जीवनसाथी -3 भाग -52

शौर्य की तबीयत में अब पहले से काफी आराम हो चुका था… बांसुरी ने डॉक्टर से मिलकर सारी बातें तय कर ली थी..!
डॉक्टर ने भी कुछ हिदायतों के साथ शौर्य को छुट्टी दे दी..
वहाँ मौजूद नौकर सब सामान समेट रहे थे..।
कली चुपचाप एक किनारे खड़ी थी..।
इतने बड़े राजपरिवार को इतने करीब से देख वो आँखों ही आँखों में पीती जा रही थी….।
इतने बड़े लोग होकर भी उनमें ज़रा भी घमंड ना था..
कली के मन में उत्साह तो था लेकिन एक अनजाना सा भय भी था..।
नए लोग, नयी जग़ह..। वो शौर्य को पसंद ज़रूर करती थी, विश्वास भी था लेकिन इतने बड़े राजमहल में अनजान लोगो के साथ चले जाना..।
इतना आसान भी नही था..
“विक्रम कली के साथ जाकर उसका सामान ले आओ !”
विक्रम ने कली की तरफ देखा और कली एक बार शौर्य की तरफ देख कर विक्रम के साथ होटल निकल गयी..
राजा साहब अपने पार्टी कार्यालय के कुछ एक जानने वालों के बार बार बुलाने पर उनके दफ्तर में किसी मीटिंग के लिए निकल गए थे..
बांसुरी शौर्य की दवाये रख रही थी तभी अपूर्व चला आया..
उसने रुपयों की कुछ गड्डियां शौर्य की तरफ बढ़ा दी..
“ये लीजिये लिटिल मास्टर.. ये आपके लिए !”
शौर्य और बांसुरी चौंक कर अपूर्व की तरफ देखने लगे..
” हमें मालूम नहीं था लिटिल मास्टर की आपके कार्ड्स समर ने ब्लॉक करवा दिए हैं। वरना हम उसी वक्त आपके पास कैश लेकर पहुंच जाते। हमें तो यह तक नहीं मालूम था कि आप दिल्ली में कहां रह रहे हैं…?
वह तो यहां आने के एक दिन पहले हमने महल में रेखा बाई सा और रानी सा को बात करते सुन लिया था कि कुंवर सा हर्ष और धनुष पेरिस से वापस लौट रहे हैं। और अब तक उनका फ्लैट भी रिनोवेट हो गया होगा, जो चार दिन से रिनोवेशन के कारण बंद कर रखा गया था। तब हमने सोचा कि अगर फ्लैट बंद था तो जरूर हमारे लिटिल मास्टर किसी फाइव स्टार होटल में ठहरे होंगे। हमने आपका फोन मिलाया जो नही लग रहा था।
और तब हमने दिल्ली के सारे बड़े होटल में फोन करके पता करवा लिया, लेकिन कहीं आपका पता नहीं चला..
फिर हमने दुबारा आपका फोन ट्राई किया, लेकिन वह भी बंद आ रहा था..।
हम बहुत परेशान हो गए थे। आप तो जानते हैं कि आप हमारे कितने लाडले हैं। हम आपका पता करने के लिए निकल ही रहे थे कि तभी एक बैंक अधिकारी महल में दाखिल हो रहा था। हमें कुछ अजीब सा लगा और थोड़ा माथा ठनका, क्योंकि वह फोन पर समर से कुछ बात करते हुए जा रहा था। हमने चुपचाप उसका पीछा किया, वह समर के ऑफिस में गया और उससे बात करने लगा। तब हमें मालूम चला कि समर ने आपका कार्ड ब्लॉक करवा दिया है..।
सच कह रहे हैं छोटे कुंवर, हमें आपकी चिंता लग गई थी। इन चार दिनों में आप कहां रहे? कैसे रहे? क्या खाया, कहाँ सोये,हम सोच सोच कर पागल होने लगे थे। आपके पास फ्लैट नहीं था, और आपके पास पैसे भी नहीं थे। पता नहीं इन चार दिनों में आप पर क्या-क्या मुसीबत टूटी होगी।”
शौर्य की आंखों में तड़प आ गई।
अपूर्व ने बचपन से शौर्य को सिर्फ उसके पिता के ही नहीं बल्कि प्रेम और समर के खिलाफ भी धीमा धीमा जहर देना जारी रखा था।
शौर्य समर और प्रेम को ज्यादा पसंद नहीं किया करता था।
हां अपने विराट और विराज चाचू से उसके अच्छे संबंध थे। शौर्य ने अपनी मां की तरफ देखा, बांसुरी शौर्य को ही देख रही थी।
वह शौर्य को सब कुछ समझना चाहती थी, लेकिन इस वक्त कमरे में मौजूद इतने सारे लोगों के बीच शौर्य से कुछ भी बोलना सही नहीं था।
यह सोचकर उसने दवाइयां रखी और अपूर्व की तरफ घूम गई..
