जीवनसाथी -3 भाग -21

कली के इंडिया जाने की सारी तैयारियां हो चुकी थी… लेकिन इन तैयारियों के दौरान कली जितना ही ज्यादा उत्साहित थी, सरु उतना ही ज्यादा दुखी हो रही थी..
सरू को रह-रहकर दर्श और वासुकी का ख्याल आ रहा था।
उसे लग रहा था उसके जाने के बाद 10 दिन यह लोग कैसे रहेंगे?
काका भी जब से कुछ ज्यादा बुजुर्ग हो गए थे इंडिया ही जाकर रहने लगे थे।
हालांकि वासुकी के घर में नौकर चाकर की कमी नहीं थी। बावजूद उसे ऐसा लग रहा था कि उसके जाने के बाद दर्श और वासुकी का ख्याल कौन रखेगा? और इसलिए तैयारियों के दौरान बार-बार कली सारिका को छेड़ उठती थी..।
” अरे आपका मन नहीं है तो आप मत जाओ ना, क्यों जा रही हो.. ?”
सरू आंखें तरेर कर कली को देखने लगती थी।
” मैं देख रही हूं कि आजकल हमारी प्रिंसेस कुछ ज्यादा ही एक्साइटेड है इंडिया के लिए।
जितना सोच रही हो ना, वहां पहुंचकर यह सारी एक्साइटमेंट दूर हो जाएगी। यहां जैसा खुशनुमा मौसम नहीं रहता वहां…।
वहां जब गर्मी पड़ती है, तो इतनी भयंकर गर्मी पड़ती है कि परेशान हो जाओ।
और जब सर्दियां होती हैं तब इतनी सर्दी पड़ती है उनसे परेशान हो जाओ। बारिश का भी पूछो मत, हाल बेहाल है.. !”
” क्या बात है? इसका मतलब हमारी सरू पैदा ही हुई थी लंदन में रहने के लिए। लेकिन सरू, कली पैदा हुई है, इंडिया में रहने के लिए..।
वह एक गाना है ना बहुत पुराना सा, मुझे इंडिया के लिए वह गाना याद आता है।
तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई, यूं ही नहीं दिल लुभाता कोई..।
इंडिया के साथ कोई जबरदस्त कनेक्शन तो है मेरा। जो मैं वहां जाने के लिए इतना एक्साइटेड हूं।
और पता है, इंडिया में सारे पुराने फोर्ट, पैलेस, पहाड़, नदियां, समंदर, सिर्फ इंडिया ने अपने अंदर हर चीज समाय रखी है।
सच में बहुत एक्साइटेड ऐसा लग रहा है। यह 10 दिन कभी खत्म ही ना हो..।”
” लेकिन याद रखिएगा मैडम, ठीक 10वे दिन सुबह हमको वहां से निकल जाना हेगा। 1 सेकंड की भी लेट हुई ना, तब तो आपके डैडा….
” जानती हूं, इसीलिए डैडा ने वापसी की टिकट भी करवा दी है।
खैर अभी वापसी की बातें करके मेरा मन उदास मत करो। अभी तो मैं इसी बात में खुश हूं कि मैं जा रही हूं इंडिया और यह 10 दिन मैं अपनी जिंदगी के सबसे खुशगवार यादगार पल जीने वाली हूं….।”
दोनों बातें करते हुए सामान भी रखते जा रहे थे…
सरू ने काफी सारे खाने पीने की चीजें भी बना ली थी। सब कुछ सही तरीके से रखते हुए सरू बीच-बीच में कली को कुछ बातें भी समझाती जा रही थी। उसी वक्त वासुकी वहां चला आया…
उसने अपना कार्ड निकाल कर कली के हाथ में रख दिया..
“ये कार्ड तुम्हारे लिए इश्यू करवाया है.. ये इण्डिया में भी चलेगा, लेकिन हर एक एटीएम में ये काम नहीं कर पायेगा..
इसलिए तुम एयरपोर्ट पर उतरने के बाद कैश निकाल कर अपने पास रख लेना..।
बहुत ज्यादा कैश रखना भी सुरक्षित नहीं है.. तो इस बात का ध्यान रखना.. और जब ज़रूरत हो देख लेना.. !
