जीवनसाथी -3 भाग -68

जीवनसाथी -3 भाग -68

जीवनसाथी by aparna

“तुम थे कहां धनुष कितना कॉल लगाया है तुम्हें? तुम्हारा फोन बंद आ रहा था ।”

“आप सबको सारी बातें बताता हूं, दो मिनट रुकिए ।”

धनुष एक तरफ को हटा और उसके पीछे से मीठी सबके सामने चली आई…

मीठी को सामने देखते ही सबके चेहरों पर राहत चली आयी..
मीठी को देखते ही बांसुरी और निरमा भाग कर उसके पास पहुँच गए..
निरमा ने मीठी को गले से लगा लिया….

“कहाँ चली गयी थी मीठी.. !”

मीठी की आँखों से लगातार आंसू बह रहे थे..
वो इतना ज्यादा घबराई हुई सी थी कि उसके मुहं से कोई शब्द नहीं निकल रहा था…

शौर्य ने इधर उधर देखा और उसे टेबल पर रखा पानी दिख गया.. पुलिस वाले की इजाजत लेकर वो मीठी के लिए पानी लेकर आ गया..।

“लो पानी पीओ… थोड़ा आराम से बैठो और फिर बताओ, बात क्या है ?”

मीठी ने पानी पिया और उसे निरमा ने अपने पास बैठा लिया..

धनुष की हालत भी ख़राब सी ही लग रही थी.. शौर्य ने उसे भी पानी पिला दिया..
धनुष बार बार अपनी गर्दन पर हाथ फेर रहा था….

“क्या हुआ धनुष ? ” शौर्य के सवाल पर उसने धीरे से पलके झपकाई और पानी का गिलास रख सब बताने को तैयार हो गया.. लेकिन उसी वक्त महल में मौजूद पुलिस वाला रियाल को साथ लिए वहाँ पहुँच गया…

एक कॉन्स्टेबल अंदर आकर थाना प्रभारी को ये बता गया..थाना प्रभारी ने उसे बाहर ही बैठाने को कहा..
लेकिन थाना प्रभारी उस पुलिस वाले को पहचान नहीं पाया.. क्यूंकि वो वहां का स्टाफ नहीं लग रहा था.. !

“उस लड़की को बाहर ही बैठा कर रखो, उसके पास से गन मिली है.. ये कोई सामान्य बात नहीं है.. गन के साथ वो महल में मौजूद थी, मतलब वो एक बड़ा खतरा साबित हो सकती थी…।”

उस पुलिस वाले की बात सुन कर धनुष बोल पड़ा..

“सर हो सके तो उसे ये मत पता चलने दीजियेगा की मै और मीठी यहाँ हैं.. ! बल्कि मै आपसे जो कहने जा रहा हूँ, उसे सुनने के बाद तय कीजियेगा कि आगे उस लड़की के साथ क्या करना है..  !”

“बताइये धनुष.. आप क्या बताने वाले है ?”

“सर हो सके तो हर्ष को यहाँ ले आइये !”

पुलिस वाले तब तक हर्ष को भी वहाँ ला चुके थे…. हर्ष की नजर पहले धनुष पर पड़ी, उसे देखते ही हर्ष के चेहरे पर सवाल उभर आया। लेकिन धनुष के साथ ही दूसरी तरफ बैठी मीठी पर नजर पड़ते ही हर्ष के चेहरे पर आश्चर्य के साथ एक खुशी की लहर दौड़ गई।

उसकी मीठी उसके सामने सही सलामत बैठी थी। वह कुछ पलों के लिए मीठी को देखता रह गया।
मीठी भी उसे ही देख रही थी।

इस वक्त उन दोनों की नजरों के बीच और कोई नहीं था, ऐसा लग रहा था इस पूरी दुनिया में इस वक्त और कोई नहीं था। वह दोनों अकेले ही थे।
दोनों का मन नहीं भर रहा था एक दूसरे को देखते हुए.. लेकिन तभी पुलिस वाले का सवाल हवा में गूंज गया..

