जीवनसाथी -3 भाग -42

जीवनसाथी -3 भाग -42

जीवनसाथी by aparna

एक धीमी सी आवाज़ हुई और शौर्य झटके से गिर गया.. कली की चीख निकल गयी..!
वो लड़खड़ाती हुई शौर्य के पास पहुंची और लल्लन की तरफ देख तुरंत बजरा वापस मोड़ने कहा और शौर्य के चेहरे को थपका कर उसे जगाने की कोशिश करने लगी..

कई सालों पहले का अतीत जैसे खुद को दुहरा रहा था, लेकिन उस वक्त गोली खाने वाला राजा था और उसे संभालने वाली बांसुरी..
आज राजा का बेटा भी बिलकुल उसी जग़ह, उसी समय पर कंधे पर गोली लगने से घायल हुआ पड़ा था, और उसे संभालने वाली थी कली, जिसकी परवरिश कभी बांसुरी ने की थी..

हर वक्त बेसर पैर की बातें करने वाली कली एकदम से समझदार हो गयी थी..।
लल्लन थोड़ा घबराया भी, लेकिन कली ने अपना धैर्य नहीं खोया..
बजरा किनारे पर लगा, और आसपास के दो चार लड़के भी वहाँ पहुँच गए…।
उन सबकी मदद से वो शौर्य को उठा रही थी कि कहीं से भागता हुआ वो भी चला आया, जिसने शौर्य और कली को अपना परिचय विक्रम के तौर पर दिया था..।

“अरे इसे क्या हो गया ?”

उसने आगे बढ़ कर शौर्य को सहारा दिया और टैक्सी तक ले गया..

“किसी ने गोली मार दी.. ?”

लल्लन ने अटकते हुए कहा.. लल्लन बनारस का रहने वाला था, खुद को बहुत बड़ा लडाका भी मानता था, बावजूद गोली चलने से उसके हाथ पांव फूल गए थे। लेकिन विक्रम पूरी मुस्तैदी से इधर उधर देखता गोली चलाने वाले को ढूंढने की कोशिश में दिख रहा था।

लेकिन कली का ध्यान पूरी तरह से सिर्फ शौर्य पर था, वो शौर्य को लिए टैक्सी में सवार हो गयी ..

“आसपास जो हॉस्पिटल हो.. उधर निकाल लीजिये !” उसने टैक्सी वाले से कहा..

लल्लन सामने टैक्सी वाले के साथ बैठ गया, और उन लोगो को आगे निकलने का बोल विक्रम पीछे दूसरी गाड़ी में उनके साथ हो लिया…

****

हर्ष और मीठी धनुष के साथ वापस लौट रहे थे…।
यश का कुछ दिन रुकने का मन था इसलिए वो वहाँ से अपने विराट चाचू के पास चला गया था..।
उनका इवेंट बहुत कामयाब हुआ था, और वो तीनो ही लोग बहुत खुश थे..।
वहाँ की ढेर सारी मीठी प्यारी सी यादें समेटे वो लौट रहे थे..

लौटने के ठीक एक दिन पहले हर्ष ने अपनी सारी मॉडल्स और अपनी टीम के लिए पार्टी रखी थी..।
वैसे तो मीठी का पसंदीदा पहनावा जींस ही था, लेकिन उस दिन पार्टी में उसने कुछ हट कर पहना था..।

उसने भी इस इवेंट की सफलता के लिए खूब मेहनत की थी।
  इसलिए वहाँ मौजूद मॉडल्स ने पेरिस की सबसे महंगी शॉप से उसके लिए हेमीज़ की बेहद खूबसूरत शार्ट ड्रेस खरीदी थी..।

वैसे मीठी कभी भी ज्यादा लड़कियों वाले लटके झटके नहीं रखती थी, सादी जींस पर ऊँची सी पोनी टेल में बालो को बांधे, आँखों पर चश्मा चढ़ाये अपने काम और हिसाब किताब में ग़ुम रहने वाली मीठी को जब उन लड़कियों ने उस ड्रेस को तोहफे के तौर पर दिया, मीठी बहुत खुश हुई, लेकिन उस ड्रेस को देख कर उसका सारा उत्साह ठंडा पड़ गया…!

“मैं तो ऐसी ड्रेस पहनती ही नहीं !”

“तो अब ट्राई कर लो न मीठी.. तुम पर बहुत अच्छी लगेगी.. !”

उन लोगो ने उस शाम की पार्टी के लिए उसे तैयार कर लिया, लेकिन वो बार बार उस ड्रेस में झिझक रही थी..
पार्टी के लिए जब हर्ष धनुष और बाकी लोग, उन सभी का इंतज़ार कर रहे थे, उन सारी मॉडल्स के साथ वहाँ पहुंची मीठी को कुछ पलों के लिए हर्ष पहचान नहीं पाया..।

उसकी नजर बार बार मीठी पर ठहर रही थी, लेकिन मीठी को अजीब न लगे सोच कर वो खुद को बिलकुल सामान्य दिखाने की कोशिश कर रहा था…

लेकिन जब मौका मिलता वो मीठी की तरफ देखने लगता..।
हर्ष एक बहुत अच्छा बिज़नेसमैन था, लेकिन उसे सामने खड़े होकर बोलना पसंद नहीं था। उसके लिए धनुष था..

हर्ष को ज्यादा बोलना पसंद नहीं था, वो चुप रह कर काम करने वालो में से था, और उसके कम बोलने का सारा बदला धनुष चुका लिए करता था..।
धनुष का बड़ा भाई शोवन अक्सर धनुष की इस आदत पर ये बोलता था..

“अगर धनु को नींद से उठा कर हाथ में माइक दे दो तो भी ये चार घंटे माइक पर बोल लेगा.. बस इसी काम में महारथ हासिल है इसे.. !”
और धनुष मुस्कुरा कर रह जाता था..
आज भी इवेंट की सफलता पर एक सुंदर सा भाषण देने के बाद धनुष ने हर्ष को सामने दो शब्द कहने बुला लिया..

इतनी छोटी सी उम्र, इतने बड़े बिज़नेस अम्पायर को संभालने वाला वो लड़का इतनी भीड़ के सामने खड़ा हुआ और मुस्कुरा कर उसने सबका धन्यवाद देना शुरू कर दिया..
बोलने में माहिर नहीं था, ऐसी बात नहीं थी, बस बोलता कम था…।

“इस इवेंट की सफलता मेरी अकेले की सफलता नहीं है। यह हमारी पूरी टीम का काम है। इसमें भाग लेने वाली हमारे सारी मॉडल्स की मेहनत, उन्हें ट्रेंड करने वाली टीम की मेहनत, इस सारे इवेंट को पूरी तरह से ऑर्गेनाइज करने वाली हमारी टीम की मेहनत और सब के साथ हर एक काम को अपनी निगरानी में सफल करवाने में शामिल मेरे दोनों दोस्त धनुष और मीठी और मेरा छोटा भाई यश, एक तरह से कहा जाए तो यह पूरा इवेंट एक टीम वर्क था।
जहां अलग-अलग बहुत सारी टीम काम कर रही थी। और उन सारी टीम्स के ऊपर सुपरविजन के लिए बैठी थी हमारी चार लोगों की एक छोटी सी टीम।
तो मैं आज आप सबको इस सफलता का श्रेय देते हुए धन्यवाद देना चाहता हूं। यह सफलता पूरी तरह से आप सब की है। इसके साथ ही जितनी मॉडल्स यहां हमारे साथ काम के लिए आई थी, यह सारी मॉडल्स हमारी टीम के साथ अब परमानेंटली काम करेंगी।
आप सभी के कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू किए जाएंगे अगले 5 सालों के लिए..।

हमारे साथ यहां काम करने वाली सारी टीम के कांट्रैक्ट्स रिन्यू होंगे और इसके साथ ही आप सबके इंसेंटिव बोनस भी आप लोगों को दिए जाएंगे।
हालांकि यह सारी जिम्मेदारी धनुष की है तो अब इसके लिए आप मेरी गर्दन पकड़ने की जगह धनुष की गर्दन पकड़े।
        पर फिलहाल यहां थैंक्स बोलने के साथ ही मैं अपने स्पेशल कोर मेंबर्स को बुलाना चाहता हूं। मेरा भाई यश, मेरी खास दोस्त मीठी और मेरा लाडला धनुष…।”

हर्ष के ऐसा कहते ही मुस्कुरा कर धनुष यश और मीठी उसके पास चले आए। चारों एक साथ खड़े थे और फोटॉग्रफर्स उनकी तस्वीर लेने के लिए झूम पड़े…

एक किनारे यश था, बीच में हर्ष  धनुष और धनुष के बगल में मिठी खड़ी थी।
कुछ एक तस्वीरों के बाद धनुष ने एक किनारे से होते हुए मीठी को अपने और हर्ष के बीच किया, और खुद किनारे हो गया।
उन चारों की अलग-अलग एंगल से ढेर सारी तस्वीरें फोटॉग्रफर्स ने बड़े उत्साह से निकाली..।

पार्टी अपने रंग में आ चुकी थी। कोई स्नेक्स की प्लेट पकड़े कुछ खाते हुए किसी से बात कर रहा था, तो किसी के हाथ में जाम के गिलास थे। मीठी दो तीन मॉडल लड़कियों से कुछ बातें कर रही थी। हाथ में स्नेक्स की प्लेट थामें यश मीठी के पास चला आया..

” तूने कुछ खाया नहीं मीठी..? अच्छा आज मॉडल टाइप की शॉर्ट ड्रेस पहनी है तो खाने के कारण कहीं पेट ना दिखने लगे इसलिए!”मीठी को छेड़ कर वो हंसने लगा..

“चिपो…जब बोलेगा बकवास ही बोलेगा.. फिलहाल के कुछ खाने पीने से मेरा पेट नहीं निकलने वाला, समझा? वह तू है पेटू कहीं का..!
जहां जिस पार्टी में जाता है, तेरा पूरा फोकस खाने पर और पीने पर ही रहता है..!”

” हां तो जीवन का उद्देश्य ही वही है…
हम पैदा क्यों होते हैं खाने और पीने के लिए, क्यों धनुष?”

उन दोनों की नोंकझोंंक के बीच धनुष भी उन लोगों तक आ गया था। धनुष ने भी हाथ में प्लेट पकड़ रखी थी।

        धनुष को खाने का जबरदस्त शौक था। अपने काम के प्रति धनुष जज्बाती था, जुनूनी था।
जब अपने काम में डूबा होता था, खाना पीना सब भूल जाता था। लेकिन जब भी हर्ष के साथ का उसका कोई इवेंट सफल होता, और उसे सफलता की पार्टी दी जाती तो यह सारे लोग धनुष को मिलाकर यही चिढ़ाया करते थे कि पूरी पार्टी वही वसूल करता है।
हर एक खाने का आइटम धनुष जरूर चखता था, आज भी वह वही कर रहा था…।

बड़ी सी डिनर प्लेट में उसने ढेर सारे स्नैक्स के आइटम सजाये हुए थे और बड़े मजे लेकर एक एक चीज टेस्ट कर रहा था..

“अब बताओ.. इन महाशय को यह भी सीखाना पड़ेगा कि स्नैक्स के लिए क्वार्टर प्लेट यूज़ की जाती है, डिनर प्लेट मेन कोर्स के लिए होती है..।”

” देख मीठी यह अंग्रेजो वाले ढकोसले ना मुझे नहीं पसंद है…।
मेरे सामने खाना आया, उसके बाद मैं यह नहीं सोचता कि उसको कौन सी प्लेट में सर्व करके खाऊं।
मेरा उद्देश्य रहता है, खाना खाओ।
वैसे भी हमारे इंडियन कल्चर में एक ही थाली में सब कुछ परोसने का रिवाज है..!”

“हां तो मिस्टर इंडिया, हमारे इंडिया में पहले स्टार्टर फिर मेन कोर्स, फिर स्वीट डिश का भी रिवाज नहीं है। हम एक ही साथ खाना खाते हैं..।”

हर्ष अपने हाथ में वाइन का गिलास लिए उन लोगों तक पहुंच गया और धनुष के कंधे पर बड़े प्यार से हाथ रखकर उसने भी उसे टोक दिया..

” इसीलिए तो मुझे हमारा इंडियन कल्चर पसंद है। प्लेट वेट का झंझट ही नहीं। और वैसे भी खाना ऐसा होना चाहिए कि हम परोसने तक का इंतजार ही ना कर सके, सीधे खाने पर टूट पड़े।
     ये अंग्रेजों के ढकोसले ज्यादा है, इनके खाने में ज्यादा चीजे तो होती नहीं। बस वही ब्रेड लोफी इससे ज्यादा इनके पास होता क्या है?
तो इसलिए डिजाइनर प्लेट्स दिखा दिखा कर अपनी पाककला को प्रमाणित करते रहते हैं…
वैसे भी सत्य को प्रमाण की आवश्यकता नहीं है.. जो अच्छा है वो स्वयं आपने गुणों का गुणगान नहीं करता, और जिस प्रोडक्ट में दम नहीं होता उसी का विज्ञापन महंगा करना पड़ता है की लोग विज्ञापन देख कर ही आ जाएँ.. !”

वह चारों हँसते बोलते खा पी रहे थे कि मॉडल्स में से एक मॉडल उठकर मीठी के पास चली आई।
   उसने वाइन का गिलास मिठी की तरफ बढ़ा दिया। मीठी ने मना कर दिया..

“सॉरी देवयानी.. मैं नहीं लेती.. !”

“अरे लेकिन क्यों.. ? यहां तो सब ले रहे हैं। पार्टी हो रही है यार।
  पार्टी में अगर तुमने नहीं ली तो फिर क्या मतलब..?”

“नहीं.. मैंने कभी नहीं ली.. और लूँगी भी नहीं.. !”

अब तक में बाकी मॉडल्स भी उन तक आ गयी थी.. उनमें से ज्यादातर मॉडल्स हर्ष के आसपास रहना चाहती थी, और इसीलिए बहाने से वहां चली आई थी। वह सारी लड़कियां मीठी को पीने के लिए फोर्स करने लगी..

“एक आध ग्लास में कुछ नहीं होने वाला, ले लो.. !”

“न.. बिलकुल नहीं.. ! मुझे पसंद ही नहीं

” अरे जब टेस्ट ही नही किया तो कैसे पता, पसंद है कि नहीं?
वैसे हम सबको पता है तुम ममा की बेटी हो। हर काम ममा से पूछ कर करती हो। और अभी भी भले ही तुम यहां हो, लेकिन सुबह सात बजे तुम्हारी ममा का अलार्म क्लॉक फोन आ जाता होगा।
   मीठी उठो, मीठी ब्रश करो, मीठी नहा लो, मीठी यह ब्रेकफास्ट का टाइम है..।
मीठी रात में सोने के पहले ब्रश करना। बाहर अकेले घूमने मत जाना। हर्ष और धनुष के साथ ही हर जगह जाना…।
सो चिल मीठी, हम सब भी जानते हैं कि तुम ममाज़ गर्ल हो। अपनी मम्मी की मर्जी के बिना तुम सांस भी नहीं लेती। आज पता नहीं कैसे तुमने यह ड्रेस पहन ली, बिना अपनी मॉम को दिखाएं..?”

” किसने कहा मैंने अपनी मॉम को दिखाई बिना पहना है?
मैंने पहनने के बाद सबसे पहले वीडियो कॉल करके ममा को ही दिखाया था, उन्होंने बोला ओके है.. !”

“ओह्ह गॉड रियली… यार मीठी तुम तो मतलब कौन से ज़माने की हो यार… ?
एक स्पेस तो होना चाहिए न…!  पेरेंट्स से हम सब बच्चे काफी क्लोज होते हैं, लेकिन एक एज के बाद हमारी अपनी भी तो कोई लाइफ होनी चाहिए ना। हर बात हमें मां-बाप से पूछ कर ही करना है, ऐसा जरूरी थोड़ी है? अच्छा सुनो, आज फर्स्ट टाइम अपनी मां से पूछे बिना यह ट्राई कर लो..!”

इन सारी लड़कियों की बातचीत के बीच, पहले धनुष फिर यश और फिर हर्ष भी वहां से निकल गया था।
और यह सब लड़कियां मीठी के पीछे पड़ी हुई थी कि वह वाइन टेस्ट कर ले।
लेकिन मीठी किसी हाल में इस बात को मानने को तैयार नहीं थी। और वह लड़कियां उसका पीछा छोड़ने को तैयार नहीं थी।

दूर खड़े हर्ष को समझ में आ रहा था कि उनके बीच क्या बातचीत चल रही है…।
हर्ष को मालूम था कि मीठी अपनी माँ की बात कभी नहीं टालती..

वो लड़कियां ज़बरदस्ती मीठी के पीछे पड़ी थी..

“ऐसी बात नहीं है देवयानी.. बस मुझे पसंद ही नहीं ये सब !”

“व्हाट ये सब ? तुम तो ऐसे कह रही जैसे कोई ख़राब चीज़ है..।
हर्ष भी तो पीता है..।
यश भी.. ये तो आजकल कॉमन है यार..।
और वैसे भी कोई तुम्हे डेली ड्रिंक करने हम थोड़े न कह रहे.. ! आज पार्टी है, बस उसी की ख़ुशी मनाने कह रहे। लेकिन लगता है तुम हमारी ख़ुशी में हमारा साथ नहीं देना चाहती.. !”

“अरे नहीं.. ऐसी भी बात नहीं है !”

“फिर कैसी बात है.. ? देखो मीठी, हम सब जानते हैं कि तुम अपनी मॉम से बहुत डरती हो। उन्ही के हिसाब से  चलती हो, और जो काम उन्होने मना कर दिया वो करने की सोच भी नहीं सकती..।
पर एक बात सोच कर देखो, तुम अपनी मॉम से इतना डरती क्यों हो?
तुम्हें उनसे प्यार होना चाहिए, तुम्हारे और तुम्हारी मॉम के बीच दोस्ती का रिश्ता होना चाहिए। जिससे तुम अपने मन की सारी बातें उन्हें बता सको।
लेकिन तुम्हारी मम्मी ने तुम्हें बहुत डरा कर रखा है। हर बात पर इजाजत लेने की जिम्मेदारी रखी है तुम पर।
इसलिए तुम कुछ भी अपने मन का नहीं कर पाती हो।
अपने मन के कपड़े नहीं पहनती, अपने मन का खाती पीती नहीं हो।

   उनके हिसाब से चलती हो। तुम एक्चुली अपनी मॉम का चाबी वाला गुड्डा हो, जिसे वह अपने हिसाब से चलाती फिरती है।

अब तुम देखो हम सब हफ्ते भर से यहां पर है। एक तुम ही हो जिसने किसी भी दिन की लेट नाइट पार्टी अटेंड नहीं की।
   हम सब कितना इंजॉय करते थे। लेकिन तुम दस बजे अपने रूम में चली जाती थी, और सो जाती थी।
कौन करता है यार ऐसा? मैच्योर बनो।
अब तुम बड़ी हो गई हो। अपने निर्णय लेना सीखो। कल को तुम अगर हर्ष की कंपनी छोड़कर बाहर किसी और कंपनी को ज्वाइन करती हो तो, तुम्हारी मम्मी तो तुम्हें कुछ करने ही नहीं देंगी।
तुम्हें पता है, अभी भी वह तुम्हें काम इसलिए करने देती है, क्योंकि तुम हर्ष की कंपनी में हो।
      वरना तो वह तुम्हें घर से भी न निकलने दे..।
प्लीज़ मीठी बुरा मत मानना लेकिन निरमा मैम बहुत स्ट्रिक्ट है..।”

देवयानी और बाकी लड़कियों की इन बातों का मीठी के पास कोई जवाब नहीं था..।
वह चुपचाप सी बैठी थी। किसी बात का क्या जवाब दूं यह सोचती।

लेकिन फिर उसने टेबल पर अपने सामने रखे वाइन के ग्लास की तरफ हाथ बढ़ाया और उसे उठाने ही वाली थी कि हर्ष वहाँ चला आया।
उसने मीठी के हाथ से वह गिलास ले ली…

“आओ मीठी, तुम्हे कुछ लोगो से मिलवाना है !”

मीठी ने हर्ष की तरफ देखा.. -“मुझे.. लेकिन किससे ?”

“आओ तो सही !”

वो उसे आपने साथ ले गया..
लेकिन जाते जाते मीठी वापस मुड़ी और उसने देवयानी को देख कर इशारे में मैं वापस आकर गिलास ख़त्म कर दूंगी का इशारा किया और हर्ष के साथ आगे बढ़ गयी..

क्रमशः

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Abhishek kr singh
Abhishek kr singh
1 year ago

देवयानी उसे अपनी तरह बनाना चाहती है लेकिन मीरा भी शायद मन से अपने आप पर अपने फ़ैसलों पर खड़े होना चाहती है तो उसकी बातों में आ जाए पर यह सही नहीं है, सबकी मेहनत रंग लाई है हर्ष और मिठी की क्या कहानी है वह भी पढ़ना है और सबसे ज्यादा राजा की तरह शौर्य को गोली लगने की गुत्थी सुलझाने के लिए पढ़ना जरूरी है, बेहतरीन पार्ट दीदी 💐👍🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️💐💐💐

gurmail singh
gurmail singh
2 years ago

mam pratilipi per kya hua baha to kahani kahi aggr chl rhi thi

Anonymous
Anonymous
2 years ago

Finnally I got it 😁

Anonymous
Anonymous
2 years ago

Finnally I got this 😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁👍

Jagruti
Jagruti
2 years ago

Bahut badhiya kahani.