“आप जरा बाहर जाकर गाड़ियां देख लीजिए, अगर गाड़ियां कम पड़े तो और मंगवा लीजिएगा और यह पैसे भी ले जाइए, मेरे बेटे को इनकी जरूरत नहीं..।”
“मुझे जरूरत है मॉम..!”
बांसुरी ने आहट दृष्टी से उसे देखा.. वो समझ गयी थी अपूर्व अपना ज़हर भरा तीर चला कर चला गया है… उस वक्त बांसुरी ने और कुछ नही कहा…
अपूर्व कुटिलता से मुस्कुराता बांसुरी के सामने ज़रा झुक कर उसे प्रणाम कर बाहर निकल गया..
शौर्य चुपचाप बैठा अपूर्व की बात का मंथन करने लगा…
वो लोग लगभग तैयार थे कि भागती दौड़ती मीरा भी वहाँ पहुँच गयी…
उसे भी सिक्योरिटी ने रोकने का प्रयास किया लेकिन वो चीखने चिल्लाने लगी और उसकी चीख पुकार सुन बांसुरी बाहर चली आई ।
बांसुरी ने मीरा को देखा और उसके पास पहुंच गई ।
मीरा ने बांसुरी को देखते ही उसके सामने हाथ जोड़ दिए। मीरा बांसुरी को पहचानती थी।
” मैं, मैं शौर्य की फ्रेंड हूं। मैं उसकी बेस्ट फ्रेंड हूं एक्चुअली। मैं उसे एक बार देखना चाहती हूं। मुझे पता ही नहीं था कि उसकी तबीयत खराब है। बस अभी मालूम चला, जब न्यूज़ पेपर में मैंने शौर्य की खबर देखी।”
बांसुरी ने हां में गर्दन हिलाई और उसे साथ लेकर शौर्य के कमरे की तरफ बढ़ गई ।
शौर्य के कमरे में पहुंचते ही भीड़ भाड़ को अनदेखा करते हुए मीरा सीधे शौर्य के पास पहुंची और उसके गले से लग गई।
शौर्य अपनी मां के सामने ऐसे मीरा के गले लग जाने से जरा झेंप गया। उसने एक हाथ से मीरा को खुद से दूर करने की कोशिश की लेकिन मीरा ना में गर्दन हिला कर उससे यूं ही चिपकी रही।
अब तक राजा साहब भी वहां आ चुके थे, उन्होंने बांसुरी की तरफ देखा और बांसुरी ने “मैं कुछ नहीं जानती” का इशारा कर दिया।
कली भी आ गई थी, और वही खड़ी थी।
आखिर मीरा शौर्य से दूर हुई और उसकी चिंता जताते हुए बोलने लग गई।
” तुमने मुझे कुछ भी बताने की जरूरत नहीं समझी? बस पराया कर दिया ना मुझे।
मुझे कल अखबार में देखकर पता चला कि तुम बनारस में हो।”
शौर्य मीरा की बात सुनकर सन्न रह गया।
” अखबार में देखकर मतलब? क्या यह खबर अखबार में भी आ गई ?”
