जीवनसाथी -3 भाग -7

जीवनसाथी -3 भाग -7

जीवनसाथी by aparna

  शौर्य के अपूर्व मामा जी ने उसका सामान अच्छे से जांचा परखा और फिर अपने साथ लायी हुई महंगी सी सिगरेट उसके सामान के साथ रख दी..

शौर्य उन्हें इतने प्यार से उसके सामान में सिगरेट का गोल्डन बॉक्स रखते देख खुश हो गया..

“मेरी पसंद का ध्यान सिर्फ आप ही रख सकते हैं मामा जी.. और तो किसी को परवाह भी नहीं !”

“ओह्ह इसमें इतना दुःखी होने की क्या बात है शौर्य.. तुम्हारे डैड के पास ख़ूब सारा काम है.. उन्हें सिर्फ अपनी रियासत नहीं अब तो पूरा स्टेट देखना होता है, और जानते तो हो एक बार जिस आदमी को राजनीति का चस्का लग गया वह फिर किसी और काम को पूरे मन से नहीं कर पाता..
और फिर तुम अपने डैड से इतनी उम्मीदें रखते ही क्यों हो?  जब वह तुम्हारी मॉम का ख्याल नहीं रख पाते तो तुम्हारा कैसे रखेंगे? और इसमें उनकी कोई गलती भी नहीं है बाबा…।
एक पब्लिक फिगर है वो, सेलिब्रिटी स्टार है।

   राजा अजातशत्रु का नाम, उनकी पर्सनालिटी के जितना ग्रैंड और कोई नहीं हो सकता..
और ज्यादातर यहीं होता है जो ऊंचा बरगद का पेड़ होता है ना, उसके नीचे कोई दूसरा पौधा कभी पनप नहीं पाता..
   और यह बहुत बड़ी सच्चाई है बेटा, और तुम्हें सच्चाई को मानना ही होगा कि तुम द ग्रेट अजातशत्रु के बेटे हो, और इसलिए वह चाह कर भी तुम्हें पनपने नहीं दे सकते…।
लेकिन इस बात का तुम बुरा क्यों मानते हो? तुम्हें तो यह सोच कर खुश होना चाहिए तुम अजातशत्रु और बांसुरी जैसे रॉयल गोल्डन कपल के बेटे हो।
यह और बात है कि तुम्हें वह दोनों ही इतना समय नहीं दे पाते… !”

  शौर्य चुपचाप अपूर्व की बातें सुन रहा था, और अपूर्व बरसों से जो ज़हर शौर्य के दिमाग में भर रहा था आज भी उसी को वापस दोहरा रहा था..

” अजातशत्रु को शायद बिल्कुल अपने जैसी ही औलाद चाहिए थी और उसे मिल गए तुम। अब हर इंसान एक जैसा तो नहीं होता ना ।इसीलिए शायद अजातशत्रु तुमसे ज्यादा हर्षवर्धन पर लट्टू रहता है। अजातशत्रु का बस चले तो वह तुम्हारी जगह अपनी गद्दी हर्षवर्धन को सॉन्प  दे!”

” इस बात से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता मामा जी, बल्कि मैं तो खुद चाहता हूं कि हमारी रियासत हर्ष भैया ही संभाले..!”

” यह तुम्हारा बड़प्पन है शौर्य, खैर अब यह सारी बातें छोड़ो और चलो एयरपोर्ट के लिए तुम्हें देर हो रही है..!”

” क्या आप मेरे साथ आ रहे हैं..?”

” आना तो चाहता हूं, बिना तुम्हारे साथ गये मन नहीं मानता लेकिन..!”

” अगर आपको कोई काम है तो, रहने दीजिए मैं एयरपोर्ट अकेले निकल जाऊंगा…!”

” हां कुछ जरूरी काम तो था। खैर चलो, अब तुम इधर उधर जाने की जगह सीधे एयरपोर्ट के लिए निकलो क्योंकि तुम लेट हो रहे हो..!”

शौर्य अपना फोन संभाले गाड़ी की तरह बढ़ गया। उसके पीछे उसके दो हेल्पर उसका सामान लेकर निकल पड़े। शौर्य आगे बढ़ रहा था कि उसका मोबाइल बजने लगा। उसने देखा हर्ष का नंबर दिखाई दे रहा था, उसने तुरंत फोन उठा लिया..

” काका जी तो बाहर ऑफ़िस मे है, लेकिन काकी घर पर ही हैं, ऐसे मे उनसे मिलकर ही निकलना शौर्य !”

शौर्य हर्ष की बात नहीं टाल सकता था। और यह बात हर्ष भी अच्छे से जानता था। शौर्य ने खीझकर अपना चेहरा एक बार गोल घुमाया और फोन को काट कर वापस जेब में डाल दिया।
वह अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ा ही था कि पिछली सीट का दरवाजा खुल गया। वह अंदर बैठने को हुआ कि गाड़ी में बैठी बांसुरी पर उसकी नजर पड़ गई और उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई..

” मॉम आप..?”

” तुमने क्या सोचा, तुम मुझे नहीं बताओगे तो मुझे पता नहीं चलेगा। तुम्हारी मां हूं शौर्य, तुम मेरा हिस्सा हो। तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है ,यह तुमसे पहले मुझे पता चल जाता है।
यह भी जानती हूं कि, आजकल तुम्हारे दिमाग में कुछ ज्यादा ही मॉडर्निटी का भूत सवार है, इसलिए अपने मॉम डैड की कोई बात तुम्हें पसंद ही नहीं आती….। लेकिन मैं तो तुम्हें देखूंगी क्योंकि मेरा काम ही है तुम्हें टोकना और मां बेटे की रिश्ते की सबसे खूबसूरत बात यही तो होती है..।”

” कैसे सब समझ जाती हो..?”

” क्योंकि मां के पास एक अलग सी पावर होती है, अपने बच्चे की दिल और दिमाग में चल रही बातें जान लेने की.. । मेरी माँ भी ऐसी ही थी, और अब मैं भी उनके जैसी ही हूँ…
शौर्य तुम्हारा सारा सामान मैंने तुम्हारे हेल्पर के साथ मिल कर पैक करवा दिया था, तुमने चेक कर लिया था ना..!”

” सामान आपने पैक करवाया था..?”

“और कौन करवाएगा ?”

मुस्कुराकर शौर्य अपने बालों पर हाथ फेरने लगा… बांसुरी ने प्यार से उसका चेहरा अपनी तरफ किया और उसके माथे को चूम लिया..

” तुम आज भी मेरे लिए वही छोटे से शौर्य हो जो मेरी गोद में मेरी लोरी सुनते हुए सो जाया करता था, समझे!! अपनी मां से हाइट में ऊंचे हो गए हो इसका मतलब यह नहीं कि बहुत बड़े हो गए हो..।
और सुनो एयरपोर्ट के लाउंज में अपने बैग में से  सिगरेट केस निकाल कर फेंक देना..!”

“मॉम… मैं नहीं पीता.. !”

” जानती हूं, और इसीलिए कह रही हूं कि उस पैकेट को निकाल कर फेंक देना। वहां पर जाकर भी किसी को गिफ्ट करने की जरूरत नहीं है। क्योंकि तुम्हारे विराट चाचू स्मोक नहीं करते..!”

