जीवनसाथी -3 भाग -11

जीवनसाथी -3 भाग -11

जीवनसाथी by aparna

पूरे दिन की कड़ी मेहनत के बाद मीरा थक कर जब अपने कमरे पर पहुंची तो उसकी कुछ करने की हिम्मत नहीं हो रही थी। दिल ही दिल में उसे धनुष पर जितनी नाराजगी थी उससे कहीं ज्यादा वो शौर्य पर चिढ़ी हुई थी, क्या फायदा शौर्य प्रताप सिंह को अपना बॉयफ्रेंड बनाने का जब उसकी गर्लफ्रेंड को थोड़ी सी भी लिबर्टी ना दी जाए..

मीरा जली भूनी सी अपने फ्लैट में पहुंची और उसके चेहरे का उड़ा हुआ रंग देखकर उसकी रूम मेट उसे ध्यान से देखने लगी..

” तू मॉडलिंग असाइनमेंट के लिए गई थी ना.. ?”

“हाँ क्यूँ ?”

“ऐसा लग रहा है भरी धूप में बाजरे के खेत में बुवाई कर के आई है.. खैर तेरी शक्ल भी ऐसी ही है, वह तो तू 1 क्विंटल मेकअप पोती लेती है, वरना तेरी असली शक्ल अगर कोई देख ले ना तो.. !”

” मेरी असली शक्ल देखकर भले किसी को फर्क पड़े ना पड़े, लेकिन अगर तेरे जैसे दोस्त हो, तो किसी को दुश्मन की जरूरत कभी ना पड़े.. !”

” हाय मेरी गरीब देश की राजकुमारी चिढ़ गई मुझसे। मैं तो मजाक कर रही थी डार्लिंग। चल तू बैठ, मैं तेरे लिए लाल चाय बनाकर लाती हूं..!”

” लाल चाय क्यों..? दूध खत्म हो गया?”

“जी नहीं.. थोड़ा सा बचा था उसे तिलोत्तमा पी गयी.. !”

“यार किसी दिन ये तिलोत्तमा हाथ लगे ना तो कसम से इस के छोटे-छोटे टुकड़े करके रास्ते के कुत्तो को डाल आउंगी मैं.. गरीबी में आटा गीला इसे ही कहते हैं। सुबह से एक ढंग की चाय नहीं मिली यार।
   वहां पर तो पानी भी हम लोगों को जीरे वाला उबाल उबाल कर पिलाया जा रहा था। जिससे हम मॉडल के शरीर में 1 इंच का भी फैट ना जमा हो पाए।
     दिन में दो बार उन्होंने चाय के नाम पर ग्रीन टी थमा दी… कहा बस इसे ही पियो और वह ग्रीन टी मां कसम ऐसी जहर थी ना कि उसे पीकर मुझे लगा इससे आसान फिनाइल पीना होगा..!
इस बिल्ली मौसी को भी और कोई घर नहीं मिलता.. हम गरीबों की चाय ही इस कमज़र्फ को खटकती है..!
और तू भी यार शीना.. दूध का बर्तन ढांक कर रखने में तेरी जान क्यूँ निकलती हैं ?
   पक्का तूने बर्तन नहीं धोये होंगे, और तेरे पास बर्तन ढंकने को प्लेट नही रही होगी..

सामने खड़ी शीना ने चेहरे पर भोलेपन का बहुत गंदा सा अभिनय करते हुए हां में गर्दन हिला दी और मीरा बहुत हताश होकर बैठ गई…

“मुझे दूध वाली चाय ही पीनी है यार.. जा ना नीचे सोसाइटी वाली शॉप से एक टेट्रा पैक ले आ,छोटा वाला.. !”

“मैं नहीं लाने वाली.. पिछले महीने के राशन का पैसा उन्हें अभी तक दिया नहीं है। अब ऐसे में कुछ और उधारी लेने जाओ तो वह अंकल बहुत ज्ञान बघारते हैं, और उसके बाद उनकी आंखों के गंदे इशारे मुझे पसंद नहीं आते.. !”

“अबे.. खड़ूस ठरकी बुड्ढा ही तो है.. ।
वो बस आंखें ही सेंक सकता है, और कुछ नहीं..। और मुझे तो ऐसे लोगों से कोई फर्क नहीं पड़ता..। उल्टा मैं थोड़ा हॅंस बोल कर अपना काम निकलवा लेती हूँ..।
मैंने तो यहीं सीखा है कि काम पड़ने पर गधे को भी बाप बनाने से पीछे मत हटो !”

” इस घटिया और वाहियात ज्ञान की देवी जी को मैं प्रणाम करती हूँ..। आप ही जाइये और उन अंकल की आँखों को ठंडक दिलवा कर फ्री में दूध का पैक ले आइये, तब तक मैं चाय के लिए पानी चढ़ाती हूँ.. !”

शीना रसोई में घुस गयी और मीरा एक बार फिर घर से बाहर निकल गयी..

वह अभी दुकान की तरफ बढ़ रही थी कि उसके मोबाइल में एक मैसेज आ गया। उसने मैसेज खोल कर देखा हर्ष के ऑफिस से ब्रॉडकास्ट मैसेज था कि उन सभी को कल सुबह ठीक 5:45 पर ऑफिस के पीछे वाले गार्डन में इकट्ठा होना है। सभी को योगा की ड्रेस में आना होगा…

मोबाइल पर आए मैसेज को पढ़ने के बाद मीरा ने मोबाइल से ही अपना सर ठोक लिया, और दुकान की तरफ बढ़ गई।
कुछ देर बाद ही वह दूध का पाउच लेकर अपने फ्लैट में पहुंच चुकी थी…

बिना हाथ पैर धोए बिना कपड़े बदले ही वह फ्लैट के बाहर वाले कमरे में पड़े एकमात्र काउच पर पसरी हुई थी कि शीना उन दोनों के लिए चाय ले आई। चाय के साथ ही वो एक प्लेट में मुरमुरे भी लेकर आई थी..

मीरा ने जैसे ही चाय देखी वो तुरंत उठ बैठी और उसने तुरंत कप उठाकर अपने होठों से लगा लिया..

एक गहरा सा घूंट भरते ही उसके चेहरे पर गहन तृप्ति वाले भाव चले आए…

” दिन भर में अब जाकर कोई ढंग की चाय गले के नीचे उतरी है, वरना अब क्या कहूं यार… पानी तक वहां ढंग का नहीं मिला..!”

” मिलने को तो तुझे शौर्य प्रताप भी मिला हुआ है, लेकिन तुझे फायदा उठाना ही नहीं आता, उस चार्मिंग प्रिंस को फोन कर और बोल कि तेरे अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करें..
तेरे अकाउंट का बेलेन्स निल बटा सन्नाटा हो रखा है.. !”

” उसे तो मैं फोन करके पैसे मंगा लूंगी मैडम, लेकिन यह बताइए कि आपके अकाउंट का सारा पैसा कहां गायब है..?”

” पूछ तो तू ऐसे रहीं है, जैसे मैं कोई धन्ना सेठ की बेटी हूं! यार लें देकर 15,000 तो मेरी सैलरी आती है.. इस सड़े से फ्लैट का रेंट हम 9000 पे करते हैं, उसके बाद मेरा ऑफिस तक आने जाने का बस का पास, ऑफिस कैंटीन का खर्चा सब मिलाकर खत्म हो ही जाता है यार और फिर खाने पीने में भी तो लग ही जाता है ना…!”

” जब खाने से ज्यादा पीने पर ध्यान हो तो ऐसे ही बैंक अकाउंट के पैसे खाली हो जाते हैं..!”

” तू तो ऐसे बोल रही है जैसे मैं अकेली बेवड़ी हूं…
पीने खाने के बारे में तू मुझ से दो कदम आगे ही है! तेरा तो सपना ही है अपना घर ‘बार’ बनाने का..
पीते समय तुझे होश भी रहता है कि तू कितना और कहां पी रही है? बल्कि तुझे तो यही एडवाइज दूंगी कि यह मॉडलिंग वाले काम में उस शौर्य के ऑफिस में कभी गलती से भी पी मत लेना क्योंकि अगर तुझे चढ़ गई ना तो तू अपनी इस सड़बिल्ली जबान से अपनी खुद की पोल पट्टी उसके सामने खोल देगी..!”

” यार पीने की इतनी बात होती है ना तो तलब लगने लगती है! सारा का सारा माल खत्म है, मुझे इस शौर्य के बच्चे को फोन करना ही पड़ेगा..!”

“शौर्य का बच्चा नहीं मैडम अजातशत्रु का बच्चा है वह! वैसे लड़का तो बहुत हैंडसम है, लेकिन मैं इसके बाप पर ज्यादा फिदा हूं..!”

” तेरे जैसी जाने कितनी फिदा होंगी उन पर, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता! अब तू चुपचाप बैठना क्योंकि मैं उसे फोन लगाकर रोने वाली हूं..!”

शीना ने गंदा सा मुहँ बनाया और अपनी चाय सुड़कने लगी..
  थोड़ी देर के लिए आंखें बंद करके अपने आप को तैयार करने के बाद मीरा ने शौर्य को फोन लगा दिया…. उधर से जैसे ही शौर्य ने फोन उठाया मीरा टसुंऐ बहाते हुए अपनी तकलीफ बताने लगी….
लेकिन शौर्य  किसी इवेंट में बहुत ज्यादा व्यस्त था, उसके पास उस वक्त समय नहीं था, इसलिए कुछ ज्यादा ही हड़बड़ी में मीरा से बात कर रहा था…

” जल्दी बोलो मीरा थोड़ा सा बिजी हूं..!”

” मुझसे बात करने के लिए तो तुम्हारे पास कभी वक्त ही नहीं होता। कौन कहेगा कि तुम मेरे बॉयफ्रेंड हो? मेरे जैसी गर्लफ्रेंड हो तो लड़का पागल बना फिरता है पीछे पीछे, लेकिन तुमसे तो कभी होता नहीं कि खुद से एक फोन भी कर लो। तुमने खबर भी नहीं ली कि तुम्हारी मीरा यहां जिंदा है या मर गई? मैं यहां दिन-रात तुम्हारा नाम लेते हुए जी रही हूं, तुम्हें याद कर कर के मर रही हूं। और तुमसे यह तक नहीं होता..

“कट ईट शार्ट मीरा, प्लीज़.. !”

“ये तो हद हो गयी.. मतलब खुद से होकर तुम्हें अपने लेडी लव को फोन नहीं करना है। पर अगर मैं सारा दिन तड़पकर तुम्हारे फोन का इंतजार करूं, और उसके बाद जब तुम फोन ना करो तो मैं तुम्हें फोन लगाऊं,
   और तब भी तुम मुझसे बात नहीं करोगे.. !”

दूसरी तरफ से शौर्य ने एक गहरी सी सांस छोड़ी,और एक बार फिर उससे जल्दी से अपनी बात कहने को कह दिया…..

“मीरा फ़िलहाल क्या चाहिए वो बोलों ?”

“कुछ पैसो की ज़रूरत..

मीरा की बात पूरी होने से पहले शौर्य ने “कितने पैसे चाहिए ?” पूछ लिया

“एक लाख !”..

“हम्म.. डाल रहा !”

मीरा का फ़ोन कटा नहीं था और शौर्य ने उसके अकाउंट में पैसे डाल दिये.. मेसेज की नोटिफिकेशन देखते ही मीरा चहक उठी..
अब वो दुगुने जोश से शौर्य से बातें करने लगी..

और शौर्य ने अपनी तरफ से फोन म्यूट करके जेब में डाल दिया..
दूसरी तरफ से मीरा अपनी बातें कहती रही और शौर्य के जेब में पड़े फोन पर उसकी बातें रिकॉर्ड होती रही..

असल में इस वक्त पर शौर्य और बाकी रॉयल फैमिली के बच्चों से मिलने के लिए जापान की महारानी स्वयं आई हुई थी। और उनके सम्मान में इन सारे ही युवाओं ने अपने अपने फोन को साइलेंट कर दिया था। वह तो इत्तेफाक की बात थी कि शौर्य जब फोन साइलेंट कर रहा था, उसी वक्त मीरा का फोन आ गया। वह उठाना नहीं चाहता था लेकिन ऊँगली छू जाने से फ़ोन उठ गया। और उसे फोन कान से लगाकर जल्दी-जल्दी मीरा से बात करनी पड़ी। लेकिन मीरा उसकी समस्या सुनने को तैयार ही नहीं थी। वह लगातार अपना ही दुखड़ा रोए जा रही थी। शौर्य  के पास फ़ोन म्यूट करके अपनी जेब में डालने के अलावा और कोई उपाय नहीं बचा था..।

इस वक्त लंदन के रॉयल पैलेस के ओपल हॉल में सारे राज परिवार के युवा जापान की महारानी का उद्बोधन सुन रहे थे। उनके उद्बोधन के बाद वह सारे लोग एक साथ महारानी के सम्मान में खड़े हो गए। जापान के राष्ट्र गीत के बाद वहां महारानी भी उन युवाओं के बीच आ बैठी। सामने बने स्टेज पर कुछ रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां शुरू हो गई थी। अब तक के इस इवेंट में राजपरिवार के सदस्यों के अलावा और किसी का अंदर आना माना था, इसलिए कली अंदर नहीं जा पायी थी..।

वो बाहर रुकी हुई विराट का कहा काम निपटा रही थी… उसे पैलेस के भी फोटो लेने थे..

कुछ देर में ही विराट वहाँ चला आया…
उसके पीछे एक वेटर था.. विराट आकर कली के पास वाली कुर्सी पर बैठ गया..
और वेटर को उसने अपने साथ लाये सामान को वहीँ रखें टेबल पर रखने कह दिया..

“ये क्या है सर ?” कली ने विराट से पूछा और विराट ने ट्रे पर ढंका कपडा हटा दिया..

टी पॉट के साथ दो खाली कप देख कली के चेहरें पर हल्की सी रौनक आ गयी.. विराट ने झट कप में चाय उड़ेल दी और एक कप उठा कर कली की तरफ बढ़ा दिया..

कली ने कप उठा कर तुरंत अपने होंठो से लगा लिया और चाय का स्वाद महसूस करती अपनी आंखें बंद कर ली…

“अनंत तृप्ति शायद इसी को कहते हैं, मुझे तो लगता है सिर्फ चाय पीकर ही मुझे मोक्ष मिल जाता है..!”

कली की बात सुन विराट के चेहरें पर मुस्कान चली आई..

“सुबह से देख रहा था की तुम चाय के लिए परेशान हो.. !”

“सच कहूं सर तो यहाँ की राजसी चाय मुझसे पी ही नहीं जाती.. अलग अलग चांदी के बर्तनों में सज़ा सब कुछ जैसे ही कप में डलता है ठंडा हो जाता है, और वैसे भी जब तक दूध पत्ती चीनी एक साथ उबल उबल कर एकसार ना हो जाएं चाय में मज़ा कहाँ आता है.. !”

विराट ने गर्दन हिला दी..

“अब तो शाम हो रहीं है.. तुम्हें वापस लौटना भी तो होगा ना.. ?”..

कली ने भी अपनी गर्दन हिला कर हामी भर दी..
कुछ देर बाद ही अंदर चल रहा इवेंट समाप्त हो गया और वो सारे लड़के लड़कियां बाहर चले आये..

शाम की चाय का प्रबंध आज रॉयल गार्डन में था….
एक एक कर सारे लोग बाहर आने लगे.. वहाँ पर भी हर किसी के बैठने की व्यवस्था थी और उनके टेबल पर उनके नाम की लिखी तख्ती लगी थी..

कली भी अपनी चाय पीते हुए उन लोगों को देख रहीं थी.. भीड़ का जत्था था, लेकिन ये सारे लोग बिना किसी शोरगुल के सतर पंक्ति में आगे बढ़ते जा रहे थे..

कली ने उन लोगों को देखने के बाद विराट की तरफ देखा..

“राजपरिवार के बच्चों को बात करने की मनाही रहती है क्या ? एकदम कदम कदम बढ़ाये जा, ख़ुशी के गीत गाए जा वाले पैटर्न पर कदमताल मिलाते चल रहें हैं ये लोग !”..

कली की बात पर विराट ने धीरे से गर्दन हिला दी.. उसे खुद भी बचपन से कभी भी ये कवायद कहाँ पसंद थी और इसलिए तो वो अपने घर में सबसे अलग और निराला ही निकला था..

“सर एक कप चाय और मिलेगी क्या ?”

“हाँ क्यूँ नहीं.. ?”

विराट ने टीपॉट उसकी तरफ सरका दिया और कली ने अपने कप में जैसे ही चाय डालनी चाही वहीँ खड़े वेटर ने एक दूसरा साफ़ कप उसके सामने रख कर उसका कप हटा लिया..

कली एक बार फिर अपनी चाय का स्वाद लेने लगी.. उसी समय उसकी उन्हीं की टेबल की तरफ आते शौर्य पर नज़र पड़ गयी….

शौर्य दूर से ही विराट को देख विराट से मिलने आ रहा था, उसका ध्यान कली पर था ही नहीं..
वो विराट की तरफ बढ़ ही रहा था कि उसकी नज़र बाजू में बैठी कली पर चली गयी और वो थम गया, लेकिन उतनी देर में विराट उसे देख चुका था..
विराट ने उसे आँखों से इशारा कर मिलने बुला लिया..
शौर्य भी कली की परवाह किये बिना अपने चाचू के गले से लग गया..

“ये बवंडर कौन है? जिसे अपने साथ लिए घूम रहें हैं आप ? आपकी नयी गर्लफ्रेंड तो नहीं ? लेकिन उस हिसाब से एज डिफ़रेंस थोड़ा ज्यादा ही नहीं है ?”

“शौर्य…. !” विराट ने उसे मीठी सी झिड़की दे दी..

“बच्ची है वो.. अच्छी फोटोग्राफर है, इसलिए उसे साथ बुला लिया है.. वैसे तुम्हारा क्या सीन चल रहा उसके साथ ?”

“नो चाचू.. मेरा कोई सीन नहीं है.. बस इसे ये मत बताना की मैं प्रिंस हूँ.. उसे लगता है मैं परी का ड्राइवर हूँ !”

“व्हाट.. ?”

“हम्म.. प्लीज़ !”..

“ओके.. मुझे कोई दिक्कत नहीं है.. वैसे परी कहाँ है ?”

शौर्य ने मुड़ कर परी की तरफ इशारा कर दिया.. वो वहाँ मिली बाकी की राजकुमारियों के साथ बातें करने में व्यस्त थी..
वहाँ उन लोगों को हर इवेंट के अनुसार ही कपड़े पहनने थे, परी ने भी अभी शाम की चाय के लिए घुटनों तक झूलती फ्रॉक पहन रखी थी जिसमे वो वाकई परी लग रहीं थी…

कली अब भी बड़े ध्यान से अपने चाय के कप को देखती चाय पी रहीं थी, उसने सर उठा कर एक बार भी शौर्य की तरफ नहीं देखा था..
शौर्य ने उसकी तरफ देखा और वापस जाने को था कि कली अपने कप के साथ उठी और उसी तरफ आगे बढ़ी जिधर से शौर्य उसकी तरफ बढ़ रहा था, और दोनों की हल्की सी टक्कर हो गयी…

कली के कप की बची हुई चाय शौर्य की सफ़ेद कमीज़ रंग गयी..
और कली चौंक कर घबराने का अभिनय करने लगी..

“ओह्ह सॉरी मिस्टर ड्राइवर ! मैंने तो आपको देखा ही नहीं.. !”

अपनी पलकें गोल गोल घुमाती वो शौर्य को देख कहने लगी..
शौर्य का दिमाग घूम गया…उसने घूर कर कली की तरफ देखा और मुड़ कर जाने को था कि वहीँ रखा टिश्यू उठा कर कली उसकी कमीज़ साफ करने लगी और उसी चक्कर में उस छोटे से चाय के दाग को और बढ़ा दिया..

शौर्य एक गहरी सी साँस भर कर उसे घूरने लगा..

“जो दाग दिख भी नहीं रहा था उसे बेकार में इतना बढ़ा दिया, यू इडियट !”..

“अरे सॉरी सॉरी… आपके पास दूसरा सफ़ेद शर्ट तो होगा ही ना.. ? वैसे भी ड्राइवर सफ़ेद कमीज़ ही तो पहनते हैं.. ! अगर नहीं होगा तो मैं कल अपनी वाली लें आउंगी.. !”
.शौर्य ने उसे घूर कर देखा और उसके ज़रा करीब आकर धीरे से अपने दिल की भड़ास निकाल गया..

“कल के कल मुझे दूसरी ऐसी ही शर्ट दे देना, क्यूंकि मेरी मैडम को गंदे कपड़ों से नफरत है, और अब ये शर्ट धुलने का यहाँ मेरे पास वक्त नहीं है.. !”

“क्यूँ.. इतने बड़े इवेंट में सर्वेंट्स के लिए रुकने का कोई इंतज़ाम नहीं है.. लानत है ऐसे राजपरिवार के लोगों पर.. खुद तो एक एक राजकुमार राजकुमारी को तीन हज़ार स्क्वेयर फ़ीट का बैडरूम दे डालते है,और नौकरो की गत नहीं !”

“हाँ ऐसा ही कुछ है.. हम नौकरो के लिए बैकयार्ड में व्यवस्था है, लेकिन हम अपने कपड़े धुल कर यहाँ नहीं डाल सकते, इसलिए तीन दिन के लिए तीन जोड़ी कपड़े बोले थे यहाँ.. मेरे पास कुल जमा दो ही शर्ट है.. सोचा था इसे ही कल भी पहन लूंगा.. अब ये बर्बाद हो गयी.. क्या करूँ बोलों ?”

“अरे बाबा.. इतना गुस्सा मत करो.. मैं कल लें आउंगी.. अपना साइज बता दो बस.. !”..

शौर्य को कली की घबराहट देख कर अब हंसी आने लगी थी, लेकिन अपनी हंसी रोकें वो उसकी तरफ गर्दन घूमा कर खड़ा हो गया..

“देख लो साइज  !”

शौर्य की कॉलर को पलट कर कली ने देखा और उसका साइज और ब्रांड ध्यान से देख याद कर लिया..

विराट को शौर्य की हरकत देख हंसी आ रहीं थी..

“वैसे एक बात पूछूं… ?”

“पूछ लो !”..

“तुम विराट सर के गले कैसे लग गए.. मतलब इतने बड़े आदमी ने तुम जैसे… नहीं मेरा कहने का मतलब था..

“इनके घर भी काम किया है मैंने..।
तब से बहुत मानते हैं मुझे, चाहो तो विराट सर से पूछ लो.. और वैसे भी ये विदेशो में रहने वाले इंडियंस भी विदेशियों के जैसे हो जाते हैं.. गरीबी अमीरी का भेदभाव नहीं करते !”

“अभी तो तुमने बताया की तुम लोगों को कपड़े सूखाने की भी इजाज़त नहीं है और अब कह रहे भेदभाव नहीं करते !”

“अरे राजा महाराजाओ की बात अलग है.. !”

“हाँ वो तो है… मैं भी एक राजा साहब को जानती हूँ, और उनके जैसा इस पूरी दुनिया में कोई नहीं है.. !”..

शौर्य ने मुहँ बना कली की तरफ देखा, उसे लगा आजकल की जनरेशन की तरह किसी जापानी या कोरियाई राजा या राजकुमार पर कली भी फ़िदा होगी, इसलिए बिना नाम सुने ही जाने लगा…
कली ने इधर उधर देखा और धीरे से नाम ले लिया..

“राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला !”

हालाँकि शौर्य के कानो में कली की आवाज़ नही पड़ी और वो परी की तरफ बढ़ गया..

कली भी अपना सामान समेटे विराट से अनुमति लेकर घर के लिए वापस निकल गयी… उसे मालूम था उसके डैडा उसी जगह उसका इंतज़ार कर रहें होंगे जहाँ उन्होने उसे छोड़ा था..

वो तेज़ी से अपने सारे दोस्तों को फ़ोन मिलाती हुई आगे बढ़ गयी..

नियत समय पर उसके दोस्त उसे स्टेशन पर मिल गए.. वहाँ से ट्रेन में सवार हो वो अपने स्टेशन के लिए बढ़ गए….
कुछ ही देर में वो लोग उसी स्टेशन पर पहुँच गए जहाँ से सुबह कली ने गाडी पकड़ी थी..

ट्रेन का ग्लास डोर खुलते ही कली को सामने वासुकी खड़ा नज़र आ गया… लम्बे से ओवरकोट में प्लेटफॉर्म पर खड़ा वासुकी अपनी कली को देखते ही प्रसन्न हो गया..
कली भी भागकर उसके गले से लग गयी..
ख़ुशी से चहकते हुए वो दिन भर का किस्सा सुनाने लगी,उसके दोस्तों ने उसे हाथ हिला कर विदा दे दी… कली को साथ लिए वासुकी घर की तरफ निकल गया..

“कली.. तुम्हारी दोस्त नतालिया ने सुबह तो कुछ पिंक कलर की ड्रेस पहनी थी, उसे वहाँ ड्रेस बदलने का मौका कब मिल गया ? मतलब क्या वो अपने साथ कपड़े  लेकर गयी थी ?”

कली अपनी जीभ काट कर रह गयी..
वो हड़बड़ी में अपने दोस्तों से ये कहना ही भूल गयी थी कि सुबह के कपड़ों में ही आकर मिले.. उसके डैडा सीआईडी ऑफिसर से कम थोड़े ना हैं !

“हाँ वो उसकी ड्रेस पर कुछ गिर गया था, इसलिए उसे बदलना पड़ा.. !”

और तभी कली को याद आ गया कि उसे उस ड्राइवर के लिए भी एक शर्ट खरीदनी है..
उसने वासुकी की तरफ देखा और धीरे से ना में गर्दन हिला दी.. ” नहीं डैडा की शर्ट उसे सही नहीं आएगी.. उसके लिए नयी ही लेनी पड़ेगी… !”

दिन भर में अभी घर लौटती कली की अपने डैडा से कहने की हिम्मत नहीं हो रहीं थी, लेकिन उसने हिम्मत जुटा कर कह ही दिया..

क्रमशः

aparna…

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Manu verma
Manu verma
2 years ago

बहुत सुन्दर भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️

Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
2 years ago

Wowww padhakar mza aa gya, kali shaurya aur mira ki gatha, bechari Shani Billi khub paise eainthna chahati hai, very bad girl, but superb chap di…🙏💐