जीवनसाथी -3 भाग -54

कहीं ना कहीं इतिहास खुद को दोहरा रहा था..
एक वक्त था जब राजा अजातशत्रु के साथ बांसुरी भी इसी तरह महल रवाना हुई थी। और तब तक उसे भी कहां मालूम था कि राजा सिर्फ नाम का नहीं बल्कि असल जिंदगी का भी राजा है..।
जिस वक्त बांसुरी को यह बात मालूम चली थी, तब वह भी चकित रह गई थी। लेकिन उससे कहीं ज्यादा आश्चर्यचकित थी कली, क्योंकि कली ने आज तक शौर्य को सिर्फ एक सामान्य सा लड़का समझा था। उसके लिए वाकई यह बहुत बड़ी बात थी कि एक इतना प्रसिद्ध और इतना रईस राजकुमार उसके साथ बिल्कुल एक आम लड़के की तरह जीवन जी रहा था..।
कली के मन में शौर्य के लिए मोहब्बत तो बहुत पहले ही जाग गई थी, लेकिन अब जो सम्मान जागा था, उसके बाद कली चाह कर भी नजर भर कर शौर्य को देख नहीं पा रही थी।
उसकी नजर जब जब शौर्य पर पड़ती उसे लगता आगे बढ़कर इस इंसान के पैर छू ले, जिसने उसकी रूह को छू लिया था…।
कुछ आगे बढ़ने पर शौर्य की गाड़ी में लगे फोन में घंटी बजने लगी..
शौर्य ने फोन उठा लिया, कुछ देर बात करने के बाद उसने फोन रख दिया। कली शौर्य की तरफ देख रही थी, लेकिन उसने कुछ नहीं पूछा। पर मीरा चुप बैठने वालों में से नहीं थी। उसने कूद कर अपना सवाल शौर्य से पूछ लिया
“किसका फोन था.. ?”
“ड्राइवर का..”
शौर्य भी मीरा का स्वभाव समझता था, इसलिए जितना मीरा ने पूछा उतने का जवाब देकर वह चुप हो गया। मीरा ने झल्ला कर आगे का सवाल भी पूछ लिया।
” क्या बोल रहा था ड्राइवर..?”
” ड्राइवर के पास डैड के गार्ड का फोन आया था। हमें आगे किसी जगह पर थोड़ी देर इंतजार करना पड़ेगा ।हर्ष भाई भी रियासत जाने के लिए ही निकले हैं, और बीच में एक जगह वह हम लोगों को ज्वाइन करेंगे ।
उसके बाद वहां से हम सारे लोगों का काफिला एक साथ चलेगा.. ।”
“ओह्ह ओके !”
शाम ढलने लगी थी और अभी उन्हें रियासत पहुंचने में वक्त था। ड्राइवर ने गाड़ी एक तरफ करके रोक ली। शौर्य उतरकर अपनी मां के पास चला गया। उसके पीछे मीरा भी उतर कर चली गई। पर जाने किस संकोच में गड़ी कली उतरकर नहीं जा पाई।
वह चुपचाप गाड़ी में ही बैठी रही। ड्राइवर गाड़ी में ही था इसलिए उसे अकेले बैठने में कोई असुविधा नहीं हुई। कुछ देर बाद हर्ष का काफिला भी वहां पहुंच गया। हर्ष के वहां पहुंचते ही बाहर चहल-पहल सी होने लगी। कली को लगा कि उसे उतर कर शौर्य के बड़े भाई से मिल लेना चाहिए। बहुत संकोच के साथ वो धीरे से गाड़ी से उतर गई।
दूर खड़ा राजसी परिवार आपस की बातचीत में लगा हुआ था। उसे उन तक पहुंचने में भी संकोच सा लग रहा था। कैसे जगमगाते हुए लोग थे यह सब, और वह कितनी आम सी लड़की।
क्या शौर्य कभी भी उसके लिए अपने मन में वही भाव ला पायेगा, जो वह ला चुकी है..।
वो शौर्य को देखते हुए और मन ही मन यह सब सोचते हुए आगे बढ़ रही थी कि तभी उसके कान के पास आकर विक्रम धीरे से गुनगुना गया..
