
जीवनसाथी -3 /भाग -3
सुबह सुबह का वक्त था, सारिका रसोई में नाश्ता बना रहीं थी..
अब तक उन लोगों को इण्डिया से आये हुए खासा वक्त बीत चुका था..
लगभग सत्रह साल से वो लोग यहीं थे…
काका काफी बुज़ुर्ग हो चुके थे, इसलिए वो वापस लौट गए थे..
वासुकी और दर्श ने अपने जोड़ रखें पैसों से यहाँ भी अपना कारोबार जमा लिया था..
कलि भी अब बड़ी हो चुकी थी.. कॉलेज जाने लगी थी..
आज भी उसका तैयार होने का वक्त हो गया था, लेकिन अब तक वो नीचे नहीं आई थी..।
नाश्ता बनाते हुए वहीं रसोई में लगे अलार्म को सारिका ने एक बार बजा दिया..
अलार्म सीधा कलि के बिस्तर की बगल वाली दिवार पर चिंघाड़ उठा..
और कलि ने करवट बदल कर तकिया अपने कान में रख लिया..
कुछ देर बाद भी जब वो नीचे नहीं आई तो सारिका ऊपर चली आयी..।
कलि मुहँ फुलाए बिस्तर पर पड़ी थी..
“क्या हुआ शोना… आज कॉलेज नहीं जाना क्या ?”
कलि ने मुहँ दूसरी तरफ घूमा लिया..
“बच्चे.. हुआ क्या.. ? मुझसे क्यूँ रूठा हुआ है, मेरा शोना बेबी ?”
“मुझे किसी से बात नहीं करनी.. !”
“पर क्यूँ ?”
“आप तो इतना इनोसेंट बन रहीं है सरु जैसे आपको कुछ पता ही नहीं… जाइये और उन मिस्टर खड़ूस से कारण पूछ लीजिये..।”
“बेटा अपने पापा के लिए ऐसे कैसे बोल रहीं हो ?”
“तो…. क्या करूँ ?”
कलि बिस्तर पर बैठ गयी..
“मेरी पूरी क्लास झील पर घूमने गयी थी, लेकिन मेरे मिस्टर डैडा को उनके साथ मेरा जाना सेफ नहीं लगा.. ये क्या बात हुई भला ?
क्या मैं माफिया, गुंडों मवालियों के साथ पढ़ती हूँ.. अरे सारे रईसों के बच्चे ही है उस कॉलेज में.. पर नहीं !
डैडा को लगता है कलि अब भी छोटी सी बच्ची है.. ऊँगली पकड़ कर नहीं चलेगी तो खो जायेगी..
साथ में ना रहो तो कहीं थेम्स में ना कूद जायें..
उफ़…. इतना ज्यादा रोकटोक कौन करता है भला.. ? वो भी आज के ज़माने में !”..
“मैं करता हूँ… और ऐसा ही हूँ मैं !”
दरवाज़े पर खड़े वासुकी की आवाज़ कलि के कान में पड़ी और उसने अपना मुँह घूमा लिया..
“जाइये आपसे बात नहीं करनी !”
सारिका ने वासुकी की तरफ देखा और मुस्कुरा कर खड़ी हो गयी..
“अब आप इसे मना कर नीचे लाइए, मैं तो चली नाश्ता सर्व करने !”
कलि खिड़की पर खड़ी गुस्से में बड़बड़ाती रहीं और वासुकी सब सुनता रहा..
जैसे ही वो शांत हुई वासुकी ने बस एक शब्द कहा…
“कलि.. !”
उसके मुहँ से अपना नाम सुन वो पिघल गयी.. मुँह घूमा कर उसने अपने डैडा को देखा और वापस उसके पास आकर उसके सीने से लग गयी..
“आप बहुत ख़राब हैं डैडा… आप जानते है कलि आपसे कितना प्यार करती है इसी बात का आप फ़ायदा उठा लेते हैं.. कलि रियली हेट्स यू.. !”
“मैंने तो कुछ कहा भी नहीं.. !”
“यही तो.. बिना कुछ कहें जो अपनी मासूम सी शक्ल मेरे सामने लें आते हैं.. आप बहुत गंदे हैं.. !”
“ओके.. सुनो.. चार दिन बाद मेरी छुट्टी है.. उस दिन हम सब उसी झील पर चलेंगे जहाँ तुम्हें जाने नहीं दिया था.. खुश.. !”
कलि ने गर्दन हाँ में हिला दी..
और अपने डैडा के सीने से जा लगी..
उसके सर पर हाथ फेर कर वासुकी ने सारिका को देखा और हल्के से मुस्कुरा दिया..
“मनाना आना चाहिए, बच्चे चुटकी में मान जाते हैं.. !”
इतना कह कर वो बाहर निकल गया..
सारिका को वासुकी के अतिआत्मविश्वास पर हंसी आ गयी…
सारिका ने कलि की तरफ देखा..
“और बोलों लाड़ो रानी… अब खुश ?”
“खाक खुश ! अरे मेरा भी तो मन होता है की दोस्तों के साथ घूमूं फिरूं.. मेरे सारे दोस्त सोलह की उम्र से पब जा रहें, ड्रिंक कर रहें, सबके चार चार अफेयर्स और आठ आठ ब्रेकअप्स भी हो गए और एक मैं हूँ आज तक झल्ली की झल्ली बैठी हूँ.. ये ज़िंदगी भी कोई ज़िंदगी है.. ?
लगता ही नहीं की लंदन में रहती हूँ..।
मुझसे बेहतर ज़िंदगी तो इण्डिया के गाँव खेड़ो की लड़कियों की रहती होगी..।
ये क्या है सरु… ?
मैं आप लोगों के साथ उस झील को देखने नहीं जाउंगी.. बिल्कुल नहीं…।
आप सब बुज़ुर्गो की संगत में मुझे भी बुज़ुर्गो वाली फीलिंग आने लगी है… ।”
“तुम्हारे डैडा तुम्हें बुज़ुर्ग लगते हैं ? बेबी अभी वो जिस उम्र के है ना, आजकल के लड़के उस उम्र में शादी करते हैं..।
उनका उनके ऑफ़िस में जो जलवा है वो जानती हो ना…। उनकी सेक्रेटरी वेरोनिका पागल है उनके पीछे.. !और तुम उन्हें बुज़ुर्ग कह रहीं.. !”
“माफ़ कीजिये सरु मैडम मैं तो भूल ही गयी थी कि आपके देवता की बुराई कर दी मैंने ?”
“वो बात नहीं है गोला शोना ! लेकिन दुनिया बहुत ख़राब है… इसीलिए तुम्हारे डैडा तुम्हें लेकर ज्यादा पज़ेसिव है.. बस !”
“पर नुकसान तो मेरा हो रहा ना ! मेरी ज़िन्दगी बर्बाद हो रहीं है..। मैं बाहर की दुनिया देखना चाहती हूँ.. मैं इण्डिया देखना चाहती हूँ..।
मैं बस एक बार अपने पहले प्यार को यानी अपने क्रश को देखना चाहती हूँ..।”
“पागल बच्ची.. कुछ भी बोलती है !”
उसी समय दरवाज़ा खुला और वासुकी ने झांक लगा ली..
“जानता हूँ मेरी प्रिंसेस मेरे साथ घूमने के लिए सुपर एक्साइटेड है.. बेटा बस चार दिन बाद चलेंगे… ओके ?”..
“थैंक यू डैडा…. यू आर माय एंजेल !”
कलि ने मुस्कुरा कर एक फ़्लाइंग किस वासुकी की ओर उछाल दिया..
वासुकी मुस्कुरा कर चला गया..
और कलि मुहँ फुला कर पलंग पर बैठ गयी..
“कहें दे रहीं हूँ सरु… एक दिन घर छोड़ कर भाग जाउंगी.. !
और….
“और क्या ?” सारिका ने पूछ लिया
“और क्या.. ? अपने क्रश को एक नज़र देख कर वापस आ जाउंगी… !”
उसकी बात सुन सारिका मुस्कुरा उठी..
” हाँ पता है.. अब चलो और नाश्ता कर लो.. कॉलेज जाना है ना ?”..
“हाँ जाना ही है.. बिना गए नहीं रह सकती मैं.. ! इस भूत बंगले में कैद !”..
पलंग से कूद कर वो बाथरूम में घुस गयी…
ठीक चार दिन बाद कलि अपने डैडा और सारिका दर्श के साथ उसी झील पर घूमने आई हुई थी..
सारिका दर्श के साथ झील किनारे पड़ी बेंच पर बैठी आसपास देख रहीं थी..
दर्श अपने मोबाइल पर कुछ काम कर रहा था..
वासुकी भी उन लोगों से हट कर रखी एक बेंच पर बैठ गया..
उसने अपने कान में ईयर प्लग लगा लिए और मोबाइल पर नेहा की आवाज़ में गाना बजा लिया..
छाप तिलक सब छिनी रे मोसे नैना मिलायी के
नैना मिलायी के नैना मिलायी के..
सुधबुध मोरा छीनी रे मोसे नैना मिलाई के…
बल बल जाऊ मै तोरे रंग रजवा
अपने ही रंग रंग लीनी रे मोसे नैना मिलायी के…
आंखें बंद किये वो नेहा की आवाज़ में खो गया…
कलि उस झील के किनारे खड़ी बड़े ध्यान से उसका पानी देख रही थी..
वो खूबसूरत सी झील पर्यटन का विशेष आकर्षण थी..
पिछले हफ्ते उसके कॉलेज की ट्रिप को यहाँ लाया गया था लेकिन उसे अपने पिता से यहाँ आने की इजाज़त नहीं मिली थी..
रो धोकर कलि ने सारा घर सर पर उठा लिया था..
इसलिए आज उसे अपने साथ लेकर वासुकी यहाँ घुमाने लाया था..
कलि मुस्कुरा कर उस सुंदर दृश्य को देख रहीं थी, कि उसी रेलिंग के पास खड़े तीन चार लड़के उसे देख कर आपस में बातें करते हुए उसे छेड़ने लगे..
कलि खुद में मगन अपने मोबाइल से तस्वीरें ले रही थी,उसे फोटोग्राफी बहुत पसंद थी..
और लड़के उसे घूरते हुए कहकहे लगा रहे थे..
लड़कों की भद्दी टिप्पनी वहीँ बैठे वासुकी के कानों में भी पड़ गयी..
उसने कुछ देर के लिए गाना बंद किया और अपने कान उन लड़कों की तरफ लगा दिये..
लड़के वहीं के रहने वाले थे..!
वो कलि पर टिप्पणी कर रहे थे..।
उनमे से एक ने उसकी तस्वीर लेने की बात कहीं और
तभी उनमे से एक लड़के ने अपना मोबाइल निकाल लिया..
उसने कलि की तस्वीर लेने के लिए जैसे ही उसकी ओर मोबाइल घुमाया, उसी वक्त कलि के ठीक बगल में वासुकी आकर खड़ा हो गया..
वैसे तो यूरोपियन लोगों की औसत लम्बाई कुछ ज्यादा ही होती है, वो लड़के भी दुबले लम्बे से ही थे, लेकिन साढ़े छैः फुट के वासुकी के वहाँ आकर खड़े होते ही उन लड़को की सिट्टी पिट्टी गुल हो गयी…
लंबा चौड़ा बिल्कुल किसी बॉडीबिल्डर के डीलडाॅल सा वासुकी जब आकर छोटी सी कलि के बगल में खड़ा हुआ तो तीनों लड़कों के चेहरे पर हवाइयां उङने लगी। वासुकी के धीर गंभीर चेहरे पर उसकी बड़ी-बड़ी गहरी आंखें एक अलग ही प्रभाव पैदा कर रही थी। वासुकी ने कलि के पास आकर खड़े होने के बाद धीरे से उसके कंधे पर हाथ रख दिया और अपनी नजरें उन लड़कों की तरफ फेर ली..
उसने धीरे से कलि के कंधे को अपनी बाँहों के घेरे में ले लिया और एक नज़र उन लड़कों पर डाली..
वो लड़के उसे देखते ही घबरा गए, और एक एक कर बहाने बनाते हुए वहाँ से चम्पत हो गए..
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इधर भारत में…
राजा अजातशत्रु के महल में भव्य तैयारियां चल रहीं थी…! हफ्ते भर बाद विराट भारत वापस आने वाला था।
विराट इतने सालों में अपने शौक को जीते हुए एक कमाल का फोटोग्राफर बन चुका था.. वो अपनी आदत के कारण पहले तो कहीं टिक कर नहीं रह पता था, और इसी लिए उसने लगभग आधी से अधिक पृथ्वी का भ्रमण कर लिया था..
देश विदेश में घूम घूम कर उसने जाने कितनी तस्वीरें खींची थी..
कभी किसी जंगल में जाकर अपना डेरा डाल देता और रात दिन एक करके दुर्लभ प्रजाति के पेड़ पौधे पंछियों की तस्वीरें खींचता..
इस सब के लिए बहुत बार उसे मुहँ अँधेरे उठ कर जंगलों में जाना पड़ता तो कभी रात बिरात वहीँ मचान बना कर ठहरना भी पड़ता..
लेकिन उसे इन सब कामों में मज़ा आता था..
उसकी कलाकारी निरंतर अभ्यास से इतनी निखर चुकी थी कि अब उसे देश विदेश के बड़े बड़े इवेंट्स में बुलाया जाने लगा था..
लंदन पेरिस के फैशन शो के लिए उसे विशेष आमंत्रण देकर बुलाया जाता था..।
लंदन के रॉयल हॉउस में हर साल दुनिया भर के रईसों में शुमार परिवारों के बच्चों को बुलाया जाता था..
साल में एक बार होने वाले इस इवेंट में ये सारे बच्चे एक दूसरे से मिलते जुलते और पहचान बढ़ाया करते थे..।
एक तरह से ये एक दूसरे से पहचान बढ़ाने और इन बड़े होते बच्चों को उस रॉयल समुदाय में शामिल करने की शुरुवात होती थी..।
यहाँ इस इवेंट में शामिल होना किसी भी परिवार के लिए गर्व की बात होती थी…
लंदन, अमेरिका, इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया, इण्डिया, जापान के अभिजात्य वर्ग के बच्चे इनमें हर साल शामिल होते थे…
कहा जाता है ये कार्यक्रम अंग्रेज़ो के समय में शुरू हुआ था, और आज तक चल रहा था..
अपने समय में युवराज, राजा, विराज और विराट चारों को ही इस सम्मेलन में शामिल होने का मौका मिला था..
तीन दिन तक चलने वाला ये सम्मेलन युवा वर्ग में खासा लोकप्रिय भी था..
तीन दिन तक चलने वाले इस इवेंट में पहले दिन औपचारिक मुलाकात का दिन होता था, जिसमे युवा लड़के लड़कियां एक दूसरे के शाही घरानो का परिचय पाते थे..
उस पहले दिन सामान्य मुलाकात बातचीत के साथ लंच हुआ करता था, और शाम में लंदन पैलेस और आसपास के दर्शनीय स्थल घूमने का कार्यक्रम होता था..
दूसरे दिन इन सारे लोगों को एक मॉडलिंग प्रतियोगिता का हिस्सा बनना होता था, और शाम को पैलेस में बॉलरूम डांस के साथ ही डिनर होता था..
तीसरे और आखिरी दिन में इन युवाओ में से एक लड़के और एक लड़की का चयन किया जाता था, जो रॉयल यूथ को रिप्रेसेंट करेंगे…
उनके नाम पर उस साल का लन्दन रॉयल्स का ब्रांड एंडोर्स किया जाता था..उसी शाम के डिनर में सभी के परिवारजन भी आपस में मुलाकात किया करते थे..
ये एक भव्य और शाही कार्यक्रम होता था, जहाँ शामिल होने का सपना लगभग हर एक रॉयल परिवार का युवा अपनी किशोरावस्था से ही देखने लगता था…
पिछले लगभग चार पांच साल से विराट को इस इवेंट में सादर आमंत्रित किया जा रहा था और उसकी खींची तस्वीरो से ही वहाँ के अलग अलग विशाल कमरों को सजाया जा रहा था..
वहाँ के बॉलरूम में पिछले पचास साल से उस इवेंट को जीतते आये युवाओं की तस्वीरें लगी थी..
जापान कोरिया इग्लेंड आदि के राजकुमारों की तस्वीरो के बीच राजा अजातशत्रु की शानदार तस्वीर मुस्कुरा रही थी….
जिस साल अजातशत्रु इस इवेंट में हिस्सा लेने गए थे उस साल बाकी जगहों के राजकुमारों के भी जलवे कम नहीं थे…..
उस साल जजेस के लिए उन सारे सजीले युवाओ में से किसी एक का चयन करना मुश्किल हो गया था लेकिन ब्रिटेन की महारानी ने जब अजातशत्रु को देखा तो फिर और किसी को देखने की ज़रूरत ही नहीं समझी.. और अपनी तरफ़ से दिये जाने वाले नंबर में उन्होने अजातशत्रु को पूरे और बाकियों को शून्य पर ही टिका दिया…
वो उस वक्त चाहती थी अजातशत्रु अपनी रियासत छोड़ कर वहीँ बस जायें लेकिन बड़े प्रेम और विनम्रता से उनका ये सुनहरा आतिथ्य छोड़ कर अजातशत्रु ने भारत का रुख कर लिया था… ।
इस साल इवेंट की तैयारियों में लगे लोग खासे उत्साहित थे, क्यूंकि इस बार इस इवेंट के लिए राजा अजातशत्रु का बेटा आने वाला था..।
पिछले साल ही युवराज सा का बेटा हर्षवर्धनऔर विराज का बेटा यशवर्धन इस कार्यक्रम का हिस्सा बन चुके थे..
दोनों ही सुंदर थे सजीले थे और कुशाग्र बुद्धि के मालिक थे.. कोई किसी से ज़रा भी कम नहीं था..
लेकिन यश का मनमौजी स्वभाव था कि वो किसी भी बात को बहुत गंभीरता से नहीं लेता था..
और इसीलिए इवेंट का एक महत्वपूर्ण सत्र उससे छूट गया था… और वो पीछे रह गया था!
वहीँ हर्षवर्धन जापान के राजकुमार से कुछ आधे नंबर से पीछे हो जाने के कारण प्रतियोगिता में दूसरे नंबर पर पहुँच पाया था..
इस बार शौर्य को आना था, और शौर्य का इन सब परपंच में जाने का कतई मन नहीं था..!
हर्ष उसे यहाँ आने के नफे नुकसान समझा समझा कर थक चुका था, लेकिन शौर्य ने ना आने की कसम खा रखी थी…
इस बार परी को भी यहाँ से निमंत्रण भेजा गया था और वो इस शानदार इवेंट का हिस्सा बनने के लिए बहुत ज्यादा खुश और उत्साहित थी…
इस इवेंट को कवर करने के लिए हर बार की तरह विराट को भी बुलाया गया था..
और वो भी अपने भतीजे और भतीजी की तस्वीरें उतारने के लिए खुश था….
इस इवेंट के बाद ही उसे भारत वापस लौटना था, वहाँ उसके फोटोग्राफ्स की प्रदर्शनी लगनी थी….
यहीं सब बातें अपने साथ खड़े शेरी को बताता विराट उसी झील पर मौजूद था, जहाँ कलि अपने डैडा के साथ आई हुई थी…
क्रमशः
aparna….

बहुत बेहतरीन भाग 👌🏻👌🏻
अरे वाह.. वासुकी ने कितनी आसानी से अपनी रूठी हुई कली को मना लिया, इन दोनों बाप बेटी का प्यार 👌🏻👌🏻।कली बिलकुल अपनी माँ नेहा पर गयी है और वासुकी बिलकुल नहीं बदला।वो जो लडके कली को देखकर टिप्पणी कर रहे हैं उनको यह नहीं पता वासुकी कौन है 😃अब तो गए वो।
आज आपने राजघरानों के उत्सवों के बारे में बहुत अच्छी तरह से वर्णन किया अब देखते है शौर्य बाबू वहां उस फंक्शन का हिस्सा बनते है कि नहीं…।
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻🙏🏼।
नाईस पार्ट दीदी, कहानी आगे बढ गई है, शौर्य का डील डौल बड़ा धांसू मालूम हो रहा है ना जाने कौन सा गुल खिलेगा कली के ऊपर उसका…. पढ़ने को तत्पर हूं, बहुत बढ़िया….💐🙏🙏