जीवनसाथी -3 भाग -36

जीवनसाथी -3 भाग -36

जीवनसाथी by aparna

   शौर्य को याद था वो कठिन समय जिसके बाद उसके डैड ने बाहरी लोगों से हाथ मिलाना छोड़ दिया था..
बात उस समय की थी जब पहली बार राजा साहब मंत्री पद पर नियुक्त हुए थे..
उनके कार्यकाल को लगभग चार साढ़े चार साल बीत चुके थे और अगले चुनाव होने वाले थे..

उसी समय के आसपास की बात थी.. राजा साहब अपनी आदत के अनुसार आम सभा लेने वाले थे..

***
   वो बहुत बड़ा सा स्टेडियम भी खचाखच भरा था…

     अधिकतर मंत्री नेता के आने पर उनके कर्मियों को गांव खेड़ो से लोगो को पैसे दे देकर गाड़ियों में भर कर लाना पड़ता है, लेकिन ये वो किराया देकर इकट्ठी की हुई भीड़ ना थी..

यहाँ हर एक इंसान अपनी मर्ज़ी से वहाँ पहुंचा था, अपने बाल बच्चो घरवाली के साथ। क्यूंकि सब को अपने राजा साहब को देखना जो था..।

ये राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला की आम सभा थी..।

राजा अजातशत्रु बाकी नेताओ की तरह सिर्फ चुनाव के समय नजर आने वाले मंत्री ना थे..उनके अपने नियम थे और अपनी कार्यशैली थी..।
वो साल में छह से सात आमसभा कर लिया करते थे, और उस आमसभा में सम्मिलित होने वाला एक भी आदमी किराये का नहीं होता था..
आमसभा के बाद उनका मिडिया वालों के लिए एक प्रेस वार्ता होती थी, जिसमें उनके आमसभा में हुई बातचीत का सूचीबद्ध लेखाजोखा मिडिया कर्मियों को दिया जाता था….।

अपनी आमसभा में राजा साहब जनता की ज़रूरतों को जानते समझते थे और उनका निपटारा किया करते थे..।
आज उनकी आमसभा निपटने के बाद वो वहाँ से प्रेस वार्ता के लिए निकल गए..

बड़े से हॉल में मीडियाकर्मी बैठे उनके आने का इंतज़ार कर रहे थे..।
आज आमसभा में तयशुदा समय से थोड़ा ज्यादा समय लग गया था, जयकारे लगाने में ही जनता ने खूब समय ले लिया था। जनता अपने प्राणप्रिय राजा को अपने सम्मुख देख विभोर हो उठती थी..।
वो लोग चाहते ही नहीं थे कि राजा साहब उनके सामने से जाये..
ये सब निपटा कर राजा साहब मिडिया वालों से मिलने पहुँच गए..।
         प्रेम ने देर हो जाने के कारण आज प्रेस वार्ता रद्द करने को भी कहा, लेकिन उनका इंतज़ार करते लोगो से बिना मिले उन्हें वापस खाली हाथ राजा साहब नहीं भेजना चाहते थे।
   जबकि आज उनकी तबियत भी ज़रा सही नहीं थी..।

फिर भी प्रेम को साथ लिए वो प्रेस वार्ता के लिए पहुँच गए। वहाँ एक आदमी बड़ी शिद्दत से उनका इंतज़ार कर रहा था..।

       उसका अभी दो तीन साल पहले ही क्राइम शो टीवी पर शुरू हुआ था, जिसमे वो असल ज़िंदगी से जुड़े क्राइम केस दिखाया करता था..।
    अपने पहले ही एपिसोड के प्रसारण के बाद से वो सेलेब्रेटी बन चुका था,और मंजे हुए रिपोर्टर्स के बीच उसकी पैठ बन गयी थी…

आज पहली बार वो राजा साहब से मिलने आ पाया था..उसका नाम था सनंत कस्तूरिया!!

राजा साहब के वहाँ पहुँचते ही लोग खड़े होकर उनका अभिवादन करने लगे.. राजा साहब ने सभी को बैठने का इशारा किया और खुद भी बैठ गए..
एक के बाद एक लोग उनसे सवाल पूछते गए और वह अपने खुशमिजाज स्वभाव से हर एक पत्रकार के सवालों का नपा तुला जवाब देते चले गए।
         इन्हीं सबके बीच सनंत कस्तूरिया ने भी अपनी पेन उठाकर सवाल पूछने की मंशा जता दी…

राजा साहब ने उसे देख हामी भर दी..

“राजा साहब, आपका पर्सनल इंटरव्यू चाहिए था, अगर आप दे सके तो !”

आज तक राजा साहब ने किसी चैनल को व्यक्तिगत तौर पर इंटटव्यू नहीं दिया था, और आज भी उन्होने मना करना चाहा लेकिन वो उनके बिलकुल पीछे पड़ गया और आखिर राजा साहब ने हामी भर दी..।

उसे इस सेशन के बाद सिर्फ दस मिनट का समय दिया गया था..।
प्रेस कॉन्फ्रेंस ख़त्म होने के बाद एक एक कर बाकी पत्रकार बाहर निकल गए, और कस्तूरिया राजा साहब के ठीक सामने आकर बैठ गया..

“एक बार आपसे हाथ मिला सकता हूँ ?”

उसने पूछा और राजा साहब ने मुस्कुरा कर अपना हाथ आगे बढ़ा दिया..।

उसने अपने हाथ में राजा साहब का हाथ लेकर बड़ी नफासत से उनके हाथ को खुद के माथे से लगा लिया..

“हाँ तो राजा साहब, आपसे कुछ सवाल करना चाहता हूँ अगर आप इजाजत दे तो.. !”

“जी पूछिए !”

“आप इतने बड़े राजा हैं फिर अपनी रानी की सुरक्षा के लिए आपको किसी और आदमी का सहारा लेना पड़ा था, क्यों ?”

“कोई इस संसार में इतना बड़ा आदमी नहीं हो सकता की अपना हर काम खुद कर ले, अगर ऐसा होता तो भगवान सबको सिर्फ दो हाथ नहीं देते…।
मुझे भी मेरे बहुत से कामो में मेरे लोगो की सहायता लगती हैं.. !”

“एक बार पहले भी रानी साहेब आपको छोड़ कर जा चुकी है, क्या आपका पारिवारिक जीवन सुखद नहीं है ?”

“ये मेरा बिलकुल निजी मामला है, और इस सवाल के जवाब से आपको कोई खास मालूमात नहीं मिलेंगी.. !”

सनंत के चेहरे पर हलकी मुस्कान चली आयी..

“क्या बाकी नेता मंत्रियो की तरह आप भी मेरे बेबाक सवालों के बाद मुझे सजा ए मौत दे देंगे ?”

“मैं सिर्फ खुद के बारे में जानता हूँ और मैं इतना कमज़ोर नहीं की आपके चंद सवालों पर नाराज़ होकर आपको मौत दे दूँ !”

“इसका मतलब अगले कुछ सवालों के लिए आप मेरी जान बख्शते हैं !”.

राजा साहब खुल कर हँस पड़े.. “आप निश्चिन्त रहिये, आपको कुछ नहीं होगा !”

उसके बाद उस पत्रकार ने और भी ढेर सारे सवाल किये और राजा साहब अपनी तरफ से उन उलझे सवालों के तार सुलझाते रहे..

लेकिन प्रेम और राजा दोनों को समझ आ गया था कि ये पत्रकार अपने सवालो के घेरे में राजा साहब को उलझाने के लिए बेक़रार है..

एक बार फिर राजा साहब से हाथ मिला कर वो पत्रकार बाहर निकल गया..

और राजा साहब वापस महल लौट गए..

इस सब बातचीत के लगभग दो सप्ताह बाद टेलीविज़न पर उस पत्रकार का कार्यक्रम प्रसारित हुआ..

उसके कार्यक्रम का नाम था “सच की गूंज”
जिसमे आज तक वो ढेर सारे सच्चे किस्से दिखाता आया था। सबसे ज्यादा पारिवारिक किस्सों को वो दिखाया करता था, जहाँ कभी दहेज़ हत्या तो कभी वसीयत के लालच में अपने ही माता पिता का हत्यारा बना बैठा लड़का जैसे किस्से शामिल होते थे..
उसने कुछ रेप केस भी कवर किये थे..

उसका कार्यक्रम बहुत ज्यादा लोकप्रियता हासिल कर चुका था और इस बार वो लेकर आने वाला था मुख्यमंत्री का किस्सा..

उसने ऐसी ऐसी झलक दिखाई थी कि लोग मुख्यमंत्री का किस्सा जानने को उत्सुक हो उठे थे..
कार्यक्रम के विज्ञापन देख देख कर लोग उस कार्यक्रम का प्रसारण देखने को लालायित बैठे थे..।

वैसे तो राजा साहब बहुतों के चहेते थे, लेकिन बहुत से लोग उनसे जलते भी थे..।
कुछ तो सिर्फ इसीलिए उनसे खार खाये बैठे थे कि कोई इतना सुप्रसिद्ध कैसे हो सकता है..?
ऐसे सभी लोग उनके व्यक्तिगत जीवन पर आधारित क्राइम शो देखना चाहते थे..।

सनंत ने उनसे ये नहीं कहा था कि उसका क्राइम शो है..
और राजा साहब को मुगालते में रख उसने उनके इंटरव्यू के आधार पर उनके जीवन का एक नाटकीय रूपांतरण तैयार किया और उसे प्रसारित कर दिया..।

इस सारे क्रियाकलाप के समय समर वहाँ मौजूद नहीं था..।
हो सकता है वो होता तो ये सब नहीं हो पाता, लेकिन सनंत शायद इसी बात के इंतज़ार में था कि समर की अनुपस्थिति का फायदा उठा कर वो राजा साहब का इंटरव्यू ले ले..

बांसुरी अपने एनजीओ और बाकी कार्यों में व्यस्त थी, इसलिए उसे भी इस कार्यक्रम के बारे में मालूम नहीं चल पाया..।
खैर.. वो वक्त भी आ गया, जब इस कार्यक्रम का प्रसारण हुआ और, रातोरात राजा साहब को लालची, स्वार्थी और गलत इंसान के रूप में पोट्रे कर गया…।

महल में किसी को इस बात का ज़रा भी एहसास नहीं था की सनंत ऐसा कर जायेगा..।
कहानी के नाट्य रूपांतरण के साथ ही परदे पर दिखाई देता सनंत कस्तूरिया अपने शब्दों में कहानी भी सुनाता जा रहा था..

“ये देखिये.. यही है आपके प्रिय राजा साहब, जिन्हे आप लोगो ने ससम्मान अपने सर माथे पर बैठा रखा है। पर गौर से देखिये क्या ये इंसान इतने सम्मान के लायक है भी ?
इनकी पत्नी शादी के महज दो साल के बाद भरी महफ़िल में इन्हे अपशब्द सुना कर इन्हे छोड़ गयी..।
क्या आप जानते है उसके पीछे का कारण क्या था..?
राजा साहब की अय्याशियां ?
या उनका गुस्सैल स्वभाव ? या फिर उनकी बेहद पीने की आदत ?
जी हाँ ये महानता का प्रतिरूप दिखने वाला राजा अंदर से एक बहुत गलत इंसान है, जो खुद भी गलत है और गलत चीज़ो को बढ़ावा भी देता है.. “

उसी के साथ नाट्य रूपांतरण शुरू हुआ, जिसमे राजा साहब बने युवक को एक दूसरी लड़की के हाथ से शराब पीते दिखाया गया और उनकी पत्नी बनी लड़की को गुस्से में लाल पीला होते दिखाया गया..!

इसके साथ ही सनंत उस सीन के सामने आकर वापस बोलने लगा..

“इस इंसान ने अपनी हर हद पार कर दी.. ऐसे ही राजा महाराजा बदनाम थोड़े ना होते हैं..!
एक साधारण घऱ की ड़की से विवाह तो किया, लेकिन उस विवाह को निभा नहीं पाए..!
इनके आये दिनों के किस्सों से त्रस्त होकर इनकी धर्मपत्नी अपने धर्म को भूल कर इन्हे छोड़ कर चली गयी.. लेकिन उसी समय राजा साहब राजनीती में आने का सपना देख रहे थे, और इसलिए इनके चाणक्य ने इन्हे कूटनीति सिखाई और कहा की राजनीति में आने के लिए उन्हें अपनी एक साफ सुथरी इमेज बनानी पड़ेगी, और इसके लिए उनका अपनी पत्नी को मना कर लाना बहुत ज़रूरी है..।
लेकिन फिर सवाल ये उठेगा कि आखिर दो साल तक वो अपनी पत्नी को भूले काहे बैठे थे?
इसलिए राजा साहब ने अपनी पत्नी को आईएएस बनवा दिया। जिससे लोगो की आँखों में ये एक धूल और झोंक सके कि पढाई के लिए उन्हें खुद से दूर रखा गया..।

और बस थोड़ा मनुहार से, तो थोड़ा डरा धमका कर राजा साहब अपनी पत्नी को वापस ले आये..।

लेकिन दो साल उनसे दूर रहने वाली उनकी पत्नी आखिर कहाँ थी? किसके साथ थी.. ?
      दबी ज़बान में कुछ जानने वाले तो कहते है, उनकी पत्नी ने दूसरी शादी कर ली थी और जब वो महल वापस आयी तब गर्भवती थी..।

जी हाँ, उनकी वापसी के कुछ समय बाद ही रानी बांसुरी ने एक संतान को जन्म भी दिया, लेकिन उसके तीन साल का होने के साथ ही वो वापस अपने प्रेमी या कह लो पति के साथ भाग गयी..।

जी हाँ दोस्तों, ये सच्चाई है उन ऊँचे ऊँचे महलो में रहने वाले लोगो की जिसे आम जनता भगवान मान कर पूजती है..।
    लेकिन सोच कर देखिये क्या ये वाकई आपकी पूजा, आपके सम्मान के लायक है..?
नहीं.. कभी नहीं..
आप सब से गुज़ारिश है कि आंख बंद कर राजा अजातशत्रु पर विश्वास करना बंद करे, वो कोई बहुत बड़े धर्मात्मा नहीं है.।

इनका नाम तो इतिहास में भी बदनाम है, इन्होने गद्दी पर बैठने अपने पिता को मरवाया था.. फिर इस अजातशत्रु की क्या औकात ?

मेरा काम है समाज से गंदगी को हटाना, मैं एक चिंगारी हूँ जो सच का दीपक जलाने आया है..!
और मैं इसी तरह उन बड़े बड़े नामों के पीछे छिपे काले सच को सामने लाता रहूँगा..!
इस कहानी में अभी और भी बहुत कुछ बाकी है।
    बने रहिये सनंत के साथ, इस सच्चाई के अगले किस्से में हम जानेंगे कि कैसे राजा साहब, गलत को सही साबित करते हैं !”

बांसुरी महल में बैठी सनंत का कार्यक्रम देख रही थी, उसकी आंखे बहने लगी.. उसके लिए अपने साहब के खिलाफ कुछ भी सुनना असहनीय था..
वही हाल वहाँ मौजूद सभी का था..
ऑफिस में बैठा समर और उसकी टीम भी ये कवरेज देख रही थी..
गुस्से में उसके जबड़े भींच गए..

“ये बेवकूफ आदमी खुद को समझता क्या है ? ” समर ने गुस्से में टेबल पर हाथ मारा और उसी समय राजा साहब वहाँ चले आये.. उन्हें देखने के बावजूद वो अपने चेहरे पर आ रहे गुस्से के भावो को हटा नहीं पा रहा था..

“इतना नाराज़ होना सही नहीं है समर ! अभी तो एक एपिसोड और बाकी है.. जाने वो उसमे क्या दिखाने वाला है.. !”

राजा साहब की इस बात पर गुस्से में मुट्ठियां भींचे हुए प्रेम खड़ा हो गया।

“आप चाहते है अब भी उसका अगला एपिसोड प्रसारित हो.. मैं तो उसकी दुकान बंद करवाने जा रहा था.. !”

प्रेम के ऐसा कहते ही समर ने तुरंत प्रेम के कंधे पर हाथ रखा और उसे शांत करने का प्रयास करने लगा

“नहीं.. अभी ऐसा कोई काम मत करना प्रेम ..!
चुनाव का समय है और ऐसे में अगर उसका अगला एपिसोड हम रुकवा देते है, या उसे किसी तरह का नुकसान पहुंचाते है,तो उसका सीधा नुकसान हमे होगा… 
वो जानबूझ कर शतरंज की ऐसी चाल चल रहा, जिससे हमे शह और मात दे सके, लेकिन वो जानता नहीं उस बार वो राजा साहब के सामने खड़ा हुआ है.. !”

“तो अब क्या करेंगे हम.. क्या हुकुम के बारे में उसे मनगढ़ंत कहानियां बनाने देंगे.. ?और वो तो रानी साहब को भी लपेटे में ले रहा.. !”

“हम्म.. थोड़ा सोचने दो मुझे.. !”

“अगला एपिसोड अगले हफ्ते नहीं कल ही प्रसारित होना है… जल्दी सोचना पड़ेगा !” प्रेम का गुस्सा अपने चरम पर था, और उन दोनों की इन बातों के बीच राजा साहब उठ कर खिड़की पर खड़े यही सोच रहे थे कि आखिर उनसे हाथ मिलाने के बाद उस इंसान ने ऐसा किया क्यों..

******

शौर्य की गाड़ी के ठीक पीछे एक और गाड़ी चल रही थी… लेकिन उस पर शौर्य या कली में से किसी का ध्यान नहीं गया था..

शौर्य गाड़ी चला रहा था, और लल्लन हर गली चौबारे के बारे में अपना समस्त ज्ञान उन पर उड़ेल कर अपनी वहाँ होने की उपादेयता समझाने में लगा था..

“जिज्जी.. आप लोगों ने कलेबा तो नहीं किया ना?”

कली ने ना में गर्दन हिला दी..
“चलिए मेहमान जी आपको दीनानाथ की पूड़ी आलू खिलाते हैं.. क्या आलू पूरी बनाते हैं चच्चा की क्या काहे..?
मतलब दोना पतरी सब चाट जायेंगे आप.. ओहोहो… उस पर उनकी भजली मिर्ची..।
कसम गंगा मैया की पुरे उत्तर प्रदेस में उन सा नास्ता कोनो नहीं बना सकता..।
   नहीं वैसे इलाहाबाद का लोकनाथ भी उत्तै फेमस है, पर हमारे दीनानाथ की बाते अलग है..
आप लोग ऊँगली ना चाट गए तो हमरा नाम बदल देना.. !”

“बदल कर क्या नाम रखे तुम्हारा.. पहले ही बहुत बेकार नाम है !”

शौर्य ने कहा और कली शौर्य को घूर कर वापस लल्लन की बातों में रस लेने लगी..

“लल्लन भाई मैंने सुना है, यहाँ टमाटर की चाट मिलती है.. !”

“मिलती है ना जिज्जी और क्या जबरा मिलती है मतलब एकदमे भौकाल.. क्या है ना जिज्जी हमारे बनारस के लोग कहीं बाहर ज्यादा दिन टिक नहीं पाते..घूम फिर के वापस यही चले आते हैं। काहे की बनारस सा खाना और गंगा मैया का पानी और कही एक साथ नहीं मिलता ना..।
आइये पहले आप लोगन को दसाश्वमेध घाट घुमा दे, वहीँ से नास्ता कर के बाहिर चलेंगे फिर !”

वो लोग कुछ आगे बढ़ कर घाट पर उतर गए..
सुबह सुबह का वक्त था, लोगो की भीड़ उमड़ी पड़ी थी..
लल्लन कली और शौर्य के लिए आगे बढ़ रहा था कि तभी पीछे से किसी ने उसे आवाज दे दी

“पायलागी गुरुदेव, यहां कहां भटक रहे हैं सुबह-सुबह?”

लल्लन ने मुड़कर देखा, एक दुबला पतला सा पान गुटका चबाता  हुआ लड़का उसकी तरफ चला आया आते ही उसने लल्लन के पैर छूने का इशारा सा किया, और लल्लन ने उसे “खुसी रहो खुसी रहो” कहते हुए बीच में रोक लिया..

“इनसे मिलिए जिज्जी, यह हमारे दोस्त नन्हे हैं.. अभी-अभी वकालत पढ़कर निकले हैं, ताजा ताजा वकील है…।
     कोनो भी तरह की परेशानी हो, किराएदार घर न खाली कर रहा हो, मकान मालिक किराया बढ़ा रहा हो, पति पत्नी का अनबन हो, सौतन से छुटकारा चाहिए, बच्चा ना हो रहा हो, हर समस्या का समाधान है हमारे नन्हे के पास..

” बाकी सब तो ठीक है, लेकिन बच्चे ना होने की समस्या के लिए नन्हे क्या कर सकता है?”

शौर्य ने एक बार फिर अपनी आदत के अनुसार लल्लन की बात काट दी और लल्लन ने अपनी जेब से खैनी पुड़िया निकाल खोला, मुंह में डाला और मुस्कुरा कर रह गया।

” इलाहाबाद का फेमस सोफिया लॉरेंस खाएंगे..पान का नाम है. ओह्हो.. का जब्बर पान है कि का बताये दादू..।एकदमे अमृत.. ओहोहो… मुहं में रखते ही लगता है मक्खन मलाई घुल गया है !”

“अमृत भी चख रखे हो ?”  शौर्य ने उसे घूरा और अगला वाक्य बोल दिया.. 

“लोग तो बनारस के पान की तारीफ करते हैं..!”

“वो तो अमित साहब ने हमार पान का बहुत ज्यादा ही दिया भजन कर दिया!
      ‘खाई के पान बनारस वाला’ इसलिए इतना फेमस हो गया!
    बाकी सच्ची कह रहे हैं गुरु इलाहाबाद का सोफिया लॉरेंस खा लिए ना थूके का मन नहीं करेगा…!”.

उसी समय लल्लन का फोन बजने लगा उसने देखा उसकी गर्लफ्रेंड का फ़ोन था….
उसने धीरे से उठा लिया और मुहं के सामने हाथ रख बात करने लगा..

“बोलो गुड्डन, का बात है ?”

“कुछ नहीं.. बस आपका आवाज़ सुनना था.. !”

“अच्छा, फिर रखो यार, अभी काम पर है ?”

“बड़े आये काम करने वाले, हमहू को पता है कितना काम करते हैं आप, ज़रूर फ़ोन पर रम्मी खेल रहे होंगे.. !”

“ज्यादा करमचंदई ना झाड़ो, समझी ! गाइड बने हैं अभी !”

“अरे तो डांट काहे रहे हैं, हम तो मजाके ना भर कर रहे थे, आप तो इत्ती सी बात पर बम हो गए…!
  अच्छा सुनिए शाम को मेला दिखा लाइयेगा ?”

अब तक में लल्लन थोड़ा ठंडा पड़ गया.. -” हाँ तैयार रहना, दिखा लाएंगे !” तभी लल्लन के बमपिलाट दिमाग में एक मस्त आईडिया आया..

“जिज्जी यहाँ तुलसी मानस मंदिर में मेला बैठा है, गज्जब मेला लगता है.. आप दुनो का फोटू सेशन वहाँ भी बढिया होगा..

“क्या होता है उस मेले में ?”  जितना ही शौर्य को इस बैझड़ लड़के की बातों पर गुस्सा आ रहा था, उतना ही कली को मजा आ रहा था..

“मेले में बहरी अलंग यानी शहर की भीड़भाड़ से दूर पकाते-खाते खुशियाँ मनाते लोगों को धर्म और आस्था के जरिए खुशिओं की सौगात-सी मिल जाती है जिज्जी.. खूब धूम रहती है.।”

“ठीक है, फिर शाम को वहीँ चलेंगे.. !”

घाट से उतर कर लल्लन उन दोनों को मंदिर की तरफ ले गया..
शौर्य को भगवान पूजा पाठ मंदिर आदि पर ऐसी कोई विशेष आस्था ना थी…

वो मंदिर के बाहर रुकने को था कि कली ने उसकी तरफ देखा और उसका हाथ पकड़ अपने साथ अंदर खींच लिया….

क्रमशः
aparna..

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Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
1 year ago

डॉ बशीर बद्र साहब का शेर है कि कोई हाथ भी नहीं मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से, ये नए मिजाज़ का शहर है जरा फासले से मिला करो। राजा साहब के लिए, देखना है क्या उपाय निकालते हैं। इधर शौर्य ने अपने मन को मारकर अपने बुरे हालातों में खुद को स्थिर रखा है तो कली का कमाल है बहुत बेहतरीन भाग, पढ़कर मज़ा आ गया दी लल्लन छाप कॉमेडी से… देसी किरदार, पूरा प्यार…💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

रिपोर्टर ने बहुत गलत किया राजा को झूठा बदनाम करके पर झूठ की नाव में छेद जरूर होता है और वो जल्दी ही डूब भी जाती है, उस रिपोटर को खबर भी नहीं होगी अब जो उसके साथ होगा समर और प्रेम उसकी तो बैंड बजा देंगे अगर राजा उनको की एक्शन लेने देंगे तो… राजा का व्यक्तित्व ही ऐसा है कि उनके साथ कुछ भी गलत हो रहा हो फिर भी वो अपना धैर्य नहीं खोते पर हाथ मिलाने क्या मतलब ऐसा क्या किया उसने हाथ मिलाकर 🤔। देखते है अगले एपिसोड में क्या करता है वो पत्रकार।
लल्लन तो बहुत बढ़िया गाइड है 😃शौर्य को जितनी चिढ़ हो रही उसकी बातों से कली को उतना ही मज़ा रहा और अब तो मेला दिखाने भी ले जाएगा लल्लन और साथ में अपनी गर्लफ्रेंड को भी ले जाएगा मज़ा आएगा 😊।
ये वकील है या बाबा 🤔मतलब जिस तरह से ललन ने उसका परिचय करवाया है ऐसा तो आजकल टीवी पर पर ऐड आती है ना, वो तांत्रिक बाबा लोगों की 😃😃बस वैसा ही कुछ।
बहुत बेहतरीन भाग 👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏼।