जीवनसाथी -3 भाग -66

पुलिस महकमा इतना सजग वाकई नहीं होता कि तुरंत सीएम के घर पहुँच कर कार्यवाही शुरू कर दे, लेकिन राजनीती पुलिस विभाग और पत्रकारिता ये तीन ऐसी वस्तुएं हैं, जिनका आपस में जुड़कर काम करना बेहद जरूरी है। और अगर इनमें आपस में कुछ मनमुटाव हुआ तो, फिर यह एक दूसरे को नीचा दिखाने में सारी हदें पार कर जाते हैं।
चुनाव का समय करीब था। सीएम की पार्टी जरूर सत्ता में थी, बावजूद विपक्ष का दबाव पुलिस प्रशासन पर कुछ ज्यादा ही था।
और जिसके कारण पुलिस वाले कुछ ज्यादा ही जल्दी हरकत में आ गए थे…
इनमें से कुछ चुनिंदा पुलिस वाले विपक्षी दल के खास थे और इसीलिए विपक्ष के जोर देने पर यह तुरंत ही कार्यवाही करने पहुंच गए…
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पुलिस वाले ने शौर्य का फोन स्विच ऑफ किया । और वही एक सोफे में रखने के बाद हर्ष को साथ लिए वह लोग बाहर निकल गये।
हर्ष के वहां से जाते ही शौर्य और यश भी उसके पीछे-पीछे तेजी से अपनी गाड़ियों में पुलिस स्टेशन के लिए निकल गये..
शौर्य के पीछे ही कली और विक्रम भी निकल गए..
ये सब बड़े आननफानन हो गया..।
जैसे तैसे सब लोग वहाँ पहुँच गए, जहां पुलिस वाले हर्ष को लेकर गये थे..
पुलिस वाले हर्ष को जिस कमरे में लें गए वहाँ वो और किसी को आने नहीं दे रहे थे..।
शौर्य यश विक्रम के साथ अंदर जाकर हर्ष से मिलना चाह्ते थे लेकिन पुलिस वालों ने उन्हेँ जाने नहीं दिया..
दूसरी तरफ महल में सभी इस अचानक हुए मसले के बाद स्तब्ध थे..
रूपा चुपचाप बैठी थी.. उसकी समझ से बाहर था कि अब क्या किया जाये..
वहीँ उसके साथ मौजूद गीता और उसके पति भी चुपचाप बैठे थे..।
गीता के पतिदेव ने गीता को बाहर चलने का इशारा किया और और रूपा की नजर बचाकर गीता अपने पति के साथ बाहर निकल गई। दोनों ही वहां मिले मेहमान कमरे में चले गए, उन दोनों ने आपस में कुछ बातचीत की और प्रियदर्शनी को साथ लिए वापस नीचे चले आए। गीता रूपा के पास आकर बैठी ही थी कि बांसुरी और राजा भी हड़बड़ाये से चले आए..।
अगला चुनाव ठीक सर पर था, और विपक्ष ने भी चुनावी तैयारी बहुत जोरों शोरों से शुरू कर दी थी। इसलिए पुलिस पर पूरी तरह से रोक-टोक करना फिलहाल राजा साहब के लोग नहीं करना चाह रहे थे..।
राजा जैसे ही आकर रूप के सामने बैठा, रूपा बिलख उठी..
” देख लो कुमार तुम्हारे होते हुए भी हर्ष को पुलिस पकड़ कर ले गई। क्या यह ठीक हुआ? हर्ष ने कुछ भी ऐसा नहीं किया कि उसे पुलिस ले जाए, लेकिन हम लोगों को कुछ भी बोलने का मौका नहीं मिला..।”
“भाभी साहब आप चिंता मत कीजिए। मैं जा रहा हूं, और हर्ष को वापस लेकर आऊंगा।”
राजा अपनी जगह से उठ गया..
बांसुरी रूपा के हाथों पर हाथ रखे बैठे, उसे संबल प्रदान कर रही थी। तभी सामने बैठी गीता बोल पड़ी ।
“रूपा हम जानते हैं तुम्हारे साथ बहुत गलत हुआ है। लेकिन हम भी क्या कर सकते हैं, तुम भी हमारी जगह होती तो शायद तुम भी यही निर्णय लेती जो हम लेने जा रहे हैं। हमने और हमारे पति भार्गव जी ने यही तय किया है कि अब प्रियदर्शनी और हर्ष की शादी नहीं हो सकती। हम जानते हैं तुम बहुत रसूख वाले लोग हो। बहुत बड़ा परिवार हो। हम यह भी जानते हैं कि पैसों के बल पर हर्ष को तुम लोग जेल में नहीं रहने दोगे। लेकिन आखिर एक बार तो थाने तक जाने का कालिख हर्षवर्धन के नाम पर लग ही गया और, हम अपनी इकलौती बेटी को किसी ऐसा लड़के के साथ नहीं बांध सकते।
हमें माफ कर देना रूपा, और एक बात और कहेंगे कि यह रिश्ता टूटने से हमारी दोस्ती पर आंच नही आएगी। अच्छा होगा, तुम हमारी बात को समझ कर स्वीकार कर लो।
इस वक्त तुम भी परेशान हो, और तुम्हारा परिवार भी। तुम सबको एक दूसरे की जरूरत है। ऐसे में बाहर वालों का यहां क्या काम? इसलिए हम लोग तुरंत ही लौट रहे हैं। हमें माफ कर देना..।”
रूपा ने भारी पलके उठा कर उसे देखा, उसे गीता से बिल्कुल ये उम्मीद नहीं थी, लेकिन अब अचानक ही उसे गीता से और कोई आस बाकी नहीं बची थी..।
लेकिन गीता की ये बात वहाँ मौजूद हर किसी को चौंका गयी..