वैसे कली तुम्हें नहीं लगता दस दिन बहुत ज्यादा है ?”
“डैडा…. जब आप अपने बिज़नेस टूर पर जाते हैं ना, तो दस दिन आपके यूँ निकल जाते हैं..।
इस बार भी आप न्यूयार्क जाने ही वाले हैं.. तो काम में रहते हुए आपके दिन यूँ कट जायेंगे.. !”
वासुकी ने कली के सर पर हाथ रखा और उसके बाल सहला दिये.. उसका गुमसुम सा चेहरा देख कली उसके सीने से लग गयी..
“दिस इस नॉट फेयर डैडा… मैं पहली बार जा रहीं हूँ, इतनी एक्साइटेड हूँ, और आप बार बार अपना मुहँ लटका लेते हैं..।
ऐसे मत करिये ना प्लीज़.. वरना मैं जा नहीं पाऊँगी.. !”
“हम्म.. मैं ठीक हूँ.. पर तुम अपना ध्यान रखना प्रिंसेस !”
“श्योर डैडा.. !”
कली वासुकी के गले से लगी खड़ी रह गयी.. ।
देखते ही देखते इंडिया जाने का समय भी आ गया। देखा जाए तो ना दर्श चाहता था कि कली इंडिया जाए और ना वासुकी ।
लेकिन कली भी अपने दिल की पक्की थी, आखिर थी तो वह नेहा की बेटी
कली के दोस्तों को कली ने समझा दिया था कि उन सबको भी एयरपोर्ट पहुंचना है…।
वो सारे लोग वासुकी से जबरदस्त डरते थे, और इसीलिए कली की बात भी काट नहीं पाते थे। उसके वह तीनों दोस्त जिन्होने वासुकी से कली के साथ इन्डिया चलने की बात कही थी, वह भी निर्धारित समय पर हीथ्रो एयरपोर्ट पहुंच गए.. ।
बाहरी मुख्य द्वार से अंदर जाने के लिए टिकट दिखाना होता था, फिर चाहे वो कहीं भी जाने का हो..।
कली के दोस्तों ने पेरिस की टिकट्स करवा रखी थी..
वो सब एक साथ ही वहाँ पहुंचे, तब तक कली भी अपने डैडा के साथ पहुँच चुकी थी..।
कली ने जैसे ही अपने दोस्तों को देखा, उसने जोर से हाथ हिला दिया। उसके दोस्त भी उसकी तरफ देखकर हल्के से मुस्कुरा उठे।
उन तीनों के चेहरे बिल्कुल ऐसे लग रहे थे जैसे कत्ल के लिए ले जाते हुए बकरे.. !
वासुकी ने उन तीनों को देखा और वैसे ही चुप खड़ा रहा। उन तीनों ने वासुकी का अभिवादन किया और कली से बात करने लगे। वासुकी ने डैरिक को देखा और उससे पूछ लिया..
” तुम इंडिया में क्या करोगे? मेरा मतलब तुम्हें वहां का वेदर शायद उतना पसंद ना आए.. !”
“नहीं सर, पसंद आएगा ! “
“हम्म… टिकट्स दिखाना अपनी.. !”
इतनी सर्दी में भी डेरिक के माथे पर पसीना चमकने लगा..
” आहा..हम्म… ये… एक्चुली..
टिकट्स…. किसके पास है?
ओह्ह शायद मेरे पास…. 1 मिनट सर मैं दिखाता हूं!”
वो अपने बालों पर हाथ फेरने लगा..
“बालों में छुपा रखी है क्या टिकट्स ?”
कली ने उसे छेड़ दिया और वह घूर कर कली को देखने लगा। कली मुस्कुराने लगी।
” पता है डैडा, एक बार एग्जाम के वक्त यह अपने बालों में चिट्स छिपा के लाया था..।
अपने बालों की भीतरी लेयर पर इसने पिन की सहायता से चिट्स को अटैच कर दिया था, और ऊपर से अपने बालों की सेकंड लेयर सेट कर दी। किसी को मालूम भी नहीं चला कि इसके बालों के भीतर चिट्स छिपी हुई है। लेकिन आपको पता है यह उन्हे यूज नहीं कर पाया..
“क्यूँ ?”
“क्योंकि यह जिन क्वेश्चन के आंसर लिख कर ले गया था, वह क्वेश्चन ही नहीं आए। सारा पेपर बेकार चला गया और यह डंबो कुछ भी लिख कर चला आया। मैंने इसकी हेल्प की थी। याद है डैरिक ?”
“बिल्कुल याद है.. और आज तक उस एहसान का बदला चुका रहा हूं, अपने खून पसीने से.. ।”
डेरिक की बात सुनकर कभी ना हंसने वाले वासुकी के चेहरे पर भी हल्की सी हंसी आ गई।
” तुम इतने फिल्मी डायलॉग बोलना किससे सीख रहे हो? कली से तो नहीं..?”
“यस सर! इसी की संगत का असर है। इसने मुझे भी टिपिकल इंडियन डायलॉग मारना सिखा दिया है।
80-90 की इतनी फिल्में देखती है यह, और हम लोगों को भी दिखाती है।
मूवीस के गाने सुनाती रहती है।
सुना सुना के सब को पागल कर दिया है।
एक कोई अजीबोगरीब सा गाना भी गाती है जो हमें कहीं नहीं मिला, बस यही गाती है उस गाने को।”
डेरिक पल भर को रुका और होने कान एयरपोर्ट के अंदर से आती आवाज़ ओर केंद्रित करने लगा..
“एक्सक्यूज मी! लगता है अंदर से अनाउंसमेंट हो रही है। चल कली, वरना हम लेट हो जाएंगे।”
सारे बच्चों ने एक साथ वासुकी को देखकर हाथ हिलाया और गेट से अंदर चले गए।
सारिका भी उनके पीछे-पीछे अंदर की तरफ बढ़ने लगी।
आगे बढ़ते हुए अचानक कली थमी और वापस लौट कर अपने डैडा के पास चली आई।
वासुकी उसे आता देखकर धीरे से मुस्कुरा उठा। उसने अपने हाथ बढ़ा दिये।
लेकिन कली वासुकी के पास पहुंचकर उसके सीने से लगने की जगह उसके पैरों पर झुक गई।
उसने अपने दोनों हाथ अपने डैडा के जूतों पर रख दिए। वासुकी कली को ऐसे करते देख हड़बड़ा गया।
” यह क्या कर रही हो कली?”
” आपके पैर छू रही हूं डैडा।”
और धीरे से अपने डैडा के पैर छूकर कली खड़ी हो गई। वासुकी ने अपनी प्यारी सी बेटी को अपने सीने से लगा लिया।
” खूब खुश रहो मेरी बच्ची..!
ऊपरवाला तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करें। जल्दी वापस आना, वरना तुम्हारा डैडा रह नहीं पाएगा..।”
“सॉरी डैडा !” होंठो ही होंठो में बुदबुदा कर हां में सिर हिला कर कली वापस चली गई..
सारिका ने भी वहीं से वासुकी को देखकर हाथ हिला दिया।
अपनी बातों में उलझा कर डैरिक और बाकी बच्चे बिना टिकट दिखाये ही अंदर चले गए थे।
अंदर जाने के बाद उन लोगों की पैरिस की फ्लाइट थी। जो लगभग 5 घंटे बाद थी।
लेकिन उन्हें कली के डैडा के सामने यह दिखाना था कि वह भी कली के साथ इंडिया जा रहे हैं।
इसलिए वह लोग अपने समय से पहले ही वहां पहुंच गए थे। कली ने एक-एक कर अपने सारे दोस्तों को अपने गले से लगाया और सब को थैंक्स बोल कर अपनी फ्लाइट की तरफ चली गई।
चेक इन और सिक्योरिटी चेकिंग के बाद कली और सारिका अपनी फ्लाइट की गेट की तरह बढ़ गए…
लगभग घंटे भर बाद में दोनों इंडिया की तरफ उड़ने वाली फ्लाइट में बैठे हुए थे।
कली का उत्साह अपने चरम पर था। खिड़की से बाहर देखती वो खुशियों में खोयी हुई थी..।
कुछ देर बाद कली के विमान ने उड़ान भरी और इण्डिया की तरफ उड़ चला…
उस विमान के गुज़रते ही, वासुकी भी एयरपोर्ट के अंदर दाखिल हो गया..।
लगभग आठ घंटे बाद उसकी भी इण्डिया के लिए फ्लाइट थी..।
आखिर वासुकी जैसा आदमी ऐसे कैसे कली को अकेले जाने दे देता…?