उसने तड़प कर अपनी सिक्योरिटी की तरफ देखा। बांसुरी और राजा की तरह शौर्य भी अपनी पल-पल की खबरें अखबारों में छपने नहीं देना चाहता था। उसे इन बातों से सख्त नफरत थी। वह अपनी पर्सनल लाइफ को पूरी तरह से व्यक्तिगत ही रखना चाहता था। लेकिन जाने कहां से यह बात लीक हो गई ,और अखबार के मुख्य पेज का हिस्सा बन गई कि राजा साहब के बेटे शौर्य को बनारस के घाट पर गोली लग गई है।
“हां फ्रंट पेज पर पढी यह खबर, और मेरे तो होश उड़ गए। मुझे लगा मैं कैसे तुम्हारे पास पहुंच जाऊं? मैं इतना घबराई , इतना परेशान थी।
तुम्हें पता है जब तक तुम्हें ठीक-ठाक देख ना लिया ना मुझे चैन नहीं पड़ रहा था।
ना मुझसे पानी पिया जा रहा था, ना कुछ खाया जा रहा था।”
शौर्य ने मीरा की तरफ देखते हुए उससे सवाल कर लिया।
” तो मुझे कॉल कर लेती? कॉल में तुम्हें बता देता कि मैं कैसा हूं?”
मीरा हड़बड़ा कर रह गई। क्योंकि शौर्य ने बात तो सही कही थी लेकिन मीरा ने शौर्य को कॉल करने की जरूरत ही नहीं समझी।
उसने अखबार में पूरी खबर पढी थी और उसे मालूम चल चुका था कि शौर्य खतरे से बाहर है ।
मीरा बड़े आराम से अपने डिज़ाइनर कपड़ों को और जूते को पैक करने के बाद कैब करके बनारस तक आई थी।
“शौर्य, मैंने बताया ना मेरी हालत इतनी खराब हो गई थी कि बस जैसे-तैसे में दौड़ती भागती आई हूं। “
उस वक्त बाहर एक बार फिर से शोरगुल सुनाई दिया। अबकी बार बांसुरी के इशारे पर एक गार्ड बाहर देखने चला गया। कुछ देर में वह गार्ड वापस आया और बांसुरी के कान में कुछ बोल गया। बांसुरी ने धीरे से अपने पास से कुछ पैसे निकाले और बाहर खड़े कैब ड्राइवर को देने के लिए दे दिए।
मीरा कैब वाले को बिना पैसे दिए ही अस्पताल के अंदर चली आई थी और वही ड्राइवर जाकर मीरा के लिए बाहर पूछताछ कर रहा था।
गार्ड से यह बात सुनकर बांसुरी ने पैसे भिजवा दिए थे। मीरा शौर्य के पास से उठकर बांसुरी के पास चली आई।
“मैम क्या आप शौर्य को लेकर महल जा रही है?”
बांसुरी ने हां में गर्दन हिला दी।
“मैंम अगर आपको बुरा ना लगे तो, क्या मैं आप लोगों के साथ चल सकती हूं?
सिर्फ दो-तीन दिन के लिए।
मैं बहुत मिस कर रही थी अपने इस बुरे दोस्त को।
यह बहुत गंदा है.।
यह मेरी इतनी ज्यादा केयर करता है कि यह चाहता ही नहीं कि मैं परेशान हूं। बस इसीलिए मुझे कुछ बताता ही नहीं, जबकि सच्चाई यह है कि मैं इसके लिए बहुत परेशान हो जाती हूं।”
बांसुरी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई। जैसे वह भी मीरा की बातों के पीछे छुपे झूठ को समझ गई है…
लेकिन उसने कहा कुछ नहीं और राजा साहब की तरफ देखने लगी! कली के लिए जितनी आसानी से बांसुरी ने खुद चलने की हामी भर दी थी, वैसे मीरा के लिए उन्होंने कुछ नहीं कहा।
राजा साहब ने धीरे से हां कह दिया लेकिन शौर्य बोल पड़ा।
” तुम कैसे चलोगी, हम लोगों के साथ। क्योंकि तुम्हारा तो यहां काम होगा, हर्ष भैया भी वापस आ गए हैं।” लेकिन तभी बांसुरी बोल पड़ी।
” लेकिन हर्ष भी महल के लिए निकलने वाला है। रूपा भाभी सा का फ़ोन आया था.. ।”
बांसुरी के मुंह से जाने अनजाने यह बात निकल गई थी, और उसकी यह बात सुनकर मीरा मुस्कुरा उठी ।
उसने मुस्कुराकर शौर्य की तरफ देखा।
” अब तो चल सकती हूं ना, जब मेरे बॉस खुद छुट्टी लेकर महल जा रहे हैं तो मैं भी चलती हूं..।”
शौर्य का बिल्कुल मन नहीं था कि मीरा उन लोगों के साथ जाए लेकिन बांसुरी ने उसे भी मंजूरी दे दी..
” लेकिन मीरा तुम्हारा तो सामान भी यहाँ नही होगा। तुम्हें हमारे साथ जाने में दिक्कत आएगी।”
शौर्य ने अपनी तरफ से बहाना बनाया और मीरा गर्दन एक तरफ झुका कर उसे देखने लगी..
“थोड़ा बहुत सामान मैं अपने साथ लेकर आई थी, मैं बस इतने में ही काम चला लूंगी।”
शौर्य के पास अब कोई उपाय नहीं बचा था। कुछ देर में ही सारे लोग वहां से निकलने के लिए तैयार हो गये। सारे नौकर सामान लिए बाहर निकल गए और सिक्योरिटी के घेरे में राजा साहब और रानी बांसुरी अपने लाडले राजकुमार को साथ लिए वहां से बाहर निकल गए।
इन सब के साथ ही अपूर्व ठाकुर भी निकल गया…।
उसके चेहरे पर कुटिलता से भरी मुस्कान आ गई थी। उसे हर वह काम करना पसंद था जो राजा अजातशत्रु नहीं करना चाहते थे।
राजा साहब और रानी बांसुरी का परिवार अपने आप को मीडिया और पेपराजी से बचा कर रखना चाहते थे, और इसीलिए उनके बारे में गलत खबरें छपवाने में अपूर्व ठाकुर हमेशा से आगे रहता था। इस बार भी शौर्य को गोली लगने की खबर उसी ने अखबारों की खबर के लिए भेजी थी…
अखबारों के मुख्य पेज पर बड़ी-बड़ी हेडिंग के साथ लिखा हुआ था कि आखिर कौन सा वह पुराना दुश्मन वापस लौटा है जो राजा अजातशत्रु से बदला लेने के लिए निशाने पर उनके राजकुमार को रख रहा है? इस खबर के साथ ही मुख्य हेडिंग में लिखा था “खतरे में राजकुमार…”
इन खबरों को छपवाने वाला कौन है, इस बात से अनजान राजा साहब का परिवार महल के लिए निकल गया।
एक गाड़ी में राजा अजातशत्रु के साथ रानी बांसुरी बैठी। राजा साहब चाहते तो थे कि उनका प्रिय राजकुमार उनके साथ बैठे, लेकिन वह जानते थे कि शौर्य उनके साथ नहीं बैठेगा।
उनकी ठीक पीछे की गाड़ी में शौर्य बैठ गया। कली चुपचाप खड़ी थी कि वह कहां जाए और विक्रम ने उसे धीरे से शौर्य की गाड़ी की तरफ धक्का दे दिया..
“जाओ जल्दी से बैठो, वरना वह छिपकली बैठ जाएगी..।”
विक्रम के बोलने पर थोड़ी सी हिम्मत कर कली आगे बढ़ ही रही थी कि मीरा गाड़ी के पीछे का दरवाजा खोल शौर्य की ठीक बगल में बैठ गई।
कली विक्रम को देखने लगी।
विक्रम ने ड्राइवर को हटाकर खुद ड्राइविंग सीट पकड़ ली। और मीरा को अंदर आते देख शौर्य गाड़ी से उतरकर सामने की सीट पर बैठने चला गया..।
“आओ कली, पीछे बैठ जाओ।”
शौर्य ने कली को अपनी गाड़ी की तरफ आने का इशारा किया और कली मीरा की बगल में जाकर बैठ गई।
ढेर सारी गाड़ियों का काफिला वहां से महल के लिए निकल गया….
