जीवनसाथी -3 भाग -24

जीवनसाथी -3 भाग -24

जीवनसाथी by aparna

कली के रसोई से बाहर आते में शौर्य बाहर पड़े सोफे पर ही सो गया था..
काउच से उसकी टाँगे बाहर तक जा रही थी.. उसने जूते भी नहीं उतारे थे..।
महल में उसे जूते खुद उतारने की आदत ही नहीं थी..। वो आकर अपने कमरे में बैठता था और उसका हेल्पर नीचे बैठ कर उसके जूते निकाल दिया करता था…
यहाँ फ़्लैट पर भी ऐसा ही होता था..।
आज उसे थकान भी थी, इन्हीं सब कारणों से वो यूँ ही सो गया..

“एकदम पागल लड़का है.. जूते तो उतार लेना था !”

कली पहले तो अंदर कमरे की तरफ बढ़ गयी, लेकिन फिर वापस आई और उसने शौर्य के जूते निकाल दिये..।
उसके पैर यूँ ही हवा में रह जा रहे थे.. काउच की लम्बाई उसे पूरी नहीं पड़ रहीं थी..।

कली ने वहीं पड़े एक सोफे को ऐसे रख दिया, जिस पर शौर्य अपने पैर आराम से रख पाए !
और उसके पैरों को उस पर रख दिया..
शौर्य अब आराम से पैर फ़ैला कर सो गया..।
मौसम में ठंडक बढ़ गयी थी, कली अंदर से ब्लेंकेट ले आई और उसने शौर्य पर उसे डाल दिया….

वो अंदर चली गयी..
अपने कपड़े बदल कर वो भी अपने बिस्तर में दुबक गयी.. आज तो सुबह ही उसके डैडा से उसकी बात हो चुकी थी। लेकिन अब कल वो कैसे उनकी बात अपने दोस्तों से करवाएगी..
सोचते सोचते उसकी भी आंखें लग गयी..

*****

महल में सुबह के नाश्ते पर सारे लोग इकट्ठा थे..
आज कई दिनों बाद युवराज और राजा साथ नाश्ते के लिए बैठे थे..।
चुनाव का समय पास आ जाने से देश भर में राजा के दौरे शुरू हो चुके थे..। वो व्यस्त नहीं अतिव्यस्त था..।
बड़े दिनों बाद वो महल में रुका था, और इसलिए सुबह सबके साथ नाश्ते के लिए पहुँच गया था..
बाँसुरी भी खुश थी, उसने राजा की पसंद का सारा नाश्ता तैयार करवाया था…।

सभी खुश थे, लेकिन सबसे ज्यादा खुश रूपा नज़र आ रहीं थी..।
उसे देख कर ही लग रहा था कि वो सभी से कुछ कहना चाहती है..
सभी का नाश्ता परोस कर सहायक एक तरफ पीछे को होकर खड़े हो गए.. और सब ने नाश्ता शुरू कर दिया..
रूपा पुलकित थी, खुश थी, उसने युवराज की तरफ देखा और बोलना शुरू कर दिया..

“आप सभी से एक बात कहनी थी.. !”

“कहिये रूपा !” युवराज ने पूछ लिया..
और रूपा मुस्कुरा उठी…

“हमारी सखी धनश्री को आप जानते हैं ना ?”

“हाँ.. जानते हैं, उनसे तो कई बार मुलाकात भी हुई है.. वहीं टी एस ग्रुप्स की धनश्री तोमर की बात कर रही हो ना ?”
.
“हाँ, वहीं.. कल उनसे बात हो रही थी.. धनश्री ने अपनी बेटी के लिए हमारे हर्ष का हाथ माँगा है..।
देखिये सच कहें तो हमें ये रिश्ता बहुत पसंद आया !
उनकी बेटी युविका हर तरह से हर्ष के लिए उपयुक्त है.. और फिर टी एस ग्रुप्स एक जाना माना ग्रुप है, धनदौलत, रुतबा हर बात में वो हमारे समतुल्य है..।

रूपा ने कुछ रुक कर युवराज की तरफ देखा..

“क्या विचार है आपका, इस बारे में ?”

“हम्म…. इस बारे में हम अकेले क्या कह सकते हैं ? आप सब आपसी सहमति से जो निर्णय लें, वो हमें भी मान्य होगा.. वैसे तोमर ग्रुप का व्यापार भी हर तरफ फ़ैल रहा है.. उन्होंने अभी अभी क्रूड आयल में भी काम शुरू किया है !”

