जीवनसाथी -3 भाग -4

कली झील पर खड़ी थी और वो लड़के उसे घूरते हुए उस पर छींटाकशी करते हुए मुस्कुरा रहें थे …
..वासुकी वहाँ पहुंचा और धीरे से कली के कंधे को अपनी बाँहों के घेरे में ले लिया और एक नज़र उन लड़कों पर डाली..
वो लड़के उसे देखते ही घबरा गए, और एक एक कर बहाने बनाते हुए वहाँ से चम्पत हो गए..
एक-एक करके वह किसी ना किसी बहाने से वहां से जाने लगे। वासुकी उनके पीछे बढ़ने को हुआ कि तभी उसकी नजर दर्श कर चली गई! उसने इशारे से उसे मना कर दिया.. वासुकी ने दर्श की बात का मान रखा और उन लड़कों को वहां से जाने दे दिया..
वह पलटा और कली के पास वापस आ गया !
इतनी देर में कली को ना उन लड़कों के अभद्र आचरण के बारे में कुछ समझ में आया और ना वासुकी के पास आकर खड़े होने के बारे में..
वह पूरी तन्मयता से उस झील में तैरते सारस देख रही थी। और उनकी तस्वीरें उतार रही थी..।
उसी वक्त उसके पास खड़े एक उसके पिता की उम्र के आदमी ने उसे अपने मोबाइल का एंगल सही करने कहा, वह चौंक कर अपने बगल में देखने लगी। उसे नहीं मालूम था कि उसके बगल में विजयराघवगढ़ रियासत के प्रिंस विराट सिंह बुंदेला खड़े थे…
विराट को भी फोटोग्राफी का शौक था और वह सालों से दुनिया में इधर-उधर घूम कर अपने इस शौक को पूरा कर रहा था, और अब उसकी फोटोग्राफी पर कई किताबें भी प्रकाशित हो चुकी थी। वह अपने दोस्त के साथ खड़ा उस झील पर की भी तस्वीरें ले रहा था कि तभी उसने अपने बगल में खड़ी बच्ची को मोबाइल से सारस की तस्वीरें लेते देखा और उसके बाद उसे एंगल सही करके तस्वीरें लेने के तरीके बताने लगा। कली भी बड़े ध्यान से उसकी बातें सुनने लगी और उन कुछ ही पलों में दोनों की दोस्ती हो गई ! विराट ने कली की तस्वीरों की तारीफ की और इसके साथ ही उसे यह भी बताया कि एक हफ्ते बाद इंडिया में उसकी तस्वीरों की प्रदर्शनी लगने वाली है। यह सुनकर कली मुस्कुरा उठी…
वासुकी का कोई फोन आ गया था और जिसके कारण वह बात करते हुए वहाँ से थोड़ा आगे बढ़ गया था। इसलिए उसकी नजर विराट पर नहीं पड़ी !.
इधर विराट ने कली की खींची तस्वीरों की तारीफ करने के बाद उसके हाथ में अपना कार्ड पकड़ा दिया..
“तुम बहुत अच्छी फोटो लेती हो.. मुझे भी बचपन से फोटोग्राफी का बड़ा शौक रहा है.. !”
“जी धन्यवाद.. ! “
विराट ने अपने कैमरा में उसे तस्वीरें दिखानी शुरू कर दी, और उसकी निकाली तस्वीरें देखकर कली भी खुश होने लगी…
विराट के साथ उसका दोस्त भी खड़ा था..
उसने भी कली को देखा, और कली ने उसे.. दोनों ही हल्के से मुस्कुरा उठे..
” तुम तो वाकई कलाकार हो.. इतनी छोटी सी उम्र में तुम्हें कैमरा एंगल और तस्वीरों का बहुत नॉलेज है ! कभी इंडिया आओ तो कॉल करना अगर उस वक्त मैं इंडिया में रहा तो जरूर तुमसे मिलूंगा…!”
“श्योर !”
मुस्कुरा कर कली ने विराट का कार्ड अपने पास रख लिया..
विराट और उसका दोस्त वहाँ से चले गए..
