जीवनसाथी -3 भाग -14

जीवनसाथी -3, भाग -14

जीवनसाथी by aparna

    इवेंट का दूसरा दिन भी बीत गया…
कली को वहाँ विराट के साथ बहुत कुछ सीखने मिल रहा था, इसके अलावा पैलेस के अंदर भी हर जगह वो उसके साथ जा पा रही थी..
उसके ये दो दिन बेहद खूबसूरत बीते थे..
उसे अब आज़ादी का महत्व समझ में आ रहा था..

उसकी जैसी उम्र थी, उसमें अक्सर बच्चे माता पिता की हद से ज्यादा साज संभाल को कहाँ समझ पाते हैं.. ?
वासुकी क्यूँ उसके लिए इतना ज्यादा चिंतित रहता था, वो क्यूँ उसे सौ बंदिशों में रखता था इसका कोई कारण उसके किशोर मन को मालूम नहीं था..!
उसने अक्सर अपने पिता को अपने कमरे में अकेले एक उदास सी धुन सुनते देखा था..
वो अक्सर खिड़की से बाहर देखते खुद में खोये रहते थे.. लेकिन इस सब का कारण उसे मालूम नहीं था,
उसे लगता था उसके पिता का स्वभाव ही यही है.. धीर गंभीर और शांत !!

उसने कई बार सरु से भी पूछा कि उसके माता पिता का रिश्ता कैसा था, दोनों पहली बार कहाँ मिले, दोनों की शादी कैसे हुई ? और वो खुद कैसे इस धरती पर आई और हर बार उसके सारे सवालों के जवाब में सरु उसे एक ही घिसा पिटा सा जवाब टिका दिया करती थी..

“कली तुम्हारे डैडा की मम्मी ने तुम्हारी मॉम को कहीं देख कर पसंद कर लिया था और फिर तुम्हारे मॉम डैड की शादी हो गयी…
दोनों हंसी ख़ुशी से रहने लगे..
और फिर तुम आ गयी.. तुम्हारे आने के कुछ समय बाद तुम्हारी मॉम की तबियत ख़राब रहने लगी और शहर के बड़े बड़े डॉक्टर्स को दिखाने से भी कोई फ़ायदा नहीं हुआ और तुम्हारी मॉम भगवान के पास चली गयी.. !”

“फिर.. सरु, मुझे मौसी माँ क्यूँ याद आती है ? मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं मौसी माँ की गोद में हूँ और वो मुझे ख़ूब प्यार कर रहीं है ! वो कौन है ? डैडा मेरी मौसी माँ से कभी क्यूँ नहीं मिलते ? “

“क्यूंकि ऐसा कोई है ही नहीं कली ! तुम्हें जिनकी गोद याद आती है वो तुम्हारी मॉम ही हैं.. ! तुम्हारी मॉम की कोई बहन थी ही नहीं, तो तुम्हारी मौसी कहाँ से आई.. ? तुम्हारी मॉम के जाने के बाद मैंने ही तुम्हें संभाला है बेटा !”

पता नहीं क्यूँ लेकिन कली इस बात को दिल से स्वीकार नहीं पाती थी..
उसके अवचेतन मन में अब भी एक खुशबू, एक एहसास, कुछ गीत, एक मीठी सी आवाज़ और एक मुकम्मल शख्सियत काबिज़ थी.. और इसकी कोई कैफियत वो नहीं पा पाती थी..

उसे बचपन से ही अपने हिंदुस्तान से बेहद लगाव था… वो हमेशा से वहाँ जाना चाहती थी, लेकिन आज तक उसे मौका नहीं मिला था..
उसके दिल दिमाग पर एक नाम छाया हुआ था, वो था राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला का…
उसे लगता था जैसे वो उनके बारे में सब जानती है और उनसे अपने जीवनकाल में बस एक बार मिलने की उसकी तमन्ना थी, लेकिन वो ये नहीं समझ पाती थी कि आखिर क्यूँ उसे राजा साहब से इस कदर लगाव था…

आज तक उसने अपने घर और कॉलेज के बाहर की दुनिया देखी ही नहीं थी, और आज जब वो अपने पिता के बनायें सुरक्षा घेरे के बाहर थी उसे यूँ लग रहा था जैसे दुनिया चमत्कारों से भरी थी..।

इवेंट में नौजवान लड़के लड़कियां अपनी पूरी स्वतंत्रता के साथ इधर उधर घूम रहें थे, अपनी मर्ज़ी के कपडे पहन रहें थे, खा रहें थे पी रहें थे, एक दूजे से बातें कर रहें थे..
क्या ऐसी भी दुनिया होती है ?
कली के लिए ये सब कुछ बिल्कुल नया था..
उसके तो दोस्त भी उसके पिता के चुने हुए ही थे..।

उसे याद है दो साल पहले जब उसके स्कूल में कैथी आया था और उसके दोस्तों की मण्डली में शामिल हो गया था तब कैसे उसके पिता ने उस लड़के को उनके ग्रुप से निकाल बाहर फिंकवा दिया था..।

कैथी शेर्लेट का रहने वाला था, उसके माता पिता के तलाक के बाद वो अपने किसी अंकल के पास लंदन चला आया था.. ।
कितनी स्टाइल से वो सिगरेट के छल्ले बनाया करता था.. कली को उसकी सिगरेट की खुशबू हलकी सी भाने लगी थी.. अभी उसे आये हफ्ता ही तो बीता था.. और वो उन सब को अपने साथ पब ले जाने का न्योता दे बैठा था.. ।
कली के बाकी दोस्त तो कली के पिता का स्वभाव जान कर उस पर कभी साथ चलने का दबाव नहीं बनाया करते थे, पर कैथी इन सब से अनजान था..।
कैथी ने ही पब में कली को साथ ले जाने के लिए ये तरीका निकाला था कि रात में सबके सोने के बाद कली अपने कमरे की खिड़की से कूद कर बाहर आ जायेगी और वो उसे लेकर  पब चला आएगा..।

कली के सारे दोस्तों ने “अब तुम लोग खुद देख लो” वाले भाव में कंधे उचका दिये थे..
.कली उस वक्त कैथी के प्रभाव में आने लगी थी, वो भी उसके साथ जाने को तैयार थी..
आधी रात के वक्त कैथी के बताये अनुसार वो खिड़की कूद कर बिल्ली की तरह दबे पांव अपने मुख्य द्वार तक पहुँच भी गयी, लेकिन गेट के ठीक बाहर उसे कैथी के साथ खड़े अपने डैडा नज़र आ गए और उसने अपने माथे पर हाथ मार लिया….

वो साँस रोके अपने डैडा और कैथी की बातचीत सुनने लगी थी.. कैथी से जब वासुकी ने उसके वहाँ खड़े होने का कारण पूछा तो वो अपनी शेखी बघारने लगा.. अपनी बातें कहते कहते उसने जेब से मारिजुआना निकाला और वासुकी की तरफ भी बढ़ा दिया..
भीतर खड़ी कली ने अपना सर पीट लिया..।

मारिजुआना को कैथी के हाथ से लेने के बाद वासुकी ने खींच कर एक थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया, और वो सींकिया पहलवान भरभरा कर वहीँ गिर गया..
उसे उठा कर अपने कंधे पर डाले वासुकी वहाँ से बाहर की तरफ गया और रोड साइड लगी बेंच पर उसे डाल कर वापस लौट आया..।

वासुकी घर में घुसते साथ कली के कमरे की तरफ बढ़ गया.. कली के कमरे का दरवाज़ा खोल कर वो भीतर गया और पलंग पर गहरी नींद में सोई पड़ी कली को देख उसके चेहरें पर राहत के भाव चले आये..।
उसने धीरे से झुक कर अपनी लाड़ली का माथा चूम लिया और लम्बे लम्बे डग भरता कमरे से बाहर निकल गया..।

उसके जाते ही कली उचक कर खिड़की के पास पहुँच गयी.. उसे खिड़की से बाहर मेन रोड पर लगी बेंच पर स्ट्रीट लाइट के ठीक नीचे बेसुध पड़ा कैथी नज़र आ गया..।

नशे में धुत कैथी वासुकी के थप्पड़ के बाद अपना रहा सहा होश भी खो चुका था.. जाने क्यूँ उसे देख कर कली के मन में नफरत की लहर सी उठने लगी..
छी यही वो लड़का था जिसके साथ वो अपने डैडा से झूठ बोल कर पब जाने वाली थी..
अगर पब में कोई उसके साथ बदतमीजी पर उतर आता तो ये नाकारा उसकी क्या ही मदद कर पाता, उल्टा उसे ही इसकी साज संभाल करनी पड़ती..

उस दिन के बाद उसके सारे दोस्तों की पेशी उसके डैडा के सामने हुई थी… और उसके डैडा को उनमे से जो सही लगे उन्हीं के साथ वो दोस्ती निभा पायी थी..।

आज यहाँ लड़के लड़कियों का अलग ही रूप उसे देखने को मिल रहा था..।

वो इस आज़ादी की खुशबू को करीब से सूंघ पा रहीं थी.. महसूस कर पा रहीं थी और इसी खुशबू में खुद खो जाना चाहती थी…

वो मुस्कुराती हुई शाम की चाय पी रही थी और उसके सामने बैठा विराट उसे ही देख रहा था..।

“कली… मेरे साथ इंडिया चलोगी ?”

“इण्डिया ?” सुनते ही उसके चेहरे पर चमक आ गयी..

“लेकिन मुझे जाने की अनुमति नहीं मिलेगी !”

“और अगर मैं तुम्हारे पेरेंट्स से बात करुँ  तो ?”

“ना तब भी नहीं, उल्टा डैडा और ज्यादा नाराज़ हो जायेंगे ! उन्हें मेरे और उनके बीच कोई कुछ बोले ये पसंद नहीं !”

“हम्म… ओके फाइन !”

“लेकिन मैं इण्डिया जाना चाहती हूँ… बहुत समय से जाना चाहती हूँ, लेकिन डैडा को जाने क्यूँ इण्डिया पसंद नहीं !”..

“क्यूँ.. इण्डिया में ऐसा क्या है जो नहीं पसंद ?”

“मालूम नहीं, लेंकिन जब भी मैंने छुट्टियों में इण्डिया जाने का मन बनाया उन्होने हमेशा मना कर दिया.. ! वहाँ जाने के नाम पर ही उन्हें गुस्सा आ जाता है !”

“चलो कोई बात नहीं.. पर अगर कभी आना हुआ तो ये मेरा कार्ड तुम्हारे पास है ही, तुम मुझे कॉल कर लेना.. अगर मैं वहाँ हुआ तो तुम्हारा रहना घूमना फिरना सब मेरी तरफ से ही होगा.. !

कली ने मुस्कुरा कर हाँ में गर्दन हिला दी..

“सर एक बात पूछूं ?”

“हाँ पूछो !”

“आप जब पहली बार मुझसे मिले तभी से आप मुझ पर बहुत मेहरबान है, आप इतने बड़े कलाकार है, आखिर मुझमें ऐसा क्या दिखा आपको ? बुरा मत मानियेगा सर, बस मन में ये सवाल आया तो पूछ लिया, क्यूंकि ऐसी तो कोई खास खूबी मुझमें है नहीं.. !”

विराट हल्के से मुस्कुरा उठा..

“तुम्हारा चेहरा हमारी भाभी सा से बहुत मिलता जुलता है… तुम्हें जब देखूं तो लगता है वहीं सामने हैं.. शायद इसलिए तुमसे बात करना अच्छा लगता है !”

कली मुस्कुरा कर रह गयी..
उसका खुद का इण्डिया जाने का बहुत मन था लेकिन वो जानती थी कि उसे वासुकी कभी इण्डिया नहीं जाने देगा…

शाम गहराने से पहले ही वो वापस लौट गयी, आज गुरुवार था और आज के दिन वो घर के पास के बच्चों के गार्डन में बच्चों को कहानियां सुनाने जाया करती थी..
उसके साथ सरु भी जाती थी..
कली को अपनी हिंदुस्तानी संस्कृति और सभ्यता से बहुत लगाव था। उसे अपने गौरवशाली इतिहास पर भी बेहद गर्व था। और इसलिए उन बच्चों को हफ्ते में एक दिन वह अपने हिंदुस्तान के महान योद्धाओं, कवियों, राजा महाराजाओं, वैज्ञानिकों आदि के बारे में जानकारी दिया करती थी। उनमें से ज्यादातर बच्चे आसपास के हिंदुस्तानी परिवारों के ही थे, लेकिन कुछ ब्रिटिश बच्चे भी उन बच्चों के साथ कली की मनोहारी कहानियां सुन लिया करते थे। कली विराट से विदा लेकर अपने घर के लिए निकल गयी..

आज भी अपने निर्धारित समय पर कली के सारे दोस्त उसे ट्रेन में मिल गए और वह उन दोस्तों के साथ ही वासुकी के सामने स्टेशन पर उतरी, वासुकी के साथ अपने दोस्तों से विदा लेकर वह घर के लिए चल पड़ी। घर पहुंचने पर सरु को साथ लेकर वह पास के ही गार्डन में चली आई। कली हर बार अलग-अलग कहानियां सुनाना शुरू करती थी, लेकिन घूम फिर कर उसकी कहानी समाप्त राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला के किस्सों पर ही होती थी। आज भी वही हुआ..।

*****

इवेंट में रात के डिनर के लिए सारे नव युवाओं को विशेष रूप से ब्रिटिश महारानी ने आमंत्रित किया था, और आज की ड्रेस कोड में सफेद शर्ट और ग्रे पेंट्स को शामिल किया गया था। सफेद शर्ट के ऊपर गहरे स्लेटी रंग का वेस्ट कोट पहनना था।
शौर्य अपने कमरे में तैयार हो रहा था। ढेर सारी वाइट शर्ट होने के बावजूद उसे मनमाफिक शर्ट नहीं मिल रही थी… तभी उसे कमरे में कुर्सी पर पडे एक पैकेट पर ध्यान चला गया..।

शौर्य ने अलट पलट कर देखा और उस पैकेट को खोल कर उसके अंदर रखी शर्ट निकाल ली। वह उस शर्ट को देखकर आश्चर्य में डूब गया ।
यह तो वही शर्ट थी जो उसे उस पागल लड़की ने भिजवाई थी और जिसे उसने उसी वक्त उस वेटर को ही सौंप दिया था..।

महल के प्रोटोकॉल के हिसाब से महल में काम करने वाला कोई भी कर्मचारी किसी भी बाहरी मेहमान से किसी तरह का कोई तोहफा नहीं ले सकता था। महल में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरा लगे हुए थे, बस इसलिए उस वेटर ने भी उस वक्त शौर्य की बात को नहीं काटा लेकिन उस शर्ट को लाकर शौर्य के कमरे में ही रख दिया था। शौर्य अब तक इस बात से अनजान था….।

उसने उस शर्ट को उठाकर अलट पलट कर देखा और उसे उस वक्त पहनने के लिए वह शर्ट जम गई…
बाथरूम में जाकर उसने गर्म पानी का शावर लिया और बाहर निकल आया। उसने जैसे ही उस शर्ट को पहना धीमी धीमी सी एक खुशबू ने उसे जकड़ लिया..

मीठी सी उस खुशबू को महसूस कर शौर्य उस शर्ट को उतारने जा रहा था, फिर उसका ध्यान गया कि शर्ट तो ब्रांडेड थी, और लंदन के स्टोर पर ऐसी महंगी ब्रांडेड शर्ट  कोई भी खरीदार कभी पहनकर ट्रायल नहीं ले सकता तो इसका मतलब इस शर्ट को पैक करने से पहले ही इस पर स्टोर वालों ने ही खुशबू का छिड़काव किया होगा यही सोचकर शौर्य ने वापस उसको पहन लिया और इवेंट के लिए तैयार हो क्या..।

कुछ देर बाद ही वह परी के साथ डिनर के लिए निकल गया लेकिन आज की सारी शाम उसे उस मनमोहक सी खुशबू ने घेरे रखा…

*****

हर्ष के ऑफ़िस में हर्ष किसी काम में लगा हुआ था..
एक बहुत बड़ा सरकारी टेंडर निकलने वाला था, जिसके लिए हर्ष पिछले 6 महीने से प्रोजेक्ट तैयार करने में लगा हुआ था। उसे किसी भी कीमत पर यह टेंडर चाहिए था….उसकी तैयारी पक्की थी बावजूद वो कुछ परेशान लग रहा था..
बहुत देर से सामने बैठी मीठी हर्ष की उलझन और उसके चेहरे की परेशानी को देख रही थी। आखिर मीठी से नहीं रहा गया और उसने हर्ष देख पूछ लिया।

” क्या बात है हर्ष, कोई परेशानी है?”

हर्ष ने मीठी को देखा और ना में गर्दन हिला दी।

मीठी ने मुस्कुरा कर हर्ष की टेबल पर लगातार चलती
उसकी ऊँगली को रोक दिया..

” अगर कोई परेशानी नहीं है तो, टेबल पर अपनी पेन क्यों बजा रहे हो..?”

मीठी के कहने पर हर्ष का ध्यान अपनी उंगलियों पर गया और उसने पेन को एक तरफ रख दिया..

“तुम जानती हो मीठी की मुझे फ्लाईओवर वाला प्रोजेक्ट चाहिए, मैंने टेंडर भी डालने का सोच लिया है, तैयारी भी पूरी है.. मुझे पूरा विश्वास है कि ये टेंडर मुझे ही मिलेगा, लेकिन..

“लेकिन क्या ?”

“ये की अगर ये मुझे मिल गया तो लोग यहीं कहेंगे कि काका सा की पोज़िशन की वजह से मुझे ये टेंडर मिला है… इसमें काका सा का भी नाम ख़राब होता है और हमारी कंपनी की साख भी गिरती है.. ! तुम समझ रही हो ना, मुझे अगर मेरी मेहनत से ये प्रोजेक्ट मिल भी गया तब भी हमारा नाम बिगड़ना ही है !”

मीठी कुछ देर को सोच में डूब गयी..

“एक बात कहूं हर्ष !”

“हम्म !”..

“तुम्हारी कंपनी के शेयर्स को मार्केट में स्टैंड करने के लिए तुमने कुछ एक छोटी छोटी कम्पनी भी खड़ी की थी ना, जिससे तुम्हारी कंपनी के शेयर्स की मार्केट वैल्यू बढ़ सके..
वो तीन चार छोटी कम्पनीस भी रजिस्ट्रड है.. है ना ?”

“हम्म !”

“तो तुम उन्हीं में से किसी से टेंडर क्यूँ नहीं भर देते? देखो तैयारी तो तुम्हारी पूरी है, अगर तुम्हें काम मिला तो काम होगा भी ईमानदारी से..
तुम्हारी ही वो छोटी कंपनी काम करेगी और इस तरह काम निपट जायेगा, उसके बाद तुम सोशल मीडिया पर ये अनाउंस कर देना की उस छोटी कंपनी को तुम उसके मालिकों से खरीद रहें हो और अपनी कंपनी में मर्ज़ कर रहें हो..
इसके साथ ही कोई नई कंपनी बना कर अपने शेयर्स वापस शेयर कर लेना.. !”

हर्ष आंखें फाड़े सामने बैठी मीठी को देख रहा था..

“कहाँ से सोच लेती हो यार इतना.. इतना आसान सा उपाय था और मैं सुबह से इसी बात पर परेशान था कि क्या करूँ क्या नहीं ?
यू आर ऑसम.. !”

मीठी मुस्कुरा कर खड़ी हो गयी.. और वहीं एक तरफ रखें कॉफ़ी परक्युलेटर से उसने दो कप कॉफ़ी बनायीं और हर्ष के पास ले आई..

“तुम्हारे पेरिस प्रोजेक्ट का क्या चल रहा है ?”

“फ़िलहाल तो धनुष देख रहा है.. सारी तैयारी के बाद हम सब साथ चलेंगे पेरिस ! तुम चलोगी ना ?”

मीठी ने ना में गर्दन हिला दी..

“मॉम को जानते हो ना, वो मुझे बिना पापा के कहीं नहीं भेजती ! उन्हें लगता है मैं सिर्फ अपने मम्मी पापा के साथ घूमने बनी हूँ.. !”

हर्ष को हंसी आ गयी..

“चलो देखते हैं, वैसे भी आज तक तुम कभी भी हम सब के साथ कहीं बाहर नहीं गयी.. !”

“हम्म…. देखते हैं.. !”

मुस्कुरा कर वो उठ कर बाहर चली गयी और हर्ष एक बार फिर अपने काम में मसरूफ हो गया..

क्रमशः

aparna…

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Manu verma
Manu verma
2 years ago

कली और शौर्य का मिलना तय है और उनको मिलाने में पूरी कायनात लगी है, एक shirt को ही देखो कैसे भी घूम कर शौर्य के पास आ गयी 😊।
विराट ने कली से जब कहा कि तुम्हारा चेहरा हमारी भाभी यानि बांसुरी से मिलता है तो एक पल के लिए मैं भी बहुत पीछे बांसुरी और नेहा के time में चली गयी। सच में एक माँ और दूसरी मासी माँ दोनों का चेहरा एक सा तो कली भी तो उन पर ही जाएगी और वो तो अपनी मासी माँ कि खुश्बू तक ना भूली ❤️।
कली का ये भारत प्रेम कली को भारत ले ही आएगा यह तो पक्का तय है।उसके मन में भारत बसा है राजा अजातशत्रु, रानी बांसुरी उसकी बातों में है।
बेहद खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻🙏🏼।

Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
2 years ago

रोचक भाग दीदी, बड़े तथ्य पढ़ने को मिले, हरेक का जुड़ाव दूसरी कड़ी से और सारी कड़ियों का लिंक राजा अजातशत्रु है, शौर्य पर शर्ट जाम गया है और उसकी आंखों में खुशी खिल आई है…. मीठी का दिमाग़ और आइडिया लाजवाब था…. बेहतरीन दी…💐🙏