जीवनसाथी -3 भाग -71

मीठी को भी पहली बार हर्ष को छेड़ने का मौका मिला था…
“अच्छा सुनो…
मीठी के मुहं से ये सुन कर बिना वजह ही हर्ष के गाल लाल हो उठे..
“हम्म कहो !”
“नहीं…. अभी रहने दो.. बाद में पूछ लूँगी..
हर्ष ने मीठी की तरफ देखा… इतनी तकलीफ में भी वो मुस्कुरा रही थी..
जाने कितनी बातें थी हर्ष के मन में जो वह मीठी से कहना चाहता था….
अगर उसकी मां ने अभी उसकी शादी की बात नहीं की होती तो, शायद वह अब भी मीठी को अपनी दोस्त की तरह ही रखता, क्योंकि उसके मन में एक थोड़ा सा संकोच इस बात का भी था कि कहीं उसके दिल की बात जानने के बाद मीठी उसकी दोस्ती भी ना ठुकरा दे।
लेकिन जब अचानक उसकी जिंदगी ने करवट बदली और उसके सामने प्रियदर्शनी को लाकर खड़ा कर दिया, तब हर्ष हक्का-बक्का सा रह गया। उस एक पल में उसे महसूस हुआ कि जिंदगी आपके हिसाब से नहीं चलती, बल्कि आपको अपने हिसाबो में चलाती है।
और इसलिए इस समय उसने यह तय कर लिया कि अब कुछ भी हो जाए, वह मीठी से एक बार अपने दिल की बात कह कर रहेगा। हर्ष मीठी की तरफ देख रहा था। मीठी भी उसी की तरफ देख रही थी।
“मीठी तुमसे कुछ कहना चाहता हूं!”
” बोलो हर्ष, मैं भी सुनना चाहती हूं ।”
दोनों दोस्तों की आंखें आज किसी और रंग में रंगी हुई थी। हर्ष ने धीरे से मीठी का हाथ थाम लिया।
मिठी खड़ी होना चाहती थी, लेकिन लडखडा कर वापस बैठ गई। हर्ष उसके ठीक सामने अपने घुटनों पर बैठ गया।
” मीठी, बहुत समय से बल्कि यह कहूं कि जब से थोड़ी समझ विकसित हुई, तभी से मैंने तुममें अपना एक खास दोस्त देखा है। आज तक मेरी जिंदगी बहुत आराम से सुकून से बसर हो रही थी। ऐसा लगता था सब कुछ मुझे बड़ी आसानी से मिलता जा रहा है। यूं लगने लगा था कि भगवान ने मेरी अच्छी किस्मत को थाली में सजा कर मेरे सामने परोस दिया है। मैं इस बात पर इठलाने की जगह हमेशा भगवान का शुक्रिया अदा करता रहा हूं। सबसे ज्यादा शुक्रिया इस बात का कि मुझे मेरे माता-पिता दिए। उनके साथ ही काका साहब और काकी सा जैसे प्यारे लोगों को मेरी जिंदगी में मेरा साथ देने के लिए चुना। मेरे सभी भाइयों से मेरा प्यार तुमसे छुपा नहीं है।
मैं इन सबके साथ ही जिंदगी में बहुत खुशी से आगे बढ़ रहा था। लेकिन इसके साथ ही उम्र का एक पड़ाव ऐसा भी आ जाता है, जब खुद को अपने लिए एक साथी की जरूरत महसूस होने लगती है। और जब वह महसूस हुआ, उस वक्त पहला चेहरा जो मेरी आंखों के सामने आया, वह तुम्हारा चेहरा था मीठी। मैं बचपन से तुम्हें बहुत अच्छी दोस्त के रूप में देखा आया था। लेकिन अभी कुछ समय पहले से अचानक ऐसा लगने लगा कि तुम सिर्फ साथी ही नहीं मेरी जीवन साथी भी बन सकती हो…।
मैं तुमसे इतनी जल्दबाजी में कुछ नहीं कहता, लेकिन जब तुमने रियाल के बारे में मुझसे कहा, तब पहली बार मेरे दिल में किसी को लेकर जलन की भावना आई, और यह बहुत अजीब था कि यह जलन मुझे किसी दूसरे लड़के से नहीं एक लड़की से थी।
लेकिन जब मैं रियाल से पहली बार मिला तो मुझे पूरी तरह से स्पष्ट हो गया कि ना रियाल तुमसे प्यार करती है, और ना तुम रियाल से।
एक बात और कहूं मीठी, अगर तुम दोनों वाकई एक दूसरे से प्यार करती तो, मैं आगे बढ़कर तुम्हारे घर वालों को तुम दोनों के साथ रहने के लिए मना लेता। पूरी दुनिया से लड़ जाता, तुम्हारी खुशी के लिए।
और जब यह बात मैंने सोची, उस वक्त ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे दिल को अपनी मुट्ठी में लेकर जोर से दबा दिया है। अंदर इतना दर्द महसूस हुआ और तब लगा कि तुम्हारे दूर जाने के ख्याल बस से मुझे इतनी तकलीफ हो रही है, तो अगर सच में तुम दूर चली गई, तो मैं कैसे जिऊंगा?
बस तभी रियाल को जानना शुरू किया। और उससे एक दो मुलाकात होने के बाद ही मालूम चल गया कि वह तुमसे प्यार नहीं करती। बस इतना मेरे लिए काफी था।
मैं मीठी को उसके प्यार से मिलवा तो देता लेकिन पहले इस बात के लिए मैं खुद एश्योर होना चाहता था कि सामने वाला भी मेरी मीठी से उतना ही प्यार करे।
क्योंकि तुम्हें जिंदगी भर खुश रखने वाला मुझे चाहिए था, और मैं यह जानता था कि रियाल से कहीं ज्यादा खुश मैं रखूंगा तुम्हें।
मैं अभी भी यह नहीं कहता कि मैं आसमान के तारे तोड़ लाऊंगा, या हर रोज तुम्हारे पैरों के नीचे फूल बिछा दूंगा। लेकिन हां मीठी एक बात जरूर कहता हूं कि जिंदगी के कड़वे मीठे सभी अनुभवों में तुम्हारा हाथ पकड़ कर साथ चलूंगा।
इन आङे टेढ़े रास्तों में कभी तुम्हें अकेला नहीं छोडूंगा। मौत भी आ गई ना अगर तुमसे पहले, तो ब्रह्मा से भी लड़ जाऊंगा कि मुझे मेरी मीठी के लिए जीना है..”
मीठी सांस रोक हर्ष की बातें सुन रही थी। लेकिन यह आखिरी पंक्ति सुनते ही उसकी आंख से एक बूंद आंसू टपककर उसके पैरों पर रखें हर्ष के हाथ पर गिर पड़ा, हर्ष ने मीठी की तरफ देखा और बोलना जारी रखा..
” तुम मेरे लिए क्या हो, यह मुझे पहली बार रियाल से मिलने के बाद महसूस हुआ और दूसरी बार प्रियदर्शनी से मिलने के बाद।
मां साहब का कहना है कि प्रियदर्शिनी से अच्छी लड़की मुझे नहीं मिल सकती। जिस वक्त उन्होंने ऐसा कहा उस वक्त लगा कि ऐसा कैसे हो सकता है ? मैंने तो अपने साथ तुम्हारे अलावा कभी किसी की कल्पना भी नहीं की। फिर प्रियदर्शनी कब और कहां से आ गई?
मैंने सब कुछ अपने महादेव पर छोड़ दिया। मैंने उनसे मन ही मन कहा कि अब सब आपके हाथ में है प्रभु, मुझे मेरी मीठी से मिलवाना और किसी आसान तरीके से प्रियदर्शनी का यहां से चले जाना।
और फिर देखो, अचानक सब होता चला गया। रियाल ने ऐसा जाल बुना कि प्रियदर्शनी के परिवार वाले खुद मुझसे सगाई तोड़ गए।
सच कहूं तो यह मालूम चलते ही, इतनी राहत मिली कि मैं क्या बताऊं? मैंने हमेशा से अपनी जिंदगी में तुम्हें अपने साथ देखा है।
मुझे लगा तुमसे बेहतर जीवन संगिनी मिलना मुझे मुश्किल है। मीठी ज्यादा लंबी-लंबी बातें करना नहीं आता मुझे, बस इतना पूछना चाहता हूं कि क्या मुझसे शादी करोगी?”
मौका खुशी का था, हर्ष मीठी दोनों के लिए। लेकिन मीठी की आंखों से आंसू बहते चले जा रहे थे।
” ये आंसू भी ना बहुत बुरी चीज है, जब हम इन्हें सबसे ज्यादा अपनी आंखों में रोके रखना चाहते हैं, उसी वक्त यह सामने वाले के सामने हमारी कमजोरी बयां कर जाते हैं! हर्ष मैं तुमसे माफी मांगना चाहती हूं। मुझे नहीं पता था रियाल ऐसी है, वरना मैं कभी उसे अपने साथ यहां नहीं लेकर आती। मेरी, उसकी दोस्ती बहुत पुरानी है। वह इस तरह मुझे धोखा देगी,यह मैंने कभी नहीं सोचा था। उसने तुम्हें भी बहुत परेशान किया है हर्ष, और यह सब मेरी वजह से हुआ। मुझे माफ कर दो हर्ष..।”
“तुम्हारी वजह से कुछ नहीं हुआ, तुम इस बात का गिल्ट लेना छोड़ दो। पहले मेरी बात का जवाब दो। बोलो मुझसे शादी करोगी..?”
मीठी ने धीरे से गर्दन हां में हिला दी, और हर्ष ने आगे बढ़कर मीठी को अपनी बाहों में ले लिया…।
दोनों एक दूसरे की बाहों में सुकून की औ राहत की सांस ले भी नहीं पाए थे, कि दरवाजे पर धीरे से दस्तक हो गई।
बाहर यश खड़ा था। दरवाजा हालांकि बंद नहीं था, लेकिन यश ऐसे अंदर नहीं गया। हर्ष ने तुरंत ही उसे अंदर आने को कह दिया।
यश अंदर गया और मीठी का फोन उसकी तरफ बढ़ा दिया..
” मीठी पिछली तीन बार से तुम्हारा कॉल आकर कट गया, इसलिए इस बार मुझे फोन लेकर ऊपर आना पड़ा। आई एम सॉरी गाइस, अगर मैंने तुम दोनों को डिस्टर्ब किया तो..।”
यश ने शैतानी मुस्कान देते हुए हर्ष की तरफ देखा और हर्ष ने उसे मजाक में मारने के लिए हाथ उठा दिया… मुस्कुरा कर उसके हाथ से बचते हुए यश ने फोन मीठी को थमाया और बाहर निकल गया। मीठी ने देखा उसके फोन पर वीडियो कॉल आ रहा था। उसने फोन अटेंड कर लिया..।
लगभग छह महीने पहले मीठी एक एनजीओ से जुड़ी थी, इस एनजीओ के मुखिया मीठी को फोन कर रहे थे।
मीठी उनसे अच्छी खासी प्रभावित थी। वह गरीब बच्चों के पढ़ने के लिए व्यवस्था किया करते थे। मीठी भी उस एनजीओ में शामिल होने के साथ ही हर शनिवार और रविवार को उनकी टीम के साथ गरीब कस्बे और बस्ती में जाकर बच्चों को पढ़ाने की सामग्री प्रदान किया करती थी। इसके अलावा जिन बच्चों को स्कूल जाने की सुविधा नहीं है, उनके लिए स्कूल और कोचिंग की भी व्यवस्था किया करते थे…।
उन्होंने अपने किसी अगले प्रोजेक्ट के बारे में मीठी को बताने के लिए फोन किया था। मीठी ने फोन नहीं उठाया इसलिए वह घबरा गए थे। मीठी ने उनसे बात करने के बाद हर्ष को भी उनसे मिलवा दिया..।
” सर इनसे मिलिए, ये मेरे दोस्त हैं हर्ष। मैं इनसे आपको मिलवाना चाहती थी, लेकिन अब तक वक्त ही नहीं मिल पाया था..!”
” कोई बात नहीं मीठी, जब वापस आओगी तब हम एक बार फिर मिलेंगे। वैसे तुम्हारी वापसी कब तक है?”
उनके सवाल पर मीठी ने हर्ष की तरफ देखा, और हर्ष ने दो दिन का इशारा कर दिया।
” बस सर दो-तीन दिन में हम लोग वापस आ जाएंगे। यहां घर में कुछ फंक्शंस थे, इसके कारण हम सब यहां आ गए थे..।”
“ठीक है मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा..।”
मीठी ने फोन रख दिया और उसके फोन रखते ही दरवाजे को खोलकर सारे लड़के अंदर चले आए..।
“अब अगर आप दोनों का हो गया हो, तो हम सब बाहर चलते हैं..। रानी माँ और बाकी सबकी गाडी मुख्य द्वार पर पहुँच चुकी है !”
शौर्य की इस बात पर हर्ष ने हामी भरी और मीठी का हाथ थाम लिया..
मीठी मुस्कुरा कर उसके करीब आ गयी..
बाकि सारे लड़के मीठी और हर्ष को घेर कर आगे बढ़ने लगे…
“ले जायेंगे ले जायेंगे दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे..
रह जायेंगे रह जायेंगे घर वाले देखते रह जायेंगे !”
कुछ देर बाद ही घर की सभी रॉयल लेडिस भी वापस लौट आई और हंसते खिलखिलाती वह दिन बड़े प्यार से गुजर गया। मीठी और हर्ष ने एक दूसरे के दिल की बात जान ली। लेकिन अब भी हर्ष की मां को, हर्ष के दिल की बात पता नहीं थी…।
कुछ देर बाद मीठी अपने घर लौट गयी, जाने से पहले वो रूपा के पास गई, और धीरे से झुक कर उसके पैर छूने लगी। लेकिन रूपा ने उसे आधे में ही रोक दिया।
” अरे नहीं मीठी, यह क्या कर रही हो। हमारे यहां हम बेटियों से पैर नहीं छुआते..।”
पास ही बांसुरी भी खड़ी थी। मुस्कुरा कर उसने मीठी को अपनी तरफ खींचा और धीरे से उसे अपने गले से लगा लिया।
” खूब खुश रहो मेरी लाडली, ईश्वर करें जिंदगी की सारी खुशियां तुम्हारे दामन में बस जाए…।”
दूर खड़ा हर्ष मीठी और अपनी मां को देख रहा था। उसे मालूम था कि उसकी मां को मनाने में थोड़ा वक्त जरूर लगेगा, लेकिन उसे यकीन था कि उसकी मां मान जरूर जाएंगी।
मीठी जैसे ही उन लोगों से विदा लेकर बाहर की तरफ जाने लगी, हर्ष बाकियों की नजर बचाकर मीठी के साथ हो लिया..