” मीठी जी, प्रिंस हर्षवर्धन पर यह इल्जाम लगा है कि इसने अपने भाइयों के साथ मिलकर आपके साथ जबरदस्ती की और उसके बाद आपको महल से अचानक गायब करवा दिया। इस बारे में आप क्या बोलना चाहती हैं ?
   देखिए आप पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है। इस वक्त भले ही यहां पर सारे ही लोग महल के मौजूद हैं, बावजूद आप सच्चाई से अपनी बात रख सकती हैं। अगर आपको किसी भी तरह का डर महसूस हो तो आप अंदर चलकर अकेले भी..

पुलिस वाला अपनी बात पूरी कर पाता उसके पहले ही अपनी सारी हिम्मत समेट कर मीठी बोल पड़ी।

” नहीं सर यह बात गलत है कि, हर्ष ने या किसी और ने मेरे साथ कोई ज्यादती की।
    इन्होंने कोई जबरदस्ती नहीं की। मेरे गायब होने में भी हर्ष का हाथ नहीं था..।”

“फिर किसका हाथ था.. किसने आपको गायब किया या फिर आप खुद ही अपनी मर्जी से कहीं गई थी.. ?”

“नहीं सर मैं अपनी मर्जी से कहीं नहीं गई थी..
उस रात जब पार्टी के बाद मैं और रियाल अपने कमरे में पहुंचे, तब किसी बात पर हम दोनों की कहां सुनी हो गई। मैं कमरे से निकल कर हर्ष से ही मिलने जा रही थी, कि तभी पीछे से रियाल ने मुझ पर कोई बहुत भारी चीज मारी, उसने निशाना ऐसे लगाया था कि वह मेरी गर्दन पर लगा और मैं बेहोश हो गई। उसके बाद मुझे कुछ भी ठीक से याद नहीं है, मेरी आंखें खुली तो मैं एक बहुत बड़े से बैग के अंदर थी। उस बैग में मैं सांस तो ले पा रही थी, लेकिन मुझे कुछ नजर नहीं आ रहा था। बहुत मुश्किल से मैं इधर-उधर देखने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसने मेरे हाथों को पीछे की तरफ करके बांध रखा था। मेरे पैर भी बंधे हुए थे। इसके साथ ही मेरे मुंह पर उसने बहुत सारी टेप चिपका रखी थी। जिसके कारण ना तो मैं किसी से मदद मांग सकती थी, और ना ही खुद अपनी मदद कर सकती थी। फिर भी मैंने इधर-उधर अपने आप को हिला कर आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन उस वक्त में पूरी तरह से ब्लैंक थी। काफी देर तक वैसे ही पड़े रहने के बाद धनुष ने मेरा बैग खोला और मुझे बाहर निकाला।
लेकिन वह मुझे बाहर लेकर जा पाता कि उस समय वहां रियाल पहुंच गई…।”

“उसके बाद क्या हुआ मीठी..।”

राजा साहब जो मीठी के आते ही उसे गले से लगा कर सांत्वना दे चुके थे और इतनी देर से धैर्य से बैठे थे, पूछ बैठे..

” उसके बाद जो हुआ वह मैं बताता हूं।”

धनुष ने जैसे ही कहा, सारे लोग धनुष की तरफ देखने लगे।

” मैं समझ चुका था की रियाल ने ही मीठी को पकड़ कर रखा हुआ है…।
मुझे इतना भी आभास हो चुका था कि यह सारा काम रियाल अकेले नहीं कर सकती। कोई तो है जो रियाल की मदद कर रहा है। अब वह महल के भीतर है या बाहर यह जानना बाकी था।
मैंने रियाल से पूछा, लेकिन मुझे पता था वह कोई जवाब नहीं देगी। लेकिन मुझे जानना था, क्योंकि मैं ने रियाल से पहली मुलाकात में ही समझ लिया था कि रियाल जो दिख रही, ये वो नहीं है !
     ये मीठी को बेवकूफ बनाकर महल में घुसने का रास्ता ढूंढ रही है। उसी समय से मैंने रियाल पर नजर रखनी शुरू कर दी थी….।”

हर्ष आश्चर्य से धनुष को देखने लगा..
धनुष ने हर्ष की तरफ देखा, और हल्के से मुस्कुरा कर वापस बोलने लगा..