दुनिया मांगे अपनी मुरादे, मैं तो मांगू साजन।
रहे सलामत मेरा सजना और सजना का आंगन
इसके सिवा दिल रब से कुछ भी चाहे ना।
ये पगला है समझाने से समझे ना!
दिल दिवाना बिन सजना के माने ना।
विक्रम कि इतने दिनों में जो धीर गंभीर सी छवि थी उसके कारण कली उसका मान करने लगी थी।
और वह आजकल अक्सर कली को शौर्य के नाम से छेड़ जाता था। जब से कली को मालूम चला की विक्रम और कोई नहीं बल्कि शौर्य का सबसे खास बॉडीगार्ड है, तब से कली को भी विक्रम भाने लगा था। वह हल्के से मुस्कुरा कर रह गई, और तभी शौर्य ने उसे हाथ हिला कर अपने पास बुला लिया।
हामी भरकर धीरे से कली उस तरफ बढ़ गई। उन लोगों के पास पहुंचते ही सामने खड़ी बांसुरी हर्ष और बाकी लोगों को देखकर वह सिमट कर एक तरफ खड़ी हो गई।
शौर्य एक-एक कर उसे सबसे मिलवाने लगा। हर्ष धनुष और मीठी से मिलवाने के बाद वह रियाल की तरफ देख कर चुप रह गया… रियाल से मीठी ने कली का परिचय करवा दिया..
बातचीत के बीच सब इस बात पर भी चर्चा करने लगे की रात घिरने लगी है, ऐसे में रात कहीं रुक कर सुबह रियासत के लिए निकल जाए तो कैसा रहेगा।
लेकिन राजा साहब को सुबह तक रियासत पहुंचना बहुत जरूरी था। इसलिए वह किसी भी हाल में नहीं रुक सकते थे। लेकिन जब बांसुरी ने देखा कि बच्चों का रुकने का मन है तो उसने उन लोगों के सामने यह प्रस्ताव रख दिया कि वह और राजा साहब कुछ गार्ड्स के साथ निकल जाएंगे, और बाकी सारे बच्चे आसपास कोई अच्छा होटल देखकर रुक जाए।
लेकिन शौर्य और हर्ष दोनों ही इस बात के लिए राजी नहीं हुए। उन दोनों का यही सोचना था कि वह लोग राजा साहब के साथ ही जाएंगे…।
वहां जितने गार्ड्स थे, सभी को ड्राइविंग आती थी। इसलिए यह तय हो गया कि आधी आधी देर अलग-अलग गार्ड्स ड्राइव कर लेंगे। और इस तरह वह रात भर का सफर तय कर सुबह-सुबह रियासत पहुंच जाएंगे।
वहीं ढाबे में थोड़ा बहुत कुछ खा पीकर वह सारे लोग एक बार फिर गाड़ियों में सवार हो गए और यह सारा काफिला रियासत की तरफ बढ़ गया…।
कुछ दूर चलने के बाद गाड़ियों में हल्का म्यूजिक लगा दिया गया था.. ।
कली जो हर वक्त बेमतलब की ढेर सारी बातें कह जाती थी, आज कुछ कह ही नहीं पा रही थी। उसके मन में ढेर सारा कुछ कुलबुला रहा था, जो वह शौर्य से कहना चाहती थी, अपने मन की हर बात उससे बांटना चाहती थी..
लेकिन आज वह कुछ नहीं कह पा रही थी। और शौर्य उसकी इस तकलीफ को समझ पा रहा था। शौर्य ने कली की तरफ देखा, कली उसे ही देख रही थी। लेकिन जैसे ही शौर्य ने उसे देखा, कली बाहर की तरफ देखने लगी।
वो भी मुस्कुरा कर दूसरी तरफ की खिड़की पर नजर टिका कर बैठ गया।
कुछ देर बाद अपनी साइड बकेट में पड़ी मैगजीन उठाकर शौर्य उसके पन्ने पलटने लगा। उसके एक पन्ने पर शौर्य की तस्वीर आई हुई थी।
शौर्य ने मैगजीन पर लगी अपनी उस तस्वीर को कली को दिखाना चाहा, लेकिन फिर कुछ सोच कर उसने उस तस्वीर को ना कली को दिखाया और ना मीरा को
बस चुपचाप उस तस्वीर के नीचे लिखे लेख को पढ़ने लगा।
यह कोई इंटरनेशनल बिजनेस मैगजीन थी, जिसमे एक लेख छपा था जो फिलहाल पिछले महीने टेक्सास में हुए “इंटेरनेशनल बिज़नेस आईडिया एक्सपो ” में शामिल हुए युवा बिजनेस टायकूंस के विचारों पर आधारित थी।
उस मीट में सबसे ज्यादा प्रशंसा शौर्य के आईडिया की ही की गई थी…
शौर्य ने वहां पर जो भाषण दिया था, उसे इंटरनेशनल बिजनेस चैनल और न्यूज़ चैनल पर भी दिखाया गया था! इत्तेफाक की बात थी कि एक रात जब कली टीवी चला कर चैनल बदल रही थी, तब अचानक वह न्यूज़ चैनल भी टीवी पर चला आया था जिसमें शौर्य के भाषण की झलक दिखाई जाने वाली थी।
वह तो इत्तेफाक से शौर्य खुद वहीं बैठा था और उसने कली के हाथ से रिमोट छीन कर दूसरा चैनल लगा दिया था। वरना उसी रात कली को मालूम चल जाता कि शौर्य असल में कौन है?
शौर्य और कली के जीवन में इन चार दिनों में इतनी ढेर सारी यादें भर चुकी थी कि दोनों के दिल दिमाग बस एक दूसरे में ही खोए हुए थे। बावजूद दोनों में से कोई भी एक, दूसरे से आगे बढ़कर यह बोलने की ज़हमत नहीं उठा रहा था कि वह एक दूसरे को पसंद करने लगे हैं। जहां एक तरफ कली यह सोच सोच कर परेशान थी कि एक इतनी बड़ी रियासत का राजकुमार क्यों उसे पसंद करेगा?
वहीं दूसरी तरफ शौर्य यह सोचकर परेशान था कि वह आज तक कली को झूठ बोलता आया है और क्या इस झूठे नवाब को एक प्यारी और मासूम सी लड़की स्वीकार कर पाएगी?
दोनों अपने ख्यालों में गुम थे। कुछ देर बाद कली ने खिड़की पर लगे कांच में अपना सर टिकाया और उसने आंखें बंद कर ली। गाड़ी बहुत आरामदायक थी। बाहर के झटके अंदर महसूस भी नहीं हो रहे थे। ऐसा लग रहा था वह लोग अपने ही घर के बिस्तर पर अधलेटे से पड़े हैं। सभी की सीट्स पीछे सुविधाजनक ढंग से झुकाई जा सकती थी। और इस पोजीशन में रखने के बाद सभी अपनी सीट्स पर आराम से बैठे बैठे ही सो गए थे…।
मीरा के बगल की सीट में कली थी, और कली के सामने शौर्य।
शौर्य के बगल में विक्रम बैठा था। विक्रम की आंखों में नींद नहीं थी। पता नहीं यह लड़का मिट्टी से बना था या पत्थर से। लेकिन वह हर वक्त इस कदर चौकन्ना रहता था कि शौर्य को हवा भी बिना उसकी मर्जी के उसे छू न पाए..।
वह बस यही सोच कर परेशान था कि पता नहीं उससे कहां चूक हो गई जो बनारस के घाट पर शौर्य को गोली छूकर निकल गई।
शौर्य विक्रम से पहली बार मिल रहा था और अब उसे मालूम चला था कि उसके समीर चाचू ने उसके पीछे विक्रम को लगा रखा था। विक्रम को यह ताकीद भी कर दी गई थी कि शौर्य को किसी तरीके से भी पैसों की कोई कमी ना हो। इसलिए जब-जब जहां शौर्य और कली गए थे, वहां विक्रम किसी न किसी तरह से मौजूद जरूर रहता था। जब-जब शौर्य को पेमेंट करने की जरूरत पड़ी, विक्रम पहले ही वहां पहुंच जाता। लेकिन हर बार कली पैसे देकर शौर्य को पैसे देने से रोक लिया करती थी…..
विक्रम भले ही शौर्य के साथ महल के लिए निकल गया था लेकिन उसने अपनी टीम और लड़कों को बनारस का चप्पा चप्पा छानने भेज दिया था।
वह जानता था कि यह एक पुलिस केस था और इस बारे में उन लोगों ने एफ आई आर दर्ज भी करवा दी थी लेकिन उसे पूरा भरोसा था कि उन लोगों के बनारस छोड़ने के बाद वहां की पुलिस भी कुछ खास छानबीन शायद ही कर पाए..
और इसीलिए वह अपने स्तर पर यह जांच करवा लेना चाहता था कि आखिर शौर्य पर गोली जानबूझकर किसी ने चलाई है या वाकई यह धोखे से लगी गोली थी…।
शौर्य भी सो चुका था, सामने बैठी मीरा और कली भी नींद में थी।
विक्रम ने जब देखा यह तीनों सो चुके हैं, उसने अपने बैग में से लैपटॉप निकाला और किसी जरूरी काम में व्यस्त हो गया…।
भोर होने लगी थी चार साढे चार का वक्त था। जिस वक्त रियासत के शुरुआती गांव में गाड़ियों का काफिला दाखिल हुआ।
विक्रम ने फटाफट अपने लैपटॉप को शटडाउन किया और बैग में वापस डाल लिया..।
पानी का बोतल निकाल कर वह पी रहा था कि तभी शौर्य की भी नींद खुल गई। उसने मुस्कुरा कर शौर्य की पानी की बोतल उसकी तरफ बढ़ा दी ।शौर्य ने विक्रम से पूछा कि वह लोग कहां पहुंच गए हैं ,और विक्रम ने उसे बता दिया की रियासत में दाखिल हो चुके हैं।
रियासत का यह पहला ही गांव था और इन ग्रामवासियों को मालूम हो चुका था कि उनके लाडले राजकुमारों का काफिला उनके दिल अजीज राजा साहब के साथ आ रहा है..
आज भी रियासत में मौजूद हर एक गांव, राजा अजातशत्रु और रानी बांसुरी को भगवान की तरह पूजता था। उनके लिए राज अजातशत्रु सिंह बुंदेला स्वयं श्री राम की परछाई से थे, और रानी बांसुरी माता जानकी।
इन दोनों ने वाकई अपने रियासत के लोगों से उतना ही प्यार किया था। रानी बांसुरी ने भले ही अपने पारिवारिक उत्तरदायित्वों के कारण अपनी नौकरी छोड़ दी थी। लेकिन उसके बाद उन्होंने पूरा समय अपनी रियासत
मैं मौजूद हर एक गांव की हर एक औरत और बालिका की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली थी। उन औरतों को मिला-जुला कर बांसुरी ने एक एनजीओ बनाया था जिसे राजा अजातशत्रु का वरदहस्त प्राप्त था..।
और उस संस्था में हर औरत को उसकी काबिलियत के अनुसार काम दिया जाता था। अब गांव में कोई औरत ऐसी नहीं थी जो खाली बैठी थी। हां जो अपनी मर्जी से उस संस्था में शामिल नहीं होना चाहती थी उनके लिए किसी प्रकार की कोई बाध्यता ना थी।
हल्का-हल्का सा उजाला होने लगा था। गाड़ी थोड़ा और आगे बढ़ी और एक-एक करके गाड़ियों के काफिले को रुकना पड़ गया।
यह रियासत का एक तरह से प्रवेश द्वार था। और इसीलिए यहां पर आसपास के गांव के लोग बड़ी संख्या में स्वागत के लिए उपस्थित हो चुके थे। गाड़ी के रुकते ही झटके से कली की भी नींद खुल गई। उसने देखा गाड़ी का रूफ खुला हुआ था और शौर्य का चेहरा गाड़ी से बाहर की तरफ निकला हुआ था। कली को एकदम से समझ में नहीं आया कि वह कहां है? और यह सब क्या हो रहा है? उसने आंखें मलते हुए विक्रम की तरफ देखा..