अपना फ़ोन रख कर वासुकी उन लोगों के पास चला आया…
वक्त के पाबंद वासुकी को किसी दूसरे काम से कहीं जाना था, इसलिए उसने कली और बाकी लोगों को साथ लिया और घर निकल गया…..
कली जाने क्यूँ जब भी इण्डिया सुनती उसका मन वहाँ जाने को बावरा होने लगता.. उसे अपनी मासी माँ की याद आने लगती..।
उसने अपनी माँ को तस्वीर के अलावा कभी नहीं देखा था, लेकिन मासी माँ की गोद की खुशबू वो आज तलक नहीं भूल पायी थी..।
और इसलिए शायद वो एक बार अपने जीवन में उनसे मिलने उन्हें ढूंढने इण्डिया जाना चाहती थी, लेकिन उसके डैडा इण्डिया सुनते ही बौखला जाते थे..
पर उसके दिल की जाने कौन सी डोर थी जो उसे इंडिया की तरफ खींच रही थी…
****
हर्ष का फ़ोन आ रहा था, और शौर्य का मोबाइल उसकी कार में पड़ा था..
शौर्य सड़क के दूसरी तरफ किसी लड़के से कुछ बात कर रहा था.. अपनी बात समाप्त कर वो लगभग भागता हुआ सा अपनी कार की तरफ बढ़ गया..
उसने कार का दरवाज़ा खोला और अंदर बैठी लड़की ने उसकी तरफ उसका फ़ोन बढ़ा दिया..
“तुम्हारा फ़ोन बज रहा था शौर्य !”
“किसका था.. ?”
“हर्ष का.. !”
शौर्य ने एक नज़र उस लड़की को देखा और फ़ोन अपने हाथ में ले लिया..
“हर्ष जी बोला करो… उनके लिए किसी के भी मुहँ से सिर्फ हर्ष नहीं सुन सकता !”
धीरे से शौर्य अपनी सीट में बैठ गया..
“हाँ हाँ.. हर्ष जी का फ़ोन था !”
“उठाया तो नहीं ना तुमने ?”
“पागल हूँ क्या ? तुम्हारी उस चांडाल.. मेरा कहने का मतलब है, मैं कहाँ तुम्हारा फ़ोन उठाती हूँ.. ?”
अब तक में हर्ष को शौर्य ने फ़ोन लगा लिया था..
“हाँ भाई !”
“कहाँ हो शौर्य.. ?”
“बस ये.. यहीं.. आप आदेश करें.. कहाँ आना है ?”
“हम सब कोरल में बैठे हैं.. मीठी की पार्टी है.. आ जाओ.. सब साथ में ही खाना खाएंगे और फिर घर लौट जायेंगे !”
“जी… पहुँचता हूँ.. !”
वो लड़की शौर्य को कुछ इशारा करने लगी..
शौर्य ने धीमे से हाँ में सर हिला दिया…
“मैं जानती हूँ तुम कभी नहीं मिलवाने वाले उन सब से मुझे ?”
“ऐसी बात नहीं है मीरा.. !”
“फिर कैसी बात है ? तुम साफ साफ कह क्यूँ नहीं देते.. मुझे झूठी उम्मीद क्यूँ दे रखी है ?”
शौर्य ने एक ठंडी सी सांस भरी और तभी उसका मोबाइल वापस बजने लगा.. इस बार मीठी लिखा दिखाई दे रहा था..
“रहने दो ना, मत उठाओ.. जरुरी है क्या हर एक का फ़ोन उठाना ?”..
शौर्य ने एक नज़र मीरा पर डाली और मीठी का फ़ोन उठा लिया..
“ये कुछ नाम ऐसे हैं जिन्हे मैं कभी अवॉयड नहीं कर सकता !”
फ़ोन उठाते ही मीठी कहने लगी…
“कहाँ हो शौर्य ? अब तक नहीं पहुंचे, अच्छा सुनो, जिसके भी साथ हो उसे भी ले आओ.. यहाँ सिर्फ हम ही लोग है.. बाहर का कोई नहीं !”
“हम्म.. “
शौर्य ने फ़ोन बंद कर के रखा, और अपनी कार भगा दी….
कुछ देर में ही वो लोग भी कोरल पहुँच चुके थे..
हर्ष पर नज़र पड़ते ही शौर्य मीरा को लिए उस तरफ बढ़ गया..
शौर्य के साथ आई उस लड़की से वहाँ बैठे वो सभी लोग पहली बार मिल रहें थे.. उनमे से हर्ष और शोवन ने तो मुस्कुरा कर उस लड़की का स्वागत किया लेकिन मीठी और परी को कुछ ख़ास फर्क नहीं पड़ा..
शौर्य ने सबका परिचय देना शुरू कर दिया..
“हैलो हर्ष जी.. !”
“ओह्ह कम’ऑन आप मुझे सिर्फ हर्ष ही बुलाइये !”
मीरा ने व्यंग से शौर्य की तरफ देखा, शौर्य ने शोवन से उसका परिचय करवा दिया..
शोवन के सामने मीरा ने हाथ बढ़ाया और शोवन ने झेंपते हुए उसका हाथ थाम लिया.. ।
मीरा उन लोगों से बड़ी गर्मजोशी से मिली..
“ये मीठी है.. !”
“हाय मीठी.. मैं मीरा !”
मीठी ने धीरे से गर्दन हिला दी..
“ये परी है.. !”
परी ने मीरा को देख हलके से मुस्कुरा कर अपना हाथ हिला दिया.. -“हाय मीरा !”
परी और मीठी के बीच कुर्सी खाली थी बावजूद मीरा शौर्य की बाँह थामे उससे चिपक कर बैठ गयी…
हर्ष ने शौर्य को देखा, शौर्य झेंप कर दूसरी तरफ देखने लगा…
शौर्य आज के ज़माने का मनमौजी बिंदास बेपरवाह लड़का था.. उसे ज़िन्दगी अपने ढंग से जीनी थी.. अपनी ज़िंदगी में किसी का हस्तक्षेप उसे पसंद नहीं था.. यहाँ तक की अपने माता पिता का भी नहीं..।
बस एक हर्ष था जिसके सामने वो संयत रहता था, उसकी सुनता और मानता था..
बाकी पूरी दुनिया के सामने शौर्य कुछ और ही था, उसे किसी से कोई फर्क नहीं पड़ता था.. लेकिन हर्ष के सामने कोई लड़की उससे इस कदर चिपके ये खुद उसे अच्छा नहीं लग रहा था..
उसकी हालत मीठी से छिपी नहीं थी.. वो उसकी हालत देख अपनी हंसी नहीं रोक पा रहीं थी..।
मीरा ने धीरे से शौर्य के कान में कुछ कहा..
शौर्य ने हाँ में सर हिला दिया..
मीरा ने वापस उसे उकसाया और आखिर शौर्य को हर्ष से कहना ही पड़ गया..
“हर्ष भाई… आपसे कुछ कहना था.. !”
“हाँ कहो !”
हर्ष ने अपने हाथ का ग्लास नीचे रख उसकी तरफ देखते हुए पूछ लिया..
हर्ष ने जैसे ही अपनी गहरी आँखों से शौर्य की आँखों में देखा शौर्य बोलने से चूक गया..
उसने वहीं रखा पानी का बॉटल उठा कर पिया और वापस खुद को बोलने के लिए तैयार करने लगा…
शौर्य वैसे तो चंचल था पर मन ही मन हर्ष से जरा दबता था.. हर्ष का व्यक्तित्व था भी ऐसा कि उससे मिलने वाला उससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता था। दिखने में जहां वह बिल्कुल राजकुमार लगता था, वही उसके स्वभाव का गांभीर्य और उसकी बुद्धिमता उसे एक अलग ही छवि प्रदान करते थे।
उसका ऑरा ही ऐसा था कि उसके साथ वाले उसके निर्णय को मानने के लिए बाध्य हो जाते थे। इतना ही नहीं अपनी छोटी सी उम्र में उसने अपने बिजनेस को भी कई गुना बढ़ा चढ़ा लिया था..।
उसके पिता ही नहीं उसके काका यानी राजा अजातशत्रु भी हर्ष का बहुत मान करते थे, और अब तो यह हाल था कि बिजनेस के छोटे-मोटे निर्णय हर्ष उनसे बिना पूछे ही लेने लग गया था।
और इस बात की इजाजत उसे उसके पिता ने ही नहीं बल्कि उसके काका साहब ने भी सहर्ष दे रखी थी..।
फिलहाल हर्ष का कारोबार इतना बढ़ चुका था कि अब उसे कारोबार को संभालने के लिए नए-नए रिक्रूटमेंट करने पड़ रहे थे। इन सब के साथ ही उसे अपने कारोबार का विज्ञापन भी टीवी पर करवाना था, जिसके लिए वह मॉडल्स की भी तलाश में था..।
हर्ष के साथ ही यश भी काम सीखने लग गया था। हर्ष चाहता था कि शाॅर्य भी उसके ऑफिस को जॉइन कर ले, लेकिन शौर्य अपने में मगन अपनी अलग ही दुनिया में व्यस्त रहता था।
अभी-अभी मीठी ने भी हर्ष का ऑफिस जॉइन कर लिया था। इस तरह वह सारे दोस्त एक साथ हो गए थे। परी की पढ़ाई चल रही थी लेकिन पार्ट टाइम वह भी ऑफिस आ जाया करती थी..।
फिलहाल यह सभी लोग मिलकर हर्ष के विज्ञापन के लिए मॉडल की तलाश में थे।
मीरा को यह बात मालूम थी..
मीरा चाहती थी किसी तरीके से वो हर्ष की कम्पनी की मॉडल बन जायें..
वो सोलह साल की थी, तब से मॉडलिंग की दुनिया में अपना कैरियर बनाने के लिए हाथ-पांव मार रही थी, उसके दिल दिमाग में एक ही बात चस्पा थी की उसे सुपरमॉडल बनना है.. चाहें किसी शर्त पर..
हर्ष की कंपनी का शहर ही नहीं पूरे देश में नाम था और उसकी कम्पनी में मॉडल का काम मिलना बहुत बड़ी बात थी..
हर्ष ने अपनी कम्पनी के लिए एक दो मॉडलिंग एजेंसी से बात कर रखी थी, जहाँ पर देश की टॉप मॉडल्स काम किया करती थी..
हर्ष के पास एक से बढ़ कर एक खूबसूरत मॉडल के पोर्टफोलियो आये हुए थे..
और उन्हीं में से कुछ मॉडल्स को उसने अगले दिन अपने ऑफ़िस में बुलवाया हुआ था..
ये सारी अंदर की बातें थी लेकिन ये सब कुछ मीरा को मालूम था..।
मीरा का एक दोस्त ‘लाइमलाइट फैशन एजेंसी’ में काम करता था, और उसी ने ये सारी बातें मीरा को बताई थी.. उसने मीरा से बहुत बार लाइमलाइट जॉइन कर लेने की बात कहीं थी लेकिन मीरा एक स्वंतत्र मॉडल के तौर पर ही आगे बढ़ना चाहती थी..
उसने अपने शुरूआती दौर में एक छोटी सी मॉडलिंग एजेंसी ज़िशार में काम किया था.. जहाँ शुरुवात में उसे बस मॉडलिंग कॉन्ट्रेक्ट दिलवाये जाते थे..।
जब तक मॉडलिंग कॉन्ट्रेक्ट ना मिले तब तक वो कम्पनी मॉडल्स को कोई पैसे नहीं देती थी..
धीरे धीरे मीरा की खूबसूरती देख कर उसे काम मिलने लगा था..
लेकिन वो कंपनी जिसने शुरू में मीरा से चालीस प्रतिशत का हिस्सा देने का वादा किया था वो अचानक मीरा को काम मिलना शुरू होते ही अपना रंग बदल गयी और उसने मीरा की हिस्सेदारी सिर्फ दस प्रतिशत कर दी….।
सारी मेहनत मीरा की और उसके जैसी बाकी की मॉडल किया करती थी लेकिन उन्हें उनकी मेहनत का काफी कम मुआवजा मिला करता था, इसीलिए मीरा ने उस दोस्त से सलाह मशवरा करके अपना कॉन्ट्रैक्ट खत्म होते ही उस कंपनी को छोड़ दिया।
लेकिन इस सब में 5 साल निकल गये थे। मीरा अब 21 साल की हो चुकी थी, और स्वतंत्र रूप से मॉडलिंग के लिए प्रयास कर रही थी…।
इसी सबके बीच उस लड़के ने मीरा से कहा कि वह किसी ऐड एजेंसी में काम करने की जगह बड़े ब्रांड्स को खुद अप्रोच करे, जिससे उसकी बात बन सके।
हर्ष की कंपनी एक बहुत पुरानी और स्थापित कंपनी थी। उसकी कंपनी ने नए परफ्यूम ब्रांड लांच किए थे। यह परफ्यूम पैरिस की ब्रांड के साथ हर्ष की कंपनी का कोलैबोरेशन था, और इसलिए इस परफ्यूम की लॉन्च बहुत बड़े पैमाने पर की जाने वाली थी…।
वैसे तो हर्ष के सहयोगी रस्तोगी जी का कहना था कि पेरिस के परफ्यूम के विज्ञापन के लिए किसी जानी-मानी ब्रिटिश मॉडल को बुलाया जाए, लेकिन हर्ष चाहता था कि परफ्यूम का इंडियन वर्जन लॉन्च किया जा रहा है, इसलिए मॉडल भी हिंदुस्तानी होनी चाहिए।
लेकिन उसे अब तक अपने परफ्यूम के लिए सूटेबल चेहरा नहीं मिल पाया था। वह अपनी मॉडल की तलाश में था। और यह बात मॉडलिंग जगत में चर्चा का विषय बनी हुई थी। हिंदुस्तान की सारी जानी-मानी मॉडल हर्ष की कंपनी के परफ्यूम का विज्ञापन पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही थी, और यह बात हर्ष अच्छे से जानता था…।
उसके ऑफिस में अगले दिन ऑडिशन होना था और इसके लिए मीठी ने यश के साथ मिलकर पहले से तैयारियां शुरू कर दी थी। मीठी की जानदार तैयारियों को देखने के बाद ही हर्ष ने मीठी से कहा था कि वह बिना उसकी कंपनी जॉइन किए ही इतना काम कर रही है इससे बेहतर होगा कि वह कंपनी जॉइन करके स्थाई सदस्य के रूप में अपना काम संभाल ले, और इसीलिए मीठी ने अपना काम शुरू कर दिया था..।
मीरा को भी भनक लग चुकी थी कि अगले दिन हर्ष के ऑफिस में ऑडिशन होने हैं और इसीलिए वो आज सुबह से शौर्य के पीछे लगी हुई थी कि वह बस उसे हर्ष से मिलवा दे…
मीरा चाहती थी कि उसे हर्ष अपना मॉडलिंग असाइनमेंट दे दे। लेकिन उसकी हर्ष से सीधे तौर पर कोई जान पहचान नहीं थी, और बस इसीलिए वह शौर्य के पीछे पड़ी थी। उसे भी मालूम था, अगर शौर्य हर्ष की बात नहीं काटता था तो हर्ष भी शौर्य की हर बात मान ही लेता था। बस इसीलिए वह पिछले 10 दिन से शौर्य के पीछे हाथ पैर धोकर पड़ी थी कि वो हर्ष से उसकी पहचान करवा दे..।
आज भी शौर्य के बहुत पीछे पड़ कर और आंसू बहा बहा कर उसने शौर्य को आखिर मना ही दिया था और उस पर हर्ष का फोन भी चला आया इसलिए शौर्य अब मीरा को लेकर हर्ष के पास चला आया था।..
सब लोगों से मीरा को मिलवाने के बाद शॉर्य अब अपनी प्लेट से कुछ खा रहा था कि तभी उसके मोबाइल पर उसके बहुत प्यारे विराट चाचू का फोन आने लगा। उसने फोन उठाया और विराट चाचू ने एक बार फिर उसे लंदन में होने वाले रॉयल इवेंट के बारे में याद दिलाना शुरू कर दिया..
” चाचू प्लीज मैं वहाँ नहीं आना चाहता हूं, आप जानते तो हो मुझे यह सारी चीजें बड़ी रिडिक्युलस लगती हैं..!”
” लेकिन हो तो तुम रॉयल ब्लड और यह सारी चीजें तुम्हें विरासत में मिली हुई है..।
इस बात को मत भूलना! दूसरी बात शौर्य, तुम हुकुम सा के बेटे हो और उनके बेटे को उनका मान रखने के लिए इतना तो करना ही पड़ेगा!”
“चाचू प्लीज़.. कोई और उपाय नहीं है ?”
“ना… अरे सिर्फ तीन दिन की बात है.. आ जाओ.. ! यह इवेंट पसंद नहीं भी आया तो मेरे साथ लंदन घूम लेना वैसे भी अगले हफ्ते इंडिया में मेरा एग्जिबिशन लगने वाला है। और वह भी हमारे पैलेस में तो, मुझे भी इंडिया जाना है तो तुम मेरे साथ ही वापस लौट जाना। 3 दिन के लिए तो आ ही सकते हो..?”
” इतनी दूर तक जाना और वह भी सिर्फ 3 दिन के लिए इतना तो मेरा जेट लेग भी बैलेंस नहीं हो पाएगा और वापसी का समय आ जाएगा..!”
” देख लो शौर्य, अब जैसी तुम्हारी मर्जी। वैसे मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा और यह भी बता दूं कि इस इवेंट को मैं खुद भी कवर करने के लिए पहुंचने वाला हूं ।
अच्छा परी कहां है..?”
” यही है, उसे भी इनविटेशन कार्ड मिला है और वह बहुत एक्साइटेड भी है..!”
” एक्साटमेंट वाली तो बात ही है। पूरी दुनिया भर के सारे रॉयल फैमिली के बच्चे वहां मौजूद होते हैं। सऊदी के बड़े-बड़े आयल किंग्स, ग्रेट ब्रिटेन का राजघराना, कोरिया का राजपरिवार, जापान के शाही लोग, नेपाल राजघराना, हर कोई वहाँ मौजूद रहेगा..।
इसके अलावा हॉलीवुड बॉलीवुड की बड़ी-बड़ी हस्तियों के बच्चों को भी इनविटेशन दिया गया है, समझ रहे हो?
इस इवेंट में शामिल होना बहुत बड़े गर्व की बात है शौर्य.. जिन्हें मौका नहीं मिलता, वह इस मौके के लिए तरसते हैं। और तुम्हें मिला है तुम भाव खा रहे हो ।
फिर तुम्हारी मर्जी, इससे ज्यादा मैं तुम्हें दबाव नहीं डालूंगा..
आखिर हूं तो तुम्हारा चाचा ही, मेरी बात क्योंकर मानोगे भला..?”
” चाचू यार, आप लोगों का यह इमोशनल अत्याचार भी ना… परेशान कर जाता है..।
चलिए ठीक है.. आता हूँ मैं भी..।
इवेंट परी अटेंड कर लेगी और मैं आपका लंदन घूम लूंगा… देखते हैं आपके लंदन में ऐसी क्या खास बात है..?”
” तुम तो ऐसे बात कर रहे हो, जैसे इसके पहले लंदन कभी आए ही नहीं..?”
” आया तो हूं, लेकिन उस वक्त मैं छोटा था। मॉम डैड के साथ ही आना हुआ था, और घूम फिर के वापस लौट गए थे। उसके बाद से कभी मौका ही नहीं लगा क्योंकि मुझे यूरोप ज्यादा पसंद है… !”
“इसका मतलब तुम आ रहे हो ना ?”
“हाँ चाचू.. आ रहा हूँ..।
कह दीजिये अपने लंदन से, कर ले वो तैयारी, अब आ रहीं है शौर्य की सवारी.. !”
मुस्कुरा कर विराट ने फ़ोन रख दिया..
उसके फ़ोन रखते ही उसका मोबाइल वापस बजने लगा..
कोई अनजाना नंबर था.. उसने जैसे ही फ़ोन उठाया, दूसरी तरफ से एक लड़की की आवाज़ आई..
“क्या मैं मिस्टर विराट से बात कर रहीं हूँ !”
“हाँ.. आप कौन ?”
“मैं कली बोल रहीं हूँ सर !! आपसे झील पर मेरी मुलाकात हुई थी, आपने मुझे अपना कार्ड दिया था.. बस उसी में से आपका नंबर देख कर कॉल किया है, उसमें आपके नाम के आगे और कुछ नहीं लिखा था, सिर्फ आपके नाम के अलावा.. !”
“मेरे पास मेरे नाम के अलावा और कुछ है भी नहीं ! आप सुनाइए कली, कैसी हैं आप ?”
“मैं ठीक हूँ सर.. मुझे आपसे एक बार मिलना था, कब मिल सकती हूँ.. ? मुझे फोटोग्राफी के बारे में आपसे बहुत कुछ सीखना था.. !”
“कल मैं दो दिन के लिए बाहर जा रहा हूँ.. आप चाहें तो दो दिन बाद यानी गुरुवार को मुझसे मिलने आ सकती हैं। लेकिन आपको लंदन के रॉयल पैलेस में आना होगा.. वहाँ मैं एक इवेंट में शामिल होने जा रहा हूँ.. वहीँ हम मिल लेंगे.. !”
“लंदन रॉयल इवेंट में सर ?”
“हाँ !”
“मुझे वहाँ का इन्विटेशन नहीं है, मैं कैसे अंदर दाखिल हो पाऊँगी… !”
“तुम्हारे नाम का कार्ड मैं वहाँ गेट पर छोड़ दूंगा, तुम चाहो तो उस इवेंट में मुझे असिस्ट कर लेना.. ! साथ में फोटोग्राफी भी हो जायेगी और तुम फोटोग्राफी की बारीकियां भी जान लोगी.. !”
“जी सर.. थैंक यू !”
कली के चेहरे पर मुस्कान खिल गयी…..
वो ख़ुशी से उछलती कूदती नीचे अपनी सरु मासी के पास चली गयी…
क्रमशः
दिल से..
सारी रॉयल न्यू जेन का परिचय मिल गया…
कहानी के ये सारे भाग पहले भी प्रकाशित किये थे लेकिन फिर हटा लिए थे…
इस कहानी को शुरू करने में वक्त लग रहा था, लेकिन फिर पाठकों की रूचि को देखते हुए मैंने इसे शुरू करने का निर्णय ले लिया और इसलिए वापस कहानी शुरू से ही शुरू की है..
कहानी के शुरुवाती तीन भाग प्रकाशित किये थे, लेकिन आप लोगों को दुबारा पढ़ कर बोरियत ना हो इसलिए कुछ ना कुछ जोड़ कर ही प्रकाशित कर रहीं हूँ… अगले भाग से नए पार्ट्स आने शुरू हो जायेंगे..
आप लोग ये ना सोचें कि मैं आप लोगों को बुद्धू बना रहीं हूँ…।
नए भाग ही लिखना चाहती हूँ, लेकिन उसके पहले ये कुछ भाग प्रकाशित करना ज़रूरी था वरना कहानी की लय खो जाती..
अगला भाग जल्दी आएगा..
तब तक पढ़ते रहिये, मुस्कुराते रहिये और कहानियों की अपडेट्स पाने के लिए फॉलो भी कीजिये..
मुझे पर्सनल सब्सक्राइब करने से पाप नहीं लगेगा..
इसलिये वो भी कर सकते हैं… बाकी आपकी मर्ज़ी !!
क्रमशः
aparna…

बेहद लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻
अब चलते है लंदन आपके साथ 🤗✈️
ये भाग भी बहुत अच्छा लगा है दीदी, शौर्य का क़िरदार और भी निखरेगा आई थिंक आफ्टर रीडिंग दिस चैप्टर… बेहतरीन पार्ट दीदी…💐🙏