जीवनसाथी -3 भाग -34

जीवनसाथी -3 भाग -34

जीवनसाथी by aparna

उस लड़के के पास ज्यादा बातें करने का वक्त नहीं था। ढाबे पर बहुत सारे कस्टमर उसका इंतजार कर रहे थे। और इसलिए वह अपने हाथ पोछता वहां से आगे बढ़ गया और शौर्य आश्चर्य से कली और कली शौर्य को देखने लगी कि आखिर 2 मिनट के भीतर भीतर वह बाबा जी उनकी आंखों के सामने से ही कैसे और कहां गायब हो गए..?

उन दोनों को लगा शायद वो भी हाथ मुहं धोने उतर गए होंगे..

अपनी चाय ख़त्म करने के बाद कली ने शौर्य की तरफ देखा और खड़ी हो गयी..

“सुनो.. मैं वॉशरूम से आती हूँ.. !”

कली ने शौर्य से कहा और वॉशरूम की तरफ निकल गयी….

अब तक में ढाबे में मौजूद मालिक और स्टाफ ने शौर्य को पहचान लिया था..
ढाबे का मालिक खुद वहाँ शौर्य से मिलने चला आया..

“प्रिंस शौर्य प्रताप हुकुम !”

अचानक ऐसी अनजान जग़ह पर अपने लिए हुकुम शब्द सुन कर शौर्य पल भर को चौंक गया..
उसने नजर उठा कर मालिक की तरफ देखा, मालिक विनम्रता में दुहरा होता जा रहा था….

“योर मेजेस्टी, आप यहाँ हमारे गरीबखाने में आये, हमारी खुशनसीबी है ये.. आप क्या लेना चाहेंगे ? आपके लिए क्या स्पेशल करवा दूँ ?”

शौर्य को इसी बात से सबसे ज्यादा चिढ थी..
उसे इस तरह से खुद का लोगों से घिर जाना पसंद नहीं आ रहा था…

“आपके वार्म वेलकम के लिए थैंक्स, लेकिन यहाँ ऐसा कोई सीन मत क्रिएट कीजिये प्लीज़…!”

“श्योर सर.. वैसे एक बात कह दूँ आपसे कि मैं आपके पिता का बहुत बड़ा फैन हूँ.. !”

“हम्म.. जानता हूँ.. ! लापरवाही से शौर्य ने कहा…

गंवार मैनेजर इस बात पर खिल गया..

“हुज़ूर कैसे जानते हैं आप ?”

“इस दुनिया में कोई है जो उनका फैन नहीं है..?  यहाँ तक की उनके दुश्मन भी अगर एक बार उनसे मिल ले तो वो भी उनके फैन हो जाते हैं.. !”

“हाँ हाँ सही कहा, मेरा उनसे दुबई में मिलना हुआ था !”

मैनेजर फ़िज़ूल में शेखी बघारने लगा..

“मैंने उनसे हाथ भी मिलाया था.. !”
     मैनेजर की इस बात पर शौर्य ने चौंक कर उसकी तरफ देखा..
और मैनेजर सकपका गया.. उसे लगा ऐसे कह कर वो शौर्य पर अपना प्रभाव जमा पायेगा..

“एक इंसिडेंट के बाद से डैड किसी से हाथ नहीं मिलाते, शायद आपको मालूम नहीं होगा..।
खैर.. एक काम कर सकते हैं आप ?”

“जी कहिये !”

“मेरी जेब इस वक्त खाली है, मैं आपका बिल बाद में भिजवा दूँ तो..

“अरे कैसी बात कर रहे हैं हुज़ूर, बिल की तो कोई बात ही नहीं..

मैनेजर अभी भी गोल गोल बातें बनाने में लगा था कि दूर से आती कली शौर्य को नजर आयी और शौर्य तेज़ी से मैनेजर की तरफ घूम गया..

“अब मैं निकलता हूँ… आप सामान्य बने रहिये.. मुझे ये सारा दिखावा पसंद नहीं है.. !”

“ओह्ह.. बिलकुल बिलकुल हुज़ूर.. !”

और मैनेजर ने अपने मुँह के सामने ज़िप लॉक का इशारा किया और खड़ा रह गया..
शौर्य तेज़ी से उठा और गाड़ी की तरफ बढ़ गया..
कली को भी उसने उसी तरफ आने का इशारा कर दिया…

इसी बीच मैनेजर ने काफी सारा खाने पीने का सामान शौर्य की गाड़ी में रख दिया..
शौर्य ने भी कली के सामने ज्यादा कुछ कहे बिना गाड़ी आगे बढ़ा दी..
मैनेजर और उसका स्टाफ शौर्य के सम्मान में जापानी तरीके से झुक कर खड़े रहे..

थोड़ा आगे बढ़ते ही कली शौर्य को चिढ़ाने लगी..

“लगता है तुम्हारा मालिक खूब मालदार आदमी है.. !”

“क्यों ?”

“वो मैनेजर और उसका स्टाफ तुम्हारे मालिक की गाड़ी का ही तो सम्मान कर रहे थे ना, तुम्हे क्या लगा, ये लोग तुम्हे इतना रिस्पेक्ट दे रहे हैं ?”

शौर्य को हंसी आ गयी..

“अमीरी अच्छी चीज़ है, आपके पास खर्च करने के लिए ढेर सारा पैसा होता है लेकिन जानते हो प्रिंस ज़िंदगी तो उन्ही की ज्यादा खुशनसीब होती है, जिनके पास आज़ादी होती है.. ।
अब तुम खुद को देख लो.. ।
पैसों से भले ही गरीब हो, लेकिन जब दिल करे कहीं भी घूम सकते हो, कुछ भी खा सकते हो,मन भर कर सो सकते हो..
मन भर कर रो सकते हो, खुल कर हँस सकते हो..।
तुम्हे पता है, मैंने सुना है राजमहल के लोग तो रोते भी आंसू गिन कर है और हँसते दाँत गिन कर.. !”

शौर्य को कली की फ़िज़ूल सी बात सुन कर हंसी आ गयी..

“अच्छा..?
ऐसा लगता है तुमने महल और महल वालों को बड़े करीब से देखा है !”

“हम्म… देखा तो है.. पर किसे ये ठीक से याद नहीं.. !”

शाम ढलने लगी थी… अँधेरा बढ़ रहा था..
वो लोग अब तक बनारस नहीं पहुँच पाए थे, शौर्य को भी ड्राइविंग पसंद तो थी, लेकिन इतनी ज्यादा गाड़ी चलाने की उसे आदत नहीं थी..
उसने किसी छोटे से शहर में गाड़ी एक होटल की तरफ बढ़ा दी..

“रात यही रुक जाते हैं, सुबह सुबह निकलेंगे.. !”

“हाँ, मुझे तो वैसे भी छोटे छोटे शहर ही देखने हैं, यही तो असली इण्डिया है.. !”

शौर्य ने एक नजर कली को देखा और बिना कुछ बोले उस होटल की पार्किंग में गाड़ी डाल दी..

होटल के रिसेप्शन पे पहुँच कर शौर्य ने देखा रिसेप्शन खाली था, डेस्क पर रखा साउंड सिस्टम पुराने गाने बजा रहा था..

मेरी साँसों में बसी खुशबू तेरी
ये तेरे प्यार की है जादूगरी
तेरी आवाज़ है हवाओं में
प्यार का रंग है फिजाओं…

शौर्य ने सिस्टम बंद किया और  डेस्क पर अपनी चाबी खटकायी और डेस्क के पीछे नीचे झुका मैनेजर सीधा खड़ा हो गया..
मुहं में भरा पान गुटखा संभालते हुए वो बड़ी नफासत से पूछ बैठा..

“फरमाइए का सेवा करे आप लोग की !”

“कमरा चाहिए था !”

शौर्य ने कहा..

“हाँ तो यहाँ कमरा लेने ही आते है लोग.. ! ” मैनेजर की आँखों में सुरमा डला था, बाल शुद्ध नारियल के तेल से भीग कर चपटे हुए एक पंक्ति में जमे थे..
मैनेजर गले में डाल रखे गमछे से बीच बीच में माथे पर बह आता तेल पोछ लिया करता था…

“कौन सा कमरा चाहिए.. ?”

शौर्य ने एक नजर उस होटल पर डाली, उसे होटल का नक्शा देख लग नहीं रहा था कि वहाँ तरह तरह के कमरे होंगे भी..

गांव के किसी पुराने रईस जमींदार की पुरानी बिना काम पड़ी हवेली को रंगरोगन कर होटल में तब्दील कर दिया हो, ऐसा लग रहा था….

“कौन कौन से हैं ?”  देश विदेश में घूम घूम कर हमेशा स्टार्ड होटल्स के रॉयल सुईट में ठहरे राजा साहब के बेटे ने पूछ लिया..

“डीलक्स, सूपर डीलक्स, सुपर डुपर डीलक्स, महाराजा रूम और विशेष फ़ास्ट नाइट रूम भी मौजूद है.. !”

आखिरी कमरे का नाम बोलता हुआ मैनेजर आँखों ही आँखों में शैतानी लिए शौर्य को घूरने लगा..
कली इधर उधर घूमती हुई ज़रा दूसरी तरफ चली गयी थी..
होटल के रिसेप्शन के एक तरफ लम्बा चौड़ा कांच लगा था.. जहाँ से अंदरूनी तरफ बना बगीचा दिख रहा था, जिसमे ढेर सारे रंगबिरंगे फूल खिले हुए थे…

“फास्ट नाइट या फर्स्ट नाइट ?” , शौर्य ने मैनेजर को सुधरते हुए पूछ लिया..

