जीवनसाथी -3 भाग -62

कली आंखे फाडे विक्रम को देखने लगी..
“ऐसे ना मुझे तुम देखो… आगे का नहीं गाऊंगा क्यूंकि आगे का हिस्सा लिटिल मास्टर के लिए है..
जाओ जल्दी, वरना कोई और तुम्हारी कुर्सी ना खींच लें !”
“क्या मतलब, वहां जाकर ही क्या हो जायेगा ?”
“इसलिए तो कह रहा हूँ.. उनकी मुहब्बत देखने के लिए उनके पास रहना होगा ना ! जाओ.. तुरंत जाओ वरना मीरा, शीरा खा कर उनके पीछे पड़ जाएगी … !”
कली को एक तरह से जबरदस्ती विक्रम ने शौर्य की टेबल की तरफ भेज दिया। एक नजर दूर खड़ी मीरा पर डालकर कली धीमे-धीमे मीठी जहां बैठी थी वहां पहुंच गई।
मीठी और रियाल के साथ बैठे शौर्य की बगल की कुर्सी खींचकर कली भी बैठ गई…
” क्या सोच रही ही मीठी.. ?”
शौर्य ने पूछा.. -” कुछ भी तो नहीं !” मीठी बोल पड़ी
“वैसे आज मैं हर्ष भाई के लिए खुश हूँ !
उन्हें अपने जीवन में आगे बढ़ते देखना, मुझे हमेशा ही खुशी से सराबोर कर जाता है! उन्होंने आज तक अपने जीवन में कभी कोई गलत निर्णय नहीं लिया है, वह पढ़ाई में भी आगे थे। फिर उन्होंने हमारे बिजनेस को भी बहुत ऊंचाइयां दी, और आज उनकी जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। उनकी जीवन संगिनी उनके जीवन में आने वाली है, और सच कहूं तो प्रियदर्शनी से अच्छी हमसफर उन्हें नहीं मिल सकती। क्यों मीठी सही कहा ना मैंने..?”
शौर्य बड़े ध्यान से मीठी को देख रहा था। मीठी ने चुपचाप हामी भर दी।
रियाल भी आज बहुत खुश थी। उसे लग रहा था बिना मांगे उसकी मुराद पूरी हो गई थी। रूपा रानी साहब ने उसकी मुश्किल चुटकियों में आसान कर दी थी। उसके रास्ते का एकमात्र रोडा अपने आप हट गया था।
और इसीलिए वह दुगुने उत्साह से मीठी से बातों में लगी हुई थी। लेकिन मीठी का मन अब कहीं नहीं लग रहा था।
खासकर शौर्य की बातें सुनने के बाद उसका दिमाग उलझन में चला गया था। उसी वक्त वहां धनुष और यश भी चले आए, उन लोगों ने भी एक-एक कुर्सी खींची और वही जम गए..।
” सही कह रहा है शौर्य, आज मैं भी बहुत खुश हूं। मतलब हर्ष को मैंने शुरू से अपने काम के लिए बहुत ईमानदार देखा है, और अब लगता है कि जिंदगी की दूसरी पारी में भी वह अपना बेस्ट परफॉर्मेंस ही देगा। मैं पूरे विश्वास के साथ ये कह सकता हूं कि वह एक बहुत सच्चा, ईमानदार और बहुत मुहब्बती जीवनसाथी बनेगा। प्रियदर्शनी वाकई बहुत किस्मत वाली है।”
धनुष के ऐसा बोलने के बाद यश भी शुरू हो गया…
“सच कहूं तो हर्ष भाई में ना मुझे काका साहब नजर आते हैं। इतना तो शौर्य भाई, काका साहब जैसे नहीं है जितना हर्ष भाई है। इसलिए उनमें बहुत बार मुझे भगवान श्री राम के दर्शन हो जाते हैं। और तब खुद को लक्ष्मण मान लेता हूँ मैं !
