जीवनसाथी -3 भाग -58

शाम की रंगीनियां शुरू हो गयी थी… महल के एक बड़े से दीवानखाने एमरेल्ड को दुल्हन की तरह सजाया गया था..
उस दीवानखाने का एक हिस्सा खुले हुए गार्डन में था..
उस गार्डन में भी रंगीन चांदनी चंदोबा लगा कर सजा दिया गया था..
दूर दूर पर बड़े बड़े फाउंटेन लगे थे जो संगीत की स्वरलहरी के साथ उठ गिर रहे थे…
युवराज ने सारी व्यवस्था देखने के बाद रूपा को बुलवा भेजा..!
“देख लीजिये आप भी, कही कोई कमी तो नहीं रह गयी ना ?”
रूपा सब कुछ देख कर खुश थी.. आज उसकी ख़ुशी का ओर छोर ना था.. आज उसके बेटे की सगाई की घोषणा होनी थी.. वैसे तो उसने इतनी तैयारी रखी थी कि उसी समय अंगूठियां भी बदलवा दे..
लेकिन शौर्य ने उसे टोक दिया था..
और कोई टोकता तो वो ध्यान भी नहीं देती… बांसुरी की बात पर उसने कान कहाँ दिया था..।
बांसुरी ने भी तो यही कहाँ था कि एक बार हर्ष से पूछे ले लेकिन रूपा को ज़रूरत नहीं लगी थी। लेकिन उसके लाङले शौर्य का टोकना वो नजरअंदाज नहीं कर सकती थी…
आखिर शौर्य में उसके प्राण बसते थे…।
शौर्य ने उसे कहा था कि आप एक बार हर्ष भाई से बात तो कर लो..
बस यही बात रूपा के मन को खटक गयी थी। इसलिए सीधे सगाई करवा देने की जगह उसने पहले घोषणा करने का सोचा था…
सारी साज सजावट देख कर वो संतुष्ट होकर अपने कमरे में चली गयी..
शाम रोशन हो रही थी.. एक तरफ ओर्केस्ट्रा पर कोई बहुत प्रसिद्ध गायक अपनी टीम के साथ परफॉर्मेंस देने वाला था..
ओर्केस्ट्रा की टीम उसी तैयारी में लगी थी..
एक एक कर लोग आने लगे थे..
महल के लोगो का भी आना शुरू हो चुका था…
समर प्रेम के साथ गया हुआ था, इसलिए उन दोनों का आना मुश्किल था लेकिन रूपा अपनी प्रिय डॉक्टर पिया को बुलाना नहीं भूली थी..
पिया अब अपना खुद का अस्पताल चलती थी.. ऐसे में उस पर भी काम का बहुत बोझ था, लेकिन शोवन उसके साथ सब कुछ संभाले हुए था। पिया आज अस्पताल से थोड़ा जल्दी ही घर लौट आई थी। और उसने शोवन को भी पार्टी के कारण जल्दी ही बुला लिया था। दोनों ही सज धज कर तैयार होकर पार्टी के लिए निकल चुके थे। हालांकि धनुष के बारे में पिया को मालूम था, वो पूरी तरह से अपने पिता की प्रतिलिपि था…।
उसका जब जहाँ जिस वक्त जाने का मन करता तभी जाता..।
इसलिए पिया शोवन को अपना बच्चा और धनुष को सैम का बच्चा ही कहती थी..।
वो दोनों जब तैयार होकर निकले उस वक्त भी धनुष घर पर मौजूद नहीं था, शोवन ने उसे फ़ोन कर सीधे महल पहुंचने को बोल दिया और खुद ड्राइविंग सीट पर बैठ अपनी मॉम को साथ लिए निकल गया..
महफ़िल सजने लगी थी..
शौर्य और हर्ष पहुँच चुके थे..
महल की रॉयल लेडीज़ भी पधार चुकी थी..।
सभी ने अपना राजसी पोशाक ही पहना था..
बांसुरी वैसे पोशाक कम ही पहनती थी, लेकिन रूपा का मन था कि वो सभी पोशाक ही पहने..
बहुत हलके पीच रंग की पोशाक के साथ मोती का सेट पहने बांसुरी अब भी नवविवाहिता ही लग रही थी…।
राजा साहब अपने कार्यालय में व्यस्त थे, उन्हेँ आने में वक्त था.. !
रूपा और युवराज के मेहमान भी आने लगे थे..!
मीरा दो घंटे में अपने चेहरे को लीप पोत कर अब भी संशय में थी कि कुछ लगाना रह तो नहीं गया..।
कली ने ज्यादा कुछ नहीं किया था..।
वो काफी देर तक तो यही सोचती बैठी रही कि माँ का गिफ्ट किया ड्रेस पहने या बेटे की सौगात साडी…
फिर उसने लॉन्ग ड्रेस ही उठा ली..
उसके बाल बिलकुल सीधे थे.. वो जब कपडे बदल कर आयी तब उसे देख मीरा चौंक गयी..
“ज़रा जल्दी कर लो.. वरना लेट हो जायेंगे..
“मैं तो तैयार हूँ !”कली ने कहा
“अरे ऐसे कैसे.. इधर आओ… !”
कली के बार बार मना करने पर भी मीरा की उँगलियाँ कुलबुलाने लगी और आईने के सामने उसे बैठा कर मीरा ने अपनी कारीगरी दिखा दी..।
कली के बालों को हल्का सा कर्ल कर उसने खुला छोड़ दिया और चेहरे पर खूबसूरती से मेकअप कर दिया..
कली ने खुद को देखा और पहचान नहीं पायी..
वाकई मीरा की उंगलियों ने कमाल कर दिया था..
” वाह.. मीरा.. थैंक यू.. !”
मीरा ने मुस्कुरा कर सर हिला दिया.. -“अब चले.. मुझे थोड़ी सी भूख भी लगने लगी है !”
“हम्म !” मुस्कुरा कर कली ने हामी भर दी..
कली और मीरा कमरे से बाहर निकले और उनका रास्ता देखता खड़ा लड़का उनके बाहर आते ही सतर खड़ा हो गया..
“आइये मैम !”
वो उन लोगो को साथ लिए दीवानखाने की तरफ निकल गया….
मीठी और रियाल भी वहाँ पहुँच ही रहे थे…
रियाल ने मीठी का हाथ पकड़ रखा था और बिलकुल ऐसा अभिनय कर रही थी, जैसे उसे किसी का डर हो.. ..
मीठी ने भी उसका हाथ थाम रखा था.. वो लोग जैसे ही दीवानखाने में प्रवेश करने लगे हर्ष मीठी का स्वागत करने चला आया…
“वेलकम मीठी… तुम्हारा भी स्वागत है रियाल !”
मीठी मुस्कुरा उठी और रियाल मीठी से जरा और सट गयी..
हर्ष ने उन्हेँ अंदर आने का इशारा किया और उधर से गुज़रते वेटर को बुला कर वेलकम ड्रिंक के लिए पूछ लिया.. मीठी ने मना कर दिया..
उसी समय वहाँ पहुंची कली और मीरा में से मीरा ने फटाफट ड्रिंक ले लिए..।
एक दूजे को देख मीठी और कली भी प्रसन्न हो गए..।
वो दोनों एक दूसरे से मिल रहे थे कि किसी ने पीछे से आकर मीठी की आंखे बंद कर दी..
मीठी चौंक गयी कि इस वक्त कौन उसकी आंख बंद कर सकता है..
वो धीरे से उन हाथो को छू कर जानने का प्रयास करने लगी..
“परी !” उसने उन हाथों को हटाते हुए कहा और पल में परी सामने चली आयी.. मीठी और परी एक दूसरे के गले से लग गए..
“सुबह से कहाँ थी ?”
“महल में ही नहीं थी… कॉलेज फ्रेंड्स के साथ दो दिन का एलुमनाई प्लान हुआ था, बस कल से वहीँ थी.. फिर आज रानी माँ ने बुलवा लिया.. !”
परी को देख कली भी उसे पहचान गयी..
परी भी कली को पहचानने की कोशिश कर रही थी…
“तुम्हे कहीं देखा है.. !”
“लंदन में !”
“ओह्ह.. हाँ.. क्या अजब इत्तेफाक है.. !” मुस्कुरा कर परी ने अपना हाथ कली की तरफ बढ़ा दिया….
कली भी मुस्कुरा कर उससे मिल रही थी कि पिया के साथ शोवन चला आया..
शोवन को देखते ही हर्ष ने उसे हाथ देकर अपने पास बुला लिया..
वो लजाता शर्माता सा उन लोगो तक आ गया..
“ओह्ह माय माय !! कौन है ये हैंडसम अंग्रेज ?” मीरा धीरे से फुसफुसा कर बोल पड़ी, बाकियों को तो नहीं कली को सुनाई दे गया..
उसने मीरा की तरफ देखा और मीरा ने अपने होंठो पर ऊँगली रख ली.. -“सॉरी !”
हर्ष अपनी सारी मण्डली को लेकर एक तरफ बढ़ गया.. आज बहुत दिनों बाद सारे लोग मिले थे..
एक बड़े से गोल टेबल को घेर कर सब लोग बैठने लगे.. मीठी के एक तरफ कली बैठ चुकी थी, उसके दूसरे तरफ की खाली कुर्सी पर हर्ष बैठने जा रहा था कि “एक्सक्यूज़ मी ” कहती रियाल ने कुर्सी खींची और खुद बैठ गयी..।
हर्ष मुस्कुरा कर दूसरी तरफ जाकर मीठी के ठीक सामने पड़ने वाली कुर्सी पर बैठ गया..।
उसके बाजु में शोवन बैठा था..। शोवन के बगल की कुर्सी पर सबकी नजर बचाती परी बैठ गयी..
कली और परी के बीच में मीरा बैठी थी..।
कली की नजर शौर्य को ढूंढ़ रही थी और मीरा की नजर वेटर को, जो स्नैक्स सर्व कर रहा था..।
हर्ष को मीठी के बाजु में बैठने नहीं देकर रियाल को लगा जैसे वो जीत गयी है..
उसने मुस्कुरा कर हर्ष की तरफ देखा और उसे छेड़ने के लिहाज़ से बोल पड़ी..
“वो आये हमारे करीब, और आकर चल दिए
उन्होंने मुहब्बत में दिए ज़ख्म जो हमने सिल दिए.. !!”
रियाल के इस शेर का आगा पीछा ना समझ आने के बावजूद परी ने वाह वाह कर दिया..
” बहुत खूब.. आप तो शायरा निकली.. वैसे हमारे हर्ष भाई भी कुछ कुछ कह लेते हैं.. हम तो बस बॉलीवुड प्रेमी है, गाने ही गुनगुना लेते है.. ! जैसे बाजीगर का ये गीत…
ये नीली नीली ऑंखें तु रु रु तु रु रु,
ये गोरे गोरे गाल, ये तीखी तीखी नजरे, ये फैंटम जैसी चाल.. !”
परी ने शोवन पर अपना गाना गया और उसके गाने को पीछे से आकर पूरा कर दिया..
“देखा जो तुझे हैंडसम, हुआ है बुरा हाल !” यश की आवाज़ सुन परी ख़ुशी से चहक कर खड़ी हो गयी..
यश ठीक उसके पीछे खड़ा था..
परी चहक कर अपने लाड़ले भाई के गले से लग गयी..
“तुम कब आये ?”
“बस अभी महल पहुंचा और पता चला रानी माँ की पार्टी चल रही.. तो सीधे यही लैंड हुआ हूँ..।
और हैंडसम डॉक्टर साहब क्या हाल हैं आपके !”
शोवन से गले मिलते हुए उसका हाल चाल पूछ कर यश हर्ष के पैर छूने झुक गया..।
हर्ष ने उसके सर पर हाथ रखा, और यश गोल घूम कर मीठी के पास चला आया उसके पैरो के पास झुकने का प्रयास करते गए धीरे से बोल गया..” प्रणाम भाभी सा” मुस्कुरा कर उसने हर्ष की तरफ देखा और हर्ष ने उसे आंखें दिखा कर अपने पास बुला लिया..
मीठी ने चौंक कर अपने पैर सिकोड़ लिए..
“यश मेरे पैर क्यों छू रहे हो ?”
“अरे सॉरी गलती से हो गया मीठी..।
पता नहीं किसी चमत्कारी शक्ति से हर्ष भाई के पैर छूने के बाद मेरे हाथ तुम्हारी तरफ क्यों बढ़ गए.. !”
यश एक एक कर सबसे मिलते हुए कली और मीरा तक पहुँच गया..
कली से मिलने के बाद उसने मीरा की तरफ देखा..
“आपकी तारीफ ?”
“तारीफ के लायक इनमें कुछ नहीं है !” धीरे से पीछे आकर खड़ा हुआ धनुष बोल गया.. उसकी आवाज़ सुनते ही मीरा ने पलट कर देखा और धनुष को आया देख उसका मुहं बन गया..।
” तुम यहां भी?”
धनुष को हंसी आ गयी..
धनुष ने बड़ी विनम्रता से अपना सर झुका कर उसे देखा और एक कुर्सी पकड़ कर बैठ गया..
“पेरिस नहीं जा पायी थी, तो क्या मॉडलिंग से सन्यास ले लिया ? “
“नो नेवर !”..
“जिस ढंग से हर आते जाते वेटर पर हाथ मार रही हो.. इसी स्पीड से खाती रही ना, तो हम बच्चो को डायनोसोर वापस इसी ईरा में देखने मिल जायेगा.. लम्बी तो पहले ही बहुत हो.. चौड़ी भी होने ही लगी हो.. !”
सबसे बचा कर धनुष ने एकदम धीमे से कहा लेकिन मीरा के साथ कली ने भी सुन लिया..
हालाँकि उसने अपनी हंसी दबा ली..
धनुष भी जाकर हर्ष के एक तरफ बैठ गया..।
“हर्ष भाई अब आप भी एक तड़कती फड़कती सी शायरी सुना ही दो..
हर्ष ने मुस्कुरा कर धनुष की तरफ देखा..
“तू मेरे इश्क को समझ जाये,
ये मेरे प्यार की कदर होगी
दुनिया को मेरा हाल ए दिल मालूम है,
जाने तुझे कब खबर होगी..
तेरे पास रहूं तो मुझको
सुकून मिलता है लेकिन
तू सामने हो तो हर वक्त,
हर कहीं, तुझ पे ही नजर होगी.. !”
“वाह वाह.. वाह बड़े भाई… आप शायरी में भी हम सबके बॉस हैं.. !”
धनुष तालियां बजाने लगा.. हर्ष ने अपनी गहरी नजर से रियाल की तरफ देखा, उसका चेहरा लटक गया था. ।
बात तो सही कही थी हर्ष ने.. अगर वो मीठी के पास बैठता तो उतनी आसानी से उसे देख नहीं पाता, जितने आराम से अब देख पा रहा था..।
सभी लोग एक दूसरे को गाने के लिए बोलने लगे..
सभी मीठी पर ज़ोर देने लगे..
और मीठी ने गाना शुरू किया..
क्रमशः
aparna..

हर्ष के मीठे बोल से रियाल का रेट गिर रहा है पर मज़ा आया धनुष आ गया मीरा के रोकथाम के लिए, आज तो bM फूटेगा कौन महफ़िल लूटेगा, पढ़ने के लिए आतुर हूं थोड़ी देर में, बहुत बेहतरीन भाग दीदी…💐🙏
बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌
कली को देखो कितनी समझदार है साड़ी का रेट सुनकर नहीं ली, ये जानते हुए भी कि उसे पेमेंट नहीं करनी है और दूसरी तरफ मीरा ने कोई कसर नहीं छोड़ी सब सब बाँध लो पोटली में 😄।
ओहो… क्या बात है शौर्य ने कली से दोस्ती का हाथ बढ़ाया है, चलो किसी ने तो पहल की, अब क्या पहनकर जाएगी कली पार्टी में 🤔बांसुरी का पसंद किया गाउन या शौर्य की दी साडी.. 🤔।
🙄😲रियाल क्या गेम खेल रही है, मीठी को झूठ बोलकर हर्ष के लिए उसके मन में जहर भर रही,कहीं मीठी गलतफहमी का शिकार ना हो जाए 🤦♀️।
वासुकी आ ही गया इंडिया, वासुकी शायद सोच रहा…
पिछले दिनों ज़िन्दगी मिली
उलझने उसमें बहुत थी
थोड़ी परेशानी थी,
थोड़ी हवा अंदर खिंचकर
मैंने सांस ली
और मैं जी गया।
जिस बात के लिए वासुकी इंडिया से चला गया वो सब फिर उसके सामने होगा,
देखते है आगे क्या होता है।
बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌👌👌🙏🏻।