बांसुरी ने गीता की तरफ देखा..
“आप इस वक्त ऐसे कैसी बातें कर रही है ? आप जानती भी है कि आप क्या कह रही है ?”
“माफ़ करना बांसुरी, लेकिन अब हम इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं !”
“इतनी छोटी सी बात पर आपका विश्वास हिल गया ? क्या आप हर्ष को जानती नहीं है ? कि आपको सच में नहीं पता की राजनीती में उतरने का ये सबसे ख़राब पहलु होता है कि एक राजनीतिज्ञ के परिवार का हर इंसान लोगो की अदालत में बिना किसी गुनाह के भी खड़ा किया जा सकता है..।
हर्ष के साथ जो हो रहा है कही न कहीं इसके पीछे साहब का पद ही है..।
अगले महीने चुनाव है, अब हर एक पार्टी अपने आड़े तिरछे हथकंडे दिखाएगी ही…
और ऐसे में घर परिवार के सदस्यों पर ऐसे कीचड़ उछलता ही है। लेकिन उस बात को समझ कर ऐसे बुरे वक्त में परिवार के साथ, अपनी दोस्त के साथ, खड़े होने की बजाय आप हमसे रिश्ता तोड़ कर जा रही है.. हद है..।”
गीता ने एक जलती हुई नजर बांसुरी पर डाली..
“हम आपको कोई सफाई नहीं देना चाह्ते.. रूपा याद रखना इस बुरे वक्त में हमारा परिवार तुम्हारे साथ ज़रूर है, लेकिन हम प्रियदर्शिनी की शादी हर्षवर्धन से नहीं कर सकते.. अब हम चलते हैं.. !”
गीता की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि भागती हुई निरमा वहाँ पहुँच गयी..
” बंसी.. !” वो आते ही बांसुरी के सामने खड़ी हो गयी…
“मीठी कहाँ है ? क्या हुआ उसके साथ ?”
निरमा का रो रोकर बुरा हाल था… अब तक ये खबर पूरे शहर में फ़ैल चुकी थी..
और पिया के साथ शोवन भी वहाँ चला आया था..
निरमा को देखते ही रूपा अपना दुःख भूल कर खड़ी हो गयी… उसका बेटा जेल में था लेकिन था तो, लेकिन मीठी तो गायब ही थी..।
रूपा बांसुरी सबके चेहरों पर हवाइयां उडी हुई थी..।
वाकई महल की तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगा कर आखिर मीठी को किसी ने कैसे गायब कर दिया..
बांसुरी निरमा को समझाने की कोशिश कर रही थी,पुलिस की टुकड़ी के साथ घर भर के सुरक्षा गार्ड्स इधर उधर महल की तलाशी ले रहे थे..
चप्पा चप्पा छाना जा रहा था कि आखिर महल से मीठी कहाँ गायब हो गयी..
पर अफ़सोस ये था कि पुलिस वाले और सुरक्षा गार्ड्स, जिन कमरों में लोग रहते थे, उन कमरों की जाँच नहीं कर रहे थे…
और बस इसीलिए रियाल का कमरा अभी तक जाँच के घेरे से बचा हुआ था..।
एक पुलिस वाला उसके कमरे से होकर गुज़र रहा था कि दरवाज़ा खोल कर वो बाहर निकल आयी.. उसका चेहरा भी वीडियो में फ़िलहाल नजर नहीं आया था, उसे भी धुंधला किया गया था, लेकिन एक टीवी चैनल ने शाम में उसके लाइव आने की बात कही थी..
इसीलिए किसी भी हाल में रियाल को वहाँ से निकलना ही था..
चेहरे पर मोटे गॉगल्स चढ़ाये गले को स्कार्फ से ढके एक बहुत बड़ा सा बैग खींचते हुए वो वहाँ से निकल गयी..
पुलिस वाले ने उसे जाते हुए टोक दिया..
