जीवनसाथी -3 भाग -18

जीवनसाथी -3 भाग -18

जीवनसाथी by aparna

  कली के दोस्तों की साँस आफत में अटकी पड़ी थी… वासुकी से मिलने जाना मतलब शेर की मांद में घुसने बराबर था..
सब अपनी हिम्मत जोड़ कर कली के बताये समय पर वहाँ पहुँच गए..
डेरिक के मन में कली के लिए कोमल सी भावनाएं थी.. उसे लगा वासुकी से मिलने जा ही रहा है तो उसे अच्छे से इम्प्रेस भी कर लिया जाये.. ।

सुबह ही इंडियन स्टोर से उसने शेरवानी खरीदी थी… गुलाबी शेरवानी पर ताज़ा खिला गुलाब लगा कर बिल्कुल किसी लूटी पीटी सी रियासत का सस्ता नवाब बनकर वह अपने दोस्तों के साथ कली के घर पहुंच गया।

डोरबेल बजाते ही कली ने हीं दरवाजा खोला और डेरिक को देखते ही उसे हंसी छूट गई..
सारिका भी हसँ पड़ी..

“इतना दूल्हा बन कर आने की क्या ज़रूरत थी ?”

कली की बात सुन डेरिक झेंप गया..
उसके साथ ही कली की बाकी सहेलियां भी अंदर चली आई..

उन सब को बैठा कर कली अपने डैडा को बुलाने चली गयी..
सरु भी आकर उन सब के सामने बैठ गयी.. और उन में से एक लड़की ने सरु से सवाल पूछ लिया..

“आप तो सच में उसके साथ जा रहीं है ना ?”

सारिका ने बड़े ध्यान से उस लड़की की तरफ देखा और कंधे उचका दिये..

“आप लोग सच में नहीं जा रहे क्या ?”

सारिका के सवाल पर डेरिक उछल पड़ा.. -“क्यूँ नहीं जायेंगे.. हम सब को .इण्डिया से प्यार है..।”

डेरिक के अलावा बैठी तीनों लड़कियां इंडियन थी, इसलिए सरु ने हां में गर्दन हिला दी।

” इन तीनों का तो समझ में आता है, लेकिन तुम्हें इंडिया से क्यों प्यार है?”

सरू ने डेरिक से सवाल पूछ लिया।
  डेरिक और बाकी तीनों को कली ने सवालों के जवाब रटवाये हुए थे। उन्हीं सवालों को जिनके वासुकी द्वारा पूछे जाने की कली को उम्मीद थी। लेकिन अचानक सारिका आकर ऐसा कुछ पूछ जाएगी यह उन चारों में से किसी को भी आभास नहीं था..।

डेरिक अपने पास बैठी निशा को देखने लगा..
वो मुस्कुरा कर सरु को देखने लगी..

” इंडिया से किसे प्यार नहीं होगा आंटी। हमारे ग्रुप में हम चार लड़कियां इंडिया से हैं और हम इंडिया के बारे में इतना कुछ बताते हैं कि इसे भी इंडिया देखने का मन करने लगा है..!”

” लेकिन मेरे विचार से तो तुममे से कोई भी आज तक इंडिया नहीं गया, फिर तुम सब इसे बताते क्या हो..?”

सब एक दूसरे का मुंह देखने लगे, और लेकिन तभी कली वहां पहुंच गई..

” क्या सरू, आप भी इन लोगों के साथ गप्पे मारने में लगे हो। इन लोगों को कुछ खिलाओ पिलाओ। बड़ी दूर से आए हैं बेचारे, और हां आज ये चारों डिनर हमारे साथ ही करेंगे..!”

” आज तुम्हारे दर्शन अंकल खाना बना रहे हैं, और वह भी टिपिकल इंडियन फूड तो डिनर कितने बजे मिलेगा यह मुझे नहीं पता? मैं फिलहाल तुम सब के लिए स्ट्रौबरी शेक बनाकर लाती हूं..!”

सब ने हामी भरी और सरू के वहां से जाते ही सब ने राहत की सांस भरी।

” तेरे घर में तो यार हर कोई जासूस है। यह तेरी सरु आंटी भी सवाल पर सवाल मार रहीं थी हम पर !”

” अब देख लो तुम लोग, मेरे घर पर तुमसे 10 मिनट भी  बैठा नहीं जा रहा..
मैं इसी घर में जी रही हूं, सांस ले रही हूं, इसलिए तो इंडिया जाना चाहती हूँ एक बार ..! कम से कम एक बार तो खुल कर साँस लूँ !”.

” हां तो हम सब भी तो तेरी मदद ही कर रहे हैं, किसने मना किया है..!”

उसी वक्त वासुकी वहाँ चला आया… ब्लू डेनिम पर ब्लैक शर्ट पहने उसने बाज़ू आधी मोड़ रखी थी..

तेज़ी से सीढ़ियां उतर कर वो उन लोगों के बीच चला आया.. और उसके आते ही वो सब लोग अपनी जगह पर खड़े हो गए…
सब एकटक उसे देख रहे थे..

“अरे प्लीज़.. आप सब बैठिये !”

सब तुरंत बैठ गए..
उसी वक्त सारिका कुकीज़ और स्ट्राबेरी शेक ले आई..

“आप लोग लीजिये ना !”

वासुकी के ऐसा कहते ही यंत्रचालित गुड्डों सा सबने अपना अपना गिलास उठा लिया..
वासुकी के पीछे खड़ी कली ने पीछे से उन लोगों को बोलने का इशारा किया..
लेकिन सामने बैठे उन चारों पर वासुकी इफेक्ट ऐसे चढ़ा था कि किसी को कली का इशारा समझ नहीं आया..

एक बार फिर कली ने इशारा किया और अब की बार सामने बैठे डेरिक को लगा कली उसे कूकीज़ उठाने बोल रहीं..

उसने वासुकी की नजरों के ताप से खुद को बचाते हुए झिझकते हुए एक बिस्किट उठा ली..
उसकी देखा देखी लड़कियों ने भी वहीं काम किया..

चारों ने बिल्कुल किसी परेड की कवायद की तरह एक साथ मुहँ में रख कर बिस्किट चबानी शुरू कर दी..

वासुकी के पीछे खड़ी कली ने अपने माथे पर हाथ मार लिया.. उसने वापस ईशारा किया और एक बार फिर डेरिक ने बिस्किट उठा ली..

सरु बड़े आराम से ये सब पंचायत देख रही थी..
उसके माथे पर बल पड़ रहें थे..

और उन बातों से अनजान वो चारों लोग चुपचाप बिस्किट पर बिस्किट ठूंसते जा रहें थे..
वासुकी उन लोगों के सामने बैठा था..
उसके दोनों हाथ उनके पैरों पर रखें थे और सामने की तरफ उसने दोनों हाथों की हथेली को आपस में जोड़ रखा था…

वो बड़े ध्यान से उन सब को देख रहा था..
और शायद इसलिए सब को सांप सूंघ गया था..

आखिर कली ने ही कहना शुरू किया..

“डैडा ये चारों मेरे साथ इंडिया जाने वाले हैं और डैडा हम सारे लोग वहां पर 10 दिन एक साथ रहेंगे। जिस फोटोग्राफी एग्जिबिशन को अटेंड करने के लिए हम लोग जा रहे हैं, वहां के हेड ने हम लोगों के रुकने के लिए एक फ्लैट का इंतजाम किया हुआ है। 3BHK फ्लैट है। जिसमें हम चारों लड़कियां एक साथ रहेंगी। वहां पर दूसरे देशों से भी और लोग आ रहे हैं कि इंडिया का सबसे बड़ा फोटोग्राफी एग्जिबिशन होने वाला है।
डेरिक उन लड़कों के साथ रहेगा। यह हम लोगों के रूम में नहीं रहेगा। हम लोगों के लिए रूम अरेंज करने वाले विराट सर का ही एग्जिबिशन है। और इसमें हम लोगों को फोटोग्राफी की ढेर सारी बारीकियां सीखने को मिलेंगी।
डैडा प्लीज मना मत कीजिएगा, मेरा बहुत मन है इस एग्जिबिशन को अटेंड करने का।
   मैं बिल्कुल चुपचाप दिल्ली जाऊंगी, एग्जिबिशन अटेंड करूंगी और वापस चली आऊंगी … आई प्रॉमिस डैडा… !”

“हम्म…. कौन सा कैमेरा यूज़ करते हो ?”

वासुकी ने डेरिक से पूछा.. डेरिक ने मोबाइल कैमेरा के अलावा और कोई कैमेरा कभी नहीं यूज़ किया था..।
वो कुछ गलत जवाब देता, इसके पहले कली बोल पड़ी..

“लाइका एम -3 डी -2 “

कली ने फट से बोल दिया और डेरेक ने उसकी बात पर मुहर लगा दी..

“जी मिस्टर वासुकी.. लाइका एम यूज़ करता हूँ !”

वासुकी के माथे पर बल पड़ गए..

“इतना महंगा कैमेरा खुद खरीदा या तुम्हारे डैड ने दिलवाया है !”

वासुकी के सवाल पर डेरिक ने अपनी बुद्धिमता का परिचय देते हुए जवाब खुद ही देना शुरू कर दिया।

हड़बड़ाहट में कली ने विराट के कैमरा का नाम तो ले लिया था, लेकिन उसे खुद भी अंदाजा नहीं था कि वह जिस कैमरा की बात कर रही थी उसका मूल्य करोड़ों में था। और किसी कॉलेज के विद्यार्थी के लिए इतना महंगा कैमरा रखना वाकई असंभव था।
    वासुकी तो वासुकी था। वह भले फोटोग्राफी के बारे में कुछ ना जानता हो लेकिन कैमरे की कीमत के बारे में तो उसे भी मालूम ही था..।

“जी थोड़ा पॉकेट मनी जोड़ ली थोड़ा डैड ने दे दिया.. !”

“फिर भी कॉलेज स्टूडेंट के हिसाब से कैमेरा काफ़ी महंगा है !”

“ओह्ह हाँ !”

“दस करोड़ का कैमेरा है… तुम स्टूडेंट ही हो ना ?”

वासुकी के द्वारा कैमेरा का प्राइज बताते ही डेरिक के गले में शेक फंसने लगा, उसे ठसका सा लगा और उसके पास बैठी निशा उसकी पीठ ठोंकने लगी..
गहरी नज़र से उन्हें देख वासुकी ने अगला सवाल दाग दिया…

“तो तुम सब साथ जा रहें हो.. ?”

चारों ने एक साथ गर्दन हाँ में हिला दी….

वासुकी ने ध्यान से सब को देखा..

“वीसा हो गया है ?”

चारों एक दूसरे को देखने लगे, और कली बोल पड़ी..

“हाँ डैडा, वहीं मिस्टर विराट सर करवा रहें हैं !”

“हैं कौन ये विराट सर ?”

“इण्डिया की जानी-मानी रॉयल फैमिली के मेंबर हैं… लेकिन अब इंडिया में भी राजा महाराजा कहां रह गए हैं? इनकी फैमिली भी बिजनेस फैमिली हो चुकी है। लेकिन इन्हें फोटोग्राफी का बहुत शौक था और इसलिए फोटोग्राफर बन गए। इनके जगह-जगह एग्जिबीशंस होते हैं। इनकी खींची तस्वीरों के बुक भी आ चुके हैं। यह फोटोग्राफी पर अक्सर सेमिनार करवाते हैं। आपको पता है डैडा इन के सेमिनार में एक-एक दिन के चार्ज ही सौ डॉलर के अराउंड होते हैं। इतने महंगे एग्जिबिशन और सेमिनार में इन्होंने मुझे बिल्कुल बिना किसी फी के चुना है कि मैं इनका एग्जिबिशन कम सेमिनार अटेंड करूँ !
मेरे लिए बहुत बड़े गर्व की बात है कि इतना बड़ा फोटोग्राफर मुझे खुद अपने पास इंटर्न रखना चाहता है..!”

“वहीं तो मुझे समझ नहीं आ रहा कि तुझमे ऐसा क्या है ?”

सरु बोल पड़ी..

कली ने सरु को घूर कर देखा..

“घर की मुर्गी दाल बराबर ही लगती है सबको ! मेरा फोटोग्राफी टैलेंट अगर आप लोग देखोगे ना तो दांतो तले उंगली दबा कर रह जाओगे..!”

” वह तो ठीक है कली लेकिन इन सबके चेहरों में वो रौनक नज़र नहीं आ रही,जो तुम्हारे में.. ऐसा क्यूँ ?”

वासुकी के सवाल पर कली चहक उठी..

“क्यूंकि सिर्फ मुझे फ्रीे में सिखाने बुलाया गया है, बाकी इन सभी से पैसे लिए जायेंगे !”

वासुकी कली की बात सुन हॅंस पड़ा..
कली ने पीछे से एक बार फिर इशारा किया और डेरिक ने लपक कर कुकी उठा ली..

सरु का पूरा ध्यान कली और डेरिक पर ही था..
वो बड़ी गहरी नज़रों से कभी डेरिक को कभी कली तो कभी अपनी शानदार होममेड कुकीज़ को देख रही थी..
ये दर्श की पसंदीदा ओट्स कुकीज़ थी..

दर्श का खान पान वैसे भी अलग था.. उसे मण्डोरियन चायनीज़ इटेलियन खाना ही पसंद आता था..
वासुकी का वैसे भी खाने पीने में कोई ख़ास पसंद नापसंद नहीं थी..
उसके सामने जो परस कर रख दिया जाये वो चुपचाप खा लेता था..
इसी से सरु सभी ऐसी ही चीजे बनाया करती थी..

ये भी उसने एक दिन पहले बड़ी मेहनत से बनायीं थी…

“चिंता मत करो, अभी टोक देती हूँ कि पूरी प्लेट साफ़ ना कर जायें….!”

सरु की कुकीज़ पर टिकी निगाहें देख कली उसके पास आ गयी..

“अरे.. ना.. नहीं..!” सरु अभी कुछ कहती उसके पहले ही कली ने वापस बम फोड़ दिया..

“तो डैडा हम सब जा सकते हैं ना ? प्लीज़ प्लीज़ डैडा.. मैं वादा करती हूँ रोज़ दिन में दो बार आपको कॉल करुँगी..

कली की बात आधे में काट कर वासुकी कहने लगा..

“दो बार वीडियो कॉल करोगी, रोज़ सुबह शाम अपने खाने की तस्वीरें भेजोगी, पैसे सम्भल कर खर्च करोगी, और चाहें कुछ भी हो जायें तुम गाड़ी ड्राइव नहीं करोगी.. !
तुम्हारा हाथ बहुत ज्यादा ना खुल जाएं इसलिए तुम्हें रूपये लिमिट में ही दूंगा…।
कली तुम वाकई मेरी प्रिंसेस हो लेकिन मैं नहीं चाहता की मेरी प्रिंसेस हवा में उड़ती फिरे.. और ठीक दस दिन बाद यानी ग्यारहवे दिन तुम यहाँ वापस होंगी.. !”

“पक्का डैडा.. कली खुद अपने डैडा से इससे ज्यादा दिन तक दूर नहीं रह सकती… !”

कली अपने डैडा के गले से लग गयी…

वासुकी अपनी जगह से उठा और एक गहरी सी नज़र हर किसी पर डाल कर वापस मुड़ गया..
तेज़ कदमो से वो अपने ऑफ़िस रूम की तरफ चला गया..
और गहरी सी साँस लेकर कली वहीं बैठ गयी..

उसके सारे दोस्तों ने भी एक गहरी सी राहत भरी साँस ली और डेरिक ने जैसे ही कुकीज़ की प्लेट की तरफ हाथ बढ़ाया कली ने सरु को देखते हुए उसे टोक दिया..

“बस कर डेरिक.. तू बस यहाँ कुकीज़ ही खाने आया था..।
वैसे प्लेट में परोसी सारी चीज़े मेहमानो को खत्म करना ज़रूरी नहीं होता.. बचा सामान हम वापस डिब्बे में रख लेते है और दुबारा कोई मेहमान आए तो परोस भी देते हैं.. !”

झेंप कर डेरिक मुस्कुरा उठा और अपना हाथ पीछे हटाने लगा की कली ने प्लेट उसके सामने कर दी और खुद कुकीज़ उठा कर उसके मुहँ में ठूंस दी..

“थैंक यू सो मच गाइज़.. तुम सब के कारण मुझे इजाज़त मिल गयी.. लव यू ऑल.. !”

डेरिक ने वापस उसे झेंप कर देखा और धीरे से लव यू टू बोल दिया….

कुछ देर बातों में लगे रहने के बाद सरु और दर्श ने मिल कर सबका डिनर परोस दिया..

एक बार फिर वासुकी के सामने बैठ कर वो चारों मासूम किसी फ़ौज की ट्रेनिंग के सामान सधे हाथों से एक पर एक निवाला बिना किसी आवाज़ के निगलते चले गए..

दोस्तों के वहाँ से जाते ही कली सरु को पकड़ कर झूम झूम कर नाचने लगी..
कांच की खिड़की पर बारीश की झिलमिल फुहारें पड़ रहीं थी और उन रसवंती फुहारों से कली अंदर तक ख़ुशी से भीगती चली जा रहीं थी…..

****

हर्ष का परफ्यूम वाला काम दिल्ली ही में चल रहा था… और अब उसकी मॉडल्स भी दिल्ली आ गयी थी…

उन सबके रहने के लिए हर्ष की कम्पनी की तरफ से अलग से कोई व्यवस्था करने की जगह उन्हें हॉउस रेंट देने की व्यवस्था कर दी गयी थी, जिससे सब अपनी सुविधानुसार घर देख लें.. जब तक ये लोग घर नहीं ढूँढ लेते तब तक के लिए इन सब को होटल में रुकवा दिया गया था…
होटल के कमरे में ढ़ेर सारी लड़कियों के साथ मीरा को रहना पसंद नहीं आ रहा था..

उसी वक्त उसकी पिछली रूम मेट रानी का फ़ोन आ गया..
उसका दिल्ली ट्रांसफर जो गया था और उसे अपने ऑफ़िस के पास किसी बिल्डिंग में एक छोटा सा फ्लैट रेंट पर ऑफ़िस मैनेजर ने ढूँढ कर दिलवा दिया था.. उसकी बात सुन मीरा ख़ुशी से उछल पड़ी..

“थैंक गॉड… तू आ रहीं है। अब सब ठीक हो जायेगा..। पिछले दो दिन से मैं चार चार लड़कियों के साथ एक ही कमरे में एडजस्ट कर रहीं हूँ यार.. कसम से रोना आ रहा है..
ये इतना बड़े बुंदेलाज़ खुद तो महलों में रहते है, और अपनी मॉडल्स को चार गर्ल्स को एक कमरे में ठूंस दिया है जैसे हम मुर्गियां हो.. रिडिक्युलस !!”

मीरा के साथ बैठी लड़की जो अपने पैरों की नेल पेण्ट हटा रहीं थी फट से बोल पड़ी..

“बुंदेला फैमिली रॉयल फैमिली है, इसका मतलब ये थोड़े ना हुआ कि वो अपने एम्पलॉईस को रॉयल ट्रीटमेंट देंगे..। वैसे भी ये फाइव स्टार होटल है.. इसमें हमें एकोमोडेशन दिया है, यही बड़ी बात है !”

उस लड़की की आवाज़ रानी के कानों में भी पड़ गयी…

“ये कौन बोल रहीं है ?” रानी ने सवाल किया..

“होंगी कोई बुंदेलों की चमची ! वैसे यार इस ऑफ़िस में काम करना इतना भी आसान नहीं है !”

“क्यूँ.. क्या हुआ ?”

“यहाँ एक लकड़बग्घा काम करता है, जिसकी नज़र हर वक्त हर किसी पर होती है.. पता नहीं कितने सर और कितनी आंखें हैं उसके पास..
मुझे तो लगता है हर्षवर्धन के ऑफ़िस का हर बंदा उस लकड़बग्घे से परेशान होगा.. !”

“कौन है वो ? नाम तो बड़ा अलग सा है.. ! ऐसा नाम भी आजकल पेरेंट्स रखने लगे हैं क्या ?”

“अबे यार, तेरा दिमाग है या गोबर… धनुष नाम है उसका.. लकड़बग्घा मैं बोल रहीं.. !”

उत्तेजना में मीरा ज़रा ज्यादा ही तेज़ बोल गयी और आजु बाजू बैठी लड़कियां उसे घूरने लगी…

“किसे लकड़बग्घा बोला.. ? मेरे धनुष को कुछ बोला ना तो तेरा जबड़ा तोड़ दूंगी. !”

तभी दूसरी लड़की चली आई..

“तेरा कब से हो गया… वो तो दिलों जान से मुझ पर फ़िदा है.. देखा नहीं सबसे ज्यादा प्यार से मुझसे  बात करता है.. !”

“मैंने तो नहीं देखा… बल्कि मुझे अक्सर पूछता है कोई कमी तो नहीं लग रहीं.. अच्छे मेहनत से काम करना..!”

“वो तो ये सभी लड़कियों को मोटिवेट करने बोलता ही है.. इसमें कौन सी बड़ी बात है !”

सभी लड़कियों के नाराज़गी भरे चेहरें देख मीरा ने सबसे माफ़ी मांगी और फ़ोन उठाये बाहर निकल गयी..

“रानी कब पहुँच रहीं है तू यहाँ ?”

“बस आज रात मेरी ट्रेन पहुँच जायेगी, और तू चाहें तो कल सुबह ही अपना सामान पैक कर आ जाना.. पर सुन रूम रेंट शेयर करना होगा.. आधा मैं आधा तू.. !”

“हाँ बाबा.. पक्का शेयर करुँगी.. !”

“पिछली बार जैसा नहीं चलेगा.. !”

“हाँ पर रेंट है कितना ?”

“अभी ठीक से नहीं मालूम, वहीँ आकर पता चलेगा.. चल अब मैं रखती हूँ.. बाद में बात करुँगी.. !”

राहत की साँस लेकर मीरा अंदर चली गयी… वो खुश थी की लकड़बग्घे की फैन इन छिपकलियों के साथ उसे रहना नहीं होगा…

****

शौर्य दिल्ली जाने के लिए अपना सामान लिए एयरपोर्ट पहुँच चुका था.. बाँसुरी उसके साथ थी..
बाँसुरी के अलावा रूपा और निरमा भी आये हुए थे..
मीठी शौर्य के साथ ही जा रहीं थी..

शौर्य ने अंदर जाने से पहले बाँसुरी को एक बार गहरी नज़र से देखा..

“आज भी डैड कहीं ना कहीं व्यस्त ही होंगे !”

बाँसुरी ने हाँ में गर्दन हिला दी और गर्दन को हल्का सा झटका देकर शौर्य भारी मन से अंदर चला गया…

मीठी अपनी माँ के गले से लगने के बाद बाँसुरी के भी गले से लग गयी.. उसने बाँसुरी के कान में धीरे से थैंक यू मासी कहा और उससे अलग होकर रूपा के सामने चली आई..
रूपा से जाने क्यूँ वो ज़रा संकोच ही करती थी.. उसके सामने उसने हाथ जोड़ दिये..
रूपा ने भी मुस्कुरा कर उसे देखा और अपना हाथ हिला दिया..

मीठी और शौर्य भी दिल्ली के लिए रवाना हो गए..

क्रमशः

aparna…

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Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
2 years ago

दीदी, यह भाग पढ़कर भई मज़ा आ गया, दी पढ़ते पढ़ते चेहरे पर स्माइली बनी रही, दीदी लेखन में कुछ चीज़ें जो आपसे अडमायर करने लायक है उनमें से एक है आपकी विवरण पद्धति, वह मेरे लिए हमेशा विशिष्ट रही है, बहुत उम्दा भाग दी…💐🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

कली को कितने पापड़ बेलने पड़ रहे इंडिया जाने के लिए, उसके दोस्त तो बेचारे वासुकी के सामने कितनी प्रेक्टिस के बाद भी कुछ बोल नहीं पाए और वो डेरिक बस सारिका की इतनी मेहनत से बनाई कूकीस ही खाय जा रहा था 😃😃😃।हाय आज का भाग पढ़कर तो मेरी हंसी नहीं रुक रही थी।
बहुत बहुत बढ़िया भाग 👌🏻👌🏻👏👏👏👏।