*****
इधर हर्ष धनुष के साथ महल के लिए निकल गया.. उसकी गाड़ी के आगे पीछे उसकी सिक्योरिटी गाड़ियों का काफिला निकल गया..।
हर्ष की गाड़ी मीठी को लेने निकल गयी..।
मीठी रियाल के फ्लैट पर रुकी थी, इसलिए हर्ष उसी के घर के लिए रवाना हो गया..।
नीचे पहुँचते ही उसने मीठी को फ़ोन लगा दिया..
“हाँ हर्ष.. मैं आ रही हूँ.. !”
मीठी ने फ़ोन रखा और थोड़ी ही देर में रियाल नीचे चली आयी..
वो खाली हाथ आयी थी.. उसने गाडी के उतरे हुए कांच से अंदर झाँका और हर्ष की तरफ देख एक जलती हुई सी मुस्कान उछाल दी..
“क्या बात है.. रियासत के राजकुमार अपनी रियासत घूमने निकल पड़े !”
“रियासत तो कई दफा घूम चुके हैं… अभी तो बस आराम करने जा रहे हैं.. !”
“हम्म.. आराम करने ?”
“हाँ सभी दोस्त मिलेंगे, पार्टीज़ के दौर चलेंगे, जँगल भ्रमण होगा, सब साथ बैठेंगे तो ढेरो बातें होंगी, गपशप होंगी.. !”
“हाँ हाँ सब जानती हूँ.. !” रियाल मुस्कुरा रही थी कि तभी दो बैग कंधे पर टांगे मीठी चली आयी..
मीठी हर्ष और धनुष को देख मुस्कुरा उठी..।
उसने सामान पीछे डाला और पिछला दरवाज़ा खोल बैठ गयी..
“दरवाज़ा लॉक कर दिया ना मीठी ?” रियाल ने पूछा और मीठी ने हाँ में सर घुमा दिया..
उसकी ये बात सुन हर्ष चौंक गया और तभी रियाल भी पिछला दरवाज़ा खोल अंदर बैठ गयी..
“मैं भी आपके साथ चल रही हूँ कुंवर सा… मैं भी आपका रॉयल पैलेस देखना चाहती हूँ.. आप सब की कंपनी में घूमना चाहती हूं, जंगल भ्रमण करना चाहती हूं। पार्टी और गपशप के दौर अटेंड करना चाहती हूं। मीठी ने हीं मुझसे कहा कि तुम्हारी जॉइनिंग को वक्त है तुम भी हम लोगों के साथ चलो।
क्या करें हम दोनों एक दूसरे के बिना रह नहीं पाते ना। जैसे मेरा मन तड़पता है कि मैं हर वक्त मीठी के साथ रहूं, ऐसा ही कुछ मीठी के साथ भी है। है ना मीठी?”
उसने मीठी की तरफ देखकर सवाल किया और मीठी ने धीरे से हा में गर्दन हिला दी।
हर्ष को बिल्कुल भी मालूम नहीं था कि रियाल उनके साथ जाने वाली है, वह कोई जवाब नहीं दे पाया।
“हां अच्छी बात है, तुम भी चलो मैंने कब मना किया है। हमारा तो पूरा गैंग वैसे भी काफी बड़ा है।
बहुत दिनों से परी से मिलना नहीं हुआ…।
शोवन भी पिछले कुछ समय से अपने हॉस्पिटल में बहुत बिजी चल रहा था, और उसका भी मन था कि हम सब आए तो वह भी एक ब्रेक ले ले।
तो बस हम सब दोस्त मिलकर खूब मस्ती करेंगे। तुम भी हम सब में शामिल हो जाना।”
हर्ष ने रियाल से कहा और उनकी गाड़ी भी आगे बढ़ गयी…
क्रमशः
aparna…

महल में इतने लोग जा रहे हैं, टिकट लगना चाहिए, पर हम मुफ्त में पढ़ने के लिए जायेंगे, यहां भी सुपर फैन सिस्टम हो, ख़ैर मीरा छिपकली भी साथ आ गई, अपूर्वा भी अपनी चाल चल गया और सब महल में एंट्री ले रहे आगे क्या होगा , नाईस पार्ट दीदी…💐🙏
बहुत बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐💐💐💐💐