जीवनसाथी -3 भाग -12

और तभी कली को याद आ गया कि उसे उस ड्राइवर के लिए भी एक शर्ट खरीदनी है..
उसने वासुकी की तरफ देखा और धीरे से ना में गर्दन हिला दी.. ” नहीं डैडा की शर्ट उसे सही नहीं आएगी.. उसके लिए नयी ही लेनी पड़ेगी… !”
दिन भर में अभी घर लौटती कली की अपने डैडा से कहने की हिम्मत नहीं हो रहीं थी, लेकिन उसने हिम्मत जुटा कर कह ही दिया..
“डैडा एक बात बोलनी थी.. !”
“हम्म.. !”
“वो मेरा एक दोस्त है, उसकी शर्ट पर आज मुझसे कॉफ़ी गिर गयी.. गलती से !”
“हम्म.. तो ?”..
“वो थोड़ा गरीब सा बंदा है.. ! तो इसलिए…
“हम्म.. क्या ?”
“ये की…. मैं सोच रही उसे एक शर्ट गिफ्ट कर दूँ ! मतलब मेरे कारण उसकी शर्ट ख़राब जो हो गयी.. !”
वासुकी ने एक नज़र कली पर डाली..
“तुम जहाँ पढ़ती हो वहाँ इतना गरीब तो कोई नहीं हो सकता ?”
कली चुपचाप मुहँ फुला कर सीधे बैठ गयी, वासुकी ने एक नज़र उसे देखा और मार्केट की तरफ गाडी मोड़ ली…
एक बड़े से कपड़ों के स्टोर के सामने उसने गाड़ी रोक दी..
कली आज से पहले कभी शॉपिंग के लिए नहीं आयी थी.. उसके कपड़े खरीदने के लिए वो, सारिका वासुकी दर्श सभी एक साथ आया करते थे..
जिनमे से सारिका फटाफट उसके लिए शॉपिंग करती थी और फिर सब लौट जाया करते थे, बहुत बार तो सिर्फ सारिका ही दर्श के साथ आकर उसके लिए सामान ले आया करती थी..
कली को घड़ियों का बेहद शौक था, उसे ये शौक अपने पिता से ही विरासत में मिला था और इसीलिए उसके लिए एक से बढ़ कर एक घड़ियाँ लाने का काम वासुकी का था..।
उसकी पसंद भी अच्छी थी, इसलिए कली को उसकी लायी वस्तुएं उपयोग करने में दिक्कत भी नहीं होती थी..।
ये पहली बार था जब वो खुद होकर कुछ खरीदने जा रहीं थी..।
उसके कार से उतरते ही वासुकी भी उतरने लगा, लेकिन उसी वक्त वासुकी के किसी बिज़नेस क्लाइंट का फ़ोन आने लगा और कली ने उसे उतरने से मना कर दिया..
कली अंदर की तरफ बढ़ रहीं थी कि वासुकी ने उसे रोक कर अपना डेबिट क्रेडिट कार्ड थमा दिया..
कली मुस्कुरा उठी..
उसके लिए अकेले स्टोर में घूम घूम कर शॉपिंग करना भी नया अनुभव था..।
वासुकी साथ तो था लेकिन फ़ोन पर था…
कली मुस्कुराते हुए शॉपिंग के लिए कपडे देखने लगी.. उसे ब्रांड का नाम याद था… वो उसी ब्रांड की शर्ट पूछ कर उसे देखने लगी..
कॉफ़ी तो उसने उस लड़के पर जानबूझ कर गिरायी थी, अपना बदला लेने के लिए..।
लेकिन फिर जब देखा की गरीब ड्राइवर के पास कुल जमा दो ही शर्ट हैं तो, उसे तरस आ गया..
और इसलिए वो उसके लिए कमीज़ खरीदने चली आई थी….
उसने डिओर के कपडे जहाँ रखें थे वहाँ से चुन कर दो तीन सफ़ेद शर्ट उठा ली… उसने शर्ट पर प्राइज देखा और चकरा गयी.. एक एक शर्ट लगभग हज़ार हज़ार ब्रिटिश पाउंड की थी….।
किसी के दाम कम नहीं थे..।
कोई हज़ार कोई डेढ़ हज़ार तो कोई दो हज़ार..
उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या करें.. ?
उसने उन सब में से सबसे सस्ती शर्ट को ढूँढा और उसे लिए स्टोर कीपर के पास पहुँच गयी…
“आप एक बार ट्रायल भी ले लीजिये !”
स्टोर कीपर की बात सुन कली को भी लगा कि एक बार ट्रायल तो ले ही लेना चाहिए..
कली उस शर्ट को ट्राई करने चली गयी.. उसे पहन कर ये अनुमान हो गया की उस लड़के पर कैसी आएगी..
शर्ट एकदम सफ़ेद थी, और बेहद खूबसूरत भी लग रहीं थी…. कली ने अपनी दो तीन सेल्फी खींचने के बाद शर्ट उतार दी…।
और बाहर लेकर चली आई..।
उसने उस शर्ट को पैक करवाया और खरीद कर बाहर चली आई..।
लेकिन आज का ये अनुभव उसके लिए बेहद खुशनुमा था.. खुद से घूम घूम कर कपडे देखना, अपनी पसंद का सामान खरीदना और खुद होकर पैसे देकर कोई सामान लेना..।
उसे खुद में एक आत्मनिर्भरता महसूस हुई और वो मुस्कुराती हुई गाड़ी में आकर बैठ गयी…
उसने कार्ड अपने डैडा को वापस दे दिया..
उसके डैडा ने भी बिना कुछ बोले कार्ड वापस रख लिया….
“वैसे कली, तुम्हारी शर्ट भी ज़रा ख़राब हो गयी लगती है, कुछ गिरा लिया था क्या ? वैसे भी तुम तो खुद पर, अपने कपड़ों पर सामान गिराने में माहिर हो !”..
कली ने झेंप कर वासुकी को देखा और हाँ में गर्दन हिला दी..
वासुकी के पास शॉपिंग नोटिफिकेशन आ गया था, कीमत देख कर भी उसने कली से कुछ नहीं पूछा..
