जीवनसाथी -3 भाग -9

जीवनसाथी -3 भाग -9

जीवनसाथी by aparna

कली को इधर से उधर भागते भटकते देख एक गार्ड ने आकर उसे रोका और उससे पूछताछ करने लगा..
कली को लगा कहीं वह उससे बाहर का रास्ता ना दिखा दे कली ने उसे विराट का नाम बता दिया..
गनीमत थी की गार्ड विराट को अच्छे से पहचानता था.. उसने अपने साथियों से पता किया और आखिर कली का एंट्री पास उसे मिल गया..

कली भी चहकती हुई अंदर दाखिल हो गयी…

लंदन पैलेस वो पहले भी अपने डैडा के साथ घूमने आ चुकी थी, लेकिन वैसे घूमने में बहुत सी चीज़े बंद मिलती थी..
आज पहली बार वो अकेली अंदर जा रहीं थी.. उसके दिल में अजीब सी धुकधुकी मची हुई थी..

लोगों की भीड़ जिस तरफ जाते हुए नज़र आ रहीं थी, वो भी उसी तरफ बढ़ गयी.. पैलेस के मुख्य द्वार की जगह सभी लोग उसके बाई तरफ बने रास्ते की ओर मुड़ रहे थे, कली भी उधर बढ़ गई कि एक लंबा सा ढेर सारी खिड़कियों वाला हिस्सा महल से लगकर उसके बाएं और बना हुआ था..।
महल के दरवाजे की तरह ही इसका भी ऊंचा सा लकड़ी का दरवाजा था। दरवाजे की नक्काशी और उसमें हुआ कांच का काम इतना अदभुत था कि कली कुछ देर के लिए उस दरवाजे को देखती हुई ही खो गई। लेकिन लोगों की भीड़ भाड़ के रेले में बहती हुई वह भी अंदर दाखिल हो गई। अंदर जाकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई ।
   यह पैलेस का इंसाइड स्विमिंग पूल था। लगभग 6000 स्क्वायर फीट में फैला पूल देखने वालों की आंखें चौंधिया रहा था…

पूल के गहरे नीले पानी के नीचे फर्श पर अलग-अलग रंगों की रोशनीया लगी हुई थी, जो पल पल रन्ग बदलकर पानी का भी रंग बदलकर देखने वालों को अद्भुत ही सुकून प्रदान कर रही थी।
शायद सभी मेहमानों का स्वागत स्वल्पाहार यहीं होना था…
पूल के चारों तरफ गोल टेबल सजी थी… सब पर सफ़ेद रेशमी कपडा बिछा था.. और उन टेबल के चारों ओर कुर्सियां लगी थी.. कुर्सियों को भी सफ़ेद रेशमी कपड़े से बाँधा गया था..
हर कुर्सी के पीछे गुलाबी रंग के जालीदार कपड़े से बड़ा सा फूल बनाया गया था..
हर एक टेबल पर एक छोटी सी चांदी की ट्रे में कुछ ज़रूरी नमकीन रोस्टेड बादाम पिस्ते रखे हुए थे और हर टेबल पर उसमें बैठने वाले के नाम की तख्ती रखी थी..

कली बड़ी नजाकत से आगे बढ़ती अपने बैठने के लिए जगह ढूँढ रहीं थी..
उसने पहले इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि टेबल पर बैठने वालों का नाम लिखा है…
पूल में पानी की तरफ सबसे किनारे लगी एक कुर्सी पर वो धीरे से जा बैठी..

और थोड़ी ही देर में किसी की आवाज़ ने उसे चौंका दिया..
कोई उसके ठीक कान के पास आकर चीख पड़ा..

“एक्सक्यूज़ मी प्रिंसेस परी… ?”

वो चौंक कर पीछे पलटी और सामने खड़े उसी कॉफ़ी वाले लड़के को देख कली की भौंह चढ़ गयी..
पता नहीं खुद को कहाँ का राजकुमार समझता है ? वैसे यहाँ आया है तो होगा भी.. !”

मन ही मन बड़बड़ाती कली ने उसे घूर कर देखा..

“तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है ? जब देखो तब तुम्हें मैं ही मिलती हूँ क्या ?”

“सुनो . मिलने की ये जो बात है ना, उसके लिए मेरे पास लड़कियॉं की लाइन लगी है… और दूसरी बात अगर पूरे यूनिवर्स में भी तुम आखिरी लड़की बची ना तब भी मैं तुम्हारे पीछे तो आने से रहा.. !”

“लग तो नहीं रहा.. बातें तो बड़ी बड़ी बना रहें हो पर ढूँढ कर मुझ तक ही चले आये.. तुम लड़कों की प्रॉब्लम क्या होती है…?  जहाँ सुंदर लड़की देखी वहाँ लपक लिए… !”

“ओह्हो हो.. सुंदर लड़की !! आपको मैं सिर्फ ये बताने आया हूँ कि ये डेस्क प्रिंसेस परी के नाम पर रिज़र्व है.. और आप किसी भी रिज़र्व्ड टेबल पर अपना आसन नहीं जमा सकती.. ?”..

शौर्य की बात सुन कर कली ने धीरे से झेंप कर टेबल के बीचोबीच देखा उसे परी एन्ड शौर्य लिखा नज़र आ गया..

“ओह्ह… हाँ… वो तो ऐसा था की चलते हुए बेलेंस बिगड़ा और मैं यहाँ इस कुर्सी पर गिर पड़ी.. !”

कली ने अपनी झेंप मिटाते हुए कहा…

“वैसे तुम बड़े चौधरी बने घूम रहें हो ? तुम किस खोये हुए प्लेनेट के प्रिंस हो…?
कहीं ये शौर्य तुम ही तो नहीं.. वैसे सच कहूं तो शक्ल से प्रिंस लगते नहीं हो ? “

“बस इतनी सी देर में मेंरी शक्ल पर रिसर्च भी कर ली ?
वैसे प्रिंस नहीं लगता तो क्या लगता हूँ ?”

“प्रिंस के ड्राइवर ! जैसे वेस्टकोट पहन कर सजे धजे आये हो ना, पूरे ड्राइवर लग रहें हो.. !”

“मुझे तो लगा था तुम्हारी आंखें भी मेरी किस्मत की तरह फूटी हुई हैं पर नहीं, तुम्हें तो साफ़ साफ दिख रहा है.. सही पहचाना मैं ड्राइवर ही हूं..

“देखा… कली कभी गलत नहीं होती.. !”

कली ने ऐंठ कर कहा और अपनी जगह से खड़ी हो गयी..

वो इधर उधर देख रहीं थी कि शौर्य वापस बोल पड़ा..

“हाँ देख लो, वैसे यक़ीन नहीं है की तुम्हारे नाम की तख्ती यहाँ मिलेगी.. पर ढूँढ लो.. कोशिश करने में क्या हर्ज़ है.. ?”

कली ने घूर कर शौर्य को देखा और बोल पड़ी..

“मिस्टर ड्राइवर अगर आप अपनी कैंची जैसी ज़ुबान को ज़रा कम चलाएंगे तो मुझे आसानी होगी.. आपकी लगातार चलती बातों के कारण फोकस नहीं कर पा रहीं हूँ.. !”

“ओह्ह आई एम सॉरी प्रिंसेस ! वैसे तुम हो कहाँ की प्रिंसेस? किसी खोये हुए प्लेनेट से आई एलियन सी लगती हो… और सबसे अजीब बात तुम्हारे साथ ये है कि उस प्लेनेट से खुद तो चली आई, अपना दिमाग वहीँ छोड़ आई हो…..  है ना प्रिंसेस.. !”

कली के कंधे पर किसी ने पीछे से हाथ रखा और वो चौंक कर पलट गयी..
उसके ठीक पीछे विराट खड़ा था..
शौर्य ने जैसे ही विराट को देखा तुरंत अपने होंठो पर ऊँगली रख उसे चुप रहने का इशारा कर दिया, विराट भी अपने भतीजे का इशारा समझ चुप रह गया..
विराट कली से मुखातिब हो गया…

“हेलो मिस…

“कली… कली अनिरुद्ध नाम है मेरा सर !”

“ओह्ह यस कली… सॉरी, मेरी वजह से तुम्हें परेशान होना पड़ा.. आओ हमारी सिटिंग उस तरफ है.. “

वो कली को साथ लिए आगे बढ़ गया.. कली ने विराट से इजाज़त ली और वापस लौट कर शौर्य के पास चली आई..

“हे मिस्टर ड्राइवर सुनिए… देख लिया, बड़े बड़े लोगों से जान पहचान है मेरी.. अगर यहाँ तुम्हें खाना वाना मिलने में दिक्कत हुई तो मुझे बोल देना, खाना पीना सब दिलवा दूंगी.. !”

“आर यू श्योर ?”

शौर्य को भी उस बड़बोली को छेड़ने में मज़ा आ रहा था..

“हाँ हाँ क्यूँ नहीं.. उन्हें जानते हो जो अभी मुझे अपने साथ लेकर जा रहे थे… दुनिया के सबसे बड़े फोटोग्राफर है.. जाने कितने सारे अवार्ड मिले हैं इन्हें.. और इन्होने खुद मुझे अपने आप को असिस्ट करने बुलाया है..।
इन्होने इत्तेफाक से मेरी खींची फोटोज़ देख ली थी और यू नो जो एक बार मेरे खींचे स्नेप्स देख लें ना फिर वो किसी और को देखना नहीं चाहता…।”

कली खुद का गुणगान कर रही थी कि उसका मोबाइल बजने लगा…
डैडा लिखा देख वो उछल कर शौर्य से दूर चली गयी और लपक कर फ़ोन उठा लिया..

“कली…. तुमसे कहा था ना हर एक घंटे में मेसेज कर देना… !”

वासुकी की तीखी सी आवाज़ कानों में पड़ते ही कली के होश उड़ गए..

“सो सॉरी डैडा… मैं अभी करने वाली थी.. मैं एकदम ठीक हूँ.. अच्छे से पहुँच गयी हूँ.. और सच कहूं तो बड़ा मज़ा आ रहा है डैडा… बस आपको मिस कर रहीं हूँ.. बहुत सारा.. !”

“आ जाऊं.. ?!”

वासुकी के सवाल पर कली ने अपने माथे पर हाथ मार लिया..

“ना नो नहीं.. मेरा मतलब मेरे लिए आप अपना काम मत छोड़िये… मैं वैसे भी रात तक वापस आ जाउंगी.. !”

वासुकी ने मुस्कुरा कर फ़ोन रख दिया..

कली फटाफट विराट की तरफ बढ़ गयी.. उसके पास बैठते ही कली ने अपने बैग से अपना लैपटॉप निकाला उसमें अपना मोबाइल नंबर डाल कर एक एप में गयी और एक मेसेज टाइप कर उसका टाइम सेट कर उसे शेड्यूल कर दिया..

ये काम इसे सुबह यहाँ पहुँचते साथ करना था, जो वो जल्दी में भूल गयी थी, अब हर एक घंटे में उसके डैडा के पास उसकी सलामती के मेसेज पहुँचते रहेंगे..
निश्चिन्त होकर वो विराट के साथ बातें करने लगी…..

विराट ने उसके पास के साथ ही उसका नाम भी गेस्ट लिस्ट में डलवा दिया था..
इसलिए सभी मेहमानो की तरह ही उसके साथ भी पेश आया जा रहा था.. जब सबकी टेबल पर वेटर नाश्ता परोसने लगे तब उसकी टेबल पर भी वेटर खाने पीने का सामान ले आये..

उसने बड़ी अदा से ब्लूबेरी जूस का राउंड ग्लास अपनी दो उँगलियों में फंसा कर अपने होंठो से लगा कर सिप ली और शौर्य की टेबल पर उसकी नज़र पड़ गयी..

शौर्य को कली को देख हंसी आ गयी और वो मुहँ फेर कर अपना नाश्ता खाने लगा…
कली ने भौंह चढ़ा कर मुहँ फेर लिया…

कुछ देर बाद विराट कली को साथ लिए पैलेस के एक्सक्लूसिव फोटो लेने अंदर चला गया..

उस वक्त पर पूल साइड में बैठे रॉयल फैमिली के बच्चों का आपस में मिलना जुलना हो रहा था..
सभी नौजवान लड़के लड़कियां आपस में एक दूसरे का परिचय पा कर खुश थे..
वहाँ मौजूद इवेंट मैनेजर छोटी छोटी प्रतियोगिता जैसी करवा कर सब का मनोरंजन भी करवा रहे थे..

कोरिया के प्रिंस ने जहाँ बीटीएस वालों के गीत को सुनाया वहीँ ईरान की प्रिंसेस ने लेडी गागा को..
घूम फिर कर जब बारी आई शौर्य की तो सबके लाख कहने पर भी वो ना में सर हिलाता रहा, फिर जाने क्या सोच कर वहाँ आये बैंड को अपने गाने की धुन बता कर उसने गिटार थाम ली….
और अपना बचपन से सुना गीत दुहरा दिया…

प्यार में होता है क्या जादू
तू जाने या मैं जानूँ…
रहता नहीं क्यूँ दिल पर काबू
तू जाने या मैं जानूँ
प्यार में होता है…

गुनगुन करता क्यों फिरता है
कोई भँवरा बागों में
क्यों होती है फूल में खुशबू
तू जाने या मैं जानूँ
प्यार में होता है…

पूल साइड के ठीक बाहरी हिस्से में खड़ी कली वहाँ के फोटोग्राफ्स निकाल रही थी, उसके कानों में ये गाना पड़ा और उसने भी मुस्कुरा कर बचपन से सुन रखे इस गीत के बोलों को धीरे से दुहरा दिया..

“तू जाने या मैं जानू…. !”

******

मन मार कर मीरा को हर्ष के ऑफ़िस पहुंचना ही पड़ा.. उसने सुन रखा था हर्ष वक्त का पाबंद है और सुबह सबसे पहले पहुँच जाता है, पर इस वक्त शौर्य पर उसका इतना दिमाग ख़राब हुआ था कि रात भर विस्की पीकर वो अपना दिमाग दुरुस्त करने की कोशिश करती रहीं..

सुबह आठ बजे जब उसकी रूम मेट ने उसे उठाने की कोशिश की तब भी मीरा की आंखें नहीं खुल रहीं थी..

“मीशा, तुझे हर्ष के ऑफ़िस पहुंचना है। द ग्रेट हर्षवर्धन सिंह बुंदेला के… और तू कुम्भकर्ण की नानी बनी सो रही.. !”

हर्ष का नाम सुनते ही मीशा चौंक कर उठ बैठी ..

“यार इस बन्दे का ज़बरदस्त टेरर है वाकई… वरना तू जिसके कान में पुलिस का नाम सुनकर भी जूं ना रेंगे,  वो हर्षवर्धन के नाम से उठ गयी.. कुछ बात तो है बन्दे में.. !”

“है तो बहुत कुछ बन्दे में.. पर फ़िलहाल मुझे तैयार होकर जाने दे.. !”

“मैडम आज भी पानी नहीं आया है.. अपने बिल जो पे नहीं किया था.. ! अब आप नहायेंगी कैसे !”

रानी की बात सुन कर मीशा ने अपने माथे पर हाथ मार लिया..

“शिट यार.. ! आज पक्का वापस आते हुए बिल भर दूंगी.. ! वैसे भी मेकअप करके मैं नहायी धोयी दिखने लगती हूँ… बाकी का चमत्कार मेरा ये नॉओमी कैम्पबेल परफ्यूम कर देता है.. !”

“यार  तू क्यूँ इतना पैसा उड़ा देती हैं… और उड़ाती कहाँ है? मैं दो बार तुझे बिल पे करने के लिए अमाउंट दे चुकी हूं..
इससे अच्छा तो मैं ही अपने ऑफिस की छुट्टी करके बिल पे करने चली जाती..!”

” आज पक्का पे कर दूंगी मेरी मां, बस अब मुझे जाने दे..

मीशा जैसे तैसे बाथरूम में घुसी और थोड़े से पानी में चुग्गा समान करके बाहर निकल आई। उसने फटाफट एक हॉट पैंट के ऊपर छोटी सी क्रॉप टॉप पहनी और जैकेट को कंधे में डालकर अपना चमकीला सा पर्स लटकाए बाहर की तरफ निकल गई…

” याद से बिल पे कर देना..

मीशा के पीछे रानी आवाज लगाती रह गई और मीशा भागती दौड़ती ऑटो पकड़ने चली गयी…

मीरा हर्षवर्धन के ऑफिस के चौथे फ्लोर पर पहुंची, तब तक चुनी गई बाकी सारी मॉडल्स वहां पहुंच चुकी थी। वर्कशॉप शुरू हो चुकी थी। मीरा जल्दी से जाकर लड़कियों की उन भीड़ में मिक्स होने की कोशिश करने लगी, उसे लगा उस पर किसी का भी ध्यान नहीं गया लेकिन उसे मालूम नहीं था कि वहाँ एक लड़का ऐसा भी मौजूद था जिसकी पीठ पर भी आंखें थी…।

“हर्षवर्धन सर कहां है?”

मीरा ने अपने साथ खड़ी मॉडल से पूछा और उस मॉडल ने ना में गर्दन हिला दी

” वह अब तक यहां नहीं आए..”

” थैंक गॉड। वैसे आज लेट कैसे हो गए हर्षवर्धन सर, कहीं कल पार्टी तो नहीं कर रहे थे..?”

मीरा ने चुहलबाजी करने की कोशिश की…

उस मॉडल में घूरकर मीरा को देखा, और वापस अपना जवाब दोहरा दिया…

” मैंने कहा, यहां अब तक नहीं आए। मतलब कि इस फ्लोर पर।
   वह अपने ऑफिस में सुबह अपने वक्त पर मौजूद थे। और हम सब ने भी यहां एंट्री करने के बाद उनके ऑफिस के रजिस्टर में जाकर अपने नाम के आगे खुद से अपने साइन बनाए हैं…।
तुमने अपना साइन कर लिया.. ?”

इस मॉडल के सवाल पर मीरा के चेहरे पर 12 बज गए उसने धीरे से अपने माथे पर अपना हाथ मार लिया…

” साला ये तो स्कूल का प्रिंसिपल निकला यार..! नहीं मैं बिना साइन किये यहाँ चली आई.. !”

“जाओ जल्दी कर के आओ.. वरना यहाँ से बाहर कर देंगे.. !

“अच्छी मुसीबत है.. ?”

वो बोझिल सी बाहर निकल ही रही थी कि एक गहरी सी आवाज़ वहाँ गूंज गयी..

“हेलो गर्ल्स.. रोज़ रोज़ के दस्तखत के झंझट से आप लोगों को मुक्ति दिलवाने वाला हूं मैं, और इसके लिए आप सबको अभी 5 मिनट में यहां एक तरफ खड़े होना है.. ।”

ये घोषणा सुनते ही मीरा ने राहत की साँस ली, कि तभी वो आवाज़ वापस सुनाई पड़ने लगी…

” कल देर हो जाने के कारण आप लोगों का बायोमेट्रिक तैयार नहीं हो पाया था। आज किनारे लगी उस मशीन में आप अपनी प्यूपिल यानी की आंख का पिक्चर देंगी और उसके बाद अपना अपना थंब इंप्रेशन उस पंच मशीन में सेलेक्ट कर देंगे।
इसके बाद आप के नाम पर एक नंबर जनरेट होगा, और आपको वह कार्ड दे दिया जाएगा। इससे आप लोगों को इस बात की आसानी होगी कि कल सुबह आप जब अपनी वर्कशॉप के लिए यहां आएंगी, तब आपको सातवीं मंजिल के ऑफिस में जाकर रजिस्टर पर दस्तखत नहीं करने होंगे ।
  आप सीधे इसी मंजिल पर आएंगी और बाहर लगे ग्लासडोर के ठीक बाहर जो पंच मशीन लगी है, उस पर लगे एक छोटे से ग्लास पीस पर अपनी आंख रख कर देखना है।और उस पर एक जगह अंगूठे का निशान बना है उसमें आपको अपने अंगूठे का इंप्रेशन देना है। उसके बाद डोर का लॉक अपने आप खुल जाएगा और आप लोग अंदर एंट्री कर पाएंगे…

” सत्यानाश !! जान ही ले लो अब..  यह लोग मॉडल बना रहे हैं कि हमे फौज में भर्ती करने वाले हैं? सच सच बताओ यार, यह कोई रॉ का ट्रेनिंग शेड्यूल तो नहीं है ? सुबह 7 बजे से शाम 8 बजे तक ये लोग हमारी ट्रेनिंग करवाएंगे, कहीं गोला बारूद बनाना और गन चलाना तो नहीं सिखाने वाले हैं…?”

मीरा को लगा उसने बहुत मज़ेदार बात कहीं है, लेकिन उसकी बात सुन कर आसपास की मॉडल्स ने अजीब सा मुहँ बना कर उसे देखा और सामने धनुष की बात सुनने लगी..

मीरा की बात सुनकर उस मॉडल ने मुंह बनाकर उसे देखा और चुपचाप सामने देखने लगी… मीरा की यह बात सामने खड़े उस लड़के के कान पर भी पहुंच गई थी.. वह मुस्कुराता हुआ मीरा के सामने चला आया..

“हेलो मेरा नाम धनुष है, और मैं आपके बॉस हर्षवर्धन का पर्सनल असिस्टेंट हूं….
इस ऑफिस के ज्यादातर काम मेरी आंखों के सामने से ही होकर गुजरते हैं.. और इस वर्कशॉप की जिम्मेदारी भी मेरी है! क्योंकि हर्ष के इस प्रोजेक्ट के लिए मुझे बेस्ट सात मॉडल्स की जरूरत है..।
आप 10 लड़कियों को चुना गया है। और 10 दिन तक आप लोगों की वर्कशॉप होगी। उस वर्कशॉप के बाद एक बार फिर आप लोगों का एक टेस्ट लिया जाएगा।
यकीन मानिए अभी तो जान ली तक नहीं है, लेकिन अगर मेरे साथ काम करती रही, तो या तो खुशी से जान दे दोगी या मैं जान ले लूंगा।”

मीरा के चेहरे पर परेशानी की हल्की  सी रेखा आई और चली गई और उसे गहरी नजरों से देखते हुए धनुष ने धीरे से अपना मुंह फेर लिया।

“वेलकम टू माय वर्ल्ड मॉडल्स।  Let me take you into my miraculous world….
welcome…

क्रमशः

aparna…

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

3 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Kavita
Kavita
1 year ago

इस मीरा की तो ऐसी तैसी करवानी ही पड़ेगी धनुष को

Manu verma
Manu verma
2 years ago

लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️

Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
2 years ago

एक तरफ शौर्य और कली का नोंक झोंक तकरार है, एक तरफ़ मीरा बेकरार है, कदम कदम पर उसके लिए मुसीबतें हैं हालांकि वह खुद भी मुसीबत है और शौर्य की मुसीबत बनना चाहती है लेकिन हर्ष वह दीवार जिसे पार करना उसके लिए आसान नहीं है। गाना बहुत अच्छा और प्यारा था दीदी,… बेहतरीन भाग दीदी…🙏💐