जीवनसाथी -3 भाग -25

जीवनसाथी -3 भाग -25

जीवनसाथी by aparna

उसने पूरे आत्मविश्वास से फ़ोन अपने हाथ मे ले लिया..
उधर से वासुकी की आवाज़ उसके कानों में पड़ी..

“हेलो.. डेरिक ?”

“यस सर… कैसे हैं आप ?”

“ठीक हूँ.. तुम कैसे हो… ?”

कली ने राहत की साँस ली लेकिन तभी वासुकी ने अपना सवाल पूछ लिया..
   “कैसा लग रहा है इण्डिया, और काम कैसा चल रहा है.. ? शुरू हो गया तुम्हारा काम ?”

फ़ोन स्पीकर पर था.. सवाल कली ने भी सुन लिया..
उसने शौर्य की तरफ देख कर ना में इशारा कर दिया और शौर्य ने जवाब दे दिया..

“नहीं… अब तक नहीं शुरू हुआ, आज से ही शुरू होगा.. बस ऑफ़िस निकलना है, उसी के लिए तो यहाँ आया हूँ.. और आप बताएं, कैसे हैं आप ?”

शौर्य को इतने आत्मविश्वास से बात करते देख कली ने  गर्दन तिरछी कर ‘वाह क्या बात है’ का इशारा किया और खुद वापस स्लेब की तरफ मुड़ गई…
शौर्य की बात सुनकर दूसरी तरफ से वासुकी ने जवाब दे दिया..

“हम्म.. मैं भी ठीक हूँ… ! वापसी कब तक है ?”

इस सवाल को सुनकर शौर्य ने कली की तरफ देखा और कली ने अपनी 10 उंगलियां उसे दिखा दी.. !

“सर दस तारीख तक… | “

10 तारीख आने में अभी काफी दिन बाकी थे, उसकी बात सुनकर वासुकी चौंक गया..
और कली ने अपने माथे पर हाथ मार लिया! शौर्य कली को आश्चर्य से देखने लगा! उसने वापस इशारे में पूछा और कली ने होंठ घुमा घुमा कर उसे कहा कि 10 दिन बाद..

शौर्य ने एक बड़ा सा ‘ओह्ह्ह्ह’  कहा और वासुकी को जवाब देने लगा..

” अरे सर मैं मजाक कर रहा था! हम 10 दिन बाद ही तो वापस आ रहे हैं.. आप बार-बार एक ही सवाल पूछते हैं, इसलिए मैंने यूं ही मजाक कर दिया..!”

शौर्य के आत्मविश्वास को देखकर कली ने वापस अपने माथे पर हाथ मार लिया! वह जानती थी कि उसके डैडा  क्या है ?और यह मूर्ख लड़का उसके डैडा  के साथ मजाक करने की बात कह रहा था! दूसरी तरफ वासुकी के माथे पर बल पड़ चुके थे।
डैरिक तो कभी उसके सामने टिक कर खड़ा भी नहीं हो पाता था। और यह लड़का इतने आत्मविश्वास से बातें कर रहा है। यह डैरिक तो नहीं लग रहा। वासुकी के दिमाग में यही चल रहा था और उसने अगला सवाल पूछ लिया..

“डेरिक तुम्हारी मॉम का फोन आया था,तुम्हें पूछने के लिए..
अरे वह क्या नाम है…. सॉरी मैं भूल रहा हूं, तुम्हारी मॉम का नाम क्या है..?”

शौर्य ने इस बार कली की तरफ नहीं देखा और खुद जवाब देने लगा..

” बात यह है सर कि मॉम हमेशा से मेरे लिए मॉम ही रही है..।
और वैसे भी एक मां मां ही होती है, चाहे वह लंदन में हो या इंडिया में। उनका नाम चाहे जो हो..।
लेकिन अपने बच्चे के लिए वो सिर्फ मां होती है। अलग-अलग कंट्रीज भी मां की परिभाषा को अलग नहीं कर पाई। लंदन में रहने वाली हो या इंडिया में रहने वाली, एक मां अपने बच्चे पर अपनी जान निछावर कर देती हैं। अपना कैरियर छोड़ देती है। अपना परिचय तक भूल जाती है, और रह जाती है सिर्फ मां..।”

शौर्य की इतनी बड़ी बड़ी बातें सुनकर कली का मुंह खुला रह गया। वह जानती थी कि बात वासुकी भी आश्चर्य से इन बातों को सुन रहा होगा।

वह शौर्य के सामने आई और हाथ हिला हिला कर उसे चुप होने का इशारा करने लगी। उसने वहीं मौजूद एक गुलाब के फूल को उठाया और उसे शौर्य के सामने रख दिया ।
शौर्य ने उस फूल को देखा और धीरे से ना बोल दिया..

“नहीं चाहिए.. “

कली ने जोर-जोर से गर्दन हिलाकर ना का इशारा किया और गुलाब के फूल को दिखाकर होंठो ही होठों में कहने लगी ‘रोज़..’

एक बार फिर शौर्य ने बड़े से ओह्ह का  इशारा किया और धीरे से उस गुलाब को पकड़ लिया..

“सर रेड रोज़.. !”

उसके ऐसा बोलते ही कली एक बार फिर जोर जोर से ना में गर्दन हिलाने लगी और शौर्य उसे देखकर अपनी हंसी रोकने की कोशिश करने लगा।

“मेरा मतलब है रोज। रोज, नाम है मेरी मॉम का। और मुझे आश्चर्य है कि इतना खूबसूरत नाम होने के बावजूद आप मेरी मॉम का नाम कैसे भूल गए..?”

“हम्म…. सॉरी, मैं नाम भूल गया। वैसे इतनी आसानी से कुछ भूलता नहीं हूं मैं..!”

” यह तो बहुत अच्छी बात है सर। काश आपका यह गुण आपकी बेटी में भी आया होता।”

धीरे से मुस्कुरा कर शौर्य ने कली को देखा, और कली उसे  घूरने लगी..।

” तुमसे बात करके अच्छा लगा डेरिक !”

” और मुझे आपसे बात करना हमेशा अच्छा लगता है सर।
      शौर्य ने फोन कली की तरफ बढ़ा दिया। कली ने अपने डैडा से बात की और फोन रख दिया..

फोन रखते ही कली शौर्य  की तरफ घूम गई…

“इतना उछल उछल कर बात करने की क्या ज़रूरत थी.. ? तुम जानते नहीं हो तुम किससे बात कर रहे थे.. ?”

“मैं जिनसे बात कर रहा था, वो भी कहाँ मुझे जानते हैं ?”

शौर्य मुस्कुरा उठा..

“अरे मैं वो वाला ‘नहीं जानना’ नहीं कह रहीं, मेरा मतलब है मेरे ग्रेट डैडा को तुम नहीं जानते.. की वो क्या हैं ?”

“हाँ… तो तुम मुझे भी कहाँ जानती हो.. ?”

वो मुस्कुरा कर बाहर निकलने को था कि उसका मोबाइल बजने लगा, और शौर्य अपना फ़ोन उठा कर वहीँ खड़े होकर बात करने लगा..

उतनी देर में कली का ध्यान अपने जलते हुए तवे पर चला गया..
वो एक बार फिर अंडे फोड़ने की जद्दोजहद मे लग गयी..
लेकिन अंडे को हर तरफ से घुमा घुमा कर देखने के बावजूद कली को समझ में नहीं आया कि अंडा कैसे फोड़ना है?

तभी शौर्य ने पीछे से उसके कंधे पर धीरे से एक उंगली से दस्तक सी दी और वो पीछे मुड़ गई।

शौर्य फोन पर बात करते हुए उसे अंडा फोड़ने की तरकीब बताने लगा।

शौर्य ने अपने दोनों हाथों से अंडे को पकड़कर दोनों विपरीत दिशाओं में खींचने को बोला…

कली को ये काम बड़ा कठिन सा लगा.. उसने ना में गर्दन हिला दी..
शौर्य ने अपनी हथेली दिखा कर उसे रुकने बोला और आसपास किसी ऐसी चीज़ को तलाशने लगा जिससे हल्के से अंडे पर मार कर उसमे क्रेक किया जा सके..

उसे कुछ ढूंढते देख कली ने इशारे से पूछ लिया कि वो क्या ढूँढ रहा है..

शौर्य ने भी फ़ोन पर बात करते हुए उसे इशारे से बता दिया की कोई वजनदार वस्तु की तलाश है उसे..

कली ने इधर उधर ढूंढा और रसोई में रखे हथोड़े को उठा लिया..
उसे हथौड़ा हाथ में लिए देख शौर्य ने अपना माथा पीट लिया..

हथौड़े को उसके हाथ से छीन कर शौर्य ने वापस रखा और वहीं सामान में से चाकू निकाल कर कली को पकड़ा दिया..
चाकू देख कर कली को सारिका का चाकू से फल सब्जियां काटना याद आ गया और वो अंडे को स्लैब पर रख कर उस पर चाकू चलाने लगी..

शौर्य उस समय अपने ड्राइवर से बात कर रहा था..
उसके ड्राइवर प्रिंस को तेज़ ज़ुकाम हो गया था, उसके साथ ही उसे बुखार भी आने लगा था..।
और इसलिए उसने शौर्य को फ़ोन किया था कि आज वो सारे वक्त नहीं आ पायेगा, और अपनी जगह किसी और को भेज देगा..

“नहीं जरूरत नहीं है.. मैं मैनेज कर लूंगा !”

उसी वक्त उसने कली को चाकू से अंडा काटने की कोशिश करते देखा..

“अरे ऐसे थोड़े ना किया जाता है.. स्टुपिड.. !”

शौर्य ने कली को कहा लेकिन उसके ड्राइवर को लगा वो उसे बोल रहा है..

“यंग मास्टर.. ? क्या गलती हो गयी मुझसे ?”

“नो नो.. तुम्हें नहीं कह रहा मैं ! तुम ध्यान रखो अपना !”

शौर्य ने ड्राइवर को कहा और कली से वापस इशारों में बात करने लगा..

उसने कली को चाक़ू चलाने को मना किया..

कली ने उसकी बात मान ली..
शौर्य ने उसे अंडे को फोड़ने का इशारा किया, कली ने अपने माथे का पसीना पोंछा और वापस कुछ ढूंढने लगी..
शौर्य ने चम्मच का इशारा किया..
कली ने चम्मच निकाल लिया..

लेकिन उसकी सहायता से भी उससे फोड़ा नहीं जा रहा था.. वो चम्मच से धीरे धीरे उसे फोड़ने की कोशिश कर रहीं थी कि परेशान होकर शौर्य ने अपने दोनों हाथ जोड़ दिये..

कली ने मासूमियत से उसे देखा और अपने दोनों हाथों के बीच अंडा रख कर ज़ोर से दबा दिया…

अंडा फूट कर बह गया..
और कली परेशान सी होकर पैर पटकती रसोई से लगे वाशिंग एरिया में अपने हाथ धोने चली गयी..

उसके वापस लौटने तक में शौर्य अपना फ़ोन रख चुका था..।

वो बड़े आराम से आहिस्ता से सामने रखे पैन पर ही एक अंडे को धीरे से मार कर बड़ी सफाई से फोड़ गया…।

अंडा पैन में ही फूटा.. शौर्य ने दूसरा भी उसी अंदाज़ में फोड़ दिया, और पैन को बड़ी कलात्मकता से गोल घूमा कर अंडे को चारों तरफ फ़ैला भी दिया..।
उसने वहीं रखें नमक और काली मिर्च को ऊपर से छिड़का और पैन को धीरे से हिला कर ऑमलेट को हवा में उछाल कर उसे पलट लिया..

कली आंखें फाड़े उसे देखती रही..

शौर्य ने उस ऑमलेट को प्लेट में खिसकाया और दूसरा अंडा भी वैसे ही बनाने लगा..

कली ख़ुशी से तालियां बजाने लगी..

“वाह वाह… तुम तो बड़े स्मार्ट हो कुकिंग में.. वैसे एक बात बताओ, ड्राइवरी के अलावा किसी होटल में पार्ट टाइम खाना भी बनाते हो क्या ?”

शौर्य को याद आ गया कि उसने कली को यही बताया था की वो ड्राइवर है..
उसने शरमा का ज़मीन की तरफ देखते हुए ना में गर्दन हिला दी..

“आय हाय.. इसमें इतना शरमाने की तो कोई बात नहीं थी..।”

उसी समय कली को अपने एयरफ्रायर  में रखे आलू याद आ गए..

“ओह नो.. पता नहीं मेरे आलूओं का क्या हुआ होगा ?”

वो एयरफ्रायर की तरफ लपकी और शौर्य ने उसे शांत रहने का इशारा कर दिया..

“मैंने बंद कर दिया है.. वो अच्छे से पक गए हैं..।”

शौर्य ने दूसरी प्लेट में दूसरा ऑमलेट निकाला और एयरफ्रायर खोल कर एक और प्लेट में सारे कुरकुरे आलू निकाल दिये..

फ्रिज खोल कर उसने एक कटोरी में मेयोनीज़ भी निकाल ली…
वहीं रखें ड्राई हर्ब्स मसालों को उसने आलूओं पर छिड़क दिया और सारा सामान एक ट्रे में सलीके से सज़ा कर बाहर ले आया..

कली भी फुदकती हुई उसके साथ बाहर चली आयी..

कली ने झट से एक आलू उठा कर मुँह में रख लिया.. और आलू खाते ही उसके स्वाद में खोयी उसने आंखें बंद कर ली

“उह्ह्हमम… क्या स्वाद है.. लग रहा बनाने वाले के हाथ चूम लूँ.. !”

कली ने मुस्कुरा कर शौर्य की तरफ देखा.. शौर्य के माथे पर बल पड़ गए और कली ने अपना हाथ आगे कर अपनी उँगलियाँ चूम ली…

“जिओ कली जिओ… अगली मास्टर शेफ तुम्हें ही बनना है !”

शौर्य ने एक नज़र उस पर डाली और अपनी प्लेट उठा कर ऑमलेट का टुकड़ा मुहँ में डाल लिया..
खाते हुए उसे अख़बार पढ़ने की आदत थी..

“न्यूज़ पेपर लेती हो ?”

उसके सवाल पर कली ने ना में गर्दन हिला दी..

“एक बात पूछूं ?”कली ने सवाल किया

“हम्म !”शौर्य ने ज़रूरत भर का जवाब दे दिया

“तुम्हारी सैलरी कितनी है ?”

कली का सवाल सुन शौर्य उसे देखने लगा..
उसे अचानक कली के सवाल का महत्व या जरूरत समझ में नहीं आई!

” क्यों..?  मेरी सैलरी से तुम्हें क्या लेना देना? मेरे लिए लड़की ढूंढ रही हो क्या?”

कली की बेवकूफियों में अब शौर्य भी मजे ले रहा था..

” मैं क्यों ढूंढूंगी तुम्हारे लिए लड़की? वह तो बस इसलिए पूछा कि तुम्हारी सैलरी तो ड्राइवर वाली होगी, लेकिन तुम्हारी हरकतें, आदते कुछ ज्यादा ही रईसों वाली नहीं है ?
इतना स्टाइल से फोर्क से आमलेट खा रहे हो, खाते हुए तुम्हें न्यूज़ पेपर चाहिए!
इतनी स्टाइल से बैठे हो सोफे पर, ऐसा लग रहा जैसे कही का राजा बैठा है! तुम्हें देखकर ना किसी एंगल से लगता नहीं कि तुम ड्राइवर हो..!”

“हाँ फिर ? तुम्हें देख कर भी कहां लगता है कि तुम इतनी बड़ी वाली झल्ली हो.. ! शक्ल सूरत से ठीक-ठाक दिखती हो। और शांत रहो तो काफी रॉयल फील देती हो। लेकिन जैसे ही बोलना शुरू करती हो समझ में आ जाता है कि ऊपरी माला पूरी तरह से खाली है। लेकिन तुम्हारी शक्ल देखकर यह बात पता नहीं चलती..।”

” अच्छा ड्राइवर, तुम कुछ ज्यादा ही नहीं बोल रहे..?”

” नहीं मैं एकदम जरूरत भर की बात ही बोल रहा हूं। और वैसे भी किसी की शक्ल पर थोड़े ना लिखा होता है कि वह ड्राइवर है..!”

” तुम्हें मैं ड्राइवर बुलाती हूं तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगता ना..?”

” मुझे बुरा क्यों लगेगा? जब किसी डॉक्टर को हम डॉक्टर बुलाते हैं, वकील को लॉयर बुलाते हैं। टीचर को टीचर बुलाते हैं। तो ड्राइवर को ड्राइवर बुलाने में क्या प्रॉब्लम है..?”

” वैसे बातें बड़ी रॉयल टाइप की करते हो? ऐसा लगता है जैसे अपने नाम को तुमने कुछ ज्यादा ही सीरियसली ले लिया है,है ना प्रिंस ?”

कली की बात सुन शौर्य के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई ।
उसने अपने मोबाइल पर आज का अखबार खोला और पढ़ते हुए खाने में मगन हो गया।
कली ने उसे देखकर कंधे उचका दिये और वह भी सारिका को फोन लगाकर उससे बाते करते हुए खाने में मगन हो गयी..

****

शौर्य के सिक्योरिटी गार्ड्स को भी मालूम नहीं चल पाया था कि शौर्य रातों-रात कहां चला गया है..?

वह लोग लगातार शौर्य के मोबाइल पर फोन कर रहे थे लेकिन शौर्य का मोबाइल लग नहीं रहा था। उन लोगों ने सोचा शौर्य के ड्राइवर को जरूर मालूम होगा कि शौर्य कहां है? और इसीलिए उनमें से एक ने शौर्य के ड्राइवर को फोन मिला लिया।

वह सारे लोग घबराए हुए थे। क्योंकि उन्हें मालूम था कि अगर उनका राजकुमार उनकी छत्रछाया से कहीं दूर चला गया तो उन चारों की नौकरी खत्म हो जाएगी।

सिर्फ अपनी नौकरी भर के लिए नहीं, वह सभी लोग असल में सच्चे दिल से शौर्य को बहुत प्यार करते थे। और उनका राजकुमार पिछली रात से ही गायब था।
ना वह अपने फ्लैट पर था और ना ही अपने ऑफिस में था..।
इत्तेफाक से शौर्य के ड्राइवर का भी फोन नहीं लगा ।और इसलिए उन चारों ने फिलहाल प्रेम को बिना बताए ही शौर्य को ढूंढने की कोशिश शुरू कर दी। वह चारों अलग-अलग दिशाओं में बंट गए और शहर के सारे फाइव स्टार और सेवन स्टार होटल की खाक छानने निकल गये….

क्रमशः

aparna..

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Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
1 year ago

सुबह सुबह यह भाग पढ़कर होठों पर मुस्कान चली आई दीदी, जिस तरह उसने वासुकी से बात की, उसका कॉन्फिडेंट वाह, कली का किचन शौर्य ने संभाल लिया। और मेरे दूध में पत्ती ज्यादा हो गई…. बहुत अच्छा भाग दीदी।।।💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

शौर्य ने इतने आत्मविश्वास से वासुकी से बात की कि एक पल के लिए वासुकी को भी शक हो गया क्या ये डेरिक है, शक तो होना ही था क्योंकि डेरिक कि इतनी हिम्मत कहाँ जो वासुकी से कह सके कि वो मजाक कर रहा है, पर शौर्य ने संभाल लिया। हाय सच में झल्ली है कलि भी, अंडा तोड़ने के लिए हथोड़ा ले आयी 😃। पर शौर्य एक राजकुमार होकर भी कितना सिम्पल है और कितने आराम से किचन का काम कर रहा रहा 👏, बहुत लाजबाब होने वाला है आने वाला सफर 👌🏻।
बहुत मजेदार भाग 👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏼।