जीवनसाथी -3 भाग -53

जीवनसाथी -3 भाग -53

जीवनसाथी by aparna

  हर्ष की शानदार रोल्स रॉयल्स में बैठी रियाल का दिमाग पूरी तरह से हर्ष पर ही लगा हुआ था..!

हर्ष ने ऐसा कुछ नही किया था, जिससे रियाल और मीठी के बीच ग़लतफ़हमी पैदा हो और वो लोग दूर हो जाये, बावजूद रियाल मन ही मन हर्ष से खार खाये बैठी थी..

असल में रियाल के जीवन में जब मीठी का आगमन हुआ, उसके पहले ही मीठी हर्ष से मिल चुकी थी। कहीं ना कहीं कहीं मीठी हर्ष से प्रभावित भी थी, और अक्सर रियाल से बातचीत में वह हर्ष का जिक्र जरूर कर जाती थी। और बस इसीलिए मन ही मन में रियाल ने हर्ष के लिए एक बैर भाव पाल लिया था।

आज जब वह सब महल की तरफ जा रहे थे, तब भी मन ही मन वह हर्ष से चिढ़ी जा रही थी…।

बहुत दूर लगातार चलते रहने पर हर्ष ने ही गाडी रोकने का प्रस्ताव रखा.. उसका देखा भाला एक ढाबा था, उसने वहीँ गाड़ी रुकवा दी..
सभी लोग उतर कर ढाबे में चले आये..

हर्ष एक तरफ की टेबल की तरफ बढ़ गया, मीठी भी उसी तरफ बढ़ने लगी कि रियाल ने उसका हाथ पकड़ लिया..

“मीठी, आओ हम इधर बैठते हैं !” और उसे खींच कर अपने साथ एक दूसरी टेबल पर बैठा लिया..।

ये टेबल उस हॉल के बीचोबीच लगी थी.. आसपास ढेर सारी टेबल्स लगी थी, जिन पर लोग बैठे खा पी रहे थे। वुडन फ्लोर पर लकड़ी के ही टेबल कुर्सी बहुत सुंदर लग रहे थे..
सजावट के लिए भी लकड़ी और चमड़े का प्रयोग किया गया था, फर्नीचर भी चमड़े से मढ़ा लकड़ी का था.. जिससे एक अलग सी कच्ची महक सी आ रही थी.. जो भली सी लग रही थी…

एक तरफ ओपन किचन की भट्टी नजर आ रही थी.. सामने ही रसोईया बना बनाकर गरमा गरम खाना परोस रहा था।
हर्ष जिस टेबल की तरफ गया था, वह काफी किनारे लगी हुई थी। और उस तरफ से खुला हुआ बगीचा साफ-साफ नजर आ रहा था।

लेकिन अपनी जिद में रियाल में मीठी को बीच टेबल पर बैठा दिया। धनुष और हर्ष भी उन लोगों के साथ वहां चले आए। उनके साथ के बाकी लोग भी आकर अपनी अपनी टेबल पकड़ कर बैठ  गए.. ।

हर्ष ने बिना मेनू देखे ही रियाल और धनुष की तरफ देखते हुए सवाल कर दिया।

” क्या खाना चाहते हो आप लोग, वेज या नॉनवेज? वैसे यहां का सब कुछ फेमस है…।”

“मैं हार्डकोर नॉनवेजिटेरियन हूँ.. !” रियाल ने घोषणा  की और हर्ष ने अपनी तरफ से उसे कुछ नाम बता दिए..

“वैसे यहाँ का गार्लिक साल्मोन और सी फ़ूड बहुत फेमस है !”

उसकी बात पर ध्यान दिए बिना रियाल मेन्यू कार्ड से देख कर अपनी पसंद की डिश आर्डर करने लगी.. उसने अपने हिसाब से कुछ आर्डर कर दिया..

हर्ष ने वेटर को देखा और मीठी की तरफ मुड़ गया…हर्ष को मालूम था मीठी नॉनवेज नही खाती है, उसने अपने और मीठी के लिए उसकी पंसद का बैगन का भरता और अँगारी रोटियां ऑर्डर की और धनुष की तरफ कार्ड बढ़ा दिया.. धनुष अपना आर्डर देने के बाद रियाल से कुछ पूछताछ करने लगा..

