जीवनसाथी -3 भाग -16

लंदन इवेंट से वापस लौटे कली को दो-तीन दिन बीत चुके थे, लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे अपने शरीर का एक हिस्सा वह वहीं छोड़ आई थी। उसका किसी काम में मन नहीं लग रहा था। दो-तीन दिन से वह कॉलेज भी नहीं गई थी। अपने कमरे में खड़ी उदास आंखों से बस खिड़की के पार देखती रहती थी।
एक शाम ऐसे ही अपने कमरे में खड़ी थी कि तभी वासुकी घर वापस आ गया। मेन गेट से गाड़ी अंदर ले जाते हुए उसकी नजर कली के कमरे की तरफ उठ गई। कली का कमरा पहली मंजिल पर था और कली अपनी खिड़की पर उदास नजरों से सामने लगे बड़े-बड़े दरख्तों को देख रही थी।
वासुकी ने गाड़ी पार्किंग में डाली और तेजी से घर के अंदर दाखिल हो गया। उसने सारिका से कली के बारे में पूछा और सारिका के यह बताने पर कि कली आज भी कॉलेज नहीं गई और ऊपर अपने कमरे में है, वह सीधा अपनी बेटी के कमरे में पहुंच गया।
कमरे का दरवाजा हल्का सा टिका हुआ भर था। वासुकी ने धीरे से दरवाजे को अंदर की तरफ धकेला और अंदर दाखिल हो गया। उसके ऐसे अंदर आ जाने का भी कली को पता नहीं चला और वह खामोश नजरों से बस बाहर देखती खड़ी रही।
वासुकी चुपचाप कली के ठीक पीछे जाकर खड़ा हो गया..
“क्या सोच रहीं हो ?”
“हम्म.. बस यहीं कि यह हवाएं कितनी आजाद होती है ना!! यह जब चाहे, जहां चाहे, अपनी मर्जी से बह सकती हैं।
यह पंछी कितने आजाद होते हैं, जब चाहे एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक उड़ान भर सकते हैं।
पूरा आसमान अपने पंखों में नाप सकते हैं। इनके परवाज को रोकने की या टोकने की हिम्मत किसी में भी नहीं..।”
“क्या बात है? कुछ परेशान है क्या मेरी प्रिंसेस ?”
“डैडा मैं बस एक बार भारत जाना चाहती हूँ… बस एक बार !
मेरी इस एकलौती विश को पूरा कर दीजिये डैडा, फिर कभी कुछ नहीं मांगूंगी आपसे.. पक्का प्रॉमिस.. !!
जानती हूँ, आप मेरी बात नहीं मानेंगे।
बस ऐसे ही समय में मुझे मॉम की बहुत याद आती है, आज वो होती तो आप ऐसे मेरी बात को इग्नोर नहीं कर सकते थे..।
बल्कि वो कैसे भी आपको मना ही लेती और मुझे मेरी इच्छा पूरी करने में मदद भी करती। लेकिन मॉम है नहीं और इसलिए आप यूँ अकड़ू बने बैठे रहते हैं।
मैं जानती हूं डैडा कि आप मेरे लिए बहुत केयरिंग हैं और प्रोटेक्टिव भी।
लेकिन अपनी कली पर आप भी भरोसा रखिए ना। कली भी आपकी बेटी है। किसी कमजोर इंसान की थोड़ी ना!
मुझे भी अपनी रक्षा करना आता है। मैं भी समझदार हूं। लोगों को एक नजर में देखकर पहचान सकती हूं, मुझे कोई भी ऐसे थोड़ी ना उल्लू बना सकता है..।”
“इण्डिया जाकर करोगी क्या ?”
“डैडा, एक फोटो एक्ससीबीशन है, वो अटेंड करना चाहती हूँ.. सिर्फ दस दिन की बात है डैडा, उसके बाद आपकी कली आपके पास होगी, हमेशा हमेशा के लिए..
उसके बाद मैं कभी आपको छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाली ?”
एक गहरी सी फूँक छोड़ कर वासुकी भी खिड़की से बाहर देखने लगा…
उसे लगा जैसे नेहा उसके कानों में आकर गुनगुना गयी है…. -“जाने दीजिये ना, हमारी बेटी है वो ! सही गलत का फर्क जानती है… आपसे कहीं ज्यादा समझदार है वो ! मुझ पर जो गयी है.. !”
“इसी बात की तो टेंशन है कि तुम पर गयी है !” वासुकी नेहा की बात का जवाब दे उठा..
“हम्म…. क्या कहा डैडा ?”
“अहम्म कुछ नहीं.. कौन कौन जा रहा है तुम्हारे साथ ?”
कली आश्चर्य से आंखें फाड़े वासुकी को देखती रह गई। उसे सच में इस बात पर यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसके खडूस हिटलर डैडी उस से इंडिया जाने के बारे में सवाल जवाब कर रहे हैं। उसने तो बस ऐसे ही एक आखरी पांसा फेंका था। उसे क्या पता था कि उस पासे में 6 बटा 6 आ जाएगा।
कली ने फटाफट अपने दो-तीन दोस्तों के नाम वासुकी को गिना दिए…
“कल सब को घर बुलवाओ.. एक बार बात करना चाहता हूँ। उसके बाद तुम्हें भेजना है या नहीं ये सोचूंगा !”
कली अपनी जगह से उछल पड़ी…
वो अपने डैड के सीने से लग गयी..
“थैंक यू डैडा, थैंक यू सो मच.. यू आर माय एंजेल डैडा.. !”
अपनी बाँहों को वासुकी के गले में लपेट कर वो उसकी गर्दन से लगी झूल गयी..
“मेरे प्यारे डैडा.. !”
“हो गया.. बस करो ये मसखरी.. आखिर मान गए ना तुम्हारी डैडा।
मैंने तो पहले ही कहा था कि एक बार मना कर देख लो, हो सकता है मान जाए।”
सरू की बात सुनकर कली ने अपने सिर पर हाथ मार लिया।
क्या सरू हर जगह आप ऐसे ही अच्छे खासे प्लान के गुड को गोबर बना देती हो।
मन ही मन कली बड़बड़ा उठी…
अब तक तो उसके डैडा को यह लग रहा था कि वह हिंदुस्तान जाने के लिए उदास खड़ी है, और अब उन्हें पता चल गया कि यह सरू के साथ कली का बनाया प्लान था…
कली अपनी जीभ काट कर रह गयी..
कली ने वासुकी की तरफ देखकर दोनों कान पकड़ लिये…
वासुकी ने कली को देखा और फिर सरू की तरफ देखने लगा..
“तुम भी साथ जाओगी ! ” वासुकी ने आदेश सा दिया, और उसकी कहीं बात काटने की हिम्मत वहाँ किसी में नहीं थी..
“जी भैया !” सरु ने जवाब दिया
“लेकिन क्यूँ.. मैं अपनी देखभाल कर सकती हूँ !”कली छटपटा उठी..
वासुकी ने कली को घूर कर देखा..
“जाना है ना भारत, तो सारिका को साथ लेकर जाना होगा !”
कली ने सरु को घूर कर देखा और होंठो ही होंठो में वापस बड़बड़ाने लगी..
वासुकी ने सारिका से एक कॉफ़ी लाने कहा और अपने कमरे में चला गया..
अपने कमरे की खिड़की पर खड़ा वो वापस नेहा की याद में डूब गया था… उसे यूँ लगा जैसे उसके पीछे से आकर दो कोमल सी बाँहों ने उसे अपने घेरे में लें लिया है..
नेहा की खुशबू महसूस करते वासुकी ने अपनी ऑंखें बंद कर ली..
यूँ लगा जैसे नेहा एक बार फिर उसके कानों में गुनगुना गयी..
“सुध बुध मोरा छीनी रे मोसे नैना मिलायी के..
छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नयना मिलायी के..
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लंदन इवेंट में अपने पिता की तरह ही शौर्य ने भी सर्वश्रेष्ठ युवा राजकुमार के ख़िताब पर कब्ज़ा जमाया था..
ये और बात थी कि इवेंट के आखिरी दिन रात में ये घोषणा स्वयं इंग्लैंड की रानी द्वारा वहाँ मौजूद युवक युवतियों के बीच की गयी थी, और इत्तेफाक से उस वक्त कली वहाँ मौजूद नहीं थी.. ।
उसे आखिर तक ये मालूम नहीं चल सका की शौर्य प्रताप असल में एक राजकुमार था और राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला का बेटा था..।
शौर्य की वापसी की ज़ोरों शोरो से तैयारी की जा रहीं थी..।
और आखिर महलवासियों की प्रतीक्षा की घड़ियों को समाप्त कर राजकुमार शौर्य प्रताप महल पहुँच गए..
एयरपोर्ट पर शौर्य और परी को लेने उनकी पूरी मण्डली पहुँचने वाली थी, लेकिन हर्ष को किसी फॉरेन क्लाइंट से मीटिंग होने के कारण वो और मीठी रुक गए और धनुष अकेला ही उन्हें लेने चल पड़ा..
आज वर्कशॉप में लड़कियों को धनुष सुबह से ही दिखाई नहीं दिया था….
मीरा के अलावा हर एक लड़की उदास थी, लेकिन मीरा आज बहुत खुश थी..
पहली बात आज शौर्य वापस लौट रहा था, दूसरा आज सुबह से उसे धनुष के दर्शन नहीं मिले थे..
“आने दो एक बार शौर्य को, इस लकड़बग्गे की शिकायत ना करी ना तो मेरा नाम भी मिशा हम्म मीरा नहीं.. !”
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महल के सबसे बाहरी गेट पर झिलमिलाती रोशनियों के तोरण लगाए गए थे…
मुख्य द्वार के दोनों तरफ लगभग दस फुट से भी ऊँचे पाषाण मूर्ति के द्वारपाल सजे थे, उनके ठीक बगल में पानी के झरनो में कुमकुम और केसर छिड़क कर पानी को खुशबूदार कर दिया गया था..
शौर्य और परी की गाड़ी जैसे ही उस मुख्य द्वार से अंदर की तरफ मुड़ी वैसे ही सारे रस्तों में एक एक कर दिये जलने लगे..
ये बिजली के दीपक थे जो रास्ते पर गाड़ी के आगे बढ़ते जाने पर खुद ब खुद जलते चले जा रहें थे..
यूँ लग रहा था महल में दीवाली आ गयी हो…
शौर्य और परी जैसे ही गाड़ी से उतरे उन पर हर तरफ से फूलों की बरसात होने लगी…..
शौर्य मुस्कुरा कर झेंप सा गया.
उसे इतना ग्रेंड वेलकम अजीब ही लगा करता था लेकिन वो जानता था कि उसकी रानी मां उससे इतना स्नेह करती है कि वह कहीं से 2 दिन के बाद भी लौटे, तब भी रानी मां का प्यार इसी तरह उस पर बरसने लगता है! अपने बालों में फंसे फूलों को हटाता हुआ शौर्य अपनी बड़ी-बड़ी पलकों को उठाकर सामने की तरफ हुआ कि अपने सामने रानी मां को खड़ा पाया!
रूपा अपलक नेत्रों से अपने कलेजे के टुकड़े को देखकर मोहित हो रही थी…।
गुलाबी रेशमी कपड़े पर रेशम के धागो का महीन काम रूपा की राजसी पोषाक को और भी खूबसूरत कर रहा था..
वो आज भी बिलकुल वैसी ही नजर आ रही थी, जैसे आज से कुछ सालों पहले बांसुरी के महल में प्रथम आगमन पर वो राजा के स्वागत के लिए खड़ी हुई थी..
रूपा अपने नाम के अनुरूप ही सुंदरता की अप्रतिम मूरत थी। उस पर उसे सजने संवरने का भी बेहद शौक था। हीरो का जड़ाऊ हार और हीरो के ही जगमगाते कर्णफूल उसके चेहरे के लुभावने पन को और भी ज्यादा सुंदर और मोहक बना रहे थे।
वह बड़े प्यार से अपने बच्चों का स्वागत करने के लिए खड़ी थी। शौर्य और परी के उसके पास आते ही उसने धीरे से अपना आंचल जो उसने अपने सीधे हाथ की उंगलियों में थाम रखा था, को छोड़कर अपनी सहायिका के हाथ से आरती की थाली ले ली।
आरती की उस सोने की थाल में ढेर सारे गुलाब के फूलों के बीच एक बहुत सुंदर सा दीपक रखा था। इसके साथ ही चांदी के लोटे में पानी भी रखा था। आरती की थाल अपने हाथों में लेकर रूपा ने परी और शौर्य की आरती उतारी। दोनों के माथे पर कुमकुम का तिलक लगाने के बाद उसने आरती की थाली अपने पास खड़ी सहायिका के हाथ में पकड़ा दी।
चांदी के कलश से दोनों के माथे से 7 बार जल उतारने के बाद वह कलश भी उसने अपनी सहायिका को दे दिया। अपने हाथ से उसने एक अंगूठी निकालीं और एक बार फिर शौर्य की नजर उतार कर साथ खड़ी सहायिका के हाथ में रखी थाली में छोड़ दी।
वह अंगूठी और वह कलश दोनों ही उसने उसी सहायिका को दे दिया। उनके इतना करने की देर थी कि शौर्य लपक कर अपनी रानी मां के चरणों में झुक गया।
हर्ष के चेहरे का रानी मां के चेहरे से बहुत ज्यादा साम्य था। इसलिए बहुत बार शौर्य को हर्ष के चेहरे पर रानी मां ही नजर आती थी।
हर्ष का डिल डौल ऊंचा पूरा व्यक्तित्व जहां अपने पिता युवराज की तरह था, वही चेहरे का भोलापन और मासूमियत अपनी मां के जैसा था.. ।
शौर्य जैसे ही अपनी रानी मां को धोक देकर सीधा खड़ा हुआ, रानी मां ने आगे बढ़ कर उसे अपने सीने से लगा लिया। घर भर के लड़के अब इतने लंबे हो चुके थे कि उनकी माताएं उनके कंधों से नीचे तक ही पहुंच पाती थी। रानी मां भी शौर्य के सीने से लग कर खड़ी हो गई उनकी आंखों से दो बूंद मोती ढुलक पड़े..
” अरे अब क्यों रो रही हैं आप? आ तो गया हूं वापस..!”
” पता नहीं इतने दिन वहाँ क्या खाया पिया होगा? समय पर उठते थे, सोते थे? या पता नहीं सारा वक्त पार्टी करते रहते थे..?”
“रानी माँ… आप नहीं सुधरोगी.. अरे वहां पार्टी करता किसके साथ ?
मेरा पूरा गैंग तो यही छूटा हुआ था और वहां कोई नये दोस्त मिले नहीं..!”
” थोड़ा हम पर भी लाड़ बरसा लीजिये.. जी हम भी इसी महल की अदना सी राजकुमारी हैं.. !”
परी की बात सुन रूपा ने उसे भी अपने गले से लगा लिया..
” वैसे आपको बता दूं आपके लाड़ कुंवर को वहां कोई ढंग की लड़की मिली नहीं, जिसके साथ मिल कर फ्लर्ट कर सके बस इसीलिए इसकी कोई पार्टी वार्टी नहीं हुई वहाँ.. !”
रानी मां ने बनावटी गुस्से से शौर्य को देखा और शौर्य ने बड़े लाड से अपनी रानी मां को अपनी बाहों के घेरे में पीछे से ले लिया और उनके कंधे पर अपना चेहरा टिका कर उन्हें छेड़ने लगा..
“अब क्या कहूं रानी माँ.. जिसने आपको देख लिया उसे कोई और चेहरा भा ही नहीं सकता..
आपके लाड़ले की गर्लफ्रेंड होने के लिए आप जितना नहीं तो भी कम से कम आपका पांच परसेंट तो हो..
रानी माँ ने लाड़ से उसके गाल पर हल्की सी चपत लगा दी…
वहीँ एक तरफ खड़ी बाँसुरी हाथ बांधे खड़ी माँ बेटे के लाड़ का ये रूप देखती मुस्कुरा रही थी..
शौर्य ने अपनी गोल गोल पलकों को उठा कर बाँसुरी को देखा और आँखों ही आँखों में मुस्कुरा दिया…
धीरे से वो अपनी माँ की तरफ बढ़ गया, बाँसुरी ने प्यार से उसे अपनी बांहों में ले लिया…
माँ के सीने में एक सुकून सा भर गया.. और बेटे ने प्रसन्नता से आंखें मूँद ली.. -” डैड कहाँ है ?”
“आज ही सुबह दिल्ली निकलना पड़ गया, पार्टी हाईकमान ने बुला लिया था.. !”
“हम्म.. मालूम था,ऐसा ही कुछ होगा ! जब भी मैं कहीं बाहर से आता हूँ तब डैड को अक्सर मुझसे ज़रूरी काम याद आ जाता है !”
“शौर्य… !”
बाँसुरी ने प्यार से उसे देखा, और उसका हाथ थामे उसे अंदर लें गयी..
आज महल में सब कुछ परी और शौर्य की पसंद का ही था..
परी और शौर्य की टोली उन दोनों का इंतज़ार कर रहीं थी…
हर्ष ने भी आगे बढ़ कर परी और शौर्य को गले से लगा लिया..
“हर्ष भाई आप ऑफ़िस नहीं गए ?”
“गया था, अभी तुम्हारे आने के टाइम पर वापस आ गया, बस अब तुमसे मिल कर वापस लौटना है ! रात के खाने पर मिलते हैं !”
“जी भाई ! धनुष तो मेरे साथ था, एयरपोर्ट मुझे लेने आ गया था, लेकिन शोवन कहाँ है ?”
शौर्य का सवाल सुन परी को भी ज़रा सुकून सा लगा क्यूंकि वो इतनी देर से उसे ही ढूँढ रहीं थी…
और उसी वक्त कहीं से यश चला आया और शौर्य के गले से लग के झूल गया..
परी की हथेली पर अपना हाथ मार कर वो बोल पड़ा..
“शोवन का आज कोई केस आ गया था, बस इसीलिए वो नहीं आ पाया.. वैसे मैं खुद एयरपोर्ट आने वाला था लेकिन कुछ ज़रूरी काम आ गया था.. !”
“रहने दो रहने दो यश, तुम्हारा ज़रूरी काम पता है हमें.. !”
मीठी बोल पड़ी और उसकी बात में छिपे व्यंग को समझ कर सभी हॅंस पड़े..
वो आगे कहने लगी..
“अभी मुश्किल से आधा घंटा पहले ही जनाब सोकर उठे हैं.. क्यूँ यश ? आज हर्ष के ऑफ़िस में मीटिंग के वक्त उस मीटिंग को अटेंड करने के लिए तुम्हें कॉल किया था और तुमने गहरी नींद में फ़ोन उठाया और रखने के बाद पक्का सो गए.. है ना ?”
यश झेंप कर अपने बालों पर हाथ फेरने लगा..
“ये सब छोडो यार, आज तो पार्टी बनती है.. शौर्य एक बार फिर हमारे महल का खोया हुआ ख़िताब वापस लें आया है, ये हम सब के लिए बड़ी ख़ुशी की बात है !”
“हाँ ख़ुशी की बात तो है ! आप सब कहें तो मैं पार्टी अरेंज कर देता हूँ !”
धनुष की इस बात पर हर्ष ने उसे देखा और मुस्कुरा उठा..
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“बस तुम पार्टी अरेंज करने का काम किया करो, खुद तो हमारी पार्टी का हिस्सा बनते हो नहीं.. इतना ज्यादा खुद को नियम कायदो में बांध रखा है..!”
हर्ष की बात सुन धनुष मुस्कुरा उठा..
उसने शौर्य और परी से इजाज़त ली और वहाँ से निकल गया..
हर्ष भी मीठी के साथ ऑफ़िस के लिए निकल गया..।
परी और शौर्य अपने अपने कमरे में चले गए..
शौर्य अपने कमरे में पहुंचा और उसे एक बार फिर सुकून ने बाँहों में लपेट लिया..
उसका सामान पहले ही उसके कमरे में आ चुका था..
जिसमे से उसके सहायक ने धोने वाले कपड़े अलग कर लिए थे..
सारे कपड़े वो धोने के लिए लेकर जा चुका था, लेकिन लेकर जाते समय सफ़ेद शर्ट गलती से वहीँ गिर गयी थी..
शौर्य ने उस शर्ट को उठाया और अपने पास खींच कर आंखें बंद कर ली..
उसे उस शर्ट की खुशबू के साथ ही एक बार फिर लंदन का इवेंट, वहाँ की रंगीन शामे, वहाँ का खुशनुमा मौसम, राजसी परिचर्या सब कुछ एक एक कर याद आ गया….
और इन सब के साथ याद आ गयी वो झल्ली सी लड़की, जो उसे ड्राइवर समझ कर ऊलजलूल बातें बनाने में लगी रहती थी..
उस लड़की का ख्याल आते ही शौर्य के चेहरें पर हल्की सी मुस्कान चली आई..
वो अपने पलंग पर पसर गया..
वहाँ से उसकी नज़र ठीक सामने की बालकनी
पर चली गयी..
बालकनी में कई पौधे रखें थे, जिनमे ट्यूलिप का पौधा भी था,
और उस में एक कली खिली हुई थी..
उस कली को देख अचानक शौर्य के होंठो पर वो नाम आ ही गया…. कली !!
क्रमशः
aparna…

शौर्य जीत का हकदार है भव्य स्वागत हो रहा है, बहुत ही अच्छा लगा, भव्य लगा दी, साथ ही उसे कली भी याद आ गई और कली भी विदेश से देश आने को है, मीरा का भी भंडा फूटने को है, यह पढ़कर अच्छा लगा…💐🙏👌
लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️💐💐💐🤩🤩⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