जीवनसाथी -3 भाग -59

जीवनसाथी -3 भाग -59

जीवनसाथी by aparna

सभी लोग एक दूसरे को गाने के लिए बोलने लगे..
सभी मीठी पर ज़ोर देने लगे..

और मीठी गाना शुरू करने जा ही रही थी कि उसी वक्त हर्ष को उसकी माँ ने बुला लिया…. .
वो उन तक जाने के लिए खड़ा हुआ और यश ने एक गाने की शुरुआत मीठी के कान में गुनगुना कर उसे गाने की गुज़ारिश कर बैठा…

मीठी ने यश की तरफ देख इशारे से पूछा कि क्या यही गाना गांऊ ? यश ने हामी भर दी..

और मीठी ने गाना शुरू कर दिया

आज जाने की ज़िद्द न करो
यूँ ही पहलू में बैठे रहो हाय,
मर जायेंगे हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बातें किया न करो….
आज जाने की ज़िद ना करो..

हर्ष ने यश और मीठी की बातचीत पर ध्यान नहीं दिया था, वो उठ कर जाने के लिए मुड़ चुका था, लेकिन जैसे ही मीठी का गाना शुरू हुआ, हर्ष की साँस थम सी गयी.. उसने आंखे पल भर के लिए बंद की और हलकी सी मुस्कान के साथ आंखे खोल दी..

उसने दूर से उसे किसी से मिलवाने के लिए बुलाती अपनी माँ की तरफ देखा और उन्हेँ बस पांच मिनट में आ रहा हूँ का इशारा कर दिया…
रूपा ने भी उसे इजाजत दे दी..।

वो ख़ुशी से वापस घूम गया..

तुम ही सोचो ज़रा, क्यों न रोकें तुम्हें?
जान जाती है जब उठ के जाते हो तुम,
तुमको अपनी क़सम जान-ए-जाँ
बात इतनी मेरी मान लो
आज जाने की …

हर्ष ख़ुशी में झूमता सा मीठी के ठीक सामने आ बैठा…
वो बड़े प्यार से मीठी को देख रहा था…।
मीठी ने गाते  हुए एक बार उसे देखा और मुस्कुरा कर उसे इशारा कर दिया कि अगली बारी उसी की है..
हर्ष ने भी गर्दन झुका कर बड़े प्यार से मीठी की उस बात को मान लिया….

मीठी और हर्ष की आँखों आँखों में चलती बातचीत देख जहाँ यश के चेहरे पर ख़ुशी थी, वहीँ धनुष भी सब कुछ समझते हुए हल्का सा मुस्कुरा रहा था।
लेकिन रियाल के चेहरे का रंग बिगड़ा हुआ था..

मीठी ने अपना गाना खत्म किया और माइक हर्ष की तरफ बढ़ा दिया..

“अब तुम गाओगे !”

हर्ष ने मुस्कुरा कर रियाल की तरफ देखा..

“आप बताइये रियाल जी, क्या गायें हम ?”

“मुझे क्या पता.. जो ठीक लगे गा लीजिये.. !”..

“चलिए ठीक है.. !”

और हर्ष ने गाना शुरू किया..

“आपकी आँखों में कुछ महके हुए से राज़ हैं
आपसे भी खूबसूरत आपके अंदाज़ हैं
आपकी आँखों में…

लब हिले तो मोगरे के फूल खिलते हैं कहीं
आपकी आँखों में क्या साहिल भी मिलते हैं कहीं
आपकी खामोशियाँ भी, आप की आवाज़ हैं
आपकी आँखों में…

हर्ष की आंखे मीठी पर ही थी, और मीठी के साथ बाकी सारे लोग हर्ष को देख रहे थे उसने गाना पूरा किया और सभी तालियां बजाने लगे..

इसी सब में शौर्य भी वहाँ आ चुका था..

वो भी हर्ष के बगल की कुर्सी खींच कर बैठ गया..
लेकिन गाने को सुनते हुए भी उसका ध्यान अपनी रानी मॉम पर ही था..।
उसने उनके पास आकर रुके कुछ खास मेहमानों को देख लिया था…
उन मेहमानों में एक उसी की उम्र की लड़की भी उसे नजर आ गयी थी..।।
और उस लड़की को देखकर ही शौर्य को समझ आ गया था कि इस लड़की को ही उसकी रानी मॉम ने हर्ष के लिए चुना है..

हर्ष के तीनो ही भाई उसके दिल के हाल से वाकिफ थे..
धनुष और यश, हर्ष के ज्यादा साथ रहते थे, इसलिए उन्हेँ पल पल की खबर थी.. शौर्य साथ नहीं होता था हमेशा, बावजूद वो भी मीठी के लिए हर्ष का सॉफ्ट कॉर्नर समझता था…।

और इसीलिए उसने अपनी रानी मॉम से अपनी तरफ से सगाई फ़िलहाल रोकने की बात कही थी, लेकिन अब इतने सारे विशिष्ट अतिथियों के बीच अगर सगाई ना भी हुई, तब भी अगर रानी मॉम घोषणा भी कर देती हैं तब भी आगे चल कर इस सगाई से इंकार करना हर्ष के लिए मुश्किल होगा..।

शौर्य इसी सब सोच में था कि धनुष ने गिटार लाकर उसके हाथ में पकड़ा दी..

उसने मना किया लेकिन वहाँ उसकी सुनने वाला कौन था..?
और फिर हर्ष के कहने पर शौर्य मना नहीं कर पाया..

हर्ष का कहा उसके लिए पत्थर की लकीर सा था, अगर हर्ष कभी उससे कह देता कि महल के सबसे ऊँचे गुम्बद पर चढ़ कर छलांग लगा दे तो बिना कुछ सोचे शौर्य शायद वो भी कर जाता…।

ऐसा ही तो था वो..।
जिन्हे मानता था उन्हेँ हद से ज्यादा मानता था, लेकिन जिनके लिए उसके मन में नफरत आ जाये उन्हेँ फिर छोड़ता भी नहीं था..।

अभी तक उसके आसपास रहने वालों ने उसका स्नेही रूप ही देखा था..
उसका सिक्के के दूसरे पहलु वाला रूप तो हर्ष के लिए भी अनजाना ही था..।

धनुष ने उसके कंधे पर हाथ रखा और वो गिटार बजाने लगा..

कुछ ख़ुशबुएं यादों के जंगल से उड़ चलीं
कुछ खिड़कियाँ लम्हों की दस्तक पे खुल गईं
कुछ गीत पुराने, रक्खे थे सिरहाने
कुछ सुर कहीं खोए थे, बन्दिश मिल गई
जीने के इशारे मिल गए,
बिछड़े थे किनारे मिल गए….

मेरी ज़िन्दगी में तेरी बारिश क्या हुई,
मेरे रास्ते दरिया बने बहने लगे,
मेरी करवटों को तूने आके क्या छूआ
कई ख़्वाब नींदों की गली रहने लगे,
जीने के इशारे मिल गए,
बिछड़े थे किनारे मिल गए….

शौर्य में गायकी का नैसर्गिक गुण था, वो गुण उसे अपने पिता से मिला था..।
वो जितना सहज गाता था, उतना ही सुनने वाले उसके गायन में खो जाते थे…..
आज भी सभी बड़े ध्यान से उसे सुन रहे थे, लेकिन कली अपनी सुध बुध गँवा कर शौर्य को सुन रही थी..।

गाते समय बीच बीच में शौर्य के माथे पर लकीरे पड़ जाती थी.. गाते हुए होंठ ज़रा तिरछे हो जाते थे, और उसकी बड़ी बड़ी ऑंखें मुस्कुराने लगती थी..

कली पूरी तरह खो कर उसे सुन रही थी…
शौर्य का गाना पूरा हुआ और सभी जब तालियां पीटने लगे तब जाकर कली किसी दूसरी दुनिया से वापस लौटी..

“बहुत बहुत अच्छा गाते हो प्रिंस !”
उसने धीमे से कहा और शौर्य हल्का सा मुस्कुरा उठा..

“थैंक यू कली.. चलो कम से कम तुम्हारे मुहं से मेरा नाम तो निकला !”

महल में गुमसुम सी हो चुकी कली को मुस्क़ुरते देख शौर्य भी खुश था, लेकिन कली ने उसे प्रिंस क्यों बोला ये बात सभी के लिए अचरज वाली थी..

“भाई ये प्रिंस वाला क्या माजरा है ?” धनुष ने कली की तरफ देखते हुए शौर्य से पूछा..

