जीवनसाथी-3 भाग -51

जीवनसाथी-3 भाग -51

जीवनसाथी by aparna

शायद वह भी यही सुनना चाहती थी। उसने बांसुरी की तरफ देखा। बांसुरी भी मुस्कुरा रही थी। बांसुरी ने भी हां में गर्दन हिला दी।

कली ने शौर्य की तरफ देखा और तभी कली का फोन बजने लगा

उसने अपना फोन उठा कर देखा डैडा..  लिखा हुआ दिख रहा था।
कली घबरा गयी और इसी घबराहट में उसने फ़ोन उठा लिया..

वो बांसुरी की तरफ एक बार देख उससे आँखों से इजाजत ले कमरे से बाहर निकल गयी..

“हेलो डैडा.. ?”

“कहाँ हो कली ? दो दिन से तुमने फ़ोन नही किया ?

वाकई जिस दिन से शौर्य को गोली लगी थी, कली सब भूल कर रह गयी थी..।
वो खुद को भूली बैठी थी, बस इसीलिए अपने डैडा को नियम से फ़ोन करना भी भूल गयी..।

बाकी दिन तो शौर्य खुद डेरिक बन कर उसके डैडा से बात कर लेता था..
और उससे बात करते हुए वासुकी को अनजाने ही डैरिक पसंद आने लगा था। वरना पहले जब भी वह घर आता था, वासुकी को देखते साथ खड़े होकर बिल्कुल किसी सूखे पत्ते की मानिंद कांपने लगता था।
    तब वह कहीं किसी कोने से वासुकी को पसंद नहीं आता था। लेकिन फोन पर उसके बात करने का तरीका ही निराला था। इतने आत्मविश्वास से वह वासुकी से बात करता था कि वासुकी अब उसकी बातों से प्रभावित होने लगा था..

” डैडा वो प्रोजेक्ट ही ऐसा था कि मुझे बिल्कुल समय नहीं मिला। आपको पता है आपकी कली खूब मेहनत से काम कर रही है। आप मेरा काम देखकर बहुत खुश होंगे..।”

“अच्छा ऐसा क्या कर रही हो ?”

कली पल भर के लिए सोच में पड़ गई कि अब अपने डैडा को कैसे घुमाए..

”  एक बात पूछनी थी आपसे, मुझे अपने प्रोजेक्ट के लिए एक महल में जाने का मौका मिल रहा है। सिर्फ दो-तीन दिन के लिए, क्या मैं जा सकती हूं..?”

“कहाँ जा रही हो ? कौन सा महल है प्रिंसेस ? अब तो हिंदुस्तान में राजशाही खत्म हो गई है। वहां तो लोकतंत्र है, क्या अब भी वहां महल में राजा महाराजा रहते हैं..?”

” हां डैडा हमारे एनजीओ की तरफ से हम सभी को वहां लेकर जाया जा रहा है..प्लीज़ डैडा मुझे भी जाने दीजिये ना ?”

” मैं मना कर दूंगा तो कौन सा तुम रुक जाओगी?”

” आप मना कर दोगे तो मैं पक्का नहीं जाऊंगी..!”

“ठीक है एक बार डेरिक से बात करवाओ !”

कली ने अपने माथे पर अपना हाथ मार लिया। शौर्य अंदर पूरे परिवार के साथ था। राजा साहब और रानी बांसुरी के सामने शौर्य से यह कहना कि वह डेरेक बन कर उसके डैडा से बात कर ले, शोभा नहीं देता था।

इतने सारे गार्ड्स के सामने वह और शौर्य उसके पिता से झूठ झूठ बात करें, बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। वह सोच ही रही थी कि क्या करूं, तभी सामने विक्रम खड़ा दिखाई दिया। वह भाग कर विक्रम के पास पहुंच गई… विक्रम की जेब में नजर आई पेन उसने एक झटके में निकाली और अपने हाथ पर कुछ लिखने लगी..