तुम दोनों सच कह रहे हो, उनकी लाइफ पार्टनर बहुत खुशनसीब होगी। वैसे तुम दोनों सही कह रहे हो हर्ष भाई और प्रियदर्शनी की जोड़ी सुंदर तो बहुत लग रही है, पर पता नहीं क्यों अंदर से मुझे प्रियदर्शनी को देखकर वह भाभी वाली फीलिंग नहीं आ रही है।”
यश ने भी यह बात कहते हुए मीठी पर नजर जमाई हुई थी।
यह तीनों ही रॉयल बॉयज मीठी को पूरी तरह से अपने घेरे में लिए हुए थे। यश की आखिरी लाइन सुनकर मीठी चौक कर उसकी तरफ देखने लगी।
” ऐसा क्यों बोल रहे हो यश?” मीठी के ऐसा बोलते ही यश ने मासूम सी शक्ल बनाई और मीठी की तरफ देखने लगा।
” पता नहीं मीठी, लेकिन प्रियदर्शनी बेहद खूबसूरत है, इंटेलिजेंट है, स्मार्ट लेडी है, प्रेजेंटेबल है, अपना खुद का बिजनेस चल रही है, इसके बावजूद वह हर्ष भाई के साथ उतना परफेक्ट कपल नजर नहीं आ रही।
अभी हो सकता है, यह मेरी नजरों का कसूर हो, क्योंकि धनुष और शौर्य को तो इन दोनों की जोड़ी बहुत परफेक्ट लग रही है..।”
” उन दोनों को ही नहीं यहां मौजूद हर किसी को वह दोनों एक साथ बहुत परफेक्ट लग रहे हैं। इन फैक्ट मुझे भी।”
रियाल ने मीठी को देखकर कहा, मीठी इसके जवाब में कुछ नहीं बोल पाई।
उस टेबल पर मौजूद हर किसी ने अपने विचार व्यक्त कर दिए थे और सारे ही लोग एक साथ कली की तरफ देखने लगे। लेकिन कली इतनी देर से सिर्फ शौर्य को देखने में व्यस्त थी। उसका ध्यान ही नहीं था कि यह सब लोग क्या बात कर रहे हैं?
जैसे ही सब ने उसकी तरफ उसके विचार जानने के लिए देखा, वह सबको देखकर चौंक गई।
” क्या हुआ? सब मुझे क्यों देख रहे हैं?”
धनुष हंसने लगा।
” आपसे जानना चाहते हैं कि अभी जो नया-नया जोड़ा यहां पर डिक्लेयर हुआ है, उसके बारे में आपके क्या विचार है?”
” मेरे विचार अच्छे हैं।”
कली ने मासूमियत से जवाब दिया और वहां बैठे तीनों लड़के जोर से हंस पड़े।
हालांकि शौर्य ने अपनी हंसी दबाने की कोशिश की
” मैं जानता हूं कली कि तुम्हारे विचार अच्छे हैं। हम लोग यह पूछ रहे थे कि एक कपल के तौर पर हर्ष भाई और प्रियदर्शनी कैसे लग रहे हैं?”
” बहुत अच्छे लग रहे हैं, बहुत सुंदर। बहुत प्यारे।”
कली ने अनजाने में दोनों की तारीफ कर दी। वैसे भी उस मासूम को पूरी दुनिया ही खूबसूरत लगती थी। वह अपनी भोली आंखों से ही सबको देखती और जानती आई थी।
शौर्य ने धीरे से “इसका कुछ नहीं हो सकता” कहा और अपने दोनों भाइयों को देखकर आगे बढ़ने का इशारा कर दिया।
एक बार फिर धनुष और शौर्य प्रियदर्शनी की तारीफ में लग गए..
” मैं सच कहूं तो मैं ऐसी इंडिपेंडेंट लड़कियों से बहुत प्रभावित होता हूं।
सुना है 22 साल की छोटी सी उम्र में ही इन्होंने अपने फादर का बिजनेस जॉइन कर लिया था..।”
धनुष ने कहा…
जिसके जवाब में शौर्य बोल पड़ा..
” हां मैंने भी सुना है, और उनके फादर ने सिर्फ 20 करोड रुपए दिए थे इन्हे..।
और इस बहुत छोटी सी धनराशि से इन्होंने अपना फैशन स्टोर खोल लिया..।
दिल्ली में 5 स्टोर है उनके, और अब यह पूरे इंडिया में अपने स्टोर जमाना चाहती हैं…..।”
शौर्य की इस बात पर धनुष ने अपना राग छेड़ दिया।
” वाकई बहुत बड़ी बात है, इतने कम रूपयो में एक बड़ा फैशन स्टोर डालना। अपने आप में मिसाल है।
मैंने तो सुना है इनका टर्नओवर भी अच्छा खासा बढ़ गया। अगले शार्क टैंक की उम्मीदवार है यह..।”
धनुष की बात पर यश ने उसे टोक दिया…
“शार्क टैंक की यह उम्मीदवार तो है लेकिन पार्टिसिपेंट के तौर पर नहीं, जज के तौर पर इन्हें बुलाया जाएगा समझे बच्चू..।”
वहां बैठे वह तीनों लड़के एक के बाद एक प्रियदर्शनी की तारीफों के हवा में पुल बांध रहे थे, और मीठी का मन इन बातों को सुनकर धीरे-धीरे सुलगने लगा था। उसकी नजर बीच-बीच में दूर खड़े हर्ष पर चली जाती थी।
हर्ष और प्रियदर्शनी एक साथ खड़े थे, बातों में लगे हुए थे।
बीच में किसी बात पर प्रियदर्शनी जोर से हंसी और उसने अपना हाथ हर्ष की बांह पर रख दिया..।
पता नहीं क्यों लेकिन मीठी का जी जल कर रह गया…
शौर्य, धनुष और यश का पूरा ध्यान मीठी पर ही था..
मीठी अचानक अपनी जगह पर खड़ी हो गयी.. उसके हाथो पर रखा रियाल का हाथ ऐसे ही खाली रह गया..
“क्या हुआ मीठी ?”
रियाल ने पूछा और मीठी ने एक नजर उसे देखने के बाद अपने कदम हर्ष की तरफ बढ़ा दिए..
मीठी को हर्ष की तरफ जाते देख तीनो लड़कों के चेहरे पर मुस्कान चली आयी…
मीठी तेज़ी से हर्ष की तरफ बढ़ने लगी..
हर्ष ने मीठी को अपनी तरफ आते देखा, उसी समय प्रियदर्शिनी ने कुछ पूछा, लेकिन हर्ष क पूरा ध्यान सामने से आती मीठी की तरफ था..
प्रियदर्शिनी भी पलट कर मीठी की तरफ देखने लगी..
मीठी वहाँ पहुँच गयी..
“कोन्ग्रेचुलेशन्स हर्ष !”
एकाएक थैंक्स कहने के अलावा हर्ष और कुछ नहीं कह पाया….
“खुश हो ?”
मीठी ने पूछा और हर्ष अचानक कुछ कह नहीं पाया..
“ये कौन है हर्ष.. ?”
प्रियदर्शिनी ने पूछा और हर्ष तड़प कर रह गया..
कैसे कहे कि मीठी क्या है ? वो सिर्फ उसकी मुहब्बत नहीं उसका सबकुछ है.. मीठी के अलावा उसने कभी अपने जीवन में अपने साथ कभी किसी को सोचा ही नहीं…..
ओर्केस्ट्रा में उसी समय गायक ने माइक संभाला और गाने लगा..
मिलके भी हम ना मिले तुमसे न जाने क्यूँ
मीलों के हैं फासले, तुमसे न जाने क्यूँ
अनजाने हैं सिलसिले, तुमसे न जाने क्यूँ
सपने हैं पलकों तले तुमसे न जाने क्यूँ
कैसे बताये क्यूँ तुझको चाहें, यारा बता न पाएं
बातें दिलों की, देखो जो बाकी, आँखें तुझे समझाएं
तू जाने ना…तू जाने ना…
बचपन की वो उम्र जब दोस्ती क्या है समझ में आना शुरू होता है, मीठी ही उसकी पहली दोस्त बनी..।
जब जब वो किसी टेस्ट में सही नंबर नहीं ला पाता था, तब मीठी ही थी जो उसे समझा बुझा कर मना लेती थी..।
उसके जन्मदिन पर चाहे कितनी बधाइयाँ मिल जाये लेकिन जब तक मीठी आकर बर्थडे विश ना कर दे, उसका दिन पूरा नहीं होता था..
उसे आज भी याद था, जब उसका अठारहवा बर्थडे था तब मीठी ने उसे अपने हाथ से केक बना कर दिया था..।
और वो सारे दोस्त महल के बगीचे में उसका बर्थडे मनाते हुए उसे विश कर रहे थे, और हर्ष ने उन सब कि दुआओं के बीच वो केक बड़े प्यार से काटा था..।
जाने कितनी यादें थी उसकी मीठी के साथ.. ये और बात थी कि वो यादें हर्ष के लिए उसकी मुहब्बत थी और मीठी के लिए दोस्ती..
“दोस्त है.. मीठी !” हर्ष ने प्रियदर्शिनी से मीठी का परिचय करवाया..
“मीठी… कुछ अजीब सा नाम नहीं है ?” प्रियदर्शिनी बोल पड़ी..
मीठी ने हल्के से हाँ में गर्दन हिला दी..
“मेरा नाम राजा साहब ने रखा था.. उसके बाद ये नाम पापा और माँ को इतना पसंद आया कि उन्होंने और कोई नाम नहीं रखा.. बस तब से मीठी ही हूँ !”
“हम्म.. काफी कैज़ुअल सा है.. नाम में थोड़ा वजन होना चाहिए लाइक हर्षवर्धन, प्रियदर्शिनी.. !”
प्रियदर्शिनी के ऐसा कहते ही मीठी ने हामी भर दी….
“हाँ नाम कैज़ुअल तो है लेकिन काका सा ने रखा है इसलिए मुझे अपना नाम बहुत पसंद है….!”
हर्ष का इस वक्त दिमाग काम नहीं कर रहा था कि आखिर वो क्या करे…?
वो प्रियदर्शिनी से तब तो कुछ कहता जब मीठी के मन में क्या है ये पता चल जाता.. बिना कुछ जाने वो करे भी तो क्या ?
इधर शौर्य धनुष और यश के दिमाग में कुछ और खिचड़ी पक रही थी..!
वो तीनो उस तरफ चले गए जिधर रूपा रेखा और जया
गीता और पिया के साथ बैठी थी..
बांसुरी राजा के साथ दूसरी तरफ थी…
रूपा जिस कुर्सी पर बैठी थी.. उसके ठीक पीछे की तरफ धनुष और यश बैठ गए….
उन तीनो ने दो दिन की मियाद को आगे खिसकाने का कोई प्लान सोच रखा था, बस उसी प्लान को पूरा करने वो तीनो वहाँ आकर जम कर बैठ गए थे..
क्रमशः

Very Imotional and critical condition in this part, Waiting for the next part
ये लो लव घोटाला हो गया जिसमें फंसी मीठी बिना समझ के रियाल को हां कहा था और समझने पर अपने दिल की हकीकत देख गई। तीनों ने पत्ता फेंक दिया है इन दोनों को समय दिलवा दिया है पर ओटीपी तो रूपा ही देगी वह पढ़ने में मज़ा आएगा थोड़े से अंतराल पर, नाईस पार्ट दीदी…💐👍🙏
ये तीनों भाई हर्ष और मीठी की जोड़ी बनाना चाहते हैं लेकिन हर्ष मुश्किल में पड़ गया है और मीठी कन्फ्यूज हो गई है, हर्ष से दूरी शायद उसे उसके पास ले जाए, कली को सिर्फ शौर्य दिखता है और वह हिस्ट्री भी नहीं जानती है की हर्ष के लिए मीठी क्या है पर प्रियदर्शनी अब हर्ष को आसानी से नहीं छोड़ने वाली है, देखें ये लोग कितना आगे तक डेट बढ़वा पाते हैं, नाईस पार्ट दीदी…💐👍🙏
बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌
ऐसा हो ही नहीं सकता राजा अपनी बांसुरी के हँसते चेहरे के पीछे की उदासी ना पढ़ पाए 😊।
मीठी समझ नहीं पा रही और हर्ष कुछ कह नहीं पा रहा,अब तो ऐसा लग रहा राम जी की सेना क़ो ही कुछ करना पड़ेगा पर इन दोनों क़ो भी तो कुछ कदम बढ़ाने होंगे तभी तो दूरियां कम होगी।
बिक्रम बंदा सही है समय समय पर कली क़ो याद दिलाता रहता शौर्य की 😄।
राजा बांसुरी की जोड़ी तो फॉरेवर है 👌👌, इन दोनों क़ो साथ देखकर चेहरे पर 😊ऐसी मुस्कान आ जाती 😊। गाना भी 👌👌👌बहुत अच्छा था 👌👌👌।
बेहद खूबसूरत भाग 👌👌👌👌।