जीवनसाथी -3 भाग -50

पेरिस से आने वाली फ्लाइट अपने सही समय पर भारत में लैंड हो गई… उस वक्त रात के नौ बज रहे थे, जब एयरपोर्ट से मीठी धनुष और हर्ष बाहर चले आए.. उनके साथ उनकी सारी मॉडल्स भी मौजूद थी। बाहर निकल कर सभी मॉडल्स ने हर्ष और मीठी को हाथ हिलाकर उनसे विदा ली और टैक्सी लेकर अपने अपने घऱ निकल गई…।
हर्ष की लंबी चौड़ी लिमोजिन उन लोगों को लेने के लिए बाहर इंतजार कर रही थी। लेकिन तभी मीठी की नजर बाहर एक तरफ खड़ी रियाल पर पड़ गई..।
मीठी मुस्कुरा कर उसकी तरफ बढ़ गई। हर्ष ने मीठी को रियिल की तरफ जाते देखा और चुपचाप अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ने लगा।
लेकिन वह कुछ आगे बढ़ा ही था कि मीठी की आवाज उसके कान में पड़ी।
” हर्ष!! इधर आओ ना।”
हर्ष ने पलट कर मीठी को देखा और धनुष को आगे बढ़ने का इशारा कर खुद मीठी की तरफ बढ़ गया। मीठी जैसे ही रियाल के पास पहुंची, रियाल ने तुरंत मीठी को अपने सीने से लगा लिया।
रियाल आंखें बंद कर मीठी की वापसी महसूस कर रही थी। वह खुश थी, बहुत खुश।
उसने आंखें खोली और अपने ठीक सामने खड़े हर्ष को देखा, और रियाल के चेहरे का रंग बदल गया।
वह मीठी और हर्ष की दोस्ती के बारे में जानती थी। हर्ष का सारा बैकग्राउंड भी उसे पता था। वह जानती थी कि यह महल का सबसे बड़ा और सबसे लाडला और काबिल राजकुमार है। जिसके लिए लड़कियों की अच्छी खासी लाइन लगी हुई है। रियाल की आंखों में हर्ष के लिए किसी तरह का कोई सम्मान या स्नेह नहीं था।
और उसकी आंखों में जो था वह हर्ष ने साफ-साफ महसूस कर लिया।
कहीं ना कहीं रियाल हर्ष से एक बैर अनुभव कर रही थी। उसने धीरे से मीठी को खुद से अलग किया,
” आज मेरे साथ मेरे फ्लैट पर चलो ना! तुम्हें एक खुशखबरी देनी है।”
मीठी ने धीरे से हर्ष की तरफ देखा और रियाल की तरफ देखकर हां में सिर हिला दिया।
हर्ष चुप खड़ा उन दोनों को ही देख रहा था..।
” अगर आप दोनों को दिक्कत ना हो तो मैं अपनी गाड़ी में आप दोनों को छोड़ देता हूं!आखिर यहाँ से कैब लेकर ही तो जाओगे ना ?”
मीठी ने तुरंत हामी भर दी।
” हां क्यों नहीं? रियाल यह हर्ष है, मेरे बहुत अच्छे दोस्त और हर्ष यह रियाल है। वैसे आप दोनों पहले भी मिल चुके हो !”
मीठी की इस बात पर रियाल मुस्कुरा उठी..
“बुंदेला पावर्स, बुंदेला टेक्सटाइल्स, बुंदेला कॉर्पोरेशन जैसे लम्बे चौड़े बिज़नेस को संभालने वाले हैंडसम सीईओ को कौन नही पहचानेगा भला..
उस पर सीएम के भतीजे भी हैं.. राजपरिवार के सम्मानित बड़े कुंवर सा है..!
मैं इन्हे अच्छे से जानती हूँ, लेकिन शायद ये मुझे नही पहचानते !”
हर्ष ने बहुत प्यार से मीठी की तरफ देखा और धीरे से गर्दन झुका दी,
” मैं पहले ही समझ गया था कि यह रियाल है, एक बार कहीं मिले तो हैं हम ! कैसी हो रियाल ?”
हर्ष ने रियाल की आंखों में झांकते हुए पूछा, और रियाल कोई जवाब नहीं दे पाई..
उसने बस धीरे से गर्दन हिला दी..