कली सारिका से मिलने के लिए बेहद उत्सुक थी.. वो उसे सुबह से अब तक का सारा किस्सा सुनाना चाहती थी…
वो घर पहुंची और सरु के पास पहुँच उसके गले से झूल गयी.. आज कली बेहद खुश थी..।
अपने अब तक के जीवन में आज उसने पहली बार अपने घर से बाहर अकेले कदम रखा था..।
आज तक वो सिर्फ कॉलेज के अलावा कहीं नहीं गयी थी… उसमें भी उसके डैडा उसके कॉलेज छूटने के समय के पहले ही गेट पर मौजूद हुआ करते थे..।
वो सरु के साथ रसोई में चली गयी और उसे बड़े उत्साह से सब कुछ बताने लगी.. बातों ही बातों में उसने उसे कमीज़ वाला किस्सा भी कह सुनाया….
सारिका कली की बातों में बहुत रूचि लेती थी..
उसने शर्ट भी निकाल कर देख ली..
शर्ट के ब्रांड पर नज़र पड़ते ही सारिका की आंखें चौड़ी हो गयी..
“ये पड़ी कितने की ?”
“डेढ़ हज़ार की !”
“डेढ़ हज़ार ? ” सारिका ने दोनों हाथ अपने गालों पर रख लिए..
“तुम्हारे गरीब दोस्त के लिए कुछ ज्यादा ही महंगी ड्रेस नहीं खरीद ली तुमने कली ?”
“हम्म महंगी तो हो गयी, पर उसे यही ब्रांड पहने देखा था तो यहीं ले लिया.. !”
“वाह.. तुम्हारे गरीब दोस्त भी डिओर, लुइ वितान और अरमानी पहनते हैं.. भाई वाह !”
“क्या सरु… हो सकता है उसके मालिक ने उसे अपनी पहनी हुई शर्ट दे दी हो या फिर अपनी रिजेक्टेड.. !”
“हाँ ये हो सकता है.. सुबह से कुछ खाया पिया, या बस ऐसे ही घूम रही हो, वैसे चेहरा उतरा हुआ सा नज़र तो आ रहा..
सारिका ने ग्रिल्ड सेंडविच और मिल्क शेक उसके सामने बढ़ा दिया…
कली खाते हुए वापस बातों में लग गयी…
*****
मीरा के अकाउंट में शौर्य ने लाख रूपये डाल दिये थे….
मीरा बेहद खुश थी.. पैसे ट्रांसफर होने का मेसेज आते ही वो ख़ुशी से उछलने लगी..।
उसने अपनी रूम मेट के सामने अपना मोबाइल घूमा दिया..
“ये देख गरीब लड़की, अब इतने सारे पैसे हैं हमारे पास.. !”..
“लेकिन इन्हें बचा कर रखना है.. उड़ाना नहीं है !”
.
शीना ने कहा और मीरा ने हामी भर दी..
“पर फ़िलहाल बहुत प्यास लग रही है, प्लीज़ चल ना.. ज्यादा दूर नही जायेंगे यहीं पास के किसी रेस्टोरेंट से खा पीकर वापस आ जायेंगे !”
“जैसे रेस्तरां तुझे चाहिए वैसा पास में कहीं नहीं है.. हमें भूगोल तक जाना ही पड़ेगा !”..
“भूगोल…. !” सुन कर ही मीरा के चेहरे पर चमक आ गयी..
“अब तो भूगोल ही जायेंगे.. चाहे जो हो जाये.. !”
वो शीना को साथ लेकर पब जाने निकल पड़ी..
पब में दोनों नाचते झूमते पी रहे थे…
दोनों थक कर एक किनारे बैठ गयी, और मीरा ने अपने लिए बिरयानी मंगवा ली….
मीरा ने वहीँ के एक परिचित वेटर से इशारे से अपने लिए ग्रास भी मंगवा कर उसका शार्ट भी ले लिया..
वो शीना के साथ मजे में झूमती हुई उसे दिन भर की बातें सुनाते हुए धनुष को कोस रही थी, कि वेटर उनका ऑर्डर लेकर चला आया..
मीरा ने उसे खाना टेबल पर रखने को बोलने के लिए सर उठाया और उसकी आंखें फटी रह गयी.. सामने बिरयानी का डोंगा लिए धनुष खड़ा था..
“ज़ाहिल लड़की, तुम्हें मना किया था ना ज्यादा खाने और पीने को लेकिन तुम्हारी मोटी बुद्धि में कुछ घुसे तब ना.. अब कल देखना जब सारी लड़कियां वर्कशॉप में बढ़िया काम करेंगी तुम एक तरफ अपना सर पकड़ कर बैठी रोती मिलोगी… जानता हूँ मैं !”
मीरा गुस्से में बिफर गयी और खड़े होकर उसने वेटर का कॉलर पकड़ लिया..
“तू साले यहाँ भी चला आया.. मुझे चैन से जीने देगा या नहीं.. तू मेरी ज़िन्दगी हराम करने के लिए ही पैदा हुआ है कमीने.. मैं तुझे ज़िंदा नहीं छोडूंगी.. किसी कीमत पर नहीं.. मैं तेरी जान ले लूंगी.. !”
मीरा उस वेटर का गला पकड़ कर दबाने लगी….
वो वेटर भी चौंक गया, उसे समझ नहीं आया कि अचानक ऐसा क्या हुआ जो ये लड़की ऐसे पागलो जैसा व्यवहार करने लगी..
शीना तुरंत उठ कर मीरा को रोकने लगी..
मीरा को ड्रग्स लेने के कारण वेटर में धनुष नज़र आ रहा था..
शीना के साथ बाकी लोगों ने भी मीरा को पकड़ कर उससे अलग किया और खींच कर अपने तरफ कर शीना ने उसे बैठा दिया..
मीरा फटी फटी आँखों से अपने आसपास देख रही थी, शीना ने सबको वापस जाने कहा और मीरा के पास बैठ गयी..
“चल अब हम घर चलते हैं, तुझे ज्यादा ही चढ़ गयी है !”
मीरा ने घूर कर शीना को देखा..
“मुझे चढ़ी नही है, वो कमीना जानबूझ कर मुझे डरा रहा है !”..
“ओके.. तो उससे बचने के लिए हम वापस चलते हैं !”
शीना समझ गयी थी कि मीरा अपने होश खो बैठी है,वो उसे समझा कर ले जाने को थी कि एक हट्टा कट्टा सा आदमी उन लोगों के पास चला आया..
उनकी टेबल पर आकर उसने ज़ोर से टेबल पर हाथ मारा…
“यहाँ बैठ कर ऐश करने के लिए तेरे पास पैसे हैं, और मेरा उधार लौटाने के लिए नहीं है.. वाह !”
उस आदमी को देख मीरा के होश पल भर में उड़ गए..
वो ज़रा डरी हुई सी नज़र आने लगी..
“मैं तुम्हारा सारा रुपया दे दूंगी.. !”
“दे दूंगी नहीं.. अभी दे… अभी के अभी !”
शीना ने उस आदमी को देखा और मीरा को देखने लगी..
“कितना रुपया उधार है तुम्हारा ?”
शीना ने डरते डरते पूछा..
“दो लाख.. !”
“क्या ?” शीना की आंखें चौड़ी हो गयी.. वो मीरा की तरफ देखने लगी..
“अब ये क्या है मीशा… उसके दो लाख कहाँ उड़ा दिये तूने !”..
शीना अपना सर पीट कर रह गयी.. मीरा को कोई होश ही नहीं था..
वो टेबल पर अपने हाथ फैलाये उसी पर अपना सर टिकाये बेसुध पड़ी थी..
शीना ने मीरा की पॉकेट से उसका मोबाइल निकाला और उस आदमी से उसका आईडी पूछ कर फ़िलहाल पचास हज़ार उसे ट्रांसफर कर दिया..
उस वक्त के लिए वो आदमी वहाँ से चला गया और शीना मीरा को सहारा देकर उठाये हुए घर के लिए निकल गयी..
अपने फ्लैट में पहुँच कर उसने मीरा को पलंग पर डाला और कपडे बदलने चली गयी..
अगली सुबह साढ़े पांच बजे मीरा का फ़ोन बजने लगा.. उबासी लेते हुए मीरा ने फ़ोन उठा लिया..
हर्ष के ऑफ़िस से ही मॉर्निंग अलार्म फ़ोन था..
मीरा ने अपना सर पीट लिया..
वो तुरंत बाथरूम में घुस गयी..
फटाफट तैयार होकर वो हर्ष के ऑफ़िस के लिए निकल गयी..
लेकिन जाते जाते हुए वो योग करने के लिए अलग से कपड़े पहनने और रखने भूल गयी…
वहाँ वो पहुंची तब तक बाकी लड़कियां पहुँच चुकी थी और उनका सेशन भी शुरू हो चुका था..
उन सब को योग करते देख उसे याद आया कि उसे भी कपडे रखने को कहा गया था.. हड़बड़ी में वो रात में पहन रखी शार्ट स्कर्ट ही पहन कर चली आयी थी..
वो अभी इधर उधर देख ही रहीं थी कि धनुष की आवाज़ ने उसे चौंका दिया..
“आप जैसो के लिए उस तरफ योगा ड्रेस रखी है, जाइये और फटाफट बदल कर आइये.. ! इन कपड़ों में योग कर के नमूना नहीं बनाना है आपका !”
धनुष की आवाज़ सुनते ही वो चौंक गयी.. धनुष की दिखाई दिशा में वो आगे बढ़ी और उधर रखे कपड़ों में से अपनी साइज़ के कपड़े उठा कर चेंजिंग रूम में चली गयी..
धनुष पर अपना गुस्सा निकालती मन ही मन उसे कोसती हुई वो बाहर चली आई..
आते आते वो फंस कर गिरने को हुई लेकिन सम्भल गयी..
“मन ही मन में मुझे गालियां दोगी तो खुद ही गिरोगी.. !”
उसे घूर कर धनुष आगे बढ़ गया और उसे कोसती हुई वो उसके पीछे चली गयी….
सारी लड़कियां सूर्य नमस्कार कर रहीं थी, मन मार कर मीरा भी एक तरफ मैट डाल कर खड़ी हो गयी.. उसका इस सब में मन नहीं लगता था..
ईश्वर की कृपा थी कि उसके पास एक खूबसूरत चेहरे के साथ ही सांचे में ढला जिस्म भी था! आज तक उसे कभी अपना कुछ ज्यादा रखरखाव नहीं करना पड़ा था! लेकिन जिस तरीके की उसकी बुरी आदतें थी,ज्यादा दिनों तक उसकी खूबसूरती टिकने वाली नहीं थी..
लेकिन अपनी खूबसूरती के गुरुर में वो इन बातों पर ध्यान नहीं दिया करती थी..
लेकिन उसे उस बात को सोचना चाहिए था कि सुंदरता के व्यापार में सिर्फ सुंदरता का ही तो मोल होता है। अगर वो खुद की खूबसूरती को बरक़रार नहीं रखेगी तो उसका आज के प्रतियोगिता के युग में अपने आप को रेस में बनाये रखना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता जाएगा..
लेकिन उसके लिए खुद को बनाये रखने से तात्पर्य सिर्फ बेवज़ह की लीपापोती से था..
कुछ योगासन होने के बाद जब उन लोगों को रेस्ट दिया गया तब वो बाजू वाली लड़की से बातों में लग गयी..
“यार ये रोज-रोज की कवायद में तो मैं थक जाऊंगी..!”
” लेकिन हर्ष सर के ऑफिस में काम करने का यही रुल है..! उन्हें हर चीज परफेक्ट चाहिए। वह खुद इतने ज्यादा परफेक्ट है कि उन्हें इंपरफेक्शन पसंद ही नहीं। उनके हर एक एंप्लॉय वह खुद चुनते हैं और उसी बंदे को अपने साथ काम पर रखते हैं जो उनके कदम से कदम मिलाकर चले। यहां तक कि उनके सिंपल से ऐड के लिए भी हम मॉडल्स को किस तरह से प्रिपेयर किया जा रहा देखा ना तुमने.. ?”
“हाँ मुझे तो ये सब बकवास लग रहा.. टीवी पर तीस सेकंड के एड के लिए कौन इतनी तैयारी करवाता है. !”
“ओह्ह जंक्स मतलब तुम्हें नहीं पता की ये तैयारियां क्यूँ की जा रहीं है ?”
आश्चर्य से आंखें फाड़े मीरा उस लड़की को देखने लगी..