“क्या हुआ कली ?”

वासुकी की गहरी सी आवाज़ गूंज गयी..

विक्रम ने इशारे से कली से पूछ लिया, “कौन है यह” और काली ने उसे इशारे से ही बता दिया कि उसके डैडा है। वह फटाफट अपनी हथेली में कुछ लिखने लगी..

“विक्रम प्लीज़ मेरा दोस्त बन कर डैडा से बात कर लो.. तुम्हारा नाम डेरिक है और तुम मेरे साथ लंदन से यहाँ आये हो.. !”

उसने अपनी हथेली विक्रम की तरफ घुमा दी और फोन पर अपने डैडा से बात करने लगी..

“डैडा.. डैरिक को यहां आने के बाद सर्दी हो गई है, यहां ठंड बहुत है ना?”

“अच्छा.. लंदन से भी ज्यादा ?”

एक बार फिर वो अपनी जीभ काट कर रह गयी..

“लीजिये डेरिक से बात कीजिये, लेकिन नेटवर्क बहुत ख़राब है यहाँ !”..

उसने स्पीकर विक्रम की तरफ घुमा दिया..

“हेलो सर.. कैसे हैं आप?  मैं डेरिक हूँ.. मैं कली के साथ लंदन से इण्डिया आया हूँ.. !”

कली ने बस जानकारी के लिए अपनी हथेली पर लिखा विक्रम को पढ़ाया था। लेकिन विक्रम को लगा कि जो कली ने लिखा है, उसे वैसे का वैसा बोलना है। और वह वैसा ही बोल गया। उसे वैसे बोलते देख कली ने वापस अपने माथे पर हाथ मारा और फोन खींच कर “डैडा नेटवर्क बहुत खराब है” बोल कर फ़ोन कट कर दिया…

कली ने एक गहरी सी साँस भरी और सामने खड़े विक्रम की तरफ देखा।
विक्रम उडी हुई नजर से कली को देख रहा था..

“अब तुम्हे क्या हुआ.. ? कली ने उससे पूछा..

” सबसे पहले तो यह बताओ कि यह क्रिस्टोफर जज जैसे आवाज किसकी थी?”

” मेरे डैड.. मैं उन्हें डैडा कहती हूं। उनकी आवाज वाकई बहुत अच्छी है..!”

” अच्छी?  अरे पागल लड़की यह आवाज तो करोड़ों की है। आई मीन,अगर यह रेडियो में होते ना यार तो कमाल कर जाते। कितनी गहरी आवाज है। इनके एक-एक शब्द ऐसे सुनाई दे रहे थे, जैसे मतलब क्या कहूं। ऐसा लगता समंदर से भी गहरी आवाज है। पूरे अंतरिक्ष में गूंज जाए ऐसी आवाज..।
मैं तो आवाज सुनकर ही फैन हो गया, जब तुम्हारे डैडा इंडिया आए तो, मुझे जरूर मिलवाना प्लीज..।”

” तब तो भूल जाओ, क्योंकि वह कभी इंडिया नहीं आने वाले…।”

“लेकिन क्यों? इंडियन है ना तुम्हारे डैडा? वैसे आवाज तो उनकी बिल्कुल फॉरेनर्स जैसी ही थी..।”

“है इंडियन, लेकिन उन्हें इंडियन्स पसंद नहीं। पता नहीं क्यों? लेकिन वह इंडिया आना ही नहीं चाहते..।”

“ओके, तब तो फिर जब तुम हमारे लिटिल मास्टर को लेकर अपने डैडा से मिलवाने जाओगी, तब दहेज में मैं भी साथ चलूंगा। और एक बार तुम्हारा डैडा के दर्शन कर लूंगा..।”

“पागल हो विक्रम, ऐसी बातें क्यों कर रहे हो? तुम्हारे लिटिल मास्टर के मन में मेरे लिए कुछ भी नहीं है..।”