हर्ष के कहने पर मीठी और रियाल भी हर्ष की गाड़ी की तरफ बढ़ गए….
हर्ष ने रियाल से उसके घर का पता पूछा और ड्राइवर को बता दिया। वह सारे लोग रियाल के फ्लैट की तरफ निकल गए। रास्ते में धनुष उतर गया ।
फ्लैट पर पहुंचने के बाद रियाल और मीठी ऊपर जाने लगे। मीठी चाहती थी कि हर्ष भी उनके साथ आकर एक कप कॉफी पीकर निकले, लेकिन घऱ रियाल का था। इसलिए वो कुछ कह नही पायी और रियाल ने जानबूझकर हर्ष को अपने घर आने का निमंत्रण नहीं दिया।
जबकि औपचारिकता के नाते एक बार कहना तो बनता था। हर्ष मुस्कुरा रहा था। वह रियाल के मन के भावों को समझता था।
उसे रियाल गलत नहीं लग रही थी। लेकिन गलत ना होते हुए भी रियाल हर्ष से बिना वजह नाराज थी। या शायद उसके मन में मीठी को खो देने का खौफ बैठा हुआ था।
उसे लग रहा था कहीं हर्ष मीठी को रियाल से छीन ना ले। और इसीलिए वह मीठी को हर्ष से दूर रखना चाहती थी। वह दोनों ऊपर जाने लगे।
उन्हें जाता देखकर हर्ष भी वापस गाड़ी की तरफ मुड़ गया कि तभी मीठी ने पलट कर उसे आवाज दे दी..
“हर्ष कल सुबह कितने बजे ऑफिस पहुंचना है..?”
“चाहो तो कल छुट्टी ले लो मीठी। इतने दिन के टूर के बाद आई हो, और फिर पेरिस और यहां पर समय में भी अंतर है। थोड़ा जेटलेग भी रहेगा, इसलिए तुम दो-तीन दिन आराम कर लो..।”
“हां यह सही रहेगा, मैंने तो सोचा भी था कि हम दो-तीन दिन की छुट्टी पर कहीं चलेंगे..।”
“छुट्टी पर?” आश्चर्य से मीठी ने रियाल की तरफ देखा और रियाल ने मुस्कुरा कर मिठी के दोनों हाथ पकड़ लिए ।
“तुमसे यही तो बताना था। यही तो खुशखबरी थी कि मेरी भी जॉब लग गई है। और मुझे अभी ज्वाइन करने में दस दिन बाकी हैं।
तो मैं सोच रही थी तुम्हारे साथ दो-तीन दिन के लिए कहीं छुट्टियां मनाने चली जाती।”
मीठी ने रियाल की तरफ देखा। वह भी खुश थी, उसके लिए।
” मैं बहुत खुश हूं रियाल। बहुत अच्छा हुआ कि तुम्हारी नौकरी लग गई।
तुमने अपने घर पर बताया?”
” हां मम्मी को बता दिया है। लेकिन पापा जी को नहीं बताया।”
” कोई बात नहीं, मम्मी पापा जी से भी कह देंगे। लेकिन रियाल इस वक्त मैं छुट्टियों पर नहीं जा पाऊंगी। वैसे भी पेरिस से आने के बाद यहां का बहुत सारा काम समेटना है। इतने दिन का काम छूटा पड़ा है, वह भी तो देखना है। है ना हर्ष ? मुझे अभी छुट्टी नहीं मिल पाएगी ना ?”
मीठी के चेहरे के भावों को देखकर हर्ष समझ गया था कि, मीठी को इस वक्त छुट्टियां नहीं चाहिए।
हर्ष ने धीरे से हां में गर्दन हिला दी।
“ठीक है, तुम कल सुबह अपने यूजुअल टाइम पर ऑफिस आ जाना। थोड़ा लेट भी आओगी, तो चलेगा।”
हर्ष मुड़कर चला गया और मीठी और रियाल एक दूसरे का हाथ थामे ऊपर फ्लैट की तरफ बढ़ गये।
रियाल मीठी की तरफ देख रही थी।
” मीठी तुमने पूछा नहीं ,मैंने कौन सा ऑफिस ज्वाइन किया है?”
मीठी रियाल की तरफ देखने लगी।
” कौन सा ऑफिस ज्वाइन किया है, बताओ ?”
रियाल ने एक बार फिर मीठी के हाथ पकड़े और उन्हें अपने होठों से लगा लिया।
” मेरी जान, मैं तुम्हारे बिना कहां जा सकती हूं ? तुम्हारे ऑफिस को ज्वाइन किया है मैंने। और अब हम हर वक्त साथ रहेंगे। हालांकि मुझे अभी दस दिन बाकी है ज्वाइन करने में।”
मीठी आश्चर्य से रियाल को देख रही थी। वह वाकई रियाल की नौकरी से खुश थी। लेकिन रियाल ने उसी का ऑफिस ज्वाइन किया, यह सुनकर पता नहीं क्यों लेकिन मीठी को उतनी प्रसन्नता नहीं हुई।
मीठी रियाल का प्यार समझती थी, लेकिन रियाल के प्यार में अब स्नेह की जगह बंधन ज्यादा हावी होने लगा था। रियाल मीठी को अपनी नजरों से पल भर के लिए भी ओझल नहीं करना चाहती थी। अभी पेरिस जाने का निर्णय जब मीठी ने रियाल को बताया था, तब भी रियाल ने रो धोकर हड़कंप मचा दिया था।
वह तो ऐसा हुआ कि उसी वक्त इत्तेफाक से रियाल की मां ने किसी काम से उसे घर बुला लिया, और मीठी को पेरिस जाने का मौका मिल गया..।
रियाल चाहती थी मीठी उसके फ्लैट में उसके साथ रहे। लेकिन मीठी ने अपनी मां के नाम की दुहाई देते हुए अपनी मां की सहेली के घर पर ही रहने को प्राथमिकता दी..।
ऐसा नहीं था की मीठी रियाल से प्यार नहीं करती थी, लेकिन वह अपने और रियाल के बीच एक स्पेस बनाए रखना चाहती थी, जो रियाल को पसंद नहीं था।
मीठी जानती थी कि, अगर वह रियाल के साथ एक ही घर में रहने लगेगी तो रियाल का पागलपन और ज्यादा बढ़ने लगेगा।
हालांकि रियाल के प्यार में भी किसी तरह का शारीरिक आकर्षण मिठी के प्रति नहीं था, बावजूद रियाल मीठी के प्यार में बुरी तरह से पागल थी…।
अब अगर एक ही ऑफिस में हुए तो क्या होगा, ये सोचती मीठी अपनी मम्मा को फ़ोन लगाने चली गयी..
रियाल उन दोनों के लिए खाना परोसने लगी..
*****
कली और बांसुरी साथ खड़े थे..
विक्रम भी उनके साथ था कि उसी वक्त बांसुरी को बुलाने के लिए एक सिक्योरिटी गार्ड वहाँ चला आया। बांसुरी ने आ रही हूं का इशारा किया और कली की तरफ घूम गई।
” चलो, तुम भी शौर्य से मिलना चाहती थी ना?”
कली ने बांसुरी की तरफ देखा और धीरे से हां में गर्दन हिला दी।
बांसुरी आगे बढ़ गई और कली उसके पीछे-पीछे उसका अनुसरण करती धीमे कदमों से आगे बढ़ने लगी।
कली के ठीक पीछे विक्रम चल रहा था। विक्रम धीरे से कली की तरफ झुका और उसके कान के करीब आकर कहने लगा..
“आप एक बार लिटिल मास्टर से बोल कर देखिएगा, हो सकता है अपना महल घूमाने के लिए वह आपके साथ ले जाये।”
विक्रम की बात सुनकर कली पल भर के लिए चौक गई और उसकी तरफ देखने लगी।
” मैं चाहूं भी तो तुम्हारे लिटिल मास्टर के साथ नहीं जा सकती। पहली बात तुम्हारे लिटिल मास्टर ऐसा कुछ कहेंगे नही, और दूसरी बात मेरे डैडा मुझसे नाराज हो जाएंगे..
और अब सच कहूं तो कहीं जाने का मन भी नहीं! मुझे डैडा की याद आ रही है..
मुझे उनके पास वापस लौटना है!”
विक्रम ने धीरे से हां मे गर्दन हिलाई और वापस अपने कंधे सतर किए चलने लगा।
कली का मन बहुत भारी हो गया था।
जब किसी इंसान के दिल में प्यार, बेइंतहा उमङने लगे और साथ ही यह भी मालूम हो कि उसका प्यार उसे कभी नहीं मिलने वाला, तब उस इंसान को अपने पालनहार, अपने पैदा करने वाले ही याद आते हैं।
अपना घर, अपना कमरा, अपने पिता, अपनी सरू अभी कली को इस वक्त इन्हीं सब की जरूरत थी। उसे शौर्य को भूलना जो था।
लेकिन शौर्य को भूलने की चाह में वह और उसकी तरफ आकर्षित हुई जा रही थी।
बांसुरी के साथ चलते हुए वह कमरे के बाहर पहुंच गई। इतनी भारी सिक्योरिटी के बीच से वह बांसुरी के साथ बड़ी आसानी से वहां चली गई।
कमरे का नजारा बिलकुल बदला हुआ था। यह वही कमरा था, जहां पहले भी वह आ चुकी थी। लेकिन अब इस कमरे को बिल्कुल किसी आधुनिक फिल्मी चिकित्सालय की तर्ज पर सजा दिया गया था।
यूँ लग रहा था अस्पताल में मौजूद हर एक मशीन इस कमरे में लाकर फिट कर दी गई है। एक कतार में सात-आठ डॉक्टर हाथ बांधे खड़े थे। उनके साथ ही लगभग दस बारह नर्सेस खड़ी थी।
लग रहा था जैसे पूरे अस्पताल का स्टाफ आज लिटिल मास्टर की तीमारदारी करने पहुंच गया है। उन सब को देखती हुई कली का ध्यान इस बात पर नहीं गया कि पलंग पर पड़ा हुआ शौर्य उसे ही देख रहा है, बहुत प्यार से।
शौर्य को भी ऐसा महसूस हो रहा था, जैसे सदियों बाद उसे कली नजर आई है।
पिछले चार दिन से जब दोनों साथ थे, तब इसी कली की बेवकूफियों नादानियों पर वह जी खोल कर हंसता था।
आज तक उसे सबसे बड़ी तकलीफ इसी बात की थी कि उससे जुड़ने वाले हर एक इंसान ने उसके अंदर के शौर्य को पहचानने की जगह उसके रुतबे और उसके राजकुमार के कद से दोस्ती की थी।
ऐसा नहीं था कि उसके जीवन में लड़कियां नहीं आई थी। जब वह कॉलेज में था, तब भी तीन-चार लड़कियों ने खुद से होकर उसे प्रपोज किया था, लेकिन वह जानता था कि वह लड़कियां शौर्य प्रताप को नहीं राजकुमार शौर्य को प्रपोज कर रही है।
और इसलिए बड़ी नफासत से उसने उन चारों से माफी मांग ली थी ।
अब भी मीरा उसके जीवन का हिस्सा बनी हुई थी। लेकिन मीरा जिस तरीके से उससे उलझी थी, उसकी वजह से उसे पूरी तरह से अवॉइड करना भी शौर्य के लिए मुश्किल था।
इतनी सारी लड़कियों के बीच एकमात्र कली उसे ऐसी मिली थी, जिसे ना शौर्य के महल का पता था और ना इस बात का कि शौर्य राजकुमार है।
बावजूद उस लड़की ने शौर्य की मदद करने में कहीं कोताही नही बरती..
बांसुरी जाकर शौर्य के सर के पास खड़ी हो गई। एक तरफ की कुर्सी में राजा साहब बैठे हुए थे, और शौर्य के सिर के दूसरे तरफ उसके मामा अपूर्व ठाकुर खड़े थे। अपूर्व ने कली को देखा और उनके चेहरे पर नाराजगी झलकने लगी।
कली इतने लोगों की भीड़ में घबराकर कांपने लगी थी। उसके पैर संभल नहीं रहे थे, वह खुद को सहारा देने के लिए शौर्य की पलंग में लगे किनारे को पकड़ कर खड़ी हो गई..।
बांसुरी उस वक्त शौर्य के एक तरफ रखी दवाइयों को देख रही थी।
राजा साहब समर से किसी गहरी चर्चा में लीन थे और इन सबको उनके कामों में व्यस्त छोड़ शौर्य और कली सिर्फ एक दूसरे को निहारने में लगे थे।
ऐसा लग रहा था एक दूजे को देखते हुए दोनों का मन नहीं भर रहा..