” हम सब रियासत पहुंच चुके हैं, यह रियासत का पहला ही गांव है, और गांव की जनता हमारे हुकुम के स्वागत के लिए आई हुई है..।”
“क्या मैं देख सकती हूँ !”
कली के मासूम से सवाल पर विक्रम ने मुस्कुरा कर उसे बाहर निकलने का इशारा कर दिया। कली धीरे से दरवाजा खोलकर बाहर निकल आई।
बाहर हल्की-हल्की सी ठंड होने लगी थी, उसने अपने स्टॉल से अपने आप को अच्छे से लपेट लिया। गाड़ियों के काफिले के कारण उसे साफ-साफ कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। वह थोड़ा आगे बढ़ी और उसे लोग दिखने शुरू हुए।
वह थोड़ा और आगे बढ़ी और उसकी आंखें उस भीड़ को देखकर आश्चर्य से फैलने लगी। जैसे-जैसे वह आगे बढ़ती गई लोगों का काफिला भी और बढ़ता चला गया। अब तो ऐसा लग रहा था जहां तक उसकी नजर जा रही थी, वहां तक लोगों की भीड़ फैली हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा का पूरा गांव अपने प्रिय राजा साहब के स्वागत के लिए उमङ पड़ा था।
वह आगे बढ़ रही थी कि तभी तेज तेज कदम रखता एक तरह से भागता हुआ शौर्य उस तक पहुंच गया। मुस्कुरा कर उसने कली को देखा और धीरे से एक फुलझड़ी छोड़कर आगे बढ़ गया।
” देख लो, तुम्हारे पहले क्रश के पीछे दुनिया कैसी पागल हुई पड़ी है?”
कली भी मुस्कुरा कर आगे बढ़ गई ।
सारा राजसी परिवार गाड़ी से उतरकर स्वागत के लिए सामने पहुंच चुका था।
बुजुर्ग सी एक महिला ने राजा साहब के माथे पर तिलक लगाया और अपने कांपते हाथों से फूलों की माला उन्हें पहनाने के लिए अपने दोनों छोटे-छोटे हाथ उस तरफ बढ़ा दिए।
लेकिन उनकी ऊंचाई इतनी नहीं थी कि वह राजा साहब तक पहुंच सके। राजा साहब ने मुस्कुरा कर अपनी गर्दन बिल्कुल नीचे झुका ली, और उस बुज़ुर्ग अम्मा ने बड़े लाड से राजा साहब के कंधों पर अपनी माला डाल दी..
अपने दोनों हाथों से राजा साहब के चेहरे की परिक्रमा सी कर उंगलियां अपने माथे पर लाकर फोड़ ली, और फिर अपनी थाली में मौजूद हल्दी और कुमकुम से राजा साहब के माथे पर तिलक खींच दिया।
अपने पास रखें कलश से उसने राजा साहब और रानी बांसुरी की नजर उतारी और अपनी एक तरफ लुढका देने के बाद उसने थाली एक दूसरी महिला को सौंप दी..।
वह महिला उस गांव की सरपंच थी।
उसने रानी बांसुरी के माथे पर टिका करने के बाद उन्हें माला पहनाई और उनकी आरती उतार ली। एक-एक करके लोग आते गए और रियासत के राजकुमारों को तिलक करके माला पहनाते गए।
कली यह सब देखी हुई खोई सी थी कि तभी अचानक उसे कुछ याद आया..
उसने फटाफट अपने पर्स से अपना मोबाइल निकाल लिया..
और उन अविस्मरणीय पलों को अपने कैमरे में कैद कर लिया।
अपने सर पर एक हाथ रख आंखें मूंदे सामने को चेहरा झुकाए हुए रानी बांसुरी और उनके माथे पर तिलक लगाते गांव की औरत के मुस्कुराते चेहरे पर सौ वाट का चमकता बल्ब।
राजा साहब का अपनी आधी ऊंचाई तक झुक कर उस बुजुर्ग महिला के हाथों से माला पहनना।
शौर्य और हर्ष का माला पहन कर तिलक लगवाने के बाद वहां सामने खड़े बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेना।
एक-एक दृश्य कली के लिए रोंगटे खड़े कर देने वाला था। उसे आज तक यह लगता आया था कि राज परिवार के बच्चे बिगड़ैल और घमंडी जिद्दी और सनकी हुआ करते होंगे। लेकिन यहां तो दृश्य ही अलग सा था।
इन लड़कों को देखकर कौन कह सकता है कि इनमें संस्कार नहीं है। यह वाकई रॉयल ब्लू ब्लड थे जो उनके हर एक अंदाज से बयां हो रहा था।
कली भाव विभोर सी तस्वीर खींचने में मगन थी, की तभी धनुष उसके पास चला आया..
“एक्सक्यूज़ मी.. आप ऐसे रॉयल फैमिली की बिना परमिशन के उनकी तस्वीर नहीं खींच सकती। उनकी तस्वीरों पर भी कॉपीराइट है। दूसरी बात अगर यह तस्वीर कहीं लीक हो गई तो…
” आई एम सो सॉरी। मुझे पता नहीं था कि मैं ऐसे तस्वीर नहीं खींच सकती।”
” कोई बात नहीं, अब तो मालूम चल गया ना। आप यह तस्वीर डिलीट कर दीजिए।”
” मैं यह तस्वीर किसी से शेयर नहीं करूंगी, प्लीज क्या मै ये तस्वीरे रख सकती हूं?”
” नो, आप नहीं रख सकती। मैं मानता हूं कि आप शौर्य की फ्रेंड है, बावजूद यह हमारे सिक्योरिटी रीजंस के कारण मैं आपसे कह रहा हूं। आप नहीं जानती तस्वीरों से भी कितना ज्यादा बवाल खड़ा हो जाता है। इसलिए प्लीज आप इन तस्वीरों को डिलीट कर दीजिए।”
” ठीक है मैं कर दूंगी।”
“कर दूंगी नही, कर दीजिए! मैं फ्यूचर टेंस में बिलीव नहीं करता, जो करना है प्रेजेंट टेंस में, मेरे सामने कीजिए!”
धनुष के इतने खडूस रवैये को देख कली ने अपने गले से सांस निगली और उसके सामने ही उन तस्वीरों को डिलीट करने लगी। तस्वीर बहुत खूबसूरत आई थी। और उन्हें डिलीट करने का उसका बिल्कुल भी मन नहीं था। उसने वापस अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से धनुष की तरफ देखा, और धनुष ने ना में गर्दन हिला दी।
‘” सोचना भी मत कि आप मुझे ब्राइब करेंगी और मैं आपको इन तस्वीरों को रखने के लिए मान जाऊंगा।”
“मैं ब्राइब करने के लिए आपको नही देख रही थी। मैं तो इसलिए देख रही थी कि जानना चाहती थी कि आप इतने खडूस क्यों है?”
” ऐसा ही हूं मैं। अब चाहे जो सोच लो, बातें बनाना छोड़ो और डिलीट करो। ओके?”
कली ने एक-एक कर वह सारी तस्वीरे डिलीट कर दी।
“अब यह बताओ कि अपनी तस्वीरों को या अपनी गैलरी को कहीं और लिंक तो नहीं कर रखा है? जैसे गूगल ड्राइव या कहीं और?”
” नहीं बिल्कुल नहीं।”
” ऐसा तो नहीं ना कि यहां डिलीट कर दिया और फिर लैपटॉप खोलकर वापस बिन से निकाल कर ले आई..।”
“मेरा लैपटॉप चेक करना चाहते हो..?”
” चाहता नहीं हूं, करूंगा ही। अभी महल में पहुंचने के बाद आपके ड्राइव और क्लाउड दोनों जगह से मुझे यह तस्वीरे डिलीटेड चाहिए।अगर आपने थोड़ी सी भी होशियारी की….
दूर से धनुष को कली से उलझा देखकर शौर्य भाग कर उसके पास पहुंच गया।
” अरे धनुष आराम से मेरे भाई आराम से.. ।”
“कली उस वक्त तुम्हें धनुष से मिलवाया था लेकिन मैं इसका पूरा परिचय देना भूल गया था। यह हमारे महल के जेम्स बॉन्ड है, कभी-कभी इन पर करमचंद की आत्मा आ जाती है। और ज्यादातर वक्त यह ब्योमकेश बख्शी बने रहते हैं।
क्योंकि यह हमारे सुपर स्मार्ट द मोस्ट इंटेलिजेंट एक्सीलेंट ब्रिलियंसी वाले समर चाचू की औलाद है। और यह इन सभी बातों में अपने डैड से दस कदम आगे हैं।
तो इनसे जरा बच के रहना।”
धनुष ने बड़ी प्यार भरी नजरों से शौर्य की तरफ देखा और उसकी तरफ हाथ बढ़ाने को था कि शौर्य ने उसका हाथ झटका और मुस्कुरा कर उसे दूसरी तरफ धक्का दे दिया..
” तेरी मोहब्बत नहीं चाहिए मुझे..।”
“फिर.. ? किसकी चाहिए ?”
धनुष ने पूछा.. और शौर्य हल्के से गुनगुना उठा… .
अजब है दीवाना, न घर ना ठिकाना
ज़मीं से बेगाना, फलक से जुदा
ये एक टूटा हुआ तारा
न जाने किसपे आयेगा…
है अपना दिल तो आवारा
न जाने किसपे आयेगा…
” क्या बात है बहुत गाने याद आ रहे.. !”
धनुष के टोकने पर मुस्कुरा कर कर शौर्य ने कली की तरफ इशारा कर दिया।
” धनुष यह मेरी दोस्त है कली, और यह लंदन से आई है। बहुत सीधी और साफ दिल है, यह फोटोग्राफर बनना चाहती है। इसलिए जहां से कुछ अच्छी तस्वीर लेने का मौका मिलता है, यह तस्वीर ले लेती है।
इसे फिलहाल राज परिवार के प्रोटोकॉल के बारे में कुछ मालूम नहीं था। इसलिए अब इस को डराना बंद करो समझे..।”
“जी हुकुम!”
धनुष ने बड़ी अदा से अपने एक हाथ को अपने पेट पर रखकर आधा झुक कर जापानी तरीके से शौर्य को प्रणाम किया और शौर्य ने धीरे से गर्दन हिलाते हुए ड्रामा कंपनी बोला और वापस उन लोगों का काफिला गाड़ियों की तरफ बढ़ गय

उफ्फ ये प्रोटोकॉल्स, कली उलझ रही है दिमाग़ क्यूंकि दिल में शौर्य है पर उसकी ख्वाहिशों में भी कली है राजा रानी का इतना भव्य स्वागत हो गया और सबके संस्कार भी दिख गए अब कली और शौर्य की केमेस्ट्री पढ़ता रहूं, यही इच्छा है पर भाग बहुत अच्छा है दी….💐🙏
बेहद खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️💐💐💐