“आप कौन ?”
“महल में गेस्ट थी.. वो जो लोग जा रहे हैं, ना उनके साथ थी.. !”
उसने गीता के परिवार की तरफ इशारा कर दिया
पुलिस वाले ने देखा और फिर उसे जाने का इशारा कर दिया.. वो जाने लगी कि पुलिस वाले ने वापस उसे टोक दिया.. -” एक्सक्यूज़ मी.. आपका बैग कुछ ज्यादा ही बड़ा है.. ज़रा ये खोल कर दिखाएंगी.. !”
रियाल के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी..
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इधर निरमा की बेकरारी बेचैनी किसी ठौर ठंडक नहीं पा रही थी.. उसका बुरा हाल था..
“मै पुलिस स्टेशन जा रही हूँ.. !”
वो खड़ी हो गयी.. रूपा ने घबरा कर बांसुरी को देखा.. बांसुरी ने आँखों से ही रूपा को ढांढस दिया और निरमा के कंधो पर हाथ रख दिया..
“चलो मै भी साथ चलती हूँ !”
इन सब के एक तरफ खड़ा शोवन उन्ही लोगो को देख रहा था.. उसके पास खड़ी परी भी घबराई हुई थी..
शोवन ने सबकी नजर बचा कर परी के हाथ पर धीरे से ऊँगली चलाई.. परी ने जैसे ही उसे देखा..
शोवन धीमे से पूछ बैठा..
“क्या हुआ है ?” उसे कुछ भी नहीं मालूम था.. वो मासूम मोबाइल कॉल के आलावा मोबाइल किसी उपयोग में लाता ही नहीं था, इसलिए उसे हर्ष के वीडियो के बारे में कुछ मालूम नहीं था.. परी ने उसे घूर कर देखा
“बुद्धू राम कुछ पता भी होता है तुम्हे? अभी अगर किसी मरीज़ के बारे में पूछ लिया तो उसकी जन्मकुंडली निकाल कर रख देना..।”
परी ने फटाफट शोवन को सारी बातें बता दी.. शोवन ने सारी बात सुनी और वो भी निरमा और बांसुरी के साथ निकल गया..
“चलिए मै आप लोगो के साथ चलता हूँ.. !”
निरमा का तो किसी बात पर ध्यान नहीं था, वो सुध बुध खोयी चली जा रही थी.. बांसुरी उसे संभालती चल रही थी..
शोवन उन लोगो के साथ निकल गया..
गाड़ी में बैठते ही उसने धनुष को फ़ोन लगा लिया..
लेकिन धनुष का फ़ोन नहीं लगा..
धनुष और शोवन के फ़ोन पर एक विशेष एप था जिससे उन दोनों को एक दूसरे की लोकेशन हर वक्त दिखाई देती थी..
शोवन ने गाड़ी में बैठे हुए ही धनुष को मेसेज भेजा लेकिन उसे मेसेज गया नहीं.. शोवन ने तुरंत उसकी लोकेशन देखनी शुरू की, लेकिन वो भी नजर नहीं आयी…।
अब शोवन थोड़ा चिंतित हो गया, क्यूंकि धनुष कभी भी अपना मोबाइल बंद नहीं करता था..।
तो क्या धनुष भी किसी मुश्किल में फंस चुका था..?
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पुलिस स्टेशन में विक्रम और यश पुलिस वालो से बात कर रहे थे लेकिन उन्हेँ वो लोग हर्ष से मिलने नहीं दे रहे थे..
उन सबको पुलिस वालो ने बड़े सम्मान से बैठने के लिए कहा लेकिन शौर्य को हर्ष का अंदर रहना सहन नहीं हो रहा था..।
उसने उन पुलिस वालो के सामने हाथ जोड़ दिए.. आखिर एक पुलिस वाले ने अपने सीनियर ऑफिसर के वहां से हटते ही शौर्य को सिर्फ पांच मिनट के लिए हर्ष से मिलने की इजाजत दे दी।
शौर्य हर्ष के पास पहुंचा और कुछ बोलने ही जा रहा था कि हर्ष ने उसे टोक दिया..
” शौर्य पहले मेरी बात सुनो। यह सब जानबूझकर बिछाई हुई चाल है। तुम इनमें से किसी पुलिस वाले के साथ बदतमीजी मत करना। क्योंकि यह सारे लोग जानबूझकर हम लोगों को प्रवोक करने के लिए ही यह सब कर रहे हैं। और इसका सीधा असर काका साहब के भविष्य में होने वाले चुनाव के नतीजे पर जाएगा…
ठीक महीने भर बाद चुनाव है। सारी पार्टी अपने प्रचार में लग गई है। और कहीं ना कहीं रियाल से करवाया गया यह सारा खेल भी काका साहब की निगेटिव पब्लिसिटी का ही एक हिस्सा है। इसलिए अपना धैर्य किसी कीमत पर मत खोना।
पुलिस वालों से किसी बात पर वाद विवाद मत करना। पूरे धैर्य और शांति से उनकी बात सुनना, फिलहाल इस बात पर फोकस करो की मीठी मिल जाए।
अगर मीठी यहां चली आती है तो, फिर यह लोग मुझे थाने में नहीं रोक पाएंगे। इन्हें मुझे छोड़ना ही पड़ेगा..।”
“ठीक है भाई..।
मै बाहर जा रहा हूँ.. वरना कहीं मै इन लोगो से बदतमीजी ना कर बैठूं.. क्यूंकि अगर वैसा हुआ तो जैसा आप कह रहे, ये डैड के लिए और गलत हो जायेगा.. !”
हर्ष से बात कर शौर्य बाहर निकाल कर आ ही रहा था कि अपूर्व अपनी फौज के साथ हल्ला मचाते हुए वहां पहुंच गया। उसने वहां पहुंचते ही पुलिस की टेबल पर रखे सामान को इधर-उधर फेंकना शुरू कर दिया। शौर्य और यश उसे रोकने की कोशिश में लग गए। लेकिन अपूर्व किसी की सुनने को तैयार नहीं था..
“शांत हो जाइये मामा जी.. सब ठीक हो जायेगा.. !”
“अरे क्या ठीक हो जायेगा.. ? कुछ ठीक नहीं होगा, हम कह दे रहे हैं शौर्य। आत्मसम्मान को छोड़कर चुप बैठना कायरता है। हम कायर नहीं है।
जब हमारे साथ गलत हुआ है तो हम उस गलत के खिलाफ आवाज उठाएंगे..!”
“मामा जी वैसी कोई बात नहीं.. फ़िलहाल शांत रहिये !”
“हम गलत बात को सह कर चुप रह जाने वालो में से नहीं हैं.. ।
ठाकुर है हम..। हमारे खून में उबाल है, कायरता नहीं..। भले तुम्हे लगे की हम हिंसक है लेकिन अगर खुद की आन पर बात आएगी तो हम हिँसा करने से भी नहीं चूकेंगे.. हम गलत का साथ देने वालों में से नहीं है..।
“अरे यार ये आदमी क्यों पगला रहा है.. ! विक्रम ने धीमे से कहा लेकिन कली ने सुन लिया… कली चुप चाप खड़ी थी..।
उसने पहली बार शौर्य को इतना परेशान देखा था…
शौर्य अपूर्व की बकवास को ना सह पाने के कारण वहाँ से बाहर निकल गया… वो बाहर निकल कर खड़ा था..
बाहर बारिश हो रही थी..।
शौर्य परेशान सा खड़ा था..।
उस पर बारिश की बूँदे इधर उधर से पड़ रही थी…
कली ने इधर उधर देखा और वही पड़ा एक बड़ा सा गत्ते का टुकड़ा उठा कर चुपचाप शौर्य के पीछे खड़ी हो गयी..
उसने धीमे से वो टुकड़ा शौर्य के सर पर कर दिया और..
शौर्य को इधर उधर से आकर भिगोती बूंदे अब उस पर नहीं गिर रही थी..
लेकिन गत्ता भीगने लगा था..। हालाँकि शौर्य अपने मोबाइल में इतना व्यस्त था कि उसका ध्यान इस बात पर गया ही नहीं..
उसी समय विक्रम वहाँ चला आया..
उसने कली के कंधे पर हाथ रखा और कली चौंक कर पलट गयी… विक्रम ने उसके हाथ से वो गत्ते का टुकड़ा लिया, और अपने साथ लायी छतरी उसे पकड़ दी..
छतरी देख कली हलके से मुस्कुरायी और विक्रम के हाथ से उसने ले लिया…
क्रमशः
aparna….

बेहतरीन भाग दीदी, पढ़कर मज़ा आ गाया, इस भाग में सब कुछ है पर गीता का बदल जाना बहुत अजीब लगा और कष्ट प्रद है यह जनकर उससे शादी करने वाली थी वह, सेमफुल, मीठी मिल जायेगी ! नाईस पार्ट दीदी 💐👍🙏
ओह्ह तो ये लड़की रियाल नहीं नहीं वाणी उस पत्रकार संनत कस्तूरिया की बेटी है और ये अपने बाप का बदला लेने यहाँ आई है, ये लड़की भी वही गलती कर रही है जो कभी इसके बाप ने की थी।
धनुष ने मीठी क़ो तो ढूंढ लिया पर रियाल भी मौक़े पर पहुंच गई 🤦♀️बड़ा स्यापा हो गया ये तो। हर्ष क़ो भी पुलिस पकडकर ले गई, अब क्या होगा 🤔।
इंतज़ार है अगले भाग का 🙏🏻।