जीवनसाथी -3 भाग -75

जीवनसाथी -3 भाग -75

जीवनसाथी by aparna

   मीठी वहाँ से  निकल गयी..
तेज़ कदमो से चलती हुई वो चली जा रही थी, वो खुद नहीं जानती थी वो कहाँ जा रही थी..
आज उसके सामने जो सच्चाई आयी थी वो उसकी कल्पना से परे थी..
उसने कभी सोचा भी नहीं था कि वो जिन्हे अपना पिता मानती है वो उनकी नहीं उनके छोटे भाई कि बेटी है..
हे भगवान तो उसकी माँ…
क्या वो उसके पापा से शादी नहीं करना चाहती थी.. ? पापा मतलब प्रेम पापा..

सोचते सोचते मीठी को झुंझलाहट सी होने लगी थी. उसकी आँखों से लगातार आंसू बह रहे थे…
आज तक जिन्हे अपना पिता समझ कर हक जताती आयी थी वो उसके पिता नहीं है..

ये वाक्य सोचने में भी उसे मर्मान्तक पीड़ा हो रही थी.. वो ये बात दुनिया को कैसे समझा सकती थी..

जब कहीं मन नहीं लगता तब लगता है ऎसी जगह चले जाये जहाँ कोई ना पहचानता हो, ना कोई जानता हो.. बस एक शांति हो जो दिल में उठ रहे भवँर को शांत कर सके..
लेकिन वो नीरव स्तब्धता मन में शांति को लाने की जगह मन में एक सूनापन भर रही थी….

मीठी के आंसू बह रहे थे, लेकिन उसे उन आंसुओं की कोई परवाह नहीं थी…

वो बस चलती चली जा रही थी..
सामने एक गेट खुला था.. बच्चो का पार्क था, मीठी चलते चलते उसी के अंदर चली गयी..

एक किनारे लगी बेंच पर वो जा बैठी…
उसकी खोयी खोयी सी ऑंखें अपलक सामने खेलते बच्चो पर टिकी हुई थी..
एक बच्ची भागते हुए गिर पड़ी… उसने इधर उधर देखा, कोई नहीं दिखा, उसे चोट लगी थी, अपनी चोट देख कर वो रो पड़ी, वो खुद को संभाल कर उठने की कोशिश में थी कि तभी उसके पिता जाने कहाँ से चले आये और उसे बड़े प्यार से संभाल कर अपनी गोद में उठा लिया..

रोती हुई बच्ची अपने पिता कि गोद में आते ही आंसुओं में भी मुस्कुरा उठी..।

उसके पिता ने उसका पैर देखा और धीरे से सहला कर बच्ची को गोद में लिए खिलाने लगे, बच्ची भी अपने पिता की गोद में पहुँचते ही अपना दर्द भूल कर खिलखिला उठी..।

उन्हेँ देखते हुए मीठी के चेहरे पर भी हलकी सी मुस्कान चली आयी..
उसे ढेर सारी बातें याद आ रही थी….

उसे याद आ गया जब एक बार वो तीनो कहीं घूमने जाने वाले थे, और उसने ब्लू जींस के साथ ब्लैक टॉप पहनने का मन बनाया था.. उसने प्रेम को भी ज़िद कर के वहीँ रंग पहनवा दिया, निरमा से उसने बोला और निरमा ने हड़बड़ी में उस रंग के कपड़े ढूंढने की जगह दूसरे कपड़े पहन लिए थे..
तीनो पिकनिक के लिए निकल रहे थे कि घर पर काम करने वाली अम्मा ने पहले टोक दिया..

“पापा और बिटिया की जोड़ी तो बिलकुल एक जैसी लग रही… लेकिन माँ जरा अलग है.. ।”

तब निरमा का ध्यान गया कि वाकई दोनों बाप बेटी एक से कपडे एक सी बेल्ट और एक सी घडी बांधे आँखों पर एविएटर लगाए हर तरफ से एक जैसे प्यारे लग रहे थे..।
उसने जल्दबाजी में काले की जगह गुलाबी शर्ट पहन ली थी और वो वाकई में उन दोनों के बीच “ऑड वन ऑउट ” की सिचुएशन में खड़ी थी..

निरमा का मुहं बन गया..

” यह तो बहुत बड़ी जालसाजी है, दोनों पापा और बेटी एक जैसे तैयार हो गए, मुझे मौका ही नहीं दिया..।”

” क्यों ममा मैंने आपसे कहा तो था कि मैं इस कांबिनेशन को पहन रही हूं, फिर आपने क्यों नहीं पहना? पापा ने तो बकाएदे ढूंढ कर वही कपड़े निकाले, और मेरे जैसे पेयर कर लिया ।”

“हां क्योंकि पापा को किचन में जाकर पिकनिक के लिए क्या बनाना है, क्या लेकर जाना है? यह देखने की जरूरत नहीं थी ना। उन्हें और तुम्हें बस तैयार होना है लेकिन मुझे पिकनिक की तैयारी भी करनी है..।”

“ओ मैडम पिकनिक की आप से ज्यादा तैयारी हमने की है। फिशिंग के लिए सामान मैने रखे, बैडमिंटन खेलने के लिए सामान रखा है, फुटबॉल रखी, तीनों के लिए तीन अलग-अलग नोवेल्स रखे हैं। फ्रूट्स रखे हैं।
बैठने के लिए चेयर्स रखी है। अगर वहां कुछ कुकिंग करने का मन हुआ जैसे चाय वगैरह, उसके लिए सामान रखा है, इतना कुछ करके भी मैं अपनी बेटी के आर्डर पर उसके जैसे कपड़े पहन कर रेडी हो गया, तो तुम जलो मत समझी।
हो सके तो चेंज करके आ जाओ, वरना बनी रहो ऑड वन !”

निरमा ने मुहं टेढ़ा किया और उन दोनों पर बनावटी गुस्सा दिखाती अंदर चली गयी..
कुछ देर में ही वो भी कपड़े बदल कर चली आयी..

और तीनो पिकनिक के लिए निकल गए..
बाहर कहीं भी परिवार के साथ जाते समय प्रेम ना अपने साथ किसी नौकर को रखता था ना सिक्योरिटी, ये उसके लिए उसका निहायत ही निजी समय होता था। जिसमे वो किसी बाहरी व्यक्ति का हस्तक्षेप नहीं चाहता था.. ।

तीनो पिकनिक पर अक्सर निकल जाया करते थे….।
घने पेड़ों की छाँव में बैठे तीनो कभी ताश खेलते, कभी खाते पीते बातें करते ही पूरा दिन गुज़ार दिया करते थे..।
इस समय में प्रेम का सबसे प्रिय समय होता था जब उसकी फरमाइश पर निरमा गाना गाती थी..।

निरमा वैसे तो बड़ी गंभीर स्वभाव की थी, लेकिन प्रेम उसे छेड़ छेड़ कर शर्माने पर मजबूर कर ही देता था..।

उन दोनों का ये मीठा सा प्यार मीठी को भी ख़ुशी से भर देता था…

अपने काम में और अपने पेशे में वो बहुत सख्त और कठोर था..।
किसी की ज़रा सी गलती पर उसे चीर कर रख देने वाला मितभाषी प्रेम, निरमा के सामने बिलकुल हाथ जोड़े अदब से झुका ही रहता था..।

मीठी अक्सर उसे चिढ़ाया करती थी..।

“पापा आप दुनिया के सामने इतने कठोर बने रहते है, मम्मा के सामने क्या हो जाता है आपको.. मम्मा से इतना डरते क्यों हो ?”

“बेटा तेरी माँ के पूर्वजन्म कि कहानी नहीं पता है क्या तुझे… ये पिछले जन्म में हिटलर थी और मैं नाजियों की सेना का अदना सा सिपाही.. वो पिछले जन्म का खौफ अब भी बाकी है मुझमे..।
समझी !!”

और प्रेम की ये बात सुन बनावटी गुस्सा दिखा कर निरमा दोनों बाप बेटी की हंसी चुहल में शामिल नहीं होती थी.. हालाँकि मुहं फेर कर वो भी अपनी हंसी दबा लेती थी लेकिन मीठी अपने पिता कि इस बात पर उनके गले में दोनों बांहे डाल झूल जाया करती थी….।

“लव यू पापा, आप कितने स्वीट हो ?”

“अच्छा मतलब तेरी मम्मा स्वीट नहीं है ?” प्रेम वापस निरमा को छेड़ पड़ता था..

“हाँ आप दोनों बाप बेटी बस एक दूसरे का ही फेवर करो.. मुझे मत पूछना… जैसे आप वैसी आपकी बेटी.. !दोनों को ही दीन दुनिया से कुछ लेना देना नहीं है.. एक मैं ही सब कुछ देखती संभालती रहूं..।
आप दोनों बस अपनी मर्ज़ी के मालिक.. !”.. बोलते हुए निरमा के पलटते तक में दोनों बाप बेटी की जोड़ी कभी तो कानो पर इयर फ़ोन लगाए टीवी पर विडिओ गेम्स खेलने लग जाती थी, और कभी प्रेम की बुलेट निकाले घर से बाहर तफरीह के लिए निकल जाती थी…।

और निरमा बड़बड़ाते हुए उन दोनों का फैलाया सामान समेटने लगती थी…

कभी जब किसी बात पर निरमा विवाद कर बैठती तब भी प्रेम चुपके से मीठी के कमरे में ही आकर सो जाया करता था और फिर निरमा बड़बड़ करती हुई मीठी के कमरे में उसे ढूंढने आती थी और पकड़ कर ले जाती थी..।

आज वो सारी बातें सोचती बैठी मीठी की आंखे बहती चली जा रही थी..

****

निरमा के स्तब्ध चेहरे को देख कर बांसुरी उसके पास चली आयी..

“क्या हुआ निरमा?”

निरमा ने दरवाजे से बाहर उंगली दिखा दी। बांसुरी उस तरफ देखने लगी। लेकिन उसे कोई नजर नहीं आया। निरमा ने बांसुरी की तरफ देखा, उसकी आंखों में देखते हुए वह बोल पड़ी।

“मीठी ने सब सुन लिया।

निरमा की बात सुनकर बांसुरी भी सर पकड़ कर बैठ गई। उसके अगले ही पल बांसुरी मीठी के पीछे जाने को हुई कि तभी निरमा ने उसका हाथ पकड़ लिया।

” रुक जाओ बांसुरी, उसे जाने दो। इस वक्त उसे अकेलेपन की जरूरत है। हम में से कोई भी जाकर उसे कुछ भी समझाएगा तो अभी वह समझ नहीं पाएगी। कभी-कभी जिंदगी में कुछ मौके ऐसे भी आते हैं, जब हमें सिर्फ अपने आप की जरूरत होती है। उस वक्त सिर्फ हम खुद ही अपने आप को संभाल सकते हैं, और समझ सकते हैं।
आज उसके मन में संग्राम छिढ़ा होगा कि, क्या सही है क्या गलत?
   उसके अपने अस्तित्व पर सवाल उठ रहा है कि जिसे आज तक अपना पिता मानती आई थी,  अचानक उसे पता चल रहा है कि उससे उसका कोई लेना-देना नहीं। बल्कि उसका छोटा भाई उसका पिता है, ऐसे में मैं तुम या कोई और उसे कुछ नहीं समझा पाएगा।”

“अरे लेकिन कहीं गुस्से में वह कोई ऐसा कदम ना उठा ले जो उसे नुकसान पहुंचा दे।”

“मुझे मेरी परवरिश पर भरोसा है बांसुरी, मीठी ऐसा कुछ नहीं करेगी।
और मेरी परवरिश से ज्यादा मुझे मीठी के पिता की परवरिश पर भरोसा है। प्रेम ने जैसे उसे पलकों पर रख कर पाला है, मीठी उन्हें कभी अपने जीवन से अलग सोच ही नहीं सकती।
इस वक्त मीठी को सिर्फ एकांत की जरूरत है, उसे जाने दो। जब उसे समझ में आ जाएगा वह खुद वापस आ जाएगी..।”

“नीरू बच्ची है वह, कहीं कोई ऐसा वैसा कदम …”

“नहीं बंसी कभी नहीं.. वह मुझसे ज्यादा प्रेम सिंह चंदेल की बेटी है।
वह बहुत मजबूत है, बिल्कुल अपने पिता की तरह।
हां इस वक्त दुखी जरूर है, लेकिन वह खुद को टूट कर बिखरने नहीं देगी।
उसमें इतनी काबिलियत है कि वह अपने आप को समेट कर वापस खड़ी हो सकती है।

नाजुक जरूर है मेरी बेटी, लेकिन कमजोर नहीं है.. ।”

बांसुरी ने आगे बढ़कर निरमा को अपनी बाहों में ले लिया दोनों सखियां रोने लगी…।

” तुम सही कह रही है नीरू, मीठी पर मुझे भी भरोसा है। लेकिन फिर भी आजकल का जमाना वैसा नहीं रहा…
हमें चलकर देखना चाहिए मीठी कहां चली गई..?”

” ठीक है बंसी..।”

“तू एक बार प्रेम भैया को फोन करके बता तो दे।”

“नहीं बंसी अभी उन्हें परेशान नहीं कर सकती। वैसे भी आज रात तक वह आ ही जाएंगे..।

पिछले कुछ दिनों से वह अपने काम में इतने व्यस्त है कि ठीक से मुझसे बात तक नहीं हो पा रही। ऐसे में उन्हें बताने का मतलब उन्हें और ज्यादा परेशान करना है। घर आ जाए उसके बाद बताऊंगी।”

” ठीक है नीरू, तुझे जो सही लगे, लेकिन इन लोगों को तो दो दिन पहले ही आ जाना चाहिए था।”

” हां लेकिन काम कुछ बढ गया था, इसलिए नहीं आ पाए। “

“इस बार तो मैं भी नहीं जानती कि साहब ने प्रेम भैया और समर सा को कहां और क्यों भेजा है?”

” बंसी इतना सोच मत ,यह इन तीनों की तिकड़ी ही जानती है कि यह लोग क्या-क्या करते रहते हैं।
महल और यहां के लोगों की सुरक्षा के लिए प्रेम जी कुछ भी कर सकते हैं।”

” जानती हूं नीरू, महल और सब की सुरक्षा के लिए ही तो यह दोनों अपने घर से इतनी दूर पता नहीं क्या कर रहे हैं। किसे ढूंढ रहे हैं?”

बांसुरी ने धीरे से निरमा की तरफ हाथ बढ़ाया और निरमा ने बांसुरी का हाथ थाम लिया। दोनों अपनी जगह पर खड़े हो गए। दोनों कमरे से बाहर निकलने वाले थे कि दरवाजे से भीतर आई हुई मीठी नजर आ गई।

मीठी पर नजर पड़ते ही बांसुरी मुस्कुरा कर आगे बढ़ गई। उसने मीठी को अपने गले से लगा लिया।

” कहां चली गई थी मीठी? हम कितना परेशान हो गए थे तुझे मालूम भी है?”

मीठी ने धीरे से अपनी आंखें पोंछी और अपनी प्यारी मासी की तरफ देखने लगी।

” आई एम सॉरी मासी। मुझे ऐसे नहीं जाना चाहिए था।”

” कोई बात नहीं बेटा, कभी-कभी ऐसा हो जाता है। आओ अब बैठो तुम्हें अपनी मां से बात करनी चाहिए।”

मीठी ने निरमा की तरफ देखा, निरमा उसे ही देख रही थी।
मीठी धीरे से निरमा की तरफ बढ़ गई।

उसने अपनी मां के दोनों हाथ थाम लिये।

“मीठी मेरी कहानी सुनोगी?”

मीठी ने निरमा की तरफ देखा और भरी-भरी आंखों से ना में गर्दन हिला दी।

“नहीं ममा मैं ऐसी कोई कहानी नहीं सुनना चाहती जिससे मुझे यह मालूम चले कि पापा मेरे पापा क्यों नहीं है। ममा आई एम सॉरी, आपका पास्ट जो भी रहा हो, लेकिन मेरे पास्ट, प्रेजेंट और फ्यूचर में सिर्फ पापा ही मेरे पापा थे, हैं और रहेंगे।
मैं उनके अलावा और किसी को अपने पापा की जगह नहीं दे सकती।
आई एम सॉरी ममा!’

मीठी आगे बढ़कर निरमा के गले से लग गई। आंसुओं के बहने के बावजूद निरमा के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई। उसने अपनी बेटी को अपनी बाहों में ले लिया और वह धीरे-धीरे उसके बालों पर हाथ फेरने लगी।

निरमा ने बांसुरी की तरफ देखा, बांसुरी भी मुस्कुरा रही थी।
मां बेटी एक दूसरे के गले से लगी देर तक आंसू बहाती रहीं।
कुछ देर बाद मीठी निरमा से अलग हुई और उसके दोनों हाथों को पकड़ कर अपने माथे से लगा लिया।

मैं इतना तो समझ सकती हूं मां कि आपके पास्ट में जो भी रहा, वह पेनफुल रहा होगा। लेकिन उस पास्ट से मेरी लाइफ नहीं बदलेगी।
मेरे लिए मेरे पापा ही मेरे पापा है, और मेरी ममा मेरी क्वीन है। आप दोनों के लिए रिस्पेक्ट, आप दोनों के लिए प्यार कभी काम नहीं होगा।
आई लव यू ममा।”

निरमा ने मुस्कुराकर मीठी को गले से लगा लिया।

” ममा एक बात और कहना चाहती हूं, आज के पूरे दिन को हमारी जिंदगी से पूरी तरह से वेनिश कर दीजिए ना। प्लीज, मैं चाहती हूं सब कुछ पहले जैसा हो जाए…
मैं भूल जाना चाहती हूँ जो भी सब सुना वो सब..।
मेरे पापा ही मेरे पापा रहेंगे.. बस और कुछ ना जानना है न सोचना है..।”

“अरे क्या बातें चल रही है मम्मा और प्रिंसेस के बीच.. !”

रात तक लौटने वाला प्रेम शाम में ही वापस लौट आया..
उसकी आवाज़ सुनते ही मीठी ने फटाफट अपनी आंखे पोंछी और उससे जाकर लिपट गयी..

“पापा.. !”

“हम्म प्रिंसेस.. क्या हुआ ?”

मीठी ने ना में गर्दन हिला दी… प्रेम उसके बालों पर हाथ फेरने लगा..

निरमा  उससे चेहरा छिपाती रसोई में घुस गयी…

रसोई में पानी चला कर उसने चेहरे पर पानी के छींटे डाल कर आँखों को खूब अच्छे से धोया और पानी का गिलास लिए बाहर चली आयी..

“कितनी बार कहा है भागदौड़ कम कीजिये, अब पच्चीस के नहीं रहे आप, पचास के होने जा रहे हैं। लेकिन नहीं खुद को अब भी जवान ही मानते फिरेंगे.. !”

“हाश… मुझे तो अंदर घुसते ही ऐसा लगा था जैसे माहौल ज़रा तनाव भरा है, लेकिन तुम्हारी मम्मा को नार्मल देख समझ आ गया कि सब ठीक है.. बाकी ज़रूर तुम्हारे किसी फ्रेंड्स टूर के लिए मम्मा मना कर रही होंगी.. आई गेस !”

“बिलकुल सही पहचाना….. !”  निरमा ने भी बात को संभालते हुए कहा और प्रेम हँस कर सोफे पर पसर गया.. उसने निरमा के हाथ से पानी का गिलास ले लिया…

उसके बैठते ही बांसुरी ने निरमा से जाने की इजाजत ली और प्रेम को देख हाथ हिला कर घर जाने के लिए निकल गयी…

हालाँकि उसे निरमा और मीठी ने नहीं जाने दिया और रोक लिया.. बांसुरी भी बैठ गयी वो सारे ही लोग साथ बैठे बातों में लग गए..
कुछ देर पहले के घने काले बादल धीरे धीरे छंटने लगे…

बांसुरी कुछ देर बैठ कर निकल गयी और उसके जाने के बाद प्रेम के दोनों तरफ निरमा और मीठी उसके कंधे पर सर रखे बैठ गयी…

कितना सुकून था इन बाँहों में… ज़िन्दगी की तमाम परेशानियों का एक ही हल था, ये बांहे…
निरमा सोच कर मुस्कुरा उठी..

वहीँ मीठी भी अपने पापा के पास जो राहत महसूस कर रही थी वो कहीं नहीं थी..

प्रेम की ज़िन्दगी की सबसे अहम् दोनों औरतों के लिए वो दुनिया में सब कुछ था और उसके लिए वो दोनों ही पूरी दुनिया थी…

क्रमशः

aparna…

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Arun Kumar
Arun Kumar
1 year ago

🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

Gurpreet Kaur
Gurpreet Kaur
1 year ago

😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍

Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
1 year ago

मीठी तो प्यार से समझ गई कि मैं प्रेम पप्पा की ही परी हूं पास्ट नहीं जानना, बड़ी समझदारी से आपने संभाल लिया दी, निरमा ने मीठी पर भरोसा किया और मीठी ने अपनी मां पर, दोनों राजी खुशी आज को सम्मान देकर उसमें खो गए, बहुत सही लगा दी फिर भी मैं बांसुरी के साथ ही हूं आजकल जमाना सही नहीं है और आजकल के बच्चे…., ख़ैर नाइस पार्ट दीदी…💐🙏

नीरु
नीरु
2 years ago

बहुत अच्छी बहुत दिनों में ढूंढ पायी। अब पढ कर दिल को करार आ गया

Manu verma
Manu verma
2 years ago

😊बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
कुछ देर के लिए मैं भी डर गई, मीठी का अगला कदम कैसा होग़ा, कितने ही सवाल करेगी वो प्रेम और निरमा से मगर निरमा का विश्वास जीत गया, उसे अपनी परवरिश पर भरोसा था और देखो मीठी ने एक बार फिर समझदारी दिखा दी 😊।

बहुत लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

Manu verma
Manu verma
2 years ago

लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐⭐

Rani bhagat
Rani bhagat
2 years ago

👌👌👌👌👌💕💕💕💕💕

Rani bhagat
Rani bhagat
2 years ago

👌👌👌👌👌💕

Jagruti
Jagruti
2 years ago
Reply to  Rani bhagat

Bahut badhiya part..

Dolly A Singh
Dolly A Singh
1 year ago
Reply to  Jagruti

बहुत ही शानदार पार्ट 💐💐