“दस दिन बाद के पेरिस फैशन वीक में हर्ष सर की कम्पनी का परफ्यूम भी लांच होगा, और वहाँ मॉडल्स का रैम्प वॉक होगा उसके बाद उसी फैशन वीक में हर्ष सर अपना ब्रांड लॉन्च करेंगे.. !”
“तो क्या हम सब पेरिस जाने वाले हैं ?”
“जी हाँ मैडम.. और ये बहुत बड़ी ऑपर्चुनिटी है.. क्यूंकि वहाँ और भी बड़े ब्रांड्स आएंगे और अगर उनकी नज़र हम पर पड़ गयी तो हमें और भी बड़े बड़े असाइनमेंट्स मिल सकते हैं.. समझी आप !”
मीरा घोर अचरज में डूब गयी.. उसे नहीं मालूम था उसे इतना बड़ा मौका मिलने जा रहा था.. अब धनुष पर से भी उसका गुस्सा कम हो गया था..।
वो पेरिस जायेगी ये सुन कर उसका दिल बल्लियों उछल रहा था..
वो धनुष को देख रहीं थी कि उसके बगल वाली लड़की ने उसे टोक दिया..
“कोई फ़ायदा नहीं है.. ये किसी से पटने वाला बंदा नहीं है !”
“मुझे इस हिटलर को पटाना भी नहीं है.. वैसे ये है कौन ?”
“अरे….. इसकी हिस्ट्री नहीं पता तुम्हें ?”
.उस लड़की ने आंखें फाड़ कर पूछा..
और अपनी बेवकूफी पर हल्का सा झेंप कर ना में गर्दन हिला दी मीरा ने..
“राजा साहब को जानती हो ना, राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला !”
“हाँ महामहीम को कौन नहीं जानता ?”
“फिर तो उनके मंत्री जी को भी जानती होंगी ?”
मीरा के माथे पर बल पड़ गए..
“राजा साहब के मंत्री जी यानी समर सिंह सा की औलाद है ये धनुष समर सिंह !
इनके बारे में ये कहा जाता है कि जब ये अपनी माँ यानी डॉक्टर प्रिया मैम के पेट में आये तब उस वक्त वो अपने बड़े बेटे शोवन की परवरिश में इस कदर मसरूफ थी कि उन्होंने इस बच्चे को ना रखने का फैसला किया और खुद ही कोई दवा ले ली..
मैंने सुना है उन्हें बहुत तकलीफ हुई और सारे लक्षण वहीं हुए जो प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करने पर होते हैं.. उस समय उन्हें लगा की उनकी प्रेग्नेंसी टर्मिनेट हो गयी है..
लेकिन ऐसा हुआ नहीं था..
उनका छठवा महीना चल रहा था, तब उन्हें अपने शरीर के बदलाव देख कर अजीब लगा..वजन बढ़ने लगा था पेट का आकार भी बढ़ रहा था और तब उन्होंने सोनोग्राफी करवाई और देखा की बच्चा टर्मिनेट नहीं हुआ था..
वो बहुत डर गयी कि दवा के असर से कहीं बच्चे पर कोई बुरा असर ना पड़ा हो इसलिए उन्होने ढ़ेर सारी जाँच करवाई.. उस वक्त एक बार फिर उन्हें लगा कि उन्हें उस बच्चे को नहीं रखना चाहिए क्यूंकि दवा के प्रभाव से कहीं ये असामान्य ना पैदा हो जायें लेकिन इस बार समर सा ने उन्हें रोक लिया। उनका कहना था जब एक बार दवा के प्रभाव के बावजूद ये बच गया तब फिर इसे जन्म लेने देना चाहिए..।
और बस दसवें महीने में ये ‘टेलेंट ओवरलोडेड’ पैदा हो गया..
उसके बारे में ये सुना है मैंने कि ये पढ़ने में इतना गज़ब का होशियार बच्चा था कि सिर्फ एक महीने में अपना सारा सिलेबस खुद पढ़ जाता था..
ये क्लास फिफ्थ में था तब ये अपने से बड़ी क्लास वालों की पढाई भी कर जाता था..
इसकी क्लास टीचर ने जब ये बात प्रिंसिपल को बताई तो उन्हें यक़ीन नहीं हुआ और उन्होंने इसके टीचर को चेलेंज कर दिया और इसकी टीचर ने इसे सिर्फ तीन महीने में सिस्क्थ और सेवंथ दोनों क्लास का सिलेबस पढ़ा कर प्रिंसिपल के सामने इसे एग्जाम दिलवा दिया..
प्रिंसिपल इतना प्रभावित हुए की इसे उसके बाद सीधे आंठवी में प्रोमोट कर दिया.. ।
कूदते फांदते ही इस बंदे ने पढाई पूरी की है… सोलह की उम्र में स्कूल पूरा कर इंजीनियरिंग में दाखिला ले लिया था इसने और उसी पढाई के दौरान जब जब जो मिलता गया सब पढ़ कर चाट गया..
सुना है अपने बड़े भाई की मेडिकल बुक्स भी रटे बैठा है और अपने पापा की वकालत की भी…
ये अपने कमरे में कम लाइब्रेरी में ही ज्यादा वक्त बीताता है, मुझे तो इस पर किसी भूत प्रेत का साया लगता है.. दिखने में भी बिल्कुल किसी हीरो जैसा दिखता है, और कारनामे तो पूछो मत.. !”
‘”हम्म.. कारनामे तो ऐसे हैं की बस… मुझे तो लगता है मुझे जान से मारने के लिए ही ये पैदा हुआ है !”
“पता नहीं.. फ़िलहाल तो हम इतनी देर से गप्पे मार रहें हैं अगर उसकी नज़र पड़ गयी तो पक्का जान ले लेगा.. चलो अब अगले सेशन के लिए चलते हैं.. !”
मीरा भी पेरिस के नाम पर इतनी खुश थी कि तुरंत तैयार हो गयी और उस लड़की के साथ पिलाटे के लिए चली गयी..
क्रमशः
aparna…
और तभी कली को याद आ गया कि उसे उस ड्राइवर के लिए भी एक शर्ट खरीदनी है..
उसने वासुकी की तरफ देखा और धीरे से ना में गर्दन हिला दी.. ” नहीं डैडा की शर्ट उसे सही नहीं आएगी.. उसके लिए नयी ही लेनी पड़ेगी… !”
