जीवनसाथी -3 भाग -44

कली कॉरिडोर में यहाँ से वहाँ टहल रही थी..
उसका कहीं मन नहीं लग रहा था। इतना सूनापन, इतनी घबराहट उसने कभी महसूस नहीं की थी। उसे लग रहा था जैसे रेत की तरह समय उसके हाथ से फिसला जा रहा है, और वह कुछ नहीं कर पा रही है।
इतनी लाचारगी उसने कभी महसूस नहीं की थी। उसे अपने डैडा की याद आने लगी। उसे लगा आज डैडा यहां होते तो शायद वह सब ठीक कर देते।
प्रिंस को भी पूरी तरह से ठीक करके वह उसके सामने खड़ा कर देते..।
वह घबराई हुई सी सिर्फ उस रास्ते की तरफ देख रही थी, जहां से शौर्य को अंदर ले जाया गया था कि, तभी ओटी का दरवाजा खुला और एक नर्स बाहर चली आई..
“आपके मरीज़ को ऑपरेशन के लिए लेकर जा रहे हैं.. !”
“क्या मैं उन्हेँ एक बार देख सकती हूँ.. ?” लरजते हुए कली ने उस नर्स से मिन्नत सी की.. नर्स ने हाँ में गर्दन हिला दी..
नर्स कली को अपने साथ लिए अंदर चले गई।
कली को बालों में एक कैप लगाने के लिए दिया और उसके हाथों में मास्क देकर उसे अपने साथ लेकर ओटी में दाखिल हो गई।
ओटी में उस नर्स के अलावा दो और नर्स और एक युवा डॉक्टर मौजूद था। वह डॉक्टर फिलहाल एक्सरे मॉनीटर में शौर्य की बांह की पोजीशन देख रहा था। कली चुपचाप आकर शौर्य के पास खड़ी हो गई…..।
शौर्य दर्द से बेहोश था या, उसका दर्द कम करने के लिए उसे बेहोश किया गया था। यह मालूम नहीं चल रहा था। लेकिन वह बिल्कुल बेसुध पड़ा था। उसका एक हाथ उसकी चादर से बाहर निकला नजर आ रहा था। धीरे से उसके पास पहुंच कर कली ने अपना हाथ उसकी हथेली की तरफ बढ़ाया कि तभी उस डॉक्टर की आवाज कली के कानों में पड़ी। उस डॉक्टर ने अब तक अपने पीछे की तरफ खड़ी कली को नहीं देखा था..
” ओह शिट, मुझे लगा था गोली बस छूकर निकल गयी है, लेकिन ये तो अपर क्वाड्रेंट में फंस गयी है..।
इसीलिए इतना ज्यादा ब्लीड कर रहा था.. ! कम ऑन सिस्टर्स, क्विक.. जल्दी काम शुरू करना पड़ेगा.. !”
उस डॉक्टर की बात सुनकर कली और घबरा गई। और उसके मुंह से एक सिसकी सी निकल गई। उसकी आवाज सुनते ही डॉक्टर ने पलट कर देखा, और गुस्से में नर्स को घूरने लगा।
“ये कौन है, और यह यहां क्या कर रही है?”
नर्स की भी नई-नई शादी हुई थी। शायद इसीलिए वह कली का दर्द समझ पा रही थी।
” सर यह इस मरीज की वाइफ है…बस इसीलिए !”
यह बात सुनकर वह युवा डॉक्टर भी पसीज गया। आखिर था तो वह भी कम उम्र का लड़का ही।
उसके चेहरे के भाव बदल गए। उसने कली को देखा। और उसे समझने लगा।
” आप घबराइए नहीं, हम इन्हें ठीक कर लेंगे। लेकिन पहले जितना कैजुअल यह केस लगा था, उतना कैजुअल है नहीं।
कोशिश हमारी पूरी है कि आपके मरीज को हम कुछ न होने दें, लेकिन ऑपरेशन में थोड़ा वक्त लगेगा। आप लोग धैर्य बनाए रखें, और बाहर इंतजार कीजिए।”
इतना बोलकर वह डॉक्टर रिपोर्ट्स को एक तरफ रख ऑपरेशन के लिए तैयार होने दूसरी तरफ के दरवाजे से बाहर निकल गया। वहां मौजूद तीनों नर्स अपने-अपने काम में लगी हुई थी।
कली को शौर्य की तरफ देखकर लग रहा था, उसका मन कर रहा था भाग कर उसके सीने पर अपना सर रख दे। उसके कानों में चुपके से कह दे कि मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं, और मैं चाहती हूं कि तुम मेरे लिए वापस आ जाओ…।
उसने धीरे से शौर्य की उंगलियों पर अपनी उंगलियां फिरानी शुरू कर दी। उसे ऐसा लगा शौर्य की उंगलियां हल्के से कांप उठी है। वो उसका चेहरा देख रही थी। उसकी पलकों में भी कली ने हलचल सी महसूस की। उसका मन कर रहा था, एक बार उसके चेहरे के पास चली जाए। उसने नर्स की तरफ देखा, वह नर्स जो उसे साथ लेकर आई थी, वहां से एक ट्रे में कुछ जरूरी सामान लेकर बाहर चली गई थी।
एक दूसरी बुजुर्ग नर्स वहां मौजूद थी। उसने घूर कर कली को दिखा और उसे ना में उंगली दिखाती हुई वह भी बाहर चली गई।
” मरीज को छूना नहीं है।” कली उसकी डांट से जर घबरा तो गई लेकिन शौर्य को अपने पास देखकर वह अपने आप को रोक नहीं पाई।
वहां मौजूद एक मात्र नर्स उस वक्त मॉनिटर पर कुछ काम कर रही थी। कली ने अपनी सारी हिम्मत समेटी और शौर्य के चेहरे के एकदम करीब चली आई। उसके गालों पर अपने गाल धीरे से छू कर कली ने शौर्य के पास जाकर बहुत ही धीमे से अपने मन की बात कह दी।
” तुम वापस आओगे प्रिंस! तुम्हें मेरे लिए वापस आना होगा! अभी तुमने मुझे मेरे पहले क्रश से नहीं मिलवाया है। मेरी मौसी मां से नहीं मिलवाया है, और जब तक तुम यह दोनों काम नहीं करोगे मैं यहां से कहीं नहीं जाऊंगी..।”
कली की आंख से आंसू का एक टुकड़ा शौर्य के गाल को भीगा कर चला गया..।
अपने आप को संभालती कली खड़ी हो गयी.. वो जाने को थी कि उसे लगा उसकी उंगलियों पर शौर्य की उँगलियाँ लिपटी हुई हैं..
आश्चर्य से उसने उसके हाथ की तरफ देखा….
वाकई शौर्य की उँगलियाँ उसकी उंगलियों पर लिपटी थीं..
“पेनकिलर के असर में ऐसा होता है !”
नर्स की बात सुन वो झेंप कर बाहर निकल गयी..
उसके निकलते ही वो नर्स एक भीगा हुआ कॉटन का टुकड़ा लाकर शौर्य की उँगलियाँ और गाल साफ कर गयी..
कली के बाहर जाने के कुछ देर बाद ऑपरेशन के लिए स्टाफ वहाँ पहुँच गया और उन लोगों ने ऑपरेशन शुरू कर दिया.. !
कली परेशान थी, उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे..? और तभी उसने शौर्य का मोबाइल निकाल लिया..
शौर्य का मोबाइल उसके पर्स में ही पड़ा था.।
मोबाइल निकालने पर पहली बार कली का ध्यान मोबाइल के ब्रांड पर गया..।
ये ड्राइवर भी ना..!
है गरीब, लेकिन शौक सारे रईसों वाले पाल रखे हैं…। लाख लाख रुपये का तो मोबाइल लिए फिरता है..
खैर.. हो सकता है इसके रईस मालिक ने इसे दिया होगा.. !”
तभी कली को वो एक बात याद आ गयी, जब शौर्य से एक लड़का मिलने आया था..
दुबला पतला सांवला सा लड़का शौर्य से मिलने आया था, और उसे आते देख शौर्य खुद होकर उसकी तरफ भागता चला गया था.. कली को उसने उस लड़के का परिचय अपने मालिक के तौर पर दिया था…
काली नहीं जानती थी कि वह असल में शौर्य का ड्राइवर था।
दूर से उन दोनों को बात करता देख कली को ये कहीं से नहीं लग रहा था कि, शौर्य नौकर और वो लड़का मालिक है…।
शौर्य का बात करने का अंदाज़ ही निराला था…
उसके खड़े होने का अंदाज़, बात करते समय उसकी गर्दन की अकड़, उसके चेहरे के हाव भाव, हर तरफ से उसका जो एक एटीट्यूड था वो कहीं से ऐसा नहीं लग रहा था कि वो अपने मालिक के सामने खड़ा है..।
हाँ अंत में उसके मालिक ने जाने से पहले उसके हाथ में कुछ रूपये ज़रूर रखे थे, लेकिन कली जब तक भाग कर उन लोगों तक पहुंची उनकी बातें ख़त्म हो गयी थी..।
शौर्य के मालिक से मिलने पर वो लड़का कैसे हड़बड़ा गया था.. आज भी उस बात को याद कर कली के चेहरे पर हंसी चली आयी..
और कली को साथ लिए पुरे आत्मविश्वास से शौर्य वहाँ से निकल गया था..
“कभी कभी ना लगता ही नहीं कि तुम ड्राइवर हो, दूर से तुम दोनों को बात करते देख कोई नहीं कह सकता कि तुम ड्राइवर और वो मालिक है.. ऐसा लग ही नहीं रहा था..।”
“फिर क्या लग रहा था.. !”
“इसका उल्टा.. मतलब तुम मालिक और वो तुम्हारा ड्राइवर !”
आज उन बातों को सोचती कली ने शौर्य के मोबाइल को अलट पलट कर देखा और उसका फ़ोन खोल लिया..
स्क्रीन पर राजा अजातशत्रु की तस्वीर थी, रानी बांसुरी के साथ..
रानी बांसुरी ऊँची सी महाराजा कुर्सी पर एक पैर पर दूसरा पैर चढ़ाये बैठी थी…
बादामी मोतियों सितारों से सजी साड़ी में उनका रंग और खिल रहा था..
खुले बालो पर सामने से पीछे की तरफ क्लिप कर के खुला छोड़ा था.. एक छोटी सी मोती की बिंदी माथे पर चमक रही थी और उसी से मैच करता हीरों का सेट गले और कान की शोभा बढ़ा रहा था..
रानी बांसुरी का रूप जैसा दमक रहा था, उसे टक्कर देते राजा साहब चमक रहे थे..
गहरे मैरून कुर्ते और सफ़ेद धोती डिज़ाइन के पाजामे के साथ उनके गले में पड़ी तीन लड़ियों की मोतियों की माला भी खुद की किस्मत पर जैसे इठला रही थी..
कुर्सी के पिछले हिस्से पर एक हाथ टेक कर खड़े राजा साहब अपने निराले अंदाज़ में मुस्कुरा रहे थे..
कली उस तस्वीर को देखती मंत्रमुग्ध हो गयी..
“अच्छा तो उसका मतलब ये भी राजा साहब का फैन है.. और बन तो ऐसे रहा था जैसे जानता तक नहीं.. वही मैं सोचूं की ऐसा कैसे संभव है.. जब लंदन में रह कर मैं राजा साहब की ऐसी दीवानी हो सकती, तो ये तो फिर इण्डिया में ही रहता है.. इस पर राजा साहब का जादू कैसे नहीं चला..?
बुद्धूराम, लेकिन एक बात है तुम्हारा चेहरा राजा साहब से इतना ज्यादा मिलता है कि कोई भी उल्लू गधा बड़े आराम से तुम्हे उनका बेटा मान सकता है!”
इतने गंभीर समय में जब उसकी आंखे बार बार भर रही थी, शौर्य की यादें उसके चेहरे पर मुस्कान लाये दे रही थी..
कैसा अजीब लड़का है.. उसी के कारण आंखे भर रही और होंठ मुस्कुरा रहे..
दिमाग सुन्न हुआ पड़ा है और दिल में प्यार की लहरे सनसना रहीं हैं…
कली ने उसके फ़ोन पर कॉल लिस्ट निकाली और सबसे अंत में लगे नंबर पर बात कर के शौर्य की हालत बताने के लिए कॉल मिलाने की सोची, लेकिन आखिरी नंबर जिस पर शौर्य ने बात की थी वो उसकी मॉम का था..
.”ये देखो एक और चोंचला.. साधारण गरीबो की तरह माँ अम्मा माता जी की जग़ह अपनी माँ को मॉम कह रहा.. ! शौक बड़ी चीज़ है जनाब.. लड़के को रईसी का भारी शौक है !”
वो एक बार फिर मुस्कुरा उठी.. कॉल लगाने जा रही थी कि वो रुक गयी..
“पता नहीं इसकी माँ ये सदमा बर्दाश्त भी कर पायेगी या नहीं.. ? बेचारी खुद ही बीमार लचर सी होंगी और मैं इसकी हालत बता कर उन्हेँ और परेशान कर दूंगी.. नहीं उन्हेँ बताना सही नहीं है !”
ये सोच कर उसने फ़ोन वापस पर्स में डाल लिया..
लल्लन उतनी देर में उसके लिए चाय ले आया.. लल्लन के फ़ोन पर गुड्डन भी वहाँ चली आयी..
आते ही हड़बड़ाई सी वो लल्लन से लिपट गयी..
“हाय तुम तो ठीक हो ?”
“हमे का हो रहा? हम तो तुम्हे जे के लाने बुलाये रहे !” उसने कली की तरफ इशारा कर दिया..
अपने सामने खड़ी खूबसूरत सी कली को देख गुड्डन को अचानक कुछ समझ नहीं आया..
“हैं… का मतलब ?”
“मतलब जे जिज्जी और इनके उनको हम बनारस घुमा रहे थे कि घाट पर गोलीकांड हुई गवा। और गोली भैया जी को छू कर निकल गयी.. !”
गुड्डन ने पुराने अभ्यास से मजबूर अपनी नाक पर चुन्नी रखी और टंसुए बहाती कली से लिपट गयी.. कली इस हमले के लिए तैयार नहीं थी, वो उसे सँभालने की कोशिश में थी कि एक नर्स भागती हुई चली आयी..
“सुनिए… खून बहुत बह रहा है.. इनके ब्लड ग्रुप का खून हमारे बैंक में भी नहीं है.. तुरंत ब्लड की ज़रूरत है.. !”
कली तुरंत नर्स तक पहुँच गयी..
“आप मेरा ले लीजिये.. और उन्हेँ चढ़ा दीजिये.. !”
” अरे मैडम यह कोई मूवी नही है। मूवी में जैसा दिखता है ना कि एक बेड पर देने वाला लेटा है। उसका खून निकाल कर दूसरे में चढ रहा है। ऐसा कुछ नहीं होता।
आप लोग उस तरफ ब्लड बैंक में जाइए। तीन पॉइंट ब्लड डोनेट कीजिए। वह ब्लड हमें दूसरे ब्लड बैंक भेजना होगा।
हम फोन पर बात कर ले रहे हैं। आपके दिए ब्लड के बदले, हमें उनके ब्लड ग्रुप का ब्लड मिल जाएगा ओके..?”
” ओके ठीक है मैं तीन पॉइंट ब्लड दे सकती हूं ना? किस तरफ जाना होगा..?”
” अरे नहीं, आप अकेली तीन पॉइंट नहीं दे सकती। आपके अलावा कोई दो लोग और चाहिए आपको।
और ब्लड डोनेशन के पहले आप लोगों का ब्लड टेस्ट होगा कि उसमें किसी तरह की कोई बीमारी तो नहीं है। इसके साथ ही आप लोगों का ब्लड ग्रुप भी टेस्ट किया जाएगा।
आप यहां से सीधे जाकर लेफ्ट में टर्न ले लीजिए, लास्ट में हमारा ब्लड बैंक है। जल्दी कीजिए मैडम..।”
हैरान परेशान सी कली पीछे की तरफ घूम कर आगे बढ़ने लगी। लल्लन भी उसके साथ हो लिया।
“जीज्जी हम भी ब्लड दे लेंगे, लेकिन तीसरा कौन मिलेगा?”
कली ने परेशान होकर लल्लन की तरफ देखा कि तभी सामने से आता विक्रम दिखाई दे गया। विक्रम ने आकर कली की तरफ देखा, और उसे आंखों से ही ढांढस बंधा दिया।
” मैं हूं ना, मैं दूंगा, चलिए।”
वह साथ में कली को लिए ब्लड बैंक की तरफ बढ़ गया.. वह दोनों ब्लड बैंक पहुंच गए। कली और विक्रम का सैंपल लेने के साथ ही वहां पर मौजूद नर्स ने उन लोगों को बता दिया कि अभी-अभी ओटी से फोन आया था। उन्हें सिर्फ दो पॉइंट ही चाहिए, इसलिए सिर्फ आप दोनों के ब्लड से काम चल जाएगा।
ब्लड ग्रुप और बाकी सारी जांच होने के साथ ही कली और विक्रम को लेकर नर्स अंदर चली गई। लल्लन गुड्डन के साथ बाहर ही बैठ गया..।
3 से 2 पॉइंट की जरूरत होने पर लल्लन ने आगे बढ़कर कली के सामने यह प्रस्ताव भी रखा कि कली की जगह वह खून दे देगा, लेकिन कली किसी हाल में उसकी बात मानने को तैयार नहीं थी।
“नहीं लल्लन भैया, आप एक गाइड के तौर पर हमसे मिले थे। पूरा बनारस घूमाने के साथ ही आपने हम लोगों की बहुत मदद की है। अब यहां तक आपने इतना साथ दिया है तो आगे भी साथ रहिएगा।
आपका साथ ही हमारे लिए बहुत है।”
उसकी हथेली थपथपा कर कली अपने आप को मजबूत करती अंदर चली गई थी। कुछ देर बाद ही दूसरे ब्लड बैंक से शौर्य के लिए खून का प्रबंध हो गया। कुछ देर में कली और विक्रम भी खून देकर बाहर चले आए..।
” कमजोरी तो नहीं लग रही आपको?”
विक्रम ने कली से पूछा और कली ने ना में सर हिला दिया। लेकिन उसे हल्की सी कमजोरी महसूस हो रही थी उसने बहुत देर से कुछ खाया पिया नहीं था। वह वही कुर्सी पर बैठ गई। दीवार से सर टिका कर उसने आंखें मूंद ली और तभी लल्लन और गुड्डन उन लोगों के लिए जूस लेकर वहां चले आए।
कली ने बहुत मन किया लेकिन लल्लन मानने को तैयार नहीं था.. उसने शौर्य की कसम दे दी…”भैया जी की कसम है आपको.. पी लीजिये !”
कली ने चुपचाप जूस गटक लिया..
विक्रम अपना जूस का बोतल पकड़े टहलते हुए दूसरी तरफ निकल गया…
उन लोगों को अस्पताल पहुंचे बहुत वक्त बीत चुका था..
कली की थकी हुई सी नजरे ऑपरेशन थिएटर के बाहर टिकी हुई थी..
कुछ देर बाद ही ओटी के ऊपर जलती हुई लाइट बंद हुई और दरवाजा खोलकर डॉक्टर बाहर चले आए..
कली उनके पास पहुँच गयी..
“आपका मरीज़ अब खतरे से बाहर है.. ! असल में शुरू में लगा था कि गोली छूकर निकल गयी है, लेकिन गोली धंसी रह गयी थी, जिसकी वजह से गोली निकालने के बाद कुछ ज्यादा ही खून बह गया…
“अभी तो वो ठीक है ना.. मैं मिल सकती हूँ क्या ?”
“नहीं इंफेक्शन का खतरा हो सकता है, इसलिए अभी किसी से मिलने नहीं दिया जा सकता… !
लेकिन कली का रुआंसा चेहरा देख डॉक्टर फिर पसीज गया..
डॉक्टर भी कम उम्र का लड़का ही था। वह कली के मनोभावों को समझ पा रहा था। उसे लगा कली शौर्य की गर्लफ्रेंड या बीवी है। उसने कली को देखकर ढांढस बंधाया और उसे अपने साथ लेकर अंदर की तरफ बढ़ चला
“आप बाहर से देख सकती है.. !”
“थैंक्स डॉक्टर !”
उसे कांच के पार शौर्य पूरी दुनिया से बेसुध लेटा हुआ दिखाई दे गया। उसकी बड़ी-बड़ी आंखें बंद थी। और उसके चेहरे पर एक अलग सी शांति छाई हुई थी। आसमानी रंग की चादर से उसे ऊपर से नीचे तक ढक दिया गया था। उसके आसपास ढेर सारी मशीनें लगी थी। उसके हाथ में लगी सुई से उसे जीवन दाहिनी दवाइयां दी जा रही थी। उसे देखते ही कली का फूट-फूट कर रोने का मन करना लगा।
कुछ समय पहले तक दोनों साथ-साथ हंसते खिलखिलाते घूम रहे थे। आज से तीन-चार दिन पहले जब शौर्य से उसकी पहली मुलाकात हुई थी, तब कली ने कभी सोचा भी नहीं था कि यह लड़का उसके दिल दिमाग में इस कदर छा जाएगा। उसकी भोली मासूम सी अजीबोगरीब बातें, उसे इस कदर छू जाएंगी।
जिस वक्त से शौर्य को गोली लगी थी और वह लोग अस्पताल आए थे, रह-रह कर कली को बीता हुआ हर पल याद आता जा रहा था।
उनकी गाड़ी में रखे ढेर सारे चिप्स बिस्किट्स के पैकेट भी शौर्य ने एक किनारे बैठे छोटे गरीब बच्चों में बांट दिए थे।
कैसा अजूबा लड़का था यह। अपने लिए कुछ रखना ही नहीं चाहता था। इसे देखकर, इसके साथ रहकर, यह महसूस होता था, जैसे वह किसी साधु सन्यासी के साथ है। जो अपने लिए कुछ भी नहीं रखना चाहता। यहां तक की इसकी जेब में एक पैसा भी नहीं था, लेकिन देखो एटीट्यूड पूरा राजकुमारों वाला था….।
खाने में विदेशी फल पसंद है। विदेशी कुकीज और चॉकलेट के नाम ऐसे रटे हुए थे, जैसे इन्हें खाकर इसकी सुबह शाम बीता करती हो।
सिर्फ ड्राइवर होने के बावजूद कभी इसने अपने दुख दर्द और गरीबी का रोना नहीं रोया, और यही तो इसकी सबसे बड़ी खासियत थी। कली शौर्य को देखते हुए खोई हुई सी थी।
कहां तो वह अपने एकमात्र सपने को पूरा करने हिंदुस्तान आई थी, और कहां इस अंजान लड़के में खो कर रह गई थी।
उसे याद आया कि अब उसे वापस भी लौटना है.. लंदन।
नहीं अपना लंदन नहीं कहेगी, क्योंकि लंदन उसे कभी अपना लगा ही नहीं!
भले ही वह लंदन में ही पैदा हुई, और पली बढी, लेकिन पहली बार आने के बावजूद उसे हिंदुस्तान से जो जुड़ाव महसूस हुआ और कहीं और नहीं हुआ।
वह हमेशा के लिए हिंदुस्तान नहीं आई है। और उसके पास अब सिर्फ छह दिन बाकी है। हालांकि अब उसका और किसी काम में मन नहीं लग रहा था। क्योंकि उसे समझ में आ गया था कि अब उसे शौर्य के बिना कुछ अच्छा लगना भी नहीं है।
लेकिन वह यह भी जानती थी कि उसके डैडा कभी भी शौर्य को नहीं अपनाएंगे।
उसके डैडा उसके लिए इतने ज्यादा पजेसिव थे कि, वह उसकी जिंदगी में किसी भी लड़के का आना सह नहीं सकते थे..।
वो जानती थी, अगर उसके मन की भावनाओ के बारे में उसके डैडा जान गए तो उसे कभी यहाँ नहीं छोड़ेंगे..।
पर वो खुद भी अपनी भावनाओं को अब तक कहां जान पाई थी।
आज जब शौर्य अचानक उसका हाथ छोड़कर चला गया था। तब उसे महसूस हुआ था कि यह लड़का सिर्फ उसका एक रूम पार्टनर नहीं सिर्फ दोस्त भर नहीं, बल्कि दोस्त से काफी कुछ ज्यादा है। और वह कुछ ज्यादा ही अब उसके दिल में हलचल मचाने लगा था।
पता नहीं जितना वह उस लड़के के बारे में सोच रही है, वह इतना कली बारे में सोचता है भी या नहीं?
कभी उसकी बातों से लगा तो नहीं। तो क्या उसके मन में एक तरफा प्यार जाग गया है।
कली का चेहरा गुलाबी हो गया…
लड़कों से उसकी दोस्ती नहीं थी, ऐसा तो नहीं था। उसके आसपास उसके ग्रुप में भी लड़के मौजूद थे। लेकिन आज तक कभी किसी के लिए उसने ऐसा महसूस नहीं किया था। आज शौर्य को यूं अपने सामने अवश पड़ा देखा उसका मन कर रहा था, भाग कर उसके सीने पर अपना सर रख दे।
लेकिन वह समझ गई थी कि अगर वह यहां रही और प्रिंस ने होश में आने के बाद यह मान लिया कि उसे भी कली से मोहब्बत है, तब भी वह अपने डैडा को कभी भी इस के लिए नहीं मना पाएगी, और अगर प्रिंस ने होश में आने के बाद उसकी मोहब्बत को कबूल नहीं किया, तब भी वह जीते जी मर जाएगी…
इससे बेहतर है कि प्रिंस के होश में आने के पहले ही वह उसे छोड़कर चली जाए..
वैसे भी अब वो खतरे से बाहर है.. विक्रम और लल्लन उसका ध्यान रख लेंगे.. !
क्रमशः

चिकित्सा विज्ञान ने ढ़ेरों अविष्कार के बाद भी अब तक सुई से निजात पाने का हल नहीं ढूंढा है या ढूंढना ही नहीं चाहती, क्या है इसका कारण, पर शौर्य को लगी गोली के बाद और समां को लगाई गई सुई के बाद मैं समझता हूं हर किसी को उससे डरने की जरूरत है और सुई का विकल्प ढूंढ़ा जायेगा इसकी आशा है। कली को प्यार हो गया और ऐसा ही राजा और बांसुरी के केस में भी हुआ था उम्मीद है दोनों का साथ बने, नाईस पार्ट दीदी…👍👌💐🙏
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️♥️⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