जीवनसाथी -3 भाग -19

जीवनसाथी -3, भाग -19

जीवनसाथी by aparna

   हर्ष का काम शुरू हो चुका था… वो व्यस्त ही रहा करता था..
और अपने काम की ढ़ेर सारी व्यस्तताओं के साथ भी उसके अपने जीवन के लिए कुछ नियम भी थे..!
सुबह जल्दी उठना, कसरत करना, पौष्टिक नाश्ता करना और फिर ऑफ़िस निकल जाना…।
उसकी दिनचर्या थी…।
वो समय का पाबंद था और उसे रातदिन की पार्टियां पसंद नहीं थी, हालाँकि उसका ग्रुप हफ्ते में एक बार किसी जगह इकट्ठा ज़रूर होता था..।
वो सब लोग साथ में मिल कर ख़ूब धूम मस्ती किया करते थे..।
लेकिन हर रात पब जाकर पीना और फिर अगले दिन सोते पड़े रहना उसे सख्त नापसंद था..।

शौर्य भी रोज़ पब जाने वालों में से तो नहीं था, लेकिन दिनचर्या के मामले में वो हर्ष से अलग था..।
रात रात भर अपने लफंगे दोस्तों के साथ घूमना, पब जाना और आधी रात बीत जाने पर घर लौटना उसे पसंद था..।

वो दिन चढ़े तक अपने कमरे में सोया पड़ा रहता था..।
लेकिन अब हर्ष की रोकटोक उस पर बढ़ने लगी थी…।
आये दिन सुबह हर्ष आकर उसे जगा दिया करता था..
अपने साथ नाश्ता करने पर ज़ोर दिया करता था..।
रात में बार बार उसे फ़ोन कर घर वापस आने बोला करता था..।

एक तरह से हर्ष ने दिल्ली वाले फ्लैट को भी छोटे मोटे से महल का रूप दे दिया था..।

नौकर यहाँ भी बहुत थे..।

सुबह आठ बजते ही शौर्य के कमरे के बाहर तैनात नौकर दरवाजे पर दस्तक देना शुरू कर दिया करते थे..। शौर्य कभी तकिया कान पर रख कर तो कभी किसी और उपाय से इन सब से बचने की कोशिश किया करता, और जब नहीं हो पता तो दरवाज़ा खोल कर नौकर से ही उलझ पड़ता..।

“क्या है यार.. चैन से सोने तो दो.. !”

“हुकुम, आपके उठने का वक्त हो गया है.. !”

“अभी सुबह चार बजे तो सोया हूँ.. कायदे से चार घंटे भी नहीं हुए और तुम लोग उठाने चले आये..।”

“नीचे बड़े हुकुम आपका नाश्ते की टेबल पर इंतज़ार कर रहें हैं… आप जल्दी से जल्दी आ जाइये.. !”

और शौर्य को प्रणाम कर वो चला गया..
शौर्य ने दरवाज़ा बंद किया और वापस पलंग पर गिर पड़ा, तभी हर्ष का फ़ोन आने लगा..।

“शौर्य मैं नाश्ते पर इंतज़ार कर रहा हूँ.. !”

हर्ष का बस इतना कहना भी काफ़ी होता था..
शौर्य मन मार कर उठा और बाथरूम में घुस गया…।
और आधा घंटा बीतते वो हर्ष और धनुष के साथ डायनिंग टेबल पर था..।

यश भी वहाँ पहुँच चुका था….

हर्ष के साथ ही धनुष और यश भी ऑफ़िस निकल जाया करते थे, लेकिन शौर्य काम पर नहीं जाता था.।

उसके दिमाग में बचपन से उसके अपूर्व मामा ने बैठा दिया था कि वो राजकुमार है, और राजे रजवाड़े कभी काम नहीं करते..।
वो राजा अजातशत्रु का बेटा है और वो काम करने के लिए पैदा नहीं हुआ..।

ऐसा नहीं था कि शौर्य में इंच भर भी बुद्धि कम थी लेकिन उसने आज तक किसी काम में अपनी बुद्धि प्रयोग ही नहीं की थी..।

उसे ये मालूम था कि वो चांदी का चम्मच और सोने की थाली लेकर पैदा हुआ बालक था और उसे मेहनत करने की ज़रूरत नहीं थी..।

कभी कभी जब हर्ष उसे समझाइश दिया करता तब शौर्य उसे भी यहीं समझाया करता था… और उस वक्त ज्यादा बहस में पड़ने की जगह हर्ष अपने हाथ खड़े कर दिया करता था..।

“कभी तो, किसी दिन तो तुम्हें भी एहसास होगा कि तुम्हें अपने लिए काम करना चाहिए..।
ईश्वर से यहीं प्रार्थना करूँगा कि तुम्हें जल्दी ही सद्बुद्धि दे, और कोई तो ऐसा इंसान तुम्हारे जीवन में आये जो तुम्हारे जीवन को सही मायनो में एक लक्ष्य दे सके.. !”

“हर्ष भाई साहब.. मैं भी प्रार्थना करूँगा कि मेरे जीवन में वो दिन जल्द ही आये जब मेरे शांत सरल जीवन को एक लक्ष्य मिल जायें..।”

शौर्य के मुहँ से संजीदा सी बात सुन हर्ष और धनुष शौर्य को देखने लगे और तभी शौर्य का मोबाइल बजने लगा.. उसके दोस्त अतुल का फ़ोन था..

अपने मोबाइल पर अपने दोस्त का नंबर देख उसने मुस्कुरा कर मोबाइल हर्ष की तरफ घूमा दिया..

“ये देखिये.. कितनी जल्दी मेरी ज़िंदगी का लक्ष्य मुझे मिल गया… चेल्सी नाइट क्लब में पार्टी करने जाना है आज.. मेरा दोस्त वहीँ के लिए बुला रहा.. !”..

और हँसते हुए शौर्य ने फ़ोन उठा लिया …..

हर्ष चेहरे पर बिना कोई भाव लिए खड़ा रह गया..।
धनुष समझ गया कि हर्ष को शौर्य की ये बात पसंद नहीं आई है, लेकिन उसने भी कुछ नहीं कहा…।

शाम को मिलने आने की बात कह कर शौर्य घर से बाहर चला गया..

“क्या करूँ इस लड़के का… बाँसुरी काकी सा ने कितने भरोसे से मेरे साथ भेजा था, लेकिन मैं कुछ कर ही नहीं पा रहा हूँ.. !”

“सब हो जायेगा हर्ष… आप चिंता मत करिये.. !”

“लेकिन कैसे धनुष ? शौर्य या तो समझता नहीं या समझना नहीं चाहता कि उससे जुड़े उसके दोस्त सिर्फ उस के पैसों के कारण जुड़े हुए हैं..।
यह रोज-रोज की पार्टी में शौर्य हजारों उड़ाता है, किसी दिन अगर वह पैसे देने से इंकार कर दे ना, यह सारे लड़के अपने अपने रास्ते चले जाएंगे।
कोई शौर्य को पलट कर पूछेगा भी नहीं..।
और ये बात मैं शौर्य को कई दफा समझा चुका हूं, लेकिन पता नहीं क्यों यह समझना ही नहीं चाहता..।”

“समझेगा.. शौर्य भी समझेगा और उसे लूटने वाले उसके आसपास के लोग भी समझेंगे.. ! सब हो जायेगा बस आप सब मुझ पर छोड़ दीजिये.. !”

हर्ष के चेहरे पर परेशानी नज़र आ रहीं थी..

“बात सिर्फ पैसों की नहीं है ना, बात उसकी खुद की है..। ऐसे मक्कार और स्वार्थी दोस्तों के रहने का भी क्या मतलब? बस यही लगता है इनमें से कोई शौर्य को कभी धोखा ना दे जाये..!”

“धोखा मिलने से पहले शौर्य को उन लोगों से अलग कर दिया जायेगा.. आप चिंता ना करें.. !”

धनुष ने हर्ष की परेशानी देख अपने पिता समर को फ़ोन लगा दिया..
सारी बातें सुनने के बाद समर कुछ देर चुप बैठा रहा फिर उसने कुछ बातें धनुष और हर्ष से कह दी..

“देखो हर्ष… ये सब जो मैं करूँगा इसमें मुझे तुम लोगों का भी पूरा साथ चाहिए होगा..।
अगर शौर्य को उसके दोस्तों से दूर करना है, तो फिर मैं जो बोल रहा हूं वो करते जाओ.. !”

“ठीक है काका साहब ! जैसा आपको उचित लगे.. !”

शौर्य मुस्कुरा कर पहले ही वहाँ से निकल चुका था..