“अरे वही… बताइये.. क्या चाहिए ? एक से बढ़ कर एक कमरा मिलेगा आपको, और आपकी इश्पेशल डिमांड पर कमरा सजवा भी देंगे.. !”

मैनेजर ने धीरे से एक आंख दबा दी..

उसी समय कली वहाँ पहुँच गयी.. बस उसे ये सुनाई दिया कि मैनेजर कमरा सजवाने की बात बोल रहा है..

“अरे वाह… ये बढ़िया है.. अच्छा मैनेजर साहब आपके बगीचे में तो बहुत फूल हैं.. क्या उन्हें आप व्यक्तिगत उपयोग के लिए रखते हैं.. मतलब डेकोरेशन के लिए ?”

“आप कहेंगी तो उन्ही से डेकोरेशन करवा देंगे.. !” मैनेजर होंठो ही होंठो में मुस्कुराया..

“ओह्ह तो फिर ऐसा कीजियेगा क्रिसेंथमम, उनसे सजवा दीजियेगा.. वो जो हलके गुलाबी से और पर्पल फ्लावर्स है ना.. गुच्छे वाले उनसे.. !”

“गुलदाउदी पसंद है मैडम को ! पसंद उम्दा है! आप कहे मैडम तो उसी का इत्र भी डलवा देंगे !”  मैनेजर ने प्रशंसा भरी नजर से शौर्य को देखा….

“इत्र बहुत तेज़ महकता है.. आप कोई हल्का सा रूम फ्रेशनर ही डलवाइयेगा !”

“यहाँ भी पसंद बता दीजिये मैडम तो आसानी हो जाएगी.. !”

“कोई भी सिट्रस फ्लेवर !”

“ओहो.. अब हमको आपकी पसंद समझ आ गयी.. अब देखिये आपका कमरा क्या ज़बरदस्त तैयार करवाते हैं हम.. आप को कमरे में जाते ही आंनद मिल जायेगा.. !”

“आनंद से ज्यादा इस वक्त आराम की ज़रूरत है.. ये बहुत थक गए हैं, ड्राइव करते हुए.. आप ये भी ध्यान रखियेगा की बेड का मेट्रेस आरामदायक हो !”

“अरे बेड तो हमारा ऐसा है मैडम कि आप लोग यहाँ से जाने के बाद वापस लौट लौट के आएंगे।
पलंग ऐसा मजबूत है कि उस पर खड़े होकर बास्केट बॉल खेलेंगे तब भी नहीं टूटेगा.. !”

“अच्छा.. इतने मज़बूत पलंग भी बनते हैं यहाँ ? वैसे अभी ये सर इतने थक गए है कि बास्केटबॉल कबड्डी कुछ खेलने का इनका मूड नहीं लग रहा.. पहले तो ये आराम से सोयेंगे ही.. ! कबड्डी बाद में !”

कली मुस्कुरा कर अपनी बेवकूफी भरी बातों में लगी थी..

“जी मैडम.. आप कहेंगी तो दूध भी भिजवा देंगे केसर वाला  !”

मैनेजर ने अर्थपूर्ण नज़रों से शौर्य को देखा और वापस एक आंख दबा दी…
शौर्य बिलकुल निर्विकार सा खड़ा कली की झल्ली और मैनेजर की द्विअर्थी बातों को चुपचाप सुन रहा था.. उसे मालूम था कली को मैनेजर की कोई बात समझ नहीं आ रही है..
और मैनेजर उन दोनों को कपल समझ बैठा है..

“अब अगर आप दोनों की जी 20 मीटिंग हो गयी है तो कमरे की चाबी दे दीजिये.. !”

मैनेजर ने हामी भरी और एक चाबी शौर्य की तरफ बढ़ा दी..
चाबी थमा कर उसने अपना रजिस्टर निकाल लिया..

“नाम बता दें सर ? और आपका परिचय पत्र ?”

शौर्य के पास उसका परिचय पत्र था लेकिन वो निकालना नहीं चाहता था…..
कली अपना कार्ड निकाल कर आगे बढ़ा रही थी कि उसके हाथ से शौर्य ने कार्ड लेकर जेब में डाल लिया..

“कार्ड देना ज़रूरी है क्या ?”

शौर्य के सवाल पर मैनेजर होंठो ही होंठो में मुस्कुरा उठा..

“नहीं नहीं.. बिलकुल ज़रूरी नहीं है.. बस नाम तो बता दीजिये.. !”

शौर्य ने मैनेजर को देखा और चाबी उठा कर नाम बोलते हुए कली को लेकर आगे बढ़ गया..

“अमिताभ बच्चन !”

“हैं.. क्या ?”