“लेकिन तुम्हारे मन में तो है प्रिंसेस।
तुम्हारी आंखें जिस तरीके से लिटिल मास्टर को देखती हैं ना, साफ समझ में आ जाता है कि तुम किस कदर मुहब्बत में पड़ी हुई हो। हां लिटिल मास्टर के लिए मैं खुद भी श्योर नहीं हूं। क्योंकि वह कभी अपने हाव-भाव से अपने मन के अंदर चल रही बातों को प्रदर्शित नहीं होने देते। और यही उनकी सबसे बड़ी खूबी है। वह दिल में कितना भी दर्द लिए घूमे, उनका दर्द कभी उनके चेहरे पर दिखाई नहीं देता..।”

“ऐसा कौन सा दर्द लिए घूम रहे हैं, तुम्हारे लिटिल मास्टर..?”

“मैं खुद नहीं जानता तो मैं क्या बताऊं? मैंने कहा ना उनके उस दर्द को सिर्फ वह ही जानते हैं। जहां तक मुझे पता है, शायद उनके पैरेंट्स भी नहीं जानते..।”

“अच्छा, ऐसा क्या है प्रिंस के बारे में जो उसने अपने मॉम डैड को नहीं बताया।
वैसे इस फैमिली को देखकर मेरे मन में एक बात आई कि मैं इस प्यारी सी फैमिली की नजर उतार लूं..।”

“उतार लो.. अगर भगवान चाहेंगे तो एक दिन तुम भी इस परिवार का हिस्सा होगी..।”

विक्रम की बात पर मुस्कुरा कर कली अंदर चली गयी..

दूसरी तरफ कली का फोन काटने के बाद वासुकी सोच में पड़ गया। उसकी जान पहचान में एक महल ऐसा था, जहां आज भी राजा महाराजा रहा करते थे। लेकिन वह कभी नहीं चाहता था कि उसकी प्रिंसेस, उसकी कली उस महल में जाये..

वासुकी जानता था कि सीधे तौर पर राजा अजातशत्रु सिंह और रानी बांसुरी की कोई गलती नहीं थी। लेकिन फिर भी उसका दिल अब तक इसी बात पर अटका हुआ था कि उसने अपनी नेहा को इसी महल के कारण खोया।
इन्हीं राजा साहब के कारण खोया और इसलिए वह वापस लौट कर कभी इंडिया नहीं जाना चाहता था।
और ना ही उस महल से किसी तरह का कोई संबंध रखना चाहता था। जब शुरुआत में वह नन्ही सी कली को लेकर लंदन चला आया था, तब उस वक्त राजा साहब और समर ने उसे ढूंढने की काफी कोशिश की थी। इस बारे में वासुकी को इंडिया में मौजूद उसके लोगों से बराबर खबर मिल रही थी, बावजूद वासुकी ने अपने उन लोगों से स्पष्ट तौर पर कह दिया था कि महल के किसी भी इंसान को उसके बारे में खबर न दी जाए…
और वैसा ही हुआ..।
समर के लाख पता करने के बावजूद वासुकी या उसकी बेटी के बारे में समर को कुछ मालूम नही चल पाया…।

“क्या हुआ अनिर कुछ सोच रहे हो ?”

“हम्म दर्श.. मुझे इण्डिया निकलना है! “

“लेकिन यहाँ से तो तुम्हे इण्डिया की फ्लाइट नही मिलेगी.. अब भी हफ्ता पूरा होने में तीन दिन हैं !”

“हम्म इसलिए मैं किसी नेबर कंट्री में पहुँच कर वहाँ से फ्लाइट लूंगा, लेकिन अब मुझे इण्डिया जाना ही होगा.. मुझे लग रहा कली गलत जग़ह जाने वाली है..।”

“कहाँ ?”

“राजा साहब के महल में..

वासुकी की आँखों में अजब सी पीड़ा उभर आयी… दर्श उसकी आंखे देख कर ही समझ गया.. दर्श उसके हर दर्द का गवाह था…
वो समझ गया कि अब वासुकी को रोकना मुशिकल है..।

“ठीक है, दो टिकट्स देख लेता हूँ.. मैं भी साथ चलूँगा.. !”

वासुकी ने गर्दन हिलायी और अपने कमरे में चला गया..

*****

सुबह मीठी ऑफिस के लिए तैयार हो रही थी कि तभी रियाल भी उठ कर चली आयी..

“तुम इतनी जल्दी रेडी हो गयी.. क्यों ?”

“धनुष का मेसेज आया था.. नौ बजे कोई ज़रूरी मीटिंग है !”

“कहाँ आया मेसेज ? तुम्हारे पास ?”

” हम्म.. !”

“ठीक है.. मैं भी साथ चलूँ ?”

“नही रियाल, तुम क्या करोगी.. अभी तो जोइनिंग में वक्त है ना.. तुम घऱ पर आराम करो !”

“अकेले मन नही लगेगा मेरा.. तुम भी तो इतने दिन बाद लौटी हो !”

“कितने दिन बाद.. ? सिर्फ पांच दिन .. !”

“तुम्हारे लिए सिर्फ पांच दिन होंगे, मेरे लिए पांच बरस बराबर थे.. मीठी… एक बात पूंछू ?”

“हम्म.. !”

“मुझसे रिलेशन में हो, इस बात पर शर्मिंदा हो क्या ? तुम्हे शायद लगता है कि ये सही नही..

“ऐसा कुछ नही है रियाल ! तुम जानती हो कि मेरे लिए मेरी जॉब, मेरा काम कितना महत्व रखता है.. मेरी ज़िंदगी में मुझसे जुडी हर वस्तु महत्वपूर्ण है… ।
लेकिन सबका अपना स्थान है..। कोई किसी को ओवरलैप नही कर सकता.. ।
रियाल तुम्हारी जग़ह कोई नही ले सकता!”

“फिर मुझे कहीं साथ ले जाने में झिझकती क्यों हो ?”

“मैं कहाँ और कब झिझकी हूँ ?”

“तो अभी.. ? अभी ऑफिस के लिए क्यों मना कर रही..? आखिर वो मेरा भी ऑफिस है, मुझे भी डॉक्युमेंट्स सब्मिट करने बोला गया था कि दो चार दिन में आकर कर देना.. सोचा था आज ही तुम्हारे साथ जाकर कर लूँ..।”

“ओके रेडी हो जाओ.. मैं तो तैयार हो चुकी हूँ !”

रियाल खुश होकर मीठी के गले से लग गयी… और फटाफट तैयार होने चली गयी..
उसने एक दिन पहले हर्ष की पहनी शर्ट के रंग की ही शर्ट निकाली और पहन ली…

लेकिन इस बात पर मीठी का ध्यान नहीं गया..

वो दोनों साथ ही ऑफिस पहुँच गयीं…

ऑफिस पहुंचने के बाद मीठी ने अपने कार्ड से दरवाज़े पर के लॉक को खोला, और रियाल को साथ लेकर अंदर चली गयी..।
रियाल रिसेप्शन पर मौजूद लड़की के पास अपना आईडी कार्ड और बाकी औपचारिकताओं के लिए उससे पूछताछ करने चली गयी..।
मीठी अंदर दाखिल हो गयी..
धनुष ने उन सब को किसी नए प्रोजेक्ट की मीटिंग के लिए बुलाया था..
वो सारे प्रोजेक्ट को उन सब को समझा रहा था कि उसी बीच हर्ष भी वहाँ चला आया..।
रियाल ने बाहर से ही देख लिया की हर्ष भी मीटिंग रूम में दाखिल हो रहा है..।

वो भी वहाँ जाना चाहती थी, लेकिन जानती थी कि ऐसे किसी मीटिंग के बीच वो नही जा सकती। इसलिए मन मसोस कर बाहर वेटिंग लॉउन्ज में बैठ गयी.. ।

अंदर दाखिल होते समय ही हर्ष ने बाहर बैठी रियाल को देख लिया था…

धनुष जिस काम को बाकी लोगो को समझा रहा था उसमे हर्ष भी उसकी मदद करने लगा, और इसी सब काफी समय निकल गया…।
वो लोग मीटिंग के बाद बाहर निकले तब मीठी का ध्यान गया की रियाल बहुत देर से अकेली बैठी है.. वो भाग कर उसके पास पहुँच गयी.. ।

“तुम तो बहुत बोर हो गयी होंगी ना ? देखा, इसीलिए मैं मना कर रही थी कि मत चलो मेरे साथ !”
.”तुम्हारा इंतज़ार करना भी पसंद है मुझे.. !” रियाल मुस्कुरा उठी और उसका भोला चेहरा देख मीठी भी मुस्कुराने लगी..

“चलो तुम्हे कैंटीन ले चलती हूँ.. कॉफी पीते हैं !”
वो दोनों कैंटीन चले गए और वहीँ धनुष और हर्ष भी चले आये..

उन दोनों को देखते ही रियाल का मन ख़राब हो गया… खास कर हर्ष को देख कर, लेकिन उसने अपने चेहरे को सामान्य बनाये रखा..
मीठी के मिलवाने पर वो हर्ष और धनुष से बड़ी गर्मजोशी से मिली लेकिन मीठी का भले ही इस बात पर ध्यान नहीं गया लेकिन हर्ष ने ज़रूर गौर किया कि पिछले दिन की उसकी शर्ट के रंग की ही शर्ट पहन कर रियाल आयी हुई थी..

हर्ष को रियाल से कोई समस्या नही थी, लेकिन रियाल के लिए हर्ष बहुत बड़ी समस्या था..।

धनुष उन लोगो से बातचीत कर दूसरी तरफ निकल गया लेकिन हर्ष वहीँ बैठ गया..

मीठी उन तीनो के लिए कॉफी लेने काउंटर पर चली गयी और तब रियाल और हर्ष अकेले रह गए… हर्ष ने रियाल की तरफ देखा..

“मुझसे कोई शिकायत है रियाल ?”

रियाल ने हर्ष की तरफ देखा और ना में गर्दन हिला दी..

“तुमसे मुझे क्यों शिकायत होगी ?”

“वही तो मैं जानना चाहता हूँ कि मुझसे क्या शिकायत है? “

“तुम्हे ऐसा क्यों लगता है कि तुमसे शिकायत करुँगी !”

“ये तो तुम्हे सोचना है.. मेरी तरफ से तुम स्वतंत्र हो !”

“वैसे मिस्टर हर्ष, मैं वो नही जो अपनी मर्ज़ी के लिए या स्वतंत्रता के लिए आप पर निर्भर रहूं !”

“मैंने तो ये भी नही कहा !”

“लेकिन आपका मतलब साफ साफ समझ आ रहा है !”

“तुम्हे समझ आ रहा तो मुझे भी बताना ज़रा !”

हर्ष कि बात पर रियाल खुद पर काबू नही कर पायी और उस पर बिफर गयी…
रियाल को गुस्सा बहुत आता था और यही उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी थी..

“तुम खुद को समझते क्या हो.. मोस्ट एलीजिबल रिच एंड डेशिंग बेचलर ?”

“ये तो मैं हूँ.. इसमें समझने वाली बात कहाँ से आयी ?”

“होंगे लेकिन दूसरों के लिए! मेरे लिए नही हो और ना मैं मीठी के लिए होने दूंगी !”

“इतनी इनसिक्योर क्यों हो ?”

“किसने कहा मैं इनसिक्योर हूँ.. !”

“तुम्हारी हरकतों ने! अगर प्यार करती हो तो अपने प्यार पर भरोसा करना भी सीखो ! दुनिया तुम्हे बाद में गलत समझेगी, पहले तुम खुद तो खुद को गलत समझना बंद करो….
जो कर रही हो अगर उसे गलत नही मानती तो फिर छुपाती क्यों हो….
पूरे गर्व और स्वाभिमान से स्वीकार करो, जो तुम हो ! तुम खुद इस बात पर यकीन करो कि तुम गलत नही हो !”

उन दोनों कि बातों के बीच ही मीठी वहाँ चली आयी..

“क्या बात है.. लगता है मेरे दोनों दोस्तोँ की भी आपस में दोस्ती हो गयी… !”

रियाल और हर्ष दोनों हल्का सा मुस्कुरा कर रह गए…!
रियाल ने अपना कप मीठी की तरफ बढ़ा दिया..मीठी ने ‘क्या’ का इशारा किया और रियाल ने उसे अपने कप से कॉफी पीने का इशारा किया..
मीठी ने मुस्कुरा कर उस कप से कॉफी की एक घूंट भरी और रियाल ने वो कप अपनी तरफ कर लिया..
अपने होंठो से कप लगा कर रियाल हर्ष कि तरफ देखने लगी..

हर्ष ने रियाल को देखा और चुपचाप अपनी कॉफी उठा कर पीने लगा..
उसी समय उसके मोबाइल पर रानी माँ का फ़ोन आने लगा..
उनसे बात कर उसने फ़ोन रखा और हैरान सा मीठी की  तरफ देखने लगा..

“क्या हुआ हर्ष ?”

“हम्म मीठी, आज शाम हम सब को महल वापस लौटना है.. माँ साहब का फ़ोन था.. !”

रियाल चौंक कर हर्ष की तरफ देखने लगी..

“आपकी माँ का फोन था तो मीठी क्यों जाएगी ?”

“क्यूंकि माँ साहब ने मीठी धनुष सभी को साथ लेकर आने बोला है.. शौर्य भी जायेगा.. वो इस वक्त बनारस में हैं.. आज ही वो और काका साहेब काकी सा के साथ घऱ के लिए निकल रहे.. जाओ मीठी तुम भी तैयारी कर लो.. शाम में हम सब अपनी गाड़ियों से ही महल के लिए निकल जायेंगे..

इतना बोल कर हर्ष खड़ा हो गया और अपने ऑफिस की तरफ जाने मुड़ गया!
जाते हुए वो हल्का सा मुड़ा और रियाल को देख कर हल्के से मुस्कुरा कर चला गया..

क्रमशः.

aparna…

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Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
1 year ago

दो लोगों के बीच प्यार की जंग चल रही है, हा हा…. पर वासुकी को इण्डिया आना है उसकी सोच सही है, पर कली की एंट्री कैसे होगी, उसके डैड का सच उसका सच और उसके सपने का साफ साफ़ रुप कब क्लियर होगा l, पढ़ने के लिए उत्सुक, बेहतरीन भाग दीदी…👍💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

पता नहीं क्यों मुझे रियाल वैसी नहीं लग रही जैसा उसने खुद को दिखाया है, क्या सच में वो हालातों की मारी है मुझे ऐसा लग रहा वो मीठी के जरिये हर्ष तक पहुंचना चाहती है पर ये सच है या गलत जानना अभी बाकी है 😊।

कली का एक सपना आज पूरा हो गया, राजा साहब से मिलने का सपना, और अब शौर्य उसे महल भी ले जाएगा। अब दो दिन और कली शौर्य के साथ रहेगी 😊।ज़ब दोनों को एहसास हो गया है अपने प्यार का तो देखते है कैसे शुरू होती है इनकी प्रेम कहानी 😊।
देखते है आगे क्या होता है।
बहुत खूबसूरत भाग 👌👌👌👌👌🙏🏻।