जीवनसाथी -3 भाग -27

कली उसके मुहं से खुद के लिए हुकुम सुन मुस्कुरा उठी..
“कम तो नहीं है न…? देख लो तुम्हारा भी पाला किस दिलदार से पड़ा है !”
शौर्य ने मुस्कुरा कर उसका अभिवादन किया और दोनों सामने दिख रही दुकानों में घुस गए …
शौर्य की पसंद ही ऐसी थी कि वो अंदर घुसते ही सारे प्रीमियम कपड़ों की तरफ बढ़ गया…
कली भी इधर उधर घूमती उसके लिए कपड़े देखने लगी..
दुकान में ब्रांड्स की सेल भी चल रही थी..।
कली उसी तरफ घुस गयी..।
उसने दो टीशर्ट्स की खरीदी पर एक मुफ्त वाली जगह से तीन अलग अलग रंगो की टीशर्ट उठा ली और भाग कर शौर्य तक चली आयी….
तब तक में शौर्य ने एक बहुत खूबसूरत सी हल्की आसमानी रंग की शर्ट अपने लिए पसंद की थी..।
और स्टोर वाले के कहने पर उसका ट्रायल लेने गया था..
कली वहाँ पहुंची उसी समय शौर्य उस शर्ट को पहन कर बाहर निकला.. वो अपनी कफ के बटन को सही करता हुआ आ रहा था..
कली पल भर को उसे देखती रह गयी..
और फिर तुरंत ही अपने सर को झटक कर उस तक पहुँच गयी.. उसने अपनी एक बांह पर तीनो टीशर्ट्स टांग रखी थीं….
शौर्य वहाँ पहुंचा तभी स्टोर वाला लड़का उसकी तारीफ करने लगा..
“वाह वाह सर! क्या जंच रहे हैं, ऐसा लग रहा शर्ट आपके लिए ही बनी है.. मतलब कमाल !!”..
शौर्य ने कली की तरफ देख कर इशारे से पूछा लिया और वो भी हाँ में गर्दन हिला कर बहुत अच्छी लग रही का इशारा कर गयी..
शौर्य मुस्कुरा कर उसके हाथ में टंगी टीशर्ट्स देखने लगा… और कली ने उस शर्ट की कीमत स्टोर वाले लड़के से पूछ ली..
“मैम ये आपको पड़ेगी सिर्फ उन्यासी हज़ार नौ सौ निन्यानवे रूपये की.. !”
मूल्य सुन कर कली की आंखे चौड़ी हो गयी..
उसके अकाउंट में उसके डैडा के डाले रूपये थे, लेकिन उन्हें हाथ लगाना मतलब अपने डैडा की राडार में आना था जिस बात का रिस्क वो नहीं उठा सकती थी..।
ऊपर हाथ खर्च के लिए उसके पास जो पैसे थे वो इतने नहीं थे की इस महंगी सी शर्ट को खरीद सके..
“आप क्या सोचने लगे मैडम.. ? “
“हम्म… ये सोच रही हूँ कि एक रूपये आप लोग किस ख़ुशी में कम रखते हैं दाम…. सीधा अस्सी हज़ार कर देते न !”
सामने खड़ा लड़का हंसने लगा..
“नाइस जोक मैडम.. ! वैसे सर और निकालूँ आपके लिए कपड़े ?”
शौर्य ने उस लड़के की तरफ देख हामी भर दी..
उस लड़के के वहाँ से टलते ही कली एक झटके में शौर्य के पास पहुँच गयी..
” सुनो तुम्हारा केवल नाम प्रिंस है, तुम सच्ची के प्रिंस नहीं हो… हो तो तुम एक मिडिल क्लास लड़के ही.. 80000 तो तुम्हारी सैलरी नहीं होगी, जितने की शर्ट खुद पर सजा रखी है…
वैसे दिख अच्छे रहे हो, लेकिन इस शर्ट को छोड़ो, मैं जो कपडे लेकर आयी हूँ न,वह बेटर है..
पन्द्रह सौ में तीन…
सोचो पन्द्रह सौ की तीन… वाह क्या डील है….।”
कली ने खुद की पीठ थपथपा ली..
“कहाँ से लाती हो इतना दिमाग कली.. !” कली मुस्कुरा उठी और शौर्य ने उसकी लायी टीशर्ट्स देखने के बाद हाँ में गर्दन हिलायी और कपड़े बदलने चला गया..
वहां एक तरफ जाकर वो उस लड़के से कुछ बात करने लगा। कली को लगा कि शौर्य को शायद वह शर्ट बहुत ज्यादा पसंद आ गई है, लेकिन अपनी गर्दन को झटक कर वह दूसरी तरफ कुछ देखने चली गई..
इधर शौर्य ने अपनी जेब से अपना कार्ड निकाला और उस लड़के के हाथ में रख दिया..
वो लड़का तुरंत बोल पड़ा.. -“सर पहले और कपड़े देख लीजिये !”
“देख लूंगा… लेकिन फ़िलहाल वक्त कम है, इसलिए इन दोनों शर्ट्स का बिल कर दो.. !”
शौर्य ने ट्रायल एक ही कमीज़ का लिया था लेकिन वैसी ही एक और सफ़ेद रंग की शर्ट उसने और भी पसंद कर रखी थीं..
“और सर.. वो टीशर्ट्स भी इसी में जोड़ लूँ.. जो मैडम ने पकड़ रखी हैं..
“हम्म.. !”
हाँ में गर्दन हिला कर वो अपना फ़ोन देखने लगा…
उसके फ़ोन में मीरा के मेसेज आये हुए थे..
“हाय बेबी कहाँ हो ?”
“क्यों ?”
शौर्य ने रुखा सा जवाब दे दिया..
“बस.. तुम्हारी याद आ रही थी.. तुमसे मिलना था.. अभी मिल सकते हैं ?”
.”नहीं.. मैं किसी बहुत ज़रूरी काम में फंसा हूँ.. !”
“तुम किस ज़रूरी काम में फंस गए.. तुम तो ऑफिस भी नहीं जाते ?”
“तुम्हारा मतलब क्या है ?”
“नो नो.. मेरा वैसा कोई मतलब नहीं था.. मैं बस तुमसे मिलना चाहती थी.. !”
“देखता हूँ.. अगर काम निपट गया, फिर ट्राई करता हूँ !”
उतनी देर में वो लड़का चला आया..
“सर आपका ये कार्ड नहीं चल रहा.. !”
अब तक कार्ड्स के नहीं चलने को हलके में लेता शौर्य ज़रा गंभीर हो गया..
उसने तुरंत अपने बाक़ी दोनों कार्ड्स भी उस लड़के के हाथ में रख दिए..
और लड़के ने उन्हें चला कर देखने के बाद शौर्य को देख कर ना में गर्दन हिला दी..
“माफ़ कीजियेगा सर लेकिन आपके कार्ड्स चल ही नही रहे.. !”
“लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है ?”
शौर्य के दिमाग में ये बात घूमने लगी…
“हो सकता है बेलेंस ख़त्म हो गया हो सर ?”
लड़के ने बड़ी विनम्रता से कहा… लेकिन शौर्य को अब गुस्सा आने लगा था..
उसने तुरंत अपनी माँ के फ़ोन पर फ़ोन लगा दिया..
उस वक्त बांसुरी राजा के ऑफिस में बैठी समर के साथ राजा की चुनावी तैयारियों पर चर्चा कर रही थी… उसने जैसे ही शौर्य का कॉल आते देखा, फ़ोन उठाने को हुई की समर ने न में गर्दन हिला कर फ़ोन उठाने से मना कर दिया..
बांसुरी ने एक गहरी सी साँस भरी और वहीं रखा पानी उठा कर पी लिया…
उसके लिए भी ये समय कष्टदायी था, लेकिन अपने बेटे को सही रास्ते पर लाने का ठेका उसी ने तो समर के कंधो पर डाल रखा था, फिर अब वो बीच में कैसे बोल सकती थी.. ?