शौर्य के दिमाग में यही चल रहा था कि हर बार बांसुरी कैसे उसकी नादानियां को पकड़ लेती है। उसे अपनी मां से बेहद मोहब्बत थी। भले ही उसके बचपन से ही अपूर्व ने उसके दिमाग में बांसुरी और राजा साहब के लिए बहुत सारा जहर भरा था। बावजूद शौर्य कभी अपनी मां से नफरत नहीं कर पाया। नफरत तो वह अपने पिता से भी नहीं करता था, उनसे भी बहुत प्यार करता था। लेकिन एक हल्की सी नाराजगी जरूर थी उसके अंदर, और उसका क्या कारण था इसकी कोई कैफियत वह नहीं पाता था।
उसके बचपन में अपूर्व ने उसे एक अजीबोगरीब सी कहानी सुनाई थी, जिसके अनुसार उसके पिता ने उसकी मां को महल से निकाल दिया था और लगभग 2 साल उसकी मां महल में नहीं रही थी। इस कहानी में और भी कई सारी बातें थी जो समय समय पर शौर्य को अजीब सी उदासी में डूबा जाती थी, लेकिन शौर्य एक खुशदिल लड़का था, वह अपनी जिंदगी को जीना चाहता था। खुशियों में डूबे रहना चाहता था। पर बस इसीलिए वह उस कहानी को भूल जाना चाहता था।

     लेकिन उस कहानी का एक असर उसके सुषुप्त मन पर ऐसा पड़ा था कि, वह मन ही मन अपने पिता से हल्का सा बैर रखने लगा था। आज भी उसका एक मन तो कह रहा था कि वह अपने पिता से जाकर मिल ले, उनके गले लग कर उनसे विदाई ले ले। लेकिन उसका दूसरा मन अपनी अकड़ पर ऐंठ कर रह गया और वह अपनी मां के साथ एयरपोर्ट की तरफ रवाना हो गया। लेकिन उसे नहीं पता था कि एयरपोर्ट पर उसके लिए एक सरप्राइज इंतजार कर रहा है….

***

हर्ष के ऑफिस में धनुष दो कप में कॉफी लिए दाखिल हुआ और उसने एक कप हर्ष के सामने रख दिया…

” कैसे समझ जाते हो यार सब कुछ, इस वक्त वाकई कॉफ़ी की बहुत ज़रूरत थी..।”

” जल्दी से कॉफी फिनिश कर लो हर्ष, फिर हमें एयरपोर्ट की तरफ निकलना है…  शौर्य पैलेस से निकल चुका है..!”

“ओके.. बाकी सब से कह दिया ना !”

“हाँ… ! मीठी और परी एक साथ निकल गए हैं । यश किसी काम से गया हुआ था, वह वहीं से एयरपोर्ट आएगा।
    शोवी हॉस्पिटल में बिजी है, आज मॉम की कोई सर्जरी है जिसे वह असिस्ट कर रहा है..।
शोवी से बात हुई थी उसने कहा वह कोशिश में है, अगर फ्री हो गया तो वह डायरेक्ट वहीं से एयरपोर्ट पहुंच जाएगा..।

” ओके लेट्स गो..!”

हर्ष और धनुष भी एयरपोर्ट के लिए निकल गये…

शौर्य रास्ते में था, उसी वक्त उसके मोबाइल पर मीरा का फोन आने लगा। उसने एक बार बांसुरी की तरफ देखा और फिर धीरे से फोन उठा लिया..

” कहां हो शौर्य , मैं तुम से मिलना चाहती थी..!”

” फिलहाल तो एयरपोर्ट जा रहा हूं..।”

” क्यों..? अचानक..?  तुमने बताया नहीं..?”

” क्या नहीं बताया..?”

” यही के तुम कहीं बाहर जा रहे हो..!”

” हां, वो अचानक लंदन का प्लान बन गया, इसलिए जाना पड़ रहा है..!”

” लंदन माय गॉड!!  यू चीटर क्रो, तुम मुझे भी तो अपने साथ लेकर जा सकते थे, लेकिन तुमने इसकी जरूरत ही नहीं समझी, कि अपनी गर्लफ्रेंड को भी साथ ले लो..।”

” अभी अभी हर्ष भाई को ज्वाइन किया ना, फिर कैसे चलती..?”

“कैसे चलती”: यह कहते ही शौर्य ने धीरे से चोर नजर से बांसुरी की तरफ देखा, बांसुरी को समझ में तो आ गया था कि शौर्य किसी लड़की से बात कर रहा है, लेकिन बांसुरी ने ऐसे कर दिया जैसे उसने शौर्य की बात सुनी ही नहीं। वह अपने मोबाइल पर राजा साहब को मैसेज भेजने में व्यस्त थी…।

” वह सब मैं मैनेज कर लेती..!” मीरा ने कहा

“अगले ही दिन नौकरी से निकाल भी दी जाती।
    चलो बाद में बात करता हूं..।”

शौर्य ने फोन को रखा और बांसुरी की तरफ झेंप कर देखने लगा…

“वह एक दोस्त है, स्कूल टाइम की उसी का कॉल था..!”

बांसुरी ने मुस्कुराकर हामी भर दी…

शौर्य और बांसुरी की गाड़ी एयरपोर्ट पर पहुंची और उनके सिक्योरिटी की गाड़ियों से परे सीधे एयरपोर्ट के मेन गेट की तरफ बढ़ गई। उनके वहां पहुंचते ही अपने सिक्योरिटी के साथ लंबे लंबे कदम भरते हुए राजा साहब भी वहां पहुंच गए।
    उन्हें सामने देखकर शौर्य की आंखें चौड़ी हो गई, उसके दिल में कहीं ना कहीं यह बात जरूर थी कि उसके डैड उसे सी ऑफ करने जरूर आएंगे। लेकिन वह अपने व्यस्त शेड्यूल से वाकई समय निकाल कर चले आए। यह उसके लिए आश्चर्य की बात थी। शौर्य राजा साहब की तरफ बढ़ा और राजा ने उसे खींच कर अपने सीने से लगा लिया..।

” संभल कर रहना, रोज अपनी मॉम को एक बार कॉल कर लेना..!”

शौर्य ने धीरे से हामी भरी और अपनी मां से गले लग कर आगे बढ़ने को था कि तभी उसकी चांडाल चौकड़ी भागते हुए उसके पास चली आई और उन सभी ने एक साथ उसे गले से लगा लिया…

परी को भी लंदन से इस इवेंट का न्योता मिला था और इसलिए वह भी अपनी मां और पिता के साथ जा रही थी। उसकी मम्मी पापा भी अपनी गाड़ी में वहां पहुंच चुके थे, और परी मीठी के साथ वहां आई हुई थी। सब एक दूसरे से मिलते हुए बहुत खुश नजर आ रहे थे…।
सारे बच्चे परी और शौर्य को घेर कर खड़े थे और मीठी एक के बाद एक एडवाइज दिए जा रही थी। दूर खड़े राजा और बांसुरी शौर्य को देखकर धीरे-धीरे मुस्कुरा रहे थे…
शौर्य भी चोरी चोरी बीच बीच में बाकी सब की नजर चुरा कर अपने डैड को देख लेता था…।
वह उनसे नाराज जरूर था लेकिन वह सामने पड़ जाए तो उनका सम्मान करने को वह खुद बेबस हो जाता था…

  शौर्य गुस्से वाला जरूर था, लेकिन अब तक उसने कभी सामने से होकर अपने पिता का अपमान नहीं किया था। यह राजा अजातशत्रु के व्यक्तित्व का चमत्कार था कि उनके सामने खड़ा राक्षस भी मीठे वचन बोलने लगता था, फिर शौर्य तो उनकी खुद की औलाद थी..।

मीठी का ज्ञान शुरू था, बीच-बीच में हर्ष भी टोक कर शौर्य को कुछ ना कुछ समझाता जा रहा था।
लेकिन धनुष का पूरा ध्यान बाहर की तरफ था, और आखिर उसके चेहरे पर भी मुस्कान चली आई ।
क्योंकि उसका बड़ा भाई शोवन भागता दौड़ता उन्हीं की तरफ आ रहा था।
शोवन हॉस्पिटल से इतनी हड़बड़ी में निकला था कि उसने अपना एप्रन तक नहीं उतरा था..
    एप्रन उतारते हुए उसने अपनी एक बाँह में डाला और अपनी मंडली के पास पहुंचकर शौर्य को सीने से लगा लिया…
उसके पीछे ही समर भी चला आया..
समर को देख कर शौर्य ने धीरे से मुस्कुराने की कोशिश की और हर्ष ने उसे आगे धकेल कर समर के पैरों की तरफ बढ़ा दिया, लेकिन शौर्य के झुकने से पहले ही समर ने उसे उठा कर अपने गले से लगा लिया..

“ख़ूब मजे करना प्रिंस… ये मौका दुबारा नहीं मिलेगा, लेकिन अपने खर्चे ज़रा समेट कर करना.. तुम्हारी सारी डिटेल्स मेरे पास है.. और याद रखो समर चाचू की नज़र हमेशा तुम पर है.. !”

शौर्य ने आंखें छोटी की और गर्दन को झटक कर आगे बढ़ गया.. ।
कुछ देर में रूपा भी वहाँ चली आई..
वो अपने साथ एक बैग लायी थी.. उन्होंने वो बैग शौर्य को थमा दिया..

“ये क्या है रानी माँ ?”

“वहाँ पहुँच कर देख लेना.. तुम्हारी पसंद की डेनिश कुकीज़ है, आयरिश चॉकलेट्स है और बस यही सब थोड़ा बहुत सामान है.. !”

“माँ साहेब.. आप भी ना गज़ब करती है.. आपका लाड़कुंवर लंदन ही जा रहा है। और वहाँ उसे ये सब मिलेगा.. आप इण्डिया से ये सब भेज रहीं..।
और फिर उसके सामान का वजन मत बढ़ाइए ना.. वो ऑलरेडी दो बैग्स लेकर जा रहा है..।”

हर्ष के कहने पर बाँसुरी ने उसे टोक दिया..

“मुझे पता था शौर्य के लिए उसकी रानी माँ कुछ स्पेशल ना पैक करें ये सम्भव नहीं है, इसलिए मैंने उसके दोनों बैग्स का वजन कम ही रखा है, जिससे भाभी सा का दिया लगेज भी सेटल हो जाये.. !”

शोवन ने शौर्य के कंधे पर हाथ रख दिया.. -“हैप्पी जर्नी, एन्ड टेक केयर !”

शोवन की बात सुन कर शौर्य मुस्कुरा उठा..
शौर्य के साथ आगे बढ़ती परी पल भर को शोवन के पास ठहर गयी…. -“मुझे हैप्पी जर्नी क्यूँ नहीं कहा ?”

“आपको भी हैप्पी जर्नी !”.

“हम्म.. थैंक यू ! टेक केयर नहीं बोला ?”

“टेक केयर !”

“हम्म अब ठीक है.. वैसे तुम भी अपना ख्याल रखना.. धूप में ज्यादा मत निकलना.. !”

“क्यूँ ?”

“क्यूंकि गोरा रंग काला ना पड़ जायें.. धूप में निकला ना करो रूप के राजा.. !”

यश ने शोवन के कान में गाना गा दिया.. और परी ने यश की तरफ अपनी हथेली बढ़ा दी… यश और परी ने एक दूजे को ताली दी और परी शौर्य की तरफ बढ़ गयी..

उन सब को एक साथ हंसते खिलखिलाते देखकर जय जया राजा और बांसुरी चारों ही खुश नज़र आ रहे थे.. फ्लाइट का वक्त होने लगा था और चेक इन के लिए वो चारों अंदर दाखिल हो गए….

****

कली इसी जुगाड़ में थी कि किसी तरह उसे उस इवेंट में जाने की इजाज़त मिल जाये..
वासुकी कली के लिए बहुत पजेसिव था, वह कली के कॉलेज से वापस लौटने के समय में अगर थोड़ी भी फेरबदल हो तो तुरंत चिंतित हो जाया करता था…

अपने ऑफिस में बैठे-बैठे भी वह घर पर लगे सीसीटीवी का मुआयना वक्त बेवक्त सिर्फ कली के लिए ही किया करता था। और यह बात कली अच्छे से जानती थी..
कली जिस उम्र से गुजर रही थी इस उम्र में लड़के लड़कियों को वैसे भी स्वतंत्रता और स्वच्छंदता भाती है, उस पर वासुकी जैसा पिता जो रात दिन उसे अपनी चाक-चौबंद निगरानी में रखता हो कली को परेशान किये रहता..

कली के दोस्त फिल्म देखने का प्लान बनाते, पिकनिक का प्लान बनाते और जब कली वासुकी से पूछती तो वह बड़े प्यार से उसे इजाजत तो दे देता लेकिन जब कली अपने दोस्तों के साथ मूवी के लिए जाती तो चुपके से वासुकी भी अपनी गाड़ी से वहां पहुंच जाता।
कली अपने दोस्तों के साथ बैठकर मूवी देखती होती और अचानक कली की नजर पड़ती कि कहीं दूर पीछे वासुकी अकेला बैठ कर बोर हो रहा है। वासुकी की इन हरकतों से कली को गुस्सा भी आ जाता लेकिन वह उसकी पजेसिवनेस को समझती थी। वासुकी ने आज तक कली को रात भर के लिए भी कहीं बाहर रुकने की इजाजत नहीं दी थी।
    कली 18 साल की हो चुकी थी, बावजूद लंदन की संस्कृति के विरुद्ध आज तक उसे किसी नाइट क्लब में जाने की इजाजत नहीं मिली थी। उसके दोस्त अक्सर शनिवार की रात नाइट क्लब में जाकर गा बजाकर पार्टी किया करते थे, लेकिन कली सिर्फ तस्वीरें देखकर ही अपने मन को बहला लिया करती थी। उसके साथ के उसके दोस्त ड्रिंक किया करते थे,स्मोक किया करते थे। लेकिन कली की अब तक कुछ भी करने की हिम्मत नहीं हुई थी!
    लेकिन इस बार वह लंदन के इस गोल्डन इवेंट को अपने कैमरा से कैप्चर करना चाहती थ…
   वह उन राजसी परिवारों की एक झलक देखने को व्याकुल हुई जा रही थी…
उस पर उसे उस महान फोटोग्राफर ने न्योता भी दे दिया था । इसलिए कली की उत्तेजना अपने चरम पर थी। उसने अपनी सरु मासी को सारी बातें बता दी लेकिन सरू ने पहले ही कान पकड़ कर उससे माफी मांग ली।

    घर पर वासुकी के सामने टिकने की हिम्मत दर्श के अलावा और किसी में नहीं थी। लेकिन सरू और कली दोनों ही इस बात को अच्छे से जानते थे कि कली की सुरक्षा के लिए दर्श भी वासुकी के खिलाफ नहीं जा सकता और इसलिए कली उस इवेंट में जाने के लिए कुछ अलग ही तरकीब अपनाने वाली थी…

क्रमशः…

aparna….

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Kavita
Kavita
1 year ago

अच्छा लगा वासुकी की posesiveness देख के

Manu verma
Manu verma
2 years ago

लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️

Manu verma
Manu verma
2 years ago

बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️

Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
2 years ago

कली क्या तरकीब अपनाएगी वह देखना होगा, शौर्य और रॉयल बल्ड्स क्या धूम मचाएंगे बड़े इवेंट्स में पढ़ने को तत्पर हूं। नाईस पार्ट दीदी…💐🙏🙏