जीवनसाथी -3 भाग -61

जीवनसाथी -3 भाग -61

जीवनसाथी by aparna

“अब भाई के ऊपर है, सिर्फ दो दिन हैं उनके पास.. उसी में उन्हेँ अपनी होने वाली दुल्हन को भी मनाना है,और अपनी दुल्हन की सास को भी..।”

वो तीनो हर्ष की तरफ देख रहे थे, और हर्ष को बिना मन के उन मेहमानों से मिलना और बात करना पड़ रहा…

प्रियदर्शिनी मुस्कुरा कर हर्ष के करीब चली आयी..।

वो अपलक अपने सामने खड़े उस राजकुमार को देख रही थी, जिसे उसकी माँ ने उसके लिए चुना था..।

जब पहली बार उसकी मां ने उसे हर्ष के बारे में बताया था, तब वह यह सुनकर बौखला गई थी। वह नए जमाने की लड़की थी, और शादी ब्याह जैसे मामलों से खुद को दूर रखना चाहती थी। उसका इस सब मे विश्वास ही नहीं था।
उसकी मां और उसके पिता जबरदस्ती उसे समझा बुझा कर यहां लेकर आए थे। उनका कहना था एक बार हर्ष से मिल लो, अगर मन नहीं किया तो फिर यह बात आगे नहीं बढ़ेगी।
और इसीलिए वह बस हर्ष से मिलने की बात पर राजी होकर आज की शाम यहां चली आई थी। लेकिन हर्ष को सामने देखने के बाद उसके दिमाग के कल पुर्जे हिल गए थे। उसे लगने लगा था कि अब तक की उसकी जिंदगी वाकई कितनी बेमकसद सी चल रही थी। हर्ष के साथ उसकी दुनिया कितनी खूबसूरत हो सकती है, यही सोच कर उसके चेहरे से मुस्कान जा ही नहीं रही थी। उसका मन तो कर रहा था कि आज ही सगाई भी हो जाए। लेकिन हर्ष के रंग रूप से प्रभावित होने के साथ ही वह उससे बात भी करना चाहती थी, पहली नजर में वह उससे जरूर प्रभावित हो चुकी थी, लेकिन हर्ष के विचार कैसे हैं, यह जानना प्रियदर्शनी के लिए भी बहुत जरूरी था।
हर्ष को देखते हुए प्रियदर्शनी ने हर्ष से सवाल पूछ लिया..

“आपसे कुछ बातें करना चाहते हैं हम।”

हर्ष ने उसकी तरफ देखा, और हामी भर दी।दोनों अपने अभिभावकों से जरा हट कर एक तरफ चले गए।

     प्रियदर्शनी अपनी दोनों हाथ की उंगलियों को एक दूसरे में फंसाए उन उंगलियों की तरफ ही देख रही थी और बीच-बीच में हर्ष को भी देखने लगती थी। हर्ष लगातार उसकी इन हरकतों को पर नजर रखे हुए था।

” क्या बात है प्रियदर्शनी, किसी उलझन में हो।”

” हां हर्ष जी। हम एक छोटी सी उलझन में थे।”

” बोलो क्या कहना चाहती हो?”

” सच कहे तो आपसे मिलने से पहले हमने कभी शादी  के बारे में सोचा ही नहीं था। हम बहुत प्रगतिशील विचारों वाली लड़की हैं। हम आज के मॉडर्न इरा की लड़की है, और आजकल शादी ब्याह बाल बच्चे परिवार इन सब के बारे में कौन सोचता है? हमने तो सोचा था कि हम अपने पापा का बिज़नेस आगे बढ़ाएंगे। हम अपने पापा के बिजनेस से जुड़े भी हुए हैं। पापा का वैसे तो टेक्सटाइल का कारोबार है, लेकिन हमने फैशन इंडस्ट्री में भी कदम रख दिया है। हमारी अब तक चार-पांच ब्रांचेस दिल्ली में खुल चुकी है। इसके अलावा ऑनलाइन भी हमारे स्टोर मौजूद है। अगले तीन-चार सालों में हमारा लक्ष्य था कि हम पूरे हिंदुस्तान में अपने फैशन स्टोर को स्थापित कर लेंगे। लेकिन उसके पहले ही हमारी मम्मी चाहती थी कि हम शादी कर ले।
अब आप सोचिए, जिसने इतना बड़ा लक्ष्य सोच रखा हो उसके लिए अचानक से शादी जैसा बंधन आप समझ रहे हैं ना…।”