लेकिन लंदन का मौसम अचानक ही बदलने लगा। तेज सर्द हवाएं बहने लगी और इन हवाओं के साथ साथ इतनी जोरदार बारिश हुई कि कुछ देर के लिए सामने क्या हो रहा है यह भी नजर आना बंद हो गया।
रिमझिम बारिश की बूंदे कुछ देर बाद ही मूसलाधार में बदल गई। और उसके साथ ही बर्फ़बारी शुरू हो गयी..
और इतनी जोर की बर्फबारी शुरू हो गई की एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाली सार ही विमान रद्द कर दिए गए।
इंडिया की तरफ उड़ान भरने वाला यह विमान इस हफ्ते का आखिरी विमान था। इसके बाद लगभग हफ्ते भर तक इंडिया के लिए कोई और फ्लाइट नहीं थी।
यह मालूम चलते ही वासुकी परेशान हो गया। उसे ऐसा लगा जैसे उसे किसी गहरे तहखाने में बंद कर दिया गया है।
उसने एयरपोर्ट पर मौजूद अथॉरिटी से चर्चा शुरू कर दी।
वह किसी भी कीमत पर इंडिया जाना चाहता था। लेकिन वहां मौजूद सभी लोगों ने उस से माफी मांग ली। उसे बता दिया कि खराब मौसम के कारण इंडिया के लिए अब फिलहाल कोई फ्लाइट उड़ान नहीं भरने वाली है ।
और अगले 6 दिन के पहले उसे कोई फ्लाइट नहीं मिलेगी।
मन मसोसकर वह वहीं बैठा रह गया…
*****
दिल्ली की फ्लाइट अपनी रफ्तार पकड़ चुकी थी। उसके बाद हीथ्रो का मौसम खराब हुआ था।
इसलिए कली की फ्लाइट पर उसका कोई असर नहीं हुआ, और अपने निर्धारित समय पर वह इंडिया लैंड कर गई।
एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही उसे उसका नाम लिखी हुई तख्ती नजर आने लगी। वह उस तख्ती के पास पहुँच गयी.. ।
विराट ने अपने ड्राइवर को कली को एयरपोर्ट से लेने के लिए भेज दिया था। ड्राइवर के साथ कली और सरु बैठकर निकल गये..।
दिल्ली में जिस बिल्डिंग में हर्षवर्धन का ऑफिस था, वही दंसवी मंजिल पर विराट का भी ऑफिस था। जहां पर उसकी फोटोग्राफी एग्जिबिशन, उसकी किताबें, उसकी पेंटिंग, कल्चरल इवेंट्स आदि के काम देखे और सुने जाते थे।
दंसवी मंजिल पर मौजूद इस लंबे चौड़े ऑफिस में लगभग 40 एंप्लॉय काम किया करते थे। कली को फिलहाल विराट का ड्राइवर विराट के ऑफिस लेकर चला आया..।
कली और सरु दोनों ही थके हुए थे लेकिन इस वक्त विराट से मिलना भी जरूरी था…।.
विराट के ऑफिस में कली ने जैसे ही प्रवेश किया, विराट अपनी कुर्सी से उठकर कली की तरफ बढ़ गया। उसने बड़ी गर्मजोशी से कली और सरू का स्वागत किया। सरू तो विराट के इतने शानदार ऑफिस को देखकर ही अभिभूत थी।
विराट की कुर्सी के ठीक पीछे जमीन से लेकर छत तक विराट की बड़ी सी फोटो लगी थी। जिसमें वह एक महाराजा कुर्सी में थ्री पीस सूट पहने बैठा बड़ा शानदार लग रहा था।
और उसके कुर्सी के ठीक पीछे एक अंग्रेज खड़ा था। सरू कुछ देर को उस तस्वीर को देखती रह गई। जैसे वह उस पीछे खड़े आदमी को पहचानने की कोशिश कर रही हो।
विराट ने सरु को देखा और मुस्कुरा उठा..
सालों साल विदेश में रहने के कारण विराट की बोलचाल में भी एक अंग्रेजी लटका आ चुका था। बावजूद वह अपनी जड़ों को नहीं भूला था।
इसलिए उसकी पूरी कोशिश रहती थी कि वह हिंदी में ही सब से बात करे। कली और सरू से उन दोनों का हाल-चाल पूछने के बाद उसने उन दोनों के लिए कॉफी मंगवाई और नाश्ते की पेशकश रख दी।
हालाँकि थकान के कारण वो लोग पहले अपने रूम में जाकर आराम करना चाहती थीं।
उसने बेहिचक विराट से फ्लैट के लिए पूछ लिया… ।
विराट और कली के बीच न जाने कौन सी अनजानी डोर बंधी थी जिसके कारण दोनों ही एक दूसरे में किसी अपने को ढूंढने लगते थे।
शायद इसीलिए कली को भी विराट से किसी तरह का कोई संकोच नहीं था। विराट तो फिर कली में अपनी प्यारी भाभी बांसुरी के दर्शन पाता था। इसलिए उसे कली से विशेष लगाव था। उसने तुरंत अपने ड्रॉज से फ्लैट की चाबी निकाली और कली के हाथ में थमा दी…।
” मेरा ड्राइवर तुम्हें घर छोड़ा आएगा.. ! यहां से कुछ दूर पर एक सोसाइटी है, वहीं पर तुम्हारे लिए फ्लैट लिया है। तुम्हारी जिद थी वरना मेरा खुद का फ्लैट खाली पड़ा है। लेकिन मैं जानता था कि तुम वहाँ रहोगी नहीं !”
” थैंक यू सर। आपने मेरे मन से एक बड़ा बोझ हटा दिया। मैं एक ऐसा फ्लैट चाहती थी,जिसका रेंट मैं खुद पे कर सकूं। अभी तो फिलहाल मैं 10 दिन के लिए आई हूं, लेकिन हो सकता है कि मेरी यह छुट्टियां बढ़ जाए। मैं यहां रहकर अपना कैरियर बनाना चाहती हूं। लंबे समय तक रहने के लिए मुझे एक सामान्य सा घर चाहिए। क्योंकि मैं अपनी मेहनत के पैसों से यहां रहना चाहती हूं।
वरना तो मेरे कहने भर की देर थी, मेरे डैडा मेरे लिए एक फ्लैट खरीद कर दे देते। लेकिन मुझे वैसा नहीं चाहिए, और बस इसीलिए सर मैंने आपके फ्लैट पर भी रहने से मना कर दिया..!”
” मैं पूरी तरह से समझ सकता हूं कली। वैसे भी आजकल की जनरेशन के बच्चे चाहे गोल्डन स्पून लेकर पैदा हुए हों, लेकिन उन्हें हर काम अपने बलबूते पर करना है।
और मुझे यह चीज अच्छी भी लगती है…वैरी गुड.. !. मैंने तुम्हारे बजट के हिसाब से ही फ्लैट बुक किया है। जिसका रेंट तुम आराम से पे कर सको और सुनो तुम मेरे ऑफिस में इंटर्नशिप करोगी, जिसकी सैलरी मैं तुम्हें दूंगा हैप्पी..?”
“वेरी हैप्पी सर ! लेकिन… सर !”
“हाँ हाँ.. तुम्हें भी बाकी इंटर्न्स की तरह ही सैलरी दी जायेगी.. कोई ख़ास फ्री बिज़ तुम्हें नहीं मिलने वाले..। चलो अब जाओ और आराम करो.. और हाँ सुनो.. आज रात मेरे बच्चे पार्टी कर रहें हैं..।
वहाँ तुम भी आ जाना.. तुम्हें उन सब से मिलवा भी दूंगा.. क्यूंकि हो सकता है आगे हर्ष के ऑफ़िस में फोटोग्राफर की ज़रूरत पड़े तो तुम्हें वहाँ भी काम करना पड़ सकता है.. ! और… मैं आज रात….
विराट अपनी बात पूरी कर पाता, उसके पहले किसी का फ़ोन आने लगा..
उसने कली को इशारा किया और फ़ोन उठा लिया
“ओके सर !” कह कर कली ने हामी भरी और फ़ोन पर हाथ रख विराज ने उसे पता बता दिया..
“पार्टी ब्लू लगून में है.. ठीक आठ बजे मेरा ड्राइवर तुम्हें लेने..
” नहीं सर ऐसे आप बार-बार मेरे लिए अपने ड्राइवर को भेजते रहेंगे, तो मैं अपने खुद के पैरों पर कैसे चल कर कहीं भी जा पाऊंगी?
मैं ब्लू लगून में शाम 8 बजे पहुंच जाऊंगी, आप चिंता मत कीजिए और अपने ड्राइवर को अपने साथ ही रखें..!”
मुस्कुराकर कली चाबी उठाकर सरु के साथ कमरे से बाहर जाने लगी..
ड्राइवर के नाम पर अचानक उसे वह मनमौजी अजीब से स्वभाव का लड़का याद आ गया, जो लंदन के पैलेस में उस से टकराया था।
प्रिंस…. हां यही नाम तो बताया था उसने। मुस्कुराकर कली सरू के साथ विराज के ऑफिस से बाहर निकल गई..
उन दोनों को ही विराट के ड्राइवर ने उनके अपार्टमेंट के फ्लैट में सुरक्षित पहुंचा दिया। अपने फ्लैट का दरवाजा खोलकर अंदर जाते ही कली ने एक सुकून की सांस ली।
विराट ने पहले ही फर्निश्ड फ्लैट बुक किया था। फ्लैट में 1 बैडरूम हॉल और किचन था।
बैडरूम में एक डबल बेड था… ।
सरू और कली ने अपना सामान वही रख लिया।
सरू बेडरूम से निकलकर किचन देखने चली गई। बिल्कुल नए तरीके से बना मॉड्यूलर किचन था। जहां पर फ्रिज अवन, हॉब, सब कुछ बेहतरीन तरीके से लगा था..।
सरु घूम घूम कर सब देख रहीं थी और खुश हो रही थी..
अचानक उसे याद आया कि उसे काका को फ़ोन कर लेना चाहिए..
सरु और कली ने इण्डिया आते ही यहाँ के नंबर ले लिए थे….
सरू ने काका के नंबर पर फोन लगा दिया। पहली बार में पूरी घंटी जाने के बाद भी किसी ने फोन रिसीव नहीं किया.. सारिका ने एक बार फिर कॉल लगा दिया और इस बार किसी औरत ने फोन उठाया..
” आप कौन बोल रही हैं, मुझे काका से बात करनी थी..!”
सारिका ने कहा और वह औरत एक ठंडी सी आवाज मे सारिका को काका का हाल-चाल बताने लगी..
” क्या आप लंदन से वासुकी सर के घर से बोल रही हैं..?”
” जी मैं सारिका बोल रही हूं। लेकिन फिलहाल इंडिया आई हुई हूं ।इसलिए सोचा काका का हालचाल ले लेना चाहिए..!”
” बहुत अच्छा किया जो आपने फोन कर लिया। काका की हालत बहुत खराब है। पिछले कई दिनों से उनकी तबीयत बहुत खराब चल रही थी। और अब यह पूरी तरह से बिस्तर पर पड़े हुए हैं। समझ लीजिए बस अपनी जाने की घड़ियों का इंतजार कर रहे हैं..!”
” क्या बात कर रही हैं आप? उन्होंने कुछ बताया ही नहीं..!”
” हम लोगों ने तो बहुत बार कहा, एक बार वासुकी सर को बता दीजिए। वह खुद आपको लेने आ जाएंगे। और आप का अच्छे से अच्छा इलाज करवाएंगे ।
लेकिन इन्हें भी जाने क्या धुन सवार है, कहते हैं कि अपनी आखिरी सांसे अपनी ही मिट्टी में लेना चाहता हूं। और इसीलिए वासुकी सर को कुछ नहीं बताया।
उनके पास से हर महीने इनके लिए पैसे आते हैं, जो इनके अकाउंट में ही पड़े रहते हैं ।
इन्होंने सारे पैसे निकालने भी बंद कर दिए हैं। अपने ऊपर कुछ खर्च ही नहीं करना चाहते..।
अच्छी बात है कि आप इंडिया आई हुई है। अगर हो सके तो एक बार आकर इन्हें देख जाइए।
हो सकता है आपसे मिलकर यह अपना इलाज करवाने की बात मान लें..!”
” आप लोग हैं कहाँ ?”
“देहरादून में !”
देहरादून सुनते ही सारिका के दिमाग में सब कुछ वापस घूमने लगा।
जो भी था लेकिन वह काका को ऐसे मरने के लिए नहीं छोड़ सकती थी। उसने नजर उठाकर कली की तरफ देखा।
कली अपने नए फ्लैट में एक एक वस्तु उठा उठा कर देखती हुई खुश हो रही थी। सारिका ने फोन एक तरफ रखा और कली के पास पहुंच गई।
उसका चेहरा अपनी दोनों हथेलियों में भरा और प्यार से उसका माथा चूम लिया..
” कली, काका की तबीयत बिल्कुल ठीक नहीं है। वह इस वक्त देहरादून में है, और अपनी अंतिम सांसे ले रहे हैं। मैं एक बार जाकर उनसे मिलना चाहती हूं ।
मैं जानती हूं तुम्हें सिर्फ 10 दिन के लिए यहां आने की अनुमति मिली है। मैं इसलिए अकेले ही उनसे मिलने चली जाऊंगी। अगर तुम इजाजत दो तो, क्या तुम एक-दो दिन के लिए यहां अकेले मैनेज कर सकती हो?”.
कली आगे बढ़कर सरू के गले से लग गई..
” यह भी कोई पूछने वाली बात है सरू? आपने बचपन से मेरे लिए इतना कुछ किया है। क्या मैं आपके लिए इतना सा नहीं कर सकती। आप बेशक जाओ और सुनो डैडा को मैं कुछ नहीं बताऊंगी।
लेकिन प्रॉमिस करो, आप भी उन्हें कुछ नही बतायेंगी। ठीक है और एक-दो दिन नहीं आप आराम से 5 दिन में हो आओ। मुझे कोई हड़बड़ी नहीं है।
वैसे भी मेरा पूरा दिन तो ऑफिस में कटेगा। आप यहां पर बोर ही होती। इससे अच्छा है, आप काका से मिलकर आ जाओ..।”
“बहुत समझदार हो गई हमारी प्रिंसेस..! जैसे वह औरत बात कर रही थी, मुझे ऐसा लगता है कली कि मुझे अभी निकल जाना चाहिए।
अगर अभी आराम करने लग गई तो आज का पूरा दिन निकल जाएगा।
हमारे पास दिन भी तो कम है ।आज ही जाती हूं, रात भर में पहुंच जाऊंगी। कल उन्हें देखकर अस्पताल में दिखाकर एक-दो दिन उनकी सेवा करके वापस लौट आऊंगी..!”
” विराट सर को फोन करूं? ड्राइवर के लिए..?”
” नहीं, मुझे किसी को परेशान नहीं करना।
मेरा सारा बचपन देहरादून की गलियों में ही तो बीता है, दिल्ली और देहरादून मेरे लिए कोई नई जगह नहीं है। कली मैं चली जाऊंगी.. बेटा अपना ध्यान रखना..!”
कली ने प्यार से हां में गर्दन घुमा दी।
सारिका भी कली को दिल्ली में ऐसे अकेले नहीं छोड़ना चाहती थी, लेकिन उसने विराट का स्नेहिल स्वभाव कली के लिए भांप लिया था…।
विराट की विनम्रता में किसी पिता की ममता की छांव नजर आ रही थी, और इसीलिए सारिका कली को विराज के भरोसे यहां छोड़कर जाने को तैयार हो गई। उसे अपना वह समय याद आ गया, जब उसके साथ किशोरवय में कुछ लड़कों ने बहुत गलत किया था। और उस समय पर काका ने उसे बहुत सहारा दिया था। शुरुआती चार छै महीने वह और उसकी मां काका के संरक्षण में ही रह रहे थे।
तब उन्होंने उसे बिल्कुल अपनी बेटी की तरह सीने से लगाकर उसके डर को भगाने में मदद की थी। उसके बाद कुछ समय के लिए वह और उसकी मां एक एनजीओ में शामिल हो गए थे, और वहां रहने लगे थे। लेकिन साल 2 साल बीतते ही उसे वासुकी ने वापस बुला लिया था ।
और एक बार फिर काका की स्नेहिल छांव में वह उन्मुक्त लड़की सी अपने दर्द को भूलने लगी थी..
दर्श के साथ उसकी अक्सर कहासुनी होती थी। और काका हमेशा उसका साथ देकर दर्श को ही गलत साबित कर देते थे।
उसकी पसंद की खीर बनाने के लिए काका पहाड़ियों से नीचे उतर कर मैदान में जाकर दूध वाले से ताजा दूध लेकर आते थे।
वहीं बाजार में एक किनारे दुकान थी जहां पर बंगाली गुड मिलता था..।
काका उसके लिए विशेष तौर पर उस गुड को खरीद कर लाते थे और उसके जन्मदिन पर खीर बनाया करते थे..।
मां के जाने के बाद उसने काका में अपनी मां और पिता की छवि देखी थी और इसलिए आज जब उनकी तबीयत के बारे में पता चला तो जाने क्यों बेहाल होकर उनसे मिलने के लिए वह तड़प उठी। यहां तक कि वह कुछ पल के लिए यह भी भूल गई कि वह अपनी मासूम सी प्रिंसेस को दिल्ली जैसे शहर में अकेला छोड़ कर जा रही है।
वासुकी का डर तो था ही, लेकिन साथ ही विराट की सौम्यता ने भी उसे मोह लिया था…।
कली ने तुरंत सारिका के लिए ऑनलाइन टिकट निकाली और सारिका कली से मिल कर काका से मिलने निकल गयी..
कली फ्रेश होकर शाम की पार्टी की तैयारी में लग गयी..।
वैसे उसे ज्यादा कुछ मालूम नहीं था, इसलिए अपना लैपटॉप खोल कर वो वहाँ की जानकारी निकालने लगी..
उसके फ़्लैट से महज बीस मिनट की दूरी पर था.. ब्लू लगून।
कली आज पूरे फ़्लैट पर अकेली थी.. ये उसके लिए एकदम नया अनुभव था..।
आज तक वो कभी अकेली नहीं रहीं थी..।
उसे लग रहा था झूम झूम कर नाचे, झूम झूम कर गाए .
उसने टीवी चलाया और गाने लगा कर नाचने लगी..
स्वतंत्रता का असली स्वाद आज उसने चखा था.. ।
लेकिन अभी तो बहुत कुछ देखना बाकी था….
क्रमशः
aparna…

स्वतंत्रता अनुभूति है और इसका एहसास अपने लिए फ़ैसलों से होता है, कली की छोटी सी आशा बड़ी हो गई है, अब वह यहीं रहना चाहती है, जीना चाहती है अपने मन का करना चाहती है लेकिन वासुकी उसके मन मे चिंता समाई है वह उड़ कर आ जायेगा। अब होटल में क्या होगा पढ़ना रोचक होगा, बेहतरीन भाग दीदी…🙏💐
आज कलि का सपना पूरा हो गया भारत आने का, वासुकी ने कोशिश तो बहुत की कलि के पीछे पीछे भारत आने पर शायद ईश्वर भी चाहते है कलि अपने मकसद में कामयाब हो इसलिए तो सारिका को जाना पड़ा काका को देखने कलि को अकेला छोड़कर।
देखते है आगे का क्या होता है…।
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