युवराज राजा की तरफ देखता हुआ तोमर ग्रुप के बारे में बता रहा था..।
राजा उनकी बात सुन हामी भर रहा था..

“भाभी साहब आपने हर्ष से पूछ लिया ?”

राजा ने पूछा.. और रूपा मुस्कुरा उठी….

“उससे भी पूछ लेंगे.. पहले आप सब तो सहमति दीजिये.. अगर आप सब की सहमति होगी तो पेरिस से वापसी के बाद हर्ष और बाकी बच्चों को यहाँ बुला कर सगाई की रस्म कर ली जायेगी..
क्या कहती हो बाँसुरी !”

“जी भाभी सा.. जैसा आप सब को उचित लगे ! मुझे तो कोई आपत्ति नहीं…।”

कुछ रुक कर बाँसुरी ने अपने पास ही बैठी रूपा से पूछ लिया…

“कोई तस्वीर है आपके पास युविका की !”

“हाँ है ना.. रूपा ने अपना मोबाइल उठाया और उसमें से युविका की तस्वीर निकाल कर बाँसुरी के सामने कर दी..

सलमा सितारों जड़ी आसमानी कुर्ती में लड़की का चेहरा और भी आसमानी लग रहा था.. लड़की का चेहरा ऐसा था की देखने वाला पहली बार में हाँ बोल दे..
ठहरी हुई गंभीर सी आंखें, और सख्ती से भींचे होंठ…
चेहरें पर अभूतपूर्व तेज़ देखने वाले को एकबारगी मोहित कर ले..
बाँसुरी उस तस्वीर को देखती रह गयी..

लेकिन उसी तस्वीर में अचानक उसे मुस्कुराती हुई एक दूसरी अल्हड़ किशोरी नज़र आने लगी..
कंधे तक कटे हुए बाल, नाक में गोल बाली और आँखों में लगी प्रगाढ़ काजल की रेखा…
बाकी चेहरे पर कहीं कोई ऐसा चिह्न नहीं जिसे देख कर सामने वाला उसके लड़की होने का प्रमाण पा सके..
गहरी बुद्धिदीप्त आँखों पर चश्मा चढ़ाये एक से बढ़ कर एक कठिन सवालों को चुटकियों में हल करती मीठी कहीं किसी कोने से इस राजकुमारी से कम नहीं थी..

बाँसुरी एक ठंडी सी आह भर कर रह गयी..
लेकिन उसके सोचने मात्र से क्या होने वाला था..? हर्षवर्धन बुंदेला, बुंदेला ग्रुप का वारिस, विजयराघवगढ़ का होने वाला राजा था…
उसके जैसा सुंदर और प्रतिभाशाली नवयुवक आसपास चराग लेकर ढूंढने से ना मिले, ऐसा था वो… और ज़ाहिर था उसके माता पिता उसके लिए उसी की टक्कर की लड़की ढूंढेंगे..
मीठी भी कहीं किसी कोने से कम ना थी, लेकिन उसमें एक सबसे बड़ी कमी थी, की वो रॉयल ब्लड नहीं थी..

बाँसुरी स्वयं भी तो रॉयल ब्लड नहीं थी.. इसलिए शायद उसे इस बात का फर्क नहीं पड़ता था, लेकिन बाँसुरी जानती थी कि रूपा को इस बात से बहुत ज्यादा फर्क पड़ता है…।

रूपा के लिए अपनी आन बान शान का बहुत महत्व था.. उसके लिए घर परिवार रूपये पैसे ओहदे की बहुत अहमियत थी और इसलिए बाँसुरी चुप रह गयी..

“क्या सोचने लगी बाँसुरी ? लड़की सुंदर है ना ?”

“सुंदर नहीं बहुत सुंदर है भाभी सा… वैसे भी हर्ष के साथ खड़े होने के लिए इतनी खूबियाँ होनी तो ज़रूरी ही हैं.. !”

रूपा ने मुस्कुरा कर मोबाइल जया की तरफ घूमा दिया..
जया और रेखा साथ ही बैठी थी, उन दोनों को भी तस्वीर बहुत प्यारी लगी….
सब हँसते खिलखिलाते बातों में लगे थे, लेकिन राजा समझ गया था कि कोई तो बात है जो बाँसुरी का मन वहाँ से उचट गया है..

“युवराज भैया.. मैं सोच रहा हूँ, बहुत दिनों से रियासत का चक्कर नहीं लगाया है, मैं नाश्ते के बाद ज़रा घूम कर आता हूँ.. !”

राजा बाँसुरी की तरफ घूम गया..

“तुम भी चलोगी ?”

“हाँ.. क्यूँ नहीं ?”

बांसुरी ने भी मुस्कुराकर हामी भर दी…
नाश्ते के बाद राजा और बांसुरी युवराज और रूपा से इजाजत लेकर रियासत के दौरे के लिए निकल गए। वैसे तो राजा बिना प्रेम के कहीं नहीं जाता था, लेकिन आज राजा ने खुद होकर प्रेम को मना कर दिया। प्रेम भी इस बात को समझ रहा था कि राजा लगभग 15- 20 दिन बाद महल लौटा था, जाहिर है उसका भी बांसुरी के साथ अकेले रहने का मन होगा ही। और इसीलिए प्रेम ने भी साथ में जाने की जिद नहीं की।

राजा बांसुरी को लेकर निकल गया। राजा को बांसुरी को देखकर यह आभास हो गया था कि बांसुरी को कोई बात पसंद नहीं आई थी। लेकिन वह बात कौन सी थी यह राजा बांसुरी के मुंह से ही जानना चाहता था। रियासत में इधर-उधर घूमते हुए आखिर उसने मौका देखकर बांसुरी से अपने मन की बात कह दी।

” क्या बात हुकूम, किसी बात पर नाराज हो?”

   बाँसुरी राजा की तरफ देखने लगी।

” नहीं साहब, ऐसी तो कोई बात नहीं। आपसे नाराज क्यों होंगी भला ?”
 
“कोई ऐसी बात तो आज हुई है जो, हमारी हुकुम को पसंद नहीं आई है, क्या बात है बोलो?”

बांसुरी आश्चर्य से आंखें फाड़े राजा की तरफ देखने लगी वह दोनों साथ-साथ पैदल चलते हुए चले जा रहे थे। उनकी गाड़ी जरा दूर खड़ी थी। और गाड़ी में ड्राइवर बैठा हुआ था। बांसुरी ने मुस्कुराकर राजा की बाहों में बाहें डाल दी।

” आप ना कभी-कभी मुझे जादूगर लगते हैं। मेरे मन की बात को कितनी आसानी से पढ़ लेते हैं।
कैसे ऐसा कर लेते हैं आप?”

राजा ने मुस्कुराकर बांसुरी को देखा और उसके चिबुक को अपनी उंगलियों में थाम लिया।

” पहले तुम बताओ कि तुम किस बात पर परेशान हो?”

बाँसुरी ने ठंडी सांस छोड़ी और दूसरी तरफ देखने लगी।

”  पता नहीं साहब, हो सकता है कि यह सिर्फ मेरे दिमाग की बात है। लेकिन बचपन से रेखा अक्सर हर्ष के लिए मीठी की जोड़ी की बातें कहा करती थी।
हो सकता है , वो ये बात मजाक में कहती रही हो।लेकिन मैंने शायद इस बात को कुछ ज्यादा गंभीरता से लें लिया..। मुझे लगता था कि मेरे अलावा रूपा भाभी साहब भी मीठी को ही हर्ष के लिए पसंद करती हैं। लेकिन आज जब उन्होंने उस लड़की का फोटो दिखाया तो पल भर के लिए मेरा दिल जरा दुखी सा हो गया।
मुझे उस चेहरे में मीठी का चेहरा नजर आने लगा। मीठी ही हर्ष के लिए बनी है।”

अपनी बात कहते कहते बांसुरी चुप हो गई।

” माफ कीजिएगा साहेब, लेकिन मैं भी महल का  प्रोटोकोल समझती हूं…।
मीठी जितनी भी अच्छी हो, रॉयल ब्लड तो नहीं है ना..  शायद इसीलिए रूपा भाभी ने रेखा की बात को उतनी  गंभीरता से नहीं लिया होगा..।”

राजा ने बांसुरी के कंधे पकड़कर उसे अपनी तरफ घूमा लिया..

” बहुत बार ऐसा होता है बाँसुरी कि हम जिस बात को दूसरे तरीके से सोचते हैं, वैसा सामने वाला नहीं सोच पाता।  और हम इसी बात पर दुखी हो जाते हैं! जबकि विचार अलग-अलग होना तो एक बहुत सामान्य सी
बात है..।
हो सकता है तुम मीठी और हर्ष को लेकर जितना और जो कुछ सोच रहीं हो, वैसा वो दोनों आपस में ना सोचते हो..।
ऐसा भी तो संभव है ना कि वह दोनों एक दूसरे को सिर्फ अच्छा दोस्त समझते हो। और अगर ऐसा हुआ तो इससे बढ़कर अच्छी बात तो हो ही नहीं सकती। क्योंकि फिर रूपा भाभी और युवराज भाई साहब की इच्छा भी पूरी हो जाएगी।
लेकिन अगर वह दोनों भी वैसा ही सोचते होंगे, जैसा तुम सोचती हो तो, उसके लिए भी हम सब मिलकर कोई ना कोई रास्ता निकाल लेंगे..।”

राजा की बात बाँसुरी के चेहरें पर मुस्कान ले आई….

“काश आप जैसा बोल रहे हैं, इतना आसान सब कुछ होता। रूपा भाभी के विचारों को बदलना इतना भी आसान नहीं है साहिब।”

मन ही मन सोचती बांसुरी धीरे से मुस्कुरा कर राजा की तरफ घूम गई।
राजा ने उसे हल्के से पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया। दोनों कुछ देर तक वैसे ही खड़े रहे और वाकई बांसुरी के मन में चलती उहापोह शांत हो गई…।
राजा था ही ऐसा निराला की उसकी संगत में रहने वाला इंसान देर तक अपने मन में नकारात्मक विचारों को नहीं रख पाता था।

बाँसुरी भी राजा के सीने से लग कर एक नई सकारात्मक ऊर्जा से भर गई थी…

*****

सुबह हो गयी थी..
कली अपने कमरे में सो कर उठी और उसे याद आया की वो इस वक्त अपने सपनों के देश में हैं..।
वो ख़ुशी से खिल गयी…।
उसने अपने कमरे की खिड़की के पर्दे खोल दिए। बाहर उसे गार्डन नजर आने लगा। नीचे गार्डन में बच्चे खेल रहे थे। कुछ बुजुर्ग टहल रहे थे। कुछ औरतें आपस में बातें करती हुई चल रही थी। यह सब देखकर वो खुशी से खिल उठी।
ऐसा कुछ भी उसे लंदन में देखने को कहां मिलता था? मुस्कुराकर वो बाथरूम में दाखिल हो गई…

कली कुछ पलों के लिए भूल चुकी थी कि उसके फ्लैट पर शौर्य भी रुका हुआ है..।
वो नहा कर निकली और टॉवल बांधे हुए अपने कमरे से बाहर हॉल में चली आई, कि तभी उसकी नजर काउच पर सोए पड़े शौर्य पर पड़ी और वह एक छलांग लगाकर अपने कमरे में दाखिल हो गई….

सलीके से जींस और उस पर टीशर्ट डाल कर वो बालों को झाड़ कर बाहर निकल आयी..
उसके बालों से अब भी पानी की बुँदे टपक रहीं थी..

वो बाहर आई और रसोई में चली गयी… आज तक तो सरु उसके कमरे में ही कॉफ़ी भिजवा दिया करती थी, लेकिन आज उसे कॉफ़ी खुद बनानी थी.. और नाश्ता भी..

नाश्ते के लिए तो उसे मूज़ली एक डब्बे में नज़र आ गयी..
इसके साथ ही उसे आलू भी दिख गए.. फ्रिज खोल कर उसने देखा, उसमें अंडे भी पड़े थे..
उसके चेहरे पर मुस्कान खिच गयी..

उसने तुरंत सरु को फ़ोन लगा लिया..

“सरु… आप पहुँच गयीं.. ?”

“हाय मेरी लाड़ो, मैं पहुँच गयी… आज डॉक्टर के यहां अपॉइंटमेंट है। काका को लेकर दिखाने जाना है। तुम बताओ, तुम्हें मैंने अकेला छोड़ दिया इतने बड़े शहर में, तुम्हारे विराट अंकल तुम्हारे पास आए थे..?”

“नहीं… वह नहीं आ पाए थे सरू, लेकिन आप मेरी चिंता मत कीजिए, मैं बिल्कुल ठीक हूं…।
बल्कि सही मायने में कहूं तो मुझे अच्छा लग रहा है, अकेले रहना..।”

“कली उस दिन तुमने कहा था कि तुम्हारे फ्रेंड्स के टिकट में कुछ प्रॉब्लम हो गई है, इसलिए वह हमारे साथ नहीं जा पा रहे हैं। क्या वह इंडिया पहुंच गए..?”

“हम्म… बस आज शाम तक आ जायेंगे !”
.
” कली उस दिन एयरपोर्ट में तुमने कहा, उन तीनों की टिकट्स में कुछ ना कुछ प्रॉब्लम है। और इसलिए उन्हें लॉंग रूट से होते हुए इंडिया आना होगा। लेकिन अब तक तो उन्हे पहुंच जाना चाहिए था। मैं भी तुम्हें अकेले छोड़कर इसीलिए बड़े आराम से आ गई, क्योंकि तुमने कहा था वह लोग कल शाम तक ही पहुंच जाएंगे। और तुम अभी कह रही हो कि अब तक नहीं पहुंचे..!”

” आप चिंता मत करो,वो लोग पहुँच जायेंगे, अच्छा आप यह बताओ मुझे नाश्ता बनाना है।मेरे पास कुछ अंडे हैं, आलू है, और मूज़ली भी है, क्या करूं?”

” सबसे पहले अगर वहां कहीं एयरफ़्रायर दिखाई देता है, तो आलू को धोकर छीलकर चार बड़े बड़े टुकड़ों में काटकर एयर फायर में डाल दो,उसके पहले उस पर कुछ मसाले छिड़क कर उसे मेरिनेट कर लेना और उस पर तेल ग्रीस कर लेना !
…दस मिनट उन्हें पकने छोड़ दो.. अब एक पैन में हल्का सा तेल डालो और अंडे को फोड़ कर उसमें डाल दो.. ऊपर से हल्का सा नमक और पेपर डाल दो..
आलू पकने पर किसी पिन की सहायता से निकालना और उस पर भी हल्का पेपर साल्ट छिड़क लेना..
तुम नाश्ते के साथ दूध लेती हो.. तो वो भी गर्म कर लेना.. बस बन गया नाश्ता !”

“वाओ सरु थैंक यू… अब ये बताओ की मैं कितने अंडे खाती हूँ ?”

सारिका को कली के भोलेपन पर हंसी आ गयी…

“कभी तो एक कभी दो भी खा लेती हो.. ? “

“ओके.. अच्छा सरु अगर मैं लड़का होती तो कितने अंडे खा लेती.. !”

“उह्ह्ह… अगर तुम लड़का होती, और इसी उम्र की होती, और तुम्हारा कद पांच फ़ीट चार इंच होता..

“ना ना.. छैः फ़ीट… मान लो छैः फ़ीट होता तो..

“तब तो तुम चार पांच अंडे बड़े आराम से खा लेती.. !”
.
“अच्छा.. ! कली के लिए ये गहन आश्चर्य की बात थी..
उसने सरु से बात कर फ़ोन रख दिया..

उसने मन ही मन शौर्य के लिए पांच अंडे निकाल लिए..
पैन उसका बहुत बड़ा नहीं था, बल्कि छोटा ही था…..

कली अपने और शौर्य के लिए नाश्ता बनाने में लग गई….
उसने बड़े-बड़े तीन आलू लिए और उन्हें अच्छे से धोकर बड़ी मुश्किल से काटकर एयरफ़्रायर में डाल दिया। हालांकि सरू ने जैसा बताया था वह उन पर तेल मसाले लगाना भूल गई। इसके साथ ही वह आलू के छिलके निकालना भी भूल गयी…।

आलू सेट करने के बाद उसने अंडे निकाले और पेन को चूल्हे पर गर्म होने चढ़ा दिया।
    पैन के गर्म होते ही उसने उस में तेल डाला।
उससे गलती से थोड़ा ज्यादा ही तेल गिर गया। अब उसने अंडा फोड़ना शुरू किया। आज तक उसने अंडा कभी फोड़ा नहीं था। इसलिए उससे ढंग से फूट नहीं रहा था..
अंडा फोड़ने के लिए वो इधर-उधर कुछ तलाशने लगी। तभी उसकी नजर रसोई के दरवाजे पर खड़े शौर्य पर पड़ गई।
शौर्य दरवाजे पर टिक कर खड़ा हाथ बांधे उसे ही देख रहा था…।

” तुम जग गए? मैं बस नाश्ता ही बना रही थी, मुझे ऑफिस भी निकलना है ना..!”

आखरी की पंक्ति बोलते हुए वह गर्व से भर उठी। उसके लिए यह बहुत बड़ी बात थी कि वह अपने कदमों पर खड़े होने जा रही थी। वह खुद किसी काम को करने जा रही थी। जिसके बदले में उसे पैसे भी मिलने वाले थे। इसलिए कली बेहद खुश थी..

