The Bestseller -14

“डायरी“
शेखऱ पुलिस थाने में बैठा इंद्रपुरी केस की फाइल पढ़ रहा था उसे अभी इस केस बारे में बहुत कुछ जानना था। आसपास के लोगों से पूछताछ करने के लिए उसने सोचा इंद्रपुरी जाना ठीक रहेगा उसनेअपनी टेबल पर रखी बेल बजा दी…-” जी हुजूर?
” गाड़ी निकालो इंद्रपुरी चलना है।”
उसी समय हवलदार उसके लिए चाय लिए चला आया
” अरे यार पंसारी तुम भी ना गलत समय पर चाय लेकर आते हो। जब जब तुम गरमा गरम चाय और खाने के लिए कुछ लेकर आए हो तब तब कुछ ऐसा हुआ है कि मैं यह चाय और नाश्ता गरमा गरम नहीं खा पाया हूं।”
“नहीं साहब इस बार ऐसा नहीं होगा, आप आराम से बैठ कर खा लीजिये। अभी कोई फोन नहीं आएगा आपके पास। “
और गिरधारी ने लैंडलाइन का रिसीवर उठाकर नीचे रख दिया… शेखर ने मुस्कुरा कर उसे देखा और समोसा उठाया ही था कि उसका मोबाइल बजने लगा।
लाचारगी से गिरधारी को देख शेखर ने अपना फोन उठा लिया फोन इंद्रपुरी से ही था।
करने वाले ने अपना नाम पता बताए बिना बस शेखर को उस घर के बारे में कुछ बताया था।
” देखा अत्याचारी मैं सही कहता था ना! तुम यार साफ मन से हमारे लिए चाय लेकर नहीं आते हो, इसीलिए तो गर्म चाय पीने को ही नहीं मिलती। चलो गाड़ी तो निकल ही चुकी है अब इंद्रपुरी की सैर
करके आते हैं ।”
“जी साहब !!”
शेखर के गाड़ी में बैठते ही गाड़ी हवा से बातें करती इंद्रपुरी की ओर निकल गई।
वैसे तो जिस दिन इंद्रपुरी में वारदात हुई थी उसी दिन फॉरेंसिक की टीम ने काफी कुछ जांच पड़ताल कर सामान इकट्ठा कर लिया था ।जो कि फॉरेंसिक जांच होने के बाद एविडेंस के रूप में पुलिस थाने में वापस जमा कर दिया गया था। वह सब कुछ देखने के बाद भी शेखर को अब भी ऐसा लग रहा था कि कुछ ऐसी कड़ियां है जो उस घर में छूटी हुई है.. और जिनकी जांच करना जरूरी है। हालांकि उसने अपने दिमाग में एक थ्योरी पहले ही बना ली थी की घर के बड़े लड़के कुलदीप ने ही पैसों और प्रॉपर्टी के लालच में अपने सारे परिवार का सफाया किया है । लेकिन उसकी इस थ्योरी को भी प्रैक्टिकल जामा पहनाने के लिए उसे सबूतों की जरूरत थी, और इसीलिए एक बार फिर वह इंद्रपुरी की वारदात वाले घर पर अपने सहयोगियों के साथ मौजूद था।
उसे फोन करने वाले अंजान मददगार ने शेखर से क्या कहा और किसने कहा इस बात से शेखर की टीम अब भी अनजान थी। शेखऱ अपनी टीम के साथ उस घर में पहुंच चुका था …और वह एक-एक चीजों की बारीकी से तलाशी ले रहा था कि तभी उसके हाथ एक डायरी लगी….
डायरी में कुछ नंबर लिखे हुए थे इसके साथ ही पूजा-पाठ की कुछ विधियां लिखी थी। कुछ मंत्र लिखे थे और इसी तरह पूजा पाठ के सामानों की लिस्ट लिखी हुए थी।
डायरी बहुत सलीके से डायरी लिखने के तरीके से ही लिखी गई थी ….यानी की डायरी पर जिस पेज पर जो तारीख अंकित थी उस तारीख पर हुए पूजा-पाठ का वहां वर्णन था। डायरी पर अंकित तारीख वाले पेज पर पूजा किस समय की जानी थी और कितने घंटे चलने थी यह लिखा हुआ था और उसके ठीक पहले के तारीख पर पूजा पाठ के लिए आवश्यक वस्तुओं की लिस्ट बनी हुई थी।
शेखर फटाफट डायरी के पन्ने पलट रहा था। उस डायरी में हर पन्ने पर कुछ लिखा हो यह जरूरी नहीं था।
लेकिन शेखर को डायरी के पन्नों की तारीखों और उस में लिखी हुई पूजन सामग्री को देखकर कुछ अजीब सा लग रहा था। उसने अपने मोबाइल पर उस डायरी की तस्वीरें खींच ली और इसके साथ ही पूजा-पाठ वाली लिस्ट भी उसने तस्वीर उतारकर रख ली।
डायरी के बीच वाले भाग पर वह तारीख आती थी जिस तारीख पर एक घर के सभी लोगों ने एक साथ आत्महत्या की थी। उस पेज को खोलने के बाद शेखर को कुछ अजीब से अनुभूति हो रही थी… उसने उसके पहले वाले पेज पर नजर डाली वहां पर पूजा पाठ में काम आने वाली सामग्रियों के साथ ही दुपट्टे भी लिखे गए थे।
“कंसारी ये दुपट्टे किस पूजा में काम आते हैं दोस्त।”
” हमको तो मालूम नही सर?”
” तो तुमको क्या मालूम है बचुवा।”
“सर अब आपके जैसा पैना दिमाग तो नही न है।”
” बेटा ये बात तो तेरी सच है। “
शेखर गिरधारी से बातों में लगा इधर से उधर फैली हर चीज को ध्यान से देख रहा था कि तभी कुलदीप हाथ में चाय की ट्रे लिए उन लोगों के पास चला आया “साहब गरमा गरम चाय पी लीजिए।”
” हां भैया ले आओ चाय की तो बड़ी जरूरत थी… वो क्या है ना थाने में हम बैठे चाय पी रहे थे कि तभी…. खैर जाने दो! “
कुलदीप ने उसके और बाकी लोगों के सामने चाय की ट्रे फैला दी कि उसी समय नीचे से किराएदार की आवाज आने लगी…
” कुलदीप भैया यह आपसे कोई मिलने आए हैं ऊपर भेज दें क्या? “
” नहीं रहने दो उनसे कहो बाद में मिलने आ जाए अभी थोड़ा व्यस्त हैं।”
” अरे नहीं नहीं ऐसी भी क्या व्यस्तता भाई? हम पुलिस वाले हैं.. समाज के लोगों की मदद के लिए हैं हम, इसलिए थोड़ी कि हमारे कारण कोई परेशानी खड़ी हो जाए। अब आपसे कोई मिलने आया है तो किसी काम से ही मिलने आया होगा तो बुला लीजिए। “
” नहीं सर जाने दीजिए ना, मैं बाद में देख लूंगा।
“अरे नहीं नहीं ऐसे कैसे जाने दे बुला लो।”
कुलदीप ने इसके बावजूद दो तीन बार शेखर को मनाने की कोशिश की कि वह नीचे आए लोगों से बाद में मिलेगा पर शेखर भी मानने को तैयार नहीं था। और आखिर परेशान होकर कुलदीप को सीढ़ियों पर जाकर नीचे की तरफ आवाज लगानी पड़ी।
उसकी आंखों से ओझल होते ही शेखर ने गिरधारी की तरफ देखकर अपनी एक आंख दबा दी … ” देखा हरियाली। मैंने कहा था न, कुल के दीपक से ही कुल को आग लगी है। यह कुलदीप जरूर इस घर द्वार का सौदा करने के लिए व्यापारियों को बुलाकर बैठाया है। अब यह घर को बेचेगा, दुकानों को बेचेगा, अच्छा मोटा माल बनाएगा और नया बिजनेस जमायेगा समझे। “
” समझ गए हुजूर।”
“अबे किसे?”
“आपकी पारखी नजर और…”
“और निरमा सुपर दोनों को। “
शेखर के मजाक पर उसकी टीम को हंसी आ गई और तभी कुलदीप दो लोगों के साथ सीढ़ियां चढ़ता ऊपर चला आया।
उसके साथ ऊपर आए लोग पुलिस यूनिफॉर्म में शेखर और उसकी टीम को देखकर जरा घबरा से गए और फिर अपने आप को संभालते हुए उन लोगों ने शेखर और बाकी लोगों को नमस्ते किया और शेखर के कहने पर वहीं बैठ गये…
” तो कुलदीप जी आप लोग आराम से बातें कीजिए मैं और मेरी टीम आप लोगों को बिल्कुल भी डिस्टर्ब नहीं करेगी हम अपना काम करते रहेंगे आप लोग अपना काम करते रहिए..!”
कुलदीप ने विनम्रता से शेखर के सामने हाथ जोड़ दिये और शेखर मुस्कुरा कर दूसरी तरफ फैले सामान को ध्यान से देखने लगा।
वो भले ही उन लोगों की तरफ देख नहीं रहा था….. लेकिन उसके कान पूरी तरह से कुलदीप और उसके साथ आए दो लोगों पर ही लगे थे यही हाल शेखर की टीम का भी था। सब के सब चौकन्ने थे और सभी के कान खड़े थे। हालांकि यह बात कुलदीप भी समझता था कि यह लोग पुलिस वाले हैं इसलिए इनकी दो नहीं बल्कि छप्पन आंखे हैं जो हर तरफ से उसी पर गड़ी हुई है।
सोफे के पीछे दीवार पर बनी अलमारी में एक पुराना अजीब सा वास रखा था ।शेखर उस फ्लावर वास को उठा कर देख रहा था कि तभी उसके मोबाइल पर रिंग होने लगी उसने फोन उठाते हुए वास के नीचे रखी एक पर्ची भी उठा कर अपने जेब के हवाले कर दी।
फोन नंदिनी का था…
” कहां हो? क्या कर रहे हो? “
” काम पर हूं ,और काम कर रहा हूं। तुम बताओ कहां हो?”
“मैं फ्लैट पर हूं… सुनो तुमसे एक बहुत जरूरी बात कहनी है।”
” अभी नहीं नंदू अभी मैं काम पर हूं। शाम को रोमांस कर लेना, आ जाऊंगा तुम्हारे रूम पर।”
” ओह्ह शट आप यार! समथिंग सीरियस इस हैपनिंग।”
” ऐसा क्या हो गया? “
” मिलने पर ही बता पाऊँगी। और सुनो वो तुम्हारी मिस्टीरियस राइटर है ना , जिस पर तुम आंख मूंद कर भरोसा करते हो, जो तुम्हें संसार की सबसे विटी लेडी लगती है,जिसके सामने पहुंच कर तुम सब भूल भाल कर मिमियाने लगते हो, जिसकी खुशबू तुम्हें उसकी किताबों में भी महसूस होती है जिसकी बातें…
” अरे बस बस नंदू!! मैं समझ गया तुम कामिनी जी के बारे में बोल रही हो..”
” हाँ देखा कैसे तुरंत पहचान लिया। अभी अपने बारे में कुछ कहती तो कभी नही समझ पाते कि किसके बारे में कह रही हूँ। तुम सब मर्द न एक से होते हो, जहाँ पराई नार दिखी की लार…
“मेरी प्यारी नंदू, वो ज़रूरी बात क्या थी उस पर फोकस कर लो बेबी। इन सब पचड़ों के लिए ही तो हम शादी करने वाले हैं ना, उसके बाद आराम से ताने ताने खेलेंगे न हम। “
” जहाँ भी हो जल्दी आओ, मुझे उस घोस्ट राइडर के बारे में एक नई बात पता चली है।”
“नंदू प्लीज़ यार उसे घोस्ट राइडर मत बोल ।”
” हे भगवान !!! ऐसी दीवानगी देखी नही कहीं…”
” नंदू तुम्हारा गाना बाद में सुनता हूँ , पहले ज़रा यहाँ निपटा लूँ?
“ओके!!! जल्दी करो और सुनो कहीं की भी चाय उठा कर मत पी लेना। पुलिस वाले हो क्या पता किसने तुम्हारे डर से तुम्हारी चाय में कुछ मिला रखा हो? “
” ओके बेबी। बाकी मिलने पर बात कर लेंगे।
शेखर फ़ोन निपटा कर बाकी चीज़ों के साथ ही उन लोगो की बातचीत पर भी ध्यान देने लगा… इधर नंदिनी को शेखर के आने का सब्र नही था।
वो उठी और कामिनी के घर के लिए निकल गयी….
कुछ ही देर में वो कामिनी के घर के सामने थी। उसने अपनी गाड़ी कामिनी के घर के पीछे की तरफ ले ली। अपनी गाड़ी में बैठे उसे कामिनी का बैकयार्ड कुछ थोड़ा बहुत ही नज़र आ रहा था।
उसे जाने क्यों ऐसा लग रहा था कि ऋषिकेश रायसागर ही नही सुरेखा की बच्ची के गुम होने में भी कहीं न कही कामिनी का हाथ है। पर कामिनी ऐसा क्यों करेगी इसका उसके पास कोई जवाब नही था।
और यही जानने के लिए वो पीछे लगे कुछ पेड़ों की सहायता से कामिनी के बैकयार्ड में कूदने की सोचने लगी।
उसने कूदने का सोचा ज़रूर लेकिन जब पिछली दीवार की ऊंचाई उसने देखी तो उसके हाथ पांव फूल गए।
दस फुट की इस दीवार से भीतर कूदने का मतलब साफ साफ अपने हाथ पैर की हड्डियों का जीवन जोखिम में डालना था।
नंदिनी ज़िंदा रहे तो और भी केस मिल जाएंगे एडवेंचर के लिए, लेकिन फिलहाल यहाँ से कूद कर भीतर जाना सरासर बेवकूफी होगी। क्योंकि एक तो इस बात का बहुत बड़ा रिस्क हो जाएगा कि कोई देख न ले। और कहीं किसी ने अंदर देख लिया तो सारी जासूसी एक बार में निकल जायेगी…
चल बेटा तू बस बैठे बैठे कलम घिस ये जासूसी तेरे बस की नही।
अपने विचारों में मगन वो गाड़ी की तरफ मुड़ रही थी कि उसे गार्डन से किसी की आवाज़ सुनाई पड़ने लगी। वो दबे पांव लकड़ी के बने गेट तक चली आयी…
लकड़ी का गेट भी काफी ऊंचा था पर उन चपटी बल्लियों के बीच जो हल्की जगह बाकी थी उन पर अपनी आंखें चिपकाए वो अंदर देखने की कोशिश करने लगी।
अंदर उसे बगीचे की घास पर बैठी कामिनी दिख गयी। वहाँ आसपास लगे फूलों के पौधों के बीच अपनी डायरी खोले वो बैठी उदास और खाली खाली आंखों से अपनी डायरी घूरे जा रही थी कि तभी जमना ताई वहाँ चली आयी…
” मेमसाहब ! आप तो कुछ खा लीजिये। आज आपको तीन दिन हो गए अपने एक निवाला नही लिया है।”
” अब किसके लिए जीना है हमें जमना ताई जो हम खाये पिये। हम भी सर के साथ ही क्यों नही चले गए। हमसे बिल्कुल जिया नही जा रहा…
अपनी बात खत्म करने से पहले ही वो फफक कर रो पड़ी, उसे यूँ बच्चों सा बिलखता देख जमना ने आगे बढ़ उसे सीने से लगा लिया…-” मत रोइये ऐसे। इस तरह रोने से तो आप खुद बीमार पड़ जाएगी।”
” तो क्या करें हम? अब हमारी ज़िंदगी में कुछ नही बचा। सर से शादी करने के लिए हम पहले ही अपने घर वालो की नाफ़र्माबरदारी कर चुके हैं। हमारी हालत तो धोबी के कुत्ते सी होकर रह गयी। सिर्फ एक इनके कहने पर हम सब छोड़ कर चले आये थे और अब आज देखो, क्या बचा हमारे पास? कुछ भी तो नही। न मायके में कोई न ससुराल में। इनके अलावा एक पापा जी ही थे वो भी अब नही रहे।
इनके लड़के तो हमें मार ही डालेंगे जमना ताई। आपने देखा नही पुलिस स्टेशन पर भी इनका बड़ा लड़का हमें ऐसे घूर रहा था जैसे वहीं गन लेकर शूट कर देगा।
इस सब डर के साये में घुट घुट कर जीने से अच्छा हम एक ही बार में खुद को खत्म कर लें।”
” आप पागल हो गयी है क्या? ऐसे हिम्मत हार जाएंगी तो आपके सपने का क्या होगा जो आपके भीतर पल रहा है…?”
कामिनी को इस कदर बिलखते देख नंदिनी को अपनी सोच पर बुरा सा लगने लगा। जो औरत इस बुरी तरह से दुखी हो वो क्योंकर अपने पति को मारेगी भला?
तो क्या सुरेखा की बेटी के गायब होने में भी इसका हाथ नही होगा?
ज़ाहिर है ये एक इत्तेफाक भी तो हो सकता है ना, की जिस दिन कामिनी सुरेखा से मिली उसी दिन सिया अचानक गायब हो गयी…
…. अगर सिर्फ इत्तेफाक भी है तो भी ये खयाल उसके मन में कुलबुलाहट क्यों मचा रहा है,खैर इसका जवाब तो अब कामिनी ही देगी।
” हम तो चेहरे के भावों से पकड़ लेते हैं कि सामने बैठा इंसान सच कह रहा या झूठ? पुलिस वाले न सही पुलिस वाले की गर्लफेंड तो हैं…
मन ही मन कुछ सोच कर नंदिनी घर के मुख्य द्वार की तरफ बढ़ गयी…
क्रमशः
aparna ….