तबियत ख़राब लग रही है बोल कर वो उठ कर अपने कमरे में चली गयी.. समर भी समझ तो गया था, लेकिन वो जानता था कि इस वक्त शौर्य के साथ कितना कठोर और कितना मुलायम रहना है ?
***
इधर कली पीछे छिप कर खड़ी शौर्य और स्टोर वाले लड़के की बातें सुन चुकी थीं …
उसे ये समझ में आया की शौर्य का अकाउंट पूरी तरह खाली हो चुका है.. उसे शौर्य पर तरस आने लगा..।
“स्वाभिमनी लड़का है… मैंने कहा भी कि पैसे मैं दे दूंगी, बावजूद अपना उजड़ा चमन बैंक का एक्सपायर्ड कार्ड चलाने की कोशिश में था.. ! पुअर गाई.. !”
कली बिलिंग काउंटर पर पहुँच गयी..
और अपनी माँ के फ़ोन न उठाने पर उदास सा शौर्य स्टोर से यूँ ही बाहर निकल गया..
स्टोर से हट कर वो थोड़ा आगे जाकर यूँ ही एक जगह बैठा अपनी सोच में गुम था की कली वहाँ चली आयी..
उसने दोनों हाथ में कपड़ो के थैले पकड़ रखे थे..
“चलो चलो.. जल्दी से मैं तुम्हारी कुछ तस्वीरें ले लूँ.. ! वर्ना बाद में रौशनी की दिक्कत हो जाएगी.. मेरे पास कोई प्रोफेशनल शूट रूम तो है नहीं !”
वो आते ही चहकने लगी.. वो शौर्य को उदास नहीं देखना चाहती थी….
शौर्य ने बैठे बैठे ही हामी भरी और उठ कर खड़ा हो गया… इस वक्त भी वो जो सफेद कमीज़ पहने हुए था, वो उसमे भी शानदार लग रहा था…
कली ने उसे खड़ा किया और उसके गले में एक टाई डाल कर उसे रफली यूँ ही गले में लपेट कर छोड़ दिया..
“सही ढंग से नॉट लगा लूँ.. !”
“नहीं.. बस ऐसे ही चाहिए… तुम चलने का पोज़ लो और अपने एक हाथ के कफ के बटन लगाने की कोशिश करो.. !”
कली ने जैसा बताया, शौर्य बिलकुल उसी पोज़ में खड़ा हो गया… क्रॉस लेग के साथ अपनी कमीज़ की बाँहों का बटन लगते हुए उसे गर्दन मोड कर दूसरी तरफ देखने बोल कर कली ने उसकी दो चार तस्वीरें ले ली..
उसके बाद वहीँ, कहीं किसी बेंच पर पीछे अपने दोनों हाथ फैलाये बैठा हुआ, तो कहीं किसी रिक्शा पर हाथ बांधे बड़ी स्टाइल से टिक कर खड़ा शौर्य..
हर एक तस्वीर में बहुत सुंदर लग रहा था..
एक तस्वीर में उसके हाथ में कली ने फूल पकड़ा दिए..
और अपना हाथ आगे करने को कहा..
शौर्य ने फूल किसी को देने के ढंग से आगे हाथ बढ़ा दिया..
और कली ने फोटो ले ली.. तस्वीर में फूल और देने वाले का हाथ ही दिख रहा था, पीछे चेहरा धुंधला सा था जो तस्वीर को और खूबसूरत कर रहा था..
“ऐसे इतनी नफासत से किसी लड़की को फूल दोगे न तो अपना दिल जान सब तुम पर हार बैठेगी.. !”
“अच्छा मतलब लड़की को मुझसे नहीं मेरी फूल देने की अदा से मुहब्बत होगी ?”
शौर्य का मन अब भी खराब था.. वो बुझा बुझा सा ही था… कली भी इस बात को समझ रही थी, लेकिन कली इस बात कर कारण कुछ और समझ रही थी..!
उसने शौर्य को देखा और उसकी उदासी दूर करने का उपाय करने लगी..
“सो मेरे हैंडसम मॉडल.. चलो अब हम कहीं बैठ कर कुछ खा लेते हैं.. भूख लगने लगी है.. है न !”
शौर्य ने किसी तरह का कोई जवाब नहीं दिया, और कली उसका सामान और अपना कैमेरा कंधो पर लादे एक तरफ बढ़ गयी..
रास्ते पर ही एक कैफे था, वही एक कुर्सी पर अपना सारा सामान पटक कर दूसरी कुर्सी पर कली बैठ गयी.. बुझे मन और थके कदमो से शौर्य भी चला आया..
कली उसे देख कर उसका दुःख महसूस कर पा रही थी..
शौर्य चुपचाप बैठ गया..
“क्या खाओगे ?”
“कुछ भी.. !”
“उस नाम की डिश यहाँ मिलती है या नहीं ये ढूँढना पड़ेगा… “..कली ने वही से गुज़रती एक लड़की को आवाज़ लगा दी.. वो लड़की उस कैफे में काम करती थी वो तुरंत हाथ में पतला सा मेन्यू कार्ड दबाये वहाँ चली आयी..
“आपके यहाँ “कुछ भी” मिलता है ?”
.”हाँ मैम बहुत कुछ मिलता है… आप बताये क्या चाहिए.. !”
“इन साहब को “कुछ भी” खिला दीजिये.. नो सीरियसली कुछ भी ऐसा जिनसे इनका मूड ठीक हो जाये.. !”
कली की बात सुन खुद में खोया शौर्य उसे देखने लगा..
“जस्ट चिल यार.. पैसे ही तो नहीं है न तुम्हारे पास.. ज़रा उसे देखो.. !” कली ने वहाँ से ज़मीन पर चक्को वाले पाटे पर बैठ कर रोड पार करते एक दिव्यांग की तरफ इशारा कर दिया..
“उसके तो दोनों पैर ही नहीं है ! और उधर अपने पीछे देखो..
शौर्य ने पलट कर देखा, एक बुज़ुर्ग व्यक्ति कान में मशीन लगाए किसी की बात सुनने की कोशिश कर रहे थे..
“इनके सुनने की शक्ति नहीं है … अरे.. और उधर देखो..
एक शौर्य की उम्र का लड़का अपनी बाइक पर अपनी कमर टिकाये खड़ा बड़े मज़े से आइसक्रीम खा रहा था… और उसके सर के पूरे बाल गायब थे..
“उस बेचारे की तो उम्र भी नहीं हुई, बावजूद बाल साथ छोड़ गए… क्या इन सब की तुलना में तुम्हें यह नहीं लगता कि तुम बहुत बेटर कंडीशन में हो..।
रुपया पैसा आज नहीं है, कल मेहनत कर के कमा ही लोगे और वैसे भी ढेर सारे रुपयों का करना क्या है? खाना तो तुम्हें भी वही रोटी है, जो रईस लोग खाते हैं…
शौर्य कली को कैसे अपनी समस्या बताता.. वो चुप बैठा उसकी बात सुनता रहा..
” मैंने सरू से अक्सर सुना है, मेरी मॉम बहुत जिंदादिल थी। उनमें जिंदगी जीने का जज्बा था।
वो अपनी जिंदगी के हर एक पल को चार गुना खुशियों से सराबोर करके जीती थी। हालांकि इसीलिए शायद भगवान ने उन्हें जल्दी उठा लिया। क्योंकि अपनी 24 साल की उम्र में ही उन्होंने शायद अपनी सारी जिंदगी जी ली थी…।
मैंने अपनी मम्मी को कभी देखा नहीं, लेकिन मैं जानती हूं कि वह मेरे अंदर मौजूद है। और मुझे हर पल खुश रहने और जिंदगी जीने की सलाह देती हैं..।
मैं ज्यादा चक्करो में नहीं पड़ती, मुझे बस यह मालूम है कि हमें जिंदगी मिली है जीने के लिए, और इसे हर हाल में जीना ही है…तो रोकर और दुखी होकर क्यों गंवाई जाये… है न.. !”
