जीवनसाथी -3 भाग -35

बीच में कहीं एक बार शौर्य का फ़ोन उन लोगो ने ट्रेस कर लिया था और उसी की लोकेशन ढूंढते वो लोग भी बनारस के रस्ते चल पड़े थे..
रास्ते में पड़ने वाले होटल्स की तलाशी लेते वो लोग बढ़ रहे थे, और इसीलिए इस होटल में भी छानबीन करने चले आये…
लेकिन रजिस्टर में उन्हें कहीं भी शौर्यप्रताप का नाम नजर नहीं आया और वो लोग आगे बढ़ गए..
उस होटल में पार्किंग बिल्डिंग के पिछली तरफ होने से उन गार्ड्स का ध्यान शौर्य की गाडी पर नहीं गया और वो लोग हड़बड़ाए से वहाँ से बाहर निकल गए..
होटल एकदम साधारण भी नहीं था, लेकिन कुछ खास पॉश भी नहीं था..
इसलिए भी उन लोगो को लगा कि उनका नाज़ो में पला राजकुमार ऐसे किसी होटल में क्या ही ठहरेगा.. इसीलिए उन लोगों ने ज्यादा पूछताछ करने की ज़हमत नहीं उठायी..
वरना इसके पहले हर एक सेवन स्टार, फाइव स्टार में उन लोगों ने बकायदे तस्वीर दिखा कर पूछताछ की थी..
शौर्य ने जल्दबाजी में ज्यादा ध्यान दिए बिना गाड़ी उस होटल की तरफ मोड़ ली थी।
शौर्य और कली लिफ्ट से अपने कमरे में पहुंच गए। कमरे का दरवाजा खोलकर जब वह दोनों अंदर आए तो कमरे की हालत देखकर शौर्य बहुत ज्यादा खुश नहीं हुआ।
यह जरूर था कि वह एक सामान्य जीवन जीना चाहता था, लेकिन था तो वह असल का राजकुमार ही। आज तक उसने कभी भी बहुत करीब से एक सामान्य जन जीवन को नहीं देखा था। आज भी इस होटल के कमरे की दीवारों को देखकर उसे कुछ खास अच्छा अनुभव नहीं हुआ, लेकिन फिलहाल इस सब पर ध्यान दिए बिना उसने वॉशरूम का दरवाजा खोला और तेजी से अंदर दाखिल हो गया।
कली खुद में खोई हुई कमरे को देखती हुई कमरे की खिड़की तक पहुंच गई। उसने खिड़की पर लगा पर्दा खोल दिया। परदे के दूसरी तरफ खिड़की पर जाली लगी हुई थी। लोहे की उस जाली को कली ने खोलने की कोशिश की, लेकिन वह खुल नहीं रही थी…
फ्रेश होकर शौर्य बाहर निकल आया..
“जल्दी में देखा नहीं, लेकिन रूम कुछ खास नहीं लग रहा.. है ना ?”
कली ने अपने मन की बात कह दी.. तब तक शौर्य भी कमरे की बदहाली देख कर समझ गया था कि कमरा उसके रहने लायक बिलकुल नहीं है..।
कमरे में कोई सस्ता सा रूम फ्रेशनर डला हुआ था, जिसकी तेज़ महक से शौर्य का सर चढ़ रहा था..
“एसी का रिमोट कहाँ है.. ?”
शौर्य ने पूछा और कली भी रिमोट ढूंढने लगी…
लेकिन उसे रिमोट नहीं मिला.. दीवार पर पुराना सा एसी लगा दिख रहा था.. शौर्य ने परेशान होकर कमरे में लगे इंटरकॉम को उठा कर रिसेप्शन में कॉल करने की सोची लेकिन फ़ोन बंद आ रहा था..
“हद है यार ! इतनी गर्मी लग रही यहाँ, और रिमोट भी नहीं मिल रहा.. !”
शौर्य परेशान सा खिड़की के पास चला आया.. उसने खिड़की खोलने की कोशिश की लेकिन उससे भी वो जाली नहीं खुली.. ज्यादा ज़ोर देने पर वो एक तरफ से कील समेत उखड़ने लगी, और ये देख कर शौर्य ने उसे छोड़ दिया..
“ये तो बहुत ख़राब जग़ह है.. !”कली की तरफ देख कर शौर्य ने कहा..
कली ने धीरे से हां में गर्दन हिलाई और बाथरूम का दरवाजा खोल अंदर चली गई…
अंदर जाते ही वो चीख कर बाहर निकल आयी..
“क्या हुआ… अंदर छिपकली या कॉकरोच दिख गया क्या ?”
” नहीं, मैं छिपकली या कॉकरोच से डर कर ऐसे नहीं भागती.. !”
“फिर.. क्या हुआ ?”
“अंदर टॉयलेट !”
“क्या हुआ ?” सवाल पूछते ही शौर्य को समझ में आ गया की कली को क्या तकलीफ है..
अंदर वेस्टर्न कमोड की जग़ह पुराने तरीके का टॉयलेट शीट लगा था…ज़ाहिर था विदेश में पैदा हुई, पली बढ़ी कली का ठेठ हिन्दुस्तानी शीट से ये पहला परिचय था, और इसीलिए उसका उपयोग समझ ना आने के कारण वो चीख कर बाहर निकल आयी थी..
शौर्य को कली का चेहरा देख हंसी आ गयी..
“क्या…? ऐसे क्या चौंक रही हो..? तुम्हे ओरिजिनल हिंदुस्तान देखना है ना..।
यही है ओरिजिनल हिंदुस्तान…।
और मैडम आपको बता दूँ कि ये एक तरह का योग भी है.. शरीर के लिए हर तरह से लाभकारी !
इसे यूज़ करने वालों को कॉन्स्टिपेशन की शिकायत नहीं होती.. समझी आप ?”
” वो सब तो ठीक है, लेकिन इसे यूज़ कैसे करते हैं ?”
कली का भोला सा सवाल सुन शौर्य को वापस हंसी आ गयी..
“आओ मैं बताता हूँ, कैसे यूज़ करना है !”
“नहीं नहीं… अभी ज़रूरत नहीं है मुझे.. लेकिन.. ये कठिन लग रहा है.. !”
कली के चेहरे पर पसीना छलक आया, वो मुहं धोने अंदर जा रही थी कि उनका दरवाज़ा कोई ज़ोर से पीटने लगा..
शौर्य ने दरवाज़ा खोला और वही वेटर जो उनका सामान छोड़ने आया था, घबराया हुआ सा उसके सामने खड़ा जल्दी जल्दी उन लोगो को वहाँ से निकलने बोलने लगा..
“साहब जल्दी निकलिए यहाँ से !”
“क्यों.. ? क्या हुआ ?”
“साहब पुलिस आ गयी है.. !”
“मतलब.. ?”
“रेट पड़ी है साहब रेट.. पुलिस की रेट.. !”
“रेट नहीं रेड बोलते है.. वैसे पुलिस क्यों रेड डाल रही.. !”
शौर्य के इस सवाल के पूछने तक में, वो लड़का जिसने अपना नाम गब्बर बताया था, वहाँ पहुँच गया..
“आप लोग जल्दी निकलिए यहाँ से.. यहाँ पुलिस आ चुकी है.. !”
उस लड़के ने शौर्य को आगे बढ़ने को कहा.. और तुरंत ही कली की तरफ देख कर बाहर निकलने का इशारा किया..
वो शौर्य और कली को लिए वहाँ से बाहर निकलने में मदद करने लगा..
शौर्य ने उसकी तरफ देखा, शौर्य जानना चाहता था कि वो उसका साथ क्यों दे रहा है ? और आखिर वो है कौन ?”
“आप लोग यहाँ से निकलिए.. मैं आपको सब बताता हूँ..।”
वो लड़का शौर्य और कली को लिए एक छोटे अंधियारे से गलियारे को पार कर उन लोगो को बाहर ले आया..
शौर्य को उसकी गाड़ी तक पहुंचा कर वो वापस जाने लगा कि शौर्य ने उसे आवाज़ दे दी..
“तुम हो कौन ?”
“मैं सीबीआई ऑफिसर विक्रम हूँ… इस होटल पर मेरी बहुत समय से नजर थी.. यहाँ से ड्रग्स डीलिंग का कारोबार होता है.. यहाँ नीचे बेसमेंट में ड्रग्स स्टोर करने के बाद ये लोग बलरामपुर के रास्ते नेपाल तक सारा माल स्मगल करते हैं..
बाकी बातें बाद में.. अगर कभी मुलाकात हुई तब बता दूंगा… !”
अपनी बात हड़बड़ी में पूरी कर वो लड़का तेज़ी से होटल की तरफ बढ़ गया और शौर्य कली को साथ लिए वहाँ से बाहर निकल गया..
बाहर निकलते ही दोनों ने चैन की साँस ली..
कली ने शौर्य की तरफ देखा..
“क्या हुआ, परेशान लग रहे हो ?”
“क्या हुआ ? तुमने देखा नहीं क्या हुआ ? हम जिस होटल में थे वहाँ ड्रग्स सप्लाई का रैकेट चलता था, इत्तेफाक से हम जब थे तभी पुलिस भी आ गयी.. वो तो किसी अनजान मददगार ने हमे बाहर निकाल दिया, वरना आज हम पुलिस स्टेशन में बैठे होते, और फिर मुझे मेरे घऱ वालों को फ़ोन करना पड़ता, और फिर..
“अरे बस बस.. इतना सब नहीं हुआ ना… अब मत सोचो ! भगवान भी रूप बदल कर अच्छे लोगो की मदद करने चले आते हैं !”
“यार इतने फ़िल्मी डायलॉग लाती कहाँ से हो तुम ? अच्छे लोगो की मदद, भगवान का रूप एन्ड आल… ऐसा कुछ नहीं होता मैडम.. उल्टा अच्छे लोग हमेशा धोखा ही खाते हैं.. अच्छे लोगो को अपनी अच्छाई बनाये रखने की भारी कीमत चुकानी पड़ती है हमेशा !
बुरे लोगो के साथ बुरा होते मैंने कभी नहीं देखा.. बुरा होता है उनके साथ जो वाकई दिल के साफ और सच्चे होते हैं.. सो… जस्ट..
बोलते बोलते शौर्य चुप हो गया.. उसके माथे की नसे तन गयी थी..
उसके चेहरे का रंग लाल पड़ गया था…
कली को समझ में आ गया कि उसकी बात शौर्य को पसंद नहीं आयी…
वो लोग आगे बढ़ रहे थे की उन्हें दूर से मंदिर में जलते दिए दिखने लगे..
“मुझे लगता है हम बनारस पहुँच गए.. !”
वो लोग आगे बढ़ते गए…. और एक अच्छा सा होटल देख कर शौर्य ने गाड़ी रोक दी…
***
अगली सुबह शौर्य की आंख खुली, उसने देखा कली नहा कर आ चुकी थी, वो अपने गीले बालों को झाड़ती खिड़की पर खड़ी बाहर की हलचल देख रही थी..
उसकी खिड़की के बाहर कुछ गमले रखे थे जिनमे कुछ विदेशी फूल खिले थे..
एक तितली मंडराती इधर से उधर हो रही थी, लेकिन फूल पर नहीं बैठ रही थी..
वो बार बार आकर कभी कली की ऊँगली और कभी उसके कंधे पर बैठ रही थी..
और हर बार कली उसे उठा कर उन फूलो पर रख दे रही थी..
लेकिन ज़िद्दी तितली वापस आकर कली पर मंडराने लगती थी…
बाहर कहीं किसी रेडियो पर गाना चल रहा था..
नमकीन सी बात है, हर नई सी बात में
तेरी खुशबू चल रही है जो मेरे साथ में
हल्का-हल्का रंग बीते कल का
गहरा-गहरा कल हो जाएगा..
आधा इश्क़, आधा है, आधा हो जाएगा..
कदमों से मीलों का वादा हो जाएगा
आधा इश्क़, आधा है, आधा हो जाएगा..
शौर्य ने अपने दोनों हाथो को मोड कर तकिया सा बना कर सर के नीचे रख लिया था, वो बड़े आराम से कली को तितली से परेशान होते देख रहा था..
उसी वक्त कली पीछे घूमी और उसकी नजर सोफे पर लेटे आंखे खुली रखे शौर्य पर चली गयी..
“तुम जाग गए.. ? कब ?”
“पता नहीं.. !”
शौर्य उठ कर बैठ गया..
“सुनो फटाफट तैयार हो जाओ.. मैंने एक गाइड कर लिया है… वो हमे बनारस घुमा देगा और अच्छी लोकेशन भी दिखा देगा फोटोज के लिए.. !”
“गाइड.. वो भी बनारस के लिए ?”
“यस ऑफकोर्स !”
“अरे क्या ज़रूरत थी..? वैसे तुम अँगरेज़ भी ना.. हर जग़ह की हिस्ट्री ज्योग्रॉफी जाननी है तुम महा उत्सुक लोगो को.. !”
“एक्सक्यूज़ मी.. आई एम् नॉट एन अँगरेज़..
“सो..
“आई एम् पक्की वाली हिंदुस्तानी.. समझे ?”
“हाँ वैसे हिंदी अच्छी बोलती हो.. इस हिसाब से कह सकते हैं.. !”..
कली ने उसे घूर कर देखा, उसी वक्त वापस तितली उसके चेहरे के सामने मंडराने लगी…
उसने अपने हाथ से तितली हटाने की कोशिश की.. और शौर्य ने उसे टोक दिया..
“और रखो अपना नाम कली… तितली कली पर ही तो मंडराएगी.. !”
“मैंने खुद ने थोड़ी ना रखा है, ये नाम तो मेरी मौसी माँ ने.. ।”
अचानक बोलते बोलते कली थम कर रह गयी.. कैसे अचानक उसके मुहं से मौसी माँ निकला.. कौन है मौसी माँ ?
उसके दिमाग के किस हिस्से में ये नाम कैद था ?
और आज अचानक बाहर कैसे चला आया ? एक धीमी सी खुशबु उसे याद आने लगी.. खिड़की पर लहराता नेट का पर्दा, उसके पार बैठी वो जिनके बाल हवा में लहरा कर उनके चेहरे को ढंके दे रहे थे, और उनकी गोद में लेटी वो खुद..
उसके बालों पर फिरता वो मुलायम सा हाथ, जिसकी हथेलियों को थामे वो अक्सर देर तक सूंघा करती थी.. उस खुशबु को वो कभी नहीं भूल सकती…
पर कौन हैं वो… क्या सिर्फ उसका सपना ? या उसका वो सपना वाकई कोई हकीकत है ?
अगर वो हकीकत है तो उसके डैडा, दर्श अंकल और सरु उससे सब छिपाते क्यों हैं ?
वो अचानक उदास हो गयी..
“अरे.. ओके बाबा.. नाम बुरा है इसका मतलब ये नहीं कि तुम इतना उदास हो जाओ.. वैसे जेरी, बेरी, मिया टिया से बेहतर है कली..
लेकिन मैंने अपनी लाइफ में ऐसा नाम कभी सुना नहीं.. !”
उसी वक्त उनके खुले दरवाज़े पर दस्तक देकर एक लड़का खड़ा हो गया..
” मैडम जी , बंदा हाज़िर है… हम है लल्लन, और ये है हमारा बनारस ! आप ही ने रिसेप्शन पे फोन किया था ना की गाइड चाहिए.. बस हम उहे गाइड है.. आपके लाने हमे भेजा है, हमाये मालिक श्री शिवशम्भु बाजपेयी जी ने.. !”
“बड़े आदर के साथ बॉस का नाम लिया जा रहा है, गुड !”
कली ने मुस्कुराने की कोशिश की और वो लड़का फिर शुरू हो गया..
“आदर काहे नहीं देंगे गुरु ! आखिर पंडित जी हमाये पिता है, बाबूजी !
ये जो होटल देख रहे हैं ना, उन्ही का है.. हमारा पढाई लिखाई में मन नहीं लगता, तो उन्होने हमे ये गाइड का काम थमा दिया है.. अब का कहें, हमरा टेलेंट कोनो को समझ ही नहीं आता.. !”
“कोई बात नहीं मिस्टर टेलेंटेड.. फ़िलहाल हमे दस मिनट और लगेंगे, हम लोग रेडी होकर नीचे ही आते है, तुम वहीँ इंतज़ार करो !”
“जइसन आज्ञा गुरुदेव… लेकिन ज़रा जल्दी कीजियेगा.. वो क्या है ना ट्रेफिक बढ़ गया ना तो बनारस का मजा
दुगुना बढ़ जायेगा.. ना ना घट जायेगा.. !”
शौर्य को ये बातूनी लड़का ज़रा भी पसंद नहीं आ रहा था, लेकिन अब कली के साथ माथा फोड़ने का कोई मतलब नहीं सोच कर वो बाथरूम में घुस गया..।
लगभग आधे घंटे बाद शौर्य की कार में उसके और कली के साथ वो लड़का भी मौजूद था..
पल भर को शौर्य भी सोच में पड़ गया कि आखिर वो इस झल्ली के साथ क्यों बनारस घूम रहा.. लेकिन अपने सर को झटक कर वो वापस गाड़ी चलाने लगा..
“हाँ तो मैडम, वाराणसी शिव की नगरी है। इसी से मंदिर भी भतेरे है..। आप बताये आपको पहले कहाँ लिए चले.. ?
ऐसा करते हैं काशी विश्वनाथ मंदिर से ही शुरुवात करते हैं.. आप लोगो को फोटो भी लेना है ना.. वही से शुरू करते हैं.. महादेव की कृपा से आप दोनों के जीवन की बवंडर भौकाली शुरुआत हो जाएगी..।”
लल्लन को लगा की कली और शौर्य अपने प्रि ब्राइडल शूट के लिए वहाँ आये हैं..
और वो उन लोगों को साथ ले मंदिर की तरफ निकल गया…।
शौर्य की गाड़ी के ठीक पीछे एक और गाड़ी चल रही थी… लेकिन उस पर शौर्य या कली में से किसी का ध्यान नहीं गया था.. शौर्य की गाड़ी के ठीक पीछे एक और गाड़ी चल रही थी… लेकिन उस पर शौर्य या कली में से किसी का ध्यान नहीं गया था..
क्रमशः
aparna…

लगता है वही होटल वाला लड़का है पीछे वाली गाड़ी में, कोई bodyguard होगा शौर्य का, लगाया होगा किसी ने ध्यान रखने के लिए
और ये लल्लन को देख के तो मजा आ गया😂😂बेचारों का pre bridal करवा रहा
अब ये गाड़ी लेकर कौन पीछे लग गया, होटल के कमरे के सम्बन्ध में पढ़कर लग रहा था यह कोई उटपटांग सी जगह है, हालांकि वह सीबीआई वाला निकला, उसने बचा लिया, शौर्य अब ऊबने लगा है लेकिन कली को नया जीवन मिल गया है, वह बांसुरी का नाम याद नहीं कर पा रही है, देखना है, दोनों कैसे राजा बांसुरी तक पहुंचते हैं। बहुत बढ़िया भाग दीदी…🙏🙏💐
बहुत बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️💐💐💐💐💐