“क्यों.. ? अमिताभ बच्चन दुनिया में एक ही हैं क्या ? हाँ वैसे है तो एक ही.. !”

“और मैडम का नाम रेखा है या जया ?”

कली को कुछ समझ नहीं आ रहा था, उसने यूँ ही कह दिया.. “रेखा ही लिख लीजिये.. !”

और शौर्य के साथ आगे बढ़ गयी…

मैनेजर वापस अपने गाने को बजा कर सुनने लगा….

धडकनों में तेरे गीत हैं मिले हुए
क्या कहूँ की शर्म से हैं लब सिले हुए
देखा एक ख्वाब तो…

देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए
दूर तक निगाह में है गुल खिले हुए..

मैनेजर गाने में मग्न था कि उसकी डेस्क पर फिर किसी ने दस्तक दी..

“फरमाइए… क्या चाहिए ?”

“एक रूम मिलेगा ?”

लम्बा चौड़ा सा लड़का मैनेजर के सामने खड़ा था…
घुंघराले कंधे तक लम्बे बाल झूल रहे थे, माथे पर कुछ लटे चली आयी थी.. एक कान में बाली थी और गले में कंठी पड़ी थी..

ये लड़का वही था, जिसकी टक्कर शौर्य से दिल्ली की लोकल बस में भी हो चुकी थी….

“जी बिलकुल मिलेगा.. अकेले हैं ? या.. ?”

“फ़िलहाल अकेले ही है, ईश्वर चाहेंगे तो जल्दी ही.. !”

“समझ गए.. !”..

मैनेजर ने एक कमरे की चाबी उसकी तरफ बढ़ा दी..

“नाम क्या लिखे आपका ?”

“कुछ भी लिख लो.. नाम में क्या रखा है ?”

“नाम में आपका परिचय छिपा रखा है हुज़ूर !”..

उसने कहा और चाबी ऊँगली में घुमाता वो लड़का पलट कर मैनेजर की आँखों में झांक कर अपना नाम बोल गया..

“गब्बर.. लिख लो गब्बर सिंह.. !”

मैनेजर उसे जाते देखता रहा फिर मुहं बना कर खुद में ही बड़बड़ाने लगा..

“आज तो लगता है सारे बॉलीवुड वाले हमारे ही कॉटेज में रुकने चले आये हैं.. पहले अमिताभ बच्चन अब ये गब्बर सिंह..
बढ़िया है !!”

उस लड़के के जाते ही एक शानदार स्कॉर्पियो आकर रुकी जिसमे से चार वर्दीधारी जवान उतर कर होटल चले आये..

” सुनो मैनेजर.. यहाँ आसपास किसी राजकुमार को देखा है.. राजा साहब के बेटे को.. ?”
मैनेजर ने ना में गर्दन हिला दी..

उनमे से एक गार्ड ने उसका रजिस्टर खींच जार पिछले चार दिन से आये लोगों के नाम देखने शुरू कर दिए.. लेकिन उसे शौर्य प्रताप का नाम नजर नहीं आया..

बीच में कहीं एक बार शौर्य का फ़ोन उन लोगो ने ट्रेस कर लिया था और उसी की लोकेशन ढूंढते वो लोग भी बनारस के रस्ते चल पड़े थे..
रस्ते में पड़ने वाले होटल्स की तलाशी लेते वो लोग बढ़ रहे थे, और इसीलिए इस होटल में भी छानबीन करने चले आये…

लेकिन रजिस्टर में उन्हें कहीं भी शौर्यप्रताप का नाम नजर नहीं आया और वो लोग आगे बढ़ गए..

क्रमशः

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Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
1 year ago

शौर्य प्रताप को ढूंढते ढूंढते उनके लोग पहुंच तो गए हैं ना जानें उन्हें ढूंढ़ पाए या नहीं लेकिन यह कौन सी मुसीबत गले आ लगी है, बस वाला लड़का, यानि कहानी में है तड़का, कली के झल्ली मिजाज़ और शौर्य की खामोशी में रेखा और अमित जी की जोड़ी जमी है, उत्साही मैनेजर की क्या कहें l, अच्छा भाग लगा दी..💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

हाय मेरी झल्ली सी कली 😘😘 कभी कभी तो इतनी समझदारी की बातें करती है जैसे अभी पीछे जिस जगह इन्होने खाना ख्याल वहाँ से लौटते समय जो जो बात कली ने की मुझे बहुत अच्छी लगी और अब देखो समझ ही नहीं पायी होटल का मैनेजर क्या कह रहा 😃पर मज़ा बहुत आया कली की बातें सुनने में।
एक गब्बर, दूसरा अमिताभ बच्चन सही कह रहा होटल वाला सारे फ़िल्मी हीरो आज उसके होटल में ही आए है।पर ये बंदा है कौन?? 🤔🤔🤔।
बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏼।