जीवनसाथी -3 भाग -64

जीवनसाथी -3 भाग -64

जीवनसाथी by aparna

“बहुत कुछ तुमसे कहने की तमन्ना, दिल में रखते हैं
मगर जब सामने आते हैं, कहना भूल जाते हैं
मोहब्बत में ज़ुबाँ चुप हो, तो आँखें बात करती हैं
वो कह देती हैं वो बातें जो, कहना भूल जाते हैं
ये आंखें देख कर…

ये आँखें देख कर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं
इन्हें पाने की धुन में हर तमन्ना भूल जाते हैं….

अपने कमरे में ये गीत सुनती कली खिड़की पर खड़ी थी.. उसे ये गाना बहुत पसंद था.।
पता नहीं क्यों, लेकिन उसकी अंदर संगीत के लिए एक खास लगाव था, जिसका कारण शायद उसकी माँ थी..।
नेहा की पसंद हूबहू कली में उतर आयी थी, तभी तो वो अपनी पैदाइश के पहले के गीतों के लिए भी इतनी मोहित थी..

बालकनी में खड़ी वो गीत के साथ साथ गुनगुना रही थी तभी अँधेरे गलियारे में उसे एक परछाई सी नजर आयी.. उसने ध्यान से देखा कोई अँधेरे में चला जा रहा था..
अँधेरे के कारण चेहरा या और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन उस आकृति को चलने में दिक्कत हो रही थी.. यूँ लग रहा था जैसे उस आकृति ने कोई भारी वस्तु अपने कंधे पर उठा रखी हो..

आंखे छोटी किये कली उसे ध्यान से देखने की कोशिश कर रही थी कि मीरा उसकी पास आकर खड़ी हो गयी..

“क्या हुआ कली.. नींद नहीं आ रही क्या ?”

“हम्म.. तुम तो सो गयी थी.. जाग कैसे गयी.. ?”

“हाँ यार सो गयी थी, लेकिन वहाँ पार्टी में थोड़ा ज्यादा ही खा लिया… बस नींद में ही पेट गुड़गुड़ाने लगा.. फ्रेश होकर आ रही हूँ.. !”

उसकी बात सुन कली हँस पड़ी..

“फिर तो तुम्हे वापस भूख लग गयी होगी ?”

मीरा ने मुहं बनाया और अपने बेड के साइड टेबल पर रखे बॉक्स को खोलने लगी..

“जब से यहाँ आये हैं, तब से इस बक्से को देखना चाहती थी.. आखिर ये रॉयल लोग बेड के किनारे क्या रख कर सोते हैं ?”

उसने बॉक्स खोला उसमे तरह तरह के स्वाद से भरे मावे रखे थे, मीरा ख़ुशी से किलक कर खाने लगी..
लेकिन इसी सब में कली का ध्यान गलियारे से हट गया और जब उसने वापस पलट कर देखा तो वहाँ कोई नहीं था…।

****

अगली सुबह सब ठीक आठ बजे नाश्ते की टेबल पर मौजूद थे.. लेकिन मीठी नजर नहीं आ रही थी..
रियाल भी अब तक नहीं आयी थी..!
हर्ष के चेहरे पर परेशानी नजर आने लगी..

“मीठी, अब तक नहीं आयी.. क्या मैं देख कर आऊँ ?”

“तुम क्यों जाओगे हर्ष.. हम किसी नौकर को भेज देते हैं !”..रूपा ने कहा लेकिन हर्ष का मन नहीं मान रहा था.. वो अपनी जगह से उठ कर खड़ा हो गया.. उसकी ठीक बाजु में बैठी प्रियदर्शिनी की आँखों में तड़प चली आयी….!

हर्ष उसका होने वाला पति था आखिर, उसे किसी और की इतनी चिंता करने की क्या ज़रूरत आखिर.. लेकिन फिर बिना किसी से कुछ बोले वो मीठी के कमरे की तरफ बढ़ गया..

उसने सुबह से दो बार उसकी मोबाइल पर कॉल भी लगाया था। लेकिन मीठी ने रिसीव नहीं किया था, और फिर उसका मोबाइल बंद आने लगा था..।

हर्ष एक तरह से भागते हुए मीठी के कमरे में पहुँच गया..
उसने बाहर बैठी सहायिका से अंदर का हाल पूछा और दरवाज़े पर दस्तक दे दी…

दो बार दस्तक देने के बाद अंदर से रियाल का रिरियाता सा स्वर सुनाई दिया..
और थकी सी वो बाहर चली आयी..

“आओ हर्ष.. अंदर आओ !”

हर्ष तेज़ी से अंदर दाखिल हो गया.. -” मीठी कहाँ है ?”

“मीठी ?” रियाल आंखे फाडे हर्ष को देखने लगी..

“हां मीठी.. कहाँ है वो !”

“तुम्हारे साथ नहीं है वो ?”

“मतलब !” हर्ष की आवाज़ में अब क्रोध झलकने लगा था..

“मतलब कल रात वो तुमसे मिलने ही गयी थी, और फिर वापस नहीं आयी तो मुझे लगा तुम दोनों तुम्हारे रूम में…

“ओह्ह शटअप… तुम कैसे ऐसी बकवास कर लेती हो, वो भी उसके बारे में जिससे प्यार होने का दावा करती हो ?”

“मैं सच बोलती हूँ और सच ऐसा ही कड़वा होता है मिस्टर गोल्डन स्पून !”

“सच कड़वा उनके लिए होता है, जिसे झूठ की चाशनी भाती है.. जो सच का आदि है उसके लिए कड़वा नहीं होता.. समझी मिस बददिमाग !”

“मुझे कितनी भी गालियाँ दे लो मिस्टर रॉयल लेकिन ये सच है कि वो तुम्हे अब कभी नहीं मिलेगी !”

“क्यों.. ऐसा क्यों बोल रही हो..?
रियाल… सुनो.. अगर तुमने मीठी को अपनी ज़िद पूरी करने के लिए ज़रा सी भी तकलीफ पहुंचाई ना, तो मैं सच कह रहा हूँ, मैं भूल जाऊंगा कि तुम लड़की हो.. और फिर तुम्हारे साथ जो होगा ना उसका परिणाम सोच कर भी तुम सिहर उठोगी…।”
हर्ष की नजर बचाकर रियाल अपना फ़ोन खोल चुकी थी.. 

“क्या कर लोगे मेरे साथ… मैं अगर मीठी से प्यार करती हूँ, तो मुझे उसकी सजा दोगे.. ?”

“सजा नहीं भयानक और खौफनाक सजा दूंगा… मैं उन्ही के साथ शरीफ हूँ जो मेरे साथ शरीफ है..!
मेरे साथ बुरा करने वालों को मैं भी छोड़ता नहीं हूँ… समझी मिस घटिया !”

“कर के दिखाओ.. क्या कर सकते हो ?”

“मतलब तुम नहीं बताओगी कि मीठी कहाँ है ?”

“जब मुझे पता ही नहीं तो मैं क्या बताऊँ ? अगर तुम इतने ही उसके प्यार में पागल हो तो ढूंढ़ लो फिर ?”

हर्ष को ये तो मालूम था कि रियाल उससे नफरत करती है। लेकिन वो अब तक यही सोचता आया था कि रियाल मीठी से बहुत प्यार करती है और इसलिए वो मीठी को कभी नुकसान भी पहुंचा सकती है ये सोचना भी हर्ष के लिए असंभव था..।
लेकिन रियाल की बातें उसे अचरज में डाल रही थी..

उधर उसके इस तरह खाने की मेज से उठ जाने से रानी माँ नाराज़ हो गयी थी…
वो कितनी भी अंधविश्वासी हो या अपने बेटों के प्यार में पागल हो, लेकिन महल के नियमों के साथ वो कोई अवहेलना पसंद नहीं करती थी….।

हर्ष के उठ कर जाते ही उन्होंने एक गहरी साँस ली और सबकी तरफ खाना शुरू करने का इशारा कर दिया..

“हर्ष आ जाते.. तब हम खा लेंगे !” प्रियदर्शिनी ने चहक कर अपनी होने वाली सासु माँ को खुश करना चाहा, रूपा ने सर्द आँखों से उसकी तरफ देख कर उसे खाने का आदेश दे दिया..

“हर्ष खाने की टेबल से उठ कर गए हैं… अब आज उनका ब्रेकफास्ट का समय ख़त्म हो चुका..।
अब वो लंच ही खाएंगे।
आप सब अपना अपना नाश्ता कीजिए..!”

आज सुबह सवेरे ही राजा साहब और बांसुरी रियासत के किसी मसले के लिए निकल गए थे, इसलिए वह दोनों वहां मौजूद नहीं थे। देखा जाए तो घर के बच्चे, प्रियदर्शनी के माता-पिता के साथ प्रियदर्शनी और बाकी लोग ही मौजूद थे।
     यह आदेश पाते ही बाकी सभी ने चुपचाप नाश्ता खाना शुरू कर दिया, लेकिन हर्ष के दोनों भाई इधर-उधर देखने लगे। शौर्य तो हर्ष के बिना एक कदम नहीं उठाता था, उसने अपने प्लेट में परोसी हुई चीजों को धीरे-धीरे इधर-उधर करना शुरू कर दिया। कली की पूरी नजर शौर्य पर थी। शौर्य ने अब तक अपने मुंह में एक टुकड़ा नहीं रखा था। जब शौर्य ने हीं नहीं खाया तो कली से कैसे खाया जाता?
वह भी चुपचाप बैठी रही।
नाश्ते की दूसरी सर्विंग के लिए नौकरों ने सबके सामने रखी प्लेट हटानी शुरू कर दी। शौर्य और कली के साथ ही यश की प्लेट भी जैसी की तैसी रखी थी। नौकरों ने इशारे से पूछा और इन तीनों ने ही प्लेट हटाने का इशारा कर दिया।

रूपा की दबी छुपी सी नजर शौर्य और यश पर थी, लेकिन उसने ऐसे दिखाया जैसे उसने उन लोगों पर ध्यान ही नहीं दिया। अगली प्लेट में परोसा गया नाश्ता भी बिल्कुल वैसे का वैसा वापस चला गया।
चाय के प्याले भी भरे रह गए।
दस मिनट किसी तरह वक्त बिताने के बाद शौर्य ने अपनी रानी मॉम की तरफ देखा और वहां से निकलने की इजाजत मांग ली। उसके उठते ही यश भी उठ गया, कली भी लपक कर उठी और रानी मां को एक झटके से प्रणाम कर शौर्य और यश के पीछे-पीछे बाहर चली गई…।
नाश्ता तो खैर रानी मॉम से भी नहीं खाया गया…

मीरा के मुंह में खूब सारा नाश्ता भरा हुआ था, उसकी प्लेट भी ठसाठस भरी थी, उसकी प्लेट के बगल में दो जूस के गिलास और एक चाय का कप भी रखा हुआ था! वह आंखें फाड़े उन सब को वहां से जाते हुए देख रही थी। क्योंकि उसे अभी अपना नाश्ता करने में वक्त लगने वाला था। एक नजर उन सब पर डालकर उसने मन ही मन सोचा छोड़ो मैं पांच मिनट देर से भी पहुंची तो क्या बिगड़ जाएगा, और वापस पूरी तन मन से नाश्ते में लग गई।

प्रियदर्शनी भी हर्ष के साथ खाना चाहती थी, लेकिन हर्ष की गैर मौजूदगी में अपनी होने वाली सास के आदेश का उल्लंघन करने की उसकी हिम्मत नहीं थी और इसलिए उसने भी बड़े प्रेम से बाकी सभी के साथ नाश्ता खा लिया…

शौर्य और यश तेज़ी से चलते हुए मीठी के कमरे की तरफ जा रहे थे। उन दोनों को मालूम था कि हर्ष इस वक्त वही होगा। कली भी शौर्य के कदम से कदम मिलाने की कोशिश में उसके पीछे भाग रही थी,

” शौर्य मेरी बात तो सुनो।”

“हां! कली सुन लूंगा, लेकिन इस वक्त हर्ष भाई के पास जाना बहुत जरूरी है।”

” मैं तुम्हें हर्ष भाई के पास जाने से नहीं रोक रही, लेकिन मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूं ।”

शौर्य भाग रहा था, लेकिन भागते-भागते भी उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई। इस लड़की का भी टाइमिंग बड़ा अजीब है। वैसे जब बोलने का वक्त होता है तो आजकल सारा वक्त चुप बैठी रहती है, और अब जब मैं हर्ष भाई के पास जा रहा हूं, तब इसे अपने मन के जज्बात कहने है।

   मन ही मन यह सोचते हुए शौर्य ने बिना पीछे मुड़े ही हाथ उठाकर उसे चुप रहने का इशारा किया और आगे बढ़ गया। कली भी उसके पीछे-पीछे बढ़ गई। वह लोग सीढ़ियां चढ़कर मीठी के कमरे की तरफ मुड़े ही थे के सामने से परेशान सा हर्ष आता दिखाई दे गया।

   “क्या हुआ हर्ष भाई? मीठी अपने कमरे में नहीं है ?”

हर्ष ने ना में गर्दन हिला दी।

“आपने कमरे की तलाशी ली?” यश ने पूछा, हर्ष ने कंधे उचका दिये।

” लड़कियों का कमरा है वह, मैं ऐसे कैसे तलाशी ले सकता हूं ? और फिर मीठी के साथ आई वह लड़की हमारी मेहमान है। इस तरह से उसके कमरे की तलाशी करवाना हमें शोभा नहीं देता।”

“लेकिन मीठी अचानक चली कहां गई?”

शौर्य ने पूछा और हर्ष ने ना में गर्दन हिला दी।
हर्ष इसलिए ज्यादा परेशान था, क्योंकि जिस वक्त वह नाश्ते की टेबल से उठकर मीठी के कमरे की तरफ जा रहा था, उस समय रास्ते में वह महल के ऑफिस में भी गया था। जहां उसने कल शाम पार्टी के बाद से अभी सुबह तक का सीसीटीवी फुटेज चेक किया था। जिसमें उसे मुख्य दरवाजे से बाहर जाती या आती मीठी नजर नहीं आई थी। हालांकि कल के महल के कार्यक्रम के बाद ढेर सारे लोग मुख्य गेट को पार करके बाहर निकले थे। लेकिन उन सब में उसे मीठी नहीं दिखाई दी थी। इसलिए उसे पूरा यकीन था कि मीठी महल में ही है। दूसरी बात मीठी की मां निरमा अपनी बेटी के लिए इतनी ज्यादा भावुक थी कि उनसे मीठी कहां है यह सवाल पूछना ही बहुत बड़ा बवाल खड़ा कर सकता था।
बांसुरी भी सुबह-सुबह राजा साहब के साथ महल से निकल चुकी थी। इसलिए उसकी तरफ से भी मदद की कोई उम्मीद बाकी नहीं थी। और बस यही हर्ष की परेशानी का मुख्य कारण था।

उसने यह सारी बातें शौर्य और यश को बताई और वह तीनों वहां से ऑफिस रूम की तरफ वापस बढ़ गए।

” चलिए भाई एक बार फिर सीसीटीवी फुटेज देखते हैं। कली भी उन लोगों के पीछे-पीछे चलने लगी। ऑफिस रूम में पहुंचकर वह सभी महल में लगे सारे कैमरा को खंगालने लगे, और उस समय कली को बोलने का मौका मिल गया।

” मैं आप सब से कुछ बताना चाहती हूं।”

शौर्य ने एक बार फिर हाथ उठाकर उसे चुप रहने का इशारा किया।

” 2 मिनट रुको कली, हम सब बहुत परेशान है, तुम जानती हो अगर वाकई मीठी महल से गायब हो चुकी होगी,तो यह हम सबके लिए कितनी बड़ी परेशानी पैदा कर सकता है।”

” मैं वही तो बताना चाह रही हूं शौर्य। कल रात में जब पार्टी के बाद मैं अपनी बालकनी में खड़ी थी, तब मैंने सामने वाले अंधियारे गलियारे से किसी को जाते देखा था।”

” क्या वह मीठी थी?” हर्ष ने पूछा

” नहीं, वह जो भी था उसने काले रंग की जींस पहन रखी थी। एक बड़ा सा ओवरकोट डाला हुआ था। हुडी से उसने अपने सर को ढक रखा था, और मुझे सिर्फ हल्की आकृति ही नजर आ रही थी। पर यह लग रहा था कि उसके कंधे पर कोई भारी बैग सा टंगा हुआ है।”

” तुम कहना क्या चाह रही हो? कोई मीठी को उठाकर महल से बाहर लेकर गया है?”

हर्ष ने कली की तरफ देखकर कहा,

” मैं ऐसा नहीं कह रही हूं, मैं बस यही कह रही हूं कि मैंने कोई आकृति देखी थी।”

” क्या वक्त रहा होगा वह?”

” लगभग रात के बारह या साढ़े बारह बजे होंगे..!”

हर्ष शौर्य और यश कैमरे में उस वक्त को देखने लगे और अचानक उन्हें महल के पिछले बगीचे के पास वैसे ही एक आकृति दिखाई दे गई। उस समय धनुष भी वहां पहुंच गया।
धनुष ने उन सब को चिंतित देखा और जैसे ही कारण पूछा शौर्य ने सारी बातें उसे फटाफट बता दी..

“मैं रियाल के कमरे में जा रहा हूँ.. आप लोग बगीचे की तरफ जाइये.. ! वैसे गार्ड्स और सिक्योरिटी को बुलाना है या नहीं ?”

धनुष के सवाल पर हर्ष ने ना में गर्दन हिला दी।

“नहीं धनुष, अगर गार्ड्स और सिक्योरिटी को पता चला तो महल में सबको पता चल जाएगा। और फिर यह बात मीठी के पेरेंट्स तक पहुंच जाएगी।

यह भी हो सकता है कि मीठी खुद ही कहीं चली गई हो।

इसलिए हम इस तरह से इस बात को फैला नहीं सकते क्योंकि अगर मीठी खुद कहीं गई होगी तो यह बात करना उसके लिए अच्छा नहीं होगा।”

” लेकिन अगर मीठी खुद कहीं जाती तो मुख्य द्वार पर नजर तो आती? महल के चारों मुख्य द्वार हमने देख लिए, वह कहीं से भी नहीं गुजरी है।”

” तुम ठीक कह रहे हो यश! लेकिन हो सकता है, वह महल में ही कहीं हो। हमारा महल भी तो छोटा नहीं है।”

” हां, हर्ष भाई आप सही कह रहे हैं। तो ऐसा करते हैं कि मैं महल में ही मीठी की तलाश करता हूं, आप लोग बगीचे की तरफ जाइये।”

हर्ष ने इस बात पर भी हामी भर दी।
” हां यश तुम कमरों की तरफ देखो, शौर्य तुम और कली महल की हर छत पर जाओ, वहां देख लेना। मैं बगीचे की तरफ जाता हूं..।
धनुष तुम रियाल के कमरे के साथ-साथ सारे सर्वेंट्स के कमरे, हमारे महल के दोनों किचन, दोनों वॉशिंग एरिया भी कर लेना।

“हां हर्ष तुम परेशान मत हो।”

और इतना कह कर वह टोली बिखर गई। सारे लोग अपने तरफ बढ़ गए। कली शौर्य के साथ ही छत की तरफ चली गई। उसे लगा सीढियों से जाना है। शौर्य ने उसे रोका,

” चलो लिफ्ट से चलते हैं।”

” नहीं मुझे तो सीढ़ियों की आदत है।”

” हां लेकिन पैंतीस मंजिल के महल की हर छत को हमें देखना है। तुम इतनी सीढ़ियां चढ़ पाओगी?”

पैंतीस मंजिला महल सुनकर ही कली को गश आने लगा।

” क्या हुआ चक्कर आ गए?”

” नहीं, लेकिन कुछ ज्यादा ही बड़ा नहीं है तुम्हारा महल? इतने तो लोग भी नहीं है।”

” हां, लेकिन महल ऐसे ही बनाए जाते हैं। मुझे खुद समझ नहीं आता कि इतने सारे कमरे क्यों बनाए जाते हैं। खैर यह पहले के तरीके थे, पहले एक राजा की सौ सौ रानियां होती थी। उनके लिए कमरे भी तो चाहिए होते थे ना। फिर उन रानियों के ढेर सारे बच्चे होते थे, उनके लिए भी कमरे चाहिए होते थे। तो बस महलों को बनवाने का यही एक तरीका विकसित हो गया। जो आज तक चल रहा है।”

“अब कहाँ महल होते हैं….   मैंने तो अपनी जिंदगी में पहला लाइव महल देखा है, आई मीन लंदन में भी महल देखे मैंने, लेकिन यहां महल विथ महल वासी देखें।”

कली की प्यारी सी बात सुनकर पैंतीस के चेहरे पर इतनी उलझन के बावजूद हल्की सी हंसी चली आई, और “चलो लिफ्ट से चलते हैं” कहकर पैंतीस ने लिफ्ट का बटन दबाया और दोनों लिफ्ट में दाखिल हो गए…

हर्ष बगीचे की तरफ निकल गया…
वो इधर से उधर देखते हुए चल रहा था…

बगीचा ढेर सारे फूल पौधो से भरा हुआ था…

बगीचे के पिछली तरफ लॉन्ड्री थी.. जहाँ महल के कपड़े धोए सुखाय और आयरन किए जाते थे। वहां इस वक्त कपड़े सूख रहे थे…
हर्ष का ध्यान अचानक उन कपड़ो पर चला गया..
वहाँ मीठी ने पिछली रात जो स्टॉल अपनी बांह पर डाल रखा था, वो दिख गया..
हालाँकि मीठी की पहनी हुई ड्रेस नहीं थी वहाँ, लेकिन स्टॉल था और उसकी साथ ही रियाल की पिछले दिन पहनी ड्रेस भी थी..

ऱोज़ सुबह लांड्री से एक आदमी महल के हर कमरे में जाकर धोने वाले कपड़े समेट कर ले आया करता था..
अमूमन जो मेहमान महल में रुकते थे, वो अपने रात के कपडे अगले दिन शाम तक या उसकी बाद निकालते थे..

इतनी सुबह पिछली रात के पहने कपड़े रियाल ने क्यों धुलने डाल दिए? जब की मीठी कमरे से गायब है.. ?
अगर मीठी के गायब होने में रियाल का हाथ नहीं है तो वो खुद परेशान क्यों नहीं है…?
वो कैसे अपने सारे काम कर रही ? यहाँ तक की लॉन्ड्री में कपड़े भी डाल रही.. ?

इसका मतलब वो बिलकुल रिलैक्स है..

और इसका असली मतलब उसे मालूम है कि मीठी कहाँ है.. !”

हर्ष उलटे पैरो मीठी के कमरे की तरफ भाग खड़ा हुआ..

उसने दरवाजे पर थाप देनी शुरू कर दी….

उसके लगातार दरवाज़ा पीटने पर खीझ कर रियाल ने दरवाज़ा खोल दिया..

“क्या हुआ मिस्टर गोल्डन स्पून.. इतनी हड़बड़ी में क्यों हो !”

हर्ष ने रियाल का गला दबोच लिया..

“सच सच बताओ मीठी कहाँ है ?”

रियाल हाथ पैर मारती हर्ष के बाजुओं से अपनी गर्दन छुड़ाने का प्रयास करने लगी..

“वैसे तो मैं लड़कियों पर हाथ नहीं उठाता लेकिन आज तुमने मुझे वाकई मजबूर कर दिया रियाल.. तुमने बदतमीजी की हर हद पार कर दी..
मै मीठी से प्यार करता हूँ और उसके लिए सारी दुनिया से लड़  जाऊंगा.. जान दे सकता हूँ तो जान ले भी सकता हूँ… !”

रियाल ने खुनी आँखों से हर्ष की तरफ देखा और अपने हाथ उसकी चेहरे की तरफ बढ़ा कर उसे नोचने की कोशिश करने लगी..
इसी सब में हर्ष की बांह में रियाल ने जगह जगह अपने नाख़ून गड़ा दिए…

कुछ देर में ही रियाल अपने दोनों हाथो से क्रॉस सा बना कर हर्ष से खुद को छोड़ देने की भीख मांगने लगी..

हर्ष ने गुस्से से उसे दूर धकेल दिया..
इतने गुस्से के बावजूद हर्ष का दिमाग काम कर रहा था, उसने रियाल को अब भी ज़मीन पर गिराने की जगह सोफे की तरफ ही फेंका..

इतनी देर में धनुष भी कमरे की तलाशी लेकर पीछे की तरफ से वहाँ चला आया.. उसे देख रियाल की आंखे फटी रह गयी..

“तुम मेरे कमरे में कब घुसे..?  ये कर क्या रहे हो तुम लोग ? तुम्हारे महलों में ऐसे मेहमान का स्वागत किया जाता है ? तुम्हारे राजा साहब बस नाम भर के राजा है बाकी रहते यहाँ सब चोर ही है..।

एक जवान लड़की रातोरात महल से गायब हो जाती है, महल में रहने आयी लड़की के कमरे में चोरो की तरह घुस कर लोग तफरीह काट लेते हैं.. और तो और गला दबा कर मारने की कोशिश भी की जाती है..

हर्ष आश्चर्य से रियाल को देख रहा था…
उसकी समझ से बाहर था कि ये हो क्या रहा है..?
अब तक तो रियाल लाचारगी दिखाती खुद को माफ़ कर के छोड़ने की गुहार लगा रही थी और अभी अचानक इसका सुर ही बिगड़ गया..
तभी अचानक रियाल उन दोनों की तरफ पीठ कर के खड़ी हुई और उसने अपना मोबाइल अपने चेहरे के सामने लाकर बोलना शुरू कर दिया..

“जी हाँ दोस्तों… आप देख रहे है.. आधी हकीकत आधा फ़साना का वो स्टिंग ऑपेरशन जहाँ इस बार मैंने पर्दाफाश किया है महलो के राजा जी का…
आइये आपको बताती हूँ मै सारी हकीकत..
बने रहिये आपकी अपनी वानी के साथ…

क्रमशः

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Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
2 years ago

रियाल का खतरनाक रूप सामने आ रहा है, क्या है स्टिंग ऑपरेशन, इतना लंबा और बड़ा महल और कोन ले गया मीठी को, हल्की फुल्की कहानी गहराती जा रही है, रूपा चिंतित है पर हर्ष का प्यार शायद अब उसकी जुबां पर आ जाए, पढ़ने को उत्सुक, बेहतरीन भाग दीदी…💐👍🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

धनुष का छोड़ा तीर सीधे निशाने पर लगा है और शायद ईश्वर भी उनका साथ दे रहे है मीठी और हर्ष क़ो मिलाने में तभी तो धनुष का बोला झूठ प्रियदर्शनी के पेरेंट्स के बोले झूठ क़ो जाहिर करेगा।
हाय मेरी कली कितनी मासूम है बिलकुल आपकी तरह डॉक्टर साहिबा 😘।
रियाल कितनी कमीनी है साली कितनी कोशिश कर रही मीठी के मन में हर्ष के लिए जहर भरने की पर, रियाल का जहर उल्टा असर कर गया और मीठी क़ो एहसास हो गया कि वो हर्ष से प्यार करती है 😊।
😲🙄ये क्या किया रियाल ने, मीठी क़ो बेहोश कर दिया,अब क्या होगा… 🤔।
मैं तो दौड़कर चली अगला भाग पढ़ने 🏃‍♀️🏃‍♀️🏃‍♀️।