दिन भर में अभी घर लौटती कली की अपने डैडा से कहने की हिम्मत नहीं हो रहीं थी, लेकिन उसने हिम्मत जुटा कर कह ही दिया..
“डैडा एक बात बोलनी थी.. !”
“हम्म.. !”
“वो मेरा एक दोस्त है, उसकी शर्ट पर आज मुझसे कॉफ़ी गिर गयी.. गलती से !”
“हम्म.. तो ?”..
“वो थोड़ा गरीब सा बंदा है.. ! तो इसलिए…
“हम्म.. क्या ?”
“ये की…. मैं सोच रही उसे एक शर्ट गिफ्ट कर दूँ ! मतलब मेरे कारण उसकी शर्ट ख़राब जो हो गयी.. !”
वासुकी ने एक नज़र कली पर डाली..
“तुम जहाँ पढ़ती हो वहाँ इतना गरीब तो कोई नहीं हो सकता ?”
कली चुपचाप मुहँ फुला कर सीधे बैठ गयी, वासुकी ने एक नज़र उसे देखा और मार्केट की तरफ गाडी मोड़ ली…
एक बड़े से कपड़ों के स्टोर के सामने उसने गाड़ी रोक दी..
कली आज से पहले कभी शॉपिंग के लिए नहीं आयी थी.. उसके कपड़े खरीदने के लिए वो, सारिका वासुकी दर्श सभी एक साथ आया करते थे..
जिनमे से सारिका फटाफट उसके लिए शॉपिंग करती थी और फिर सब लौट जाया करते थे, बहुत बार तो सिर्फ सारिका ही दर्श के साथ आकर उसके लिए सामान ले आया करती थी..
कली को घड़ियों का बेहद शौक था, उसे ये शौक अपने पिता से ही विरासत में मिला था और इसीलिए उसके लिए एक से बढ़ कर एक घड़ियाँ लाने का काम वासुकी का था..।
उसकी पसंद भी अच्छी थी, इसलिए कली को उसकी लायी वस्तुएं उपयोग करने में दिक्कत भी नहीं होती थी..।
ये पहली बार था जब वो खुद होकर कुछ खरीदने जा रहीं थी..।
उसके कार से उतरते ही वासुकी भी उतरने लगा, लेकिन उसी वक्त वासुकी के किसी बिज़नेस क्लाइंट का फ़ोन आने लगा और कली ने उसे उतरने से मना कर दिया..
कली अंदर की तरफ बढ़ रहीं थी कि वासुकी ने उसे रोक कर अपना डेबिट क्रेडिट कार्ड थमा दिया..
कली मुस्कुरा उठी..
उसके लिए अकेले स्टोर में घूम घूम कर शॉपिंग करना भी नया अनुभव था..।
वासुकी साथ तो था लेकिन फ़ोन पर था…
कली मुस्कुराते हुए शॉपिंग के लिए कपडे देखने लगी.. उसे ब्रांड का नाम याद था… वो उसी ब्रांड की शर्ट पूछ कर उसे देखने लगी..
कॉफ़ी तो उसने उस लड़के पर जानबूझ कर गिरायी थी, अपना बदला लेने के लिए..।
लेकिन फिर जब देखा की गरीब ड्राइवर के पास कुल जमा दो ही शर्ट हैं तो, उसे तरस आ गया..
और इसलिए वो उसके लिए कमीज़ खरीदने चली आई थी….
उसने डिओर के कपडे जहाँ रखें थे वहाँ से चुन कर दो तीन सफ़ेद शर्ट उठा ली… उसने शर्ट पर प्राइज देखा और चकरा गयी.. एक एक शर्ट लगभग हज़ार हज़ार ब्रिटिश पाउंड की थी….।
किसी के दाम कम नहीं थे..।
कोई हज़ार कोई डेढ़ हज़ार तो कोई दो हज़ार..
उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या करें.. ?
उसने उन सब में से सबसे सस्ती शर्ट को ढूँढा और उसे लिए स्टोर कीपर के पास पहुँच गयी…
“आप एक बार ट्रायल भी ले लीजिये !”
स्टोर कीपर की बात सुन कली को भी लगा कि एक बार ट्रायल तो ले ही लेना चाहिए..
कली उस शर्ट को ट्राई करने चली गयी.. उसे पहन कर ये अनुमान हो गया की उस लड़के पर कैसी आएगी..
शर्ट एकदम सफ़ेद थी, और बेहद खूबसूरत भी लग रहीं थी…. कली ने अपनी दो तीन सेल्फी खींचने के बाद शर्ट उतार दी…।
और बाहर लेकर चली आई..।
उसने उस शर्ट को पैक करवाया और खरीद कर बाहर चली आई..।
लेकिन आज का ये अनुभव उसके लिए बेहद खुशनुमा था.. खुद से घूम घूम कर कपडे देखना, अपनी पसंद का सामान खरीदना और खुद होकर पैसे देकर कोई सामान लेना..।
उसे खुद में एक आत्मनिर्भरता महसूस हुई और वो मुस्कुराती हुई गाड़ी में आकर बैठ गयी…
उसने कार्ड अपने डैडा को वापस दे दिया..
उसके डैडा ने भी बिना कुछ बोले कार्ड वापस रख लिया….
“वैसे कली, तुम्हारी शर्ट भी ज़रा ख़राब हो गयी लगती है, कुछ गिरा लिया था क्या ? वैसे भी तुम तो खुद पर, अपने कपड़ों पर सामान गिराने में माहिर हो !”..
कली ने झेंप कर वासुकी को देखा और हाँ में गर्दन हिला दी..
वासुकी के पास शॉपिंग नोटिफिकेशन आ गया था, कीमत देख कर भी उसने कली से कुछ नहीं पूछा..
कली सारिका से मिलने के लिए बेहद उत्सुक थी.. वो उसे सुबह से अब तक का सारा किस्सा सुनाना चाहती थी…
वो घर पहुंची और सरु के पास पहुँच उसके गले से झूल गयी.. आज कली बेहद खुश थी..।
अपने अब तक के जीवन में आज उसने पहली बार अपने घर से बाहर अकेले कदम रखा था..।
आज तक वो सिर्फ कॉलेज के अलावा कहीं नहीं गयी थी… उसमें भी उसके डैडा उसके कॉलेज छूटने के समय के पहले ही गेट पर मौजूद हुआ करते थे..।
वो सरु के साथ रसोई में चली गयी और उसे बड़े उत्साह से सब कुछ बताने लगी.. बातों ही बातों में उसने उसे कमीज़ वाला किस्सा भी कह सुनाया….
सारिका कली की बातों में बहुत रूचि लेती थी..
उसने शर्ट भी निकाल कर देख ली..
शर्ट के ब्रांड पर नज़र पड़ते ही सारिका की आंखें चौड़ी हो गयी..
“ये पड़ी कितने की ?”
“डेढ़ हज़ार की !”
“डेढ़ हज़ार ? ” सारिका ने दोनों हाथ अपने गालों पर रख लिए..
“तुम्हारे गरीब दोस्त के लिए कुछ ज्यादा ही महंगी ड्रेस नहीं खरीद ली तुमने कली ?”
“हम्म महंगी तो हो गयी, पर उसे यही ब्रांड पहने देखा था तो यहीं ले लिया.. !”
“वाह.. तुम्हारे गरीब दोस्त भी डिओर, लुइ वितान और अरमानी पहनते हैं.. भाई वाह !”
“क्या सरु… हो सकता है उसके मालिक ने उसे अपनी पहनी हुई शर्ट दे दी हो या फिर अपनी रिजेक्टेड.. !”
“हाँ ये हो सकता है.. सुबह से कुछ खाया पिया, या बस ऐसे ही घूम रही हो, वैसे चेहरा उतरा हुआ सा नज़र तो आ रहा..
सारिका ने ग्रिल्ड सेंडविच और मिल्क शेक उसके सामने बढ़ा दिया…
कली खाते हुए वापस बातों में लग गयी…
*****
मीरा के अकाउंट में शौर्य ने लाख रूपये डाल दिये थे….
मीरा बेहद खुश थी.. पैसे ट्रांसफर होने का मेसेज आते ही वो ख़ुशी से उछलने लगी..।
उसने अपनी रूम मेट के सामने अपना मोबाइल घूमा दिया..
“ये देख गरीब लड़की, अब इतने सारे पैसे हैं हमारे पास.. !”..
“लेकिन इन्हें बचा कर रखना है.. उड़ाना नहीं है !”
.
शीना ने कहा और मीरा ने हामी भर दी..
“पर फ़िलहाल बहुत प्यास लग रही है, प्लीज़ चल ना.. ज्यादा दूर नही जायेंगे यहीं पास के किसी रेस्टोरेंट से खा पीकर वापस आ जायेंगे !”
“जैसे रेस्तरां तुझे चाहिए वैसा पास में कहीं नहीं है.. हमें भूगोल तक जाना ही पड़ेगा !”..
“भूगोल…. !” सुन कर ही मीरा के चेहरे पर चमक आ गयी..
“अब तो भूगोल ही जायेंगे.. चाहे जो हो जाये.. !”
वो शीना को साथ लेकर पब जाने निकल पड़ी..
पब में दोनों नाचते झूमते पी रहे थे…
दोनों थक कर एक किनारे बैठ गयी, और मीरा ने अपने लिए बिरयानी मंगवा ली….
मीरा ने वहीँ के एक परिचित वेटर से इशारे से अपने लिए ग्रास भी मंगवा कर उसका शार्ट भी ले लिया..
वो शीना के साथ मजे में झूमती हुई उसे दिन भर की बातें सुनाते हुए धनुष को कोस रही थी, कि वेटर उनका ऑर्डर लेकर चला आया..
मीरा ने उसे खाना टेबल पर रखने को बोलने के लिए सर उठाया और उसकी आंखें फटी रह गयी.. सामने बिरयानी का डोंगा लिए धनुष खड़ा था..
“ज़ाहिल लड़की, तुम्हें मना किया था ना ज्यादा खाने और पीने को लेकिन तुम्हारी मोटी बुद्धि में कुछ घुसे तब ना.. अब कल देखना जब सारी लड़कियां वर्कशॉप में बढ़िया काम करेंगी तुम एक तरफ अपना सर पकड़ कर बैठी रोती मिलोगी… जानता हूँ मैं !”
मीरा गुस्से में बिफर गयी और खड़े होकर उसने वेटर का कॉलर पकड़ लिया..
“तू साले यहाँ भी चला आया.. मुझे चैन से जीने देगा या नहीं.. तू मेरी ज़िन्दगी हराम करने के लिए ही पैदा हुआ है कमीने.. मैं तुझे ज़िंदा नहीं छोडूंगी.. किसी कीमत पर नहीं.. मैं तेरी जान ले लूंगी.. !”
मीरा उस वेटर का गला पकड़ कर दबाने लगी….
वो वेटर भी चौंक गया, उसे समझ नहीं आया कि अचानक ऐसा क्या हुआ जो ये लड़की ऐसे पागलो जैसा व्यवहार करने लगी..
शीना तुरंत उठ कर मीरा को रोकने लगी..
मीरा को ड्रग्स लेने के कारण वेटर में धनुष नज़र आ रहा था..
शीना के साथ बाकी लोगों ने भी मीरा को पकड़ कर उससे अलग किया और खींच कर अपने तरफ कर शीना ने उसे बैठा दिया..
मीरा फटी फटी आँखों से अपने आसपास देख रही थी, शीना ने सबको वापस जाने कहा और मीरा के पास बैठ गयी..
“चल अब हम घर चलते हैं, तुझे ज्यादा ही चढ़ गयी है !”
मीरा ने घूर कर शीना को देखा..
“मुझे चढ़ी नही है, वो कमीना जानबूझ कर मुझे डरा रहा है !”..
“ओके.. तो उससे बचने के लिए हम वापस चलते हैं !”
शीना समझ गयी थी कि मीरा अपने होश खो बैठी है,वो उसे समझा कर ले जाने को थी कि एक हट्टा कट्टा सा आदमी उन लोगों के पास चला आया..
उनकी टेबल पर आकर उसने ज़ोर से टेबल पर हाथ मारा…
“यहाँ बैठ कर ऐश करने के लिए तेरे पास पैसे हैं, और मेरा उधार लौटाने के लिए नहीं है.. वाह !”
उस आदमी को देख मीरा के होश पल भर में उड़ गए..
वो ज़रा डरी हुई सी नज़र आने लगी..
“मैं तुम्हारा सारा रुपया दे दूंगी.. !”
“दे दूंगी नहीं.. अभी दे… अभी के अभी !”
शीना ने उस आदमी को देखा और मीरा को देखने लगी..
“कितना रुपया उधार है तुम्हारा ?”
शीना ने डरते डरते पूछा..
“दो लाख.. !”
“क्या ?” शीना की आंखें चौड़ी हो गयी.. वो मीरा की तरफ देखने लगी..
“अब ये क्या है मीशा… उसके दो लाख कहाँ उड़ा दिये तूने !”..
शीना अपना सर पीट कर रह गयी.. मीरा को कोई होश ही नहीं था..
वो टेबल पर अपने हाथ फैलाये उसी पर अपना सर टिकाये बेसुध पड़ी थी..
शीना ने मीरा की पॉकेट से उसका मोबाइल निकाला और उस आदमी से उसका आईडी पूछ कर फ़िलहाल पचास हज़ार उसे ट्रांसफर कर दिया..
उस वक्त के लिए वो आदमी वहाँ से चला गया और शीना मीरा को सहारा देकर उठाये हुए घर के लिए निकल गयी..
अपने फ्लैट में पहुँच कर उसने मीरा को पलंग पर डाला और कपडे बदलने चली गयी..
अगली सुबह साढ़े पांच बजे मीरा का फ़ोन बजने लगा.. उबासी लेते हुए मीरा ने फ़ोन उठा लिया..
हर्ष के ऑफ़िस से ही मॉर्निंग अलार्म फ़ोन था..
मीरा ने अपना सर पीट लिया..
वो तुरंत बाथरूम में घुस गयी..
फटाफट तैयार होकर वो हर्ष के ऑफ़िस के लिए निकल गयी..
लेकिन जाते जाते हुए वो योग करने के लिए अलग से कपड़े पहनने और रखने भूल गयी…
वहाँ वो पहुंची तब तक बाकी लड़कियां पहुँच चुकी थी और उनका सेशन भी शुरू हो चुका था..
उन सब को योग करते देख उसे याद आया कि उसे भी कपडे रखने को कहा गया था.. हड़बड़ी में वो रात में पहन रखी शार्ट स्कर्ट ही पहन कर चली आयी थी..
वो अभी इधर उधर देख ही रहीं थी कि धनुष की आवाज़ ने उसे चौंका दिया..
“आप जैसो के लिए उस तरफ योगा ड्रेस रखी है, जाइये और फटाफट बदल कर आइये.. ! इन कपड़ों में योग कर के नमूना नहीं बनाना है आपका !”
धनुष की आवाज़ सुनते ही वो चौंक गयी.. धनुष की दिखाई दिशा में वो आगे बढ़ी और उधर रखे कपड़ों में से अपनी साइज़ के कपड़े उठा कर चेंजिंग रूम में चली गयी..
धनुष पर अपना गुस्सा निकालती मन ही मन उसे कोसती हुई वो बाहर चली आई..
आते आते वो फंस कर गिरने को हुई लेकिन सम्भल गयी..
“मन ही मन में मुझे गालियां दोगी तो खुद ही गिरोगी.. !”
उसे घूर कर धनुष आगे बढ़ गया और उसे कोसती हुई वो उसके पीछे चली गयी….
सारी लड़कियां सूर्य नमस्कार कर रहीं थी, मन मार कर मीरा भी एक तरफ मैट डाल कर खड़ी हो गयी.. उसका इस सब में मन नहीं लगता था..
ईश्वर की कृपा थी कि उसके पास एक खूबसूरत चेहरे के साथ ही सांचे में ढला जिस्म भी था! आज तक उसे कभी अपना कुछ ज्यादा रखरखाव नहीं करना पड़ा था! लेकिन जिस तरीके की उसकी बुरी आदतें थी,ज्यादा दिनों तक उसकी खूबसूरती टिकने वाली नहीं थी..
लेकिन अपनी खूबसूरती के गुरुर में वो इन बातों पर ध्यान नहीं दिया करती थी..
लेकिन उसे उस बात को सोचना चाहिए था कि सुंदरता के व्यापार में सिर्फ सुंदरता का ही तो मोल होता है। अगर वो खुद की खूबसूरती को बरक़रार नहीं रखेगी तो उसका आज के प्रतियोगिता के युग में अपने आप को रेस में बनाये रखना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता जाएगा..
लेकिन उसके लिए खुद को बनाये रखने से तात्पर्य सिर्फ बेवज़ह की लीपापोती से था..
कुछ योगासन होने के बाद जब उन लोगों को रेस्ट दिया गया तब वो बाजू वाली लड़की से बातों में लग गयी..
“यार ये रोज-रोज की कवायद में तो मैं थक जाऊंगी..!”
” लेकिन हर्ष सर के ऑफिस में काम करने का यही रुल है..! उन्हें हर चीज परफेक्ट चाहिए। वह खुद इतने ज्यादा परफेक्ट है कि उन्हें इंपरफेक्शन पसंद ही नहीं। उनके हर एक एंप्लॉय वह खुद चुनते हैं और उसी बंदे को अपने साथ काम पर रखते हैं जो उनके कदम से कदम मिलाकर चले। यहां तक कि उनके सिंपल से ऐड के लिए भी हम मॉडल्स को किस तरह से प्रिपेयर किया जा रहा देखा ना तुमने.. ?”
“हाँ मुझे तो ये सब बकवास लग रहा.. टीवी पर तीस सेकंड के एड के लिए कौन इतनी तैयारी करवाता है. !”
“ओह्ह जंक्स मतलब तुम्हें नहीं पता की ये तैयारियां क्यूँ की जा रहीं है ?”
आश्चर्य से आंखें फाड़े मीरा उस लड़की को देखने लगी..
“दस दिन बाद के पेरिस फैशन वीक में हर्ष सर की कम्पनी का परफ्यूम भी लांच होगा, और वहाँ मॉडल्स का रैम्प वॉक होगा उसके बाद उसी फैशन वीक में हर्ष सर अपना ब्रांड लॉन्च करेंगे.. !”
“तो क्या हम सब पेरिस जाने वाले हैं ?”
“जी हाँ मैडम.. और ये बहुत बड़ी ऑपर्चुनिटी है.. क्यूंकि वहाँ और भी बड़े ब्रांड्स आएंगे और अगर उनकी नज़र हम पर पड़ गयी तो हमें और भी बड़े बड़े असाइनमेंट्स मिल सकते हैं.. समझी आप !”
मीरा घोर अचरज में डूब गयी.. उसे नहीं मालूम था उसे इतना बड़ा मौका मिलने जा रहा था.. अब धनुष पर से भी उसका गुस्सा कम हो गया था..।
वो पेरिस जायेगी ये सुन कर उसका दिल बल्लियों उछल रहा था..
वो धनुष को देख रहीं थी कि उसके बगल वाली लड़की ने उसे टोक दिया..
“कोई फ़ायदा नहीं है.. ये किसी से पटने वाला बंदा नहीं है !”
“मुझे इस हिटलर को पटाना भी नहीं है.. वैसे ये है कौन ?”
“अरे….. इसकी हिस्ट्री नहीं पता तुम्हें ?”
.उस लड़की ने आंखें फाड़ कर पूछा..
और अपनी बेवकूफी पर हल्का सा झेंप कर ना में गर्दन हिला दी मीरा ने..
“राजा साहब को जानती हो ना, राजा अजातशत्रु सिंह बुंदेला !”
“हाँ महामहीम को कौन नहीं जानता ?”
“फिर तो उनके मंत्री जी को भी जानती होंगी ?”
मीरा के माथे पर बल पड़ गए..
“राजा साहब के मंत्री जी यानी समर सिंह सा की औलाद है ये धनुष समर सिंह !
इनके बारे में ये कहा जाता है कि जब ये अपनी माँ यानी डॉक्टर प्रिया मैम के पेट में आये तब उस वक्त वो अपने बड़े बेटे शोवन की परवरिश में इस कदर मसरूफ थी कि उन्होंने इस बच्चे को ना रखने का फैसला किया और खुद ही कोई दवा ले ली..
मैंने सुना है उन्हें बहुत तकलीफ हुई और सारे लक्षण वहीं हुए जो प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करने पर होते हैं.. उस समय उन्हें लगा की उनकी प्रेग्नेंसी टर्मिनेट हो गयी है..
लेकिन ऐसा हुआ नहीं था..
उनका छठवा महीना चल रहा था, तब उन्हें अपने शरीर के बदलाव देख कर अजीब लगा..वजन बढ़ने लगा था पेट का आकार भी बढ़ रहा था और तब उन्होंने सोनोग्राफी करवाई और देखा की बच्चा टर्मिनेट नहीं हुआ था..
वो बहुत डर गयी कि दवा के असर से कहीं बच्चे पर कोई बुरा असर ना पड़ा हो इसलिए उन्होने ढ़ेर सारी जाँच करवाई.. उस वक्त एक बार फिर उन्हें लगा कि उन्हें उस बच्चे को नहीं रखना चाहिए क्यूंकि दवा के प्रभाव से कहीं ये असामान्य ना पैदा हो जायें लेकिन इस बार समर सा ने उन्हें रोक लिया। उनका कहना था जब एक बार दवा के प्रभाव के बावजूद ये बच गया तब फिर इसे जन्म लेने देना चाहिए..।
और बस दसवें महीने में ये ‘टेलेंट ओवरलोडेड’ पैदा हो गया..
उसके बारे में ये सुना है मैंने कि ये पढ़ने में इतना गज़ब का होशियार बच्चा था कि सिर्फ एक महीने में अपना सारा सिलेबस खुद पढ़ जाता था..
ये क्लास फिफ्थ में था तब ये अपने से बड़ी क्लास वालों की पढाई भी कर जाता था..
इसकी क्लास टीचर ने जब ये बात प्रिंसिपल को बताई तो उन्हें यक़ीन नहीं हुआ और उन्होंने इसके टीचर को चेलेंज कर दिया और इसकी टीचर ने इसे सिर्फ तीन महीने में सिस्क्थ और सेवंथ दोनों क्लास का सिलेबस पढ़ा कर प्रिंसिपल के सामने इसे एग्जाम दिलवा दिया..
प्रिंसिपल इतना प्रभावित हुए की इसे उसके बाद सीधे आंठवी में प्रोमोट कर दिया.. ।
कूदते फांदते ही इस बंदे ने पढाई पूरी की है… सोलह की उम्र में स्कूल पूरा कर इंजीनियरिंग में दाखिला ले लिया था इसने और उसी पढाई के दौरान जब जब जो मिलता गया सब पढ़ कर चाट गया..
सुना है अपने बड़े भाई की मेडिकल बुक्स भी रटे बैठा है और अपने पापा की वकालत की भी…
ये अपने कमरे में कम लाइब्रेरी में ही ज्यादा वक्त बीताता है, मुझे तो इस पर किसी भूत प्रेत का साया लगता है.. दिखने में भी बिल्कुल किसी हीरो जैसा दिखता है, और कारनामे तो पूछो मत.. !”
‘”हम्म.. कारनामे तो ऐसे हैं की बस… मुझे तो लगता है मुझे जान से मारने के लिए ही ये पैदा हुआ है !”
“पता नहीं.. फ़िलहाल तो हम इतनी देर से गप्पे मार रहें हैं अगर उसकी नज़र पड़ गयी तो पक्का जान ले लेगा.. चलो अब अगले सेशन के लिए चलते हैं.. !”
मीरा भी पेरिस के नाम पर इतनी खुश थी कि तुरंत तैयार हो गयी और उस लड़की के साथ पिलाटे के लिए चली गयी..
क्रमशः
aparna…

बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️💐💐💐💐💐💐💐🤩🤩🤩
कली और मीरा का मन पढ़ने के बाद जब समर के बेटे का डिस्क्रिप्शन पढ़ा तब तसल्ली हुई यह कोई आम बंदा नहीं है, आगे इसको पढ़ने की रोचकता बनी रहेगी। कली का लाया शर्ट शौर्य पर सूट करेगा कि नहीं पढ़ने को बेताब हूं.. सुन्दर सजीला भाग दीदी….💐🙏