शौर्य ने हामी भर दी.. तभी वो लड़की एक प्लेट में ब्रेड पकौड़ा और हरी चटनी लेकर चली आयी… इस ब्रेड पकौड़े में अंदर चटनी लगा कर उस पर पनीर बिछा कर खूब सारा आलू का मसाला भर कर उसे बेसन में डूबा कर तल दिया गया था.. उसके आकार को सही करने के लिए उसे बीच से चार भागों में काट कर ऊपर से चटनी और सेव डाल कर और भी स्वादिष्ट बना दिया गया था..
कली की आंखे चमकने लगी..
“ये क्या है.. ?” वो पूछ बैठी.. और मुस्कुरा कर उस लड़की ने कॉफी के कप रखते हुए जवाब दिया..
“आप ही ने तो माँगा था, “कुछ भी”.. हमारी इस डिश का नाम “कुछ भी” ही है !”
कली और वो लड़की एक दूसरे के हाथ में ताली देकर मुस्कुरा उठी और शौर्य ने हँस कर एक टुकड़ा उठा कर मुहं में रख लिया.. उसे वाकई वो डिश पसंद आयी..। आज तक उसने हमेशा आलीशान होटलों का महंगा खाना ही खाया था… यूँ रोड किनारे बैठ कर ऐसे स्ट्रीट फ़ूड खाना उसके लिए नया अनुभव था..।
वो खाने के साथ कॉफी की चुस्कियां भी लेने लगा कि कली ने उसे देखते हुए अपना बैग उठा कर उसके सामने रख दिया..
“ये क्या है ?” शौर्य ने पूछा..
“तुम्हारे लिए शॉपिंग की थीं न.. वही !”
कली के जवाब पर शौर्य ने बैग में हाथ डाल कर टीशर्ट्स में बीच से झांकती वो महंगी सी शर्ट बाहर निकाल ली..
“इस शर्ट को क्यों लिया.. ये तो बहुत महंगी थी.. !”
“गिफ्ट है.. !” कली ने मुस्कुरा कर कहा..
“अरे लेकिन ये तो बहुत महंगी थी न.. ?”
“चिंता मत करो तुम्हारे साथ फ़िलहाल जो है न, वो भी किसी राजकुमारी से कम नहीं है… कली के डैडा के पास खूब रुपया है और उन्होंने अपनी कली को हमेशा अपनी परी बना कर रखा है…. !”
शौर्य के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आयी..
और उसी समय कली की नजर टेबल पर रखे अख़बार पर पड़ गयी..
अख़बार में राजा साहब की एक शानदर फोटो के साथ उनके बारे में कोई खबर लिखी थी.. कली उस तस्वीर को देखते ही चहक उठी..
“देखो… ये तो राजा अजातशत्रु है न !”
शौर्य ने उड़ती सी नजर डाल कर हामी भर दी.. -“हम्म शायद ! लेकिन क्यों ?”
“हाय मेरा चाईल्डहुड क्रश हैं ये..।”
शौर्य ने उसी वक्त कॉफी का सिप लिया था वो उसके गले में कहीं अटक सा गया और उसे खांसी आने लगी…..
क्रमशः
aparna…

कली के बचपन का प्यार वह भूल नहीं पाई है और उनकी तस्वीर देख फूले नहीं समाई है, शौर्य को यह जान हिचकी आई है, हमारे चेहरे पर यह पढ़ मुस्कान उभर आई है, हर बार की तरह इस बार भी बहुत ही प्यारा पार्ट है, यह पढ़ना सुखद होगा कि शौर्य को उसकी शक्तियां कब वापस मिलेगी, कली उसके सच को कब जान पाएगी, बेहतरीन लेखन दीदी…💐🙏
बहुत बहुत लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻पर मेरा मन वो ब्रैड पकौड़े में अटक गया है 😟। मुझे तो ब्रैड पकौड़े वाली भूख लग रही 😫😫।
बाकी भाग तो बहुत बहुत बहुत बेहतरीन है 👌🏻👌🏻👌🏻👏👏👏❤️❤️❤️।