जीवनसाथी -3 भाग -70

जीवनसाथी -3 भाग -70

जीवनसाथी by aparna

  पुलिस वालो के साथ वहाँ से निकल कर वानी उनकी गाड़ी में जा बैठी.. । उसका दिमाग तेज़ी से काम कर रहा था..
बदला तो वह भी लेना चाहती थी राजा साहब से, और अपने तरीके से ले भी लेती। लेकिन यह ब्लैकमेलिंग वाला जो मसला जुड़ा था  इसके कारण वह थोड़ा परेशान हो गई थी।

और इसीलिए उससे कुछ गलतियां भी हो गई। हालांकि इतना तो था कि उसने जब पीछे से मीठी पर वार किया तब मीठी उसका चेहरा नहीं देख सकी थी..।

उसने मीठी को अपने कमरे में भी जानबूझकर इसीलिए रखा था  जिससे वह इस बात पर जोर दे सके कि अगर वह खुद किडनैपर होती तो अपने कमरे में कभी मीठी को नहीं रखती।
दूसरी बात धनुष जब उसके कमरे में पहुंचा, तब धनुष पर वार उसने नहीं किया।
क्योंकि जब धनुष को बेहोश किया गया, वह धनुष के सामने खड़े होकर उससे बात कर रही थी। इतने पॉइंट्स उसकी सलामती के लिए बहुत थे।

और इसलिए वानी अब निश्चिंत थी। उसके दिमाग में एक दूसरी बात भी घूम रही थी। राजा साहब ने उससे कहा था कि उसे ब्लैकमेल करने वाले को पकड़ने के लिए अब अपने आदमी भेजेंगे, इसका मतलब राजा साहब जानते हैं कि कोई उसे ब्लैकमेल कर रहा है। अगर यह बात ब्लैकमेलर के द्वारा पुलिस तक जाती तो, उसके लिए मुसीबत खड़ा कर सकती थी। लेकिन अब पुलिस वालों के सामने वह खुद को बेचारी साबित कर सकती है। मन ही मन कुछ ठान कर वानी चुपचाप बैठ गई।
वैसे भी  उसका दिमाग तिकड़म लगाने में बहुत तेज चलता था….।

पुलिस स्टेशन पहुँच कर उसने तबियत ख़राब होने का अभिनय शुरू कर दिया..

“सर तबीयत खराब सी लग रही है।”

“क्या हुआ मैडम आप कुछ बताएंगी ?”

“लेडीज़ प्रॉब्लम है !”

“मतलब ?”

“मतलब… ? हद है, आप लोग पढ़े लिखे होकर भी एक लड़की की तकलीफ नहीं समझ सकते? अब और कितना डिटेल में बताऊँ ?”

“ठीक है, ठीक है.. आपकी क्या मदद कर सकते हैं ?”..

“मुझे मेरा बैग चाहिए था ! उसमे मेरा ज़रूरी सामान पड़ा है.. !”

“आप सामान बताइये, हम ले आएंगे !”

“हद करते हैं सर आप..?
एक ही गन थी, वो आप लोगो ने रख ली.. अब उस बैग में ऐसा कुछ बाक़ी नहीं बचा !”

पुलिस वालो ने उसका बैग उसके सुपुर्द कर दिया..

पुलिस वालों की नजर बचा कर उसने उस बैग से अपनी   ड्रेस के बटन में छिपा कर रखी एक चिप निकाल ली.. और बैग बंद कर वापस पुलिस वालो को दे दिया..

“सर वॉशरूम किधर है ?”

एक पुलिस वाला उसे साथ लेकर एक तरफ को बढ़ गया…

वॉशरूम के अंदर दाखिल होते ही उसने अपनी स्मार्ट वाच में वो चिप लगायी और अपनी घडी को वो मोबाइल की तरह उपयोग में लाने लगी..
उसने तुरंत अपने प्रोफाइल पर पोस्ट डाल दी कि, उसके पास से लाइसेंसशुदा गन मिलने पर भी राजा साहब के इशारे पर उसे गलत इल्जाम देकर थाने में रोक कर टॉर्चर किया जा रहा है..।

वानी अपने फॉलोवर्स के साथ व्यक्तिगत रूप से भी जुड़ी थी। उसने अपने उस चैनल पर अपने फॉलोवर्स को उकसाना शुरू कर दिया, और वापस अपना विक्टिम कार्ड खेल गई। उसके फॉलोअर्स को लगा कि सच के लिए लड़ने वाली उनकी साहसी पत्रकार को एक बार फिर राजा अजातशत्रु ने गलत इल्जाम लगाकर फांसने की कोशिश की है। वह सारे ही लोग इस बात से बेहद नाराज हो गए।
सबने वानी के एक सन्देश पर भर भर कर राजा साहब को कोसना और वाणी का जयकारा लगाना शुरू कर दिया..।

“बस ध्यान रखिये दोस्तों, ये खबर इतनी वायरल होनी चाहिए कि ये पुलिस वाले मुझे छोड़ने पर मजबूर हो जाये !”

“हम ईंट से ईंट बजा देंगे.. आप हुकुम कीजिये वानी !”

वानी मुस्कुरा उठी…
बस यही तो वो चाहती थी..

“अगर आपके जान पहचान के लोग विजयराघवगढ़ या आसपास हो तो यहाँ के सिविल लाइन थाने पर भेजिए लोगो को… ।
ये एक लड़की की इज्जत का सवाल है..। और लड़की भी वो जो गलत के आगे नहीं झुकती..।
समझ गए न आप सब क्या करना है.. !”

“हल्ला बोल.. !”

वानी ने मेसेज भेजा ही था कि बाहर से कॉन्स्टेबल दरवाज़ा पीटने लगा..

“हुआ नहीं आपका.. ?”

उसे एक भद्दी सी गाली देकर वानी ने वो चिप निकल कर अपनी टॉप में लगे बटन के अंदर किसी तरह से लगा दी। और स्मार्ट वाच को बंद कर बाहर निकल आयी..

बाहर आकर वो अपने चेहरे पर तकलीफ दिखाती हुई आकर बैठ गयी..

“आपने यहां नहीं बैठना, सलाखों के अंदर आपकी जगह है..।”

“एक्सक्यूज मी!!
  ऐसे कैसे सलाखों के अंदर?
मेरी बात सुनिए, क्या हिंदुस्तान में अपनी खुद की सुरक्षा के लिए अगर कोई लड़की गन रखती है, तो वह अपराध की श्रेणी में आता है ?

मुझे आप लोगों का यह दोगलापन समझ नहीं आता।
एक तरफ  आप सब यह कहते हैं कि हम लड़कियों को आत्मनिर्भर होना चाहिए, और अगर हम लड़कियां अपनी इज्जत या अपनी जान की सुरक्षा के लिए अपने साथ गन रख लेते हैं, तो आप इसे एक भारी अपराध की संज्ञा दे देते हैं..।

पत्रकार हूं मैं, मेरा काम ही ऐसा है कि मुझे ना रात दिखती है ना दिन। जिस वक्त जहां मुझे कोई खबर नजर आती है, मुझे अपने काम के लिए वहां जाना ही पड़ता है। अब ऐसे में अगर किसी सुनसान रास्ते में चार लड़के मुझे घेर ले तो  क्या मैं बस किसी पुरुष के आने का रास्ता देखती रहूं की जो आकर, मसीहा बनकर मेरी मदद कर दे, और मैं एक बिल्कुल बेचारी सी लड़की बनकर रोती बिलखती रहूं।
तब तक अपनी किस्मत को रोती रहूं, जब तक मेरा मददगार फरिश्ता मुझे बचाने ना आ जाए।
जवाब दीजिए आप लोग? अगर उसकी जगह मैं अपने पास गन रख के उन चारों लड़कों को उस गन से डरा सकूं या फिर अगर कोई मेरी इज्जत पर हमला बोल ही दे और अपने आप को बचाने के लिए मैं उसके पैर में या एड़ी पर गोली मार कर स्वयं की सुरक्षा कर लूं, तो मैं गलत हो जाती हूं..?”

“नहीं वो बात नहीं है मैडम.. सिर्फ गन रखने की बात होती तो हम लोग आपके लाइसेंस को देखकर आपको छोड़ देते  लेकिन आप पर इससे भी बड़ा इल्जाम है। आपने महल के राजकुमार के ऊपर बहुत भद्दे इल्जाम लगाए हैं।
   आपने मीठी को गायब किया। आपने धनुष को बेहोश किया, और उसके बाद उन दोनों को ही आप महल से बाहर निकाल कर किसी के हवाले करने वाली थी..।”

“किसने कहा यह सब आपसे?  उस धनुष ने ना, कितनी अजीब बात है उसने कहा तो आपने मान लिया।
लेकिन मैं अपनी कहानी सुनाऊंगी तो आप नहीं मानोगे। इसी को कहते हैं सर डिप्लोमेसी।

जिसके पास पैसा और पावर होता है ना, उसकी हर झूठी बात भी सच हो जाती है। और जो सच्चा होता है, ईमानदार होता है, वह मेरे जैसे पीछे रह जाता है।

खैर मैं जानती हूं, आप लोग मेरी कहानी मानेंगे नहीं। पर फिर भी मैं एक बार अपनी कहानी जरूर सुनाऊंगी। जो कहानी आपको मिस्टर धनुष समर सिंह ने सुनाई है, वह सिक्के का एक ही पहलू है सिक्के का दूसरा पहलू मैं सुनाती हूं…

मेरा नाम वानी है, और मैं एक बहुत प्रसिद्ध पत्रकार सनंत कस्तूरिया की बेटी हूं। मैं बहुत छोटी थी जब मेरी मां ने आत्महत्या कर ली थी। वह डिप्रेशन की शिकार थी। लेकिन उस वक्त कुछ ऐसा हुआ कि उनकी मौत का इल्जाम मेरे पिता पर आ गया ।और उन्हें काफी समय तक जेल में रहना पड़ा था। जबकि उन्होंने ऐसा कोई बहुत बड़ा अपराध नहीं किया था। कुछ लोग कहते हैं कि उनके जेल जाने के पीछे राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला का हाथ था।

मैं नहीं मानती इस बात को।
मैं सच में नहीं मानती, क्योंकि अगर राजा साहब को किसी से बदला लेना हो तो वह बड़ी आसानी से किसी के भी साथ कुछ भी कर सकते हैं।
अगर उन्हें मेरे पिता से बदला ही लेना होता तो वह उन्हें बड़ी आसानी से मौत दे सकते थे। और अगर राजा साहब उन्हें मौत दे देते तो वह भी ऐसी होती कि ना उसमें राजा साहब का हाथ और ना उनके मंत्री जी का। वह इस तरह से सिर्फ सजा करवा के उन्हें क्यों छोड़ देते?
इसलिए मेरी नजर में राजा साहब गुनहगार नहीं है। खैर मेरा बचपन बहुत कष्ट में बीता..।

एक बिना मां-बाप की बच्ची के सर पर अगर कोई रिश्तेदार हाथ भी रखता है ना, तो उसका हाथ सर से नीचे जरूर फिसलता है। उस बच्ची के बड़े होने का समय बहुत कठिनाई भरा होता है, जिसके पास उसकी मां नहीं होती।

क्योंकि उसके शरीर की ऊंचाइयों गहराइयों में डूबने के लिए हर रिश्तेदारी एक पैर में खड़ा रहता है..।
चाइल्ड मोलेस्टेशन सुना है आपने ?
बेशक सुना होगा मैंने झेला है। और इतनी बुरी तरह के दिमाग में ग्रंथि सी बन गई। बस उसके बाद दुनिया के खिलाफ एक जंग छिड़ गई थी मेरे दिमाग में और शायद मैं इसीलिए पत्रकारिता में उतरी..।
आप सोच रहे होंगे यह लड़की कितना बकवास करती है। लेकिन यह सब बताने का कारण यह है कि बचपन से ही इस दुनिया के खिलाफ मेरे दिमाग ने इतनी बगावत छेड़ दी थी कि मैंने सोच लिया था कि मुझे सबसे पहले अपनी सुरक्षा का इंतजाम करना है।
बड़ी मुश्किल से पढ़ लिखकर मैं अपने पैरों पर खड़ी हुई हूं साहब। इतना आसान नहीं होता अकेले अपने दम पर सब कुछ करना।
वह और लोग होते हैं जो सोने का चम्मच मुंह में लेकर पैदा होते हैं। मेरे पास तो एक वक्त खाने के बाद दूसरे वक्त खाने को मिलेगा कि नहीं यह सोचने का अवसर भी नहीं होता था।
तो इसीलिए जब मैं पत्रकार बनी, मेरी कमाई शुरू हुई तब मैंने बकायदा लाइसेंस लेकर गन खरीदी, और उसे हमेशा अपने पास रखती हूं।

लेकिन हां आप लोगों के कायदों के मुताबिक लाइसेंस भी साथ रखना चाहिए या शायद उसकी कॉपी जो मैं रखना भूल गई। और उसके लिए एक अदना सी लड़की को आपने दो दिन से थाने में बैठा कर रखा हुआ है। शायद मेरी जगह कोई और लड़की होती तो आप छोड़ भी देते, लेकिन मेरे खिलाफ गवाही देने वाले महल के लोग हैं ना। राजा अजातशत्रु ने जब कह दिया मेरे खिलाफ तो फिर मुझे कैसे छोड़ सकते हैं आप…।

वानी फिर अपना खेल खेल गई थी।

उसके दुख भरे बचपन के किस्से सुनकर वहाँ सभी पुलिस वाले भावुक हो रहे थे।

उन लोगों को भी लग रहा था कि कहीं ना कहीं वह इस लड़की के साथ ज्यादती ही कर रहे हैं। उनमें से एक ने अपने गले की खराश को मिटाते हुए उससे पूछा..

” चलिए कोई बात नहीं गन के लिए तो हम आपको एक बार छोड़ भी देंगे, लेकिन आप पर इल्जाम है की मीठी का आपने अगवा किया था..?”

” इल्जाम लगाने वाला कौन था धनुष ना!! वह कितना बड़बोला है, कितना ओवर स्मार्ट है, यह आप लोग मुझसे ज्यादा जानते हैं। हां यह और बात है की आप लोग इस बात को मानेंगे नहीं। क्योंकि वह भी महल का ही एक हिस्सा है, मैं जानती हूं।

महल से आप लोगों के लिए भी एक मोटी रकम तो आती ही होगी, चलो मान लिया आप में से बहुत से ऐसे होंगे जो रिश्वत नहीं लेते। लेकिन महल और महल के मालिक यानी मुख्यमंत्री जी का वरदहस्त अगर आपके सर पर है  तो यह भी कोई छोटी बात तो नहीं है।

मैं बहुत छोटी उम्र से बहुत समझदार हो चुकी हूं। यह सारा लेनदेन मुझे समझ में आता है, आप खुद सोचिए कि क्या कोई किडनैपर किसी व्यक्ति को अपने रूम में ही बंद करके रखता है।
इसलिए कि पुलिस जाकर उसके रूम की तलाशी ले, और किडनैप किये व्यक्ति को पकड़ कर उस किडनैपर को रंगे हाथों पकड़ ले।

       अरे इतनी बेवकूफ नहीं हूं सर मैं, अगर मुझे मीठी को किडनैप ही करना होता तो मैं दिल्ली में उसकी रूममेट थी। मैं वहां से उसे बड़े मजे से किडनैप कर सकती थी। किसी को कानों कान खबर भी नहीं होती। मैं यहां महल में उसके घर में घुसकर उसे किडनैप करूंगी और अपने ही कमरे में उसे बंद करके रखूंगी जिससे कोई भी आकर मेरे रूम की तलाशी ले और मीठी को वहां प्रकार मुझे दोषी ठहरा दे।
क्या आप लोगों को मैं वाकई इतनी बेवकूफ लगती हूं?”
एक और बात, अगर कोई व्यक्ति किसी को अगवा करता है यो उसका कोई लक्ष्य तो होता ही है..।
मेरे मीठी को किडनेप करने के पीछे क्या लक्ष्य था, बताइये ?
इसका भी आप लोगो के पास कोई जवाब नहीं है..
मैं पत्रकारिता में हमेशा सच्चे किस्से लिखा करती हूं।एक विधायक के बेटे ने किसी लड़की को किडनैप किया था, और मैंने उसकी पूरी रिपोर्टिंग की थी। वह विधायक का बेटा मेरे पास लड़ने पहुंच गया। मैं उसे समझा रही थी की मैं गलत का साथ नहीं देती। वह बार-बार मुझे तरह-तरह से अलग-अलग प्रलोभन दे रहा था, लेकिन मैं मानने को तैयार नहीं थी। और मैंने उसे धक्के देकर अपने घर से बाहर कर दिया…।

लेकिन मेरे सामान्य से धक्के से वो जानबूझ कर गिर गया और लुढ़क कर सीढ़ियों पर फिसलता नीचे तक पहुँच गया..।
उसके साथ आए उसके दोस्त ने इन सब बातों का वीडियो बना लिया, और उसके बाद यह वीडियो विधायक जी तक पहुंचा दिया गया।
उन्होंने मुझे फॉरेन तलब किया और उन्होंने मुझे धमकी देनी शुरू कर दी। उनके अनुसार अगर मैं अपनी पत्रकारिता बंद नहीं करती हूं तो वह मुझे जान से मार देंगे। लेकिन मैं भी निर्भीक अडिग रही। तब उन्होंने दूसरा रास्ता निकाला और मुझे मेरे ही तरीके से फसाने की कोशिश की।

उन्होंने कहा अगर मैंने उनकी बात नहीं मानी, तो वह मेरे इस वीडियो को गलत तरीके से वायरल करेंगे।
वह इस वीडियो के साथ यह खबर डालेंगे कि मैंने उनके बेटे को मारने की कोशिश की है..
उनके पास कुछ कंप्यूटर एक्सपर्ट थे, जिन्होंने वीडियो को मार्फ कर दिया और उसमें इस ढंग से नजर आया कि मेरे धक्का देने के बाद उनका बेटा तेजी से गिरा और उसके सर में चोट लगी और खून बहने लगा ।

ध्यान से देखा जाए तो इस वीडियो की सच्चाई पकड़ी जा सकती थी। लेकिन एक विधायक के खिलाफ अकेले खड़े होने के लिए मुझे काफी सारी हिम्मत के साथ विधायक जी के खिलाफ भी तो सबूत जुटाने थे। इसलिए उस वक्त मैं चुप रह गई। क्योंकि मेरे पास और कोई चारा नहीं था। और तब उन्होंने मेरे सामने यह शर्त रखी कि मुझे उनका काम मानना पड़ेगा..।

“फिर उन्होंने क्या काम कहा तुमसे.. मीठी को किडनेप करने का ?”

” नहीं उन्होंने जो भी कहा  वह मैंने सीरे से इनकार कर दिया। मैंने उनसे साफ-साफ कह दिया कि आप जो करना चाहे कर लीजिए, लेकिन मैं आपकी बात नहीं मानूंगी। इतना जरूर करूंगी कि आपके खिलाफ फिलहाल मैं कुछ नहीं लिखूंगी, उनके लिए इतना ही बहुत था..!”

वानी खुद को काफी हद तक पुलिस वालों के सामने पाक साफ साबित कर चुकी थी। उसने उन लोगों की आंखों में अपने लिए भरोसा तैयार कर लिया था…।

उसी समय पुलिस थाने के बाहर हंगामा होने लगा। कांस्टेबल ने अंदर आकर बताया कि कुछ युवा लड़के लड़कियां वहां पर धरना देने चले आए हैं, और उनकी मांग है कि उनकी दोस्त वानी को छोड़ दिया जाए..
उन लोगो ने अपने साथ किसी वकील को भी ले लिया था, जो चीख चीख कर वहाँ अपनी आईपीसी की धाराओं की जुगाली करता हुआ वानी को छोड़ने की अपील कर रहा था… ।

हंगामा बढ़ते देख थाना प्रभारी ने अपने अधिकारीयों को इस बात की इत्तला दी.. और फिर सबूतों के अभाव में आखिर पुलिस वालों को वानी को छोड़ना पड़ा..
उसके लाइसेंस की फोटो और लाइसेंस नंबर ज़रूर उन लोगो ने वानी से लिखवा लिया था…।

लेकिन वानी को ज्यादा देर वो लोग नहीं रोक पाए.. आखिर वो लड़की अपने मन का कर गयी.. !!

****

हर्ष मीठी को अपने साथ अपने कमरे में ले आया…
उसे बड़े आराम से कुर्सी पर बैठाने के बाद उसने फटाफट अपना फर्स्टएड बॉक्स निकाला और उसके घाव को साफ़ करने लगा..

“तुम रहने दो न.. मै कर लूँगी.. !”

हर्ष ने उसकी तरफ देखा और उसकी कुर्सी के सामने एक छोटे से मोढ़े पर बैठ गया.. मीठी का पैर अपनी गोद में रख कर उसने धीमे धीमे घाव को साफ कर दवा लगाना शुरू कर दिया…
मीठी बड़े ध्यान से हर्ष को देख रही थी..
क्या हर्ष सिर्फ उसे दोस्त समझ कर ही उसका इतना ख्याल रख रहा था… ?
वैसे वो था तो ऐसा ही सबका मददगार..

उसे याद आने लगा वो समय, जब एक बार वो दोनों ऑफिस के काम से बाहर निकले और एक दूसरे ऑफिस पहुंचे कि तभी सीढ़ियों पर एक बच्चा हर्ष के सामने खूब सारे गुलाब लेकर चला आया..

“भैया, ले लीजिये न !”

“नहीं, मुझे नहीं चाहिए !” पहली बार में हर्ष उसे मना कर के आगे बढ़ गया.. लेकिन वो बच्चा वापस हर्ष की तरफ बढ़ गया..

“भैया प्लीज़ ले लीजिये न, अपनी गर्लफ्रेंड को दे दीजियेगा, खुश हो जाएगी.. !”

हर्ष के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आयी..

“कितने साल का है रे तू.. इत्तू सा है और बातें इत्ती बड़ी बड़ी.. ?”

“भैया पन्द्रह साल का हूँ.. स्कूल भी जाता हूँ। बस हफ्ते में दो दिन मुझे काम करना पड़ता है…।
आप थोड़ी मदद कर दो न.. ये एक गुलाब दस रूपये का है..।”

हर्ष ने सौ का एक नोट उस बच्चे की तरफ बढ़ा दिया..  वो आश्चर्य से हर्ष को देखने लगा….

“भैया आपको दस गुलाब दे दूँ ?”

“नहीं बस एक काफी है !”

“लेकिन पैसे.. ? साहब मै भीख नहीं मांगता.. ! उस लड़के की आंखे भर आई थी…।

“और अगर बड़ा भाई कुछ दे तो ?
अब से उन दोनों दिन जब तुम काम पर आते हो दो गुलाब मेरे लिए रखना.. !”
वो बच्चा मुस्कुरा कर रह गया था..

मीठी वही सोचती बैठी थी… की हर्ष ने उसकी आँखों के सामने चुटकी बजा दी..
.
“कहाँ खो  गयी मैडम.. एक तो इतना हैंडसम कम्पाउंडर तुमको मिला है, जो बिना फी लिए तुम्हारी सेवा कर रहा और तुम अपने ख़यालो में ग़ुम हो !”

“क्यों कर रहे हो हर्ष इतना कुछ ?”

मीठी ने हर्ष से पूछा और हर्ष उसे देखने लगा..
मीठी ने अपना पैर हटाया और उसे उठने का इशारा किया…

“बोलो न हर्ष… क्या बात है.. !”

हर्ष जो रियाल के सामने पुरे दम से मीठी से अपने प्यार की दुहाई देता फिर रहा था, अचानक मीठी के पूछने पर कुछ नहीं बोल पाया..

“अरे.. दोस्ती है, अब उसमे इतना तो बनता ही है.. !”

“अच्छा… मतलब तुम अपने सारे दोस्तों की चोट ऐसे ही ठीक करते हो ?”

मीठी को भी पहली बार हर्ष को छेड़ने का मौका मिला था…

“अच्छा सुनो…

मीठी के मुहं से ये सुन कर बिना वजह ही हर्ष के गाल लाल हो उठे..

“हम्म कहो !”

“नहीं…. अभी रहने दो.. बाद में पूछ लूँगी..

क्रमशः..

aparna…

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Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
1 year ago

वानी इतनी बड़ी ड्रामेबाज है, धोखेबाज, चालबाज़, गिरी हुई है, जर्नलिज्म के नाम पर वह झूठ फैला रही है। मीठी और हर्ष के बीच प्रेम है उसका साथ एक दोनों को मिल जायेगा पर सजा वानी को जरूर मिलनी चाहिए। यह बहुत ही अद्भुत खेल है जिसका हल निकालना जरूरी है, बेहतरीन भाग दीदी…💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

हर्ष की नज़रों का बात कैसे नहीं समझती मीठी कितना प्यार, परवाह थी हर्ष की आँखों में पर अपनी निरमा माँ के सामने कुछ बोलने की हिम्मत भी तो नहीं थी उसमे मगर देखो निरमा के हर्ष की सगाई टूटने की बात बताते ही मीठी कितनी चहक उठी 😊सारी थकान, तनाव पल में दूर हो गया और मन झूम झूम उठा मीठी का, हाय रे इश्क़..।

राजा साहब की यही सब बातें तो उनको सबसे अलग बनाती है, वो खुद जैसे ही सबको वैसे ही समझते है पर उनके जैसा कोई हो ही नहीं सकता अब.. जिस लड़की ने इतना कुछ किया उनके परिवार के साथ,उस वाणी क़ो अपनी घर मेहमाननवाज़ी करवाने ले आए 🤦‍♀️और वो चुड़ैल वाणी इतना जहर भरा है उसके मन में मीठी क़ो चोट पहुंचा दी, चलो.. हर्ष संभाल लेगा मीठी क़ो और कुछ समय दोनों क़ो अकेले में बात करने का मौका भी मिल जाएगा, अरे अरे.. कली कहाँ चल दी मीठी और हर्ष के पीछे 🤦‍♀️हाय कली भी ना झल्ली है yaar शौर्य का क्या होग़ा 😄😄।
बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌🙏🏻।