” मैं आप सबको रियाल की कहानी शुरू से बताता हूं। रियाल का असली नाम वानी है जिसे इसके दोस्त वनी कहां करते हैं….।
यह उस पत्रकार सनंत कस्तूरिया की बेटी है। जिसने राजा साहब को धोखा दिया था।
धोखा इस लड़की के खून में है। जैसे इसके पिता को राजा साहब से बिना कारण की दुश्मनी थी, या जलन थी। वही चीज उनकी बेटी में भी आई है। वानी बिना किसी कारण के राजा साहब और उनके पूरे परिवार से चढ़ती और जलती है। इसलिए यह राजा साहब से बदला लेने के मंसूबे तैयार कर रही थी।

लेकिन इसी बीच इसके साथ एक हादसा हो गया!!

यह पत्रकारिता में है, और हमेशा ही फसाद बढ़ाने वाली और लोगों को जबरदस्ती प्रवोक करने वाली खबरें छापा करती है। कोई छोटी सी भी बात होगी, तो उसका यह ताड़ बनाकर लिखती है। ऐसे ही इसने एक झूठी खबर अपने अखबार पर छापी।
एक लड़के और लड़की के प्रेम प्रसंग का मामला था। दोनों की जात बिरादरी में अंतर था। इसने उसे जबरदस्ती जातिगत रूप देकर अखबार में पेश कर दिया। मामला इतना तूल पकड़ा की लड़की के भाई बंधु किसी पॉलिटिकल पार्टी के गुंडे टाइप लड़कों को लेकर उस लड़के को मारने पीटने चले गए..
जिस वक्त गुंडे उस लड़के को पीटने गए, वह लड़का अपनी गर्लफ्रेंड के साथ ही बगीचे में बैठा बातें कर रहा था।
वहां पहुंचकर उन गुंडो ने इन दोनों के साथ ही हाथापाई शुरू कर दी। ये लड़की के भाइयों के भेजे हुए गुंडे जरूर थे लेकिन इन लोगों का कोई दीन मजहब नहीं होता। इन्होंने उस लड़की के साथ भी बदतमीजी शुरु कर दी। इन गुंडो में से एक इस सारी मारपीट का वीडियो बनाने लगा, और इसके साथ ही इस पूरे वीडियो को फेसबुक पर लाइव कर दिया। साथ ही कैप्शन भी डाल दिया कि लव जिहाद में पकड़े गए लड़के को मार मार कर सीधा किया जा रहा है।
   देखते-देखते खबर वायरल हो गई। लड़की और लड़के दोनों का चेहरा सबके सामने आ गया। लड़की के कपड़े इन लोगों ने इतनी बेदर्दी और बेशर्मी से फाड़े थे कि लड़की अपनी शर्म को संभाल नहीं पाई। जैसे तैसे अपने फटे कपड़ों में वह खुद को समेटकर वहां से भाग खड़ी हुई। लेकिन उसकी किस्मत खराब थी, वह भाग कर रास्ते पर पहुंची कि सामने से आती तेज गति की ट्रक ने उसे रौंद दिया।

    वह लड़का जो कुछ देर पहले अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बैठकर अपने भविष्य के सपने बुन रहा था, के सामने अब उसकी गर्लफ्रेंड की लाश पड़ी थी। वह गुंडे तुरंत वहां से भाग खड़े हुए, लेकिन अब उस लड़के के हाथ में कुछ नहीं रह गया था।
उसने पुलिस में शिकायत दर्ज की, अपनी फरियाद लेकर वह कई स्वयं सेवी संस्थाओं तक भी गया। लेकिन क्योंकि वानी ने इसे लव जिहाद का मामला घोषित कर रखा था, इसलिए हर जगह से इस लड़के को उल्टे पैरों वापस लौटना पड़ा। हर जगह से उसे बुरी तरह से बेइज्जत करके निकाल दिया गया…
वह लड़का जिसके पास मदद मांगने जाता, वहीं उसे वानी के नाम का ताना देकर वहां से भगा देता। उस लड़के की जिंदगी वीरान हो गई थी।
उसकी गर्लफ्रेंड मर चुकी थी, और हर कोई उसे गलत ठहरा रहा था। आखिर वह परेशान हो कर वानी के फ्लैट पर पहुंच गया।
उसने वानी को भला बुरा कहना शुरू कर दिया, उस वक्त वानी के फ्लैट पर वह अकेली थी…।
वह लड़का गुस्से में पागल हो गया था। वानी को बुरा भला कहते हुए उसने उसे मार देने की धमकी भी दी। वानी भी कम तो थी नहीं, उसके अंदर वैसे भी इतना जहर भरा हुआ है कि वह सिर्फ बातों से ही सामने वाले को खून के आंसू रुला सकती है।

उसने भी उस लड़के को उटपटांग बातें कहना शुरू कर दिया। वह लड़का अपना आपा खो बैठा और उसने वानी का गला दबाना शुरू कर दिया..
अपने गुस्से में पागल हुआ वह लड़का वानी का गला दबाता जा रहा था और उसे बातें सुनाते जा रहा था। अपनी रक्षा के लिए वानी भी हाथ पैर चला रही थी, और तभी वानी के हाथ में वही टेबल पर रखा शैम्पेन का बोतल आ गया।
वानी ने वह बोतल उठाई और सीधे उस लड़के के सर पर फोड़ दी।

बोतल ऐसी जगह लगी कि उस लड़के के सर से खून की धार बहने लगी। वह तुरंत जमीन पर गिर गया। वानी ने उसे देखा, और एकदम से उसे समझ नहीं आया कि क्या करना चाहिए।

और उसी वक्त वानी की खिड़की के ठीक बाहर से किसी ने वानी की तस्वीर खींच ली..।

वानी चाहती तो तुरंत उस लड़के को लेकर अस्पताल जा सकती थी। उसका इलाज करवा सकती थी। लेकिन वानी के अंदर का गुस्सा और पागलपन उस लड़की को इंसान रहने ही नहीं देना चाहता था। वानी के अंदर का  दरिंदा जाग गया। उसने अपनी मां की पुरानी साड़ी निकाली और उसमें इस लड़के को लपेटना शुरू किया। पूरी तरह से लपेटने के बाद उसने वहां फर्श पर बिखरे खून को साफ किया, और उसके बाद एक बहुत बड़े से बैग में इस लड़के को फोल्ड करके भर दिया।  उस बैग को लेकर वह अपने फ्लैट से बाहर निकल गई।

   तब तक रात हो चुकी थी, अपनी कार की डिक्की में इस बैग को डालकर वानी अपने फ्लैट से बाहर निकल के शहर से काफी दूर एक निर्जन स्थान पर पहुँच गई।
उसने अपनी गाड़ी रोकी और इस बैग को कार से निकाल कर वहीं छोड़ दिया। रोड पर रखने के बाद उसने धीरे से बैग को धक्का दे दिया। बैग उस रोड से नीचे की तरफ गिरता चला गया। वानी को लगा वह लड़का मर चुका था।
वानी अपने घर वापस लौट आई।
वानी को लगा कि अब सब कुछ ठीक है। शायद किसी को भी इस बात की भनक नहीं लगी। लेकिन अगली सुबह जब वानी ने अपने फ्लैट का दरवाजा खोला तो सामने एक लिफाफा पड़ा था, और जिसमें कुछ तस्वीरें थी।
उन तस्वीरों में साफ नजर आ रहा था कि वानी के हाथ से लगी बोतल की चोट के कारण लड़का मर गया है। अलग-अलग तस्वीरों में यह साफ जाहिर हो रहा था, यहां तक कि वानी ने जहां पर कार रोक कर डिक्की से उस बैग को निकाला था, उसकी तस्वीर भी वहां मौजूद थी।
    वानी के हाथ पांव फूल गए कि अब क्या होगा? क्योंकि जैसे ही यह सब पुलिस को पता चलता, वानी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता।
    लेकिन तभी वानी के फोन में किसी का फोन आने लगा। उसने फोन उठाया तो सामने वाले ने उसे इन फोटोग्राफ्स के बदले ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। सामने वाले ने उसके सामने शर्त रखी कि उसे महल में दाखिल होना है, और राजा साहब के भतीजे के ऊपर मोलेस्टेशन का चार्ज लगाना है। यह काम वानी को अपने ऊपर लेकर करना था, यानी कि हर्ष ने वानी के साथ जबरदस्ती की है ऐसा इल्जाम लगाना था।

लेकिन महल में घुसने के लिए वानी को मीठी का जरिया मिला। किसी वक्त पर वह मीठी के साथ कॉलेज में पढ़ चुकी थी। वानी को बचपन से लिखने का शौक था। और उसे हर किसी से अपने लिए सिंपैथी चाहिए होती थी। इसलिए उसने मीठी को भी अपने दुखद बचपन के कई किस्से सुना रखे थे।
वह अक्सर मीठी से अपनी बीमारियों का जिक्र भी किया करती थी। जिनमें से कई बीमारियां ऐसी हैं जो वानी को कभी हुई भी नहीं, उनके बारे में बस मोबाइल से पढ़कर या इधर-उधर से सुनकर ही उसने खुद को उस बीमारी का शिकार बना दिया था। उसे इन्सोम्निया था, इम्पल्सिव डिसऑर्डर्स थे, एंगर इश्यूस थे, डिप्रेशन था! लेकिन असल में एंगर इश्यूस के अलावा उसे कुछ नहीं था, उसने मीठी से सब झूठ बोला था..

मीठी कॉलेज के समय से ही वानी पर बहुत दया किया करती थी।
     बस जब वानी को उस आदमी ने महल के अंदर घुसने के लिए धमकी दी, तब वानी को मीठी याद आ गई। वानी पत्रकारिता से कॉलेज के दिनों से जुड़ी हुई थी। लेकिन उसने इस बात को जाहिर नहीं किया था। मीठी को यही लगता था कि वानी उसके साथ कॉलेज में पढ़ती है।

कुछ दिनों पहले वानी ने मीठी के साथ रहने की इच्छा जताई और वह मीठी के साथ रहने भी चली आई। और इस तरह जैसे ही मीठी के महल आने का प्लान हुआ रो धोकर उसने मीठी को खुद को साथ ले चलने के लिए मना लिया।
लेकिन वानी इस समय भूल गई कि वह महल के अंदर इतनी आसानी से कैसे प्रवेश कर सकती है?
महल के में गेट पर लगे सिक्योरिटी सिस्टम में उसके बैग के अंदर रखी हुई गन पकड़ में आ गई थी।
लेकिन उस वक्त मैं उन सबके साथ मौजूद था, और मुझे जानना था कि आखिर वानी के दिमाग में चल क्या रहा है? और बस इसीलिए जब उसकी गन सिक्योरिटी चेक में फंसी तब जैसे ही मुझे अलर्ट आया, मैंने सिक्योरिटी ऑफिसर्स को उसे क्लीयरेंस देने के लिए कह दिया। और इस तरह वानी अपनी गण के साथ महल में दाखिल हो गई….

मेरी हर वक्त उस पर नजर थी। क्योंकि मुझे यह पता था कि कोई उसे ब्लैकमेल कर रहा है। मैं जानना चाहता था कि वह कौन है? हालांकि मुझे यह पता था कि वह किसी तरीके से हर्ष को फंसाना चाहती है, लेकिन मैंने यह नहीं सोचा था कि वह मीठी को किडनैप कर लेगी। बस वही चूक हो गई।
      जब मीठी गायब हुई तब समझ में आया कि इसने अपना प्लान थोड़ा बदला है। और जब मैंने उसके कमरे की तलाशी ली तो मुझे मीठी मिल गई।
     मैं मीठी को लेकर वहां से निकलता, उसके पहले वह वहां चली आई। लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि जो भी वानी से यह सब करवा रहा है, वह भी कहीं मौजूद था।
      मैं वानी को कुछ कह पाता कि उसके पहले एक छोटा सा एरो आकर मेरी कनपटी पर लगा, जिसमें बेहोशी की दवा थी। पल भर में मेरी आंखें बंद हो गई। और मैं बेहोश हो गया।
उसके बाद वानी फटाफट वहां से निकलने लगी। शायद वानी को सिर्फ हर्षवर्धन को जेल तक पहुंचाने का काम करना था, जो उसने कर दिया था…।

लेकिन ऐसा वह सोच रही थी, सामने वाला नहीं। मुझे हल्का सा होश आने लगा था, और मैंने वानी की बातें सुन ली।
वह किसी से फोन पर बात कर रही थी। सामने वाला कुछ ज्यादा ही नाराज हो रहा था। वह वानी के काम से खुश नहीं था। वह इतनी तेज आवाज में बोल रहा था कि मुझे भी उसकी आवाज साफ-साफ सुनाई दे रही थी। वानी जिद पर अड़ी थी कि उसने हर्षवर्धन को थाने पहुंचा दिया है और अब उसका काम खत्म हो गया। और अब वह इस महल से निकलकर यहां से हमेशा के लिए चली जाएगी। लेकिन वह सामने वाला आदमी यह कह रहा था कि अगर मीठी और धनुष थाने पहुंच गए तो हर्षवर्धन छूट जाएगा, और वह इंसान जो करना चाहता है वह काम अधूरा रह जाएगा।
इसलिए उसका यह कहना था कि वानी को मीठी और मुझे महल से किसी तरीके से निकालना होगा, और हमें गायब करना होगा। वानी ने साफ-साफ कह दिया कि महल से दो लोगों को निकाल कर बाहर ले जाना उसके बस की बात नहीं है।
और तब उस आदमी ने कहा कि हम दोनों को किसी तरीके से वह बस कार की डिक्की तक पहुंचा दे। महल के गेट के ठीक बाहर वह हम लोगों को अपने साथ ले जाएगा। मैं बेहोशी की एक्टिंग करते हुए जानना चाहता था कि वानी क्या करती है लेकिन वो बहुत चालाक निकली। उसने एक बार फिर मीठी को इस बैग में पैक करना शुरू किया और इसके साथ ही उसने मुझे भी एक बैग के अंदर डाल दिया। मुझे बेहोश करने के बाद एक दूसरा छोटा तीर मीठी को भी मारा गया था शायद क्योंकि मीठी भी बेहोश हो चुकी थी।
मैं और मीठी बेहोश है, ऐसा सोचकर वानी अपना काम निपटा रही थी। लेकिन कपड़े के उस झीने बैग से मुझे बाहर वानी का सारा काम नजर आ रहा था। वानी को पता था कि उस आदमी ने वानी पर कहीं से नजर रखी हुई है। और इसलिए वानी उसे दिखाने के लिए हम दोनों को पैक कर रही थी। लेकिन उसके बाद उसने दो बड़े-बड़े बैग निकाले और उनमें अपना खुद का सामान रखना शुरू किया। मेरा और मीठी, दोनों का मोबाइल स्विच ऑफ करके उसने बैग में डाला, अपनी गन डाली और हम दोनों को खींचकर उसने अपने बेडरूम के बाथरूम में लॉक कर दिया। और उसके बाद वह दोनों बैग लेकर वह अपने कमरे से निकल गई।

क्योंकि फिलहाल वानी को बस महल से निकलना था। वानी की आज रात की ऑस्ट्रेलिया की फ्लाइट थी। और एक बार ऑस्ट्रेलिया भाग जाने के बाद हम लोगों का उसे ढूंढ कर लाना असंभव था।
वानी राजा साहब से बदला जरूर लेना चाहती थी, वह उनसे नफरत भी बहुत करती है। लेकिन इस सारे मामले में वह इस पूरी तरह से उलझ गई थी कि अब इस सबसे बचकर भागना ही उसे एक उपाय लग रहा था।
वह बैग लेकर बाहर निकल गई। लेकिन उसे मालूम नहीं था कि यह महल इतना भी आसान नहीं है।

बाहर मेरा सिक्योरिटी गार्ड तैनात था।

उसे मैंने पहले से ही कह रखा था कि अगर इस लड़की के आसपास मैं नजर नहीं आता हूं, तो इसका बैग खुलवाकर तलाशी जरूर लेना। उसने वही किया और बैग की तलाशी में उसे गन मिल गई। ज़ाहिर था कि महल के अंदर किसी बाहरी व्यक्ति के बैग से गन मिलना बहुत बड़ा गुनाह था। और इसके लिए उस सिक्योरिटी गार्ड ने वानी को डराया धमकाया और उसे लेकर थाने चला आया।

मैंने ही उसे पुलिस की यूनिफॉर्म पहनने कहा था और इसके लिए मैंने पहले से ही इजाजत ले ली थी। अगर वह पुलिस की यूनिफॉर्म में नहीं होता तो वानी उसे अपनी बातों का चकमा देकर वहां से निकल जाती।

इस तरह से वानी उर्फ रियाल की सारी कहानी यह है। मुझे सब कुछ जानना था इसलिए मुझे बेहोश होना भी जरूरी था। जब मुझे यकीन हो गया कि वो यहां से निकल गई है,तब मैं उस बैग से बाहर निकल आया, और फिर मीठी को बाहर निकाला। और उसके बाद मीठी को साथ लेकर तुरंत यहां पहुंचा हूं।

लेकिन मैं अब भी आप सब से कहता हूं कि वानी सिर्फ एक मोहरा है। इन सब के पीछे कोई और है, जो हर्ष को जेल भेज कर पता नहीं अपना कौन सा मकसद पूरा करना चाहता है। इसलिए मैं आपसे एक बार यह कहना चाहता था कि बाहर बैठी वानी को अब तक यह नहीं पता है कि मीठी और मैं आप सबको मिल चुके हैं। किसी तरीके से हमें वानी से यह बात उगलवानी होगी कि वह किसके लिए काम कर रही थी..।”

“ओह गॉड इतना बड़ा षड्यंत्र.. “

अब तक धनुष की बातें सब सांस रोक सुन रहे थे, लेकिन अब हर्ष से नहीं रह गया..।

“लेकिन धनुष जो भी उसे ब्लैकमेल कर रहा है, वह उ

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Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
2 years ago

ओह माय गॉड! बहुत संवेदनशील हो गई कहानी, यह सब क्या है, वाणी को कौन इस्तेमाल कर रहा है, वानी ने अपनी महत्वाकांक्षा में किसी की जिंदगी बर्बाद कर दी… हर्ष बेचारा विश्वास का मारा, फंस गया देखो यह कुंवारा, मीठी मासूम है, लेकिन पार्ट बहुत अच्छा है दीदी…👍💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️💐💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