ने खुशी-खुशी अपना भरा हुआ सिलेंडर उसके हवाले कर दिया था बस यही से सुरेखा और नंदिनी की दोस्ती की छोटी सी शुरुआत हुई थी और तब नंदिनी को सुरेखा के इस अजीबोगरीब व्यवहार का कारण समझ में आया था।
     लगभग डेढ़ साल पहले उसकी जुड़वा बेटियों में से एक सिया अचानक घर से गायब हो गई थी।  उन लोगों ने बहुत पतासाजी की , हर जगह तलाशा पुलिस में रिपोर्ट की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
   उस समय पुलिस लगभग महीने भर तक उनके घर और आसपास की सोसाइटी पर आकर खोजबीन करती रही लेकिन कहीं कुछ नहीं मिला यहां तक कि एक आखिरी उम्मीद सोच कर सबने छत पर लगे पानी के सारे टैंक्स भी खोल खोल कर तलाशी ले ली, लेकिन कुछ भी हाथ नहीं आया।

” ये लो गरमा गरम चाय !” सुरेखा के हाथ से नंदिनी ने चाय ले ली।
” थैंक यू!! इसकी बहुत जरूरत थी। ” सुरेखा अपनी चाय लिए बालकनी के ग्लासडोर पर खड़ी बाहर की रोशनी देख रही थी, नंदिनी भी उसके पास चली आयी।
   
     उसने अपना एक हाथ सुरेखा के कंधों पर रख दिया। सुरेखा ने तुरंत अपनी डबडबाई आंखें पोंछ लीं।
   उसी वक्त दरवाज़े पर किसी ने दस्तक दी… और धीरे से दरवाज़ा खोल कर सुरेखा का पति अनिल भीतर आ गया….
” ओह्ह हेलो नंदिनी ! कैसी हो?”
” मैं ठीक हूँ अनिल, आप कैसे हैं? और ये क्या था? मतलब अगर घर की दूसरी चाबी है आपके पास फिर दरवाज़े पर दस्तक क्यों दी?”
  उसकी बात पर अनिल हल्का सा मुस्कुरा कर अपना लैपटॉप बैग वहीं रखे एक बुकशेल्फ पर रख उन लोगों तक चला आया।
उसके आते ही सुरेखा रसोई में चली गयी।
   उसे ऐसे जाते देख अनिल नंदिनी के सामने ज़रा शर्मिंदा सा हुआ और अपनी बात कहने लगा…-” वो असल में जब से सिया गायब हुई है सुरेखा का बर्ताव ज़रा बदल गया है। वो बात बात पर घबरा जाती है। मैं अगर बिना दस्तक दिए अचानक भीतर आ जाऊँ तो चौन्क जाती है! छोटी छोटी सी बात पर उसका बीपी बढ़ने लगता है। इसलिए इन छोटी बातों का आजकल ध्यान रखने लगा हूँ।”

” आजकल?”   कह कर नंदिनी हल्का सा मुस्कुरा कर बाहर देखने लगी। ये पति ऐसे ही तो होतें हैं जब तक पत्नी पर कोई कहर नही टूटेगा तब तक उसका ख्याल रखने का ख्याल इन्हें कभी क्यों नही आता?
   थोड़ी देर में सुरेखा चाय ले आयी और अनिल के हाथ बढ़ाने पर भी सामने रखी टेबल पर कप रखा और अपना और नंदिनी का कप लिए अंदर चली गयी। नंदिनी को इतने दिनों में यह तो समझ आ गया था कि इन दोनों पति-पत्नी के बीच सबकुछ उतना सामान्य है नहीं, जितना बाहर से यह लोग दिखाने की कोशिश करते हैं।
   सुरेखा के इस व्यवहार से अनिल उसके सामने अपदस्थ ना हो जाए इसलिए उसने बात बदलते हुए वही रखी बुक्शेल्फ से एक किताब निकाल ली…

” काली किताब ‘ हम्म नाइस नेम! ये कौन पढ़ता है? “

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   उस किताब को हाथ में लिए नंदिनी उसके पन्ने पलटने लगी…

” तंत्र मंत्र रहस्य वशीकरण मारण मोहन उच्चाटन…”
   वह अभी किताब का पहला पन्ना पढ़ ही रही थी कि उसके हाथ से अनिल ने वो किताब छीनने हाथ बढ़ाया लेकिन नंदिनी ने किताब छोड़ने की कोई इच्छा नही दिखाई……

” यह मेरे एक दोस्त की किताब है, गलती से यहां छूट गई । उसे वापस करना भूल जाता हूं।”

“हम्म ” छोटा सा जवाब देकर नंदिनी अभी किताब के और पन्ने पलट रही थी कि अनिल ने किताब वापस लेने के लिए हाथ बढ़ा दिया।  नंदिनी का उस किताब को वापस देने का बिल्कुल मन नहीं था…..-” अनिल अगर आप इजाजत दें तो क्या मैं इस किताब को घर ले जा सकती हूं?”

” तुम क्या करोगी इस किताब का?”

” कुछ खास नहीं बस…. इट साउंड्स इंटरेस्टिंग, ऐसे ही पढ़ना चाहती हूं । मुझे इन सब पर विश्वास नहीं है।”

अनिल के चेहरे से बिल्कुल ऐसा लगा जैसे उसे वह किताब नंदिनी को देने का बिल्कुल मन नहीं है।  उसी समय सुरेखा भी अंदर से बाहर चली आई….
” काफी देर हो गई है, अब तुम भी हमारे साथ ही खाना खा लो!”
सुरेखा की इस बात पर नंदिनी का ध्यान गया कि वाकई देर हो गई थी….” नहीं आप लोग खाइए… मैं चलती हूं! मेरा सुबह से ही खाना बना रखा है! यू नो ऑफिस के चक्कर में एक बार में ही बना लेती हूँ। और 2 बार खा लेती हूँ।”

” मत खाया करो सुबह का खाना शाम को।   पर्युषित हो जाता है। और वह खाना जहर बन जाता है। और जब हम जहर खाते हैं तो हमारे शरीर की काली शक्तियां जागने लगती हैं…”
   
” नो नो इट्स ओके!!! सुरेखा थोड़ा ज्यादा ही  साफ सफाई और खाने को लेकर सेंसिटिव है! बच्चों के कारण वह हर वक्त  ताजा खाना बनाने और खाने के लिए सभी को प्रेरित करती है सो….

नंदिनी को ऐसा लगा जैसे उस वक्त सुरेखा किसी और ही लय में अपनी बात कहती चली जाती अगर अनिल ने उसे बढ़कर रोका नहीं होता। नंदिनी उस किताब को हाथ में लिए वहां से बाहर निकल गई….

“थैंक्स !  पढ़ कर जल्दी ही वापस कर दूँगी।”

  अपने हाथ में थमी किताब को ज़रा ऊंचा उठा कर दिखाते हुए नंदिनी अपने फ्लैट में दाखिल हो गयी…

*****

     पुलिस स्टेशन में सुबह के छैह बजे शेखर रात की पेट्रोलिंग कर के वापस आया और अपने लिए चाय बोल कर अपने ड्यूटी रूम के वाशरूम में फ्रेश होने चला गया…

   वापस आ कर वो बैठा की उसके सामने चाय के साथ गरमा गरम पोहा भी मौजूद था…-“क्या बात है मुरारी आज पोहा कहाँ से आ गया?”

” सर गिरधारी !”
” हाँ भई गिरधारी!! वाह है भी बड़ा स्वाद! तुम्हारे हाथ में बड़ा स्वाद है गिरधा…”

उसकी बात आधे में ही काट गिरधारी ने एक तरफ इशारा कर दिया…
   कोने में एक तरफ हाथ बांधे नंदिनी खड़ी थी!

