जीवनसाथी -3 भाग -43

जीवनसाथी -3 भाग -43

जीवनसाथी by aparna

वो उसे आपने साथ ले गया..
लेकिन जाते जाते मीठी वापस मुड़ी और उसने देवयानी को देख कर इशारे में मैं वापस आकर गिलास ख़त्म कर दूंगी का इशारा किया और हर्ष के साथ आगे बढ़ गयी..

जाते जाते हर्ष उसे अपने अंदाज़ में समझाता भी जा रहा था..
उसे मालूम था कि अगर वो मीठी से सीधे तौर पर ये कहेगा की ड्रिंक न करे तो मीठी उसे आपने ईगो पर ले लेगी.. और हो सकता है, उसकी बात न माने इसलिए वो बातों को घुमा कर कहने लगा..

“मीठी, तुम वैसे ही इतनी समझदार हो.. तुम्हे ऐसे दोस्त..

मीठी ने हर्ष की तरफ ऑंखें चौड़ी कर देखा… हर्ष हड़बड़ा गया..

“मेरा मतलब था… “

“मैं समझ रही हूँ… तुम मुझे उल्लू समझते हो क्या.. ? एक तो वैसे ही ये लोग मुझे मम्माज़ गर्ल बोल कर चिढ़ते हैं,अब तुम्हारा नाम से भी कहने लगेंगे।
कहेंगे ममा साथ नहीं है तो अपना जासूस भेज दिया..!”

” ऐसी कोई बात नहीं है मीठी, और इन सब बातों से तुम्हें फर्क नहीं पड़ना चाहिए ।
अच्छी बात तो है कि तुम अपनी मॉम से पूछ कर सारा काम करती हो, इस बात पर तुम्हें प्राउड होना चाहिए..।”

” प्राउड तो तुम्हारे जैसे पर्सनालिटी हो तब होता है हर्ष। तुम देखो कितनी छोटी उम्र में इंडिपेंडेंट हो। यहां तक कि तुम्हारे पापा, तुम्हारे चाचा भी तुमसे सलाह लेकर काम करते हैं। ऐसा होना चाहिए व्यक्तित्व कि आपकी उम्र क्या है इससे फर्क नहीं पड़ता, लेकिन आपकी बुद्धिमत्ता आपका विवेक आपकी निर्णय लेने की क्षमता ऐसी होनी चाहिए कि आप से बड़े भी आपसे पूछ कर काम करें…।
एक बात बताओ तुम मुझे ड्रिंक करने से मना कर रहे हो, ड्रिंक तो तुम भी करते हो.. ? फिर ?”

हर्ष के पास मीठी की इस बात का कोई जवाब नहीं था.. उसी समय हर्ष के कुछ बिज़नेस क्लाइंट्स उससे बात करने चले आये और वो मीठी को वहीँ रुकने बोल उन लोगो के साथ चला गया..!

मीठी ने पलट कर उन मॉडल्स की तरफ देखा.. वो सब उसे ही बुला रही थी..

मीठी तमक कर उनके पास पहुँच गयी….
वो मॉडल्स वापस मीठी को उकसाने लगी और अपनी बेवकूफी में खुद को स्वतंत्र और आत्मनिर्भर साबित करने के चक्कर में मीठी ने ग्लास उठा कर गटक लिया..!
मीठी की आँखों में हल्का धुंधलापन सा आ रहा था..
वो वापस अपने होटल के कमरे में जाने को खड़ी हो गयी..
वो लड़खड़ा तो नहीं रही थी, लेकिन कहीं हर्ष समझ न जाये की उसने पी है इसलिए वो थोड़ा ज्यादा ध्यान रख रही थी कि उसके क्रियाकलाप सामान्य बने रहे..

कुछ दूर चल कर वो वापस आकर उन्हीं लड़कियों के साथ बैठ गयी..

सारी की सारी लड़कियां अपनी बातों में लगी थी.. कोई अपने बॉयफ्रेंड के बारे में बता रही थी, कोई अपने दोस्त के..
लेकिन सारी की सारी लड़कियां एक सुर में हर्ष की तारीफ करते नही अघा रही थी…।
हर्ष उन सबका सार्वजानिक क्रश बना बैठा था..।

किसी को हर्ष की स्टाइलिंग पसंद थी, तो किसी को उसका बोलने का अंदाज़..
किसी को उसका चलना बहुत भाता था तो कोई उसके लुक्स पे फ़िदा थी..
कोई उसके परफ्यूम की दीवानी थी तो कोई उसके बालों के स्टाइल की..
कुल मिलाकर उन सभी गोपियों को हर्ष में अपना मनमोहना नजर आता था..

वो सभी जानती थी कि मीठी हर्ष की दोस्त है..
उनकी बातों के बीच एक लड़की ने टोका भी..

“अरे ज्यादा तारीफ मत करो वरना मीठी जल कुढ़ जाएगी.. !”
.तभी दूसरी बोल पड़ी..

“शट अप नीति.. मीठी हर्ष की गर्लफ्रेंड नहीं है.. है न मीठी ?”

“अहह हम्म… हम सिर्फ दोस्त हैं.. और कुछ नहीं.. !”

मीठी ने उन लड़कियों की बातों के बीच हर्ष को पलट कर देखा, वो अपने साथ वालों के साथ बातचीत में लगा हुआ था..
लेकिन इसके साथ ही बीच बीच में मीठी को भी एक बार देख लेता था..
जिस वक्त मीठी ने हर्ष की तरफ देखा, ठीक उसी वक्त हर्ष की नजर मीठी पर पड़ गई।
हर्ष ने धीरे से अपनी एक भौंह चढा कर मीठी से पूछा कि क्या हुआ और मीठी ने धीरे से ना में गर्दन हिला दी।

हर्ष एक बहुत सुलझा हुआ और समझदार लड़का था। हर्ष के बारे में जानने वाले अक्सर यही सोचते थे कि इतने बड़े घर का लड़का महलों का राजकुमार जो बचपन से सोने की थाली और चांदी के चम्मच में खाते नहीं बल्कि खेलते हुए बड़ा हुआ है, उसे कैसे घमंड छूकर भी नहीं गया। देखा जाए तो हर्ष ऐसा मोस्ट एलिजिबल बैचलर था, जिसके सपने हर लड़की देखा करती थी…।

वहां बैठी लड़कियों की बात सुनकर पल भर के लिए भी मीठी के दिल में किसी तरह की कोई जलन या कुढन की भावना नहीं आई। बल्कि पता नहीं क्यों, वह एक अनोखे गर्व से भर गई थी।
आखिर उसका दोस्त लड़कियों के बीच अच्छा खासा पॉपुलर जो था।

बैठे-बैठे उसने एक और गिलास उठा लिया, और हर्ष के बारे में सोचते हुए ही घूंट पर घूंट भरती चली गई। पार्टी के खत्म होने का वक्त आ गया था। लोग एक-एक कर लौटने लगे थे। यश वहीं से अपने अंकल के साथ निकल गया…

धनुष कभी भी लेट नाईट पार्टी का हिस्सा नहीं बनता था.. उसके लिए सुबह पांच बजे उठना बेहद ज़रूरी था। और वो अपने रूटीन से कभी समझौता नहीं करता था।  इसलिए आज भी वो सारे बिज़नेस क्लाइंट्स से मिल कर ग्यारह तक अपने कमरे के लिए निकल गया था..।
जिस होटल में ये लोग ठहरे थे, वहीँ नीचे के हॉल में पार्टी थी..

एक एक कर लोग जाने लगे और टेबल पर एक तरफ उंघती सी बैठी मीठी भी ऊपर कमरे में जाने के लिए खड़ी हो गयी.. लेकिन अब उसकी चाल में लड़खड़ाहट थी..
उसने जैसे ही कदम आगे बढ़ाया वो लड़खड़ाने को हुई और हर्ष ने आकर उसे थाम लिया..

हर्ष ने उसकी बांह थामी और उसे साथ लेकर लिफ्ट की तरफ बढ़ गया..

लिफ्ट से निकलते ही सामने मीठी का कमरा था। हर्ष ने मीठी के पास से उसके कमरे की चाबी ली और कमरा खोल दिया। मीठी अंदर की तरफ जाते हुए फिर लड़खङाने लगी। इसलिए उसे छोड़ने के लिए हर्ष को कमरे के कमरे के अंदर आना पड़ा, उसने अंदर जाकर मीठी को वहीं पड़े सोफे पर बैठाया और मुड़कर जाने को था कि मीठी ने हर्ष का हाथ पकड़ लिया..

“थोड़ी देर बैठोगे, तुमसे कुछ बातें करने का मन था हर्ष..।”

हर्ष ने बहुत आश्चर्य से पलट कर मीठी को देखा और उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई।
हर्ष बहुत पहले से ही मीठी को पसंद किया करता था। लेकिन वह ये भी जानता था कि मीठी के मन में हर्ष के लिए कुछ नहीं था। मुस्कुरा कर हर्ष एक दूसरे सोफे पर बैठ गया..

“वैसे तुम्हें पीने के लिए मना किया था मीठी, पर तुम मानी ही नहीं, और देखो तुम्हें चढ़ गई है।  इस वक्त तुम अपने सेंसस में नहीं हो। ऐसे में तो मुझसे क्या बात करना चाहती हो..?”

“तुम्हें कुछ बताना चाहती थी..।”

“किसके बारे में..?”

“खुद के बारे में..।”

मीठी की बात सुनकर हर्ष मुस्कुराने लगा। उसे लगा कि शायद मीठी के मन में भी हर्ष के लिए एहसास जाग रहे हैं.. वो मुस्कुरा कर उसकी बात सुनने लगा…

” तुम जानते हो हर्ष मैं तुम्हें अपना सबसे करीबी दोस्त मानती हूँ..  बहुत करीबी..।
मुझे याद है, हम बचपन में बहुत साथ में नहीं खेले हैं.. क्योंकि तुम्हारा बहुत सारा टाइम महल में बीतता था। और उसके बाद तुम अपने महल वाले स्कूल पहुंच गए..।
मेरी ममा मुझे कभी भी महल के बच्चों के लिए बने स्कूल में नहीं भेजना चाहती थी, पर पापा चाहते थे कि मैं वहीं पढूं, तुम सब के साथ..।
पर पता नहीं क्यों मेरी ममा मुझे हमेशा आम लोगों की तरह पालना चाहती थी।
बचपन में मां की रोक-टोक मुझे समझ नहीं आती थी। कॉलेज में भी मुझे यही लगता था कि मेरी मां कुछ ज्यादा ही टोकती है। और तब तुम अक्सर मुझे यही समझाया करते थे कि ममा जो कहती है, वह सब सही है। मां ने मुझे हमेशा बहुत साधारण तरीके से बड़ा किया है।
मुझ में कभी भी किसी बात का भी घमंड नहीं आने दिया। मुझे हमेशा जमीन से जुड़े रहना सिखाया..। मुझे हमेशा यह सिखाया कि दोस्त चुनते समय मैं अपने आंख कान खुले रखूं।
कभी भी किसी से भी यूं ही दोस्ती ना करूं। ममा शुरू से ही बहुत चौकन्नी रहती थी, मेरे दोस्तों को लेकर।

    शायद उनका मानना था कि हम बच्चे एक बड़ा समय अपने दोस्तों के साथ भी गुजारते हैं, इसलिए दोस्तों का भी सही रहना बहुत जरूरी है।
लेकिन मां हमेशा तुम्हारी जरूर तारीफ किया करती थी। वैसे सच कहूं तो मेरे आस-पास शायद ही कोई होगा जिसने तुम्हारी बुराई की हो।
   तुमने भी बचपन से हमेशा मुझे सही और गलत के बीच का फासला समझाया है। तुम्हारे साथ रहती हूं तो ऐसा लगता है, जैसे कुछ गलत नहीं हो सकता, कभी भी।”

मीठी की बातें सुनकर हर्ष मुस्कुरा रहा था। उसे लग रहा था कि मीठी भी उसे पसंद करती है।
हर्ष ने धीरे से मीठी की तरफ देखा। मीठी ने अपने हाथ में एक छोटी सी किताब पकड़ रखी थी।
वह किताब उसके रूम की टेबल पर पड़ी हुई थी। हर्ष ने झांक कर जानने की कोशिश की, कि किताब कौन सी है? लेकिन वह समझ नहीं पाया।

उस किताब को अपने हाथ में इधर से उधर घूमाती हुई मीठी अपनी बात पूरी करने लगी..

“हर्ष मैंने आज तक अपनी जिंदगी की कोई बात कभी भी अपनी मम्मा से नहीं छुपाई। लेकिन पहली बार ऐसा हो रहा है कि मैं कोई बात है जो अपनी मां से नहीं बता पा रही हूं..।”

हर्ष के माथे पर सिकुड़न आ गई। उसने मीठी की तरफ देखा। मीठी भी उसे देखने लगी..।

“पता नहीं मैं इस बात को मामा को बता भी पाऊंगी या नहीं? लेकिन मां के बाद तुम ही हो जिससे मैं इतनी क्लोज हूं कि अपने मन की हर बात शेयर कर सकती हूं। हालांकि मैं बहुत समय से ही ये बात सोच रही थी कि तुम्हें बता दूं।
लेकिन कभी मौका ही नहीं मिला।
असल में मैंने इसलिए थोड़ी ड्रिंक लें ली,  जिससे मुझ में थोड़ी हिम्मत आ जाये.. ।
तुम्हे कुछ बताना है !”

“हाँ बोलो न मीठी.. मैं सुनने को तैयार हूँ, और विश्वास  मानो मैं तुम पर जजमेंटल भी नहीं होंगा.. मैं तुम्हारे मन की बात जानना चाहता हूँ… !”
.
“बात ये है हर्ष…

****

शौर्य को लेकर कली और लल्लन अस्पताल पहुँच चुके थे… शौर्य को अस्पताल का स्टाफ भरती करने में आनाकानी करने लगा..।

शौर्य को लगी गोली अस्पताल स्टाफ को डरा रही थी..

“नहीं नहीं.. अप लोग पहले पुलिस में रिपोर्ट दर्ज़ कीजिये तभी पंचनामे के बाद ही इन्हे भरती किया जा सकेगा.. !”

वहाँ मौजूद वार्ड बॉय ने कहा और कली उसके सामने हाथ जोड़ कर सिसक उठी..

“हम लोग यहाँ इस शहर में कुछ नहीं जानते.. बाहर से आये हैं ! पुलिस पंचनामे के चक्कर में कहीं इनका खून ज्यादा बह गया तो..!”

“हम लोग क्या कर सकते हैं मैडम…? ये गोली वोली का चक्कर बहुत ख़राब है…।
यहाँ तो आजकल गुंडों और पुलिस वालो की मुठभेड़  आम बात हो गयी है.. गोली लगने वाले मरीज़ अपने साथ पुलिस वकील को लेकर ही आते हैं..

“अजीब आदमी हो.. तुम्हे अस्पताल में काम पर रखा किसने..? तुम्हारे अंदर दया भावना तो है ही नहीं..।
तुम क्या मरीज़ो की मदद करोगे..?
मेडिकल प्रोफेशन जितना ही नोबेल प्रोफेशन है, उतना ही तुम जैसे स्वार्थी लोगो ने इसे बिज़नेस बना दिया है..।
आज लग रहा काश मैंने भी मेडिकल पढ़ लिया होता.. !”

कली एक तरह से रो पड़ी… लल्लन से कली को ऐसे बिलखते देखा नहीं जा रहा था….।
वो इधर उधर फ़ोन घुमाता कोई जुगाड़ बनाने में लगा हुआ था..
शौर्य दर्द से बेहाल था, लेकिन था तो राजपूती खून, राजा अजातशत्रु का बेटा..।

अपने दांत भींच कर उसने अपने आप को संभाला हुआ था, बीच बीच में आंखे खोल कर कली को देख लेता था। और कली की लगातार बहती परेशान हाल आंखे देख उसे समझाने को मुहं भी खोलना चाहता था, लेकिन ये संभव नहीं हो पा रहा था…. 

कली शौर्य के ठीक पास खड़ी थी.. और बीच बीच में उसकी आँखों से मोटे मोटे आंसू गिर कर शौर्य की कमीज़ भिगोते जा रहे थे..।
खून भी बह कर कमीज़ को रंग चुका था। उस पर लगातार गिरते आंसूओं से कमीज़ भीग चुकी थी…।
कली शौर्य की भर्ती के लिए परेशान थी, तभी भागता हुआ सा विक्रम वहाँ आ पंहुचा..

“क्या हुआ ? आप लोग अब तक यहाँ कैसे ?”

उसने पहुँचते ही कली से पूछा..

“बिना पुलिस के आये ये लोग काम नहीं शुरू करेंगे.. कह रहे पहले पुलिस और कुछ पंचनामा होगा तब जाकर ट्रीटमेंट शुरू करेंगे.. !”

विक्रम ने घूर कर उस वार्डबॉय को देखा..

“नाम क्या है तुम्हारा ?”

“जयप्रकाश सिंह ? क्या कर लोगे ?” वार्डबॉय ने बड़ी ढीठता से कहा..

