जीवनसाथी -3 भाग 45

जीवनसाथी -3 भाग 45

जीवनसाथी by aparna

यही ठीक रहेगा खुद उसके लिए भी, शौर्य के लिए भी, और उसके डैडा के लिए भी…वैसे भी अब वो खतरे से बाहर है.. विक्रम और लल्लन उसका ध्यान रख लेंगे.. !
यही ठीक रहेगा…

हाँ यही ठीक रहेगा..!

मन ही मन यह दोहराते कली अस्पताल की उस कांच की स्क्रीन से हटने को थी कि उसके पर्स में पड़ा शौर्य का मोबाइल बजने लगा उसने लपक कर फोन उठा लिया..

“हेलो शौर्य, मेरे राजकुमार, मेरे लाड़ले… कैसे हो बेटा ?”

फ़ोन पर किसी पुरुष की बारीक लेकिन तीखी सी आवाज़ सुन कली चौंक गयी..

“आप कौन.. ?”

“हम हमारे प्रिंस के मामा बोल रहे हैं। पर तुम कौन हो लड़की.. और हमारे लिटिल मास्टर का फ़ोन तुम्हारे पास कैसे ?”

लगता है पूरा परिवार पागल है.. ये आदमी ऐसे बात कर रहा जैसे प्रिंस वाकई का प्रिंस हो..

मन ही मन यह सोचती कली के चेहरे पर एक बार फिर हल्की सी मुस्कुराहट आ गई।

” सॉरी अंकल, मैं प्रिंस की दोस्त हूं और प्रिंस इस वक्त बनारस के हॉस्पिटल में है !”

” क्या? बनारस के अस्पताल में?
लेकिन प्रिंस वहां क्या कर रहे हैं.. ?!”

“आराम कर रहा है आपका राजकुमार.. उसे गोली.. ।”

कहते कहते कली रुक गयी..

“वो उसकी तबियत ज़रा ख़राब हो गयी थी.. ।”

“क्या हुआ उन्हें.. हमें सच-सच सब कुछ बताओ लड़की क्या हुआ है लिटिल मास्टर  को ?”

कली ने अपने गले की थूक निगली और साँस भर कर बोलने लगी..

“हम दोनों उस वक्त घाट पर थे, तब जाने कहाँ से एक गोली चली और आपके लिटिल प्रिंस को, सॉरी लिटिल मास्टर को लग गयी.. !”

“क्या.. ? हमें ऐसी ही कुछ अनहोनी की आशंका हो रही थी ।और हम लिटिल मास्टर का फोन ट्रैक करके बनारस तक पहुंच भी गए हैं।
बस 5 मिनट में वहां पहुंच जाएंगे..।
अपनी सिक्योरिटी के बिना लिटिल मास्टर अकेले काशी में क्या कर रहे ? प्रेम बाबू, अब आपकी महल से छुट्टी पक्की !”

वो आदमी फ़ोन बिना काटे खुद में बड़बड़ाता रहा, और कली ने “ओके अंकल..!” बोल कर फ़ोन काट दिया…

कहने को कली ने कह तो दिया लेकिन उसकी समझ से बाहर था कि प्रिंस का फोन ट्रैक करके बनारस पहुंच चुके प्रिंस के अंकल कौन थे?

    उसने तो आज तक उससे यह तक नहीं पूछा था कि प्रिंस रहने वाला कहां का था?
उसके बारे में कुछ भी नहीं जानती थी वो।एक उसके नाम के अलावा।
लंदन में प्रिंस ने बस इतना ही बताया था कि वह उस राजकुमारी परी का ड्राइवर है। लेकिन यहां आने के बाद उसने अपने मालिक से मिलवाया वह परी नहीं थी। खैर इतनी सारी बातें सोचने से अच्छा कली ने यह सोचा कि एक बार और मन भर के प्रिंस को देखकर वापस लौट जाए।

वह वापस स्क्रीन की तरफ पलटी और निर्निमेश पलकों से सामने लेटे प्रिंस की तरफ देखने लगी। जैसे उसके चेहरे को अपनी जिंदगी भर की यादों में समा लेना चाहती हो।

धीरे से उसके होंठ खुले और वह बोल उठे।

“जानती हूं, अब तुमसे कभी मिलना नहीं हो पाएगा।
हमारा प्रारब्ध शायद यही तक के साथ का था !
        लेकिन यहां से जाने के बाद हिंदुस्तान की सबसे खूबसूरत याद के तौर पर तुम मेरे ज़हन में हमेशा हमेशा के लिए रह जाओगे प्रिंस! मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे मेरा पहला प्यार हिंदुस्तान में मिलेगा, और शायद यही कारण था जो यह देश मुझे इस कदर बुला रहा था।
अपनी तरफ खींच रहा था, क्यूंकि यहाँ मुझे तुमसे जो मिलना था !
अब समझ आया कि, मेरा सपना तो एक तरफ था, लेकिन मेरी जिंदगी में तुम आने वाले थे और मेरी ज़िंदगी  बदलने वाली थी यहां आकर!
और इसीलिए मैं यहां आई!
   अब जा रही हूं हमेशा हमेशा के लिए!
तुम्हारी यादों को अपने दिल में कैद कर कर लिए जा रही हूं। पता नहीं मेरी जिंदगी आगे किस मोड़ पर मुङेगी, लेकिन अब अपना कोई भी सपना पूरा करने की इच्छा बाकी ही नहीं बची प्रिंस!
  तुमसे मिल लिया, यू लगा मेरा सफर पूरा हो गया।
यहां आने के पहले जाने क्या-क्या सोचा था। सोचा था दस दिन की अपनी जिंदगी ऐसे जियूंगी जैसे कभी नहीं जी।
    एक स्वतंत्र स्वाधीन रिबेल लड़की की जिंदगी जीना चाहती थी मैं।
   मैं अपने डैडा के सामने खुद को प्रूफ करना चाहती थी कि मैं खुद भी उनकी बेटी होने के अलावा भी कुछ हूं। राजा साहब से मिलना चाहती थी। अपनी मौसी मां को इस इतने बड़े देश में ढूंढना चाहती थी।

    लेकिन डैडा के दिए दस दिनों में से चार दिन बीत गए और इन चार दिनों में तुमने मेरे दिल दिमाग पर ऐसा कब्जा जमा लिया कि मेरे सारे सपने एक तरफ बह गए।
सच कहूं तो उन सपनों में से एक सपना अब भी सांस ले रहा है, और वह है एक बार मौसी माँ से मिलने का सपना।
     एक बार बस एक बार उनके गले लगना चाहती हूं अब भी।
लेकिन यह भी जानती हूं, इस भीड़ भरी दुनिया में मैं उन्हें नहीं ढूंढ पाऊंगी। तुमसे मिलने के पहले ढेर सारा जज्बा था मेरे अंदर, कुछ कर गुजरने का। लेकिन अब तुमसे मिलने के बाद ऐसा लग रहा है मेरी जिंदगी का लक्ष्य पूरा हो गया।

मैं क्यों पैदा हुई हूं, उसके मायने मिल गए मुझे।
जा रही हूं प्रिंस तुम्हारी दुनिया से दूर, अपनी दुनिया में। अपने डैडा, सरू और दर्श अंकल के पास।

अब कोई इच्छा बाकी नहीं रही, तुमसे मुहब्बत जो कर ली..।”

होठों ही होठों में धीरे-धीरे बुदबुदाती कली की आंखों से आंसू बहते चले जा रहे थे। उसे मालूम नहीं था कि उसके बगल में खड़ा विक्रम उसे देख और सुन रहा है।

धीरे से विक्रम ने कली के सामने अपना रुमाल बढ़ा दिया। कली ने रुमाल देखा और अपने बगल में खड़े विक्रम को देखकर झेंप गई।

” आई एम सॉरी!”

” नो….नो.. नॉट एट ऑल.. इन फैक्ट आई एम सॉरी! मैंने आपकी पर्सनल बातें सुन ली। लेकिन मैं क्या करूं आपको ऐसे रोते छोड़कर जाया नहीं गया मुझसे।
     वैसे अब क्या सोच रही है आप?”

” अब यही सोच रही हूं कि मेरा यहां कोई काम नहीं रह गया है। मुझे यहां से लौट जाना चाहिए।”

“कहां जाएंगी वापस?”

” दिल्ली जाऊंगी। और दिल्ली से लंदन।”

” आपको कहीं छोड़ दूं ?”

विक्रम के सवाल पर कली ने ना में गर्दन हिला दी।

” मैं यहां से टैक्सी ले लूंगी दिल्ली के लिए, या फिर फ्लाइट।”

” आप अकेले ट्रेवल कर लेंगी? आर यू श्योर?”

“यस!  लंदन से भी अकेली आई हूं।”

” अपना ध्यान रखिएगा।”

कली ने हां में गर्दन हिलाई और चुपचाप भारी कदमों से अस्पताल से बाहर निकालने के लिए आगे बढ़ गई।

वह आगे बढ़ ही रही थी कि तभी अस्पताल के मुख्य द्वार से एक साथ लगभग बीस बाईस वर्दी धारी दौड़ते हुए उसे पार करके अंदर की तरफ बढ़ गए। उनके पीछे एक सूट बूट में सजा आदमी हल्के से लंगड़ाते हुए उसी तरफ बढ़ गया..

इतनी भारी भीड़ को वहां देखकर कली भी चौंक कर रूक गई।

” लगता है कोई बड़ा आदमी अस्पताल में भर्ती हुआ है।”

उसने अब तक अपने पास पहुंच चुके लल्लन की तरफ देख कर कहा। लल्लन ने भी उसकी बात में हामी भर दी।

” हां जिज्जी, ऐसा लग रहा है कोई बड़ा नेता या अभिनेता भर्ती हुआ इस अस्पताल में और यह सब तो काले काले कपड़े पहने हुए सिक्योरिटी गार्ड जैसे लग रहे हैं।”

कली में भी हां कह दिया। वह सारे लोग वहां पहुंचकर इधर-उधर शौर्य के बारे में पूछने लगे। तभी उस आदमी की आवाज कली के कानों में पड़ी वह नर्स से पूछताछ कर रहा था..

“शौर्य प्रतापसिंह बुंदेला को कहाँ भरती किया है ?”

“जी इस नाम का कोई मरीज़ यहाँ भरती नहीं किया गया है सर !”

“ऐसा कैसे संभव है ? लिटिल मास्टर के फ़ोन से हमसे यही से किसी ने बात की थी, वो लड़की कह रही थी शौर्य की दोस्त है..।”

उस आदमी की इन बातों को सुनकर कली पलट कर उसे देखने लगी…
बात करने पर उस आदमी के गालों पर गहरा गड्ढा सा बन रहा था.. उसकी आंखें कुटिलता से भरी छोटी-छोटी थी, और वह अपनी छोटी आंखों को और छोटा करके सामने रिसेप्शन पर मौजूद नर्स को कच्चा खा जाने वाली नजरों से वह घूर रहा था।
ऐसा लग रहा था अगर उस नर्स ने इसके पूछे हुए लड़के का अता पता नहीं बताया, तो वह नर्स के साथ-साथ पूरे अस्पताल को जमीनदोज़ कर जाएगा।
कली को वह आवाज भी पहचानी सी लगी और इसलिए वह उस आदमी तक पहुंच गई..

” एक्सक्यूज मी, क्या आप प्रिंस को ढूंढ रहे हैं..?”

अपूर्व ठाकुर को लगा, यह लड़की राजकुमार शौर्य को  प्रिंस बुला रही है। और उसने तपाक से हां कह दिया।

” हां हम लिटिल मास्टर को ही ढूंढ रहे हैं। क्या तुम ही वह लड़की हो, जिससे हमारी कुछ देर पहले बात हुई थी।”

कली ने उस आदमी की तरफ देखते हुए धीरे से हां में गर्दन ऊपर नीचे घुमा दी। और वह आदमी एक तरह से कली पर टूट पड़ा।

” कहां है लिटिल मास्टर ? किसने गोली मारी उन्हे? क्या हो गया है..? वो है कहाँ ?”

उसकी तेज आवाज और प्रश्नों के बीच कली सहम कर एक कदम पीछे हट गई और उसने चुपचाप ऑपरेशन थिएटर की तरफ उंगली घुमा दी। उस आदमी के साथ-साथ आई पूरी फौज ऑपरेशन थिएटर की तरफ बढ़ गई..

“ये सब कौन है ?” विक्रम ने आकर कली से पूछा और कली ने मुझे नहीं पता का इशारा कर दिया..

कली विक्रम और लल्लन तीनों ही उन लोगों के पीछे बढ़ गए..

वहां ऑपरेशन थिएटर के सामने के कॉरिडोर में पहुंचते ही वह सारे काले कपड़े पहने आदमी उस गलियारे को खाली करवाने लगे।
     वह सब वहाँ तैनात हो गए, वहां से उन्होंने लोगों का आना जाना रोक दिया। वहां से गुजरते एक डॉक्टर ने उनसे उनका परिचय पूछ लिया और उनमें से एक आदमी ने अपना आई कार्ड निकाल कर उस डॉक्टर को दिखा दिया।
   वह डॉक्टर उस आई कार्ड को देखते ही सन्नाटे में आ गया, और तुरंत उस आदमी की तरफ हां मैं गर्दन हिलाता खुद भी लोगों को इस हिस्से को खाली करने कहता तेज़ी से आगे बढ़ गया..।

लल्लन,गुड्डन कली और विक्रम एक तरफ चुप चाप से खड़े रह गए थे। उन लोगों को अचानक समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर इन लोगों के आने के बाद ऐसा हुआ क्या, जो अस्पताल के इस हिस्से को बिल्कुल मिलिट्री की छावनी में तब्दील कर दिया गया था। वहां मौजूद डॉक्टर नर्स हर कोई भागने दौड़ने में लग गया था। ऐसा लग रहा था अब तक प्रिंस की जो भी चिकित्सा की जा रही थी, अब उस चिकित्सा को दुगुने  तरीके से दिखाया जाने लगा था…।

वह चारों चुपचाप एक तरफ खड़े थे। कली ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन वहाँ मौजूद गार्ड्स ने दूर से हाथ दिखाकर उन लोगों को अब इस तरफ आने के लिए मना कर दिया..

आनन फानन में ही बैरिकेट्स लगाकर उस गलियारे को उन लोगों ने बाहरी लोगों के घुसने के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र में तब्दील कर दिया..

” यह तो हद हो गई, आखिर यह है कौन जो इतना नाटक किया जा रहा है..!”

गुड्डन से इतना सारा रहस्य संभाल नहीं जा रहा था…
वह मरी जा रही थी यह जानने के लिए कि आखिर अचानक हो क्या गया?
और उसने उधर से गुजरती एक नर्स को रोक कर उससे पूछ लिया

” सुनिए नर्स दीदी, अरे सुनिए तो….

वही नर्सेस जो अब तक आराम से इधर से उधर तफरीह कर रही थी, अब सब ने अपनी यूनिफार्म बदल ली थी। सबके हाथों में बराबर ग्लव्स नजर आ रहे थे। सबके बाल बिल्कुल बंधे हुए थे, और कहीं से उन्हें देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि वह अपनी ड्यूटी की जगह फालतू में वक्त जाया करती होगी।

उस नर्स ने भी अपने आप को समय की पाबंद और कर्तव्यनिष्ठ दिखाते हुए गुड्डन की बात पर कान नहीं दिए और अपनी ट्रे संभाले ऑपरेशन थिएटर की तरफ चली गई..

खुद को बहुत ज्यादा हैरान परेशान सा दिखाता वही युवा डॉक्टर जिसने असल में प्रिंस की सर्जरी की थी, वापस ओटी से बाहर आने लगा।

      वह कुछ देर पहले ही यह सब तामझाम होने के बाद ओटी में दाखिल हुआ था। और अब ऐसे दिखा रहा था जैसे उससे बड़ा सर्जन इस पूरे संसार में कोई नहीं है। अपनी व्यस्तता का बखान करता हुआ वह उस नए आए हुए आदमी से कुछ बातें बता रहा था। वह आदमी जिसने कली से फोन पर बात की थी, चेहरे से ही महा कपटी नजर आ रहा था..
उसके घमंड की सीमा यह थी कि उसने बात करते समय कली के चेहरे की तरफ देखने तक की जरूरत नहीं समझी थी। अपने मोबाइल पर कोई मैसेज स्क्रोल करते हुए ही वह कली से बात कर रहा था, और उसके बाद उसने ऑपरेशन थिएटर का रुख कर लिया था।