“आपने अभी हमारे ही ऑफिस में ज्वाइन किया है, आई गैस।”

रियाल ने हामी भर दी। धनुष धीरे-धीरे सिर हिलाने लगा।

आसपास की भीड़ के कारण वहां इतना शोरगुल था कि आपस में बातें करते नहीं बन रहा था आखिर मीठी ही सबसे पहले परेशान होकर खड़ी हो गई

” क्या उस तरफ किनारे बैठ सकते हैं? यहां बहुत ज्यादा शोरगुल है। आराम से बातें करते भी नहीं बन रहा।”

और बिना रियाल की तरफ देखें, मीठी उठकर उस तरफ चली गई, जिधर हर्ष पहले लेकर जा रहा था। हर्ष धीरे से उठा और रियाल की तरफ देखते हुए मीठी के पीछे बढ़ गया। इसी के साथ रियाल को भी उन लोगों के साथ जाकर उस टेबल पर बैठना पङा।

धनुष एक बार फिर रियाल से सवाल करने लगा

“वैसे काम तो बहुत रहेगा हमारे ऑफिस में, लेकिन आपको बता देता हूं कि हमारे बॉस बहुत, बहुत ही अच्छे इंसान है। अगर सामने वाला ईमानदारी से अपना काम करता है, तो उसे कभी भी ओवर टाइम नहीं करना पड़ता। कभी भी ज्यादा देर रुक कर काम नहीं करना पड़ता। क्यों सही कहा ना बॉस?”

धनुष ने हर्ष की तरफ देखकर पूछा, हर्ष हल्के से मुस्करा उठा..।

“मेरा वैसे भी यह मानना है कि ऑफिस आर्स पर्याप्त होते हैं काम निपटाने के लिए। अगर सुबह नौ से शाम पांच बजे तक आप अपनी डेस्क पर बैठकर अपना काम पूरा नहीं कर पा रहे, तो उसके बाद एक घंटा दो घंटा रुक कर आप कौन सा कद्दू में तीर मार लोगे?
अगर कोई एम्पलाई उस टाइम के बाद रुक कर काम करता है तो, या तो वह अपने घर जाना ही नहीं चाहता,या बॉस को अपने सस्ते तौर तरीकों से इंप्रेस करना चाहता है।
ऐसा मेरा मानना है, क्योंकि अगर आप अपने टाइम को टाइट शेड्यूल करके अपने सारे काम निपटाते हैं, तो दिए गए टाइम में आपका काम पूरा हो ही जाना चाहिए..।”

“बॉस कौन है, और कैसा है? इससे मेरे काम पर कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे यह पता है कि मुझे दिया गया काम मुझे खत्म करना है बस..।”

रियाल बोल पड़ी.. उसने बात तो सही कही थी लेकिन उसकी बात के पीछे छुपा उसका घमंड साफ झलक रहा था।

वेटर उन सब का खाना लेकर चला आया….
मीठी के लिए भले ही हर्ष ने एक साधारण सी डिश ऑर्डर की थी लेकिन उसका एक निवाला मुंह में रखते ही मीठी को अमृत सा स्वाद मिल गया..

“हम्म… वाह देख कर तो सच में नहीं लगा था कि यह बैंगन का भर्ता इतना टेस्टी होगा ,थैंक यू हर्ष..।”

हर्ष भी अपनी प्लेट से खाने लगा लेकिन उन दोनों को इतनी खुशी-खुशी खाते देख रियाल का दिल जल गया। उसे अब अपनी डिश में कोई स्वाद नहीं मिल रहा था लेकिन ऑर्डर किया था तो खाना ही था…

वह लोग खा रहे थे कि तभी काउंटर पर कोई लड़का जोर-जोर से बात करते हुए वेटर पर चीखने चिल्लाने लगा…
उस आदमी का कहना था कि वेटर ने उसे ठंडा खाना परोसा है, इसलिए कायदे से उसके पैसे कम होने चाहिए। जबकि वेटर बार-बार यह दुहाई दे रहा था कि खाना बहुत गर्म था। यहां तक की खाने में से धुआं निकल रहा था। बावजूद वह आदमी मानने को तैयार नहीं था।
वह बुरी तरीके से वेटर से उलझ पड़ा था..।
वेटर बार-बार अपनी बात की सत्यता को प्रमाणित करने की दुहाई दे रहा था। लेकिन वह आदमी बिना कुछ सुने उलझ पड़ा था। उन दोनों के झगड़े में बीच बचाव करने के लिए ढाबे के मैनेजर को भी कूदना पड़ा। इसके साथ ही आसपास मौजूद लोग भी उनके सुलह करवाने के लिए वहां जाने लगे।

तब तक में मीठी और बाकी लोगों का खाना खत्म हो चुका था। हर्ष ने दूसरे वेटर को पैसे दिए और जाने के लिए खड़ा हो गया लेकिन तभी रियाल अड़ गई..

” यह तो बहुत गलत बात है कुंवर सा, हमें तो लगा था कि आप न्याय प्रिय होंगे। लेकिन हमें समझ में आ रहा है कि आप एक नंबर के डरपोक इंसान है। वहां एक इंसान को मदद की जरूरत है, दो लोग उलझे हुए हैं और आप उस लड़ाई में जाकर घुसने की जगह यहां से भाग रहे हैं…।”

” आपने मुझे गलत समझा। आपसे किसने कह दिया कि मैं न्यायप्रिय हूं। मैं अगर किसी रॉयल फैमिली को बिलॉन्ग करता हूं तो, क्या मुझ पर न्याय प्रिय होने का ठप्पा लगा होना जरूरी है।
मैं भी एक सामान्य इंसान हूं। और मैं अपनी जिंदगी सामान्य तरीके से जीना चाहता हूं। हर किसी के फटे में टांग अङाने का मुझे कोई शौक नहीं है।

मुझे शांति प्रिय रहना पसंद है। मैं सिर्फ उन्हीं लोगों के झगड़े में पड़ता हूं जो मुझे आकर अपने झगड़े को सुलझाने की बात कहते हैं। बाकी तो पूरी दुनिया लड़ रही है, मैं किस-किस को जाकर सुलझाता रहूंगा…।”

” बस आप जैसे लोगों के कारण ही कई सारी क्रांतियां होने से पहले ही बुझ जाती है..।

” मेरे जैसो के कारण क्रांति की चिंगारी नहीं बुझती, बल्कि अपने साधारण झगड़ों को क्रांति का नाम देने वालों के कारण क्रांति की असल चिंगारी कभी जल ही नहीं पाती।

भगवान श्री कृष्णा भी तब तक महाभारत में शस्त्र नहीं उठाते, जब तक उनके सामने हाथ जोड़कर शस्त्र उठाने का निवेदन नहीं किया गया।
    द्यूत क्रीडा के समय जब पंचाली का चीर हरण हो रहा था, तब क्या योगेश्वर श्री कृष्णा सो रहे थे, जो उन्हें मालूम नहीं चला था।
      वह जाग रहे थे और उसी भवन के बाहर ही परिक्रमा कर रहे थे। वह बस इस बात का इंतजार कर रहे थे कि एक बार उनकी सखा उन्हें पुकार ले, और जैसे ही उनकी सखा ने उन्हें पुकारा वह तुरंत इसकी मदद के लिए पहुंच गये।
    जानती हो इस बात से क्या शिक्षा मिलती है,, कि जब तक सामने वाला तुम्हें अपनी मदद के लिए ना बुलाए तब तक दूसरों के मामलों में मत कूदो। क्योंकि जरूरी नहीं कि हर किसी को मदद की दरकार हो।

कुछ लोग बिना वजह भी ऐसे कांड करते हैं, क्योंकि उनके अंदर इस बात की ललक होती है कि उन्हें झगड़ा करना है। और ऐसे झगड़ों को सुलझा कर मैं अपना वक्त और ऊर्जा बर्बाद नहीं करता। हां अगर वाकई कोई ऐसा झगड़ा होता, जिसे देखकर मुझे लगता कि अगर इस झगड़े को निपटाने मैं नहीं गया तो सामने में से किसी एक का नुकसान हो जाएगा। तब मैं जरूर जाऊंगा।
मैं जानता हूं कि ना वह आदमी पूरी तरह से गलत है, और ना वह वेटर, तो मैं उनके झगड़े के बीच पड़कर खुद का बुरा क्यों करूं?
हां अगर तुम हर किसी के झगड़े में कूद कर चौधरी बनना चाहती हो तो, तुम्हारा स्वागत है।
हम तीनों बाहर कुल्फी खा रहे हैं, तुम आ जाना झगड़ा निपटा के..”

हर्ष बाहर निकल गया, उसके साथ ही धनुष और मीठी भी चले गए। रियाल भी पैर पटकती उन लोगों के पीछे बाहर चली आई। लेकिन बाहर निकलने से पहले उसने एक बार पलट कर देखा, उन लोगों का झगड़ा अब शांत हो चुका था…।

वह आदमी जो वेटर से झगड़ रहा था, बडबडाते हुए रियाल के बगल से होकर बाहर निकल गया। और उसके निकलने के बाद वेटर हंसते हुए दूसरे वेटर के कंधे पर झूलते हुए भट्टी की तरफ बढ़ गया। लेकिन जाते-जाते उसने जो बोला वह रियाल के कानों में पड़ ही गया..

“साला जब आता है गंद मचा के जाता है।  तमीज से बात करना साले को आता ही नहीं, कभी अपनी ही कटोरी से सब्जी अपने जूते पर गिरा कर फिर बुलवाकर जूता साफ करवाएगा। कभी लस्सी बहुत मीठी हो गई है कह के मुंह की लस्सी इधर उधर थूक जायेगा..।
ऊपर से पैसे देने में भी साला किच-किच करता है। इसीलिए इस बार मैंने भी उसे खाना परोसने के पहले इसके खाने में जमालगोटा मिला दिया..।
अब साले को समझ आएगा जब हाइवे पर गाड़ी दौड़ाते समय बार बार रुकना पड़ेगा..।
मैंने तो जाते समय उसे आवाज भी दी कि सर अपना पानी का बोतल रख लीजिए, पता नहीं कब आपको जरुरत पड़ जाए..।”

“तू भी कम नही है छोटू ! “

“हाँ तो क्या करे भाई, अपनी लड़ाई खुद लड़नी पड़ती है.. !”

रियाल ने एक नजर उस वेटर पर डाली और गाड़ी की तरफ बढ़ गई। अब की बार गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर ड्राइवर को बैठा कर धनुष और हर्ष भी पिछली सीट पर बैठ गए थे। रियाल ने जब पीछे बैठने के लिए गाड़ी का दरवाजा खोला तो वहाँ हर्ष को देखकर चकित रह गई… ।

गाड़ी विदेशी थी और काफी बड़ी और लग्जरी से भरपूर थी। दो लंबी सीट आमने-सामने लगी हुई थी। एक सीट पर मीठी बैठी थी और उसकी ठीक बगल की सीट खाली थी। मीठी के ठीक सामने वाली सीट पर हर्ष था और उसके बगल में धनुष था। सारी सीट थोड़ा व्यवस्थित करने पर लेटने की सुविधा भी दे देती थी। मुंह बनाकर रियाल मीठी के बगल में बैठ गई, और उसके बैठते ही ड्राइवर ने दरवाजा बंद कर दिया।
कार के दरवाजे के पास एक छोटा सा फोन लगा हुआ था। उस फोन को उठाकर धनुष ने ड्राइवर को चलने के लिए बोला और फोन रख दिया…।

” चलो भाई अब तो पेट पूजा हो ग,ई हम तो अब सोएंगे।” धनुष मुस्कुरा कर अपनी सीट को जरा पीछे कर आराम से आंखें बंद किए बैठ गया… !”

” तुम दोनों भी चाहो तो सो सकती हो, मुझे तो थोड़ा सा काम है!”

कहकर हर्ष ने अपना लैपटॉप खोल लिया…

मीठी फोन पर निरमा से बात करने लगी और रियाल एक तरफ बैठी, हर्ष और मीठी पर नजर रखने लगी…

****

शौर्य की यात्रा भी शुरू हो चुकी थी। जहां मीरा अति उत्साहित थी, वहीं कली जरा सहमी सी थी। पता नहीं क्यों, लेकिन दिल ही दिल में उसके ढेर सारी बातें चल रही थी। सरू से पिछले दो दिन से उसकी बात नहीं हो पाई थी। उसे मालूम नहीं था कि सरू वहां से निकल चुकी है या अब भी देहरादून में ही है। दूसरी तरफ डैडा से भी उसने अनुमति तो ली थी, लेकिन उसके डैडा जिस ढंग से बात कर रहे थे, उससे साफ जाहिर था कि वह अनुमति नहीं देना चाहते थे।

कली का दिल धड़क रहा था। उसके चेहरे पर उसका डर साफ-साफ नजर आ रहा था। यहां भी गाड़ी में शौर्य विक्रम के साथ पिछली सीट पर बैठा था, और उन दोनों के ठीक सामने मीरा और कली बैठे हुए थे। कली बार-बार गुमसुम सी खिड़की के पार देखने लग जाती। उसे इस तरह खुद में खोया देख शौर्य ने उससे पूछ लिया ।

“क्या बात है कली, कुछ परेशान लग रही हो?”

“हम्म नही तो !”

“लग तो रही हो.. बताओ तुम्हारा मूड ठीक करने के लिए क्या किया जाये…..चलो ठीक है.. मैं तुम्हारा मूड ठीक करने के लिए कुछ सुना देता हूँ.. !”

कली ने सवालिया नज़रों से शौर्य को देखा, उसके ठीक बगल में बैठा विक्रम हलके से मुस्कुरा उठा…
और शौर्य अपना गला साफ़ कर के गाने लगा..

“फिर धड़कन में तुम बस जाओ
फिर कोई ग़ज़ल मैं गाऊँ!!
फिर चाँद में तुमको मैं देखूँ
फूलों में तुमको पाऊँ!!
पर ऐसा ना होता अच्छा है,
इसका अंजाम जो होता है,
वो दर्द ही देता है दिल को!!

जादू भरी आँखों वाली सुनो
तुम ऐसे मुझे देखा ना करो..
तुम ऐसे मुझे देखा ना करो.. “

शौर्य का गाना ख़त्म होते ही मीरा चहक कर ताली बजाने लगी..

“थैंक्स शौर्य, मेरे लिए इतना प्यारा गाया तुमने… क्या अब मैं भी तुम्हारे लिए कुछ गा सकती हूँ ?”

मीरा की बात सुनकर विक्रम को जोर से हंसी आ गई। मीरा ने एक बार घूर कर विक्रम की तरफ देखा और फिर
कोई और इजाजत देता, उसके पहले ही मीरा शुरू हो गयी…

“रंग बदल-बदल के क्यूँ
चहक रहे हैं दिन दुपहरियाँ
मैं जानूँ ना, जानूँ ना, जानूँ ना, जानूँ ना
क्यूँ फुदक-फुदक के धड़कनों की
चल रही गिलहरियाँ
मैं जानूँ ना, जानूँ ना, जानूँ ना, जानूँ ना
रंग बदल-बदल के…”

मीरा अपनी लय में गाए जा रही थी, लेकिन उसके गीत को महसूस करती कली का मन अब हल्का होने लगा था..
यूँ लग रहा था जैसे मीरा उसी के मन की बात गुनगुना रही है..
मीरा के गीत ख़त्म करने के बाद वो सभी कली के पीछे पड़ गए लेकिन कली से कुछ गाया नही गया.. ।

उसका मन अब शांत था। लेकिन वो अब तक इस बात से उबर नही पायी थी कि शौर्य एक आम लड़का नही बल्कि एक राजकुमार था..।
अब तक वो शौर्य के साथ जैसे उन्मुक्त रहती आयी थी, अब वैसे उसके लिए सम्भव नही हो पा रहा था..।
शौर्य से बात करने में भी अब एक संकोच आड़े आने लगा था..

और शौर्य इस बात को समझने लगा था..।

क्रमशः

aparna..

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Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
1 year ago

एक तरफ़ रियाल, यह मुद्रा ही ठीक है, लड़की अंदर से जली भुनी बैठी है, इसको सच्चे साथी की ज़रूरत है जो मीठी तो नहीं है, झूठ का खार खाए बैठी है हर्ष से, अगर मीठी ने भाव गिरा दिया तो लो फील करेंगी, शांत रहना चाहिए। मीरा अब चुड़ैल लग रही है और कली मुरझाई है, पढ़ने में अच्छा लगा दी, नाईस पार्ट…💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

आज के भाग की बात करुं तो हर बार की तरह लाजबाब भाग 👌👌👌👌।
शायद हर्ष की सगाई की अनाउसमेंट होगी इसलिए तो महल बासियों को महल वापिस बुलाया गया है। ये खबर हर्ष के लिए बम से कम नहीं है अब देखते है वहां जाकर क्या होता है, क्या मीठी को हर्ष की सगाई से फर्क पड़ता है, क्या उसके मन में हर्ष के कुछ होता है, इंतज़ार, इंतज़ार इंतज़ार…।
तो… शौर्य और कली में मीरा आ गई और हर्ष और मीठी में रियाल
आ गई, मतलब अब सब एक जगह इकठ्ठे होंगे तो कुछ तो होगा ही षड्यंत्र, प्यार, धोखा सब ये दो दिनों में होगा ऐसा लग रहा।
अरे yaar ये विक्रम बहुत अच्छा है 😊कली को कैसे शौर्य के साथ बिठा दिया ताकि वो छिपकली ना बैठ जाए 😄।
आगे का सफर और ज्यादा रोचक होता जाएगा तो उत्सुकता भी उतनी ही बढ़ती जा रही जानने की कि आगे क्या होगा तो… इंतज़ार कर रही हूँ मैं अगले भाग का।