जीवनसाथी -3 भाग -32

शौर्य की हालत देख कर कली को इतना तो समझ में आ गया था कि शौर्य का कोई काला इतिहास हैं, जिसकी वजह से वो ऐसे अचानक गुमसुम सा हो गया, लेकिन वो क्या हैं, ये उसे समझ नहीं आ रहा था..
अगली सुबह कली जब उठ कर बाहर आयी, तब शौर्य सो रहा था..
उसके मासूम चेहरे पर पिछली रात के भय के निशान मौजूद नहीं थे, ये देख कली को भी राहत मिल गयी..
उसने अपना मोबाइल लिया और सारिका को फ़ोन लगाने चली गयी..
सारिका ने उसे बताया कि उसने काका को अस्पताल में भर्ती करवा दिया हैं। लेकिन अब उनके ठीक होने की उम्मीद कम ही हैं..।
वो दो दिन में वापस आ जाएगी..।
कली ने सारिका को शौर्य के बारे में भी बता दिया, लेकिन कली के साथ एक अनजान लड़का रह रहा हैं ये सुन कर सारिका घबरा गयी..
“कली अगर तुम्हारे डैड को पता चल गया तो, वो मुझे और तुम्हे दोनों को सजा देंगे, दोनों से नाराज हो जायेंगे !”
“लेकिन उन्हें बताएगा कौन ? आप ?”
“नहीं.. मैं नहीं बताउंगी, लेकिन ये छिपाने वाली बात तो हैं नहीं !”
“मैं भी छिपाना नहीं चाहती थी सरु, इसलिए आपको बता दिया, लेकिन डैडा को नहीं बता सकती, वो समझेंगे नहीं और मुझे वापस बुला लेंगे.. अभी तक तो मैं इण्डिया घूम भी नहीं पायी हूँ… बस मेरे ये दो काम पूरे हो जाये, इसके बाद मैं डैडा को सब बता दूंगी !”
“कौन से दो काम ?”
“सरु… इण्डिया आने के लिए मैंने आप सब से भी झूठ बोला था.. मैं यहाँ किसी प्रोजेक्ट या असाइनमेंट के लिए नहीं आयी !”
“फिर ?”
सरु की आंखे फटी रह गयी थी….
उसे नहीं लगा था कि ये छोटी सी बच्ची इतना बड़ा तूफान ला देगी….
“सरु…. इण्डिया आने के बस दो कारण हैं, एक राजाधिराज अजातशत्रु सिंह बुंदेला से मिलना, उन्हें देखना, उनसे बात करना और दूसरा..
“दूसरा क्या कली ?”
सारिका का दिल धड़कने लगा था… उसे लगा कहीं कली बांसुरी के लिए ना पूछने लगे..
बचपन में बहुत समय तक कली बांसुरी के लिए पूछा करती थी… वो इतनी छोटी होने के बावजूद बांसुरी का दुलार उसका स्पर्श बहुत समय तक नहीं भूली थी….
सरु के डर पर हावी होती कली की आवाज़ फ़ोन पर गूंजने लगी..
“दूसरा मुझे बनारस देखना हैं.. द स्पिरिचुअल डिवोशनल वाराणसी.. लार्ड शिव की नगरी. !”
ये सुनते ही सरु की साँस में साँस आ गयी..
“लेकिन बनारस क्यों ?”
“बनारस के बारे में लंदन में रह कर बहुत पढ़ा हैं, बहुत सुना हैं, और बस इसीलिए इस शहर को देखने की तमन्ना थी.. बस सरु ये दो काम पूरे हो जाये फिर मैं ज़िंदगी भर किसी बात के लिए डैडा को परेशान नहीं करुँगी.. प्रॉमिस ! आप काका का ध्यान रखना और जल्दी वापस आना.. !”
“ठीक हैं मेरा बच्चा.. तुम भी ध्यान रखना.. वैसे बनारस अभी तो नहीं जाना हैं ना ?”
“जाना हैं ना ! आज ही निकलना हैं.. आपको बताया था ना मेरे सर जिन्होंने हमारे रहने के लिए फ्लैट का इंतज़ाम किया हैं, उन्हें कल रात एक मॉडल की तस्वीरें भेजी थी। वो उन तस्वीरो को देख बहुत खुश हुए हैं.. और अब वो चाहते हैं कि मैं कुछ नेचुरल तस्वीरें भी उन्हें भेजूं… मैंने उनसे पूछा की क्या मैं बनारस के गंगा घाट की तस्वीरें ले सकती हूँ.. उन्होंने कहा,, बिलकुल ले सकती हो.. तो आज मैं बनारस जाउंगी.. !”
“अरे लेकिन अकेले कैसे जाओगी कली ? इण्डिया इतना भी सेफ नहीं हैं बच्चे !”
“आप टेंशन ना लो सरु.. मेरे साथ ये बेचारा सा लड़का हैं.. इसके पास भी अभी पैसे रुपये नहीं हैं .. शायद नौकरी भी नहीं हैं, तभी तो हैरान परेशान घूम रहा हैं.. और सरु आपको पता हैं उसके पास गाड़ी भी हैं.. तो सोच रही हूँ दो दिन के लिए उसे ही हायर कर लुंगी.. उसके साथ मैं जा सकती हूँ.. उसके साथ मुझे डर नहीं लगता.. !”
“अपना ध्यान रखना कली और जब भी निकलो मुझे वीडियो कॉल कर के उस लड़के से बात करवा देना.. !”
कली ने हामी भर दी और कॉफी बनाने लगी.. उसने शौर्य को देख कर कॉफी बनानी सीख ली थी..
इधर सारिका ने काका को जिस अस्पताल में भर्ती करवाया था वो राजा साहेब का बनवाया चेरिटेबल हॉस्पिटल ही था..
इस वक्त भी सारिका उसी अस्पताल में मौजूद थी..
वो देहरादून में थी, जहाँ राजा साहब की पुरानी हवेली मौजूद थी और दून के उस इलाके में राजा जी का नाम चलता था..
काका की हालत में सुधार तो नहीं था लेकिन बाक़ी अस्पतालों की तर्ज़ पर डॉक्टर यहाँ हाथ खड़े नहीं करते थे.. कि अब आपके मरीज़ में कोई सुधार नहीं हैं वापस ले जाओ..
यहाँ के डॉक्टर जब तक इनके बस में होता जी जान से मरीज़ को बचाने में जुटे रहते थे..
सारिका कली के बारे में सोचते हुए अस्पताल में टहल रही थी, कि उसकी नज़र सामने ही बने बच्चो के वार्ड में चली गयी..
बच्चों के लिए बनाया गया वार्ड बहुत खूबसूरती से सजाया गया था। वार्ड में दीवारों पर तरह-तरह की चित्रकारी की गई थी। खिड़कियों को झालर और रंगीन पर्दों से इतनी सुंदरता से सजाया गया था, यूं लग रहा था छोटे बच्चों का कोई प्ले स्कूल है।
उसे वार्ड की खूबसूरती देखने सारिका वहां अंदर दाखिल हो गई। वार्ड में बीचों बीच बनी एक दीवार पर ऊंची से आदमकद तस्वीर लगी थी…
तस्वीर बेहद खूबसूरत थी और चेहरा राजा साहब से हूबहू मिल रहा था..
बहुत ध्यान से देखने पर ही अंतर किया जा सकता था..
बाकी इस तस्वीर में माथे पर एक किनारे किसी पुराने घाव का निशान सा था..
सारिका बड़े ध्यान से उस तस्वीर को देख रही थी कि पास खड़ी नर्स ने उस का परिचय दे दिया..
“ये लिटिल मास्टर हैं.. हम सब के दुलारे प्रिंस.. राजकुमार शौर्य प्रताप सिंह बुंदेला, राजा साहब के इकलौते लाड़ले.. !”
सारिका मुस्कुरा उठी..
“वो तो मैं इन्हे देख कर ही समझ गयी थी.. ! ये वार्ड भी बहुत सुंदर बनाया गया हैं !”
सारिका के मुहं से तारीफ सुन नर्स खुश हो गयी…
सारिका कली के बारे में सोचते हुए वहाँ से बाहर निकल गयी…
****
शौर्य के गार्ड्स को जब किसी भी बड़े होटल में शौर्य नहीं मिला तब उन लोगों ने शौर्य कि तथाकथित दोस्त मीरा के ठिकाने की राह पकड़ी…
वो लोग ढूंढते खोजते मीरा तक पहुँच गए…
लेकिन उन लोगो की पूछताछ से मीरा परेशान हो गयी.. उसने खुद शौर्य से मिलने पर ये पूछा ही नहीं था कि वो फ़िलहाल कहाँ रह रहा हैं..
जब उसके गार्ड्स को उसने उसे ढूंढते पाया तब उसे वास्त्विकता समझ में आयी..
“मैंने उसे एक लड़की के साथ, यहीं पास के कैफे में देखा था.. हो सकता हैं यही कहीं आसपास हो ? लेकिन तुम लोगो को बताये बिना प्रिंस ऐसे कैसे गायब हो सकता हैं ?”
“लिटल मास्टर का कोई पता नहीं चल रहा हैं मैडम.. उनका फ़ोन भी नहीं लग रहा.. !”
“ओह्ह लेकिन इतना परेशान क्यों हो रहे हो.. वो कोई बच्चा तो हैं नहीं.. जो रास्ता भटक जायेगा.. ! आ जायेगा वापस.. जस्ट चिल !”
“वो कोई साधारण लड़के होते तो शायद चिंता नहीं होती, लेकिन वो साहब के बेटे हैं… कहीं कोई उन्हें नुकसान ना पहुंचा दे.. अब अगर आज रात तक उनका पता नहीं चला तो हम सब को प्रेम सर को इन्फॉर्म करना पड़ जायेगा… !”
“फ़ोन ट्रेस करवा लो ना ?”
“इतना आसान नहीं हैं मैडम ! अगर हम लोग पुलिस के पास जाते हैं तो एक नया बवाल खड़ा हो जायेगा.. खैर.. आप को अगर कुछ भी पता चलता हैं तो बताइयेगा.. वैसे किस कैफे के बारे में बोल रही थी आप ?”
मीरा ने उस कैफे का नाम बता दिया जहाँ उसे शौर्य और कली मिले थे…
वो चारो गार्ड्स वहाँ से उस कैफे के लिए निकल गए.. जाने क्या सोच कर मीरा भी उनके पीछे हो ली..
वो सारे लोग साथ साथ कैफे पहुंचे और पूछताछ करने लगे..
कली और शौर्य भी पहली ही बार उस कैफे में गए थे, इसलिए वहाँ का स्टाफ भी ज्यादा कुछ नहीं बता पाया….
लेकिन उसमे से एक लड़का उन गार्ड्स के पास आ गया..
“वॉल्वो गाडी थी क्या इन लोगो के पास ?” उसने सवाल किया और गार्ड को याद आया, इस वक्त उनके लिटिल मास्टर वॉल्वो में ही तफरीह कर रहे थे…
“हाँ वॉल्वो ही थी.. !”
“वो लोग तो यहाँ पैदल ही आये थे, लेकिन उन दोनों को सुबह मैंने वॉल्वो गाड़ी में देखा था.. इसलिए अंदाज़ लगा रहा हूँ.. !”
“पैदल आये थे.. मतलब कहीं आसपास से ही आये होंगे.. ?”
एक गार्ड ने सवाल किया..
उस लड़के ने हामी भर दी और एक तरफ को ऊँगली दिखाने लगा..
“उस तरफ दो चार बड़े अपार्टमेंटस हैं, उधर देख लीजिये !”
उस लड़के कि बात पर हामी भर वो लोग उस तरफ बढ़ गए..
भौचक्की सी मीरा भी उनके पीछे बढ़ गयी…
****
सारिका से फ़ोन पर बात कर के रखने के बाद कॉफी बना कर कली बाहर आयी, तब तक में शौर्य भी जाग चुका था..
वो बड़ी बेतरतीबी से अपनी चादर को समेटने की कोशिश कर रहा था…
उसे देख कली मुस्कुरा उठी..
उसने उसकी तरफ कॉफी का प्याला बढ़ा दिया…
शौर्य कॉफी पकड़ कर बैठ गया..
“नींद ठीक से आयी.. ?”
“हम्म.. !”
“सुनो… तुम्हारे लिए एक काम मिला हैं मुझे !”
“क्या ?”
“तुम ड्राइवर हो ना.. तो बस ड्राइविंग का काम हैं.. !”
“मतलब ?”
“मतलब मुझे कुछ अच्छी तस्वीरें खींचनी हैं, जिसके लिए मुझे बनारस जाना हैं.. तुम साथ चलो.. मैं अच्छे पैसे दूंगी तुम्हे !”
“कितने पैसे दोगी ?”
“एक दिन का एक हज़ार, रहना खाना सब फ्री !”
“तुम्हे पता भी हैं यहाँ दिल्ली से बनारस जाने में कितना वक्त लागेगा.. ?”
“ऊँहुँ ! नहीं पता !”
“कम से कम बारह घंटे !”
.”बस.. ! इसमें तो मजा आएगा.. देखो मौसम भी सुहावना हैं.. अगर हम लोग अभी निकल जाये तो रात होने के पहले पहले पहुंच जायेंगे.. बड़ा मजा आएगा.. मुझे वहां के मंदिर, गलियां घाट सब कैप्चर करना हैं.. !”
शौर्य कुछ पलों के लिए सोचता रहा फिर उसने कली की तरफ देखा..
“फ्यूल का भी पैसा तुम्हे देना होगा.. !”
“हाँ वो तो मैं ही दूंगी.. ! उसकी चिंता मत करो.. चलो फटाफट तैयार हो जाओ.. आधे घंटे में हम यहाँ से निकल जायेंगे.. !”
“एक दिन का तीन हजार लूंगा। “
कली ने घूर कर शौर्य को देखा, लेकिन वो बेचारी ठेठ हिन्दुस्तानी औरतों की तरह बार्गनिंग नहीं जानती थी.. आखिर उसने हामी भर दी..
अपनी कॉफी ख़त्म कर कली तैयार होने चली गयी..
आधे घंटे बाद वो दोनों ही शौर्य की गाडी में बनारस के रास्ते पर थे…
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मीरा उन गार्ड्स के साथ एक से दूसरे अपार्टमेंट में भटक रही थी…
अब ये उस कॉलोनी का आखिरी अपार्टमेंट था..
वहाँ पहुंच कर उनमे से एक गार्ड बोल पड़ा..
“यहाँ तो राजा विराट सा का भी एक फ्लैट हैं !”
“हाँ… हो सकता हैं लिटिल मास्टर उसी फ्लैट में हों ?”
वो लोग बाहर बैठे गार्ड के पास पहुँच गए..
उन्होंने शौर्य की तस्वीर उसे दिखा कर पूछा और गार्ड ने शौर्य को पहचान लिया..
“हाँ ये तो कल रात यही रुके थे.. !”
“किस फ्लैट में.. नंबर बता सकते हों ?”
“जी अभी बताता हूँ !”
उस गार्ड ने अपना रजिस्टर खोल कर उन लोगों को कली के फ्लैट का पता बता दिया…
वो लोग कली के फ्लैट की तरफ बढ़ गए….
लेकिन वो लोग नहीं जानते थे की यहाँ भी उनके लिटिल मास्टर उन्हें नहीं मिलने वाले हैं..
वो तो आधा घंटा पहले ही बनारस की राहों को नापने निकल चुके हैं…
क्रमशः

सरू उसे देख पहचान जायेगी, धीरे धीरे कहानी इस तरह बढ़ रही है जिसमें कली शौर्य के साथ यादें संजो रही है और शौर्य भी रियाल खुशी महसूस कर रहा है, यह देखकर अच्छा लग रहा है, गार्ड्स उन्हें ढूंढ लेंगे तब तक यह वक्त उनका है…… बेहतरीन पार्ट दीदी..💐👍🙏
इस सुहाने सफर के हम भी गवाह बनेगे, उनके साथ साथ हम भी चलेंगे 😊🙏🏼।
बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏼😊।