जीवनसाथी -3 भाग -76

प्रेम के दोनों तरफ उसके जीवन कि सबसे महत्वपूर्ण दोनों औरतें बैठी थी, जिनका सुकून प्रेम था और प्रेम के लिए ये दोनों उसका जीवन थी…
मीठी कि उम्र भले ही कम थी, लेकिन थी तो वो निरमा कि बेटी, निरमा का गाम्भीर्य उसकी बुद्धिमत्ता और धैर्य मीठी को विरासत में मिले थे..
इसलिए निरमा के बिना कुछ बोले भी मीठी इस बात को समझ गयी कि उसके और उसकी माँ के बीच हुई बातों को उसके पिता को नहीं बताना है..
भले ही दोनों मां बेटी के बीच किसी प्रकार का संवाद नहीं हुआ था, लेकिन दोनों ही इस बात को समझ गई कि इस दर्द और तकलीफ भरी बात से प्रेम को अनजान ही रखना है..
“क्या हुआ मैडम.. सो गयीं क्या ? आज खाना मिलेगा या नहीं ?”
प्रेम के ऐसा बोलते ही निरमा ने चुपके से अपने आंसू पोंछे और रसोई में घुस गयी..
आज खाना बनाने वाला बटलर नहीं आया था, लेकिन उसकी मदद करने वाले दोनों हेल्पर मौजूद थे..
रसोई में अपने अपने मोबाइल पर गेम खेलते बैठे दोनों अपनी मालकिन के हुक्म का इंतज़ार कर रहे थे..
अमूमन प्रेम के कहीं बाहर से लौटने तक में निरमा की सारी रसोई तैयार रहती थी लेकिन आज कुछ भी तैयार नहीं था..
वो रसोई में आयी और फटाफट उन लोगो को काम बताने लगी.. उसे मालूम था प्रेम बाहर का खाना नहीं खाता.. बहुत मज़बूरी में ही वो खाया करता था,और अगर घर लौटने वाला हो तब तो सुबह से ही भूखा रह जाता था..
उसने उन दोनों का सारा काम समझाया और फटाफट खुद भी कमर कस ली..
“सिर्फ आधे घंटे में मुझे सारा कुछ रेडी चाहिए !”
निरमा के आदेश पर वो दोनों फुर्ती से काम पर लग गए..
सुमित्रा भी निरमा की मदद करती जा रही थी..
उसी वक्त अपने पापा के लिए चाय बनाने मीठी भी रसोई में चली आयी, उसने आते ही रसोई का माहौल देखा और हंस पड़ी..
“मम्मा अपने तो हमारी रसोई को मास्टरशेफ का किचन बना दिया है, सब एकदम लगे हुए है.. !”
निरमा ने मीठी को देखा और हल्के से मुस्कुरा उठी..
“बस ये कोशिश करना कि खाना आते तक तुम्हारे पापा जागते रहे, सो ना जाये.. !”
“इसीलिए तो चाय बनाने आयी हूँ उनके लिए !”
“बेबी साहब, आप चाय बनाएगी..? जाने दीजिये, हम बना कर देते है, आप अपने हाथ से बस साहब को दे दीजियेगा.. !”
सुमित्रा के लिए मीठी का रसोई में काम करना बहुत बड़ी बात थी..
निरमा ने उसे देखा और मीठी को गर्दन हिला कर इजाजत दे दी..
“बनाने दो सुमित्रा, इतना तो आना ही चाहिए.. !”
मीठी मुस्कुरा कर अंदर चली आयी..
निरमा की रसोई भी खासी लम्बी चौड़ी थी.. एक तरफ के चूल्हे पर मीठी ने भगोना चढ़ाया ही था कि उसका फ़ोन बजने लगा..
फ़ोन हर्ष का था, मीठी ने देखा और वॉल्यूम का बटन दबा दिया, फ़ोन की आवाज़ तो आनी बंद हो गयी लेकिन फ़ोन आता रहा..
मीठी के नहीं उठाने पर एक बार फिर हर्ष ने फ़ोन लगा दिया और मीठी ने वापस वही काम किया..
निरमा का पूरा ध्यान था मीठी पर..
“फ़ोन उठा लो मीठी, हो सकता है सामने वाले को कोई ज़रूरी काम हो ?”
निरमा के ऐसा बोलने के बाद तीसरी बार फ़ोन नहीं आया और मीठी ने राहत की साँस ली..
उसने जैसे तैसे चाय बनायी, हालाँकि सुमित्रा उसके साथ बनी हुई थी, मीठी चाय लेकर अपने पापा के पास पहुँच गयी..
“अरे वाह आज हमारी प्रिंसेस ने चाय बनायी है.. बढ़िया है!”
मीठी ने मुस्कुरा कर चाय प्रेम की तरफ बढ़ा दी..
“मम्मा ने कहा है खाना बनते तक आपको सोना नहीं है.. !”
प्रेम हंस पड़ा..
“दस हिटलर गुज़र गए, तब जाकर तुम्हारी मम्मा पैदा हुई है !”
प्रेम कि बात पर मीठी ने हंस कर प्रेम की बढी हुई हथेली पर ताली दी और उसके बाजु में बैठ गयी..
“चलो फिर, चाय पीकर रुस्तम की सवारी कर ली जाये.. !”
रुस्तम बचपन से ही मीठी का पसंदीदा घोडा था.. उसका बचपन इसी घोड़े के साथ खेलते कूदते बीता था..
रुस्तम प्रेम के किसी दोस्त का घोड़ा था।
रुस्तम जब पैदा हुआ, उस वक्त से ही उसे कुछ तकलीफ थी। प्रेम के दोस्त ने प्रेम से कहा भी की यह घोड़ा ज्यादा से ज्यादा तीन महीने ही जी पाएगा, उससे ज्यादा इसकी आयु नहीं है। लेकिन जाने क्यों प्रेम को रुस्तम की आंखें बहुत भा गई, और वह उस बीमार घोड़े को अपने साथ ले आया।
दिन बीतते गए…
हफ्ते महीनों में बदले और महीने सालों में बदल गए लेकिन रुस्तम को कुछ नहीं हुआ…
प्रेम का प्यार था जो रूस्तम तीन महीने की मियाद को पूरा करने के बाद भी जिंदा रह गया।
वाकई जानवर इंसानों से भी ज्यादा प्यार की बोली को समझते हैं।
यह प्रेम का प्यार ही था जो रुस्तम को जिला गया। मीठी के आने के बाद प्रेम अक्सर छोटी सी मीठी को रुस्तम पर बैठा कर घुमाया करता था। रुस्तम खुद भी मीठी से बहुत प्यार करता था, उसे देखते ही वह अक्सर अपनी पूंछ हिलाने लगता था लेकिन रुस्तम भी निरमा से जरा जलता था..।
निरमा भी रुस्तम का बराबरी से ध्यान रखा करती थी, उससे प्यार किया करती थी। लेकिन रुस्तम जानबूझकर निरमा को छेड़ने के लिए उसे देखकर मुंह फेर लिया करता था। और इस बात पर निरमा अक्सर प्रेम को ताना दिया करती थी कि रुस्तम प्रेम का प्यार किसी और से नहीं बांट सकता, लेकिन मीठी के लिए यह बात सत्य नहीं थी।
मीठी को रुस्तम बहुत प्यार करता था। अब जब मीठी खुद बड़ी हो चुकी थी, रुस्तम की भी उम्र हो गई थी। बावजूद वह मीठी को अपने ऊपर बैठा कर पूरा शहर घुमाया करता था।
आज भी मीठी अपने पापा के साथ रुस्तम के पास पहुंच गई। रुस्तम के पास दोनों खड़े थे कि मीठी का फोन वापस बजने लगा। मीठी ने देखा फोन हर्ष का था। उसने धीमे से फोन को साइलेंट मोड पर डाला, और रुस्तम को सहलाने लगी। प्रेम के इशारे पर मीठी रुस्तम पर बैठ गई।
प्रेम ने रुस्तम की लगाम हाथ मे थामी और मीठी को घोड़े पर बैठा कर अपने बड़े से गार्डन से निकलकर बाहर रास्ते पर चला आया।
बाहर निकलते ही मीठी का ध्यान दूर एक पेड़ के नीचे खड़े हर्ष पर चला गया, और वह चौंक कर रह गई। तो इसका मतलब हर्ष उसके घर के पास पहुंचकर उसे कॉल कर रहा था। शायद उससे मिलना चाहता था। मीठी ने भी तो हर्ष को अभी तक कुछ भी नहीं बताया था
लेकिन एक बार हर्ष से सारी बातें करनी बहुत जरूरी थी। उसने अपने पापा से कहकर घोड़े को वापस मुड़वा लिया।
“पापा घर चलते हैं ?”
मीठी नहीं चाहती थी कि प्रेम दूर खड़े हर्ष को देख ले। लेकिन मीठी के ऐसा बोलने से पहले ही हर्ष प्रेम को देख चुका था, और उसने हाथ हिला कर हर्ष को बुला भी लिया।
हर्ष लंबे-लंबे कदम भरता प्रेम तक चला आया।
उसने आते ही प्रेम के पैर छू लिए। हर्ष ने घोड़े पर बैठी मीठी की तरफ देखा और धीरे से मुस्करा उठा। लेकिन मीठी के दिल दिमाग में इस वक्त जो चल रहा था उसे सोचकर वह हर्ष को देखकर मुस्कुरा नहीं पाई।
मीठी को अब घोड़े पर बैठे रहना भी अजीब लग रहा था। उसने अपने पापा से कहा और घोड़े से नीचे उतर गई..
“यहां क्या कर रहे थे हर्ष..?”
“कुछ नहीं काका सा, बस इस तरफ का रास्ता मुझे बहुत भाता है, आपने बिल्कुल पहाड़ी पर अपना घर बनवाया है। जिससे लोगों को यहां आकर ऐसा लगे जैसे किसी टूरिस्ट प्लेस पर आ गए हैं। एक तरफ पहाड़ी, घर की खिड़की से नजर आते झरने, आपकी सोच मानने लायक है..।”
“प्रकृति से जुड़ा हुआ आदमी हूं, हर्ष ! इसलिए प्रकृति के बीच रहना ही पसंद है..।
घर चलो तुम्हारी काकी ने आज बहुत लजीज खाना बनाया है..।”
“आज काकी सा घर पर है?”
हर्ष के इस सवाल पर प्रेम ने हामी भरी और हर्ष को साथ लिए घर की तरफ निकल गया। इस वक्त मीठी नहीं चाहती थी कि हर्ष उनके घर जाए, लेकिन वह अपने पापा के सामने कुछ बोल नहीं पाई।
उसके और हर्ष के बीच की जो भी बात थी, उससे सिर्फ निरमा परिचित थी।
प्रेम को अब तक कुछ भी नहीं मालूम था। और मीठी इस बात को लेकर थोड़ा घबराने लगी थी..।
कल तक जो मीठी हर्ष से शादी करने के लिए अपने माता-पिता को मना लेने का जुनून रखती थी, आज अचानक उसकी सोच बदल गई थी।
जब से उसे अपने जन्म की सच्चाई मालूम चली थी, उसका मन बदल गया था..।
अब उसे समझ में आने लगा था कि क्यों उसकी मां महल वालों से जरा दूरी बनाए रखना पसंद करती है..।
वो सभी लोग चलते हुए घर पहुँच गए….।
दरवाज़ा खोलने वाला हेल्पर अंदर निरमा को बुलाने चला गया..।
प्रेम अपने घर में चलने वाली बातों से अनजान था, वो हर्ष को साथ लिए अपने डायनिंग में चला आया..
प्रेम हर्ष से मिलकर खुश था।
वहीं हर्ष भी प्रेम में अपने होने वाले ससुर को पा कर मुस्कुरा रहा था। लेकिन आज मीठी जरा भी नहीं मुस्कुरा पा रही थी।
वह उन दोनों को वहां छोड़कर अंदर जाने को थी कि निरमा रसोई से बाहर निकल कर डायनिंग एरिया में चली आई।
उसने जैसे ही प्रेम के साथ खड़े हर्ष को देखा उसके चेहरे का रंग बदल गया, लेकिन निरमा में समझदारी कूट-कूट कर भरी थी। उसने अपने चेहरे पर के भाव से अपने मन के अंदर चल रही परेशानी को उजागर नहीं होने दिया।
हर्ष ने आगे बढ़कर निरमा के पैर छू लिए। निरमा ने उसके सर पर हाथ रख दिया। निरमा हर्ष के साथ बिल्कुल सामान्य दिखाने का ढोंग कर रही थी, लेकिन मीठी मन ही मन अच्छे से जानती थी कि उसकी मां को हर्ष के साथ उसका जुड़ना बिल्कुल पसंद नहीं।
इसलिए चाह कर भी मीठी खुश नहीं हो पा रही थी।
वह चुपचाप अपने पिता के बगल वाली कुर्सी को खींच कर बैठ गई। उसने सोचा हर्ष उसके सामने की तरफ बैठेगा।
लेकिन हर्ष ने मीठी की बगल वाली कुर्सी का चुनाव किया, और उसके बाजू में बैठ गया। निरमा ने इस बात पर गौर किया, लेकिन एक बार फिर अपने भावों से जाहिर नहीं होने दिया। निरमा के पीछे ही दो-तीन नौकर खाने का सारा सामान लिए वहां हाज़िर हो गए।
उन लोगों ने बड़े सलीके से सब की थालियां परोसनी शुरू कर दी। निरमा ने आज सारा खान प्रेम की पसंद का ही बनवाया था। प्रेम अपनी थाली में परसते खाने को देखकर खुश हो गया।
” तो आज हमारी मैडम ने अपनी पूरी छुट्टी का दिन हमारे पीछे बर्बाद कर दिया।”
” आपके पीछे मेरी जिंदगी बर्बाद नहीं, आबाद हो रही है।”
निरमा ने एक मीठी सी झिड़की अपने पति को दी और उसे खाना शुरू करने का इशारा कर दिया। सभी लोग खाने लगे।
मीठी के दोनों हाथ उसके पैरों पर रखे थे। उसके सीधे हाथ की तरफ ही हर्ष बैठा था। उसने जानबूझकर मीठी को छेड़ने के लिए उसका वह हाथ पकड़ लिया। मीठी के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। उसके ठीक सामने उसकी मां बैठी थी। और किनारे की तरफ उसके पिता।
उन लोगों के सामने वह अपना हाथ ऊपर मेज पर नहीं ला पा रही थी, और उसके चेहरे पर यह परेशानी झलकने लगी थी। इसके साथ ही उन लोगों के पीछे नौकरों की टोली भी खड़ी थी, जो खाना परोसने का इंतजार कर रहे थे। हर्ष ने बड़े अधिकार से मीठी का हाथ थाम रखा था, और अपने दूसरे हाथ से मजे लेकर खा रहा था।
” क्या हुआ मीठी, तुम खाना क्यों नहीं शुरू कर रही हो?”
हर्ष ने हीं वापस मीठी को छेड़ दिया और मीठी कोई जवाब नहीं दे पाई। उसने अपनी मां की तरफ देखा। निरमा ने धीरे से उसे खाना शुरू करने का इशारा कर दिया। अपने उल्टे हाथ को ऊपर लाकर मीठी ने फोर्क में पनीर का एक छोटा सा टुकड़ा फंसाया और खाने लगी।
” क्या हुआ मीठी, आज तुम बाएं हाथ से क्यों खा रही हो?”
प्रेम के ऐसा पूछते ही वह एकदम से समझ ही नहीं पाई कि वह क्या करें।
“वो पापा हाथ में जरा सी लग गई थी।”
” कैसे, कब?”
प्रेम परेशान हो गया। उसने अपनी हथेली मीठी की तरफ बढ़ा दी।
” दिखाओ क्या हुआ तुम्हें?”
मीठी का हाथ हर्ष की हथेली में कसमसाने लगा। उसकी हालत खराब हो रही थी। उसे अपने माता-पिता के सामने यह भी जाहिर नहीं करना था कि उसकी बांह हर्ष ने पकड़ रखी है, और अपना हाथ भी अपने पिता को दिखाना था।
लेकिन उसके साथ में कोई चोट तो थी नहीं। परेशान होकर वह अपने पिता के सामने सब सच बोलने ही वाली थी कि हर्ष ने उसका हाथ छोड़ दिया।
एक राहत की सांस लेकर मीठी ने अपना सीधा हाथ मेज पर रख दिया।
” कोई चोट नहीं है पापा, वह बस जरा सी मोच लग गई थी।”
झेंपते हुए अपनी बात कहकर मीठी ने प्रेम पर से नजरे हटा ली। उस बेइंतिहा सच्चे और ईमानदार आदमी से झूठ बोलने में मीठी को कितना कष्ट हो रहा था, यह वही जानती थी। काश वह अपने पिता से अपने और हर्ष के संबंधों के बारे में सब कुछ कह पाती तो कितना अच्छा होता?
खाना समाप्त करने के बाद हर्ष अपनी जगह पर खड़ा हो गया।
” ठीक है काका सा, अब मैं घर चलता हूं। आप लोग भी घर आइएगा।”
प्रेम ने मुस्कुरा कर हामी भर दी,
“जाओ मीठी हर्ष को बाहर तक छोड़ आओ।”
प्रेम ने मीठी से कहा और अपने ऑफिस रूम की तरफ बढ़ गया। हर्ष ने शैतानी नजरों से मीठी को देखा और बाहर की तरफ निकल गया।
हर्ष के दिमाग में पल भर को भी ये बात नहीं आयी थी कि निरमा उसके और मीठी के रिश्ते को पसंद नहीं करती..
वो अब तक यही सोचता आया था कि निरमा को उन दोनों का रिश्ता मंजूर है..!
प्रेम कि बात सुन कर मीठी ने झेंपते हुए निरमा की तरफ देखा, निरमा ने भी उसे बाहर जाने की इजाजत दे दी!
मीठी धीमे-धीमे कदमों से हर्ष के पीछे-पीछे चलने लगी! वह अपने आप में खोई हुई थी! उसे मालूम नहीं था कि दरवाजे पर पहुंच कर वहां खड़ा हर्ष उसे ही देख रहा था..
अपनी धुन में खोई मीठी आगे बढ़ती गई और सामने खड़े हर्ष से टकरा गई!
” क्या हुआ मीठी, कुछ ज्यादा ही खोई हुई हो तुम? कोई बात है क्या?”
मीठी ने उसकी तरफ देखा और ना में सिर हिला दिया..
“झूठ मत बोलो.. मुझे बताओ कि बात क्या है आखिर ?”
“हर्ष मुझसे जुडी एक सच्चाई है, जो मैं तुम्हे बताना चाहती हूँ, पता नहीं उस सच्चाई को जानने के बाद तुम किस निर्णय पर पहुंचोगे? हो सकता है मुझसे तुम्हारा प्यार भी ख़त्म हो जाये, बावजूद मुझे हर एक बात तुम्हे बतानी होगी हर्ष !”
क्रमशः

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Jeevansathi Story bahut badhiya hai mushkil se mili itne din taq dhundhne ke baad but part 85 se aage phir nahin mil rhi pls help
😊😊😊😊😊😊😊😊😊👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍
ये क्या बात हुई जब मां से कुछ नहीं कहना चाही तो फिर प्रेमी से क्यूं, हालांकि आजकल के बच्चे भी ना, अपने मन की करते हैं, आज तो हर्ष रोमांटिक लवर बनकर परेशान कर रहे थे, दिल जब से लगा है लड़के भूल गया है क्या इंट्रो हुआ था इसका, सही है दिल तो बच्चा है जी, पर बता ही दे इसे फ़ैसला लेना इस पर छोड़े।
पढ़ते हैं क्या होगा आगे, ससुर जी के पैर छूकर गदगद हो गया राजकुमार, नाईस पार्ट दीदी ..💐🙏
बहुत दिनों के बाद जीवनसाथी को पढ़कर अच्छा लगा👌👌 हर्ष की शरारतें बहुत ही प्यारी लगी मगर मीठी के लिए यह बहुत ही मुश्किल समय है। बहुत ही खूबसूरत भाग 👌👌😊
Didi mayanagri kahan H ???
लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐
Ma’am Bahutu Dino bad story milo h bahut hi shaandaar story H humne to umeed hi chood di thi story baaps padhne Ki
Ma’am mayanagri v bta deejeeye kahan milegi bahut mis kar rhe H us story Ko bhi
Bahut hi umda part pyari lekhika ji. Harsh aur mithi dono hi sweet hain. happy to read. Always stay happy and keep smoking pyari lekhika ji.
Ye हर्ष भी इतना शैतानी दिमाग रखता है पता नहीं था 😳😳😳🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰इसने तो मीठी को पिटवाने की पुरी तरह से तैयारी कर ली थी कितना शरारती हो गया है यह लड़का 🤭🤭🤭🤭।
Sasu ma और ससुर जी k samne हाथ पकड़ लिया 😬😬😬😬😬😬और छोड़ भी नहीं रहा
ये लड़का पागल है पागल है 👻👻👻👻👻😁😁
ये भाग बड़े दिनों बाद नसीब हुआ और इतना जबरदस्त था कि मजा आ गया।
आपका बहुत-बहुत शुक्रिया डॉक्टर साहिबा इंतजार होने वाले हैं
जो लोग चुप रहते हैं वो प्यार के मामले में थोड़े जज्बाती होते हैं। और हर्ष को तो इतने समय बाद मीठी मिली थी, तो वो कैसे छोड़ देता अपनी मीठी को। नाइस पार्ट