” अरे नंदू तुम! यहाँ कैसे? और वो भी इतनी सुबह सुबह? और सच कहूं! तुम्हारी कसम ,  मैं खा कर ही समझ गया था कि इतना टेस्टी पोहा तुम ही बना सकती हो! ये तुम्हारे हाथों का ही जादू….”
” ऑफिस से घर लौट रही थी तो सोचा तुमसे मिलती चलूँ। मेरा तो वैसे भी रातों को जागने का काम है। और इंस्पेक्टर साहब मैं अखबारों में कलम घिसने का काम करती हूं। वहाँ ऑफिस में पोहा नही बनाती। ये मैं ” भैयाजी कचौरी वाले” के सामने से निकल रही थी तो पैक करवा लिया। अच्छा सुनो फटाफट खाओ मुझे कुछ ज़रूरी बात करनी है तुमसे।”
” हम्म ! ” और शेखर ने फटाफट एक दो चमच खाया ही था कि थाने का फ़ोन बजने लगा…
  फ़ोन उठा कर बात करने के बाद कॉन्स्टेबल भागा भागा सा अंदर आया…-” साहब इंद्रपुरी में हादसा हो गया है!”
” अब क्या हुआ?” खाते खाते शेखर रुक गया…
” एक ही घर के सात लोगों की लाश बरामद हुई है। सारे लोग छत से लगी लोहे कि बल्लियों पर से चुन्नियों से लटके मिले हैं।”
” क्या” शेखर चौन्क कर अपनी जगह खड़ा हो गया…-“गाड़ी निकालो!” अपना फ़ोन उठा कर एक तरह से भागता हुआ सा शेखर इंद्रपुरी की ओर निकल गया।
    उसे जाते देखती नंदिनी भी उलझन में अपनी जगह खड़ी रह गयी। एक साथ लगभग पूरा ही थाना शेखर के साथ कूच कर गया था। पीछे से दो लोग बचे थे। उन्हें देख कर नंदिनी ने वहीं रखा शेखर के चाय का कप उठाया और बैठ कर पीने लगी। वहां मौजूद स्टाफ में एक लेडी कॉन्स्टेबल भी थी। वह भी नंदिनी के पास चली आई….
” आजकल बड़े अजीबोगरीब केस आ रहे हैं मैडम। साहब भी बहुत परेशान है।”
” अच्छा!” नंदिनी के छोटे से जवाब को सुनकर वह नंदिनी को और भी बातें बताने के लिए उत्सुक हो गई।
” हां अभी 2 दिन पहले वह राइटर मैडम है ना वह आई थी अपने पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने। “
” कौन राइटर मैडम?”


” वही कामिनी मैडम। कामिनी रायसागर!”
” ऋषिकेश रायसागर की पत्नी? “
” हां जी मैम वही। वो आई थी।”
” क्या बात कर रही हो उसके पति गुमशुदा है।  आई मीन ऋषिकेश रायसागर….द ऋषिकेश रायसागर गायब है?”

  ऋषिकेश रायसागर कोई ऐसी वैसी हस्ती नहीं थी। वह बहुत जाने-माने साहित्यकार थे, और उस शहर में उनका काफी नाम था। और इस लिहाज से यह एक हाई प्रोफाइल केस था । लेकिन कामिनी के जोर देने के कारण शेखर ने इसके बारे में उस थाने से बाहर किसी को भी चर्चा करने की अनुमति नहीं दी थी। और इसीलिए पत्रकारों की जद से अब तक यह केस दूर था। नंदिनी खुद भी पत्रकार थी और शेखर की गर्लफ्रेंड भी।
       उसके लिए यह आज की मिलियन डॉलर न्यूज़ थी। उसकी आंखों में एक नई चमक आ गई। और वह अपनी जगह से उचक कर खड़ी हो गई। उसे अभी के अभी अपने एडिटोरियल में जाकर यह न्यूज़ देनी थी कि ऋषिकेश रायसागर दो दिन से अपने घर से गायब था।
    पिछले कुछ दिनों से वह अपने बोरिंग रूटीन से बहुत ज्यादा बोर हो गई थी । और उसे कुछ ना कुछ मसालेदार चाहिए था, जो आज और अभी उसे मिल चुका था वह फौरन उठी टेबल में रखा अपना हैंड बैग उठाया और तेज कदमों से बाहर निकल गई……