बाकी सारी औरतें एक साथ बैठी बातों में लग गई। शौर्य और धनुष कुछ अलग ही विचार विमर्श में लगे थे। कली भी उनके साथ ही बैठी थी। कली को चुपचाप बैठे शौर्य की बातें सुनने में भी बड़ा आनंद आता था, लेकिन उसके साथ बैठी मीरा बहुत बोर हो रही थी। एक तो दोपहर के खाने के बाद से अब तक उसे कुछ अच्छा खाने को मिला नहीं था…।
बस वह हाई टी का इंतजार कर रही थी..।
धनुष अपनी जगह पर खड़ा हुआ और शौर्य को साथ लेकर अपनी पिता के ऑफिस की तरफ बढ़ने लगा। कली ने उन दोनों को वहां से जाते देखा तो वह भी उनके साथ हो गई ।
“शौर्य, क्या मैं भी तुम लोगों के साथ आ सकती हूं?”
शौर्य ने उसे देखा और हामी भर दी।
वह तीनों ही ऑफिस के लिए निकल गए। मीरा ने जब देखा कि वह अकेली बैठी रह गई है, तो वह भी उठकर उन लोगों के पीछे-पीछे बढ़ गई। ऑफिस में पहुंच कर धनुष ने अपना लैपटॉप खोला और हर्ष का फ्रेंड बुक अकाउंट खोलकर देखना लगा..
“फ्रेंड बुक अकाउंट खंगाल के क्या मिलेगा धनुष..?”
“शौर्य मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही कि अगर कोई काका साहब से बदला लेना चाहता है, तो वह हर्ष को मोहरा क्यों बनाएगा?
उसे तुम्हें मोहरा बनाना चाहिए या फिर काकी सा को..।
पता नहीं क्यों, लेकिन मुझे लगता है रियाल को किसी ने ज़बरदस्त तरीके से उल्लू बनाया है..।
उस आदमी को ये पता था कि रियाल, काका साहेब से बैर रखती है..।
बस उसी बात का फायदा उठा कर किसी ने रियाल के दिमाग में ये बात फिट कर दी कि वो हर्ष का नाम ख़राब कर के काका साहब से बदला ले रही है..।
जबकि असल में वो आदमी किसी न किसी कारण से हर्ष से ही बदला लेना चाहता था..।
अब बस मुझे ये जानना है की वो है कौन और क्यों ऐसा कर रहा है..
क्रमशः

लवेवल पार्ट, हर्ष ने दिल की बात कही उसे प्यार मिल गया लेकिन धनुष तो पीछे पड़ा है वह ढूंढ ही ले तो अच्छा है, हम सबको है इंतजार वो घड़ी कब आयेगी, बहुत ही प्यारा और प्यार में डूबा पार्ट लिखा है दीदी आपने, हर्ष रूपा रानी को कैसे समझाएगा, कली साइड लाइन हो गई। पर पार्ट टॉप पर है, नाईस पार्ट दीदी…💐🙏
बहुत चंट, चालाक लड़की है ये वाणी, कैसे पुलिस वालो क़ो और अपने फैन्स क़ो बातों में उलझा दिया और कितना हंगामा करवा दिया कि मजबूरन पुलिस वालो क़ो उसे छोड़ना ही पड़ा। वाणी खुद क़ो बहुत चालाक समझ रही है पर ऐसा लगता इससे उसका ही नुकसान होग़ा, राजा की छत्र छाया में उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचना था पर हो सकता है वो ब्लैकमेलर उसे नुकसान पहुंचा दे। अब क्या ही करे कोई उसकी आँखों में तो राजा के लिए नफ़रत की पट्टी जो बंधी हैइसलिए तो उसे सही गलत दिख नहीं रहा,,पर उसे बहुत जल्द एहसास हो जाएगा कि राजा साहब गलत नहीं है।
ओहो.. 😊हर्ष क़ो शरम आ गयी मीठी के अच्छा सुनो.. कहते ही हाय मैं वाऱीँ जावाँ 😊पर मीठी क़ो भी मौका मिल गया हर्ष क़ो छेड़ने का,। Plz… अपर्णा अब हर्ष और मीठी से इनके मन की बात एक दूसरे से कहलवा देना plz 😊।
बेहद शानदार भाग 👌👌👌👌🙏🏻।