हर्ष धनुष के साथ ऑफ़िस निकल गया..।
यश मार्केटिंग का काम देखता था, इसलिए उसका ऑफ़िस अलग बिल्डिंग में पड़ता था..।
धनुष दोनों ही तरफ का काम संभाले रहता था…

दो दिन बाद अपनी सारी टीम को लेकर हर्ष को पेरिस निकलना था..।

उसके ऑफ़िस में वहीं सारी तैयारियां चल रहीं थी…
मीरा और बाकी मॉडल्स के आखिरी दिनों की कड़ी परीक्षा का समय था..

अब उन लोगों की डायट का विशेष ध्यान रखा जा रहा था.. उसके कार्ब्स और शुगर पूरी तरह से बंद कर दिये गए थे..।
पिछले दो दिन से उनका वर्कआउट टाइम भी बढ़ा दिया गया था.. उसके अलावा निरंतर उन्हें रैम्प पर चलते रहने का अभ्यास करवाया जा रहा था..।
मीरा को धनुष की पैनी निगाह से बच कर निकलने का मौका नहीं मिल पा रहा था…।

उसने बिल्कुल नहीं सोचा था कि उसे मॉडल बनने के लिए इतनी तपस्या करनी पड़ेगी..।
अपनी गोरे चिट्टे रंग और खूबसूरती के घमंड में मीरा इस कदर चूर थी।
   उसे लगा ही नहीं था कि मॉडलिंग के लिए मेहनत भी करनी पड़ती है। उसे लगा था शौर्य के नाम का फायदा उठा कर उसे सब कुछ थाली में परोस कर मिल जाएगा लेकिन यहां उल्टा ही हो रहा था।
हालांकि शौर्य के वापस लौटने के बाद उसे उम्मीद जगी थी, लेकिन शौर्य भी 2 दिन से जाने कहां व्यस्त था जो मीरा से मिलने नहीं आ पा रहा था। आज ऑफिस में लंच के वक्त धनुष ने आकर सभी मॉडल्स को कुछ जरूरी बातें बताने के बाद छुट्टी दे दी थी….।

आज की छुट्टी की बात सुनते ही मीरा के चेहरे पर चमक आ गई थी। उसने तुरंत शौर्य को फोन मिला दिया।
शौर्य ने बिल्कुल ही बेमन से फोन उठाया और मीरा की मिलने की जिद के कारण उससे मिलने चला गया।

मीरा शौर्य  के पहुंचने से पहले ही मॉल में बैठी उसका इंतजार कर रही थी….

“हाय बेबी.!! मैं कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रहीं थी.. बहुत मिस किया तुम्हें !”

मीरा शौर्य के गले से लटक गयी..
शौर्य ने धीरे से अपना एक बाजू उसके कमर पर लपेटा और उसे खुद से अलग कर मुस्कुरा कर कुर्सी पर बैठ गया..

“ओह्ह तुम कब पहुंची यहाँ.. मैंने तो जो वक्त बोला था उसी पर पहुँच गया.. !”

“ओह्ह माय स्वीट डम्बो.. मैं तुम्हारे लंदन रहने की बात कर रहीं.. उस वक्त में बहुत बहुत मिस किया..!”

“ओह्ह तो तुम लंदन की बात कर रहीं थी.. ?”

“हाँ फिर ? तुमने सोचा आज की ? तुम कितने स्वीट और भोलू से हो, माय चार्मिंग प्रिंस !”

शौर्य मुस्कुरा कर रह गया…

“आज भी पता नहीं तुमसे मिलने का मौका मिल पाता या नहीं, अच्छा हुआ कि लंच के बाद हम लोगों की छुट्टी हो गई!
   एक्चुअली 2 दिन बाद पेरिस निकलना है ना, तो उसी तैयारी के लिए शायद हमें छुट्टी दी गई है! तुम्हें पता है तुम्हारे ऑफिस में वो जो धनुष है ना, एक नंबर का खड़ूस है..
हम लोगों को बेंत मार-मार कर उसने ट्रेनिंग दी है..!”

” यार उसके बारे में मैं कोई कमेंट नहीं दे सकता। तुम्हें पता है हमारे घर में भले ही हर्ष भाई साहब सबसे बड़े हैं, और सबसे स्मार्ट भी बुद्धिमान भी। लेकिन चलती इस धनुष की है। पता नहीं है कुछ अलग ही बंदा है यार..!”