एक बार इस तरफ आने के बाद उसी के आदेश पर उसके गार्ड्स ने गलियारे को सील बंद कर दिया था..।
यह तो गनीमत थी कि उस गलियारे में एकमात्र ऑपरेशन थिएटर ही था, जहां इत्तेफाक से उस वक्त सिर्फ और सिर्फ शौर्य की ही सर्जरी हुई थी। वरना अगर वहां बाकी के मरीज मौजूद होते तो अपूर्व ठाकुर उन मरीजों को भी बाहर का रास्ता दिखा देता..।

कली को यह सब बड़ा अजीब लग रहा था। लेकिन इस सबके साथ ही पता नहीं क्यों उसकी धड़कनें बहुत तेज हो गई थी। अब उसे प्रिंस के बारे में कुछ भी नहीं पता चल पा रहा था, और ना यह पता चल पा रहा था कि यह डॉक्टर और नर्स बार-बार अंदर बाहर क्यों कर रहे हैं..।

” कहीं प्रिंस की तबीयत और ज्यादा खराब तो नहीं हो गई?”

कली ने विक्रम की तरफ देखकर आशंका जताई और विक्रम ने ढांढस बंधाते हुए अपने चेहरे और आंखों से कली को आश्वस्त कर दिया।
   विक्रम कम नहीं, बहुत कम बोलता था। बिना जरुरत के उसे कुछ भी बोलना व्यर्थ लगता था। अगर प्रिंस को गोली नहीं लगी होती तो शायद विक्रम यहां ठहरता भी नहीं। लेकिन आज उसे कली को देखकर उस पर तरस भी आ रहा था।

” घबराओ मत,मुझे नहीं लगता कि उसकी तबीयत बिगड़ी है। लेकिन हां यह सारा तामझाम देखकर ऐसा लग रहा है जैसे यहां के डॉक्टर और नर्स किसी के सामने यह साबित करना चाहते हैं कि वह कितने कर्तव्य परायण है।
खैर ..  छोड़ो, मैं पता करके आता हूं कि आखिर माजरा क्या है..?”

विक्रम के पीछे कली भी पलट कर चली गई और उन दोनों के पीछे लल्लन और गुड्डन भी। उस गलियारे से बाहर रिसेप्शन की तरफ आकर चारों रिसेप्शन पर खड़े थे। और रिसेप्शन के उस पार खड़ी नर्स उन चारों का चेहरा देख रही थी..।

” कहिए अब आप चारों को क्या चाहिए..?”

” यह अभी-अभी जो पलटन आई है, यह लोग कौन हैं दीदी ? अस्पताल में भौकाल मचा दिए हैं। मतलब ऐसा लग रहा है, जैसे पूरे बनारस को सर पर उठा लेंगे। यह बनारस के तो नहीं लग रहे। हैं तो कहीं बाहर के पर हैं कौन?”

” मुख्यमंत्री राजाधिराज अजातशत्रु सिंह बुंदेला का नाम सुना है, आप लोगों ने?”

“हाँ सुना है.. काहे नहीं सुनेंगे.. !” लल्लन के जवाब देने के बाद उस नर्स ने बारी बारी सबका चेहरा देखा और सब ने हामी भर दी…

” उन्हीं के बेटे शौर्य प्रताप सिंह बुंदेला को आप लोग लेकर आए थे। उन्हें ही बनारस के घाट पर गोली लगी थी, और उन्ही का ऑपरेशन किया गया है..।”

“सॉरी… किसके बेटे हैं ?”कली खुद को रोक नहीं पायी

“राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला के !”

कली का गला सूखने लगा ……
उसे लगा सारी धरती उसके इर्द-गिर्द गोल-गोल घूमने लगी है..
तो क्या अब तक वह राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला के बेटे के साथ थी। वह चकरा कर वहीं  रखी बेंच पर ढह गई।

क्रमशः

aparna….

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Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
1 year ago

वाह पुराने पाठ की याद आ गई जब हॉस्पिटल में प्रेम आया था और बांसुरी को मालूम चला था। ठीक आज उसी तरह कली को मालूम चला प्रिंस कौन है, लेकिन अब वह उससे प्यार करने लगी है, अब वह क्या करेंगी पढूंगा आगे लेकिन बेस्ट पार्ट ऑफ द स्टोरी…. वाह दी 👌👍💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️💐💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