शौर्य ने हीं पहले बोलना शुरू किया
“कली तुम्हें किसी से मिलवाना चाहता हूं ।”
कली आश्चर्य से शौर्य की तरफ देखने लगी।
” पहले यह बताओ, तुम्हारी तबीयत कैसी है अब?”
” मैं एकदम ठीक हूं, अब मेरी मॉम आ गई है ना। और तुम्हें पता है मेरी ममा डॉक्टर है।”
कली आश्चर्य से बांसुरी की तरफ देखने लगी
“रियली आप डॉक्टर हो मैम ?”
बांसुरी हंसने लगी…
“दुनिया की हर मां डॉक्टर होती है, अपने बच्चे के लिए। बचपन से इसे अपनी मम्मी के सिखाये नुस्खे से खिलाती पिलाती आई हूं ना, इसलिए यह बचपन से मुझे डॉक्टर कह कर चिढ़ाता है।
कहता है ममा तुम डॉक्टर बनना चाहती थी ना, और नहीं बन पाई, इसलिए मुझे अपना चूहा बना लिया है। और मुझ पर एक्सपेरिमेंट करती रहती हो। यह नहीं जानता कि मेरे खिलाने पिलाने का ही असर था जो इतना सुंदर-सुथरा सा बेटा है मेरा।”
बांसुरी की बात पर कली शरमा गई, और तभी बगल की कुर्सी पर बैठे राजा साहब बोल पङे।
“चूहा तो मैं भी हूं इनका। मुझ पर भी बहुत एक्सपेरिमेंट किए हैं हमारी हुकुम ने।”
उनकी बात सुनकर बांसुरी ने प्यार से राजा साहब को देखा और कली राजा साहब की तरफ देखते ही सन्नाटे में आ गई।
वह एकटक कुर्सी पर बैठे राजा साहब को देख रही थी। हां उसे तो मालूम था कि राजा साहब शौर्य के कमरे में है, लेकिन शौर्य को निहारने के चक्कर में उसका ध्यान ही नहीं गया था।
“पलक झपक लो कली।” शौर्य की आवाज उसके कानों में पड़ी और कली झेंप कर शौर्य की तरफ देखने लगी। उसने इशारे से ही शौर्य से क्या हुआ पूछा और शौर्य मुस्कुरा कर राजा साहब की देख तरफ देखने लगा।
” डैड यह मेरी दोस्त है कली, आपको पता है यह लंदन से सिर्फ और सिर्फ आपसे मिलने आई है।
इसका क्रश है आप!”
इतना बोलकर शौर्य हंसने लगा और उसकी हंसी से ज्यादा तेज आवाज में राजा साहब हंसने लगे।
वह अपनी जगह से खड़े हुए और कली के पास पहुंच गए। उनकी लंबाई चौड़ाई के सामने कली एकदम बच्ची लग रही थी। वह मुश्किल से राजा साहब के कंधे तक भी नहीं पहुंच पा रही थी। राजा साहब ने आकर कली के सिर पर आशीर्वाद वाला हाथ रख दिया।
“खूब खुश रहो कली। तुम्हारी सारी इच्छाएं पूरी हो जाए।”
कली की आंखें झुक गई। उसके दिल से आवाज उठी कि वह झुक कर राजा साहब के पैर छू ले।
कैसी बेवकूफी भरी बातें शौर्य के सामने बोल जाया करती थी, वो ।
राजा साहब और उसका क्रश!!
हे भगवान! चुल्लू भर पानी भी मिल जाए तो उसमें डूब मरने को तैयार थी वो।
इतने लोगों के सामने शौर्य कुछ भी बोल जाता है। वह धीरे से झुक कर राजा साहब के पैर छूने जा रही थी कि उन्होंने उसे रोक दिया..
“नहीं मैं किसी को भी अपने पैरों को छूने नहीं देता हूं..।”
“एक मुझे छोड़कर। इस पूरी दुनिया में सिर्फ मुझे ही हक है अपने साहब के पैर छूने का।”
बांसुरी ने मुस्कुराकर कहा और राजा साहब बड़े प्यार से अपनी हुकुम की तरफ देखने लगे।
” आपका तो पूरा हक बनता है। आप जो चाहे वह कर सकती हैं, गुलाम हूं मै आपका।”
और राजा साहब वापस अपने फोन पर बात करते हुए शौर्य की तरफ एक बार बड़ी ममता से देखकर बाहर निकल गये।
कली भी उन्हें जाते हुए देखती रही।
उसे ऐसा लगा जैसे उसने वाकई किसी ऐतिहासिक महापुरुष को देख लिया था।
वह पूरा कमरा ही एक अलग आभा से जगमगा रहा था। उसे आज सच में यह महसूस हो रहा था कि वह एक राजसी परिवार के साथ मौजूद है। पूरे कमरे को चारों तरफ से घेरे हुए सशस्त्र बॉडीगार्ड्स।
राजा साहब और रानी हुकुम के चमचमाते व्यक्तित्व के साथ उनका चमकीला मनमोहक राजकुमार, कली के सामने था।
लेकिन कली जानती थी कि इस सब पर उसका कोई अधिकार नहीं था।
इस मनमोहना ने उसे अपने मोहपाश में बांध तो लिया था, लेकिन कली को वापस लौटना था। वह धीरे से सर झुकाए बाहर निकालने के लिए मुड़ गई कि तभी शौर्य की आवाज उसके कान में पड़ी।
” कली सुनो ।”
कली रुक गई, पलट कर उसने पूछा।
” क्या हुआ?”
” कहां जा रही हो तुम?”
“अब मुझे वापस लौटना होगा शौर्य! अब तो तुम भी अपने महल जाओगे ना।”
शौर्य ने हां में गर्दन हिलाई।
” सुनो अभी तो तुम्हारे लंदन लौटने में छह दिन बाकी हैं, अगर चाहो तो हम सब के साथ महल चलो। दो दिन वहां भी रह कर देख लेना। आखिर इतनी दूर से इंडिया आई हो, और ऐसे वापस बार-बार आने तो मिलेगा नहीं।
तो राज परिवार के साथ रहकर महल भी देख लो।
कली थम कर खड़ी हो गई।
शायद वह भी यही सुनना चाहती थी। उसने बांसुरी की तरफ देखा। बांसुरी भी मुस्कुरा रही थी। बांसुरी ने भी हां में गर्दन हिला दी।
कली ने शौर्य की तरफ देखा और तभी कली का फोन बजने लगा
उसने अपना फोन उठा कर देखा डैडा.. लिखा हुआ दिख रहा था।
कली घबरा गयी और इसी घबराहट में उसने फ़ोन उठा लिया..
क्रमशः
aparna..

डैडा डाकू का कॉल आ गया, जो उसका चैन चुरायेंगे, हालंकि बाप का दिल है पर कली का सपना पूरा हो रहा है, शौर्य अब उसके साथ है l, मीठी रियाल के जॉब से संकोच में आ गई है, क्या होगा, नहीं होगा, राम जानें, नाइस पार्ट दीदी…💐🙏
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
बहुत बहुत बधाई जी 😊🎉। जीवनसाथी बुलंदियों को छू रही 🧿🧿ये तो अभी तीसरा सीजन है अभी तो और और और बहुत बहुत बहुत आगे तक जाना है आपको और सीजन लिखने है 🧿🧿💐।
अभी के लिए…
जीवनसाथी -3 के 50 एपिसोड की बधाई स्वीकार करो 💐🧿।
मीठी को हर्ष के आलावा किसी पर भरोसा नहीं है यही बात इनके रिश्ते को मजबूत बनाएगी
रियाल की कहानी तो दर्द भरी है और मीठी के सहारे को प्यार समझ बैठी , मीठी तो वैसे ही बहुत भावुक है, जो लड़की एक पेड़ के कटने से इतना दुखी हो सकती है तो जाहिर है रियाल तो इंसान है और जुड़ाव भी हो ही जाता है साथ बैठने पढ़ने से पर यहाँ तो रियाल ने कुछ और ही सोच लिया पर मीठी बहुत कंफ्यूज है रियाल से रिश्ते को लेकर पर हर्ष हैना वो सब ठीक कर देगा।
एक पल के लिए तो मुझे लगा हर्ष, बांसुरी और हम सबका हर्ष और मीठी की जोड़ी का सपना टूट गया पर नहीं शुक्र है ऐसा नहीं हुआ इसलिए शुक्रिया 😘।
बहुत लाजवाब भाग 👌👌👌।