“हम्म.. ।”

हर्ष ने बस छोटा सा हम्म कहा। वह गुमसुम सा प्रियदर्शनी के साथ खड़ा था। बीच-बीच में उसकी उड़ती हुई सी नजर मीठी पर भी चली जाती थी। मीठी उससे कुछ दूरी पर एक टेबल में बैठी थी, उसके साथ रियाल थी.. ।

मीठी के दोनों हाथ टेबल पर रखे थे, रियाल लगातार मीठी से कुछ ना कुछ बातें कह रही थी। रियाल की चहक कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी। उसकी बातें सुनते बैठी मीठी की नजर भी बीच-बीच में हर्ष पर चली जाती थी।

उसे अपने दोस्त के लिए खुशी तो हो रही थी, लेकिन उसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि दिल के एक हिस्से में एक अजीब सी मरोड़ क्यों उठ रही है?

उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी आंखों के कोर में आंसू जाकर क्यों अटक रहे हैं। और इसीलिए इन सब बातों पर ध्यान न देने के लिए वह बीच-बीच में रियाल की बातों में भी उसका साथ देने लगती थी।

हर्ष का भी यही हाल था उसका तो पूरा दिल किसी ने मरोड़ कर रख दिया था। लेकिन वह मजबूत लड़का था। अपने दिल के जख्मों को सबको दिखाने वालों में से वह नहीं था। और इसीलिए ऊपरी तौर पर सबको देखकर मुस्कुरा रहा था। प्रियदर्शनी ने अपनी बात आगे कहनी जारी रखी।

” अब आप बताइए हर्ष जी, हमने अपनी जिंदगी के आने वाले 5 सालों को पूरी तरह से प्लान कर रखा है। अब इस बीच में अगर हमारी शादी हो जाती है तो, क्या हम अपने करियर के साथ जस्टिस कर पाएंगे? हमें सिर्फ दिल्ली का काम या ऑनलाइन काम ही नहीं देखना, हमें बाकी जगह भी अपने स्टोर डालने हैं। और उसके लिए ऐसा नहीं है कि सिर्फ हमारी टीम काम कर लेगी हमारे बिना तो वो भी कुछ नहीं कर सकते ना ?

    हमने पहले ही अपने पापा से कह दिया था कि हमें अपने फैशन स्टोर के लिए उनकी कोई मदद नहीं चाहिए। हम अपने बलबूते सब कुछ करना चाहते हैं! हां जब हमने पहला स्टोर खोला था, तब पापा ने हमें मात्र बीस करोड रुपए दिए थे। उसमें से कुछ रूपयो से हमने अपना स्टोर खोला और कुछ पैसे जोड़कर रख लिए थे। और उसके बाद तो फिर बस सब कुछ होता चला गया…।”

प्रियदर्शनी और हर्ष बात कर ही रहे थे कि तभी शौर्य धनुष और यश तीनों लड़के उन लोगों के पास चले आए…।
शौर्य से रूपा ने पहले ही प्रियदर्शिनी की सारी खूबियां बयान कर रखी थी, जिन्हे शौर्य ने धनुष यश को भी बता दिया था.. !

” बधाइयां जी बधाइयां आप दोनों को ढेर सारी बधाइयां!”

यश ने उन दोनों को बधाई देते हुए हर्ष के पैर छू लिए, लेकिन प्रियदर्शनी के पैरों में उसका झुकने का मन नहीं किया। उसने प्रियदर्शनी के सामने बस हाथ जोड़ दिए। धनुष ने प्रियदर्शनी को देखकर बधाई दी और हर्ष के गले लग गया।

शौर्य ने भी धीरे से कंग्रॅचुलेशंस कहा, और हर्ष की तरफ देख रहा था कि हर्ष ने भी शौर्य को गले से लगा लिया। शौर्य धीरे से हर्ष के कान में गुनगुना उठा…

” भाई आपने हथियार डाल दिए क्या ?”

हर्ष चौंक कर शौर्य की तरफ देखने लगा..

“मतलब ?”

“मतलब दिलवाले की दुल्हनिया कहीं और बैठी है और दिलवाला कहीं और उलझा है, कुछ समझ नहीं आया !”

शौर्य की बात पर हर्ष ने कुछ नहीं कहा..
उसी वक्त राजा साहब वहाँ चले आये..

उनके आते ही माहौल और खुशगंवार सा हो गया…।
वो आते ही अपने बड़े भाई और भाभी की तरफ बढ़ गए..।
उन्हेँ आते देख बांसुरी उनके स्वागत में उन तक पहुँच गयी और राजा साहब को साथ लिए वापस चली आयी..।
रूपा ने बहुत उत्साह से राजा से सभी मेहमानों को मिलवाया…।
अपने काका साहब को देख हर्ष भी उठ कर उनके पास चला गया, उसके पीछे प्रियदर्शिनी भी चली आयी..। उसने आते ही राजा के पैर छूने के लिए हाथ बढ़ाया लेकिन राजा ने उसे बीच में ही रोक दिया..

“खूब खुश रहो, स्वस्थ रहो !”

वो मुस्कुरा कर खड़ी हो गयी..

बांसुरी भी चुप सी ही थी.. और इतने ख़ुशी के माहौल में बांसुरी का गुमसुम होना राजा की नजर से छिपा नहीं रहा..।
हालाँकि बांसुरी भी अपनी मुस्कान बिखेरती खड़ी थी, लेकिन उसकी मुस्कान के पीछे छिपी उदासी सिर्फ राजा को ही दिखाई दी….

वो सबसे मिलता जुलता बांसुरी के पास चला आया..

“क्या हुआ हुकुम… ?”

“कुछ भी तो नहीं साहेब !”

“फिर चेहरे पर उदासी क्यों ?”

“नहीं तो.. मैं तो खुश हूँ !”

“लेकिन दिख तो नहीं रही !”

बांसुरी ने राजा की तरफ आंखे चौड़ी कर देखा..

“सच कह रहा हूँ.. मुझे ऐसे घूरोगी तो अपनी बात बदल नहीं दूंगा !”

“साहब…आप कैसे समझ जाते है सब !”

राजा मुस्कुरा उठा..

“मैं तुम्हे नहीं जानूंगा, तो कौन जानेगा हुकुम… तुम्हे ज़िन्दगी भर समझने के लिए ही तो शादी की है.. !”

“और अब शादी को इतने साल भी तो बीत गए !”

“तो क्या हुआ.. मेरी हुकुम तो अब भी नयी शादीशुदा लड़की सी ही लगती है.. !”

“कुछ भी बोलते हैं आप ! अब तो बूढी हो गयी आपकी हुकुम !”

“चेहरे से छब्बीस से एक दिन ज्यादा की नहीं लगती.. !”

राजा की बात पर बांसुरी को हंसी आ गयी..

“हाश… कम से कम हंसी तो आयी हुकुम के चेहरे पर… अब सुनो अगर मूड ठीक है तो कुछ अच्छा सा सुना दो ना.. हो सकता है तुम्हारा गाना सुन कर ही तुम्हारी समस्या का कोई समाधान मिल जाये.. !”

“आपको अब तक मेरी समस्या ही कहाँ पता है ?”

“कैसे नहीं पता..।
बचपन से मीठी को हर्ष के लिए देखती आयी हो, आज अचानक रूपा भाभी सा ने प्रियदर्शिनी को लाकर खड़ा कर दिया… अब इस बात पर तुम्हारा मूड उखड़ना तो बनता है.. !”

आश्चर्य से आंखे फाडे बांसुरी अपने साहब को देखने लगी…

“आप का दिमाग है या कम्प्यूटर.. मतलब कैसे ऐसा हो सकता है की कोई बात मेरे दिमाग मे आये और आप उसे पढ़ ना लें..।”

“दिल से दिल जुड़ा हुआ है हुकुम, ऐसे ही सिर्फ कहने के जीवनसाथी नहीं है हम..।
वाकई जीवन भर का साथ है हमारा… !”

“सिर्फ जीवन भर का नहीं.. मुझे तो हर जन्म में आपसे ही शादी करनी है साहब !”

“तो फिर चलो एक मीठा सा गाना सुना दो.. बहुत दिन हो गए तुमने कुछ नहीं सुनाया !”

बांसुरी मुस्कुरा उठी..

धनुष ने वही से गुज़रते हुए राजा साहब की इल्तिज़ा सुन ली थी..

वो ऑकेस्ट्रा के पास गया और माइक लिए बांसुरी के पास चला आया और उसके सामने माइक कर दिया..

“लीजिये काकी हुकुम ! अपने साहब के लिए, हम सब को कुछ सुना दीजिये !”

बांसुरी को वहां मौजूद बाकी औरतें भी गाने के लिए कहने लगी… और बांसुरी ने माइक थाम लिया..

मुझे तुम मिल गये हमदम, सहारा हो तो ऐसा हो
जिधर देखूं उधर तुम हो, नज़ारा हो तो ऐसा हो….
मुझे तुम मिल गये हमदम….

किसी का चाँद सा चेहरा, नज़र से चूम लेती हूँ,
ख़ुशी की इंतहा ये है, नशे में झूम लेती हूँ…
हुई तकदीर भी रोशन, सितारा हो तो ऐसा हो…
जिधर देखूं उधर तुम हो, नज़ारा हो तो ऐसा हो
मुझे तुम मिल गये हमदम…

राजा के साथ साथ सभी मुस्कुरा उठे..
मीठी आगे बढ़ कर ख़ुशी से अपनी मासी के गले से लग गयी.. बांसुरी ने उसके सर पर हाथ फेर दिया..
राजा ने आगे बढ़ कर बांसुरी को आँखों से ही धन्यवाद दे दिया..

“बस इतना फीका सा धन्यवाद !”

“मीठा वाला कमरे में दूंगा.. तुम बोलो तो यही दे दूँ, लेकिन फिर तुम्हे ही आपत्ति होने लगती है. !” बांसुरी मुस्कुरा कर रह गयी…

मीठी उन दोनों को छोड़ कर वापस रियाल के पास आ बैठी..

मीठी के पास बैठी रियाल लगातार उससे बात कर रही थी….
मीठी हाँ हूँ करती चुपचाप सुन रही थी..
वेटर ने आकर उन दोनों के सामने स्नैक्स की प्लेट रख दी..

मीठी ने प्लेट की तरफ देखा भी नहीं लेकिन रियाल कुछ थोड़ा बहुत खाते हुए बातों में लगी थी…
उसी समय शौर्य वहाँ चला आया..
एक कुर्सी खींच कर वो वहीँ बैठ गया..

“क्या हुआ मीठी, कुछ खा क्यों नहीं रही.. ?”

“बस भूख नहीं है !”

“या कोई और बात है ?” शौर्य ने भेद भरी नजर से मीठी की तरफ देखा.. मीठी ने एक ठंडी सी आह भरी और अपना मोबाइल देखने लगी.. 

कली एक कुर्सी पर अकेले बैठी थी.. मीरा उसी के साथ थी, लेकिन वो वेटर की लेकर आयी प्लेट से संतुष्ट नहीं थी…।
एक प्लेट में एक ज़रा सी अजीबोगरीब डिश, खाने में ज़रूर स्वाद था लेकिन एक टुकड़ा खा कर फिर बैठे रहो.. यही सोच मीरा अपनी स्नेक्स की प्लेट परोसने चली गयी थी…।

अकेली बैठी कली के पास विक्रम चला आया..

“लिटिल मास्टर वहाँ है, तो तुम यहाँ क्या कर रही हो ?”

“मतलब ?”

“हद है.. हर बात समझानी पड़ती है तुम्हे.. अरे अगर उनके आसपास नहीं रहोगी तो उन्हेँ तुम्हारे मन की भावनाये समझ में कैसे आएंगी..।
और फिर एक एक कर दिन बीतते जा रहे हैं, ऐसे तो  तुम्हारे वापस लौटने का दिन आ जायेगा.. फिर क्या लिटिल मास्टर से बिना कुछ बोले चली जाओगी.. !”

“तुम्हारे लिटिल मास्टर के पास मेरे लिए वक्त ही कहाँ है ?”

“ये बात तो सच है.. वो दूसरों के मसले सुलझाने में इतना व्यस्त रहते कि अपने मामले भूल ही जाते.. वैसे मैंने उन की आंखो मे मोहब्बत देखी है..।”

“मैंने तो नहीं देखी..।”

“तुम देखने की कोशिश भी तो नहीं करती ?”

कली आंखे फाडे विक्रम को देखने लगी..

“ऐसे ना मुझे तुम देखो… आगे का नहीं गाऊंगा क्यूंकि आगे का हिस्सा लिटिल मास्टर के लिए है..
जाओ जल्दी, वरना कोई और तुम्हारी कुर्सी ना खींच लें !”

इस सब में एक तरफ खड़े अपूर्व की नजर भी उन सब पर बराबर थी..

क्रमशः

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Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Nice n Very good and superb part

Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
1 year ago

ये लिटिल मास्टर, इंडिया गॉट चैंपियन बनने लायक हैं और हर्ष उनको जज करेंगे क्यूंकि दोनों गुणी हैं, राजा और बांसुरी के संवाद धारावाहिक सीजन १ की याद दिला जाती है पर रियाल मिठी के मन को अब तक समझ नहीं पा रही है, ना शौर्य समय दे पा रहा है आख़िर ये हो क्या रहा है, मुझे उनका मिलन मुश्किल लग रहा लेकिन पढ़कर पता चलेगा, तब तक के लिए नाइस पार्ट दीदी 💐💐🙏👍

Jayshree Bhargava
Jayshree Bhargava
1 year ago

❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️ अच्छा जी आप इमोशनल ब्लैक मेल करेंगी अब …की आप समीक्षा दो या ना दो मैं तो दूंगी ही
आप हम पाठकों को बच्चो की तरह ही ट्रीट करते हो तो हम भी तो मां की तरह आपको ग्रीट करेंगे🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
बस अम्मा एक गुजारिश है अगले भाग में पूरा गाना सुना देना…..

तेरे दिल से ऐ दिलबर दिल मेरा कहता हैं
प्यार के दुश्मन लोग मुझे डर लगता रहता हैं
अरे तेरे दिल से ऐ दिलबर दिल मेरा कहता हैं
प्यार के दुश्मन लोग मुझे डर लगता रहता हैं
थामलो तुम मेरी बाहें मै तुम्हे सम्भालूंगा
तुमको मैं चुरा लूँगा तुमसे दिल में छुपा लूंगा
ऐसे न मुझे तुम देखो सीने से लगा लूंगा
तुमको मैं चुरा लूँगा तुमसे दिल में छुपा लूंगा …..

धीमी धीमी आग से एक शोला भडकाया हैं
दूर से तुमने इस दिल को कितना तरसाया हैं
धीमी धीमी आग से एक शोला भडकाया हैं
दूर से तुमने इस दिल को कितना तरसाया हैं
मैं अब इस दिल के सारे अरमान निकालूंगा
तुमको मैं चुरा लूँगा तुमसे दिल में छुपा लूंगा
ऐसे न मुझे तुम देखो सीने से लगा लूंगा
तुमको मैं चुरा लूँगा तुमसे
दिल में छुपा लूंगा ….…

प्यार के दामन में चुनकर हम फूल भर लेंगे
रास्ते के कांटे सारे दूर कर लेंगे
उ हू उ हं हं हं
प्यार के दामन में चुनकर हम फूल भर लेंगे
रास्ते के कांटे सारे दूर कर लेंगे
जानेमन तुमको अपनी मैं जान बना लूंगा
तुमको मैं चुरा लूँगा तुमसे दिल में छुपा लूंगा
ऐसे न मुझे तुम देखो सीने से लगा लूंगा
तुमको मैं चुरा लूँगा तुमसे
दिल में छुपा लूंगा ………

और बस इस गाने के बाद आप जिसको जिसको मिलवाना चाहे हम तो सबमें राजी है❤️🫣🫣
अब आज हमारे apple of eye तो आपने दिखा ही दिए वीकेंड अच्छा बीत जाएगा😊😊😊

Manu verma
Manu verma
2 years ago

बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻⭐⭐⭐⭐⭐💐💐💐