जीवनसाथी -3 भाग -20

जीवनसाथी -3 भाग -20

जीवनसाथी by aparna

उसका अच्छा खासा मूड चौपट हो गया था..
शौर्य अगले स्टॉप पर उतरा और बस के पीछे पीछे आ रहीं अपनी लम्बी चौड़ी सी गाडी में सवार हो कर मीरा के पास वापस जाने मुड़ गया..

उसकी महंगी सी वॉल्वो एस -90 सड़क पर आराम से चलती जा रहीं थी..
बाहर मौसम बहुत सुहाना था, काफी दिनों बाद हल्के हल्के बादल आसमान पर छाए हुए थे। उजाले और अंधेरे के बीच सूरज आंख मिचौली खेलता यूं लग रहा था जैसे मुस्कुरा रहा है.. ।
बाहर की कच्ची सी धूप में हल्की हल्की सी फुवारे पड़ने लगी थी ।
बाहर देखता हुआ शौर्य जाने क्या सोचकर गाड़ी को रुकवा बैठा। गाड़ी को रुकवाने के बाद ड्राइवर को कुछ समझा कर वह नीचे उतर गया। वह पैदल ही आगे बढ़ना चाहता था, उसके ड्राइवर ने उसे समझाने की कोशिश की..

” हुकुम आप इस तरह रोड पर अकेले पैदल कैसे चल सकते हैं? इस वक्त तो आपका कोई गार्ड भी आपके साथ नहीं है..!”

” यहां कोई नहीं जानता कि मैं एक राजकुमार हूं। और सच कहूं तो यह गार्ड की फौज लेकर जब हम राज परिवार वाले रोड पर उतरते हैं ना, तो दूसरे हमें पलट पलट कर देखने लगते हैं।
उन लोगों को समझ में आ जाता है कि हम कुछ एबनॉर्मल लोग हैं। मुझे तो यह लॉजिक समझ में नहीं आता। महल के लोग कहते हैं कि हमारी सेफ्टी के लिए हमारे साथ गार्ड रहते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि गार्ड्स के कारण हम ज्यादा परेशानी में पड़ जाते हैं। क्योंकि उन गार्ड्स की मौजूदगी के कारण जिनका ध्यान हम पर नहीं भी जाता ना, वह भी समझ जाते हैं कि हम सामान्य लोग नहीं है..!”

शौर्य की गहरी सी बात ड्राइवर के पल्ले नहीं पड़ी। ड्राइवर भी अट्ठारह -बीस साल का लड़का था। जो आज अपने पिताजी की जगह ड्यूटी करने आया था। वह अपना सर खुजाने लगा और शौर्य उसे देख कर मुस्कुरा उठा।
शौर्य ने उसके कंधे पर हाथ रखकर थपथपा दिया..

” तुम चाहो तो वापस लौट सकते हो, मैं फ्लैट पर पहुंच जाऊंगा..!”

” नहीं हुकुम, आपको अकेला छोड़कर जाने की इजाजत नहीं है मुझे! और ना मैं जाऊंगा ! आप पैदल चलना चाहते हैं तो चलिए, मैं आपके साथ पैदल ही चलूंगा..!”

“ओके… वैसे तुम्हारा नाम क्या है ?”

“प्रिंस !”

अपने ड्राइवर का नाम सुन शौर्य को एकदम से लंदन वाली वह बात याद आ गई, जिसमें उसने कली से अपना परिचय एक ड्राइवर के तौर पर दिया था और अपना नाम प्रिंस बताया था।
क्या अजब इत्तेफाक था, उसे प्रिंस नाम सुनकर एक बार फिर कली याद आ गई और वह मुस्कुरा उठा..

” ठीक है प्रिंस, ऐसा करो तुम गाड़ी में ही साथ साथ चलो..!”

” लेकिन हुजूर आप पैदल चलेंगे और मैं गाड़ी में..

प्रिंस को बड़ा संकोच हो रहा था लेकिन शौर्य ने उसके कंधे पकड़कर उसे मोड़ा और गाड़ी के पास जाकर सामने का दरवाजा खोल कर उसे अंदर धकेल दिया..

” अगर हम दोनों ही पैदल चलने लगे और कुछ दूर जाकर मुझे थकान हो गई, और मुझे तुरंत बैठने की जरूरत हुई तो तुम्हें वापस उतनी ही दूरी पैदल तय करनी पड़ेगी, गाड़ी लेने के लिए! और हो सकता है, मैं  उतनी देर खड़ा ना रह पाऊं? इसलिए बेहतर होगा कि तुम गाड़ी में साथ साथ चलो, जिससे जब भी मुझे गाड़ी में बैठने का मन करें मैं तुरंत बैठ जाऊं.. !”

आखिर शौर्य के ड्राइवर को उसकी बात माननी पड़ी और शौर्य के पीछे गाड़ी में बैठ कर गाड़ी चलाने लगा…।

शौर्य खुद में मगन रास्ते पर पड़ने वाले अपने हर एक कदम को महसूस करता आगे बढ़ता चला जा रहा था। कि तभी उसकी नजर दूर एक पेड़ के नीचे एक छोटी से कुर्सी लगाकर बैठे वृद्ध पर पड़ी।

शौर्य उस आदमी की तरफ धीरे-धीरे बढ़ रहा था, उस आदमी के सामने एक लगभग शौर्य की ही उम्र का लड़का खड़ा था। जो उस आदमी से कुछ न कुछ सवाल पूछ रहा था।
शौर्य थोड़ा और करीब पहुंचा और उसके कान में उस लड़के के सवाल पङने लगे। लड़का उस बूढ़े आदमी से किसी ऐसी जादुई चीज की मांग कर रहा था जिसके उपयोग से वो जल्द से जल्द अमीर हो जाए..।

बुड्ढा आदमी उसे बार-बार यह समझा रहा था कि जब तक वह मेहनत नहीं करेगा तब तक सिर्फ किस्मत के बलबूते पर वह अमीर आदमी नहीं बन सकता ।
शौर्य भी धीरे से जाकर उस लड़के के बगल में खड़ा हो गया..

” क्या करना चाहते हो अमीर होकर..?”

“अमीरी भोगना चाहता हूँ !”

“कैसे ? मतलब वो कौन से काम है जो करना चाहते हो ?” शौर्य ने पूछा

” शानदार आलीशान घर पर रहना चाहता हूं। जहां मेरा अपना कमरा हो। खूब बड़ा और शानदार।
गद्दा ऐसा हो जिस पर मैं कूद पङूं तो दो बार ऊपर उछल जाऊं।
नौकर नौकरानी की भीड़ हो मेरे सामने।
मुझे जूते पहनाने से लेकर कपड़े पहनाने तक के लिए लड़के आगे पीछे घूमे।
मैं तैयार होकर बाहर निकलूं और नाश्ता मेरी टेबल पर पहुंच जाये। अगर मुझे पसंद ना आए तो मैं यूं ही बिना खाये सरका दूं।
      नौकर हाथ जोड़े मेरे सामने खड़े हो जाएं कि मैं क्या खाना चाहता हूं?
घर से बाहर निकलूं कि, मेरे लिए मेरा खास नौकर आकर यह पूछे कि मैं आज कौन सी वाली गाड़ी से जाना चाहता हूं?
मेरी पसंद की गाड़ी मेरे सामने मौजूद हो और उसमे बैठकर मैं शहर घूमने निकल जाऊं।
बड़े से मॉल में, जिस बड़े स्टोर में मुझे जो चीज पसंद आ जाये, बस उस पर उंगली रख दूं और उसका मालिक सारा सामान मेरी गाड़ी में रख दे।
इसके अलावा और क्या करते हैं भाई अमीर लोग..?
बस यही सब करना चाहता हूं..!”

” तुम्हें गलतफहमी है दोस्त, अमीर लोग इसमें से कुछ भी नहीं करते?”

” तुम्हें कैसे पता? तुम तो खुद मेरी तरह पैदल घूम रहे हो?”

शौर्य मुस्कुरा कर जमीन की तरफ देखने लगा। अपने होठों को धीरे धीरे चलाते हुए वो जमीन को बड़े ध्यान से देख रहा था। और फिर उसने अपनी आंखें उठाई और सामने खड़े उस लड़के को बड़े गौर से देखने लगा..

” तुम्हारे घर पर कौन-कौन है?”

” मां है,पापा है, एक बहन भी है छोटी। लेकिन हर वक्त मुझे तंग किए रहती हैं ।
मुझे नहीं पसंद है मेरा घर और ना ही मेरे पेरेंट्स..!

“तो इसका मतलब अगर मैं तुमसे यह कहूं कि मैं तुम्हें पचास लाख रूपये देता हूं, तो तुम अपने पैरंट्स को छोड़ दोगे ?  बोलों क्या छोड़ दोगे उन्हें ?”

वह लड़का कुछ पलों के लिए शौर्य को बड़े ध्यान से देखने लगा..

” तुम कहना क्या चाहते हो यार ?
मुझे समझ में नहीं आ रहा!”

शौर्य ने उस लड़के को देखा और एक बार फिर कहना शुरू किया

” मैं अभी के अभी तुम्हें पचास लाख रूपये देता हूं, और तुमसे यह कहता हूं कि तुम अपने पेरेंट्स को छोड़ दो… तुम अपने लिए एक फ्लैट खरीद लो, एक गाड़ी ले लो! कोई अच्छा सा बिजनेस डाल लो!
तो क्या तुम यह सब करने को तैयार हो ?”

“ओ भाई, कौन से जमाने में रह रहा है तू?
पचास लाख  में आजकल कुछ नहीं होना है! और वह भी दिल्ली जैसी जगह में..!”

“तो अपने मां-बाप की कीमत क्या लगाते हो तुम?”

शौर्य ने बड़े ध्यान से उसे देखते हुए कहा और वह लड़का एकदम से हड़बड़ा गया…
शौर्य ने अपने कंधे पर टांग रखे एक छोटे से ब्लैक कलर के बैग को खोला और उसमें से अपनी चेक बुक निकाल ली..

” अपने मां-बाप से दूर जाने की कीमत बताओ..?”

वह लड़का घबराकर शौर्य और वहां बैठे उस बूढ़े की तरफ देखने लगा..

“कौन है यह पागल और यहां क्या कर रहा है?”

” एक करोड़ रुपए या डेढ़ करोड़ ?
मेरे ख्याल से डेढ़ करोड़ तुम्हारे लिए पूरे पड़ जाएंगे!  तुम इन पैसो से अपने लिए फ़्लैट भी ले सकते हो, और कोई छोटा मोटा बिजनेस भी शुरू कर सकते हो! बोलो चाहिए तुम्हें डेढ़ करोड़..?”

” पर तुम हो कौन..?”

” मैं कोई भी हूं, तुम्हें बस मेरे पैसों से मतलब होना चाहिए!  बताओ क्या कीमत लगाते हो? अपने पैरंट्स से अलग होने की..

लड़का अब बड़े ध्यान से शौर्य को देख रहा था..
अब तो उसे  शौर्य की बातें पागलपन लग रही थी… लेकिन शौर्य की चेक बुक देखते ही उसे समझ में आ गया था कि वह किसी साधारण लड़के के सामने नहीं खड़ा है! अब उस लड़के ने शौर्य को ध्यान से देखना शुरू किया तो उसकी कमीज, उसकी पेंट्स,उसके जूते उसके हाथ की घड़ी देखकर उस कॉलेज जाने वाले लड़के को इतना तो पता चल गया था कि लाख डेढ़ लाख की शर्ट पहनने वाला ये लड़का कोई साधारण लड़का तो हो नहीं सकता।
अपनी हिम्मत जुटाकर उसने पल भर के लिए आंखें बंद की अपनी दोनो हाथ  कसे और फिर शौर्य की तरफ देखकर आंखें खोल दी….

” 2 करोड रुपए..।”

एक गहरी सी सांस लेकर कर शौर्य ने चेक बुक में 2 करोड रुपए भरे, और चेक काट कर उस लड़के की तरफ बढ़ा दिया..।

” लेकिन मेरी शर्त है……
   ………..अब तुम अपने पैरंट्स से कभी नहीं मिलोगे। तुमने कहा ना कि तुम उन्हे पसंद नहीं करते। तुम्हारी बहन तुम्हें परेशान करती है।
       जाहिर है वो लोग तुम्हारे लिए कुछ करते नहीं होंगे, इसलिए तो तुम उन्हे पसंद नहीं करते हो..!”

” करते नहीं है से क्या मतलब? जो एक सामान्य पेरेंट्स अपने बच्चों के लिए करते हैं, वह सब मेरे माता-पिता भी करते हैं। मेरे पिता एक फैक्ट्री में काम कर के जो कमा कर लाते हैं, उसी से हमारा घर चलता है।
मां हम सबके लिए खाना बनाती है, घर के सारे काम करती है। और मेरी बहन मुझे रात दिन परेशान करती है। क्योंकि छोटे भाई बहनों का तो यही काम होता है.. ।”

” अच्छी बात है! लेकिन आज के बाद तुम्हें अपनी मां के हाथ का खाना नहीं मिलेगा। और ना ही तुम अपने बाप की छोटी सी कमाई पर निर्भर रहोगे।
बहन अब तुम्हारे कमरे को शेयर करने के लिए तुमसे लड़ाई नहीं करेगी, और ना ही तुम्हारे जूते पहनकर अपने कॉलेज जाया करेगी। तुम्हारे पास तुम्हारा अपना फ्लैट होगा, जिसमें तुम मनचाहे नौकर रख कर आराम से रह सकते हो। अब खुश हो.. ?”

उस लड़के के चेहरे के भाव अजीब से हो गए। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसके सामने खड़ा लड़का आखिर उसे क्या कहना चाहता है..?

” तुम चाहते क्या हो? मुझे ठीक से समझ में नहीं आ रहा। मतलब तुमने मुझे जब इतने सारे पैसे दे दिए तो, फिर तुम मुझे मेरे घर वालों से अलग क्यों करना चाहते हो? इसमें तुम्हारा क्या स्वार्थ है.. ?”

“इसमें मेरा कोई स्वार्थ नहीं है..।
बस तुम्हें एक एहसास दिलाना चाहता हूं कि अमीरों के बच्चों के पास उनके पेरेंट्स नहीं होते।
अमीर बच्चों के पिता रात दिन मेहनत जरूर करते हैं, लेकिन अपने बच्चे का भविष्य बनाने या उसका पेट पालने के लिए नहीं, बल्कि अपना नाम बनाए रखने के लिए।
     अमीर बच्चों की मां खाना जरूर बनाती हैं, और खाने में प्यार भी बेशुमार होता है।
लेकिन वह खाना बच्चे की पसंद का हो, यह जरूरी नहीं। वह खाना वही होता है जो, अमीर घरों के कायदों में लिखा होता है।
अमीर बच्चों के घर में हर तरफ सिर्फ कायदे और कानून की घड़ियां टंगी होती हैं। और अमीर बच्चों का एक-एक पल उन कायदे कानून की घड़ियों में कसकर बांध दिया जाता है। अमीर बच्चों के भाई-बहन कभी एक दूसरे के कपड़े छीनकर नहीं पहनते, क्योंकि यह अमीर बच्चों के प्रोटोकॉल में नहीं होता है।

अमीर बच्चे सोने की चम्मच से खाना खाते हैं और फिर उस चम्मच को और कोई उपयोग में नहीं लाता। अमीर बच्चे के कपड़े चाहे उसे कितने भी पसंद हो, लेकिन ज्यादा से ज्यादा महीने भर बाद बदल दिए जाते हैं। कमरे के परदे, तकिए के गिलाफ, चादरे यहां तक कि अमीर बच्चों का पूरा वार्डरोब उनकी मर्जी के बिना घर के प्रोटोकॉल के हिसाब से बदल दिया जाता है।
   अमीर बच्चों के कमरों में लगने वाला पेंट तक उनकी पसंद का नहीं होता।
    अमीर बच्चे टीवी में क्या देखेंगे, यह भी उनके घर के बड़े बुजुर्ग तय करते हैं। अमीर बच्चों के मोबाइल पर भी सिक्योरिटी लॉक होता है..
हर वक्त सर्विलेंस में होता है अमीर बच्चों का मोबाइल, क्योंकि उनकी सुरक्षा उनकी आजादी से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।

तुम नहीं समझोगे दोस्त, क्योंकि तुम्हारे पास अमीरी से भी कई गुना कीमती चीज मौजूद है। और वह है आजादी।
चिंता मत करो, तुम्हें तुम्हारे पेरेंट्स से अलग नहीं करूंगा।
जाओ अपने पेरेंट्स के साथ खुश रहो..।

जाओ जाकर आज का दिन उनके साथ सेलिब्रेट करो। उन्हें अपने साथ डिनर पर लेकर जाओ, और जो तुम्हें पसंद हो वह खाओ।
जो उन्हें पसंद है वह उन्हें खिलाओ, अपने हाथ से।
और……
…… हो सके तो, अपने पिता के गले से लग कर एक बार उनसे कह देना आई लव यू डैड…  मैं आपको बहुत मिस करता हूं… !”

अपनी बात पूरी कर शौर्य वहां से निकल गया।
गहरे गहरे कदम रखता वह आगे बढ़ रहा था और वह लड़का अपने हाथ में पकड़े दो करोड़ के उस चेक को फटी फटी आंखों से देख रहा था।
वहीं बैठा बुजुर्ग आदमी उठा और तेजी से शौर्य के पीछे बढ़ने लगा..

शौर्य की आँखों में आँसू झिलमिलाने लगे थे..
जाने वो किस अधूरेपन में भटक रहा था, जाने वो किसकी तलाश में था..।
उसका बचपन कुछ अजीब परिस्थितियों से गुज़रा ज़रूर था, लेकिन उसका स्वभाव देख कर महल में किसी को अंदाज़ा भी नहीं हो पाता था कि वो एक गहरी सी कमी खुद के अंदर महसूस किये फिरता है…

“सुनो…. ऐ लड़के.. रुको.. !”

उस बुजुर्ग की आवाज कान में पङते ही शौर्य के कदम ठिठक गये।
शौर्य ने अपने दोनों हाथ जेब में डाल रखे थे। वो पीछे मुड़कर उस आदमी की तरफ देखने लगा । रास्ते में एक पत्थर पड़ा था  उसे शौर्य ने पैरों से एक तरफ उछाल दिया..।

उस पत्थर को देखते हुए उस बुजुर्ग ने वापस अपनी नजरें शौर्य पर केंद्रित कर दी..

” सब कुछ तो है तुम्हारे पास, धन दौलत रुतबा जागीर, इतने बड़े साम्राज्य के मालिक होने के बावजूद तुम्हारी आंखों में सूनापन क्यों है..?”

एक गहरी सी फूँक छोड़ कर शौर्य ज़मीन पर पैरों से लाइन बनाने लगा..

वो बुज़ुर्ग उसे बड़े ध्यान से देख रहा था..

“सुनो… कभी किसी की तकदीर बदलने की कोशिश मत करना.. क्यूंकि तकदीर लिखने वाला सब देख रहा है.. !”

शौर्य की आँखों में सवाल उठने लगा.. की आखिर वो बुज़ुर्ग कहना क्या चाहते हैं।
.उन बुज़ुर्ग आदमी ने एक तरफ इशारा कर दिया….

कुछ देर पहले जिस लड़के को शौर्य ने चेक काट कर दिया था, वो लड़का चेक देखने में इतना व्यस्त चला जा रहा था कि उसने सामने से आती गाड़ी नहीं देखी और तेजी से आती गाड़ी से जोर से टकरा गया। कुछ दूर ऊंचा उछल कर वो नीचे धड़ाम से गिरा।
उसे देखते ही शौर्य घबरा गया। वह उस लड़के को बचाने उस तरफ भागने को था कि उस बुजुर्ग ने शौर्य का हाथ पकड़ लिया..

” चिंता मत करो, उस लड़के को वहां मौजूद लोग अस्पताल ले जाकर बचा लेंगे।
पर सुनो, वह जो ऊपर बैठा है ना उसने अपनी कलम से तुम्हारी, उसकी और हर किसी की किस्मत लिख दी है। और जब जब हम उसके लिखे को बदलने की कोशिश करते हैं, तब हम उसकी कलम में अपनी स्याही घुसाने की नाकाम से कोशिश करते हैं।
और उस वक्त हमारे लिखे को वह इस ढंग से पूरा करता है कि वह लिखा पलट कर हम पर ही वापस आ जाता है। अभी-अभी तुमने इस लड़के की जो मदद की है, इसके बदले में तुम्हारे साथ कुछ ना कुछ आज होने वाला है।
    तुमने उसकी डेस्टिनी बदली है, और इसलिए तुम्हारी आज तक की डेस्टिनी आज शाम से बदलने वाली है।

     याद रखना तुम्हारी किस्मत बदलने वाली है। ऊपर वाले का कोई भरोसा नहीं, कब वो राजा को रंक बना दे और रंक को राजा।
  अभी-अभी तुमने उसके लिखे को बदलने की कोशिश करते हुए एक रंक को राजा बनाया है, अब अगला नंबर तुम्हारा है…।”

शौर्य को उस आदमी की बातों पर भरोसा नहीं हो रहा था..

“क्या कह रहें हैं आप ?”

“तुम दिल के साफ और सच्चे इंसान हो, इसलिए तुम्हें यह दे रहा हूं।
इसे अपने पास रखना। कभी तुम्हारा बुरा नहीं होगा। और अगर कुछ बुरा हुआ भी तो एक सीमा के अंदर ही होगा। तुम सब कुछ संभाल लोगे..।”

शौर्य ने उस आदमी की हथेली की तरफ देखा, उस आदमी ने अपनी बंद हथेली खोल दी।
हथेली में एक बड़ा सा रुद्राक्ष साफ साफ नजर आ रहा था..

” नहीं, कहां रखूंगा इसे। मुझसे यह सब कैरी नहीं होगा। मुझसे खो जाएगा। आप प्लीज इसे अपने पास रखिये.. !”

“नहीं खोयेगा…. !”

उस बुजुर्ग आदमी ने शौर्य की कलाई को थामा और ऊपर करके उसकी कलाई में उस रुद्राक्ष को बांध दिया। लाल रेशमी डोरी में बंधा वह बड़ा सा रुद्राक्ष अलौकिक दिख रहा था।
ऐसा लग रहा था उसमें से एक तेजपुंज निकल रहा है। उस रुद्राक्ष के मणिबंध में बन्धते ही शौर्य को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके माथे पर हाथ रख कर प्यार से फेर दिया हो।
     एक अलग से मानसिक शांति को महसूस करते हुए शौर्य ने अपने दूसरे हाथ से उस रुद्राक्ष को धीरे से छुआ, और जाने क्या सोचकर उसे अपने माथे से लगा लिया। सामने खड़ा बुजुर्ग मुस्कुरा उठा..

“जाओ… महादेव तुम्हारा भला करेंगे !”

शौर्य मुस्कुरा कर पलट गया और अपने रास्ते आगे बढ़ गया। वह बुजुर्ग वहीं खड़ा खड़ा मुस्कुराता रहा…।

“आज से सालों पहले तुम्हारे पिता के हाथ में भी मैंने ही रुद्राक्ष बाँधा था, और आज उसके बेटे के हाथ में भी बांध दिया..
जाओ शौर्य प्रताप..।
    अब चाहे अपनी किस्मत से कितना भी भाग लो, लेकिन सारी परेशानियों को पार कर के सिंहासन तक तुम्हें पहुंचना ही होगा.. !!”

*****

महल में बाँसुरी पियानो के पास खड़ी बड़ी ममता से उस पर हाथ फेर रही थी..
उसे पियानो का शौक कभी नहीं था…
लेकिन रूपा भाभी चाहती थी कि राज महल के सारे बच्चे पियानो बजाना सीखे।
हर्ष थोड़ा बड़ा हो चुका था और इसलिए उसने मना कर दिया था। लेकिन परी यश और शौर्य को रूपा ने पियानो सिखाया था।
वही एंगलो इंडियन टीचर जो इन बच्चों को इंग्लिश सिखाया करती थी, इन लोगों की हफ्ते में 2 दिन पियानो की क्लास भी लिया करती थी।
बांसुरी को अच्छे से पता था कि परी और यश को पियानो बजाना पसंद नहीं है। पियानो बजाने में उंगलियों पर बहुत जोर पड़ता था, बावजूद जाने क्यों शौर्य को पियानो पसंद था।
    और उन तीनों बच्चों में अकेला वही था जो, बहुत प्यार से उन क्लासेस को अटेंड किया करता था।
        हालांकि शौर्य के अंदर की जिद उसे हमेशा दूसरों के सामने पियानो प्रदर्शन करने से मना कर दिया करती थी। उसके अंदर शुरू से ही यह जज्बा था कि जो काम उससे जबरदस्ती करवाया जाएगा, वह काम वह कभी भी नहीं करेगा।
और इसलिए कभी भी महल के किसी भी आयोजन में शौर्य ने पियानो बजा कर किसी को नहीं सुनाया था।
    पूरे महल में बांसुरी और शौर्य की टीचर के अलावा किसी ने भी शौर्य का बजाया पियानो नहीं सुना था।
     आज उसी पियानो के पास खड़ी बांसुरी शौर्य को याद कर रही थी कि तभी पीछे से आकर राजा ने उसे अपनी बाहों में ले लिया।
   उसके कंधे पर अपना सर रखकर राजा साहब उस के एकदम करीब आ गए..

” क्या हुआ हुकुम, आज थोड़ी उदास लग रही हो.. ?”

“नहीं साहब.. उदास नहीं हूँ.. !”

“जानता हूँ अपने साहबज़ादे को याद कर रही हो.. है ना.. ! इसी समय के लिए हमेशा कहा करता था कि 2 बच्चे होने चाहिए, लेकिन तुम को मंजूर ही नहीं था.. !”

” और अगर दोनों बच्चे एक साथ दिल्ली चले जाते तब.. ?”

“हाँ तब तो हमारे तीन बच्चे होने थे..। मुझे तो सच कहूंगा ढेर सारे बच्चे पसंद है। मुझे तो लगता है कम से कम दर्जन दो दर्जन बच्चे तो होने ही चाहिए..।”

“हे भगवान कुछ तो मेरे भी बारे में सोचिये..!”

” तुम्हारे बारे में सोचा, इसीलिए तो हुए नहीं इतने।
वरना तो दो दर्जन बच्चों की फौज खड़ी कर चुका होता  मैं..!”

“छी..
कैसे बेशर्मो जैसी बातें करते हैं आप.. अब भी ज़रा भी नहीं बदले ?”

“हाँ फिर ? कैसे बदल जाऊं.. जब हमारी हुकुम इंच भर भी नहीं बदली, तो मैं कैसे बदल जाऊं ?”

“मैं कहाँ नहीं बदली.. मोटी हो गयी हूँ.. !”

“बहुत ज़रा सी हुई हो.. और इतना मोटापा तो सजता है तुम पर, वरना कल को शौर्य की गर्लफ्रेंड को तुम्हें देख कर ही कॉम्प्लेक्स आ जायेगा.. खैर वो तो अब भी आएगा.. !”

राजा एक बार फिर मुस्कुरा उठा और उसके गाल पर पढ़ते गड्ढे को देखती बांसुरी मोहित हो गई..

उसी वक्त कमरे पर दस्तक हुई और समर भीतर चला आया।
राजा और बांसुरी उसे देखते ही उसकी तरफ बढ़ गए। समर के चेहरे पर चिंता की रेखाएं खींची देख राजा ने उसे देखा और पूछ बैठा..

”  क्या हुआ समर ? परेशान लग रहे हो ?”

“हम्म.. हुकुम आपसे एक ज़रूरी बात करनी है.. !”

“कहो.. कहो ना !”

समर ने साथ बैठी बाँसुरी की तरफ देखा और फिर अपने साथ लाये कागज़ राजा के सामने रख दिये..

“ये क्या है समर ?” राजा ने सवाल किया..

“शौर्य की इस महीने की बैंक स्टेटमेंट !”

राजा ने अचरज से बाँसुरी की तरफ देखा और बाँसुरी ने आगे बढ़ कर उन कागज़ो को उठा लिया..

“इस एक महीने में शुरुआती दिनों को और लंदन ट्रिप को छोड़ देने के बाद भी शौर्य ने सिर्फ हफ्ते भर में ढाई करोड़ रूपये उड़ा दिये हैं.. !”

बाँसुरी का मुहँ खुला रह गया..
घबरा कर उसने राजा की तरफ देखा..
राजा के माथे पर भी चिंता की लकीरे खींच गयी…

बाँसुरी ने वापस उन कागज़ो पर नज़र डाली और समर से बोल पड़ी..

“शौर्य के एकाउंट्स उसके खर्चो की सारी ज़िम्मेदारी आप पर छोड़ रखी है हमने समर सा..।
  उसके बाद भी आप यहाँ आये हैं ? क्या आपको लगता है की उसके किसी निर्णय पर हम दोनों में से कोई भी आपत्ति करेगा.. ?”

“नहीं भाभी साहब.. लेकिन एक बार आप लोगों को बताना मेरा फ़र्ज़ बनता है.. कहीं मैं कोई अधिक कठोर निर्णय ना ले लूँ ?”

“अगर शौर्य की जगह शोवन या धनुष होते तो तुम क्या निर्णय लेते समर ?”

“राजा ने पूछा और समर के चेहरे के भाव बदल गए..

“मैं समझ गया हुकुम.. अब वहीं निर्णय लूंगा जो शोवन या धनुष के होने पर लेता.. !

आप दोनों आराम कीजिये, अब मैं चलता हूँ.. !”

“अरे नहीं.. आप भी बैठिये और हमारे साथ कॉफ़ी पी लीजिये… उसके बाद चले जाइएगा.. !”

समर भी मुस्कुरा कर वहीँ बैठ गया..
तीनों लोग साथ बैठ कर कॉफ़ी पीने लगे…
लेकिन तीनों के ही मन में अलग अलग सी तकलीफ खलबला रहीं थी..

****

शौर्य के अब तक ना पहुंचने पर ढ़ेर सारी शॉपिंग कर के मीरा वापस लौट गयी..
वो अपने फ्लैट पर पहुंची ही थी, उसके नंबर पर धनुष के ऑफिस से फोन आने लगा।
मुंह बनाकर मीरा ने फोन उठा लिया। धनुष के ऑफिस से एक लड़के का फोन था। मीरा को तुरंत ऑफिस बुलाया गया था। मीरा ने वक्त देखा शाम के 7 बज रहे थे, उसका जाने का बिल्कुल मन नहीं हो रहा था..

” अभी तो शाम के 7 बज गए हैं। अभी क्यों बुलाया जा रहा है..!”

” मैडम परसों पेरिस की फ्लाइट है उसके पहले कुछ फॉर्मेलिटीज पूरी करनी है। इसलिए धनुष ने सभी मॉडल्स को बुलवाया है। आप जितनी जल्दी हो सके आ जाइए..।”

मीरा आज दोपहर के बाद से ही वहां से निकल चुकी थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि दोपहर बाद सब की छुट्टी कर ही दी गई थी, तो अभी वापस बुलाने का क्या औचित्य?
वापस जाने के लिए वो तैयार हो गई।
पर उसे उसी वक्त भूख लगने लगी। उसने फ्रिज खोल कर देखा, पिछले दिन का रानी के जन्मदिन का चॉकलेट केक फ्रिज में पड़ा हुआ था। उसने निकाला और जल्दी-जल्दी 3 बड़े टुकड़े खा लिए।
  फटाफट पानी पीकर तेजी से वो ऑफिस के लिए निकल गई..

वो ऑफिस पहुंची उस वक्त धनुष और धनुष के साथ खड़ा जानी एक एक कर सभी मॉडल्स का वजन और बाकी वाइटल स्टेस्टिक्स ले रहा था….।

मीरा भी भाग कर वहाँ पहुंच गयी..

“ये सब तो पहले दिन ही ले लिया था, फिर आज क्यूँ ?”

मीरा ने जानी से सवाल पूछ लिया और जानी अपनी ही स्टाइल में मुस्कुरा उठा।

” वह तो पहले दिन दिया था ना मीरा बेबी।
अभी 10 दिन की ट्रेनिंग के बाद आप लोगों में कितना इंप्रूवमेंट हुआ है, वह भी तो देखना पड़ेगा ना..।”

मीरा मुंह बनाकर दीवार से लग कर खड़ी हो गई।
एक बार फिर जानी ने उसका कद नापा और उसके नाम के बगल में लिख दिया..

” 5 फिट 9 इंच ही है ना! घिस तो नहीं गई मैं, यहां काम करते-करते..?”

“नो बेबी.. परफेक्ट हाइट है तुम्हारी, लेकिन टमी में थोड़ा फैट दिख रहा.. !”

“व्हाट.. !”

मीरा एक तरह से चीख उठी.. उसने इन दो दिनों में मनचाहा खाया था और उससे भी ज्यादा पिया था..

उसके मन में ये शंका उठने लगी कि कहीं उसका वजन बढ़ा हुआ ना आ जायें..

वो जैसे ही वेइंग मशीन पर सवार हुई, वैसे ही जानी ने झुक कर उसका वजन देखा और चीख पड़ा..

“ओह्ह नो…. सेवेंटी केजी !”

“क्या.. ? ” मीरा भी चौंक कर चीख पड़ी

“मीरा बेबी तुम्हारा वजन साठ- बासठ से ज्यादा नहीं होना चाहिए…। आफ्टरऑल यू आर अ सुपर मॉडल.. !

जानी ने मुहँ सिकोड़ लिया और धनुष के पास पहुँच गया..
मीरा जानी को रोकना चाहती थी, लेकिन रोक नहीं सकी।

धनुष के हाथ में कागज पकड़ा कर जानी उसके साथ बातों में लग गया। धनुष अपनी कलम को अपने माथे पर चलाने लगा।
वह अक्सर जब कुछ परेशान होता था या, कुछ गहरी सी बात सोचा करता था। तो ऐसे ही किया करता था।
उसे देखकर उसे जानने वाले समझ गए कि धनुष कुछ ज्यादा ही परेशान है।
कुछ देर बाद उसने आंखें खोली और तेज कदमों से मॉडल्स के बाद चला आया।
    धनुष जितना भी परेशान हो, लेकिन वह एक प्रैक्टिकल लड़का था। उसे मालूम था कि उसके ऑफिस के लिए क्या सही है,और क्या गलत?
    और उसके निर्णय हमेशा उसके खुद के फायदे के लिए नहीं बल्कि उसके ऑफिस के फायदे के लिए ही लिए गए होते थे।
    उसने उस लिस्ट को हाथ में थमा और जिन मॉडल्स को वह परसों अपने साथ पैरिस लेकर उड़ने वाला था, उनके नाम पढ़ने लगा।

एक के बाद एक नाम आते चले गए। मीरा को पूरा यकीन था कि उसका नाम आएगा ही, लेकिन सातवां नाम भी आ गया और मीरा का नाम रह गया।

    मीरा अपने दांत चबा कर रह गई। उसकी मुट्ठियाँ भिंच गई।
    गुस्से में वह धनुष के पास पहुंची और उसके ठीक सामने खड़े होकर उसकी आंखों में आंखें डाल कर उसे घूरने लगी। ऐसा लगा उसका बस चले तो अपने लंबे लंबे नाखूनों से धनुष का चेहरा बिगाड़ देगी..।

“मेरा नाम क्यूँ नहीं है इस लिस्ट में ?”

“क्यूंकि तुम्हारा वजन बढ़ गया है.. ! जिस वक्त तुम्हारी ट्रेनिंग शुरू की गई थी उस वक्त तुम्हारा वजन 68 किलो था ।
   उसे हमें 4 किलो कम करना था। जिसके लिए हमने इतना सब अरेंज किया। यहां मौजूद हर एक मॉडल को उनके लिए आदर्श आहार की व्यवस्था की गई ।
सबका एक रूटीन बनाया गया ।लेकिन तुमने एक दिन भी उस रूटीन को तरीके से फॉलो नहीं किया। मुझे पूरा यकीन है कि तुम यहां से जाने के बाद अपनी मनमर्जी का खाना खा लेती थी। तुमसे सिर्फ 10 दिन की यह तपस्या नहीं हो पाई।
    तुम सुपरमॉडल बनने का ख्वाब देख भी कैसे रही हो?
   तुम्हें क्या लगता है कि सुपरमॉडल बनना आम के पेड़ के ऊपर लगा हुआ एक फल है, जिसे बस तोड़ लिया और खा लिया।
ऐसा नहीं होता है मैडम!  किसी भी एक ऊंची पोजीशन पर पहुंचने के लिए इंसान को बहुत टूट कर मेहनत करनी पड़ती है।

दूर बैठकर हम उस मेहनत को नहीं देख पाते, बस सामने वाले आदमी की सफलता नजर आती है। लोग बड़ी आसानी से कह देते हैं किस्मत थी इसलिए डॉक्टर बन गया। किस्मत थी इसलिए इंजीनियर बन गए। किस्मत अच्छी थी इसलिए कलेक्टर बन गए। ठीक-ठाक दिखती थी, इसलिए मॉडल बन गई।

पर ऐसा नहीं है। इन सब के पीछे इन सारे लोगों की कड़ी मेहनत और अथक प्रयास होता है। जिसके कारण यह लोग इन पोजीशन पर पहुंचते हैं ।
  
     आशा करता हूं कि हमारे अगले प्रोजेक्ट में हमारी दुबारा मुलाकात होगी, और तब तुम अपनी इन गलतियों को नहीं दोहराओगी।
    और हो सकता तब तुम हमारे साथ चल सको। वैसे हमारी परसों यानी कि कल रात 12 बजे के बाद की फ्लाइट है। कल हम सब पर जाने के पहले होटल ब्लू लगून में मिलने वाले हैं ।
   मेरी सारी मॉडल्स को वहां पर मैं पार्टी देने वाला हूं। तुम चाहो तो तुम भी आ सकती हो।शाम 8 बजे ब्लू लगून में.. !”

मीरा गुस्से में पैर पटकती वहाँ से बाहर चली गयी..

क्रमशः

aparna…

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Manu verma
Manu verma
2 years ago

कहीं पढ़ा था.. समय से पहले और भाग्य से अधिक किसी को कुछ नहीं मिलता पर इंसानी फ़ितरत है जितना है उसमें संतोष नहीं, जो पास है उसकी कद्र नहीं…बस और ज्यादा की हसरत में जो है उसकी भी कद्र नहीं करता, संतुष्ट नहीं।
शौर्य का आज का सफर राजा की याद दिला गया वो भी तो ऐसे ही अकेले आज़ाद घूमना चाहता था
शौर्य ने बेशक उस लडके की मदद की पर ईश्वर, किस्मत भी कुछ चीज है।
पहले भोलेनाथ ने राजा की रक्षा की अब एक बार फिर भोलेनाथ जी का आशीर्वाद रुद्राक्ष के रूप में शौर्य को मिला है🙏🏼। शौर्य भी अपने जीवन में आने वाले हर इम्तिहान में सफल हो जाए।
मीरा कितनी चिपकू है यार 🤦‍♀️।
हर बार की तरह बेहद खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻।

Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
2 years ago
Reply to  Manu verma

यह भाग अच्छा था दी एहसासों से भरा सहेजा गया। सपनों की कीमत होती है जी तोड़ मेहनत करना और रिश्तों की कोई कीमत नहीं होती। सही गलत अमीर गरीब के फ़र्क को अच्छी तरह समझाने वाला सुंदर भाग दीदी, मीरा तो गयो, समर का क्या डिसीजन होगा, सब पढ़ना है अगले भाग में…💐🙏