जीवनसाथी -3 भाग -8

जीवनसाथी -3 भाग -8

जीवनसाथी by aparna

शाम से ही कली इधर से उधर टहलती हुई सोच में डूबी हुई थी, क्योंकि उसने तरकीब तो सोच रखी थी लेकिन उसकी तरकीब कितने फ़ीसदी कामयाब होती है यह पूरी तरह से वासुकी के ऊपर निर्भर करता था।

वह अपने जिद्दी और सनकी पिता को अच्छे से जानती थी..।

वासुकी के घर लौटने का वक्त हो चुका था। बाहर पोर्टिको में गाड़ी आकर रुकी और खिड़की से झांक कर देखने के बाद कली ने सरू की तरफ इशारा किया और बोलना शुरु कर दिया। वासुकी किसी टेंडर पर दर्श और अपनी सेक्रेटरी के साथ कुछ विचार विमर्श करते हुए अंदर दाखिल हुआ और घर पर बने अपने ऑफिस की तरफ चला गया…

कली मुंह बनाकर रह गई…
क्यूंकि वासुकी ने उसकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया..

सारिका ने उसे इशारा किया और अपने पास बुला लिया, और अपनी सरु मासी के पास बैठी वो बड़बड़ाने लगी..

“मेरे साथ ही हमेशा ऐसा क्यूँ होता है सरु, मैं कभी कहीं अपनी मर्ज़ी से जा नहीं सकती ? अपनी मर्ज़ी से कुछ कर नहीं सकती ? कभी कभी तो लगता है ज़िंदगी भी अपनी मर्ज़ी से कहाँ जी रहीं हूँ मैं.. ?
मेरे साथ के लोगों को देखना, तब समझ में आएगा कि जिंदगी क्या होती है। वो लोग सुबह उठते साथ मुस्कुरा उठते हैं, और सबसे पहले भगवान को धन्यवाद देते हैं कि, हमें यह जीवन दिया। जिसमें हम इतनी सारी चीजें कर सकते हैं, और मैं सुबह उठ कर  भगवान को धन्यवाद देना ही नहीं चाहती, सच कह रही हूं…।
मुझे लगता है, फिर आज का एक दिन आ गया जिसमें मैं यह नहीं कर पाऊंगी, वह नहीं कर पाऊंगी, यह भी नहीं कर पाऊंगी, और कुछ भी नहीं कर पाऊंगी…. !”

सरू उसे आंखों से इशारा कर रही थी, लेकिन कली अपने स्वगत भाषण में व्यस्त थी और तभी वासुकी ने उसके कंधे पर अपना हाथ रख दिया..

” क्या बात है, मेरी प्रिंसेस आज बहुत नाराज है? ऐसा कौन सा काम है जो तुम नहीं कर पा रही हो.. ?”

कली अपनी जीभ काट कर रह गई।और वासुकी उसके ठीक बगल की कुर्सी खींच कर बैठ गया।
    घर का यह हिस्सा हॉल में ही खुलता था। यह ओपन किचन का हिस्सा था, जिसमें किचन और हॉल के बीच में एक आधी दूरी का स्लैब बना हुआ था।
जिसके ठीक दूसरी तरफ ऊंची ऊंची स्टूल रखी थी। उसी में से एक स्टूल पर कली बैठी थी और दूसरे में वासुकी आकर बैठ गया। स्लैब के दूसरी तरफ सारिका कली के लिए स्ट्राबेरी मिल्क शेक तैयार कर रही थी….।

कली ने एक नजर वासुकी की तरफ देखा और मुंह फेर कर बैठ गई..

” कोई फायदा नहीं है आपसे कहने पर..!”

“क्यूँ ?”

“डैडा…. अब कैसे समझाऊं आपको, मैं भी लोगों की मदद करना चाहती हूं। बिल्कुल आप की तरह। लेकिन आप मुझे कुछ करने ही नहीं देते, मेरे साथ के लोग कितनी चीजें करते हैं और मैं कुछ भी नहीं कर पाती। क्योंकि आपको डर रहता है कि मैं वहां सुरक्षित हूं या नहीं।
  पता नहीं आपके दिमाग में यह क्यों बैठा हुआ है? जबकि लंदन में हमें कोई जानता तक नहीं। मैं आपकी बात नहीं कर रही हूं, आप अपने बिजनेस क्लास में काफी जाने-माने और चर्चित चेहरा है। यह मैं जानती हूं। लेकिन मेरे कॉलेज में मुझे कोई नहीं जानता..।

” करना भी क्या है अगर लोग तुम्हें जानते हैं तो उससे क्या फर्क पड़ता है..?”

” कोई फर्क नहीं पड़ता। लोगों के जानने ना जानने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन किसी की मदद करने से मुझे फर्क पड़ता है। आपको पता है अभी मेरे कॉलेज का एक ग्रुप है जो अल्जाइमर से पीड़ित बुजुर्गों के लिए एक इवेंट प्लान कर रहा है। उस इवेंट में हम जगह-जगह जाकर डोनेशन कलेक्ट करेंगे। फोटोग्राफी करेंगे। उन फोटोस को न्यूज़पेपर में देंगे। अल्जाइमर से पीड़ित बुजुर्गों के ऊपर लेख लिखकर उन्हें अलग-अलग मैगजीन में प्रकाशित करवाएंगे। शहर के जाने-माने हॉस्पिटल में जाकर हम उन मरीजों की सेवा करेंगे। बिल्कुल किसी नर्स की तरह और 3 दिन में हमारे पास जितना भी रूपया जमा होगा, उसे हम उन बुजुर्गों के नाम पर डिपॉजिट कर देंगे। यह बहुत पुण्य का काम है लेकिन मैं जानती हूं, मुझे करने नहीं मिलेगा..।”

” कैश जमा करने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ेगा तुम लोगों को।
   तो उससे अच्छा है जितना कैश चाहिए वह बताओ, वह तुम जमा कर दो… बाकी काम मत करो!”

कली को लगा अपना सर पीट ले,  उसने अपने डैडा की तरफ एकदम गहरी नजरों से देखा और वापस कहने लगी…

” डैडा प्लीज!!  मैं सच में अपने ग्रुप के साथ मिलकर काम करना चाहती हूं। मुझे सिर्फ पैसे देना पसंद नहीं आता। ऐसा लगता है जैसे मैं बहुत शो ऑफ कर रही हूं। यहाँ के ज्यादातर लड़के लड़कियां यूरोपियन है ना। उनके यहां तो ऐसा है कि उनके मॉम डैड साथ रहते नहीं। बच्चे बहुत छोटी उम्र से अपने पैरों पर खुद खड़े हैं। इनमें से ज्यादातर को बेरोजगारी भत्ता तो मिलता है, लेकिन इसके साथ ही खर्च के लिए वो लोग कुछ ना कुछ काम करते रहते हैं। अब ऐसे लोगों के सामने मैं अपने डैडा का पैसा दिखाऊं,ये अच्छा लगता है क्या..?”

” कितनी समझदार है मेरी लाडली..!”

” है ना!!  मानते हो ना आप इस बात को, तो फिर एक बार,बस एक बार मुझे परमिशन दे दो ना।
इस इवेंट में काम करने के लिए..!”

एक गहरी सी सांस लेकर वासुकी ने सारिका की तरफ देखा, सारिका ने भी धीरे से गर्दन हिलाकर “अनुमति दे दीजिए” के भाव चेहरे पर ले आई…

उसी वक्त ऑफिस के कमरे से निकलकर दर्श भी वहां चला आया। दर्श ने कली के दोनों कन्धो पर हाथ रख धीमे से हिला दिया..

“जाना कहाँ है उस इवेंट के लिए.. !”

“मेपल टावर !”

दर्श की भौंहे सिकुड़ गयी..

“वहाँ तो लन्दन रॉयल यूथ का कुछ प्रोग्राम होना है ना.. ?”

“हाँ वहीँ हम लोग भी जायेंगे.. उस इवेंट को कवर कर लेंगे साथ ही वहाँ के रईसों से पैसे भी मांग लेंगे.. !”

कली अक्सर वासुकी को तो अपनी बातों के जाल में उलझा लेती थी, लेकिन उसके दर्श चाचू के सामने उसका टिकना मुश्किल होता था। और इसीलिए वह अक्सर कोशिश में रहती थी कि जब उसे अपनी कोई उटपटांग सी मांग मनमानी हो तब वासुकी अकेला बैठा मिले। हालांकि आज तक उसके ढेरों परपंच के बावजूद वासुकी ने कभी उसे घर से बाहर कदम रखने की इजाजत नहीं दी थी।
सिर्फ घर से कॉलेज और कॉलेज से घर के अलावा कली कहीं नहीं जा पाती थी। आज भी जैसे ही दर्श ने अपनी प्रश्नोत्तरी शुरू की, कली ने घूर कर सारिका की तरफ देखा और सारिका फटाफट कॉफी ट्रे में रखकर दर्श के सामने ले आई..

” लीजिए जल्दी से अपनी सेक्रेटरी के लिए कॉफी ले जाइए, वरना ठंडी हो जाएगी…!”

सारिका ने दर्श को टालने की कोशिश की और दर्श के साथ ही वासुकी भी अपनी जगह से उठ कर वापस जाने लगा।
उन दोनों के वहां से जाते ही कली ने एक गहरी ठंडी सी सांस भरी, उसे समझ में आ गया कि उसकी तरकीब बिना काम किये फेल हो गयी है..।

वह अपना मुंह लटकाए बैठी थी। सारिका उसके ठीक पास आकर धीरे से उसका चेहरा उठाकर उसे समझाने की कोशिश कर रही थी कि तभी वासुकी की आवाज कली के कानों में पड़ी और कली सन्न रह गयी..

” कब जाना है तुम्हें?  सुबह जाकर रात तक वापस आ जाओगे ना ? वहां पर रुकने का तो विचार नहीं है..?”

वासुकी की बात सुनते ही कली के चेहरे पर 100 वाट का बल्ब जल उठा। वह कूदकर अपनी स्टूल से उतरी और जाकर वासुकी के गले से लग गई..

“थैंक यू, थैंक यू सो सो मच डैडा, आई लव यू.. ।”

“आई लव यू टू स्वीटहार्ट.. बस अपना ख्याल रखना, और मुझे हर एक घण्टे में एक मेसेज डाल देना.. आई एम फाइन.. !”

“श्योर माय किंग डैडा…. यू आर माय सुपरहीरो.. माय किंग.. !”

कली की इस बचकानी हरकत पर वासुकी ने मुस्कुराकर उसका माथा चूमा और अपने ऑफिस की तरफ बढ़ गया…

कली वापस आई और सारिका की तरफ अपनी हथेली बढ़ा दी, सारिका ने भी उसकी बढी हथेली पर अपने हाथ से ताली दी और दोनों खुशी-खुशी कली की तैयारियां करने चले गए।
अगली सुबह 7 बजे कली को घर से निकलना था….

******

सुबह सुबह सात बजे बड़े तामझाम से कली अपने घर से बिदा हुई.. वासुकी उसे खुद छोड़ने जाना चाहता था, लेकिन कली ने मना कर दिया..
उसने कहा वो अपने दोस्तों के साथ बिल्कुल सामान्य तरीके से लोकल ट्रेन में जायेगी.. अपने डैड की लम्बी लिमोज़ीन में नहीं…

लोकल ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन तक वासुकी छोड़ने गया था और कली इस बात को जानती थी कि उसके डैडा उसे छोड़ने ज़रूर आएंगे। इसलिए उसने अपनी सहेलियों को स्टेशन पर बुला लिया था..।
वासुकी ने जब कली के इतने सारे दोस्तों को देखा तो अपने मन को समझा लिया..
उसने उन लोगों को भी उस इवेंट में अच्छे  से रहने और अपना ध्यान रखने की समझाइश दी और निकल गया..
हालाँकि उसकी कही कोई बात वहाँ मौजूद किसी को समझ नहीं आ रहीं थी.. सब आश्चर्य से कली को  देख रहें थे…

कली बस अपने डैड के जाने की राह देख रहीं थी..
उनके वहाँ से जाते ही कली ने राहत की साँस ली और उसकी सहेलियां उस पर झूम पड़ी..

कली ने उन लोगों को बताया की वो रॉयल लंदन इवेंट का हिस्सा बनने जा रहीं है, और इसलिए उसने अपने डैडा से झूठ बोला है..

वो रॉयल इवेंट का हिस्सा बनने जा रहीं है यहीं उन लड़कियों के लिए सबसे बड़े आश्चर्य की बात थी.. सब आंखें फाड़े उसे देख रहीं थी..।

वैसे तो सब अगले ही स्टेशन पर उतरने वाली थी, लेकिन अब सब रॉयल इवेंट का सुन कर इतनी खुश और उत्तेजित थी कि वो सभी कली को वहाँ तक छोड़ने जाना चाहती थी। इसलिए सब उसे घेर कर बैठ गयी और उससे उस इवेंट के बारे में पूछने लगी.. ।
सभी जानते थे कि उस इवेंट में एंट्री इतनी आसानी से नहीं मिलती..
कली बहुत ख़ुशी से उन सब को विराट से मिलना और बाकी बातें बताती गयी.. इसी सब में उसका स्टेशन आ गया..
अपनी सहेलियों से विदा लेकर वो लंदन पैलेस की तरफ निकल गयी…

उसके लिए पास बाहर सिक्योरिटी में मिल जायेगा ऐसा,उससे विराट ने कह रखा था..
वो वहाँ पहुँचते ही विराट को फ़ोन लगाने लगी, लेकिन विराट ने फ़ोन नहीं उठाया..

बाहर के मुख्य द्वार के पास से होकर लम्बी लम्बी गाड़ियां अंदर जा रहीं थी..
अब वहाँ कोई एक सिक्योरिटी गार्ड होता तो वो जाकर पूछती भी, वहाँ तो सिक्युरिटी वालों की फ़ौज थी.. वो परेशन सी एक तरफ खड़ी हो गयी..
बाहर प्रेस और मीडिया वालों की भी ज़बरदस्त भीड़ थी…
इतनी भीड़ में उसे राह नहीं सूझ रहीं थी..।
वो इधर उधर देखती हुई आगे बढ़ रहीं थी कि एक तरफ खड़े सिक्योरिटी गार्ड पर उसकी नज़र पड़ी..
लंबे चौड़े अंग्रेज गार्ड के बीच एक चेहरा उसे हिंदुस्तानी नजर आया और कली हिम्मत करके उसकी तरफ बढ़ गई ।
लेकिन कली को ध्यान नहीं था कि उस गार्ड के ठीक पीछे एक बड़ा सा डस्टबिन रखा हुआ था।
वह उस गार्ड से बात कर ही रही थी कि तभी एक लंबी सी गाड़ी आकर उसके ठीक बगल में रुकी, पीछे का ग्लास डोर नीचे हुआ और किसी ने अंदर से कॉफी का ठंडा कप बाहर फेंक दिया। फेंकने वाले ने कॉफी के कप को डस्टबिन की तरफ से फेंका था, लेकिन उसी वक्त कली दूसरी तरफ घूमी और कॉफी कप और कार के ठीक बीच में आ गई…
कली की सफेद रंग की खूबसूरत सी कमीज पर कॉफी का लंबा चौड़ा का दाग बन गया। कली ने पलटकर गुस्से में उस गाड़ी के कांच को खटका दिया, क्योंकि फेंकने वाले ने फेंकने के बाद गिलास ऊपर चढ़ा दिया था…।
वैसे तो कली जानती थी कि वहां आने वाली हर गाड़ी रॉयल गाड़ी थी, लेकिन इस वक्त उसका दिमाग काम करना बंद कर चुका था। एक तो अपनी खूबसूरत सी ड्राई क्लीन की हुई कमीज का सत्यानाश होना उस से बर्दाश्त नहीं हो रहा था, दूसरे उसे अपने अंदर जाने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। उसकी खींझ और गुस्सा इस वक्त चरम पर थे और अपने उसी गुस्से में उसने कार के पिछले दरवाजे पर लगे कांच को ठकठका दिया।
  कली ने इतनी जोर से दस्तक दी थी कि, अंदर बैठा लड़का भी खीझ गया..।
उसने कांच उतारा और कली पर दहाड़ उठा..

“क्या हुआ ? क्यूँ इतनी बदतमीज़ी से नॉक कर रही हो ?”

” मैं बदतमीजी से नॉक कर रही हूं या तुम बदतमीजी से कार के अंदर का सामान बाहर फेंक रहे हो?  यू ईडियट भगवान ने आंखें तो दी हुई है  फिर ऐसे अंधे जैसा बीहेव क्यों कर रहे हो? जैसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा..।”

“व्हाट डू यू मीन !”

” आई मीन आई एम नॉट अ डस्टबिन। आपने अपनी सड़ी हुई काॅफी मुझ पर क्यों फेंकी, आपको सामने खड़ी लड़की नजर नहीं आ रही थी… ..

” मैडम मुझे तो डस्टबिन नजर आ रहा था और मैंने फेंका भी डस्टबिन पर ही था, लेकिन आप बीच में आ गई तो मैं क्या कर सकता हूं.. ?
मानता हूं कि मेरी आंखें बहुत तेज है लेकिन भविष्य देख लूं, इतनी भी तेज नहीं नज़र। मुझे क्या पता था कि मेरे कप और डस्टबिन के बीच में अचानक से प्रकट हो जाओगी, किसी एलियन की तरह..!”

” एलियन नजर आ रही हूं मैं तुम्हें इडियट..!”

इतनी देर में वहां खड़े गार्ड ने कली को जब किसी रॉयल गेस्ट से उलझते देखा तो गार्ड भी वहां चला आया। हालांकि वहां मौजूद गार्ड यह अच्छे से जानते थे कि यहां आए सभी लोग एक रुतबा रखते हैं, इसलिए गार्ड ने कली से भी बड़ी तमीज से ही बात की और कली अपनी शर्ट पर गिरी हुई कॉफ़ी दिखाते हुए गार्ड को उस लड़के की शिकायत करने लगी..

अंदर बैठा लड़का कली की इस हरकत पर और नाराज़ हो गया..
अंदर बैठा लड़का और कोई नहीं शौर्य प्रताप था जो फिलहाल मीरा से फोन पर बात कर रहा था। वह जब से लंदन पहुंचा था, मीरा उसे फोन कर कर के परेशान कर रही थी। मीरा उससे जिद कर रही थी कि वह वहीं से मीरा की भी टिकट करवा दें और उसे अपने पास बुला ले। लेकिन इस बात के लिए शौर्य राजी नहीं हो रहा था। शौर्य का सोचना यह था कि, उसके कहने पर ही हर्ष ने मीरा को नौकरी पर रखा है, अब अगर नौकरी के पहले हफ्ते में ही मीरा 3 दिन की छुट्टी लेकर अपने असाइनमेंट से गायब हो गई तो हर्ष पर उसकी इमेज खराब हो जाएगी। जबकि मीरा का सोचना यह था कि किसी भी तरीके से शौर्य के साथ बनी रहे ।
जिससे शौर्य के सहारे बिना किसी मेहनत के एक के बाद एक असाइनमेंट पाती रहे। वैसे भी उसे मालूम था कि शूटिंग अगले हफ्ते से शुरू होनी है। इस हफ्ते बस उन चयनित मॉडल की वर्कशॉप होनी थी। और इस वर्कशॉप के लिए उन लोगों को सुबह 7 बजे से शाम 8 बजे तक की शिफ्ट में काम करना था ।
इस वर्कशॉप में किस तरह के कपड़े पहनने हैं, कैसे खुद से मेकअप करना है ,कैसे चलना है, बोलना है, के अलावा उनके चेहरे के किस एंगल से तस्वीर ली जाने पर वो सबसे खूबसूरत दिखाई देती हैं, इन सब बातों की उन्हें जानकारी दी जानी चाहिए थी। मीरा की नजर में यह वर्कशॉप करना बेवकूफी थी, क्योंकि वह खुद को अत्यधिक प्रतिभावान समझती थी और इसीलिए इस मौके पर वह शौर्य के साथ लंदन घूम लेना चाहती थी। वैसे भी वह शौर्य के साथ रहने का कोई बहाना नहीं छोड़ना चाहती थी। और इसीलिए शौर्य को फोन करके उसके पीछे पड़ी हुई थी, शायद इसीलिए शौर्य का दिमाग और भी ज्यादा खराब था ।और वह कली से माफी मांगने की जगह उससे उलझ पड़ा।
    उसने गार्ड की तरफ देखा और कली की तरफ इशारा करके अपने ड्राइवर को आगे बढ़ने को कह दिया। शौर्य के ड्राइवर ने भी गेट खुलने पर गाड़ी आगे निकाल ली और कली पैर पटक कर मन मसोसकर वहीं खड़ी रह गयी..

” ठीक है रॉयल प्रिंस तुम जो भी हो, जाओ।
अंदर तो कली भी दाखिल होने वाली है और अंदर तुम से पाला ना पड़े ऐसा होगा नहीं। और कली अपने साथ हुए बर्ताव का बदला ना ले ऐसा भी पॉसिबल नहीं है..।
वेलकम टू कली’स बदलापुर मिस्टर प्रिंस..

क्रमशः

aparna…

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Kavita
Kavita
1 year ago

Ab आएगा मजा बदलापुर में,
But कली अंदर तो पहुंचो

Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
2 years ago

ये लो पहली मुलाकात ही मुकालात में बदल गया। कली का बदलापुर में प्रिंस शौर्य और उसकी नोंक झोंक का अगला अंक पढ़ना चाहूंगा। वासुकी की इंसिक्यूरिटी का क्या रीजन है वह भी जानना है, वह उसे बच्ची समझ रहा है और वह दुनिया देखना चाहती है, बहुत अच्छा पार्ट दीदी, वंडरफुल पार्ट दी….💐🙏