” तुम जॉब करती हो..?”

“हम्म.. !”
कली ने बहुत खुशी से गर्दन हां में हिला दी।
उसी वक्त कली का फोन बजने लगा। कली ने देखा उसके डैडा का नंबर दिखाई दे रहा था। कली ने अपना माथा पीट लिया।

उसके डैडा ने कल भी इस वक्त पर फोन किया था। और वह उसके दोस्तों से बात करना चाहते थे। तब कली ने उनसे कहा था कि वह कल किसी ना किसी से जरूर बात करवाएगी। आज उसे अचानक कुछ समझ नहीं आ रहा था तभी उसकी नजर शौर्य पर पड़ गई।

शौर्य हॉल में इधर-उधर चक्कर लगाते हुए टहल रहा था। कली उसके सामने पहुंच गई। कली ने उसे अपना फोन दिखाया और उसके सामने हाथ जोड़कर उसे अनुनय विनय करने लगी। इशारों इशारों में उसने झटपट शौर्य को अपना दोस्त डैरिक बन कर बात करने को मना लिया ,और फोन कटने से पहले ही फोन उठा लिया..

“कैसी हो कली ?”

“आई एम फाइन डैडा.. आप कैसे हो ?”

“तुम्हारे बिना कैसा होंगा बच्ची.. तुमने कुछ खाया ?”

“बस ब्रेकफास्ट रेडी हो रहा है.. !”

“ओके, सारिका किचन में होंगी ना !”

“हाँ… ! सरु डैडा का फ़ोन है.. !”

कली ने वहीं से आवाज लगा दी। जैसे वह सारिका को अपने डैडा के कॉल के बारे में बता रही हो। सामने खड़ा शौर्य अजीब नजरों से कली के पागलपन को देख रहा था ।
उसे मालूम था कि रसोई में कोई नहीं है। वह वापस मुङने को था कि कली ने उसके कंधे को पकड़ कर उसे अपनी तरफ घुमा लिया..

” तुम्हारी फ्रेंड्स तो तुम्हारे साथ ही रुकी होंगी ना..

” दोनों ही इस वक्त बाथरूम में है..!”

“एक साथ ?”

“नो… दो बाथरूम हैं डैडा !”

“ओह्ह… डेरिक कहाँ हैं.. उसी से बात करवा दो… !”

“यस डैडा मैं बात करवाती हूँ..।”

कली ने फोन शौर्य को  पकड़ा दिया..
शौर्य एकदम से चौंक गया, लेकिन हड़बड़ाया ज़रा भी नहीं..
उसने पूरे आत्मविश्वास से फ़ोन अपने हाथ में ले लिया..
उधर से वासुकी की आवाज़ उसके कानों में पड़ी..

“हेलो.. डेरिक ?”

“यस सर… कैसे हैं आप ?”

“ठीक हूँ.. तुम कैसे हो… ?”

कली ने राहत की साँस ली लेकिन तभी वासुकी ने अपना सवाल पूछ लिया..
कली घबरा कर शौर्य को देखने लगी कि पता नहीं इस सवाल का जवाब ये गधा लड़का कैसे देगा, और तभी..

क्रमशः

aparna…

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Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
1 year ago

और तभी अगला भाग पढ़ने की हमें प्रेरणा मिलती है, क्योंकि वासुकी सवा शेर और शौर्य शेर का बेटा, देखते हैं क्या रंग लाता है अगला भाग, राजा बांसुरी के साथ आज भी उसकी पसन्द ना पसंद, परेशानी खुशी सबमें साथ खड़ा है l, यूं ही कट जायेगा सफ़र पढ़ते रहने से के मंज़िल आयेगी नज़र शौर्य कली और वासुकी के गुत्थी सुलझने से…. बेहतरीन भाग दीदी 💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

कभी कभी सोचती हूँ क्या सच में ऐसे रिश्ते होते है जो बिना कहे मन की बात समझ जाए, जैसे राजा बांसुरी की बासुरी राजा समझ जाते है 🤔। पर आप जिस तरफ से किरदार में जान डालती है अगर झूठ भी हो तो भी सच सा लगता है।
बांसुरी जो हर्ष और मीठी के लिए कह रही थी मुझे लगता है ये बात हम पाठकों के मन में भी जरूर आयी होगी पर… देखते है आपने क्या सोचा है 😊।
कलि बेटा आप अपने पापा से झूठ तो बोल रहे हो पर वो भी वासुकी है..देखते है आपका झूठ कब तक चलता है..।
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏼।