जीवनसाथी -3 भाग -6

बाहर निकल कर उसने एक गहरी सी फूंक छोड़ी और अपनी गाडी में आकर एक सिगरेट सुलगा ली..
मीरा उसकी समझ के बाहर थी… उससे मुलाकात का किस्सा भी बड़ा अजीब था…
उसे दो हफ्ते पहले का वो मंजर याद आने लगा… जब वो मीरा से पहली बर मिला था..
वैसे उस मुलाकात में याद रखने लायक कुछ था भी नहीं, जाने क्यूँ और कैसे मीरा इसकी दोस्त बन गयी थी…
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अगले दिन मीरा वक्त पर तैयार होकर हर्ष के ऑफ़िस के लिए निकल गयी..
उसे शौर्य ने पता बता दिया था..
सुबह सुबह जब मीरा ने उसे फ़ोन लगाया तो शौर्य ने उठाया नहीं..
“सो रहा होगा अब तक.. खुद तो प्रिंस पैदा हो गया है, अब उसे क्या फर्क पड़ना है गर्लफ्रेंड कहीं जाने के लिए परेशान हो रहीं हो या नहीं !”
“मीशा यार तू भी अजीब है.. तू राजा साहेब के बेटे से ये उम्मीद कर रहीं की वो सुबह आठ बजे उठ कर अपने पैलेस से यहाँ आए और तुझे पिक करें और फिर अपने ही ऑफ़िस में छोड़ दे.. ये कैसे संभव है यार.. ! वो तो अभी इतना गहरे प्यार में दिखता भी नहीं, इन्फेक्ट उसे देख कर ये लगता ही नहीं की वो तुझसे प्यार करता है !”
“जानती हूँ वो प्यार नहीं करता, लेकिन एक दिन करेगा… उस महल की महारानी तो मैं ही बनूँगी.. !”
“दरवाज़े पे खड़े रहने से ही बस कोई नहीं आ जाता है,
देख लो मन भर के ख्वाब, ख्वाब देखने में क्या जाता है “
मीरा की दोस्त ने चुटकी ली और उसे घूर कर मीरा अपने फ्लैट से निकल गयी…
मीरा बिल्कुल समय पर हर्ष के ऑफ़िस पहुँच गयी, उसे पहले ही शौर्य ने हर्ष के बारे में बता रखा था कि वो समय का पाबंद और काम में ईमानदारी पसंद करने वलों में से हैं..
और अब मीरा का लक्ष्य हर्ष पर अपना रंग जमाना था..
लेकिन इतनी जल्दी पहुँच कर मीरा भले अपने को तीरंदाज़ समझ रहीं थी, लेकिन अंदर का नज़ारा देख उसकी आंखें चौड़ी हो गयी….
अंदर उसी की उम्र की लड़कियों यानी मॉडल्स की भीड़ जमा थी और उनके स्क्रीन टेस्ट शुरू हो चुके थे..
वहाँ एक लड़का था जो आकर एक एक का नाम पुकार कर उन्हें अपने साथ ले जाता था..
मीरा ने उसके पास पहुँच कर अपना परिचय दिया और बस हां में गर्दन हिला कर उसने अपने हाथ में पकड़ रखी लिस्ट में उसका नाम टिक कर दिया..
“एक्सक्यूज़ मी.. सुनिए तो.. मैं शौर्य मेरा मतलब शौर्य प्रताप की दोस्त हूँ, उसने कल हर्ष सर से मिलवाया भी था… हर्ष सर ने कहा था सीधे अंदर चली आना.. जाइये और उन्हें बता दीजिये की मीरा आई है.. !”
मीरा की बात सुन उस लड़के ने चेहरें पर बिना कोई भाव आये वहाँ बैठी लड़कियों की तरफ देख कर इशारा कर दिया….
“यहाँ बैठी दर्ज़न भर लड़कियां शौर्य सर की दोस्त हैं, हर हफ्ते उनकी एक नयी दोस्त बनती ही रहती है.. इनमें से कई तो साल भर पुरानी भी हैं..
“व्हाट.. ?”
“जी हाँ… उनकी सारी पुरानी नयी दोस्त जाने कहाँ कहाँ से निकल कर ऑडिशन के लिए आई हैं.. !”
“लेकिन… सुनो.. लेकिन मैं हर्ष सर से मिल चुकी हूँ. !”
“मैम.. यक़ीन मानिये ये सब भी हर्ष सर से मिल चुकी हैं.. हर्ष सर पर इन मेल मुलाकातों का असर नहीं होता है..!”
वो लड़का अगले नंबर की लड़की को साथ लिए अंदर चला गया और मीरा खीझ कर रह गयी..
.”शौर्य के बच्चे.. तेरा तो मैं ख़ून पी जाउंगी.. !”..
अपने दाँत चबाते हुए मीरा ने होंठो ही होंठो में बुदबुदाया और उसके बगल वाली लड़की हंसने लगी…
“अब तुम्हें क्यूँ हंसी आ रहीं है ?”
कहते हुए मीरा शौर्य को फ़ोन लगाने लगी..
“यहाँ बैठी एक्का दुक्का लड़की को छोड़ दो तो ज्यादातर शौर्य की फ्रेंड्स ही हैं… शौर्य का दिल बहुत बड़ा है, जो लड़की उसके सामने मुस्कुरा दे वो उसके साथ बैठ कर कॉफ़ी पी लेता है..
पूरा प्लेबॉय है… उसके चक्कर में पड़ने वाली हर लड़की यहीं सपना देखती है कि एक दिन उसके पैलेस में पहुँच जायेगी, पर इस बात में कोई सच्चाई नहीं है… !
हाँ लेकिन एक बात है उसने हर एक को हर एक को हर्ष से तो मिलवा ही दिया…
मीरा मुहँ चढ़ाये बैठी रहीं..
उसे शौर्य पर बेहद गुस्सा आ रहा था, उसे लगा था शौर्य की गर्लफ्रेंड है ये समझ कर यहाँ उसके साथ थोड़ा अलग और अच्छा व्यवहार किया जायेगा, लेकिन यहाँ ऐसा कुछ नहीं था…
“अंदर स्क्रीनटेस्ट तो डायरेक्टर ले रहा होगा ना… हर्ष तो अभी आया नहीं होगा.. ?”
मीरा ने उसी लड़की से पूछा..
“हर्ष सर डायरेक्टर से पहले पहुँच चुके थे… वो अपने काम के प्रति बहुत ज़िम्मेदार और ईमानदार है.. हद से ज्यादा पंक्चुअल हैं.. कोई आये ना आये उन्हें अपने वक्त पर पहुंचना है और अपना काम शुरू कर देना है…।
उस लड़की की बात सुन मीरा की आंखें छोटी छोटी हो गयी जैसे वो कुछ सोच रहीं हो…..
“फिर उन्होंने मुझे अब तक बुलाया क्यूँ नहीं ?”
“क्यूंकि वो जितना तुम्हें जानते हैं, उतना यहाँ हर लड़की को जानते हैं.. !
यहाँ पर हम जैसे नए मॉडल्स के अलावा कई स्थापित मॉडल्स भी हैं, जो उनके लिए पहले भी काम कर चुकी है..
” लेकिन मैंने तो सुना है कि पहली बार वह किसी मॉडल की तलाश में थे.. ।”
” वह तो इस परफ्यूम ब्रांड के लिए, बाकी उनका ढेर सारा कारोबार है… लगता है तुम्हारा होमवर्क सही से नहीं हुआ.. !”
वो लड़की मीरा पर हॅंस कर रह गयी…
और मीरा अपना उतरा हुआ सा मुहँ लेकर रह गयी, उसे जितना आसान लगा था उतना आसान था नहीं ये काम..
कुछ देर में ही वहाँ सभी मॉडल्स के लिए कॉफ़ी लेकर एक लड़का चला आया.. मीरा ने फिर बाजू वाली से पूछताछ शुरू कर दी..
“अब ये कॉफ़ी क्यूँ पिलाई जा रहीं भई.. ?”
“ये किसी ऐरे गैरे का नहीं बल्कि हर्षवर्धन सर का ऑफ़िस है… वो अपने यहाँ काम करने वालों के साथ साथ काम ना करने वालों का भी पूरा ध्यान रखते हैं..। यहाँ जब भी ऑडिशन होता है, मॉडल्स के लिए चाय नाश्ता लंच सब की व्यवस्था वो खुद करवाते हैं.. जबकि ऐसा और कहीं नहीं होता..।
एक बार एक मॉडल की तबियत बिगड़ गयी थी, तब उसे तुरंत अपने ही फाइव स्टार हॉस्पिटल में दिखवाने भेज दिया था.. पर्सनली उससे मिलने भी गए.. ! उसका हालचाल लिया.. !”
मीरा ने उसकी बात सुन कर हामी भर दी…
उसने कॉफ़ी उठायी और धीरे धीरे सुड़कने लगी..
कुछ देर बाद फिर ऑडिशन शुरू हो गए.. मीरा अपनी जगह से उठी और कॉरिडोर में टहलने लगी.. अचानक उसने अपना सर पकड़ा और घूम कर ज़मीन पर गिर गयी.. वहाँ बैठी सभी लड़कियों और मौजूद स्टाफ में हड़कंप मच गया.. आखिर ऐसा क्या हुआ जो ये लड़की बेहोश हो गयी..
अंदर हर्षवर्धन के ऑफ़िस में वो और उसका असिस्टेंट डायरेक्टर के साथ बैठे ऑडिशन देख रहें थे, हालाँकि हर्ष को इस काम में कभी मज़ा नहीं आता था, वो बस औपचारिकता के लिए वहां बैठा ज़रूर था और अपनी काम की कोई दूसरी फाइल देख रहा था.. उसके ऑफ़िस में लगी स्क्रीन पर जब बाहर के सीसीटीवी की फुटेज नज़र आई जिसमे भगदड़ सी दिख रहीं थी, तो हर्ष के इशारे पर उसका असिस्टेंट तुरंत खड़ा हो गया..
“मैं देखता हूँ क्या हुआ ?”
और वो तुरंत बाहर निकल गया…
कुछ देर में वो बेहोश मीरा को लेकर हर्ष के ऑफ़िस में चला आया..
ऑफ़िस में अंदर की तरफ बने रेस्ट रूम में मीरा को लेटा दिया गया…
“क्या हुआ धनुष ? कोई गंभीर बात ?” हर्ष की गहरी सी आवाज़ मीरा के कान में पड़ी और उसके दिल में फुलझड़ियां छूटने लगी कि कम से कम अब उसे नोटिस तो किया जायेगा..
“नहीं.. ऐसा कुछ ख़ास तो नहीं लग रहा, हो सकता है बीपी लो हुआ होगा… !”
“हम्म.. ऑफ़िस के डॉक्टर को बुला लो.. !”
“बुला लिया है.. !” कुछ देर में ही डॉक्टर भी आ गया.. उसके आने तक में थोड़ा हिलडुल कर मीरा होश में आने की एक्टिंग कर के धीरे से उठ बैठी..
हर्ष ने उसे देखा और उसका हालचाल पूछने लगा, अपने चेहरें पर किलो भर मासूमियत लपेट कर हर्ष की आँखों में आंखें डाल वो उसकी हर बात का जवाब देने लगी..
“आपने शायद मुझे पहचाना नहीं.. हम कल ही तो मिले थे… !”
मीरा की ये बात सुन कर धनुष और वहीं खड़ा डायरेक्टर दोनों ही हर्ष को चौंक कर देखने लगें..
हर्ष किसी लड़की से मिला था ये वहाँ पर सभी के लिए बेहद चौंकाने वाली बात ही थी…।
हर्ष ध्यान से मीरा को देख पहचानने की कोशिश करने लगा..
उसने पिछली रात भी उस पर बस एक उड़ती सी नज़र डाली थी..
“अच्छा याद आया.. तुम शौर्य के साथ आई थी ना ? “
मीरा ने हामी भर दी..
शौर्य की फ्रेंड है सुन कर वो दोनों लड़के आश्वस्त हो गए, क्यूंकि हर्ष के ऑफ़िस में हर दूसरे दिन किसी ना किसी काम के लिए शौर्य की कोई ना कोई दोस्त ही आया करती थी..
“क्या मेरा ऑडिशन पहले लें लेंगे, दरसअल घर पर मेरे बुज़ुर्ग दादा जी है.. उनकी तबियत बहुत ख़राब चल रहीं है.. मैं काम से लौट कर उन्हें खाना खिला कर दवा देकर फिर अपने फ्लैट में जाती हूँ.. उनकी सेहत के लिए उनकी दवाओं के लिए मुझे काम मिलना भी बहुत ज़रूरी है.. अभी तो जहाँ जो काम मिल जाता है, सब कर लेती हूँ.. बस आज तक कभी अपनी इज्जत का सौदा नहीं किया…।”
आँखों में आँसू भर कर उसने हर्ष की तरफ देखा और हर्ष ने अपने दोनों हाथ खड़े कर दिये..
“इसमें मैं नहीं डायरेक्टर सर ही बता सकते है… !”
डायरेक्टर ने ऑडिशन लेने की हामी भर दी..
ऑडिशन के लिए मीरा दूर खड़ी थी..
कैमेरा के पीछे बैठी टीम के साथ ही हर्ष और धनुष भी बैठे थे..
“पूरी नौटंकी है ये लड़की… एटीज़ की मूवीज़ जैसे अपनी कहानी बना कर बता रही है, तुम्हारी सिम्पेथी गेन करना चाहती है हर्ष.. !”
“इतना तो मुझे भी समझ में आता है धनुष.. !”
हर्ष धीरे से मुस्कुरा उठा.. उसी वक्त उसके मोबाइल पर एक मेसेज आया और मेसेज देख कर उसका माथा चढ़ गया..
“क्या हुआ ?” धनुष ने पूछ लिया
“मुझे तो लोगों की समझ है, पता नहीं मेरे छोटे को कब अक्ल आएगी… अभी मेसेज किया है कि मीरा को जॉब पर रख लेना… इसका बस चले तो मेरे ऑफ़िस में सिर्फ लड़कियां ही लड़कियां नज़र आएंगी.. !”
धनुष भी हर्ष की बात पर हंसने लगा..
धनुष ने हर्ष से एक बार फिर पूछा और डायरेक्टर से जाकर उसके कान में कुछ कह दिया..
उसके बाद धनुष ने ही जाकर मीरा को उसके सेलेक्शन की बधाई दे डाली…
मीरा ख़ुशी से झूम उठी, उसने हर्ष की तरफ देख कर उसे आभार व्यक्त किया और वहाँ से बाहर निकल गयी…
“तुम पर तो दिल जान से फ़िदा हो गयी है ये लड़की.. !”
धनुष के ऐसा बोलने पर हर्ष मुस्कुरा उठा..
“मुझ पर तो क्या ही फ़िदा होगी ये… इसने शौर्य को क्यूँ मुहरा बनाया है वो पता करना है पहले.. !
धनुष शौर्य को फ़ोन लगाओ उसने तैयारी कर ली या नहीं.. उसे लंदन निकलना है !”
धनुष ने शौर्य का नंबर लगा दिया और धनुष से उनींदी सी आवाज़ में बात करने वाले शौर्य को फ़ोन पर जैसे ही हर्ष की आवाज़ सुनाई पड़ी वो बिस्तर पर उठ कर बैठ गया..
“हाँ भाई.. मैंने सारी तैयारी कर ली है.. जी.. हाँ… ठीक है.. वैसे वक्त क्या हो रहा है भाई ?”
“चार बज चुके हैं, शाम होने वाली है.. और आप अब तक बिस्तर पर पड़े हैं… काकी सा से सुबह से बात हुई या नहीं.. ?”
हर्ष का सवाल सुन कर शौर्य इधर उधर मोबाइल ढूंढने लगा…
“शौर्य मोबाइल तुम्हारे कान पर लगा है… !”
हर्ष ने उधर से बोला और शौर्य ने फटाफट मोबाइल निकाल कर देखा उसकी माँ के चार मिस्ड कॉल थे.. !”
“शिट… !”
“कितने मिस्ड कॉल हैं ?” हर्ष ने पूछा
“चार… लेकिन बस चार !”
“हाँ क्यूंकि चार के बाद वो तुम्हारे गार्ड्स को कॉल कर लेती हैं, समझे..और उसके बाद मुझे !”
उसी समय शौर्य के दरवाज़े पर दस्तक होने लगी..
“हर्ष भाई फ़ोन रखता हूँ, शायद मामा जी दरवाज़े पर है.. ! उन्होने ही तो मेरे जाने की सारी तैयारी करवाई है.. !”
“हम्म… काकी सा को फ़ोन लगा लेना… !”
“जी भाई !”
हर्ष ने जरा नाराज़गी से फ़ोन रख दिया…
उसने धनुष की तरफ देखा..
“शौर्य की टिकट हो गयी है.. !”
उसके बताने पर हर्ष ने हाँ में गर्दन हिलायी और वापस किसी ज़रूरी फाइल को देखने लगा…
क्रमशः
aparna….

मीरा की नौटंकी से उसको काम तो मिल गया पर जब हर्ष उसकी कुंडली निकलवाएगा तो ही पता चलेगा उसे।
शौर्य बहुत बिगड़ गया है , बचपन से अपूर्व ने उसको गलत बातें पढ़ा पढ़ाकर बिगाड़ दिया है अब तो कोई सच्ची सी लड़की आ ही जाए उसकी ज़िन्दगी में जो उसे सुधार दे।
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻
बिचारी शैतान लालची लड़की मीरा, उसकी दाल गल गई, लेकिन यह अच्छी बात मालूम चली उसकी नज़र और उसका नज़रिया सबके लिए एक समान है। हर्ष उसकी बात मानता है और वह अपने भाई की बात सुनता है, पढ़कर अच्छा लगा यह भाग दी…💐🙏