” क्यों उसे इतना सिर चढ़ा रखा है तुम लोगों ने। भाई तो तुम और हर्ष ही हो ना।
    यशवर्धन भी तुम लोगों का ही कजन है है ना..।”

“हाँ यश विराज काका का बेटा है.. !”

“और वो धनुष.. ? वो किसकी औलाद है ?”

“वो हमारे समर अंकल का बेटा है.. वैसे सच कहूं तो समर अंकल बेहद खड़ूस आदमी है। तुम उन्हे देखोगी ना तो पहली बार में तुम्हें लगेगा कितना स्मार्ट बंदा है यार।
आज भी वह शोवन और धनुष के साथ खड़े होते है ना तो उनके भाई नजर आते हैं।

कहीं से नहीं लगता कि उनके डैड है।
इतना ज्यादा खुद को फिट और हैंडसम बनाए रखा है कि क्या कहूं?
    उनका दिमाग चारों दिशाओं में दौड़ता है। सच कहूं तो कभी-कभी सैम अंकल पर गुस्सा आने लगता है। मुझे भी कुछ ज्यादा ही रूल करते हैं यार ।
   आप अपने बेटों को रूल करो समझ में आता है, मुझ पर अपने रूल्स क्यों थोप रहे हो ?”

“ये समर अंकल कौन है ?”

” कायदे से तो डैड के सबसे खास मंत्री हैं, लेकिन हमारे महल में उनकी बहुत चलती है ।
मेरे डैड हो या बड़े पापा कोई भी समर अंकल से पूछे बिना कोई काम नहीं करता। मेरी मॉम तो हर एक बात उनसे पूछ पूछ कर ही करती है ।
यहां तक कि मेरे भी सारे अकाउंट और मेरा सारा पैसों का ट्रांजैक्शन सब कुछ समर अंकल को सौंप रखा है..।”

“मतलब एक तरह से तुम्हारे डैड के नौकर है वो.. !”

“अरे नहीं यार… नौकर नहीं है वह..।”

शौर्य भले ही समर से जरा दबता था लेकिन उसका ये मतलब हरगिज़ नहीं था कि वो किसी के भी मुहँ से अपने समर अंकल के लिए कुछ भी सुन लें..

“इसके पीछे एक लंबी हिस्ट्री है। उनके भी कुछ पुराने पूर्वज थे, वह हमारी रियासत के थे। मुझे ठीक से याद नहीं।
   मॉम बचपन में बताया करती थी कि समर अंकल के कोई पूर्वज हमारे पूर्वजों के भाई थे..।सगे भाई.. ।
लेकिन उनके उसी पूर्वज ने राजपूतों के बाहर शादी कर ली थी, और शायद इसलिए उन्हें हमेशा हमेशा के लिए राजगद्दी छोड़नी पड़ी..।
ऐसा कुछ तो भी हिस्ट्री है उनकी.. ।
सो देखा जायें तो वो हमारे ब्लड रिलेशन में हैं.. !”

“लेकिन वो धनुष का बच्चा ? नौकर ही तो है तुम्हारा ?”

मीरा अपना ज़हर उगलने से चूक नहीं रहीं थी और शौर्य खुद पर काबू किए उसकी बातों का जवाब देने में लगा हुआ था ।
शौर्य वैसे समर से थोड़ा डरा करता था, समर के लिए उसके मन में भी कोई खास बहुत मीठे विचार नहीं थे। बावजूद बाहर का कोई उसके सामने समर और धनुष की बुराई नहीं कर सकता था।
    वो तो मीरा थी एक लड़की, इसलिए शौर्य चुपचाप सब कुछ सुन रहा था, कोई और होता तो अब तक समर और धनुष के लिए नौकर शब्द सुनकर शौर्य शायद उनसे उलझ चुका होता..।

“अरे नहीं.. धनुष कहीं से भी हमारा नौकर नहीं है..। उसकी काबिलियत तो अच्छे-अच्छे राजकुमारों पर भारी पड़ने वाली है।
    ऐसे हमारे पूरे परिवार में हर्ष भाई के बराबर स्मार्ट इंटेलिजेंट ब्रिलिएंट हैंडसम अगर कोई बंदा है तो वह धनुष ही है.. !”

“तुम खुद को इतना अंडर एस्टीमेट क्यों करते हो ?
चलो माना कि तुम इतने स्मार्ट नहीं भी हो तो भी हैंडसम  तो हो..!”

“लुक्स तो डैड की देन है.. !”

शौर्य हल्का सा मुस्कुरा उठा..

“तुम्हारे मॉम डैड से कब मिलवाओगे ?”

“क्यूँ ?”

“गर्लफ्रेंड हूँ तुम्हारी.. उनसे नहीं मिलवाओगे ?”

शौर्य ने धीरे से सांस छोड़ी और दूसरी तरफ देखने लगा। इसके साथ ही उसने गर्दन हां में हिला दी।

हालांकि शौर्य ने कभी भी मीरा को दिल से अपनी गर्लफ्रेंड नहीं माना था..।
वह तो मीरा ही थी जो उसके गले पड़ी हुई थी..।

” शौर्य, सुनो!!  मुझे पेरिस जाने के पहले ढेर सारी शॉपिंग करनी है, तो अगर तुम भी साथ में चलना चाहते हो तो चलो मुझे शॉपिंग करवा दो..!”

“यार सच कहूं तो मैं लड़कियों की शॉपिंग में क्या करूँगा.. तुम कर लो ना !”

” लड़कियों की नहीं गर्लफ्रेंड की शॉपिंग की बात है.. अरे जी तुम्हें साथ में चलना ही होगा। चलो वह देखो सामने “जारा”है मैं वहीं से कपड़े खरीद लूंगी..!”

शौर्य ने दोनों हाथ खड़े कर दिए और उसके साथ चलने को राजी हो गया…

एक के बाद एक बड़ी-बड़ी दुकानों में जाकर मीरा महंगे महंगे कपड़े खरीदने लगी..
कपड़े जूते पर ऐसेसरीज एक पर एक वो खरीदती चली जा रही थी।
अचानक वह स्टोर के इनर्स सेक्शन की तरफ बढ़ गई। उसने अपने हाथ में 2- 4 इनर्स, कैमिजोल आदि लिए और शौर्य के पास पहुंच गई।

शौर्य एक तरफ सोफा पर बैठा मोबाइल पर कुछ देख रहा था कि, तभी उसके सामने आकर मीरा खड़ी हो गई। उसने अपने हाथ में टांग रखे कपड़ों को शौर्य  के सामने कर दिया..।

“बेबी इनमें से कौन सा सेट लूं..?”

इस तरह से लेडीस इनर्स को देखकर शौर्य जरा झेंप गया। उसने मीरा की तरफ देखा और वापस नीचे देखने लगा..

“पहनना तुम्हें हैं.. जो तुम्हें पसंद आये ले लो.. !”

“ओह्ह प्लीज़ यार, थोड़ी तो हेल्प कर दो.. !”

शौर्य को मीरा का इस तरह का फूहड़पन कभी पसंद नहीं आता था।
उसने नजर उठाकर मीरा को घूर कर देखा और मीरा समझ गई कि शौर्य को उसका यह काम पसंद नहीं आया है।
वह पैर पटकती हुई वहां से दूसरी तरफ चली गई ।
तभी शौर्य की नजर कांच के बाहर रास्ते पर चली गई। रास्ते पर एक लोकल बस आकर रुकी थी।
शौर्य अचानक उठा उसने मीरा को आवाज दी।अपना डेबिट और क्रेडिट कार्ड मीरा को पकड़ा कर वह एक झटके में दौड़ कर बाहर निकल गया..

जाने क्यों लेकिन उसे लोकल बस और लोकल ट्रेन में सफर करने में बड़ा मजा आता था। आम लोगों के बीच बस में खड़े होकर जाना उसे पसंद था। उसने बस की तरफ अपने कदम बढ़ाए कि तभी बस आगे बढ़ने लगी..

तेजी से कदम बढ़ाते हुए वो बस की हैंडल को पकड़कर फटाफट बस की सीढ़ी पर चढ़ने को था की एक हाथ उसकी तरफ बढ़ा और उसने शौर्य को ऊपर खींच लिया..

शौर्य ने उसकी तरफ देखा, सामने एक लड़का खड़ा था..
सांवला रंग, बिखरे उड़े से बाल और एक कान में लटकता कुंडल.. गहरी जी जींस पर उसने पीला सा कुरता पहना हुआ था..
वो भी शौर्य को देख मुस्कुरा उठा..

“थैंक्स.. !”

शौर्य को देख उसने हाँ में गर्दन हिलायी और एक तरफ होकर खड़ा हो गया..

बस के दरवाजे से लग कर खड़े शौर्य के चेहरे पर एक लंबी सी मुस्कान चली आई..
बाहर मौसम भी सुहाना था, हल्की हल्की सी बारिश होने लगी थी! चेहरे पर फुहारे पढ़ रही थी और ठंडी ठंडी हवा उसे सहला कर जा रही थी…

उसी वक्त उसका फ़ोन बजने लगा..
उसने देखा समर का फ़ोन आ रहा था..
शौर्य ने बेमन से फ़ोन उठा लिया..

“कहाँ हो शौर्य ?”

“क्या हुआ.. ?”

“शॉपिंग कर रहे हो ?”

समर के इस सवाल पर शौर्य के कान खड़े हो गए….

“अअअ हम्म.. हम्म क्या हुआ ?”

“ऐसा क्या खरीद रहें हो जो एक दिन में बारह लाख खर्च  दिये ?”

शौर्य राजकुमार था, और जब वो खरीदारी करने जाता था तब कई बार उसे कोई एक वस्तु ही अस्सी नब्बे लाख की पसंद आ जाया करती थी…!
और वो ले भी लिया करता था, लेकिन अपनी माँ को बताकर ही वो ये काम किया करता था..!
फिर आज सिर्फ पंद्रह लाख पर समर का यूँ पूछताछ करना उसकी समझ से बाहर था….

” 15 लाख ही तो खर्च किये हैं,  ऐसा क्या हो गया जो आप सवाल जवाब करने लगे..?”

” क्योंकि अभी जब तुम लंदन में थे तब भी तुम लगातार पैसे किसी  अकाउंट में भेज रहे थे!
आज पंद्रह लाख कि अभी शॉपिंग हुई है और बीस लाख के सामान की प्री बुकिंग की है तुमने!
अचानक इतना क्या जरूरत पड़ गई ?
बस वही पूछना चाह रहा हूं !
और देखो शौर्य तुम राजकुमार हो,  तुम्हें अपने हिसाब से खर्च करने की पूरी इजाजत है!
तुम्हारे माता-पिता या घर पर कोई भी तुम्हें किसी तरह से भी रोक-टोक नहीं करता! मैं भी तुम्हें रोक नहीं रहा हूं। लेकिन तुम्हारी मां ने मुझे यह हक भी दे रखा है कि अगर तुम अपने हाथों से बाहर जाओगे तो मैं तुमसे सवाल जरूर करूंगा..!”

” कुछ बहुत जरूरी सामान था काका..बस इसलिए खरीदना पड़ा.. !”

“लेडीज़ इनरवियर्स ?”

समर के इस सवाल पर शौर्य अपनी जीभ काट कर रह गया..

“ये बेवकूफ लड़की हद से ज्यादा पैसे उड़ाने लगी है.. !”

मन ही मन मीरा को कोसते हुए शौर्य ने..हम्म नहीं..अजीबो गरीब गोल मोल सा जवाब दिया.. और फ़ोन रख दिया..

उसका अच्छा खासा मूड चौपट हो गया था..
वो अगले स्टॉप पर उतरा और बस के पीछे पीछे आ रहीं अपनी लम्बी चौड़ी सी गाडी में सवार हो कर मीरा के पास वापस जाने मुड़ गया..

क्रमशः

aparna…

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Upasna
Upasna
1 year ago

पहले no पर कमेंट किया था बड़े दिनों बाद जाने कहाँ उड़ गया
कली शौर्य की प्रेम की गाड़ी आखिरकार रफ्तार पकड़ने ही लगी ,वासुकी नाम के स्टेशन पर तो थमना होगा इसे हाय क्या होगा तब…फिलहाल तो इस नया नए प्यार को परवान चढ़ते हुए देखना है ।
अच्छे लोगों के हर जगह दुश्मन मौजूद होते हैं शौर्य के लिए खतरा खड़ा हो रहा लेकिन विक्रम और वासुकी की नजर को हद में है वो
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Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
2 years ago

बहुत अच्छा भाग रहा दीदी, मतलबी लड़की she is very selfish, she will ruin his image, shaurya’s well wishers are really worried for him, so I also want Kali in next episode very nice chapter Didi…💐👍🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

बेहद लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