शौर्य मुस्कुरा कर कली की तरफ देखने लगा..

” ये कली है, इनसे पहली मुलाकात लंदन के यूथ इवेंट में हुई थी। वहां यह फोटोग्राफी के लिए गई हुई थी। वहां पर इन्होंने मुझे परी के साथ देखा और पता नहीं मेरी शक्ल में ऐसा क्या देखा कि उन्होंने मुझे परी का ड्राइवर समझ लिया। उसके बाद दिल्ली में दोबारा मुलाकात हुई और इत्तेफाक से उस वक्त ना मेरे पास पैसे थे और ना रहने के लिए जगह।
तब कली ने मुझे अपने फ्लैट में रहने की जगह दी। बस ऐसी कुछ गलतफहमी हो गई थी कि कली को लगता था मेरा नाम प्रिंस है, लेकिन मैं ड्राइवर हूँ.. !”

शौर्य की ये बात आज तक हर्ष को भी पता नहीं थी कि शौर्य को पैसो की कोई तकलीफ हुई थी..

“पैसो की दिक़्क़त मतलब ?क्या हुआ था शौर्य.?”

शौर्य भी कुछ और बता पाता उसके पहले परी ने उसे टोक दिया..

“कुछ खा पी भी लेते हैं.. आप सब तो घर पर ही थे लेकिन कई लोग सीधे अपने काम से लौटे हैं.. उन्हेँ तो भूख लग रही होगी ना !”

शोवन अस्पताल से आया था और परी उसी के लिए सोच रही थी.. यश ने इस बात पर तुरंत ही परी को टोक दिया..

“हाँ परी सही कह रही, वैसे भी शोवन हॉस्पिटल से आया है, उसका खाने का वक्त भी हो गया है.. है ना.. !
शोवन मम्मा से पूछना तो नहीं है ना.. या खा लोगे.. ?”

यश शोवन को छेड़ने से बाज नहीं आता था..

“अरे खाने के लिए नहीं पूछना पड़ता… बस पीने के पहले पूछना पड़ता है.. !” परी भी यश का साथ देने लगी.. और दोनों हंसने लगे..

“परी… यश !”  हर्ष ने दोनों को टोका और शोवन के कंधे पर हाथ रख दिया…

“अरे कोई बात नहीं भाई साहब.. ! वैसे मेरा तो वाकई डिनर टाइम हो गया है.. मॉमी का भी.. मैं एक मिनट उनसे पूछ कर आता हूँ, अगर वो खाना चाहेंगी तो.. !”

शोवन खड़ा होने लगा कि धनुष ने उसके कंधो पर हाथ रख उसे बैठा दिया..

“ब्रो.. मॉम वहाँ बिज़ी हैं.. वही वो ले लेंगी उन्हेँ जो लेना होगा.. आप बोलो आपके लिए क्या मँगवाया जाये!”

धनुष ने शोवन को रोक लिया.. और शोवन वापस बैठ गया…

“हम बताये क्या चाहिए ?” परी ने पूछा.. और धनुष के हामी भरते ही परी वापस एक बार शोवन को छेड़ बैठी..

“गोरी है कलाइयां, तू ला दे मुझे ब्लैक मेटल चूड़ियां..
अपना बना ले मुझे जालिमा… !”

परी के गाने पर गोरी शब्द को बार बार दुहराता यश भी उसका साथ देता रहा…

कुछ देर में वेटर उन सब के लिए स्नैक्स और ड्रिंक्स ले आया..
परी ने क्रेनबेरी जूस उठाया और पी रही थी कि उसकी ड्रेस पर हल्का सा छलक गया…

वो गिलास रख तुरंत खड़ी हो गयी..

“एक्सक्यूज़ मी गाइज़… मैं अभी आयी.. !”

और वो वहाँ से बाहर की तरफ निकल गयी..
दीवानखाने के बाहरी कॉरिडोर में बने बाथरूम की तरफ वो बढ़ गयी..

वहाँ अपनी ड्रेस पर गिरे ड्रिंक को साफ़ कर वो पलटी और संकरे से गलियारे से बाहर की तरफ जाने लगी कि अचानक वहाँ की बत्तियां बुझ गयीं..
पहले ही वो गलियारा सुनसान पड़ा था..

महल में पावर ऑफ भी नहीं होता था, फिर अचानक गलियारे की बत्तियां कैसे बुझ गयी, सोचती वो तेज़ी से आगे बढ़ रही थी कि पीछे से आकर किसी ने उसकी कलाई थाम ली.. वो घबरा गयी..

“कौन ?” परी की घबराई सी आवाज़ आयी..

“कौन है ? मैं ज़ोर से चिल्लाऊंगी.. ! “

परी कलप उठी.. और जिसने उसकी कलाई थामी थी, उसने परी के मुहं पर अपना हाथ रख दिया.. और उसे अपने साथ खींचते हुए दीवार से सटा कर खड़ा कर दिया।
और उसके ठीक सामने आकर खड़ा हो गया..

गलियारे में बाहर से चाँद की रौशनी पड़ रही थी..
उसी दूधिया रौशनी में परी ने देखा शोवन का चेहरा चमक रहा था..

“बहुत चिढ़ाया जा रहा था, वहाँ सब के सामने ? हम्म ? “

“हाँ तो.. क्यों ना चिढ़ाऊ… फ़ोन तक करने का समय नहीं होता डॉक्टर साहब के पास.. मैं पूरे दो दिन के लिए गयी थी, लेकिन मजाल जो एक भी मिस यू मेसेज भेज दिया हो.. पाप लग जायेगा ना प्यार मुहब्बत का मेसेज भेजने पर..?”

“परी…. जानती तो हो हॉस्पिटल का काम कितना बढ़ गया है.. !”

“सब जानती हूँ.. पूरे हॉस्पिटल का लेडीज़ स्टाफ आपके ही आसपास मंडराता रहता है, फिर कैसे छूटेगा हॉस्पिटल और वहाँ का काम !”

“ये सब बकवास बंद करो.. और सुनो.. मैंने बहुत मिस किया तुम्हे..!”

“सच कह रहे हो या पिया आंटी से पूछना पड़ेगा मुझे.. ?”

“आओ तुम्हे यक़ीन दिलाऊँ.. पहले पास तो आओ !”

शोवन ने परी को अपने पास खींच लिया.. वो उसके होंठो पर झुकने ही वाला था कि वो धीमे से चीख पड़ी..

“अरे हर्ष भाई.. !”

और हड़बड़ा कर शोवन ने उसे छोड़ दिया..
हँसते हुए परी ने शोवन के चेहरे को अपनी बाँहों में ले कर चूम लिया.. और हंसती खिलखिलाती उसे छोड़ कर वहाँ से भाग निकली..
मुस्कुरा कर शोवन भी अपने बालों पर हाथ फेर कर उन्हेँ ठीक करता हुआ उसके पीछे ही बाहर निकल गया..
क्रमशः

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Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
2 years ago

परी और शोवन को प्यार है, हर्ष मीठी पर फिदा है, शौर्य के जीवन में काली की एंट्री हो गई, धनुष और मीरा की ट्यूनिग पढ़ना अच्छा लगता है, गाना भी बहुत अच्छा था, क्या हर्ष आज रात के सच को बर्दाश्त कर पायेगा, पढूंगा क्यूंकि उत्सुकता बहुत है, रूपा प्रियदर्शनी को रानी बनाना चाहती है पर होगा क्या! नाईस पार्ट दीदी 🙏💐

Jayshree Bhargava
Jayshree Bhargava
2 years ago

मेरा गाना भी गा लेते पर कोई ना
कितना प्यारा
कितना प्यारा तुझे रब ने बनाया
कितना सोना तुझे रब ने बनाया …शो
और परी तो परी हु मै ….
हाए ये रात को स्पेशल फुलझड़ी कहां से लाए 😂 हम सब कित्ता मिस कर रहे थे ।
अभी तो धनुष का गाना बाकी है मीरा के लिए
खंबे जैसी खड़ी है
लड़की है या छड़ी है
पटाखे की लड़ी है
शोला है फुलझड़ी है …….😜😜😜

और फिर धीरे से राजाजी की एंट्री करवा देना गिटार के साथ,
महरूम थे…
एक साथी मिल गया …😘😘

😘😘😘😘

Manu verma
Manu verma
2 years ago

बेहद शानदार, लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️💐💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