जीवनसाथी – 3 भाग -74

जीवनसाथी – 3 भाग -74

जीवनसाथी by aparna

वो धीमे से उसके होंठो को छूने जा रहा था कि तभी कमरे के दरवाज़े को ठेल कर निरमा अंदर दाखिल हो गयी..।

अपनी आँखों के सामने मीठी और हर्ष को देख निरमा एकदम से कुछ सोच ही नहीं पायी और उसे ऐसे सामने देख हर्ष ने हड़बड़ा कर मीठी को छोड़ दिया..।

निरमा एकदम से कुछ नहीं बोली.. उसने एक कड़ी नजर मीठी पर डाली और अंदर चली गयी..

मीठी घबरा गयी..।

“अब क्या होगा हर्ष.. मैं खुद मम्मा को बताती तो अलग बात होती लेकिन मम्मा का ऐसे हमे देख लेना..
बहुत गलत हो गया सब.. बात बनने से पहले ही बिगड़ गयी.. !”

“मैं चलता हूँ उनके पास.. मैं बात करता हूँ.. !”

“नहीं नहीं.. तुम नहीं.. कहीं मम्मा ने तुम्हे कुछ कह दिया तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा.. तुम जाओ.. मैं जो भी होगा तुम्हे बताउंगी !”

“मीठी अकेले कैसे हैण्डल करोगी ?”

“मैं कर लुंगी हर्ष.. तुम जाओ अभी !”

हर्ष ने मीठी का हाथ पल भर के लिए थामा और फिर वहाँ से निकल गया..

हर्ष के आँखों से ओझल होने तक मीठी दरवाज़े पर खड़ी रही और फिर भारी कदमो से अपनी माँ के कमरे में चली गयी..

निरमा खिड़की पर खड़ी बाहर देख रही थी..
यही तो खासियत थी उसकी, कितनी भी गंभीर बात हो, परेशानी हो, वो आम औरतों की तरह रोना रोने की जगह खमोशी की चादर में खुद को समेट लेती थी.. ।

अपने ही बनाये खोल में यूँ सिमट जाती थी कि  फिर बाहर वाला उसे कितना पुकार ले  उस तक कोई आवाज़ नहीं पहुँचती थी..।
निरमा दिमाग से पैदल औरत तो थी नहीं वो भी महारानी रूपा के मन को भली प्रकार जानती थी..।
वो इस बात को बखूबी समझती थी कि हर्ष के लिए रूपा अपनी बराबरी का ही रिश्ता ढूंढेंगी.. ।
उसे खुद को हर्ष बहुत पसंद था, लेकिन वो जानती थी हर्ष मीठी के लिए जागती आँखों से देखा जाने वाला सपना मात्र है..।

अपनी जान से प्यारी बेटी के लिए उसका दिल छलका पड़ा था, लेकिन अपने मन की बात मीठी को कैसे समझाये यही सोचती वो खड़ी थी कि मीठी चली आयी..

“मम्मा.. क्या मैं अंदर आ जाऊं !”

मीठी के सवाल पर निरमा ने कोई जवाब नहीं दिया।  मीठी धीरे से अंदर चली आयी..

“माँ मैं आपसे बताने ही वाली थी.. असल में हर्ष तो पहले ही चाह्ते थे कि आपको बता दिया जाये, लेकिन हमें मौका ही नहीं मिला..।
उन्होंने कहा पहले एक बार रानी सा से बात कर लूं उसके बाद तुम्हारे घर भी बात कर लेंगे.. ।”

निरमा तड़प कर पलट गयी..

“क्यों मीठी.. पहले रानी सा से बात करना क्यों ज़रूरी समझा हर्षवर्धन ने ? उन्होंने तो यही हमे अपने आप से कमतर साबित कर दिया ना ?”

“नहीं मम्मा.. वो बात नहीं थी.. असल में आप भी तो जानती है कि रानी सा कितनी स्ट्रिक्ट हैं !”

“इसका मतलब अगर पेरेंट्स स्ट्रिक्ट हों तभी उनकी कदर करेंगे बच्चे, वरना नहीं ?”

निरमा को मीठी की बात समझ में आ रही थी, बावजूद उसके दिल दिमाग पर गुस्सा इस कदर हावी था कि वो मीठी की बात बेवजह ही काटती चली जा रही थी..।

“नहीं माँ.. मैं शायद आपको अपनी बात समझा नहीं पा रही.. !”

मीठी निरमा के पास चली आयी..

“माँ…. आप जितना प्यार पापा से करती है,और वो जितना आपसे करते हैं ना, बस वैसा ही कुछ हमारा भी मामला है… !”

“तुम्हारे पापा की बराबरी इस दुनिया में कोई नहीं कर सकता मीठी… हर्षवर्धन भी नहीं !”

“नहीं माँ.. मैं बराबरी की बात नहीं कर रही  बस ये कह रही कि आपके मन में पापा के लिए जो सम्मान, जो प्यार है, वैसा ही कुछ मैं भी हर्ष के लिए महसूस करने लगी हूँ..।
बस ये बताना चाह रही कि जैसे पापा आपके लिए है , वैसा ही हर्ष भी है..
बल्कि बहुत बार उसमे मुझे पापा की छवि नजर आती है.. !”

“हर्ष हर्ष जपना बंद करो मीठी..
अभी तुमने दुनिया देखी ही कितनी है, जो हर्ष के नाम की माला जपने लगी..
वो राजमहल का राजकुमार है…. तुमसे प्यार भले कर ले, शादी वो अपनी माँ साहेब कि मर्ज़ी से ही करेगा, चाहे तुम कितना सर फोड़ लो.. !
ये राजमहल कि बातें समझने के लिए तुम अभी छोटी हो.. !”

“मानती हूँ राजमहल की बातें समझने के लिए छोटी हूँ, लेकिन इसी राजमहल के एक राजकुमार ने आपकी सहेली से भी तो शादी की है ना.. उन्हेँ क्यों भूल जाती हैं आप !”

“मीठी.. आज तुम ज़िन्दगी में शायद पहली बार अपनी माँ से बहस कर रही हो..।
ये बात खुद साबित करती है कि महल वालों का रंग तुम पर भी चढ़ने लगा है..
और बाकी बात रही राजा भैया की, तो उनकी बराबरी उनके महल में कोई नहीं कर सकता.. यहां तक कि शौर्य भी नहीं.. ।”

उन दोनों कि बातों के बीच बांसुरी आकर कब वहाँ खड़ी हो गयी उन दोनों को मालूम ही नहीं चला..

“क्या हुआ निरमा… सब ठीक है ना ?”

बांसुरी अंदर चली आयी..
उसे अंदर आया देख कर माँ बेटी दोनों चुप हो गयी..

“मीठी, ज़रा पानी और हो सके तो थोड़ी सी कॉफी भी ले आना.. थोड़ी थकान सी लग रही.. !”

बांसुरी ने मीठी से कहा और वो हाँ में गर्दन हिलाती वहां से बाहर निकल गयी..

“तुझे क्या हो गया है नीरू ? तू कैसे बात कर रही थी मीठी से..।
अरे तेरी बच्ची है वो.. क्या उसकी ख़ुशी कोई मायने नहीं रखती ?”

“रखती है बंसी.. इसलिए उसे समझा रही थी। आज मेरे समझाने से उसका दिल टूटेगा जरूर, लेकिन वह संभल जाएगी।
अगर आज मैंने उसे जरा सी भी उम्मीद दे दी, तो कल जब सच्चाई से उसका सामना होगा ना, तब वह उस झटका को सहन नहीं कर पाएगी।

मैं जानती हूं रानी साहब कभी भी मीठी और हर्ष की शादी के लिए तैयार नहीं होगी..।

जब मुझे पता है की रानी साहब तैयार नहीं होगी, तो फिर क्यों मैं मीठी को किसी भी तरह का झूठा दिलासा दूं ?
मुझे मेरी बेटी को मजबूत बनाना होगा, मैं उससे टूटता हुआ नहीं देख सकती..।”

” तूने यह बात खुद-ब-खुद सोच ली कि रानी साहब तैयार नहीं होगी..।”

” बांसुरी मुझसे ज्यादा तू इस बात को समझती है कि रूपा भाभी साहब कभी एक सामान्य परिवार की लड़की को अपने महल की बहू नहीं बनाएंगी।

तुझे याद नहीं है क्या, तेरे ब्याह के समय भी उन्होंने बहुत ज्यादा खुशी जाहिर नहीं की थी। अब इतने सालों में तेरे प्रति उनका नजरिया जरूर बदल गया है, लेकिन उस वक्त उनके देवर की शादी का मामला था..

