जीवनसाथी -3 भाग -38

जीवनसाथी -3 भाग -38

जीवनसाथी by aparna

समय अपनी गति से बढ़ता चला जाता है..

सनंत अपने कार्यक्रम की सफलता के बाद हवा में उड़ने लगा था.। उसका घमंड आसमान छूने लगा था! उसे लगने लगा था कि अब वह कुछ भी कर सकता है। उसकी कलम में इतनी ताकत है कि वह बड़े बड़ों को उठाकर पटक सकता है। लेकिन अपने घमंड में उड़ते हुए वह यह भूल गया कि, अगर इंसान के पैर जमीन पर ना हो तो वह औंधे मुंह जमीन पर गिरता है…।

जमीन हम इंसानों को खुद को इतनी आसानी से छोड़ने नहीं देती और जब-जब जिस इंसान ने अपने पैर जमीन से हवा में उठाए हैं, पलटी खाकर जमीन पर गिरा जरूर है। बस यही सनंत के साथ हुआ..।

राजा साहब के व्यक्तिगत जीवन पर बनाया कार्यक्रम सच की गूंज में प्रसारित हुआ और उस समय ढेर सारी सुर्खियां बटोरने के बाद धीरे-धीरे लोग उस कार्यक्रम को भूलने लगे।

        2 दिन बीते, दो हफ्ते बीते, और महीने बीत गए।

इस कार्यक्रम के बाद राजा साहब ने सनंत को कुछ भी नहीं कहा। ना उससे किसी तरह का बदला लिया।

    और इसीलिए शायद सनंत और मगरूर हो गया। लेकिन राजा साहब के जीवन में इस एक घटना ने एक अजीब सा बदलाव ला दिया। राजा साहब को अब लोगों पर विश्वास करने में कठिनाई होने लगी थी। उन्हें लगा सनंत ने उन्हें अपना बड़ा भाई बोल कर उनसे हाथ मिलाया। इतने सम्मान से उनके हाथ को अपने माथे से लगाया और उसके बाद उस तस्वीर को इतने गलत तरीके से प्रयोग किया कि राजा साहब का विश्वास चूर-चूर हो गया..

राजा साहब जैसे सच्चे और ईमानदार लोग अपने जैसा  ही सारी दुनिया को भी मान बैठते हैं। पहली बार नहीं था जब किसी ने उनके विश्वास को तोड़ा था। लेकिन सनंत का यह कारनामा पता नहीं क्यों राजा साहब के दिल को मसल कर चला गया।

उन्हें ऐसा लगा कि उम्र के इस पड़ाव पर आकर भी वह अब भी लोगों को पहचानने में कैसे भूल कर जाते हैं? उनसे हाथ मिलाने वाला उनकी पीठ पर खंजर चला कर चला जाता है  और वह अपनी भलमनसाहत में उसे कुछ कह भी नहीं पाते हैं।

उन्हें खुद से ज्यादा बांसुरी के लिए बुरा लग रहा था। क्योंकि सनंत ने कहीं ना कहीं उनके और बांसुरी के पवित्र रिश्ते पर प्रश्न उठाया था? उसने यह सवाल सरे आम पूछा था कि क्या कोई जीवनसाथी अपनी प्रेयसी, अपनी पत्नी को ऐसे अकेले छोड़ सकता है ?
   इसके पीछे का गूढ़ और गहन कारण क्या था, यह जानने की उस ओछे विचारों वाले लड़के को जरूरत ही नहीं थी।

उसने कभी प्रेम की गहराई में जाकर सोचा नहीं था। और शायद इसीलिए उसने राजा अजातशत्रु और रानी बांसुरी के प्रेम पर सवाल उठाया था। यह सवाल भले ही राजा साहब ने और बांसुरी ने माफ कर दिया था, लेकिन भगवान तो सनंत को देख रहे थे ना…

कार्यक्रम के प्रसारण को 6 महीने बीत चुके थे। सनंत की पारिवारिक स्थितियां कुछ खास अच्छी नहीं थी। उसका और उसकी पत्नी का संबंध पहले जरूर बहुत गहरा था, लेकिन कुछ समय से सनंत अपने आप में इतना आत्ममुग्ध हो चुका था कि उसे दीन दुनिया की कोई परवाह नहीं रह गई थी। अपनी खुशी और अभिमान में वह अपने किए सारे कार्यों को सही और बाकी दुनिया को गलत समझने लगा था।

पीने की लत उसे शुरू से ही थी। लेकिन अब उसकी वो लत उसकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन गई थी। और कहीं ना कहीं उसकी दिनचर्या का हिस्सा बनती यह लत उसके पारिवारिक जीवन में कांटे की तरह चुभने लगी थी। उसकी पत्नी को उसकी रोज पीने की आदत पसंद नहीं थी।और इसी बात पर दोनों का कलह क्लेश मचा रहता था।

   बहुत बार सनंत ज्यादा पी लेने के बाद अपनी पत्नी पर हाथ भी उठा दिया करता था। उसकी पत्नी भी कोई अनपढ़ गवार औरत नहीं थी। वह खुद भी मीडिया पर्सन रह चुकी थी। लेकिन एक बेटी के पैदा होने के बाद खुद ही  काम से छुट्टी ले ली थी। हालांकि काम से छुट्टी लेने के बाद भी सनंत के आए दिन के ताने उसे परेशान कर दिया करते थे। बात-बात पर वह उसे यह भी सुना दिया करता था कि वह इस हद तक डूब कर काम अपनी पत्नी और बच्ची के लिए ही किया करता है..

” यह सिर्फ तुम्हारे बहाने हैं। तुम्हें क्या लगता है  अगर मैं नौकरी करती होती तो क्या मेरी तनख्वाह तुमसे कम होती? आज जहां तुम हो, वहां मैं भी पहुंच सकती थी। शायद तुम्हें याद नहीं होगा कि सच की गूंज कार्यक्रम का प्लॉट मेरा तैयार किया हुआ था।और इसके पायलट एपिसोड को हमने जब शूट किया था तब एंकरिंग करने वाली मैं थी..!”

” तुम्हारा एंकरिंग किया हुआ पायलट एपिसोड किसी चैनल ने पसंद भी तो नहीं किया ना। आखिर जब मैंने एंकरिंग की तब जाकर इसे चैनल ने पास किया है। यह क्यों भूल जाती हो तुम..!”

” सास बहू के सीरियल्स के जमाने में वैसे भी अगर एक लड़की इस तरह के प्रोग्राम को एंकर करती है तो लोग इसे हाथों हाथ नहीं लेते। बस इसी स्ट्रेटजी के कारण चैनल ने तुम्हें प्रमोट किया। लेकिन उसके पीछे कारण यह नहीं था कि मैं अच्छी एंकरिंग नहीं कर सकती।

     वह तो उन्होंने कहा भी था कि 8-10 एपिसोड के बाद वह हम दोनों को एक साथ एंकरिंग करवाएंगे। लेकिन ऐसा हुआ कि अपनी प्रेगनेंसी के कारण मैंने खुद काम करना छोड़ दिया, वरना आज तुम्हारे सच की गूंज को मैं सुनाती होती और तब तुम मुझे अपने पैसों का ताना भी नहीं दे पाते!”

” मेरी बात तुम्हें ताना लग रही है। लेकिन सोच कर देखो यह बड़ा सा करोडो का फ्लैट, यह आलीशान गाड़ी जिसमें बैठकर तुम अपने लिए शॉपिंग करने जाती हो, यह अय्याशी भरी जिंदगी, यह पॉश लाइफस्टाइल तुम दोनों को देने के लिए ही मैं रात दिन एक करके काम करता हूं।
    खतरनाक से खतरनाक जगह जाकर प्लॉट ढूंढता हूं। और उसके बाद कहानी रचता हूं ।
   मेरे दिन भर के काम के स्ट्रेस के बाद अगर मैं रात में बैठकर दो पैग पी लेता हूं, तो उसमें इतना हाय तौबा मचाने वाली क्या बात है?”

” हाय तौबा मैं नहीं मचाती, तुम मचाते हो। क्योंकि दो पैग नहीं तुम पूरी की पूरी दो बोतल अपने अंदर डाल लेते हो। और उसके बाद तुम्हारे अंदर का शैतान बाहर निकल आता है..।
     मैंने आज तक अपने घर परिवार में किसी को इस कदर पीकर पागल होते नहीं देखा, इसलिए मुझे यह सब सहन नहीं होता..।”

” तुम कहना क्या चाहती हो कि मेरे घर के लोग ऐसे ही पीकर पागलपंथी करते हैं।”

“ऐसा तो नहीं कहा मैंने, यह तो तुम्हारी अपनी सोच है।”

‘”अब तुम अपनी लिमिट क्रॉस कर रही हो..।”

यह सब आए दिन के झगड़े हो गए थे।

    सनंत और सुनंदा बात-बात पर झगड़ने लगे थे। उस रात भी दोनों की ऐसी किसी बात पर बहस हो गई थी और सनंत ने गुस्से में टेबल पर रखी दारू की बोतल उठाई और….

सनंत ने जब से राजा साहब का केस टीवी पर दिखाया था, उसके बाद उसकी हिम्मत इतनी बढ़ गई थी कि उसने कुछ और भी छोटे-मोटे नेताओं को अपने लपेटे में ले लिया था, और इसीलिए उसके बाद उसने पुलिस प्रोटेक्शन की मांग कर दी थी।
    उसने एक जायज सी मांग की थी और इसलिए पुलिस को भी उसे प्रोटेक्शन देना पड़ा था। दो सिपाही हमेशा उसके फ्लैट के नीचे तैनात रहा करते थे। जिससे उसके दिखाए गए किस्से कहानियों के असल गुनहगार कहीं उससे बदला लेने के लिए उसके फ्लैट में ना पहुंच जाए।

   उस रात, आधी रात के वक्त सनंत ने लड़खड़ाते हुए अपने सुरक्षा कर्मियों को फोन लगा दिया.. दोनों सुरक्षाकर्मी भाग कर सनंत के फ्लैट में पहुंचे..

और वो दोनो ही वहाँ बैडरूम में सुनंदा को खून से लथपथ पड़े, देख चौंक गए..

सनंत तुरंत उन पुलिस वालो की मदद से सुनंदा को लेकर अस्पताल निकल गया..
पुलिस वालो ने सनंत से पूछताछ भी जारी रखी हुई थी.. वो लोग जानना चाह्ते थे कि आखिर हुआ क्या है ?
सनंत कुछ भी ठीक से बता पाने की हालत में नहीं था..
उसके अनुसार उसका और सुनंदा का किसी बात पर झगड़ा हुआ था, और उस झगडे के बाद वो अपने कमरे में आकर टीवी लगा कर देखने लगा था, लेकिन उस वक्त उसे नहीं मालूम था कि गुस्से में पागल सुनन्दा खुद को चाकू मार लेगी..

उसकी इन बातों के बीच अस्पताल आ गया, और तुरंत ही उसे साथ लिए वो लोग आपातकालीन चिकित्सा में दाखिल हो गए..

वहाँ मौजूद डॉक्टर ने सुनंदा की जांच शुरू की और…
सुनन्दा को मारा हुआ घोषित कर दिया..

वहाँ मौजूद हर कोई चौंक गया, खुद सनंत का हाल ख़राब था… वो नशे में इस कदर बेसुध था कि ठीक तरीके से खड़ा नहीं हो पा रहा था, उस पर उसकी पत्नी की इस तरह मृत्यु से सभी चकित थे..

उसके सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत पुलिस टीम को बुला लिया  और सनंत को हिरासत में ले लिया गया..

सनंत के कोर्ट ट्रायल के समय दो अलग अलग डॉक्टर्स के द्वारा तैयार की गयी पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। जिसमें एक डॉक्टर ने तो सुनंदा की आत्महत्या की पुष्टि कर दी थी, जैसा कि सनंत खुद बता रहा था।

सनंत के अनुसार उस दिन किसी बात पर उसका और सुनंदा का झगड़ा हुआ था और इसके बाद वह उस कमरे से बाहर निकाल कर टीवी देखने लगा था। इसी बीच गुस्से में पागल सुनंदा ने अपने आप को चाकू से मार लिया था।
इस बात की पुष्टि सिर्फ एक डॉक्टर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में की थी।

लेकिन दूसरे डॉक्टर की रिपोर्ट इस बात को खारिज कर रही थी। दूसरे डॉक्टर की रिपोर्ट के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपने ऊपर चाकू से दो बार हमला नहीं कर सकता। अगर किसी ने खुद को एक बार चाकू मार लिया है तो उस चाकू को अपने अंदर से निकाल कर दोबारा खुद को मारना बेहद मुश्किल काम है। एक तरह से यह असंभव ही है, और इसलिए सुनंदा ने आत्महत्या नहीं की थी बल्कि उसकी हत्या की गई थी…।

इन दो तरह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स के अनुसार सबूत इकट्ठा करने में दिक्कत हो रही थी। क्योंकि असल में उस चाकू पर सनंत की उंगलियों के निशान नहीं थे..।

दूसरी बात सुनंदा के घर के लोग सनंत पर किसी तरह का अभियोग नहीं लग रहे थे।

ऐसा लगने लगा था कि सनंत को बेगुनाह छोड़ दिया जाएगा, लेकिन तभी सुनंदा का विदेश में रहने वाला भाई चला आया। और उसने सनंत के खिलाफ गवाही दे दी।

उसके अनुसार उसकी इकलौती बहन वक्त बेवक्त उसे फोन करके अपने और सनंत के झगड़ों के बारे में बताया करती थी। वह अक्सर अपने भाई से सनंत के खराब व्यवहार की शिकायत किया करती थी। उसके अनुसार सनंत एक नंबर का जिद्दी झगड़ालू घमंडी और बददिमाग आदमी था।

उसे अपने खुद के सामने और कोई नजर ही नहीं आता था। वह पूरी दुनिया को गलत और खुद को सही समझता था। और इसीलिए बात-बात पर उसका सुनंदा से झगड़ा हुआ करता था। इसके साथ ही सुनंदा के भाई ने यह भी बताया कि जब से सनंत ने राजा अजातशत्रु की झूठी और फेक रिपोर्ट तैयार करके टीवी पर प्रसारित की थी, उस दिन से ही सुनंदा सनंत से बेहद नाराज थी। वह व्यक्तिगत तौर पर राजा अजातशत्रु और उनकी पत्नी बांसुरी की जबरदस्त फैन थी। और वह उन दोनों से ही मिलना चाहती थी।

उसके दिल में उनके लिए एक कोमल सी भावना थी। जिस भावना को अपनी प्रसिद्धि के लिए सनंत ने तार तार कर दिया था। सनंत का झूठ सुनंदा बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और उसने इस सब के बारे में अपनी डायरी में बहुत कुछ लिखा था।

इत्तेफाक से सुनंदा ने अपनी मौत के लगभग एक हफ्ते पहले अपने भाई से हुई मुलाकात में वह डायरी उसे सौंप दी थी। जिसे सबूत के तौर पर उसके भाई ने कोर्ट में पेश कर दिया। और इसके साथ ही जज साहब ने सनंत को अपनी पत्नी को शारीरिक और मानसिक प्रताड़नाएं देने के जुर्म में उमर कैद देने के साथ-साथ ही राजा साहब के चरित्र पर बिलावजह कीचड़ उछलने के जुर्म में मानहानि दायर की और राजा साहब से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के साथ ही उनकी अवमानना के बदले लाख रूपये का मुचलका भी तय कर दिया.. ।

सनंत ने जो गलतियां की थी उनके बारे में वह जानता था। वह वाकई पीने के बाद अपनी पत्नी को बुरी तरह से प्रताड़ित करता था ।कई बार उसकी यातनाएं विभत्सता की हदों को पार कर जाती थी।

अपनी पत्नी को गुस्से में जो चीज हाथ लग जाए उसी से मारने में वह पीछे नहीं रहता था। मानसिक प्रताड़ना, ताने मारना,उसका प्रिय शगल था…….
उसकी प्रताड़नाओं से सुनंदा हताश हो चुकी थी..

इन सारी बातों को वह मन ही मन मानता और जानता था।
लेकिन यह राजा साहब का एंगल इस कहानी में कहां से जुड़ा यह सनंत को समझ नहीं आ रहा था?
क्योंकि उसकी पत्नी यानि सुनंदा ने  कभी भी राजा साहब और रानी बांसुरी के नाम पर उससे कोई लड़ाई नहीं की थी। वह तो शुरू से ही उसके गलत और झूठे केस दिखाने के खिलाफ थी। और सनंत ने सिर्फ राजा साहब ही नहीं बल्कि कई लोगों के चरित्र को तोड़ मरोड़ कर गलत तरीके से टीवी पर पेश किया था। और सुनंदा इन सभी बातों के खिलाफ थी।

अलग से राजा साहब और रानी बांसुरी के लिए उसने कभी कुछ नहीं कहा था, और ना ही सुनंदा कभी भी डायरी लिखा करती थी।

उसके पास अपनी डिजिटल डायरी थी। उसने एक बार बातों ही बातों में सनंत से कहा भी था कि पत्रकार होने के बावजूद उसे पेन पकड़े बरसों हो गए।

फिर अचानक यह डायरी कहां से प्रकट हो गई?  जिसमें उसने राजा साहब के बारे में दिखाए गए झूठे एपिसोड का उल्लेख किया था। सनंत परेशान था।

    लेकिन कोर्ट में वह अपने साले से इस बारे में कुछ पूछ भी नहीं सकता था। सुनंदा का भाई साहिल सनंत को बस घूर रहा था उसकी आंखें देख कर सनंत को लग नहीं रहा था कि साहिल उसकी किसी भी बात का जवाब देगा। जज साहब के द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद उसे पुलिस कस्टडी में कोर्ट से निकाल कर ले जाया जाने लगा।

बाहर कोर्ट परिसर में ही जब वह जीप की तरफ बढ़ रहा था, तभी पुलिस की जीप से बहुत करीब खड़ी एक लंबी काली सी एसयूवी उसे नजर आ गई।

पुलिस की गाड़ी की तरफ बढ़ते हुए उसने उस गाड़ी पर नजर बनाए रखी थी। कुछ देर में ही पीछे की सीट पर का कांच नीचे हुआ और उसे अंदर बैठा समर दिखाई देने लगा।

सनंत कुछ समझ पाता, इसके पहले ही समर अपनी गाड़ी में से उतरा और धीर गंभीर चाल से चलता हुआ सनंत के पास पहुंच गया। समर को देखकर सनंत के साथ जा रहे पुलिस वाले भी खड़े हो गए। सनंत ने समर की तरफ देखा और समर ने सनंत को देखकर हल्की सी मुस्कान दे दी..

” कहते हैं ना उसकी लाठी में आवाज नहीं होती…
देर सबेर वह किसी के भी किये की सजा उसे जरूर दे देता है। तुमने तो गलती नहीं गुनाह किया था और तुम्हें अपने गुनाहों की सजा मिलनी भी थी..!”

” लेकिन मैं सच कहता हूं मैंने अपनी पत्नी का खून नहीं किया। मैं यह मानता हूं कि शराब पीने के बाद मैं बहुत बार बहुत गुस्से में आ जाया करता था। उसे मारपीट दिया करता था।
  मैंने उसे चोट पहुंचाई है। शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी है।  बावजूद मैं उसका खून नहीं कर सकता, आखिर वो मेरी बच्ची की माँ थी…
मैं वाकई  खूनी नहीं हूं..!”

” बुरा लग रहा है ना बेगुनाह होते हुए भी गुनहगार ठहराया जाना..
बस यही काम तो तुम कर रहे थे। आज तक जाने कितने बेगुनाहों को गुनहगार बनाकर तुमने अपनी कहानी टीवी पर दिखाइ है और सबसे बुरा तो किया तुमने राजा साहब के साथ।

और इसके बावजूद तुम बड़े मजे से, आराम से घूम रहे थे। तुम्हें लगा तुम्हें इसकी सजा नहीं मिलेगी। तुम्हें एक बात बता दूं कि तुम्हें इसकी सजा भी राजा साहब ने नहीं दी।
     तुम्हें यह भी बता दूँ कि तुम्हारी पत्नी ने सच में आत्महत्या ही की है..।
मैं अच्छे से जानता हूं, कि तुमने उसे नहीं मारा है।

   अफसोस मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता। क्या करूं हर किसी को अपने किए को भोगना ही पड़ता है। तुम्हारी इस कहानी में बस एक छोटा सा एंगल मेरा जोड़ा हुआ है, और वह है राजा साहब और रानी बांसुरी का किस्सा।
   जो तुम्हारी पत्नी ने अपनी डायरी में लिखा था।

खैर अब तुम्हें सार्वजनिक रूप से अपने इस टेलीविजन शो में राजा साहब से माफी मांगनी है ।
  मेरा काम हो गया। तुम्हारी आगे की जिंदगी के लिए ऑल द बेस्ट..।”

समर मुस्कुरा कर वापस लौट गया और सनंत मन मार कर पुलिस जीप की तरफ आगे बढ़ गया…

क्रमशः

aparna…

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Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
1 year ago

सनंत ने सजा पाया और मुझे बडा मजा आया लेकिन उसकी बेगुनाह पत्नी मारी गई, इस बात का अफ़सोस है, काश वह ना मरती लेकिन जो होना था हो गया, समर ने ट्विस्ट टर्न देकर अपनी सूझ का परिचय दिया। अब उसे सच कहना चाहिए, नाईस पार्ट दीदी 💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

आज फिर समर बाज़ी मार गया 👏👏उस पत्रकार ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि कभी उसके साथ भी खेल खेला जाएगा,। सच में ईश्वर की लाठी में आवाज़ नहीं होतीपर इंसान समझता ही नहीं गुनाह पर गुनाह किए जाता है ये सोचकर कि कौन देख रहा है पर उसकी सब पर नज़र है
। समर ने राजा की बात का मान भी रख लिया और उस पत्रकार को सज़ा भी दिला दी अब गिनता रहे अपने गुनाह जेल में बैठकर।
बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻🙏🏼।