    बाहर खड़ी अपनी कार में अपना हैंडबैग डालकर उसने उसे वापस अपने ऑफिस की तरफ मोड़ लिया। जितनी तेजी से वह अपनी गाड़ी ऑफिस की तरफ भगा रही थी उतनी ही तेजी से उसका दिल भी धड़क रहा था। उसके पास इस वक्त शहर की सबसे बड़ी खबर मौजूद थी। और उसका ध्यान पूरी तरह बस इसी बात पर केंद्रित था उससे पहले किसी और न्यूज़पेपर के कॉलम में यह खबर ना आ जाए कि ऋषिकेश राय सागर गायब है।
     वह खुद पत्रकार थी और इसलिए लिखना पढ़ना उसके पेशे में शुमार था। उसे खुद भी लिखने पढ़ने का बहुत शौक था । लेकिन वह कभी कामिनी की कोई नॉवेल्स नहीं पढ़ा करती थी। पता नहीं क्यों उसके दिमाग में यह भरा हुआ था कि कामिनी को ये सफलता उसके पति के नाम के कारण मिली है। और बस इसीलिए उसने आज तक कामिनी कि कोई नॉवेल नहीं पढ़ी थी।
     काश उसने पढ़ी होती!!!

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      लेकिन आज जाने क्यों उसके मन में बार-बार यह विचार फुदक रहा था कि एक बार इस न्यू एज राइटर से मिलना ही चाहिए।

     उसने तेजी से गाड़ी घुमाई और अपने ऑफिस के पार्किंग लॉट की तरफ बढ़ चली। उसे लगा कि इतनी बड़ी खबर उसे संपादक महोदय को आराम से मिलकर बैठकर बतानी चाहिए और इसीलिए गाड़ी को उसने विजिटर्स पार्किंग की जगह मेन पार्किंग की तरफ यानी बेसमेंट में मोड़ लिया।

   गाड़ी पार्क कर उतरी और तेज कदमों से गाड़ी लॉक कर आगे बढ़ने लगी।  लेकिन उसी वक्त गाड़ी का सायरन बजने लगा। उसे एकाएक समझ नहीं आया कि ऐसा क्या हो गया कि उसकी गाड़ी सायरन देने लगी। वह वापस लौट कर गाड़ी तंक आयीं और गाड़ी के चारों दरवाजों को उसने चेक किया लेकिन सभी सही तरीके से लॉक थे। उसकी पार्किंग लाइट भी ऑफ थी।
   फिर उसकी सायरन बीप क्यों बज रही थी। वह तुरंत पीछे की तरफ गई और उसका ध्यान गया उसकी गाड़ी की डिक्की खुली रह गई थी। उसने आश्चर्य से देखा यह डिक्की उसने खोली तो है नहीं फिर खुली कैसे रह गई?
   उसने डिक्की को नीचे गिरे गिरे ही बंद करने की कोशिश की लेकिन डिक्की बंद नहीं हो रही थी! ऐसा लगा जैसे कुछ अटक रहा है! उसने डिक्की एक झटके से खोल दी और उसकी आंखें फटी की फटी रह गई….
      
     उसकी गाड़ी की डिक्की में ऋषिकेश राय सागर की लाश मौजूद थी……


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क्रमशः

aparna…..

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Kavita
Kavita
1 year ago

Lajawab story…bechari nandini….kya soch ke bhagi bhagi pahuchi apne office aur kya ho gya

Last edited 1 year ago by Kavita
Raj Kumar
Raj Kumar
2 years ago

Excellent 👌👌👌👌👌👌👌