हर्ष तो उनकी इकलौती औलाद है, लड़के की शादी वह कभी किसी आम लड़की से नहीं होने देंगी…।”

” नहीं नीरू ऐसी कोई बात नहीं।
मैं यही तो तुझे बताने आई हूं। मैंने मीठी और हर्ष के बारे में महल की औरतों के सामने बात रखी थी। उस वक्त फुफू साहब भी वहां मौजूद थी, और तब उन्होंने कुछ अलग से नियम कायदे बताएं।

हालांकि उन नियम कायदों का अब आज के जमाने में कोई औचित्य नहीं, लेकिन उन नियमों का भी तोड़ उन्होंने खुद पर खुद बता दिया।

उनके अनुसार मीठी प्रेम भैया की बेटी है, इसलिए उसका विवाह हर्षवर्धन से नहीं हो सकता। बातों ही बातों में उनकी जबान फिसल गई और उनके मुंह से यह बात निकल गई कि अगर मीठी प्रेम भैया की जगह प्रताप की बेटी होती तो एक बार को यह विवाह हो सकता था। क्योंकि प्रताप राज महल का एम्पलाई नहीं था…।”

“क्या.. तू ये क्या कह रही है बंसी ?”

“हाँ नीरू सच कह रही हूँ.. महल के फायदे कानून तू तो जानती है। आधा तो मेरा दिमाग इन कायदे कानून के कारण ही खराब रहता है, लेकिन अब महल का हिस्सा हूं इसलिए इनका पालन करना मेरी जिम्मेदारी है।

लेकिन आज जब बातचीत में फुफु साहब के मुहं से ये बात यूँ ही निकल गयी, तब तुरंत मुझे लगा कि रूपा भाभी साहब से सारी सच्चाई बता दूँ।
लेकिन फिर मैंने खुद को रोक लिया, मुझे लगा उनसे कुछ भी कहने से पहले मुझे एक बार तुमसे बात कर लेनी चाहिए।

निरमा अपनी बेटी की खुशी का ख्याल रख ले। निरमा एक बार अपना समय याद करके देख अगर प्रताप आज जिंदा होते तो… ।”

“क्या बोल रही है बंसी ?”

“सच कह रही हूँ नीरू.. अगर प्रताप जिंदा होते तो आज यहां वह होते, या शायद तू उनके साथ कहीं और होती मीठी को लेकर..।
मानती हूं नीरू कि भगवान की मर्ज़ी के आगे किसी की नहीं चलती। प्रताप के चले जाने के बाद प्रेम भइया ने तुझे और तेरी बेटी दोनों को संभाल लिया ।

मीठी को तो आज तक पता भी नहीं चल पाया कि वह प्रेम भैया की नहीं…

“बंसी.. बस कर.. इन बातों का अब कोई मायने नहीं !”

“जानती हूँ नीरू.. अगर आज ये बात राजमहल में उठी नहीं होती तो मैं तुझसे ये सब कहने भी नहीं आती.. !
मैं जानती हूँ प्रेम भैया का कोई मुकाबला नहीं… ये भी जानती हूं कि प्रेम भैया जितना प्यार तुझे और मीठी से इस दुनिया में कोई नहीं कर सकता।

सच कह रही हूं अगर आज वहां प्रताप का जिक्र नहीं हुआ होता तो मैं कभी तेरे सामने इन बातों को नहीं रखती।
लेकिन आज पता नहीं क्यों दिल में यह बात आई कि तुझसे एक बार यह गुजारिश कर दूं कि अगर मीठी और हर्ष का रिश्ता जुड़ सकता है, तो प्लीज कोशिश करना कि कोई अड़चन ना आये..।”

“बंसी.. उस रिश्ते के लिए जो अब तक जुङा भी नहीं, मैं अपने और अपने पति के रिश्ते को खराब नहीं कर सकती..।
एक समय था जब प्रताप सब कुछ था मेरे लिए, लेकिन धीरे-धीरे इनकी बातों ने, इनके व्यवहार ने इस कदर दिल दिमाग पर कब्जा कर लिया कि अब प्रताप की यादें आंसू नहीं लाती, हल्की सी मुस्कान दे जाती है।
अब वह इसलिए याद है क्योंकि वह इनका भाई है…
बंसी मीठी की किस्मत में जो होगा और जैसा होगा उसे वह मिलेगा ही।
उसके लिए मैं चाहे कोशिश करूं या ना करूं, उसकी किस्मत से ज्यादा उसे में कुछ नहीं दे पाऊंगी…।”

” मैं तुझे कुछ भी करने के लिए नहीं कह रही हूं नीरू। बस इतना कह रही हूं कि अगर तू इजाजत दे तो रूपा भाभी साहब से मैं और साहब अकेले में बात कर लेंगे। बस उन्हें इतना बता दूं कि मीठी प्रेम भाई साहब की नहीं प्रताप की बेटी है। उसके बाद वह जो निर्णय लेना चाहे, वह सब मंजूर।

वह खुद भी इतना तो समझती है कि इस बात को सरे आम नहीं होने देंगी, और यह राज जो अब तक तेरे और मेरे बीच था, वह हम तीनों के बीच ही रहेगा।”

बांसुरी और निरमा दोनों का ही ध्यान इस बात पर नहीं गया था कि पानी की ट्रे पड़े खड़ी मीठी दरवाजे पर ही थी और उसने उन दोनों की सारी बातें सुन ली थी ।

बांसुरी की कही आखिरी पंक्तियां कान में पङते ही मीठी के हाथ से ट्रे छूट गई।

उसने आज तक प्रेम में ही अपना पिता, अपना हीरो पाया था।आज उसका वह गुरुर छन से टूट कर बिखर गया था।

उसके हाथ से ट्रे छूटते ही निरमा और बांसुरी पलट कर उसकी तरफ देखने लगे।
मीठी दरवाजे पर खड़ी कांप रही थी। उसके पांव आगे बढ़ने से इनकार कर गए थे।

उसे वहां देखते ही निरमा उसकी तरफ बढी लेकिन मीठी ने हाथ बढ़ाकर निरमा को रोक दिया। वह पलटी और वहां से बाहर निकल गई..

उसके जाते ही निरमा ने दोनों हाथो में अपना सर थामा और धम्म से सोफे पर गिर पड़ी..

क्रमशः

aparna..
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Arun Kumar
Arun Kumar
1 year ago

😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳😳❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️

Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
1 year ago

सब इतनी जल्दी जल्दी अपने दिमाग़ के घोड़े दौड़ा रहे हैं कि यह मिस्टेक तो होना ही था मीठी अब कड़वे बोल बोलेगी, अभी तक वह डरी सहमी थी, अब मां डर गई। पता नहीं मां को कुछ उल्टा सीधा ना सुना दे, आजकल के बच्चे बाप हैं, शायद इससे भी कुछ रास्ता निकलेगा, आपने कुछ सोचा ही होगा दी, फिर भी मैं तो बांसुरी के साथ हूं, नाइस पार्ट दीदी…💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

सच में प्यार करने वालो की राहो में बहुत मुश्किलें आती है, अब यहाँ भी मीठी और हर्ष के लिए मुसीबते ही मुसीबते है, पर एक तसल्ली ये भी है कि बांसुरी उनके साथ होगी, बांसुरी ने कोशिश तो बहुत कि पर शायद सब इतना आसान नहीं है, ये अच्छा हुआ कि प्रताप और निरमा का सच बांसुरी ने नहीं कहा, पहले निरमा से बात हो फिर कोई फैसला लेना ही अच्छा होग़ा,ऊपर से बुआ जी ने बम फोड़ दिया🤦‍♀️।दूसरी तरफ मीठी की कही एक एक बात में सच था, एक लड़की ये सब बातें बहुत अच्छी तरह से समझती है, अब देखते है हर्ष कैसे अपनी परिवार क़ो मनाता है।
इंतज़ार…. इंतज़ार… 😊🙏🏻।

आज बहुत समय बाद दिल से…पढ़ने क़ो मिला 😊।
कहानी के लिए हम . रुक जायँगे पर आपके चेहरे की वो मुस्कान, ख़ुशी वैसे ही बरकरार रहनी चाहिए बेशक डूबी रहो सपने में कोई नहीं जगाएगा आपको ऐसे मीठे सपने देखने से 🧿😊।

Rekhapradeepsrivastava
Rekhapradeepsrivastava
2 years ago

जीवनसाथी भी यहां पढ़ कर बहुत सुकून मिला, अब इसके भी पार्ट पढ़ने को मिलते रहेंगे।
निरमा रूपा का स्वभाव शुरू से जानती है, और उसे पता है रूपा शायद ही हर्ष और मीठी की शादी के लिए तैयार हो।
आज मीठी को सच का पता चल गया की वो प्रेम की नही, प्रताप की बेटी है तो ये रिएक्शन तो होना ही है। अब निरमा और बांसुरी उसको कैसे और क्या समझाते हैं।
अगले पार्ट का इंतजार रहेगा

Puja
Puja
2 years ago

Accha lg rha h fir se jivansathi k part dekh kr

Ajay
Ajay
2 years ago

यहां आपकी रचनाएं फिर से पढ़ना सुखद है। हालांकि प्रतिलिपि छोड़ने के आपके निर्णय के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं 🙏🏻🙏🏻