और विक्रम ने अपनी शर्ट से अपना आईडी कार्ड निकाल कर उसकी आँखों के ठीक सामने चमका कर वापस अपनी जेब में डाल लिया…

“देख लिया आईडी.. पंचनामा भी तैयार हो जायेगा, पहले ट्रीटमेंट शुरू करो,  वरना गैरजिम्मेदारना हरकत के इल्जाम में तुम्हे अंदर कर दूंगा.. !”

वार्ड बॉय ने विक्रम को देख कर हां में गर्दन हिलायी और शौर्य को साथ लिए अंदर की तरफ ले गया..
अब तक डॉक्टर्स भी वहाँ पहुँच गए थे..

शौर्य को सीधा अंदर आपातकालीन चिकित्सा कक्ष में ले जाया गया..
अब तक शौर्य वहाँ था, भले ही जिस हालत में भी था लेकिन कली के पास था।  अब शौर्य के वहाँ से जाते ही वो जग़ह एकदम से कली को खाली सी लगने लगी…

अचानक वो जग़ह, वो समय, पल सब कुछ खाली सा हो गया… एक अजीब सा सन्नाटा जैसे कली के कानो में चीखने लगा था…
वो खुद को एकदम अकेला महसूस करने लगी थी..

आज तक वो कभी अपने डैडा और सरु के बिना कहीं नहीं गयी थी, बावजूद उन्हेँ छोड़ कर वो इण्डिया में रह रही थी..
शौर्य को वो ढंग से जानती तक नहीं थी,मुश्किल से तीन चार दिन बीते थे उसके साथ, और आज उसका ऐसे उसके पास से हट कर जाना कली को झकझोर गया था…

इतना अकेलापन, इतना सूनापन उसे कभी नहीं नह्सूस हुआ था..
.उसके आंसू रुक नहीं रहे थे, और अब उसे अपने आंसुओं पर शर्मिंदगी भी नहीं हो रही थी..।

कली आसानी से अपना दुःख संसार को बता देने वालों में से नहीं थी..।
उसका सुख दुःख निहायत ही निजी था उसके लिए। लेकिन आज शौर्य के लिए बहते इन आंसुओं को रोकने के लिए भी वो खुद को बाध्य नहीं करना चाहती थी..

उसके साथ बीता एक एक पल उसकी आँखों के आगे चलचित्र सा घूम रहा था, और उन पलों को याद कर वो बार बार शौर्य के करीब जाने को तड़प उठी थी..

उसे शौर्य की गायी ग़ज़ल याद आ रही थी..

जब उस दिन कैफे में वो दोनों बैठे थे, और कुछ कॉलेज के लड़के लड़कियां वहाँ अपने ही किसी दोस्त का जन्मदिन मना रहे थे..
तब उनमें से एक ने बर्थडे बॉय को गिटार तोहफे में दिया.. लड़का उसे बजाने की नाकाम सी कोशिश करने लगा और इसी कोशिश में कोई तार ढीला पड़ गया था ..

शौर्य से रहा नहीं गया और उसने उन लोगो को टोक दिया..
“अरे ऐसे नहीं दोस्त… ऐसे पकड़ते हैं.. !”

“सिर्फ पकड़ना ही क्यों बजाना भी सीखा दीजिये इस भोंदू को !”  उस लड़के की दोस्त ने कहा और शौर्य ने मुस्कुरा कर गिटार सही कर वापस कर दिया….
लेकिन फिर उन लोगो की ज़िद में शौर्य ने अपनी माँ की पसंदीदा ग़ज़ल सुना ही दी थी..

मेरे जैसे बन जाओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
दीवारों से टकराओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
मेरे जैसे बन जाओगे…

बेचैनी जब बढ़ जायेगी
और याद किसी की आएगी
तुम मेरी गज़लें गाओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
मेरे जैसे बन जाओगे…

उस ग़ज़ल को याद कर कली की आंखे एक बार फिर भर आयी, और उन्ही यादो में खोये हुए वो खिड़की पर खड़ी मन ही मन प्रार्थना करती शौर्य के बाहर आने का इंतज़ार करने लगी…


क्रमशः

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Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
1 year ago

हर्ष मीठी को पसंद करता है पर श्योर नहीं था आज शराब के नशे में वह सच कहना चाहती है तो वह बेकरार हो उठा है अगले भाग में शायद बोल भी दे वह दिल की बात लेकिन शौर्य को गोली लगने, कली को प्यार का एहसास होने वाला भाग पढ़ना रोचक होगा… नाईस पार्ट दीदी 👌👍💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